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‘नक्सली सरकार’ से नहीं डरते दिवंगत BJP MLA के परिजन: मनाया लोकतंत्र का उत्सव

हमारे देश में जब लोकसभा चुनाव का दौर आता है तो वो देश का हर नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की पूरी कोशिश करता है। हालात चाहे जो भी हों लेकिन लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने कर्तव्य का पालन करना प्राथमिकता बन जाती है। दंतेवाड़ा के कुआकोंडा क्षेत्र में बीते मंगलवार (9 अप्रैल) की शाम को नक्सलियों द्वारा किए गए विस्फोट में भाजपा के विधायक भीमा मंडावी की मृत्यु हो गई थी और चार जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इसके बाद बुधवार (10 अप्रैल) की शाम को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

विधायक की मृत्यु से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ था लेकिन उनकी अंत्येष्टि के अगले दिन ही यानि गुरुवार (11 अप्रैल) को दु:ख की इस घड़ी में भी परिजनों ने लोकतंत्र के प्रति अपने दायित्व से मुँह नहीं मोड़ा। मंडावी के परिवारवालों ने मतदान के लिए अपने क़दम आगे बढ़ाए। वोट डालकर परिजनों ने देश में यह संदेश पहुँचाने का काम किया कि हालात कुछ भी हों लेकिन देश सबसे पहले है। परिजनों ने अपने इस कर्तव्य को न सिर्फ़ निभाया बल्कि देश के सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।

भाजपा विधायक मांडवी के परिवार में की उनकी पत्नी ओजस्वी, उनकी माँ और परिवार के छह अन्य सदस्य 40 डिग्री की भीषण गर्मी में वोट डालने के लिए कतार में खड़े थे। मतदान के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करने वाला यह पूरा परिवार देश की मज़बूती में अपना योगदान देने को तत्पर दिखा।

माओवादियों ने वहाँ की जनता को डराने के लिए विस्फोट किया और पूरा प्रयास किया कि क्षेत्र के लोग मतदान के लिए आगे न बढ़ें, ऐसे में विधायक के परिवार की हिम्मत की दाद देनी होगी। विधायक के पिता लिंगा मंडावी की आँखें डबडबाई हुई थी, उनकी पत्नी ओजस्वी का गला रुँधा हुआ था, फिर भी लोकतंत्र के इस पर्व में परिवार का शामिल होना देश के प्रति उनकी सच्ची आस्था को प्रकट करता है।  

दंतेवाड़ा के दहशत भरे माहौल को बयाँ करते हुए एक महिला ने कहा कि लोकतंत्र का प्रचार करने वाले विधायक मांडवी को अपना जीवन खोना पड़ा, कम से कम हम मतदाताओं के रूप में अपने कर्तव्य को तो पूरा कर ही सकते हैं। जहाँ एक तरफ दंतेवाड़ा में मतदाताओं का यह हिम्मत भरा क़दम दिखा तो वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों का डर देखने के मिला। वहाँ लोगों ने मतदान तो किया, लेकिन मतदान के बाद ऊँगली पर लगे निशान को मिटाने का भी काम किया, जिससे यह पता न चल सके कि उन्होंने मतदान किया है।

बुलेट और बैलेट में से मतदान को चुनकर, बस्तर लोकसभा सीट के 57% से अधिक मतदाताओं ने माओवादियों की धमकियों से डरने की बजाए मतदान में अपना योगदान दिया। बस्तर के 11 लाख मतदाताओं में से छह लाख से अधिक महिलाएँ हैं। अपना वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही एक बुजुर्ग आदिवासी महिला ने कहा कि वह मांडवी की हत्या से आहत थी। पूरे क्षेत्र में माओवादी धमकियों के बावजूद, वह मतदान केंद्र पर गईं। उनका कहना था कि यदि हम वोट नहीं देंगे, तो हम अपनी सरकार को फिर से कैसे चुनेंगे? सरकार ने हमारे लिए और हमारे विकास के लिए बहुत कुछ किया है।

