मसालों की कंपनी महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया है। धर्मपाल गुलाटी 98 वर्ष के थे।
धर्मपाल गुलाटी कोरोना संक्रमित हो गए थे लेकिन वो उससे उबर चुके थे। इसके बाद हार्ट अटैक से उनका निधन 3 दिसंबर 2020 को सुबह 5:38 पर हुआ।
महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी को व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। सियालकोट में इनके पिताजी की मसालों की एक छोटी सी दुकान थी, जिसका नाम महाशय दी हट्टी था। इसी महाशय दी हट्टी से नाम आया M – महाशय D – डी H – हट्टी यानि MDH
मसालों के इतने बड़े व्यापार को स्थापित करने वाले धर्मपाल गुलाटी सिर्फ चौथी तक पढ़े थे। पाँचवीं में फेल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी।
देश के विभाजन के बाद 27 सितम्बर 1947 को इनका परिवार भारत आकर दिल्ली में रहने लगा। दिल्ली आकर इन्होंने न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से कुतुब रोड और करोल बाग से बड़ा हिन्दू राव तक तांगा चलाने का काम किया।
तांगा चलाने वाले धर्मपाल गुलाटी ने कुछ पैसे बचा कर मसालों का काम करोल बाग से शुरू किया। 1953 में इन्होंने एक दूसरी दुकान चांदनी चौक में ली। और 1959 में इन्होंने दिल्ली के कीर्ति नगर में मसालों की एक फैक्ट्री लगा दी। इसके बाद MDH ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
वैज्ञानिक कृषि के बारे में जानने के लिए हम बेगूसराय के केशाबी गाँव पहुँचे। यहाँ पर हमने कृषक एवं प्रशिक्षक राज नारायण से मुलाकात की और इसके बारे में जानने की कोशिश की। राज नारायण माइक्रो ट्रेनिंग सेंटर चलाते हैं। इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।
इनका एक ट्रेनिंग सेंटर चलता है। राज नारायण यहाँ पर आए लोगों को न सिर्फ कृषि से संबंधित किताबी ज्ञान देते हैं, बल्कि उन्हें खेतों में भी ले जाते हैं। राज नारायण ने बताया कि अभी उनके पास ज्यादातर क्रॉस ब्रीड की गायें हैं, लेकिन वो देशी नस्ल की गायों का अनुपात बढ़ा रहे हैं, क्योंकि इनका रख-रखाव वातावरण के हिसाब से आसान है। यह गाय दूध कम देती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी होती है।
महाराष्ट्र यात्रा को लेकर शिवसेना नेता संजय राउत की बातों का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम महाराष्ट्र से कुछ लेने नहीं बल्कि एक उत्तरप्रदेश में नई फिल्म सिटी का निर्माण करने जा रहे हैं।
शिवसेना नेता संजय राउत की यूपी फिल्म सिटी की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम यहाँ कुछ लेने नहीं बल्कि एक नई फिल्म सिटी बना रहे हैं। क्यों कोई इसके बारे में चिंतित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को बड़ा बनना पड़ेगा, बड़ी सोच पैदा करनी होगी और बेहतर सुविधाएँ देनी होंगी। जो सुविधाएँ दे पाएगा, लोग वहाँ जाएँगे और उत्तर प्रदेश इसके लिए तैयार है।
We’ve not come here to take anything away. We’re building a new Film City. Why one is getting worried about it? We’re giving something new to people in form of world-class infrastructure: UP CM Yogi Adityanath on being asked about Shiv Sena leader Sanjay Raut’s Film City comments https://t.co/2sP3FmIbhepic.twitter.com/REn2SqEDa4
सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।
गौरतलब है कि सीएम योगी के मुंबई दौरे को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत की बौखलाहट भी देखने को मिली थी। राउत ने चेतावनी दी थी कि मुंबई की फिल्म सिटी को दूसरी जगह शिफ्ट करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा दक्षिण भारत में फिल्म उद्योग भी बड़ा है, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी फिल्म सिटी है। जहाँ सीएम योगी को जाना चाहिए और वहाँ के निर्देशकों और कलाकारों से बात करनी चाहिए। या क्या वह केवल मुंबई में ही ऐसा करने जा रहे हैं?
