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भाजपा-कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प के बाद 6 घायल, कॉन्ग्रेस नेता समेत 6-7 पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों के दौरान आज (नवंबर 3, 2020) भाजपा व कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में आपसी भिड़ंत की खबरें आ रही हैं।

स्थानीय चैनल बता रहे हैं कि लसूड़िया थाना क्षेत्र के सांवेर में आज फिर कॉन्ग्रेस-भाजपा नेताओं में भिड़ंत हो गई है। फिलहाल पुलिस ने मौके पर स्थिति को संभाला है। इसके अलावा एक मामला धार जिले के बदनावर इलाके से भी आया है, जहाँ 6 लोगों के घायल होने की खबर है।

जानकारी के मुताबिक यह भिड़ंत सोमवार को हुई थी, जिसमें 6 लोग घायल हुए थे। इनमें से 2 की हालत गंभीर है। वहीं पुलिस ने हत्या के प्रयास और मारपीट के पूरे केस में 7 लोगों के ख़िलाफ़ (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 6 के ख़िलाफ़) मामला दर्ज किया है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर तिलगारा में सोमवार दोपहर लगभग एक बजे चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के वाहन आमने-सामने आ गए।

इसके बाद दोनों में विवाद हो गया। पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है। आरोपितों में से चार लोगों की शिनाख्त कर ली गई है। ये चारों कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी हैं।

बता दें कि कार्यकर्ताओं में यह भिड़ंत उस समय हुई, जब सभी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों से पार्टियों का प्रचार करके लौट रहे थे। इसी दौरान एक विवाद के ऊपर दोनों पक्षों में झड़प हो गई। जब तक पुलिस मौके पर पहुँची, वहाँ 6 लोग घायल थे। इन सबको पुलिस ने नजदीक के अस्पताल में पहुँचाया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस ने इस संबंध में ब्लॉक कॉन्ग्रेस प्रमुख निरंजन सिंह पवार और पूर्व पंचायत अध्यक्ष अभिषेक मोदी के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज किया। इनके अलावा कॉन्ग्रेस आईटी सेल के जिलाध्यक्ष अश्विन पाटीदार, पूर्व पार्षद साजिद खान, टिंकू और अर्जुन चौहान के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दोनों पार्टियों के जिलाध्यक्षों ने एक दूसरे की पार्टी पर झड़प का आरोप मढ़ा है।

जंगलराज वाले चाहते हैं कि छठी मैया की धरती पर ‘जय श्री राम’ के नारे न लगें: PM मोदी, किया बिहार के सैनिकों को नमन

जहाँ बिहार में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) को दूससरे चरण का मतदान चल रहा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सहरसा में जनसभा को सम्बोधित किया। सहरसा और अररिया सहित अन्य इलाकों में तीसरे व अंतिम चरण में मतदान होगा। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि वो बीते दिनों में बिहार के करीब हर क्षेत्र में गए हैं। जनभावनाओं को देखा है, समझा है। अभी दूसरे चरण के मतदान के जो ट्रेंड मिल रहे हैं, उसने तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार का जनादेश स्पष्ट है, बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

पीएम मोदी ने लालू यादव के राज को याद करते हुए कहा कि जंगलराज ने बिहार के सामर्थ्य के साथ जो विश्वासघात किया, उसे बिहार का हर नागरिक अच्छे से जानता है। उन्होंने कहा कि जुबान पर बार-बार गरीब का नाम वालों ने गरीब को ही चुनाव से दूर कर दिया था। बिहार के गरीब को अपनी मर्जी की सरकार बनाने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपने एक वोट की ताकत कम मत आँकना।

प्रधानमंत्री मोदी ने सहरसा में कहा कि जिस प्रकार से श्रीकृष्ण ने एक उँगली पर गोवर्धन को उठाया था, जिस प्रकार से ग्वालों ने समर्थन किया था, वैसे ही आपकी उँगली पर लोकतंत्र के सौभाग्य का चिह्न लगने वाला है। उन्होंने कहा कि आपके एक-एक वोट की ताकत बिहार के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। बकौल पीएम मोदी, आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार का आईटी हब के रूप में विकास। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए दुग्ध प्रोसेसिंग यूनिट का विकास।