सेक्स की सहमति, शादी का झूठा वादा, और संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने यौन संबंधों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा करके किसी महिला से यौन संबंध बनाना और फिर उससे शादी न करना रेप माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में यौन संबंध के लिए महिला की सहमति के कोई मायने नहीं हैं, क्योंकि यह धोखा देकर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव और एम आर शाह ने यह बड़ा फैसला दिया है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने 21 जून 2013 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के मालखरौदा में सरकारी अस्पताल के जूनियर डाक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया था। जूनियर डॉक्टर के साथ पीड़िता का 2009 से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोपी डॉक्टर ने शादी का वादा कर लड़की से संबंध बनाया। इसके बाद उसने किसी और लड़की से शादी कर ली। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। अब सुप्रीम काेर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी है और 10 साल की सजा को घटाकर 7 साल कर दिया गया है।

अपने फैसले में दोनों जजों की बेंच ने कहा कि शादी का वादा करके जब युवक महिला के साथ यौन संबंध बनाता है और उससे शादी नहीं करता है, तो महिला की सहमति को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि महिला इस भ्रम में होती है कि युवक उससे शादी करेगा। शादी के वादे की वजह से ही युवती ने इसके लिए सहमति दी। लिहाजा इसे महिला की सहमति नहीं माना जा सकता है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और एम आर शाह की बेंच ने 9 अप्रैल को दिए फैसले में कहा कि युवती ने संबंध बनाने की सहमति इसलिए दी थी क्योंकि दाेषी ने उससे शादी का वादा किया था। मगर बाद में वह मुकर गया। उसने युवती के साथ धोखा किया।

जस्टिस शाह ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की घटनाएँ आजकल काफी बढ़ रही है। बलात्कार नैतिक और शारीरिक रूप से समाज में घृणित अपराध है। ये पीड़िता के शरीर, दिमाग और व्यक्तिगत गोपनीयता का शोषण है। कोर्ट ने फैसले में साफ किया कि जब कोई हत्यारा किसी की हत्या करता है, तो उसके शरीर को खत्म करता है, लेकिन बलात्कारी महिला की आत्मा को खत्म कर देता है।

पाकिस्तान की सब्जी मंडी में हजारा समुदाय को निशाना बना IED धमाका

पाकिस्तान में आज (अप्रैल 12, 2019) सुबह 7:35 पर एक बम धमाका हुआ है। मीडिया खबरों के मुताबिक इस हमले में 16 लोगों की मौत के अलावा 30 लोगों के घायल होने की खबरें है। घायल लोगों में पाक सेना के 4 जवान भी शामिल हैं।

ये हमला पाकिस्तान के भीड़भाड़ वाले इलाके क्वेटा की हजारगांजी सब्जी मंडी में हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है मंडी में भीड़ होने के कारण मरने वालों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है। बता दें कि इस हमले में IED का इस्तेमाल किया गया हैं।

मीडियो रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी अब्दुल रज्जाक चीमा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह बम धमाका आवासीय परिसर के करीब हुआ है। जहाँ हजारा समुदाय के लोग ज्यादा रहते थे। उनकी मानें तो इस हमले का मकसद हजारा समुदाय के अल्पसंख्यक शिया समुदाय को निशाना बनाना हो सकता है।

धमाके की सूचना मिलते ही पाक पुलिस, सेना, खुफिया एजेंसी के अधिकारी सभी जाँच में जुट गए हैं। अभी तक धमाके का कारण नहीं पता चल पाया है, लेकिन राहत और बचाव का कार्य शुरू हो चुका है। घायलों को करीबी अस्पताल में भर्ती किया गया है। साथ ही पूरे इलाके को सुरक्षा जाँच के मद्देनजर घेर लिया गया है।

जियो न्यूज के मुताबिक इस हमले में जान गँवाने वालों में से 7 मृतक हजारा समुदाय के अल्पसंख्यक शिया समुदाय है। बम धमाके के कारण वहाँ की बिल्डिंगों को भी नुकसान पहुँचा है।

हालाँकि, अभी तक किसी भी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन सुन्नी चरमपंथियों के शामिल होने की आशंका है। चूँकि, कुछ दिनों पहले इ्न्होंने इस प्रकार के हमले की चेतावनी जारी किया था।