Not easy to shift Mumbai’s film city to another place. The film industry in south India is also big, there’re film cities in WB & Punjab too. Will Yogi Ji also visit these places & talk to directors/artists there or is he going to do so only in Mumbai?: Sanjay Raut, Shiv Sena pic.twitter.com/JTh6UU3CcM
महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने भी सीएम योगी को राज्य में दौरे से पहले चेतावनी दी थी कि वह किसी को भी राज्य से कोई उद्योग नहीं ले जाने देंगे।
उल्लेखनीय है कि सीएम योगी कल मुंबई पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के नोएडा में आगामी फिल्म सिटी को लेकर कई उद्योगपतियों, बैंकरों और फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की थी। मुंबई पहुँचने के बाद उन्होंने सबसे पहले अभिनेता अक्षय कुमार से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने गायक कैलाश खेर से भी मुलाकात की थी।
बता दें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस साल सितंबर में राज्य में फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा की थी। सीएम योगी ने आगामी फिल्म सिटी के लिए उद्योग से जुड़े लोगों से सुझाव भी माँगे थे। साथ ही कई फिल्मी हस्तियों के साथ बैठक की थी।
देश मे कोरोना की स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने पटाखों पर लगे बैन को अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया है। एनजीटी ने साफ तौर पर कह दिया है कि दिल्ली-एनसीआर समेत देश के उन सभी हिस्सों में पटाखों पर बैन बरकरार रहेगा जहाँ पर एयर क्वालिटी ख़राब या खतरनाक स्तर पर है। साथ ही एनजीटी ने कहा है कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मद्देनजर देश के उन इलाकों में जहाँ एयर क्वालिटी मॉडरेट स्तर पर है, वहाँ पटाखे रात को 11:55 बजे से 12.30 तक यानी 35 मिनट के लिए चलाने की अनुमित होगी।
बता दें कि एनजीटी द्वारा पटाखों पर लगे बैन को आगे बढ़ाने के बाद अब सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी समारोह या शादी में पटाखों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इसकी खरीद-फरोख्त पर लगी रोक भी बरकरार रहेगी।
पिछले महीने दीवाली से पहले एनजीटी ने 9 नवंबर को पटाखों के खरीद-फरोख्त और स्टोरेज पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। एनजीटी की तरफ से यह प्रतिबंध 30 नवंबर तक के लिए लगाया गया था, लेकिन अब एनजीटी ने पाया कि दिल्ली एनसीआर में कोरोना की तीसरी लहर तेज है, इसलिए यह प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा।
दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया था। दिल्ली में पटाखों को 9 नवंबर से 30 नवंबर तक पूरी तरह से बैन कर दिया गया। ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई। कहा गया कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए इस तरह की पाबंदी लगाई गई।
केजरीवाल सरकार ने पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि पटाखे जलाने और पटाखे बेचने वालों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
गोपाल राय ने कहा कि पटाखे बेचने या फोड़ने वाले लोगों पर वायु प्रदूषण (नियंत्रण) अधिनियम (1981) के तहत 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गोपाल राय ने बताया कि आरोपित के खिलाफ एयर एक्ट के तहत केस बनाया जाएगा, जिसमें 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। अब एनजीटी ने क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर रात के 11:55 बजे से 12.30 तक पटाखे चलाने की अनुमति दे दी है।
शाबाश NGT NGT-“क्रिसमस/नई साल पर 11:50PM से 12:30 AM के बीच में पटाखे चला सकते हैं” क्योंकि उससे प्रदूषण नहीं होगा ! दीवाली पर इसी NGT के आदेश पर पटाखे चलाने के जुर्म में 850 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था मी लॉर्ड,आपको इस वैज्ञानिक आविष्कार के लिये नोबेल पुरस्कार क्यों ना मिले ? https://t.co/x1ngaPtRlp
बीजेपी नेता मेजर सुरेंद्र पुनिया ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, “शाबाश NGT NGT क्रिसमस/नई साल पर 11:50PM से 12:30 AM के बीच में पटाखे चला सकते हैं” क्योंकि उससे प्रदूषण नहीं होगा! दीवाली पर इसी NGT के आदेश पर पटाखे चलाने के जुर्म में 850 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। मी लॉर्ड,आपको इस वैज्ञानिक आविष्कार के लिए नोबेल पुरस्कार क्यों ना मिले?