उन्होंने आगे कहा कि आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए कृषि उत्पादक संघों का निर्माण। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार के कुटीर उद्योगों का विकास। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि बिहार के लोग आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर बिहार के लिए प्रतिबद्ध हैं, कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में एक नए उदीयमान, आत्मनिर्भर और गौरवशाली अतीत से प्रेरित बिहार की नींव रखी जा चुकी है।, अब इस मजबूत नींव पर एक भव्य और आधुनिक बिहार के निर्माण का समय है।

सहरसा में पीएम मोदी ने कहा कि बीते दशक में CM नीतीश के नेतृत्व में NDA सरकार ने आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव रखी है। बिहार में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूल सुविधाएँ आज गाँव-गाँव पहुँच चुकी हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि आज बिहार देश के उन राज्यों में है, जहाँ बिजली की खपत सबसे अधिक होती है। साथ ही कहा कि जनधन योजना के कारण, कोरोना के इस संकट काल में बिहार की लाखों बहनों के बैंक खाते में सीधे सैकड़ों करोड़ रुपए जमा हो पाए हैं।

इसकी महत्ता की बात करते हुए पीएम मोदी ने याद दिलाया कि यही जनधन योजना है, जिसके कारण कोरोना काल में भी बिहार के लाखों किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद पहुँच पाई है। उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के तहत बिहार में करीब ढाई करोड़ ऋण बिना गारंटी के आवंटित किए जा चुके हैं। इसमें करीब पौने 2 करोड़ तो महिला उद्यमी हैं। 50 लाख से अधिक साथी ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार इस योजना के तहत ऋण लिया है। पीएम ने कहा:

“बिहार के हर जिले में कम से कम एक ऐसा उत्पाद है, जो देश और विदेश के बाजारों में धूम मचा सकता है। आत्मनिर्भर बिहार के लिए हर जिले में इन उत्पादों को निखारने, सँवारने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। NDA सरकार हमारे किसानों के उत्पादों को कितना संरक्षण दे रही है, इसका बहुत बड़ा उदाहरण है हमारा जूट से जुड़ा सेक्टर। आज जब देश सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति की तरफ तेज़ी से अपने कदम बढ़ा रहा है, तो इसका सीधा लाभ हमारे जूट किसानों को हो रहा है, जूट उद्योग को हो रहा है। पहले जितनी खादी बिकती थी, उससे कई गुना ज्यादा खादी आज बिक रही है। लोग खरीद रहे हैं, दुनिया में भी माँग बढ़ रही है। 2014 से पहले 25 साल में जितने वर्ष की खादी हमारे देश में बिकी थी, उससे ज्यादा की खादी सिर्फ पिछले 5 साल में बिक चुकी है।”

पीएम मोदी ने सहरसा की जनसभा के माध्यम से देश के 130 करोड़ देशवासियों को आग्रह किया कि वो आने वाले दिनों में धनतेरस, दीवाली, छठ जैसे त्यौहारों पर जितना संभव हो सके, लोकल चीजें ही खरीदें। उन्होंने कहा कि इससे दीवाली सिर्फ आपके घर ही नहीं, उस गरीब सामान बेचने वाले के घर भी होगी। उन्होंने कहा कि बिहार की अनेकों वीर माताएँ, अपने लाल, अपनी लाडली को राष्ट्ररक्षा के लिए समर्पित करती हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे बिहार के शूरवीर देश की सीमा, देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने लोगों से पूछा कि बिहार को जंगलराज बनाने वालों के साथी, उनके करीबी क्या चाहते हैं, आपको पता है? फिर खुद ही जवाब देते हुए बोले कि वो चाहते हैं, आप भारत माता की जय के नारे न लगाएँ। बकौल पीएम, छठी मैया को पूजने वाली इस धरती पर, जंगलराज के साथी चाहते हैं कि भारत माता की जय के नारे न लगें।