मरने के बाद मेरी ‘इस’ तस्वीर पर चढ़ाना माला: ट्विंकल खन्ना की प्रबल इच्छा

बॉलीवुड अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने भले ही फिल्मों में काम करना छोड़ दिया है, लेकिन वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। ट्विंकल खन्ना अपने ह्यूमरस अंदाज के लिए बी-टाउन से लेकर फैंस के बीच काफी पॉपुलर हैं। वह अक्सर अपने परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। वे अपने ट्वीट्स को लेकर अक्‍सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। वे कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार प्रकट करती हैं। अब ट्विंकल खन्‍ना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्‍ट कर एक अजीबोगरीब ख्‍वाहिश जाहिर की है। उन्‍होंने अपनी एक ब्‍लैक एंड व्‍हाइट फोटो शेयर कर अपनी दिल की बात फैंस के साथ शेयर की है।

अभिनेत्री ने कैप्‍शन में लिखा, “उम्‍मीद करती हूँ कि मेरी यह नई तस्वीर आप सबको पसंद आएगी। यह बहुत दुर्लभ क्षण है,जब फोटोग्राफर ने उस पल को कैद किया है, जो मेरी आत्मा कहना चाहती है। मैं उम्‍मीद करती हूँ कि जब मैं मरूँगी तो इस तस्वीर को बड़े फैंसी फ्रेम में सजाया जाएगा और उसके चारो तरफ लोग फूलों की मालाएँ चढ़ाएँगे और मेरी प्रार्थना सभा में शामिल होंगे।” इस तस्वीर के पीछे लिखा हुआ नजर आ रहा है- डेंजर, कीप आउट।

इंस्टाग्राम पर ट्विंकल खन्ना द्वारा शेयर की गई फोटो

ट्विकंल खन्ना अक्सर ऐसी तस्वीरें साझा कर पति अक्षय कुमार का मजाक उड़ाया करती हैं। हाल ही में उन्होंने एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वे बोट चलाती नजर आ रही हैं और बगल में अक्षय कुमार बैठे हैं। फोटो के कैप्शन में उन्होंने लिखा था, ”एक ही पेज पर नहीं बल्कि अक्सर एक ही नाव में, भले ही मैं स्टीयरिंग व्हील पर हूं।”

गौरतलब है कि ट्विंकल खन्ना ने अक्षय कुमार से शादी के बाद एक्टिंग करियर को अलविदा कह दिया था। वे आखिरी बार फिल्म ‘लव के लिए साला कुछ भी करेगा’ में नजर आई थी। इन दिनों वे पूरी तरह से राइटर और प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। ट्विंकल खन्ना अब तक तीन किताबें लिख चुकी हैं और नियमित तौर पर कॉलम लिखी रहती हैं। इस कॉलम का नाम ‘मिसेज फनीबोन्स’ है।

बुर्क़े में रहने दो, बुर्क़ा जो उठ गया तो भेद खुल जाएगा: बलियान ने किया फर्जी वोटिंग का दावा

देश की 91 लोकसभा सीटों पर गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को मतदान का पहला चरण सम्पन्न हुआ। इस बीच एक तरफ जहाँ आंध्र प्रदेश के टीडीपी नेता की मौत के कारण सुर्खियाँ बनी, वहीं यूपी की 8 सीटों पर बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों को लेकर विवाद हुआ।

मुजफ्फरनगर में भाजपा सांसद संजीव बलियान जिनका मुकाबला इस बार आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह से है, उन्होंने बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों के चेहरे की जाँच नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। यहाँ संजीव ने फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान केंद्र में मतदाताओं के चेहरे की ठीक से जाँच नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर ऐसा ही रहा तो एक मतदाता को बार-बार मतदान करने से कैसे रोका जाएगा।

संजीव का आरोप है कि 25-26 मतदान केंद्रों पर एक भी महिला कांस्टेबल को तैनात नहीं किया गया जो बुर्के वाली औरतों के चेहरे की जाँच कर सकें। उनका कहना है कि गाँव में एक भी महिला कॉन्स्टेबल की ड्यूटी नहीं लगी थी।

