AAP ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। फ्री वाई-फाई सर्विस से लेकर सीसीटीवी योजना सब की हालत पंक्चर है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के सामने महिला ने अपना बयान दिया था। अब तक हुई तीन सुनवाई में, महिला ने कहा कि उसे डर लग रहा है क्योंकि उसे अकेले इसमें शामिल होना है और यहाँ तक कि उसके वकील को भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनने दिया गया।
'वीरे दी वेडिंग' फिल्म में खुलकर अपने 'मन की बात' करने वाली स्वरा भास्कर को बहुत आसानी से नारीवाद का चेहरा बना कर पेश किया जाने लगा है। यह वर्तमान समय का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि महिलाओं के अधिकारों को उसके शारीरिक सुख और जबरन फूहड़पन मात्र से जोड़कर पेश कर देने से वो समाज में महिलाओं की नई पहचान दिलाने वाले ठहराए जाने लगते हैं।
ऐसे आदमी के शर्ट में एक छेद हो, तो उँगली डाल कर पूरा फाड़ कर देख ही लेना चाहिए कि भाई तुम्हारे 2009, 2014 और 2019 के चुनावी हलफ़नामे में इतने बदलाव क्यों हैं? आखिर बैकऑप्स नामक कम्पनी का डायरेक्टर प्रियंका को चुनावों के तुरंत पहले क्यों बना दिया गया था?
एक वक्त ऐसा भी था, जब भाजपा को अपनी 'माँ' बताने वाले सिद्धू का कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के साथ 'बेटे' जैसा जुड़ाव रहा था। लेकिन, पार्टी बदलते ही उन्होंने 'माँ' को 'गाली' देनी शुरू कर दी है।
राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए ख़ुलासा किया था कि राहुल गाँधी ने एक प्राइवेट कम्पनी के रजिस्ट्रेशन काग़ज़ात में ख़ुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। ये कम्पनी लंदन में स्थित है। इसी आरोप पर गृह मंत्रालय ने...
राहुल गाँधी व्यक्तित्व नहीं, एक मानसिक अवस्था है। कभी-कभी व्यक्ति व्यक्तिवाचक संज्ञा से ऊपर उठ कर जातिवाचक संज्ञा हो जाता है, और उनमें से राहुल गाँधी जैसे महज़ चंद लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति होते हुए भी विशेषण बन जाते हैं।
कंगना ने साफ़-साफ़ कॉन्ग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक वो लोग सत्ता में थे तब तक देश में ग़रीबी, भूखमरी और प्रदूषण का माहौल तो था ही, साथ-साथ बलात्कार की घटनाएँ भी बढ़ गई थीं। कंगना ने लोगों से बड़ी संख्या में देश के लिए वोट करने की अपील की।
प्रमोद कृष्णन ने सांप्रदायिक बयान (कविता के रूप में) देते हुए साफ़-साफ़ कहा था कि जो मुहम्मद का नहीं हो सकता वो हमारा भी कभी नहीं होगा। वीडियो में आप उन्हें स्पष्ट सुन सकते हैं। अपने आप को पैगम्बर मुहम्मद के दामाद हज़रत अली का अनुयायी बताने वाले प्रमोद कृष्णन चुनाव के दौरान...
समुदाय विशेष वाले तब तक ‘बेचैन’ रहेंगे जब तक धर्म और संस्कृति, हिन्दू पंथ और सम्प्रदाय की हर अभिव्यक्ति बंद नहीं हो जाती। केवल सरकारी ही नहीं, निजी भी। यही हिन्दूफोबिया है। The Print वालों ने इस लेख से प्रोपेगेंडा को नई ऊंचाई दी है।