पीएम मोदी ने बिहार के सहरसा की जनसभा में आगे कहा कि वो (जंगलराज बनाने वाले और उनके साथी) चाहते हैं, आप ‘जय श्री राम’ भी न बोलें, बिहार के चुनाव प्रचार में माँ भारती का जयकारा करना इन लोगों को रास नहीं आ रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार दोबारा बनाने का संकल्प साकार होने जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हमें पूरी शक्ति के साथ एक-एक वोटर के पास जाना है और इस बार वोटिंग के और जीत के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ने हैं।

‘राहुल राठौर नाम बताया था आसिफ के बेटे ने, बहला-फुसला कर भगा ले गया मेरी बेटी को’ – रेवाड़ी केस में नया खुलासा

हरियाणा के रेवाड़ी में 16 साल की एक नाबालिग लड़की के गायब होने के कई दिनों बाद उसके माता-पिता ने आरोप लगाया कि उसे एक मुस्लिम लड़का बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया। माँ ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक जेसीबी चालक ने उनकी बेटी को फँसाया और 11 अक्टूबर को उसे भगा ले गया।

अब माँ ने खुलासा किया कि पिछले 6 महीने से उनके चचेरे भाई के लिए जेसीबी चलाने वाले मुस्लिम लड़के ने लड़की के परिवार के करीब आने के लिए खुद को हिंदू बताया था। मुस्लिम लड़के ने अपनी पहचान छुपा लिया और खुद को ‘राहुल राठौर’ बताया था। जबकि उसके पिता का नाम आसिफ़ है और वह मूल रूप से हरियाणा के फ़िरोज़पुर झिरका के पास के एक गाँव से है। 

माँ ने कहा कि मुस्लिम लड़का उनके चचेरे भाई के लिए जेसीबी चलाते हुए नियमित रूप से उनके घर आने-जाने लगा। इसके बाद वो बिना उनकी जानकारी के चुपचाप नाबालिग लड़की से मिलने लगा और आखिरकार उसे बहला-फुसला कर भगा ले गया।

इसके साथ ही नाबालिग पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर भी मामले को ठीक से नहीं देखने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है। वो उनकी बेटी को वापस लाने की पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं।

पीड़िता की दुखी और परेशान माँ ने कहा, “हम खुद को मार देंगे। जो भी करना होगा, हम करेंगे। सड़कों को ब्लॉक करना हो या पुलिस स्टेशन के सामने प्राण त्यागना, हम सब करेंगे। हर दिन मरने की तुलना में एक बार मरना बेहतर है।”

इस बीच, पुलिस ने जानकारी दी है कि उन्होंने कई टीमों का गठन किया है, जो पीड़िता और आरोपित की तलाश के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। खौल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने कहा, “हमें 11 अक्टूबर से एक नाबालिग लड़की के लापता होने की सूचना मिली। उनके परिवार के लिए काम करने वाला एक लड़का लड़की के साथ लापता है। हमने एक मामला दर्ज किया है और लड़की को खोजने के लिए कई जगहों पर छापे मारे हैं। एक बार लड़की का पता लगाने के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा।”

गौरतलब है कि हरियाणा के रेवाड़ी से यह मामला उस समय सामने आया, जब कुछ दिनों पहले ही तौसीफ नाम के मुस्लिम युवक ने निकिता तोमर नामक हिंदू लड़की को दिनदहाड़े गोली चला कर मार डाला। निकिता की गलती बस यही थी कि उसने धर्म परिवर्तन करने से मना किया था।

यादवों के इलाके में रहकर भो$₹* वोट तुम कमल को दोगे?: RJD के गुंडो ने परिवार पर किया हमला

बिहार चुनाव में RJD के गुंडों ने एक परिवार पर हमला करते हुए उनके साथ सिर्फ इस कारण बदसलूकी की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था। बिहार में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदान के दूसरे चरण के दिन सोशल मीडिया पर एक वीडिया सामने आई है। यह वीडियो बिहार के फतुहा जिले की बताई जा रही है। JDU नेता संजय कुमार झा ने इसे अपने ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें एक कवींद्र महतो नामक बुजुर्ग का परिवार अपने ऊपर हुए हमले की घटना बताते हुए सुना जा सकता है।

ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया है कि बिहार के फतुहा में RJD के गुंडों ने कवींद्र महतो के परिवार पर हमला करके उनसे गाली-गलौज की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था।

वीडियो शेयर करते हुए अंकुर लिखते हैं, “तेजस्वी के गुंडो ने इनसे कहा, ‘यादव के इलाके में रहकर वोट कमल को दोगे।’ कल्पना कीजिए कि आरजेडी के सत्ता में आने से स्थिति क्या होगी?”