संजीव ने अपना मत रखते हुए कहा कि अगर किसी प्रत्याशी को अपने मजहब के कारण चेहरा दिखाने में आपत्ति है तो बेहतर है वो मतदान करने न आए। इतना ही नहीं उनका कहना है कि मतदान केंद्र में कुछ महिलाओं को मतदाता सूची पर बिना हस्ताक्षर किए ही मतदान देने की अनुमति दी गई है। वहीं कैराना से सांसद और गठबंधन की उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने बलियान पर पलटवार करते हुए कहा है कि बलियान बुर्के पर सवाल नहीं उठा सकते क्योंकि जब भी जरूरत पड़ती है बुर्का हटाकर चेहरे की जाँच की जाती है।

आपको बता दें संजीव बलियान के इस आरोप पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है और साथ ही उन्हें अपने दिमाग का इलाज करवाने की सलाह तक दी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स संजीव के समर्थन में ऐसी तस्वीरों को साझा कर रहे हैं, जिनमें एक लड़का बुर्के में नज़र आ रहा है। जिसके मद्देनज़र सवाल बना हुआ है कि आखिर सच्चाई क्या है?

सियाचिन पर तैनात जवानों ने डाला वोट: देश के प्रहरियों के लिए EC ने किए खास इंतजाम

ख़राब मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना के जवानों ने लोकतंत्र की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सियाचिन ग्लेशियर और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों ने गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को सशस्त्र बल मतदाता के तौर पर मतदान किया।

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि भारतीय सेना के जवानों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेकर एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि नई पहल के तहत चुनाव आयोग ने दूरदराज़ इलाक़ो और दुर्गम स्थानों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए ऑनलाइन मतपत्र डाउनलोड करके, मतदान करने और उन्हें अपने संबंधित निर्वाचन अधिकारी को पोस्ट करने की सुविधा दी गई है। भारतीय सैनिकों ने वोट डालकर देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मज़बूती को दर्शाया है।

11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई जिसके तहत देश के 18 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 91 सीटों पर वोटिंग हुई। पहले चरण में सबसे ज़्यादा उत्साह पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के मतदाताओं में दिखा। वहीं ख़बर यह भी है कि बिहार में सबसे कम वोटिंग हुई और जम्मू-कश्मीर की दो सीटों पर 54.49% तक मतदान हुआ।

JMI को मिली पहली महिला कुलपति: दिल्ली में किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी पहली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई महिला कुलपति बनी है। प्रोफेसर नजमा अख्तर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति बनने वाली हैं। गौरतलब है कि साल 2018 में मणिपुर की राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. नजमा हेपतुल्ला को कुलाधिपति (चांसलर) नियुक्त किया गया था। फिलहाल देश के किसी भी विश्वविद्यालय के दोनों सर्वोच्च पदों पर महिलाएँ नहीं हैं। शिक्षण संस्थानों के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो जामिया के लिए भी गौरव की बात है।

एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम 1988 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने जामिया के विजिटर की हैसियत से नई दिल्ली स्थित NIEPA में कार्यरत प्रोफेसर नजमा अख्तर को 5 साल के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं प्रो नजमा को चार दशक के लंबे शैक्षणिक नेतृत्व का अनुभव है। वह NIEPA में 130 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक प्रशासक पाठ्यक्रम के 15 वर्षों तक सफल नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं। देश में शैक्षिक प्रशासक तैयार करने के लिए प्रयागराज में पहले प्रदेश स्तर के प्रबंधन संस्थान को स्थापित व सफलतापूर्वक विकसित करने का श्रेय भी नजमा अख्तर को जाता है। इन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं।

इसके साथ ही प्रो नजमा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक व अकादमिक कार्यक्रमों की निदेशक सहित कई शीर्ष संस्थानों की अहम जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाई हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिस्टेंस एजुकेटर कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रमों की अगुवाई की है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्वर्ण पदक विजेता प्रो नजमा अख्तर मेधावी विद्यार्थी भी रही हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रशस्तियाँ अपने नाम की हैं। प्रो नजमा ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे वारविक विश्वविद्यालय व नाटिंघम विश्वविद्यालय के अलावा शैक्षिक योजना के अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आईआईईपी) यूनेस्को, पेरिस से भी शिक्षा प्राप्त की है। वह विकसित व विकासशील देशों के कई साझा अनुसंधान कार्यों में भी शामिल रही हैं। सफल नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने युवा शिक्षकों को स्वतंत्र नेतृत्वकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित व सहयोग किया है।

