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वाजपेयी सरकार से लेकर UPA तक सपा ने हमेशा किया महिलाओं का विरोध, सदन में फाड़े कपड़े-बिल; जमकर किया हंगामा: जानें SP-RJD ने लोकसभा में किए कैसे-कैसे तमाशे

समाजवादी पार्टी हमेशा से महिला विरोधी ही रही है। समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल का विरोध पहली बार नहीं किया। वाजपेयी सरकार के दौरान सपा सांसदों ने संसद में बिल की प्रतियाँ फाड़ डाली थीं।

लोकसभा में शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को मोदी सरकार ने महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया। लेकिन ये बिल पास नहीं हो सका। इसके समर्थन में 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इस बिल का जबरदस्त विरोध किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिलना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ जवाब दिया कि संविधान में मुस्लिमों के लिए कोई आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

ये पार्टी हमेशा से महिला विरोधी ही रही है। समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल का विरोध पहली बार नहीं किया। पहले भी यूपीए सरकार के समय और उससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सपा ने इसी तरह विरोध किया था। वाजपेयी सरकार के दौरान 1998 से 2004 तक सपा सांसदों ने संसद में बिल की प्रतियाँ फाड़ डाली थीं। उस समय भी उनकी चिंता मुसलमानों को लेकर थी। सपा का कहना था कि ये बिल मुसलमानों के खिलाफ जा सकता है और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

सपा और आरजेडी सांसदों ने सदन की गरिमा की थी तार-तार

13 जुलाई 1998 को दोपहर करीब 2 बजे तत्कालीन कानून मंत्री एम. थंबी दुरई 12वीं लोकसभा में 81वें संविधान संशोधन विधेयक यानी महिला आरक्षण बिल पेश करने के लिए खड़े हुए। उन्होंने बोलना शुरू किया ही था कि विपक्ष के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। आरजेडी और सपा के सांसद स्पीकर की तरफ बढ़ आए। सदन में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। माहौल गरम हो गया। बिल की प्रतियाँ हवा में उछाली जाने लगीं।

लोकसभा स्पीकर शांत करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन कोई नहीं मान रहा था। बीच सदन में हो रही इस धक्का-मुक्की में कानून मंत्री एम. थंबी दुरई की कमीज भी फट गई। संसद की मर्यादा तार-तार हो रही थी। आरजेडी के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव पर आरोप है कि उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी से बिल की कॉपी छीनकर फाड़ दी थी।

वाजपेयी सरकार महिला आरक्षण बिल को लेकर पूरी तैयारी के साथ आई थी। उन्हें विपक्ष के विरोध का अंदाजा था लेकिन इतना नहीं कि सदन की गरिमा भंग हो जाएगी। सपा और आरजेडी के सांसदों ने मिलकर बिल को फाड़ने का तीखा विरोध जताया। ये घटना सपा के महिला आरक्षण के प्रति रवैये को साफ दिखाती है।

यूपीए शासन में सस्पेंड हुए थे सपा के 4 सांसद, रवैया वही पुराना

यूपीए शासन में भी सपा ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था। मार्च 2010 में जब ये बिल पेश किया गया तो सपा और आरजेडी के सांसदों ने उग्र विरोध किया। सदन की कार्यवाही बाधित हुई। सभापति की टेबल से कागजात छीनने की कोशिश की गई। सपा के चार सांसद नंद किशोर यादव, कमाल अख्तर, वीरपाल सिंह यादव और आमिर आलम खान सहित कुल सात सांसदों को निलंबित करना पड़ा।

इन पर आरोप था कि उन्होंने तत्कालीन सभापति हामिद अंसारी की मेज से बिल की कॉपी छीनने की कोशिश की। निलंबन के बाद भी ये सांसद सदन से बाहर जाने को तैयार नहीं हुए। मार्शलों को इन्हें जबरन बाहर निकालना पड़ा। ध्यान देने वाली बात ये है कि उस समय सपा यूपीए को बाहर से समर्थन दे रही थी फिर भी महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं छोड़ा।

मुलायम वाला ही है अखिलेश यादव का भी रुख

आज भी सपा का रुख वैसा ही है जैसा मुलायम सिंह यादव के समय में था। अखिलेश यादव ने लोकसभा में बहस के दौरान मुस्लिम और पिछड़ी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की माँग दोहराई। लोग इसे सपा के वोट बैंक के समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। सपा हमेशा से कहती रही है कि बिल से सिर्फ बड़े घर की शहर की महिलाएँ फायदा उठाएँगी। गाँव की गरीब महिलाएँ इससे बाहर रह जाएँगी। लेकिन हकीकत ये है कि सपा ने महिला आरक्षण को लेकर बार-बार अड़ंगा लगाया है।

सपा के इस पुराने रवैये को देखते हुए लोकसभा में 17 अप्रैल को बिल गिरने की घटना कोई नई बात नहीं लगती। 1998 में वाजपेयी सरकार के समय सदन में जो हंगामा हुआ था वो आज भी याद किया जाता है। कानून मंत्री की कमीज फटने जैसी घटना संसद की तस्वीर को कलंकित करती है। 2010 में यूपीए के समय भी सपा ने बिल को पास नहीं होने दिया। हर बार सपा ने मुस्लिम महिलाओं का हवाला दिया लेकिन असल में महिला आरक्षण को रोकने की कोशिश की।

अखिलेश यादव आज भी वही पुरानी लाइन दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना मुस्लिम और पिछड़ी महिलाओं को आरक्षण दिए बिल अधूरा है। जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सपा का ये रुख दिखाता है कि पार्टी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के बजाय अपने वोट बैंक को बचाने में ज्यादा इंट्रेस्टेड है।

सपा का इतिहास महिला आरक्षण विरोध का रहा है। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक एक ही रवैया दिखता है। हर बार मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाकर बिल को रोकने की कोशिश की गई। गाँव की गरीब महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा ऐसा बहाना बनाया जाता रहा। लेकिन असल में पार्टी की मंशा महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सीमित रखने की रही है।

कभी मुलायम सिंह यादव ने कहा था- गरीब महिलाएँ आकर्षक नहीं होती

इससे पहले, लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 16 अप्रैल 2026 को दावा किया कि सपा महिलाओं का सबसे ज्यादा सम्मान करने वाली पार्टी है। एनसीआरबी रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2012-2017 में अखिलेश सरकार के समय यूपी में महिला अपराधों में भारी बढ़ोतरी हुई। 2013 में बलात्कार के 3050 मामले दर्ज हुए। 2017 में यूपी पूरे देश में महिला अपराधों में टॉप पर रहा।

आपको एक बार फिर से याद दिला दें कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने बदायूं गैंगरेप के बाद कहा कि लड़कियाँ दोस्ती करती हैं फिर रेप का नाम दे देती हैं। यही नहीं, उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि ग्रामीण और गरीब महिलाएँ आकर्षक नहीं होती।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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