वहीं, संजय सिंह झा ने इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि इस बार बिहार में जंगलराज लाने की नापाक कोशिशें कामयाब नहीं होंगी।

क्या है वीडियो में?

वीडियो में कवींद्र महतो के बेटे को कहते सुने जा सकता है, “कुछ लोग चाहते थे कि हम लोग वोट देने न जाएँ क्योंकि उन्हें पता था कि हम उनके मनपसंद पार्टी को वोट नहीं देंगे। तो जब हम वोट देकर लौटे और घर पर आकर कपड़े उतारने लगे तभी वो आ गए। वो चाहते थे कि लालटेन को वोट दिया जाए।”

यहाँ बता दें कि लालटेन RJD का चुनाव चिह्न है, जिसका नेतृत्व इस बार लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव कर रहे हैं और युवाओं को सुनहरे भविष्य के सपने दिखा रहे हैं। जबकि उनके कार्यकर्ता व समर्थक ऐसी घटनाओं को अंजाम देते पाए जा रहे हैं।

वीडियो में नजर आ रही परिवार की एक महिला को कहते सुना जा सकता है, “जिसको मन करेगा हम उसे वोट देंगे।” वहीं, युवक की माँ और कवींद्र महतो की पत्नी बताती हैं कि हमलावरों ने उन्हें मारते हुए गाली भी दी और कहा कि वो उन लोगों को यहाँ नहीं रहने देंगे। वीडियो में एक आवाज यह भी आती है कि 7-8 साल से यह लोग तंग कर रहे हैं।

कवींद्र महतो की पत्नी बताती है कि हमलावरों ने उन्हें गाली देते हुए कहा,”यादवों के इलाके में रहकर भो$₹* वोट तुम कमल को दोगे?” वह आगे अपने गाल पर लगी चोटों को दिखाते हुए बताती हैं कि उन पर भी किस तरह हमला हुआ और उनके बेटे को कैसे मारा गया।

इसके बाद कवींद्र महतो भी वीडियो में अपनी चोट दिखाते हैं। उनके हाथ में चोट आई है। वीडियो में परिवार को कहते सुना जा सकता है कि उन पर ईंट, रॉड, पत्थर से हमला हुआ है और उनका वार्ड नंबर 14 है।

50+ आतंकियों को फ्रांस ने मार गिराया: फाइटर प्लेन और मिसाइलों से किया हमला, आतंकवाद के खिलाफ एक्शन में फ्रांस

अलकायदा के आतंकियों पर फ्रांस ने तगड़ा प्रहार किया है। फ्रांस की वायुसेना ने अफ्रीकी देश माली में सक्रिय अलकायदा के आतंकवादियों पर जोरदार हवाई हमला बोला है। फ्रांस एयरफोर्स ने माली में बुरकिनो फासो और नाइजर की सीमा के पास एक एयर स्ट्राइक की, जिसमें कम से कम अलकायदा के 50 आतंकियों के मारे जाने की खबर है। फ्रांस ने यह हमला सोमवार (नवंबर 2, 2020) को किया। फ्रांस ने यह हमला मिराज फाइटर जेट और ड्रोन्स के जरिए किया। 

फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने माली की सरकार से मुलाकात के बाद कहा कि 30 अक्‍टूबर को माली में फ्रेंच एयरफोर्स ने एक आक्रामक कार्रवाई की, जिसमें 50 ज‍िहादी मारे गए। इस दौरान बड़ी संख्‍या में हथियार भी बरामद किए गए। इस इलाके में माली की सरकार इस्‍लाम‍िक आतंकवादियों का सामना कर रही है। फ्रांसीसी रक्षामंत्री ने कहा कि 30 बाइक भी हवाई हमले में नष्‍ट हो गई है।

