कल गुरूद्वारे पर हमले के बाद पूरा अफगानिस्तान अपने सिख-हिन्दू भाइयों के लिए उमड़ पड़ा और अपनी सहानुभूति व्यक्त कर उसके साथ खड़े होने की दृढ़ता दिखाई। इस हमले पर अभी तक तालिबान की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दुनिया के सामने रख दिया। इधर भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है। जैसे उसने सुकमा में नक्सली हमले के वक्त साधा था।
अगर भारतवासी इन मुश्किल दिनों और कठिन परीक्षाओं के लिए एक परिवार के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होते हैं, तो कोरोना को निश्चित रूप से पराजित होना पड़ेगा। भारतीय संस्कृति के आधारभूत विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्' के निर्णायक आत्मसातीकरण का क्षण निकट है।
आज एक वामपंथी सनक का सबब पूरी दुनिया देख रही हैl एक राजनीति तो इसके नाम पर भी चल रही है लोग यह कह रहे हैं कि जब जापानी इन्सेफेलाईटिस, जो कि जापान के नाम पर है तो कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस क्यों नहीं कह सकते हैंl डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे चाइनिज वायरस कहकर एक नई बहस को जन्म भी दे दिया हैl
"मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव है। इसलिए वे सभी भारतीयता के महत्व को नहीं समझते हैं और अरबी एवं फारसी लिपि को पसंद करते हैं। पूरे भारत की एक भाषा होनी चाहिए और वह भी हिंदी। जिसे वे कभी नहीं समझते हैं, इसलिए वे अपनी उर्दू की प्रशंसा करते रहते हैं और एक तरफ बैठते हैं।"
NPR बनने और उसके प्रभावी हो जाने पर बाहर जाने वाले 'घुसपैठियों' की संख्या के अनुपात में CAA के उपरोक्त 'लाभार्थी' बहुत ही कम हैं। साथ ही, धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अपने पूर्व-नागरिकों को शरण और नागरिकता देना भारत का संवैधानिक और मानवीय दायित्व भी है।
ये वह समाज है जिससे मोदी कह दें कि विष्ठा मलद्वार से करनी चाहिए तो वह अपने मुख से करने लगेगा। इनका ऑक्सीजन भी मोदी-विरोध है। इनका गड़बड़ाया पाचन तंत्र भी मोदी को गाली देकर दुरुस्त होता है। इस समाज के गाँजा और सेक्स लाइफ का एक्स फैक्टर है मोदी विरोध।
विश्व खुशहाली रिपोर्ट में पाकिस्तान को 66वाँ खुशहाल देश बताना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर किस आधार पर उसे यह रैंकिंग दी गई, क्योंकि गैलप के सर्वे ने तो पाकिस्तान की जनता की नाखुशी और नापसंदगी को जाहिर कर ही दिया और वहाँ की अर्थव्यवस्था तो माशाल्लाह!!! ताज्जुब की बात है कि फिर भी रैंकिंग में 66वाँ खुशहाल देश?
राजदीप ने जनता कर्फ्यू के आह्वाहन का मजाक बनाते हुए फ़ौरन बयान दिया कि क्या जनता कर्फ्यू के दिन पुलिस उसके घर के आगे मौजूद रहेगी? दरअसल, स्पष्ट सी बात यह है कि राजदीप जैसे लोग सदियों से चली आ रही सत्ता की गुलामी के कारण स्वयं को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगे हैं कि कोरोना जैसी किसी महामारी का भी ये लोग उपहास बनाते नजर आते हैं।
हम हर ऐसी वारदात के बाद कैंडल मार्च करते हैं। दरिंदों को फाँसी देने की गुहार लगाते हैं। हैशटग चलाते हैं। निंदा करते हैं। न्याय प्रशासन को कोसते हैं। लेकिन एक काम जो हम करना भूल जाते हैं वो होता है ऐसी महिलाओं की सोच को सुधारना.....
मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है।