अब पटाखे जलाने से प्रदूषण नही फैलता? केवल दिपावली पर ही प्रदूषण फैलता है? अब कोविड19 वायरस का संक्रमण खत्म हो गया है? या कानून का दुरुपयोग हो रहा है सिर्फ हिन्दू के त्योहार को प्रतिबंधित करने के लिए?
वहीं एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, अब पटाखे जलाने से प्रदूषण नही फैलता? केवल दीपावली पर ही प्रदूषण फैलता है? अब कोविड-19 वायरस का संक्रमण खत्म हो गया है? या कानून का दुरुपयोग हो रहा है सिर्फ हिन्दू के त्यौहार को प्रतिबंधित करने के लिए?
उत्तर प्रदेश सरकार के तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार भी गुंडों माफियाओं पर लगातार नकेल कस रही है। इसी कड़ी में नगर निगम की रिमूवल गैंग ने बुधवार (2 दिसंबर, 2020) सुबह भूमाफिया बब्बू उर्फ सुल्तान शेख और छब्बू उर्फ शाबिर के आलीशान मकान को ध्वस्त कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि बब्बू और छब्बू मियाँ भूमाफिया बनने से पहले टेलर और पेंटर का काम करते थे।
खजराना थाना क्षेत्र में बब्बू और छब्बू ने अवैध रूप से तीन आलीशान मकान बना लिया था। जिसको नगर निगम और पुलिस ने पहले नोटिस जारी करके खाली करवाया। फिर जेसीबी और पोकलेन की मदद से करीब तीन घंटे में अवैध मकानों को जमीदोंज कर दिया।
बता दें दोनों ही माफियाओं पर मारपीट, चोरी, हत्या, हत्या की कोशिश के एक दर्जन से ज्यादा अपराध दर्ज है। 2015 में इनका नाम गुंडे शहजाद लाला हत्याकांड में सामने आया था। उससे पहले इन्हें मामूली चोरी चाकरी जैसे मामलों में गिना जाता था। धीरे-धीरे दोनों ने अपनी पहुँच नामी गुंडों और हिस्ट्रीशीटर से बनानी शुरू की। जिसके बाद उन्होंने इलाके में क्राइम को अंजाम देने के लिए गैंग बना कर गुंडों से काम करवाना शुरू कर दिया, ताकि पकड़े जाने पर इनका नाम सामने न आए।
कहा जाता है बब्बू-छब्बू सिंडीकेट में रसूखदार लोगों के साथ मिलकर विभिन्न पार्टियों के नेता और कुछ पुलिस अफसरों की मदद से क्राइम को अंजाम देते थे। और इसके काले कारनामों से दोनों मियाँ भाई ने अवैध कारोबार का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, बब्बू व छब्बू ने खजराना इलाके में कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया था। और जमीन से संबंधित लोगों से साँठगाँठ कर इन्होंने इलाके में अवैध कॉलोनियों का निर्माण शुरू करवा दिया था। नोटरी के तहत प्लाट की नीलामी भी की गई।
इसी अवैध धंधे को देखते हुए इन दोनों ने टेलरिंग और पेंटर का काम बंद कर दिया। जमीन का यह अवैध धंधा इतना फला-फूला कि जिन बदमाशों के पास खाना खाने तक के पैसे नहीं रहते थे अब उनके पास गाड़ी और बंगला आ गया। साथ ही अलग अलग जगहों पर इन्होंने आगे के लिए पैसा लगाना शुरू कर दिया।
वहीं जब इसकी खबर प्रशासन को लगी तो पुलिस ने दोनों पर दबिश देनी शुरू कर दी। जिसके तहत बब्बू की गिरफ्तारी हो गई लेकिन छब्बू भोपाल में प्यारे मियाँ की शरण में चला गया। वही प्यारे मियाँ जोकि लड़कियों के अवैध धंधे के सिलसिले में सलाखों के पीछे है। नगर निगम ने 1 साल पहले बब्बू के पटेल नगर स्थित फार्म हाउस पर दबिश देकर अवैध बिल्डिंग को ध्वस्त करवाया था। उस दौरान पुलिस ने ग्राउंड में खड़ी 50 नई इलेक्ट्रिक बाइक भी बरामद की थी। ध्वस्तीकरण के दौरान दौरान बब्बू की पत्नी ने काफी हो-हल्ला भी मचाया था।