विमान से आतंकवादियों पर मिसाइलें

उन्‍होंने बताया कि यह हमला उस समय किया गया, जब ड्रोन ने पता लगाया कि बड़ी संख्‍या में मोटरसाइकल पर सवार लोग तीनों देशों की सीमा पर मौजूद हैं। इसके बाद ये जिहादी पेड़ों के नीचे छिप गए और निगरानी से बचने का प्रयास करने लगे। इसके बाद फ्रांसीसी वायुसेना ने अपने दो मिराज फाइटर जेट और ड्रोन विमान वहाँ भेजे। इन विमानों ने आतंकवादियों पर मिसाइलें दागीं, जिससे उनका सफाया हो गया।

सेना के प्रवक्‍ता कर्नल फ्रेडरिक बार्बी ने कहा कि 4 आतंकवादियों को पकड़ा गया है। उनके पास से विस्‍फोटक और सूइसाइड जैकेट बरामद की गई है। उन्‍होंने कहा क‍ि यह ज‍िहादियों का समूह सेना के एक अड्डे पर हमले की तैयारी में था। बार्बी ने कहा कि इस्‍लामिक स्‍टेट के आतंकवादियों के साथ ग्रेटर सहारा इलाके में एक मुठभेड़ चल रही है। इसमें करीब 3 हजार सैनिक शामिल हैं।

फ्रांसीसी वायुसेना ने जिस इलाके में हमला किया, वो इस्लामिक आतंकियों के कब्जे में था। हमला करने से पहले ड्रोन के जरिए पूरे हालात की जानकारी ली गई। आतंकी बड़ी संख्या में मोटरसाइकलों पर सवार होकर तीन देशों की सीमाओं पर थे। यह जानकारी पुख्ता होने के बाद फ्रांस ने अपने दो मिराज फाइटर जेट भेजे और आतंकियों पर मिसाइल से हमला किया।

फ्रांस सरकार की ओर से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक आतंकवाद के खिलाफ लगातार उनका ऑपरेशन जारी है। मौजूदा वक्त में सेंट्रल माली में अलकायदा आतंकियों की गतिविधियाँ बढ़ गई थीं। जिस वजह से माली सेना की मदद को फ्रांस आगे आया और एयर स्ट्राइक की। 

मुस्लिम देशों के निशाने पर फ्रांस 

दरअसल कुछ दिन पहले एक शिक्षक ने क्लास में बच्चों को विवादित कार्टून दिखाया। जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथ पर निशाना साधा। साथ ही कहा कि वो अभिव्यक्ति की आजादी पर बैन नहीं लगाएँगे, जिसको जो कार्टून बनाना हो बनाए या जो मन में है वो बोले। इससे इस्लामिक देश फ्रांस पर भड़क गए और दुनिया भर में उसके खिलाफ प्रदर्शन हुआ।। हालांकि इस दौरान भी भारत फ्रांस के साथ खड़ा दिखा। साथ ही पीएम मोदी ने आतंकी हमलों की निंदा की थी।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। इससे पहले नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या 

आखिर कैसे लिबरल्स के ‘पोस्टर बॉय’ बन गए तेजस्वी यादव? किस आधार पर माँग रहे हैं वोट?