इसके साथ ही चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा को मोतीहारी विश्वविद्यालय, बिहार का कुलपति बनाया गया है तो वहीं बीएचयू के प्रोफेसर रजनीश शुक्ला को महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति का भार सौंपा गया है।

गौरतलब है कि जामिया के पूर्व वीसी प्रफेसर तलत अहमद के पिछले साल जुलाई 2018 में जामिया से इस्तीफा देकर कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रमुख के तौर पर ज्वॉइन करने के बाद से यह पद खाली पड़ा था।

‘गठबंधन है PM की मौत का पैगाम’: सपा प्रत्याशी शफीकुर्रहमान के बिगड़े बोल

कैला देवी में गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा के दौरान सपा से संभल के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में विवादित बयान दिया। सभा में अखिलेश की मौजूदगी में बर्क ने सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन को नरेंद्र मोदी के लिए मौत का पैगाम बताया है जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और प्रशासन ने प्रत्याशी के ख़िलाफ़ नोटिस जारी कर दिया।

अखिलेश यादव शफीकुर्रहमान बर्क के समर्थन में चुनाव प्रचार करने आए थे जहाँ अखिलेश की अनुमति से ही बर्क को बोलने का मौका मिला। अपनी पाँच मिनट की बातचीत में ही बर्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जहर उगला और यूपी में गठबंधन को लेकर अटूट विश्वास दिखाया।

संभल के एसडीएम दीपेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीर बताया। साथ ही बर्क के बयान वाली वीडियो का भी परीक्षण हुआ। प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया और साथ ही तीन दिन में जवाब माँगा गया। इस मामले में प्रत्याशी के पोते जियाउर्रहमान बर्क का कहना है कि मामले को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है।

प्रधानमंत्री पर इस तरह की विवादित टिप्पणी करके बर्क एक बार फिर सुर्खियों में आ गए। बता दें कि मुस्लिम बहुल इलाके के सपा प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क वंदे मातरम के विरोध में संसद से वॉक ऑउट भी कर चुके हैं। इस दौरान बर्क ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम का खुलकर विरोध करते हुए इसे गैर-इस्लामिक करार दिया था जिसके कारण विभिन्न संगठनों ने उनका विरोध भी किया था।

बर्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ़ कई आवाजें उठ रही हैं। लोग यहाँ तक सवाल कर रहे हैं कि क्या मायावती ने इसलिए मुसलमानों को एकजुट होकर गठबंधन को वोट देने की बात कही थी।

TMC नेता कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्र पर कब्जा करने का आदेश दे रहे थे, ऑडियो क्लिप लीक

लोकसभा चुनावों का पहला चरण आज शुरू हो चुका है। इसी बीच खोकन मियाँ (कूचबिहार, ब्लॉक नंबर 1) नाम के एक TMC नेता का एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑडियो में वो अपने कार्यकर्ताओं को बूथ पर पार्टी के पक्ष में 100% वोट सुनिश्चित करने का निर्देश दे रहे हैं। इसमें मियाँ वोटर्स को किसी अन्य पार्टी को वोट न देने की चेतावनी देते हुए सुना जा सकता है। भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को क्लिप सौंपकर उचित कार्रवाई की माँग की गई है।

इस मामले पर भाजपा नेता उत्पल कुमार देब ने कहा, “यह स्पष्ट है कि खोखोन मियाँ का अपनी पार्टी की बैठक में दिए गए निर्देशों में क्या लक्ष्य है। लेकिन ऐसे लोग सफल नहीं होंगे क्योंकि लोग उन्हें रोकेंगे।”

मियाँ इस लीक हुए ऑडियो में यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि पार्टी ने निर्देश दिया है कि किसी भी अन्य पार्टी को कोई वोट नहीं मिलना चाहिए और किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करने वालों की पहचान की जाएगी। मियाँ का कहना है, “TMC  को 100% वोट मिलना चाहिए, अन्य पार्टियों को वोट नहीं मिलना चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करता है, तो उनकी पहचान की जाएगी। यह पार्टी का निर्देश है।”