अपने पिता की चिट्ठी के बाद देश भर में शुरू हुई चर्चा के बीच जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला राशिद ने उन पर तमाम आरोप लगाए हैं। शेहला ने कहा है कि उनके पिता ने उनकी परवरिश में कोई भी योगदान नहीं दिया है। शेहला ने कहा कि उनके पिता उनके बारे में कुछ नहीं जानते और उनकी माँ ने उनकी सारी परवरिश की है। शेहला ने अपने पिता पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है और कहा है कि वो इस केस में गवाह हैं, इसलिए उनके पिता ने यह सभी आरोप लगाए हैं।
My sister & I have been brought up by a single parent, as my father has never been there for us, emotionally or financially.
He never even knew which class we are studying in – clear from his letter which says that “Shehla was in last semester of Ph.D. of Sociology in 2017.”
बता दें कि इस बीच शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी। इस ट्वीट के सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है कि जब उनके पिता की उनके परवरिश में कोई योगदान नहीं है, वो उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो फिर शेहला अपने अब्बा के इतनी करीब क्यों हैं कि उनके बाहर जाते ही बीमार हो जाती थी।
But you were so attached to him that u fell sick everytime he used to travelled somewhere ??? pic.twitter.com/WgpSBVNrFR
शेहला रशीद ने अपने ट्वीट में लिखा, “मेरी और मेरी बहन की परवरिश मेरी माँ ने ही की है। मेरे पिता कभी इमोशनली या फाइनेंशली मेरे साथ नहीं रहे। उन्हें ये भी नहीं पता कि हम किस क्लास में पढ़ रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि शेहला 2017 में समाजशास्त्र से पीएचडी कर रही थी। इससे अधिक जानकारी तो उन्हें गूगल पर मिल जाती। उन्होंने कहा कि मैं 3 एनजीओ चलाती हूँ। ये बताता है कि वो मेरे बारे में कितना जानते हैं। जो भी लोग मुझे जानते हैं, उन्हें ये पता होगा कि मैं किसी एनजीओ से नहीं जुड़ी हूँ।”
Even a cursory Google search would have given him more information about what stage of study I’m in!
He says that I run 3 NGOs. This shows how involved in my life he is! Anyone who follows me even remotely knows that I’m not associated with any NGO.
अगले ट्वीट में शेहला ने कहा, “मेरे पिता मेरे अकाउंट की जाँच की बात कह रहे हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि मेरा अकाउंट नंबर है क्या? उनके अकाउंट से मेरे अकाउंट में आज तक कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है। वो कह रहे हैं कि साल 2017 में वो मुझसे मिले थे। 2017 में मुझे चिकन पॉक्स हुआ था, उस दौरान मेरी बहन ने उनसे कहा कि वो मुझे आकर देख लें। हालाँकि, इसके बावजूद जब वो नहीं आए तो हम लोगों ने उनसे बात करना बंद कर दिया।”
He keeps saying that my account should be probed, but he doesn’t even know what my account number is. There’s never been a single transaction from his account to mine ever.