भारतीय ‘लिबरलिज़्म’ का एक नया उभरता चेहरा हैं बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव। कुछ ही हफ़्तों में ये युवक अपनी ‘दिव्य’ कर्मठता से लेकर अपनी विनम्रता, परिपक्वता तथा लोगों की समस्याओं को लेकर अपनी गहरी समझ तक, हर चीज़ के लिए विख्यात हो गए हैं। यह बात है तो रोचक, क्योंकि आमतौर पर ऐसे गुण अर्जित करने में एक पूरा जीवनकाल बीत जाता है। परन्तु तेजस्वी ने जैसे यह सब रातोंरात पा लिया हो।

हालाँकि, एक प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाता है। आखिर तेजस्वी वोट माँग किस आधार पर रहे हैं? भारतीय नागरिक होने के नाते तेजस्वी को प्रश्न पूछने का पूर्ण अधिकार है। वे बिहार के मुख्यमंत्री से कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं। परन्तु वह उससे कुछ अधिक कर रहे हैं। वह अपनी पार्टी को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं और इसलिए उन्हें अवश्य ही यह बताना चाहिए कि वे किस आधार पर वोट माँग रहे हैं।

तो आखिर आधार है क्या? क्या हैं तेजस्वी के कीर्तिमान?

संयोग से, राजद के कीर्तिमानों का इतिहास है तो सही, परन्तु इतना भयावह की इनके प्रबल समर्थक भी इनका बचाव करने में संकोच करते हैं। कुख्यात जंगलराज और उसके अपराधों तथा अन्यायों की विरासत। क्या कोई भी, मतदाताओं के आँखों में आँखें डालकर एक कारण बता सकता है, जिससे यह सिद्ध होता हो कि राजद के 15 वर्ष उसके बाद आने वाली सरकार से बेहतर रहे हों? बल्कि यथायोग्य, लालू यादव वर्तमान में एक हज़ार करोड़ रुपयों के महाघोटाले में आरोपित भी हैं।

तो क्या इसी आधार पर वोट माँगे जा रहे हैं? यह तो संभव नहीं। बल्कि तेजस्वी स्वयं भी इस आधार पर वोट नहीं चाहते हैं। उनका कहना है कि पिता के अपराधों को पुत्र पर नहीं थोपा जाना चाहिए। चलिए ठीक है, यही माना जाए। इनके समर्थक कहते हैं कि वे उन्हें लालू के 15 वर्षों के आधार पर समर्थन नहीं दे रहे। परन्तु फिर कौनसा आधार है शेष रहता है?

तेजस्वी को क्या अलग बनाता है बिहार के उन करोड़ों युवाओं से? क्यों वही, कोई और नहीं? क्योंकि वे लालू के बेटे हैं, है न? तो हमें लालू का शासनकाल भी भूल जाना चाहिए और किसी को केवल इसलिए वोट दे देना चाहिए कि वह लालू का बेटा है। यह किस प्रकार का तर्क है?

तेजस्वी यादव को भी कुछ समय का कार्यकारी अनुभव है। उन्होनें 18 महीने नीतीश कुमार के सहायक के रूप में बिताए हैं। क्या उन्होनें उन 18 महीनों में कुछ अलग साध लिया? यदि हाँ, तो उनके समर्थक हमें बताते क्यों नहीं? यदि सचमुच कुछ हो, तो तेजस्वी स्वयं ही हमें क्यों नहीं बता देते?

उपमुख्यमंत्री रहते हुए, तेजस्वी के कार्यकाल के विषय में जो हम जानते हैं वो यह कि उन्हें उस दौरान एक सरकारी बँगला आवंटित किया गया था। 2017 में जब राजद की सरकार नहीं रही, तब अपेक्षानुसार तेजस्वी द्वारा उनका सरकारी आवास छोड़ दिया जाना चाहिए था। परन्तु ऐसा हुआ नहीं। इसके उलट, वे स्वयं कई कानूनी चुनौतियाँ दर्ज करवाते रहे। यह तब तक चला, जब तक फ़रवरी 2019 में उच्चतम न्यायलय ने ज़ाहिर निर्णय न सुना दिया कि तेजस्वी को वह आवास छोड़ना ही होगा। क्या यही है वह आधार जिस पर तेजस्वी वोट माँग रहे हैं?

तो किस प्रकार तेजस्वी ने कर्मठ और लोगों की समस्याओं के प्रति सजग होने की प्रतिष्ठा अर्जित की? क्या वे बीते कुछ हफ़्तों में राज्य भ्रमण कर रहे थे? कैसे बने वे राजद के नेता? क्या उन्होनें राजद का वास्तविक नेता घोषित होने के लिए इसके अन्य नेताओं से किसी संघर्ष में विजय हासिल की?

