विचार

97000 सिखों और हिंदुओं का सफाया… वो भी सिर्फ 29 साल में! आतंकी हमले आम, मानवाधिकार बेमानी है अफगानिस्तान में

अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।

ग्लोबल लीडर बनने का चायनीज षड्यंत्र: हजारों मौत के बाद का प्रोपेगेंडा, कई देश आए वामपंथी लपेटे में!

सर्बिया के राष्ट्रपति ने तो यूरोपीय सहयोग और बंधुत्व को महज एक 'दिवास्वप्न' करार देते हुए कहा कि सिर्फ चीन ही था, जिसने उनकी मदद की। - चीन के इसी प्रोपेगेंडा का शिकार होने की लाइन में ईरान, इराक और इटली जैसे देश भी हैं। जहाँ रोजाना हजारों मौतें हो रहीं, वहीं चीन इस दुर्भाग्यपूर्ण समय को एक अवसर के तौर पर देख रहा।

क्या अफगान-तालिबान शांतिवार्ता की घुटन का परिणाम है ISIS द्वारा गुरूद्वारे पर हमला, भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह की चुप्पी के मायने?

कल गुरूद्वारे पर हमले के बाद पूरा अफगानिस्तान अपने सिख-हिन्दू भाइयों के लिए उमड़ पड़ा और अपनी सहानुभूति व्यक्त कर उसके साथ खड़े होने की दृढ़ता दिखाई। इस हमले पर अभी तक तालिबान की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दुनिया के सामने रख दिया। इधर भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है। जैसे उसने सुकमा में नक्सली हमले के वक्त साधा था।

Covid-19: भारत के राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की प्रयोगशाला सिद्ध होगी यह परीक्षा

अगर भारतवासी इन मुश्किल दिनों और कठिन परीक्षाओं के लिए एक परिवार के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होते हैं, तो कोरोना को निश्चित रूप से पराजित होना पड़ेगा। भारतीय संस्कृति के आधारभूत विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्' के निर्णायक आत्मसातीकरण का क्षण निकट है।

जिस डॉक्टर ने कोरोना के बारे में सबसे पहले बताया, उसे ही चीन ने प्रताड़ित किया: करनी वामपंथियों की, भुगत रही पूरी दुनिया

आज एक वामपंथी सनक का सबब पूरी दुनिया देख रही हैl एक राजनीति तो इसके नाम पर भी चल रही है लोग यह कह रहे हैं कि जब जापानी इन्सेफेलाईटिस, जो कि जापान के नाम पर है तो कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस क्यों नहीं कह सकते हैंl डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे चाइनिज वायरस कहकर एक नई बहस को जन्म भी दे दिया हैl

‘मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव, वो इसका महत्व नहीं समझते’ – शहीद दिवस पर भगत सिंह का ‘कम चर्चा’ वाला वो लेख

"मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव है। इसलिए वे सभी भारतीयता के महत्व को नहीं समझते हैं और अरबी एवं फारसी लिपि को पसंद करते हैं। पूरे भारत की एक भाषा होनी चाहिए और वह भी हिंदी। जिसे वे कभी नहीं समझते हैं, इसलिए वे अपनी उर्दू की प्रशंसा करते रहते हैं और एक तरफ बैठते हैं।"

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की आवश्यकता

NPR बनने और उसके प्रभावी हो जाने पर बाहर जाने वाले 'घुसपैठियों' की संख्या के अनुपात में CAA के उपरोक्त 'लाभार्थी' बहुत ही कम हैं। साथ ही, धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अपने पूर्व-नागरिकों को शरण और नागरिकता देना भारत का संवैधानिक और मानवीय दायित्व भी है।

प्यारे मोदी-विरोधी चिलगोजों, PM ने ताली बजाने को कहा तो तुम्हारे अंतःपुर में खुजली क्यों हो रही है?

ये वह समाज है जिससे मोदी कह दें कि विष्ठा मलद्वार से करनी चाहिए तो वह अपने मुख से करने लगेगा। इनका ऑक्सीजन भी मोदी-विरोध है। इनका गड़बड़ाया पाचन तंत्र भी मोदी को गाली देकर दुरुस्त होता है। इस समाज के गाँजा और सेक्स लाइफ का एक्स फैक्टर है मोदी विरोध।

नान-टिमाटर वाला Pak 66वाँ खुशहाल देश, भारत 140वाँ: बकवास सर्वे और इसे शेयर करने वाले बेकार लोग!

विश्व खुशहाली रिपोर्ट में पाकिस्तान को 66वाँ खुशहाल देश बताना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर किस आधार पर उसे यह रैंकिंग दी गई, क्योंकि गैलप के सर्वे ने तो पाकिस्तान की जनता की नाखुशी और नापसंदगी को जाहिर कर ही दिया और वहाँ की अर्थव्यवस्था तो माशाल्लाह!!! ताज्जुब की बात है कि फिर भी रैंकिंग में 66वाँ खुशहाल देश?

जनता कर्फ्यू: राजदीप पूछ रहा पुलिस तो नहीं होगी घरों के बाहर? नमाज पर हुआ चुप, रामनवमी पर झूठ

राजदीप ने जनता कर्फ्यू के आह्वाहन का मजाक बनाते हुए फ़ौरन बयान दिया कि क्या जनता कर्फ्यू के दिन पुलिस उसके घर के आगे मौजूद रहेगी? दरअसल, स्पष्ट सी बात यह है कि राजदीप जैसे लोग सदियों से चली आ रही सत्ता की गुलामी के कारण स्वयं को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगे हैं कि कोरोना जैसी किसी महामारी का भी ये लोग उपहास बनाते नजर आते हैं।

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