He keeps saying that he met me in 2017. In 2017, I had chickenpox and my sister begged him to see me
उन्होंने आगे लिखा, “सच्चाई ये है कि उन्होंने मेरी माँ को आर्थिक रूप से परेशान किया और शारीरिक और मौखिक रूप से भी उन्हें बहुत तंग किया। मेरी माँ ने 32 साल सरकार की नौकरी की और हम सभी की परवरिश भी की। मेरी माँ ही मेरी माँ-बाप हैं, उन्होंने हमेशा नि:स्वार्थ रूप से हमें प्यार किया। वो हमेशा से मेरे पिता को सिर्फ इसलिए सहती रहीं कि हम अपने पिता को देखते रहें।”
But he clearly refused to see me. After this incident, my sister stopped talking to him completely.
Truth is, he has just been a parasite, exploiting my mother financially, abusing her physically and verbally. My mother has served the govt for 32 years and brought us up with her
Halal income, with her blood, sweat and tears. She is our mother & father. She’s been there for us despite everything, loved us unconditionally and been extremely protective towards us. She even put up with abuse for so long, simply so that we have a father for appearance’s sake!
शेहला ने कहा कि उनके पिता की लिखी चिट्ठी सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है, ताकि हम उनके खिलाफ किए गए घरेलू हिंसा के केस को वापस ले लें। उस केस में हम ना सिर्फ पक्षकार हैं, बल्कि गवाह भी हैं।
शेहला के पिता ने की थी कार्रवाई की माँग
बता दें कि जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद पर उनके पिता ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने डीजीपी को चिट्ठी लिखकर शेहला के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। शेहला के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी ने जुहूर बटाली और राशिद इंजिनियर से 3 करोड़ रुपए लिए थे। उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए डीजीपी से सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। हालाँकि, शेहला ने पिता के सभी आरोपों से इनकार किया है।
पंजाब के अर्जुन और पद्म पुरस्कार विजेताओं ने अब प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अपना पुरस्कार वापस करने की इच्छा व्यक्त की है। पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं। उनका दावा है कि वे 5 दिसंबर को राष्ट्रपति भवन जाएँगे और अपना पुरस्कार बाहर में रख देंगे।
खिलाड़ियों ने प्रदर्शनकारियों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए उन किए गए पानी की बौछार और आँसू गैस के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारी चार महीने का राशन लेकर आए हैं और विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए तैयार हैं। सरकार ने मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को उनके साथ बातचीत की लेकिन अभी इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं में से एक ने दावा किया कि पंजाब से 150 पुरस्कार वापस किए जाएँगे।
विरोध प्रदर्शन का ‘अवार्ड वापसी’ स्वरुप
भारत में कई पुरस्कार विजेताओं का मानना है कि उन्होंने सरकार से जो पुरस्कार जीता है वह सरकार के खिलाफ विरोध का एक रूप है। कथित तौर पर ‘बढ़ती असहिष्णुता’ पर कुछ साल पहले इसकी शुरुआत हुई जब फिल्म और साहित्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के कॉन्ग्रेस समर्थक लिबरलों ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को अपना पुरस्कार लौटाने का फैसला किया। तब से यह चलन बन गया है।