तो फिर तेजस्वी को क्या खास बनाता है? लालू का बेटा होना और बीते कुछ दिनों में एक हेलीकॉप्टर की सवारी करते रहना? ये वही हैं, जिन्होंने संसार की समस्त सुविधाएँ मुहैय्या होने के बावजूद, दसवीं पास करने तक की मेहनत न की।

अचानक कैसे बन गए तेजस्वी परिश्रम तथा कर्मठता के पोस्टर बॉय? क्या ये उन सब का अपमान नहीं है, जो जीवन में कुछ पाने के लिए दिन रात परिश्रम करते हैं?

इस आर्थिक जगत में सदा हमें सचेत किया जाता है कि अतीत में किए गए कार्य भविष्य के परिणामों को सुनिश्चित नहीं करते। लुटियन्स दिल्ली से आने वाली सामयिक सूचना ने इस परम्परागत अस्वीकरण को पलट कर रख दिया है। यदि आप अपने मत को एक निवेश के रूप में देखते हैं, तो आपको यह बताया जा रहा है कि अतीत की असफलता ही दरअसल भविष्य की सफलता का आश्वासन है। तो कीजिए निवेश…

क्या आप अपना एक सफल व्यापार चाहते हैं? तो कृपया ऐसे किसी पर निवेश करें जिसके पिता व्यापार में असफल रहे हों। जानना चाहेंगे कि कौन बन सकता है एक सफल इंजीनियर? तो किसी ऐसे को खोजिए, जिसके पिता एक असफल इंजीनियर रहे हों या कभी इंजीनियर बन ही न पाए हों।

संक्षेप में कहें, तो यही है भारत के कुलीन वर्ग का सामूहिक ज्ञान। इससे मुझे एक हास्य गल्प याद आता है:

एक व्यक्ति, किसी बिल्डर से घर खरीदने जाता है और बिल्डर से पूछता है कि कहीं घर गिरने का खतरा तो नहीं होगा? ‘बेफिक्र रहें’, बिल्डर आश्वासन देता है कि उसके बनाए हुए घरों के गिरने की संभावनाएँ केवल 50 प्रतिशत ही होती हैं। व्यक्ति को शंका होती है। फिर बिल्डर समझाता है कि उसके बनाये हुए 50 प्रतिशत घर तो पहले ही गिर चुके हैं, जिसका अर्थ यह है कि जो घर आप खरीदेंगे वह पूरी तरह सुरक्षित है।

मात्र 4 महीने में कोरोनिल के ₹250 करोड़ के 25 लाख किट बिके: भारत ही नहीं, दुनिया भर में है जबरदस्त माँग

कोरोना वायरस से बचाव के लिए आई ‘पतंजलि आयुर्वेद’ की कोरोनिल किट को बाजार ने जबर्दस्त तरीके से हाथोंहाथ लिया है। ऐसा हम नहीं कह रहे, आँकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। अपने लॉन्च से अब तक मात्र 4 महीनों में बाबा रामदेव की ‘कोरोनिल’ की अब तक 25 लाख से भी ज्यादा किट्स बिक चुकी हैं। कम्पनी के आधिकारिक आँकड़े के अनुसार, ‘पतंजलि आयुर्वेद’ ने अब तक 250 करोड़ रुपए की ‘कोरोनिल किट्स’ बेचीं है। वहीं इम्युनिटी की कुल दवाओं की 85 लाख यूनिट्स बिकी हैं।

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, बाबा रामदेव की पतंजलि के कोरोनिल को न सिर्फ भारत, बल्कि बड़ी मात्रा में विदेशों में भी बेचा गया। अक्टूबर 18, 2020 तक इसकी 25 लाख किट्स 250 करोड़ रुपए में बिकी है। इन्हें ऑनलाइन मार्केटिंग, डायरेक्ट मार्केटिंग, जनरल मार्केटिंग, और ‘पतंजलि आयुर्वेद’ के अस्पतालों व मेडिकल सेंटरों के माध्यम से बेचा गया, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में कार्यरत हैं। इसे जून 23 को लॉन्च किया गया था। बता दें कि अभी तक कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई दवा नहीं आई है।

