क्या यह विचित्र नहीं है कि इस देश में हिंदू अराध्यों को गाली दी जा सकती है, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात हो सकती है... पर गाँधी पर सवाल नहीं किया जा सकता।
भारतीय राजाओं, भारतीय सनातन धर्म और भारतीय इतिहास को लेकर नसीरुद्दीन शाह हिन्दुओं में हीन भावना भरना चाहते हैं। मुगलों का गुणगान क्यों? औरंगजेब की आलोचना से दिक्कत क्यों?