हालाँकि, इस बात का कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है कि ऐसा करने की घोषणा के बाद वास्तव में कितने लोगों ने अपने पुरस्कार और पुरस्कार राशि लौटा दी है। हिंदूफोबिक कवि मुनव्वर राणा और लेखक काशीनाथ सिंह ने अवार्ड वापसी की घोषणा करने के बाद न तो साहित्य अकादमी में अपने पुरस्कार भेजे और न ही 1 लाख रुपए का प्रशस्ति पत्र दिया।
पंजाब के किसानों का आंदोलन
पंजाब के किसान इस साल सितंबर में लागू किए गए केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें सरकार ने किसानों को एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) के बाहर बेचने की अनुमति दी, जिससे बिचौलियों का सफाया हो गया।
केंद्र सरकार ने मौजूदा व्यवस्था के अनुसार मंडियों में उपज की बिक्री के पुराने प्रावधान को जारी रखा है। हालाँकि, पंजाब के किसान चाहते हैं कि सरकार शहर के एपीएमसी और मंडियों को बंद न करे। केंद्र सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ये बंद नहीं हो रहे हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि किसान पहले से मौजूद कानून के खिलाफ आंदोलन क्यों कर रहे हैं।
इसके अलावा, किसान अब एक कानून चाहते हैं जो एमएसपी (न्यूनतम बिक्री मूल्य) की गारंटी देता हो। एमएसपी हमेशा एक प्रशासनिक निर्णय रहा है, जो प्रत्येक मौसमी फसल के बाद मामले के आधार पर लिया जाता है। हालाँकि, किसान अब प्राइवेट प्लेयर की तरह मंडियों के बाहर के लिए एमएसपी सहित इसके लिए एक कानून चाहते हैं। जबकि यह फ्री मार्केट की अवधारणा के खिलाफ होगा।
सोशल मीडिया पर एक शराब की बोतल की तस्वीर खूब वायरल हो रही है। इस शराब की बोतल का नाम पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना का उपहास करते हुए रखा गया है। शराब का नाम लिखा है ‘Ginnah’। इस बोतल पर उनका एक छोटा सा परिचय देते हुए बताया गया है कि जो चीजें इस्लाम में प्रतिबंधित हैं, जिन्ना ने वह सब कुछ किया। जैसे सिगार, शराब और पोर्क खाना।
बोतल के पीछे एक संदेश भी लिखा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि इस शराब का नाम पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की याद में रखा गया है।
एक ट्विटर यूजर ने जिन्ना के नाम पर गिन्ना नाम की शराब की बोतल की तस्वीरें पोस्ट कीं। बोतल के लेबल पर लिखा है, “इन द मेमोरी ऑफ द मैन ऑफ प्लेजर, हू वाज जिन्ना।” इस खबर को एएनआई ने भी ट्वीट किया है। हालाँकि समाचार एजेंसी एएनआई ने इस बोतल की सत्यता की पुष्टि नहीं की है। लेकिन कई ट्विटर यूजर्स गिन्ना नाम की शराब के बारे में लगातार पोस्ट कर रहे हैं।
‘In the memory of the man of pleasure’: Alcoholic drink named after Pak founder Jinnah
बोतल पर लिखा है “मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक थे जो 1947 में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में अस्तित्व में आए।”
आगे लिखा है, कुछ दशक बाद पाकिस्तान के चार सितारा जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट कर दिया था।
इस बारे में बॉटल पर लिखा है, ”कुछ दशक बाद पाकिस्तान को एक सैन्य तानाशाह ने वाशिंगटन डीसी में बैठे अपने समर्थकों की मदद से ऐसी स्थिति में पहुँचाया, मानों किसी को पहाड़ की चोटी से धक्का दे दिया गया हो। पाकिस्तान एक अशांत जगह के रूप में तब्दील हो गया। जहाँ वह (तानाशाह) और कुछ मौलाना अपने खतरनाक इरादों को अमलीजामा पहनाने लगे।”
लेबल पर लिखा गया है कि एमए जिन्ना को कभी भी यह मंजूर नहीं होगा जबकि उन्होंने पूल बिलियर्ड्स, सिगार, पोर्क सॉसेज के साथ-साथ बढ़िया स्कॉच व्हिस्की और शराब का आनंद लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल अल्कोहल की इस बॉटल पर लिखा संदेश दरअसल, पाकिस्तान और जिन्ना पर कटाक्ष है। एक तरफ जहाँ जिन्ना के समर्थकों ने शराब की बोतल पर नाराजगी जताई है। तो वहीं दूसरी ओर कई सोशल मीडिया यूजर चुटकी लेते भी नजर आए हैं।
