सोचिए इस पर, वरना प्रेम कहानी के चुम्मे में वन्धामा की 23 लाशों की विद्रूपता छुपा दी जाएगी। शिकारे पर बैठी नायिका की काली जुल्फों में सिगरेट से पूरे शरीर को जलाने के बाद, सर्वानंद कौल और उनके पुत्र की आँखें निकाल लेने की इस्लामी कलाकृति गायब कर दी जाएगी।
यही शाहीन बाग़ की भीड़ हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक चिन्हों को गाली देती देखी गई। क्या हिन्दुओं की आस्था को ठेस लगाने के लिए गाय पर चुटकुले बनाने से लेकर हिन्दुओं की कब्र खोदने की धमकी देने वाला यह शाहीन बाग़, एक शव यात्रा के लिए बैरिकेड खोलकर इंसानियत का उदाहरण बन सकता है?
कुणाल कामरा किसी का कहीं भी उत्पीड़न कर सकता है। क्योंकि दो लोगों ने जामिया नगर और शाहीन बाग़ में हवाई फायरिंग कर दी। इसीलिए, हजारों-लाखों मौतों का जिम्मेदार इस्लामी और नक्सल आतंकवाद भी जायज हो जाता है।
यहाँ पर सवाल उठता है कि केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा कि वोट देने से पहले पुरुषों से अवश्य चर्चा करें? क्या उनको आज की नारी पर भरोसा नहीं है? क्या वो पढ़ी-लिखी-समझदार नहीं है? क्या वो भला-बुरा देखकर समझ नहीं सकती? क्या महिलाओं में इतनी समझदारी नहीं है कि वो अपनी समझ से वोट दे सकें?
2015 में करीब 67% मतदान हुआ था। इस बार भी ऐसा हुआ तो एक करोड़ के करीब वोट पड़ेंगे। दिल्ली में इस वक्त भाजपा के सदस्यों की संख्या 62 लाख के करीब है। इन सभी ने बीजेपी के लिए वोट डाले तो 11 फरवरी को करिश्मा तय है।
विवादों में रहने के शौक़ीन कन्हैया कुमार ने धर्म को संघियों के लिए धंधा बताते हुए आज एक विवादित ट्ववीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि जहाँ धर्म हिन्दुओं के लिए आस्था का सवाल है वहीं संघियों के लिए मात्र धंधा।
कॉलेज-ट्यूशन से लेकर शादी-ब्याह तक के बीच एक लड़की के मन में ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर चुनाव चलता ही रहता है कि आखिर वो किस तरह समाज के बनाए पैमानों पर निखर पाएगी और कैसे अन्य लड़कियों की तरह खुद को सुंदर बना पाएगी... और कंपनियाँ इसी का फायदा उठाती हैं।
'टाइम्स नाउ' द्वारा करवाए गए हालिया सर्वेक्षण ने भाजपा समर्थकों का मनोबल गिराने का काम किया है। टाइम्स नाउ ने दावा किया है कि यह सर्वे जनवरी 27, 2020 और फरवरी 01, 2019 के बीच किया गया था, यानी कि ऐसी अवधि के दौरान जबकि भाजपा को बढ़त बनाते हुए देखा गया।
दरभंगा मॉड्यूल! शुरुआत इंडियन मुजाहिदीन के फाउंडर यासीन भटकल ने की। NIA ने दरभंगा मॉड्यूल में जाकिर नाइक का भी कनेक्शन बताया था। चुपके-चुपके इसका विस्तार पूरे मिथिलांचल में हो रहा है।
कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी है ब्रू लोगों की। 23 वर्षों तक उनके पास न घर, न जमीन, न चिकित्सा और न ही उनके बच्चों को अभी तक कोई शैक्षिक सुविधा ही प्राप्त हुई। क्यों? क्योंकि ये वैष्णव हिन्दू हैं, अत्यन्त राष्ट्रवादी हैं और इन्हें ईसाई बनना मंजूर नहीं था। लेकिन इन्होंने इसकी भारी कीमत चुकाई।