मियाँ ने आगे कहा कि केंद्रीय बल कुल 100 में से केवल 40 बूथों पर मौजूद होंगे और सभी सरकारी कर्मचारी उनके नियंत्रण में हैं। “पुलिस से लेकर बीडीओ तक, सभी हमारे नियंत्रण में हैं। वे सरकारी कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन वे मेरे अधीन हैं।”

कूचबिहार निर्वाचन क्षेत्र में चुनावों को एक कठिन लड़ाई बताते हुए उसने बूथ कार्यकर्ताओं से पीठासीन अधिकारियों के साथ, अगर आवश्यक हो तो, कुछ ‘सेटिंग’ करने का आग्रह किया, लेकिन पहले यह सुनिश्चित करें कि सभी बूथ कवर किए गए हैं। मियाँ ने कार्यकर्ताओं को वोटों में हेराफेरी करने की सलाह भी दी।

चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में पहले ही दिन भारी हिंसा और हिंसा की खबरें आईं हैं। पिछले साल के विधानसभा चुनावों के दौरान TMC के गुंडों द्वारा की गई हिंसा को याद करके लोग मतदान करने से भी डरने लगे थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि TMC एजेंट नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान केंद्रों पर मौजूद थे और भाजपा एजेंटों को धमकी दी गई थी।  यही नहीं, पिछली रात उनके घरों पर हमला किया गया था।

हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ दिनों पहले TMC नेता अनुब्रत मोनल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से खुलेआम अपील की थी कि वे प्रति बूथ 500-600 वोटों का प्रबंधन करके लोगों को चुनावों में धांधली करने दें।

‘बहन जी’ कहने पर अंजना ने कहा कॉन्ग्रेस नेता को ‘आंटी जी’, TV पर ही हो गया राड़ा, देखें वीडियो

टीवी डिबेट पर आजकल नेताओं और प्रवक्ताओं का एक-दूसरे से बहस में उलझना आम बात होती जा रही है। कभी कोई किसी के सर पर पानी गिरा देता है, तो कभी कोई आपस में थप्पड़ रसीद देता है। लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के बीच बहस होना काफी आम बात है। टीवी पर होने वाली डिबेट में भी नेता एक दूसरे के खिलाफ कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। इस बार मामला बहुत करीबी हो गया जब बात एक न्यूज़ एंकर पर ही आ गई।

एक टीवी बहस के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को ‘बहनजी’ कह दिया। इस ‘बहन जी’ शब्द से अंजना इतनी आहत हुई कि उन्होंने तुरंत कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को बदले में ‘आंटी जी’ कह दिया। हालाँकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें क्या कहकर संबोधित किया जाता है। इस ‘बहनजी’ और ‘आंटीजी’ वाले प्रकरण को आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं।

यह निंदनीय प्रकरण तब हुआ जब टीवी पर ‘राफेल डील की लीक दस्तावेज में क्या है?’ इस मुद्दे को लेकर बहस चल रही थी। बहस में शामिल होने के लिए कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रियंका चतुर्वेदी मौजूद थीं। वहीं भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए गौरव भाटिया स्टूडियो में मौजूद थे।

भाजपा प्रवक्ता ने कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर एयरफोर्स की जरूरत के अनुसार लड़ाकू विमानों के आने को लेकर देरी पर सवाल उठाते हुए कॉन्ग्रेस की पहले की सरकारों को निकम्मी, निठल्ली और भ्रष्टाचारी सरकार कह डाला। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार पर सौदे में अपना कमीशन तय करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सत्ता में आए और सिर्फ 16 महीने में ही डील हो गई और इस साल सितंबर में राफेल विमान भी आ जाएँगे।

गौरव भाटिया ने राहुल गाँधी के लिए कहा कि पाँचवी क्लास का बालक पीएचडी की थीसिस नहीं पढ़ सकता, इसी तरह राहुल गाँधी भी राफेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट नहीं पढ़ सकते। इसके बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा के प्रवक्ता का जवाब देते हुए जज्बातों में बहकर बातचीत के दौरान एंकर को ‘बहनजी’ कहकर संबोधित कर दिया। इस पर ही आजतक की महिला एंकर भड़क गईं। इस ‘आंटी जी-बहन जी’ संवाद के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने बेहद नाराज स्वर में कहा कि हम यहाँ अपना अपमान करवाने नहीं आते हैं।