कर्नाटक में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ पर शांति जूबी नाम की हिंदू महिला को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया। जिसके बाद उसका नाम असिया इब्राहिम खलील कट्टेकर कर दिया गया। राज्य अध्यक्ष राजेश कोल्हो और दक्षिण कन्नड़ जिला अध्यक्ष शब्बीर उल्लाल के नेतृत्व में ‘आधुनिक मानवाधिकार समिति’ ने आरोप लगाया कि सिया इब्राहिम खलील कट्टेकर को उसके पति इब्राहिम खलील कट्टेकर से जबरन दूर रखा जा रहा है।
‘आधुनिक मानवाधिकार समिति’ ने यह आरोप इब्राहिम खलील के बड़े भाई शिहाब और परिवार के अन्य सदस्यों पर लगाया, जो इब्राहिम खलील कट्टेकर को अपनी पत्नी से दूर रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
आसिया ने टाइम्स नाउ से बात करते हुए कहा कि उसने सोचा था कि उसकी जिंदगी सुरक्षित है, मगर यहाँ पर उसका साथ देने के लिए कोई नहीं है। इस्लाम में परिवर्तित होने से पहले उससे कहा गया था कि यह बहुत ही रंगीन और सुंदर है।
I thought I’ll have a secure life here, but there was no one to support me: Asiya, alleged love jihad victim, tells TIMES NOW. pic.twitter.com/kq53VcLlfk
26 नवंबर को विश्व हिंदू परिषद की टीम आसिया से मिलने के लिए पहुँची और उसे दक्षिणा कन्नड़ जिले के सुलिया पुलिस स्टेशन ले गए और अपने ‘गायब’ पति को लेकर परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा। विश्व हिंदू परिषद की इस टीम में शरण पंपवेल, सुरेशा राज, लतीश गुंडया और अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने महिला से वापस हिंदू धर्म में आ जाने की गुहार लगाई।
शांति जोबी केरल के कन्नूर की रहने वाली हैं। उसकी फेसबुक के जरिए अब्दुल हाजी कट्टेकर के बेटे इब्राहिम खलील कट्टेकर से दोस्ती हुई। दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानने के बाद 12 जुलाई, 2017 को इस्लाम में परिवर्तित होने के बाद उसके साथ निकाह किया। निकाह के बाद, शांति जूबी ने अपना नाम बदलकर आसिया इब्राहिम खलील कट्टेकर रख लिया। इसके बाद ये दोनों बेंगलुरु, मैसूर आदि के विभिन्न किराए के घरों में रहे।
इब्राहिम की शादी के बारे में पता चलने के बाद, उसके बड़े भाई शिहाब और अन्य लोग आसिया के पति को सुलिया में उनके घर ले गए एवं आसिया को बेंगलुरु में ही छोड़ दिया। इसके बाद दोनों अलग रहने लगे। बताया जा रहा है कि जब आसिया ने अपने पति से संपर्क करने की कोशिश की, तो परिवार के सदस्यों ने उसे मारने की धमकी दी।
दोनों पक्षों ने पुत्तुर और सुलिया पुलिस स्टेशनों में बैठक की और चर्चा की, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकला। आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। वह कहती है कि जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी। कई संगठनों द्वारा उसकी मदद के लिए किए गए प्रयास भी विफल रहे।
आसिया ने आरोप लगाया है कि शिहाब उसे अश्लील मैसेज भेज रहा है। आसिया का कहना है कि उसकी माँग के अनुसार, दो लग्जरी कारों और दो स्कूटरों के अलावा कई बार 25 लाख रुपए से अधिक की धनराशि दी गई। फिर भी परिवार खुश नहीं है और मेंटली टॉर्चर कर रहे हैं। आसिया अपने इस आरोप को दोहराती है कि उसे उसके पति से दूर रखा गया है। आसिया ने अब मीडिया से संपर्क किया है और उनसे मदद माँगी है कि वो उसे उसके पति इब्राहिम खलील कट्टेकर से मिलने में मदद करे, ताकि वह उसके साथ विवाहित जीवन गुजार सके।
#Breaking | Muslim groups refute Asiya’s love jihad charges.
Religion has no role to play in love. To call it ‘love jihad’, is wrong: Ashraf Muslim, Jamaat President. pic.twitter.com/KmC67shfEk
वहीं मुस्लिम ग्रुप ने आसिया के लव जिहाद के आरोपों का खंडन किया है। जमात के अध्यक्ष अशरफ मुस्लिम ने कहा कि प्रेम में धर्म की कोई भूमिका नहीं है। इसे ‘लव जिहाद’ कहना गलत है। कॉन्ग्रेस विधायक यूटी खंडेर ने इस पर कर्नाटक सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे एक विशेष समुदाय को नीचा दिखाना चाहते हैं।
उत्तराखंड के टिहरी जनपद में कॉन्ग्रेस नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री याकूब सिद्दीकी के भाई अब्बास सिद्दीकी एवं उसके साथ मजहबी कट्टरपंथियों के गिरोह ने एक पुलिसकर्मी मोहन सिंह नेगी, एसआई चौकी इंचार्ज ढुंगीधार, नई टिहरी के साथ बेहद अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की। जिसके बाद सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार व्यापारी अब्बास सिद्दीकी को पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
नई टिहरी के बौराड़ी बाजार में रविवार (नवम्बर 29, 2020) के दिन कपड़े का स्टॉल लगाने को लेकर एक व्यापारी अब्बास सिद्दीकी और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने आरोपित व्यापारी समेत 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
बौराड़ी के खुले बाजार में अब्बास सिद्दीकी और सलीम खान कपड़ों का स्टॉल लगाकर रखते हैं। रविवार को ढुंगीधार चौकी प्रभारी मोहन सिंह नेगी ने व्यापारी को सड़क किनारे से स्टॉल हटाने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्बास सिद्दीकी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने तहसील प्रशासन और नगर पालिका से स्टॉल लगाने की अनुमति ले रखी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की।
इसी बीच व्यापारियों और पुलिस के बीच बातचीत झड़प में तब्दील हो गई और दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। व्यापारी अब्बास सिद्दीकी के समर्थन में कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव याकूब सिद्दीकी समेत समुदाय विशेष के लोग मौके पर पहुँचे और उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। अब्बास और उसके साथियों ने पुलिस से मारपीट और अभद्रता करते हुए उल्टा पुलिसकर्मियों पर ही उत्पीड़न करने का आरोप भी लगाया है।
पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और कार्रवाई में बढ़ा डालने के आरोप में पुलिस अब्बास सिद्दीकी को थाने लेकर गई जहाँ अब्बास समेत 10 अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया गया।
सोमवार 30 नवंबर, 2020 को आरोपितों को न्यायलय में पेश किया गया। कोतवाली निरीक्षक चंदन सिंह चौहान के अनुसार, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ्तार व्यापारी अब्बास सिद्दीकी को सीजेएम की अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है। जिन 10 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है उनकी शिनाख्त की जा रही है और जल्द ही अन्य सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं, व्यापारी अब्बास सिद्दीकी और उसके भाई याकूब सिद्दीकी ने भी पुलिस पर मारपीट करने और झूठे मुकदमा में फंसाने का आरोप लगाया है। व्यापारी के समर्थन में कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कलक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। उनकी माँग है कि यह केस वापस किया जाए। साथ ही, कथित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी रोष देखा जा रहा है। दरअसल, टिहरी गढ़वाल एक पहाड़ी जिला है, जहाँ पर मजहब विशेष के कुछ लोग काफी समय से निवास करते आ रहे हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में कुछ गिनी-चुनी जगहों पर ही मजहब विशेष की आबादी रहती है।
लोगों का आरोप है कि विगत कुछ समय में पहाड़ों की बदलती डेमोग्राफी और सामाजिक अपराध में इस समुदाय का योगदान बढ़ रहा है जिसको लेकर सरकार को कुछ कठोर कदम उठाने चाहिए। यही नहीं, अक्सर सोशल मीडिया पर पहाड़ी युवा ‘लैंड-जिहाद’ की साजिश को भी उजागर करते रहे हैं।
कट्टपंथीयों द्वारा टिहरी में दरोगा के साथ मारपीट देवभूमि उत्तराखंड के लिए शुभ संकेत नहीं ।?? प्राप्त विवरण के अनुसार कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री याकूब सिद्दीकी के भाई अब्बास सिद्दीकी एवं उसके साथ कट्टपंथीयों के गिरोह ने मनोज सिंह नेगी एस आई चौकी इंचार्ज डूगीधार pic.twitter.com/PPPqatcLBK
— DILIP KR SINGH?? चौकीदार ? (@DILIPKRSINGH303) December 1, 2020