आयुष मंत्रालय ने भी ‘कोरोनिल’ पर विवाद होने के बाद स्पष्टीकरण माँगा था और कोरोना वायरस संक्रमण को ठीक करने के दावे के साथ इसका प्रचार न करने को कहा था। बाद में इसे कोरोना वायरस के खिलाफ एक मजबूत इम्युनिटी बूस्टर बताया गया। हालाँकि, इसकी बिक्री पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने खुद मीडिया में इसे लेकर अपनी बातें रखी थीं।

आयुष मंत्रालय ने राज्य सरकार, उत्तराखंड से भी इस दवाई कोरोनिल को लेकर जरूरी जानकारी माँगी थी। मंत्रालय ने राज्य लाइसेंसिंग ऑथोरिटी को लाइसेंस कॉपी और प्रोडक्ट को मंजूर किए जाने से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट माँगे थे। आयुष मंत्रालय ने 21 अप्रैल को जारी गैजेट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा था कि आयुर्वेदिक दवाओं की रिसर्च को लेकर बाकायदा नियम कानून जारी किए गए थे, उसी के तहत कोरोना वायरस पर रिसर्च की जा सकती है।

वहीं, दिव्य फार्मेसी ने इस नोटिस के जवाब में कहा था कि उन्होंने कभी भी कोरोना की दवा बनाने का दावा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि हाँ हम यह कह सकते हैं कि हमने ऐसी दवाई बनाई है, जिससे कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में को योग गुरु बाबा रामदेव सहित पाँच के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में पाँचों लोगों पर कोरोनिल का भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया गया था।

हिंदू युवती को बुर्का पहनाकर दुबई भेज रहा साबिर अली गिरफ्तार, बजरंग दल ने लगाया लव-जिहाद का आरोप

हिंदू युवती के अपहरण के प्रयास के आरोप में ओडिशा-बंगाल बॉर्डर से एक साबिर अली नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया है। युवती ओडिशा के गंजम (Ganjam) जिले की रहने वाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने साबिर को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अधिकारियों की मदद से 31 अक्टूबर को पकड़ा था।

साबिर बंगाल के मुर्शिदाबाद का निवासी है। इस पर आरोप है कि यह लड़की को बहला-फुसला कर गंजम जिले से दुबई भेजने की फिराक में था। हालाँकि जजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर साबिर अली और लड़की को आरपीएफ अधिकारियों व बजरंग कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप से पकड़ने में सफलता मिली।

लड़की के परिजनों ने कथित तौर पर अपनी शिकायत में युवक पर आरोप लगाया कि साबिर ने उनकी लड़की को झूठी बातें और लालच देकर फँसाया। स्थानीय रिपोर्ट्स में साबिर को गंजम के एक गाँव में शिल्पकारी का काम करने वाला बताया गया है जो कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुबई से लौटा था। लेकिन, शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को वह लड़की को कार में बैठाकर अपने साथ भुवनेश्वर ले जा रहा था। लड़की की पहचान छिपाने के लिए उसने उसे बुर्का भी पहनवा दिया।

साबिर अली लड़की को बुर्का पहनकर पुरी-हावड़ा ट्रेन में बैठाकर भुवनेश्वर से कोलकाता ले जाना चाहता था। मगर, इसी बीच लड़की के परिजनों ने गंजम पुलिस को संपर्क किया। इसके बाद स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ताओं की मदद से आरपीएफ व पुलिस ने दोनों को जजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया। लड़की को बरामद करके उसके परिवार के पास भेज दिया गया है। वहीं साबिर हिरासत में है।

लड़की के घरवालों ने आरोप लगाया था कि साबिर लड़की को कोलकाता से दुबई ले जाने वाला था। इसीलिए पुलिस ने साबिर का पासपोर्ट और दुबई वीजा भी जब्त किया है। ‘ऑर्गनाइजर’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साबिर शादीशुदा है और पहले भी लड़कियों को फँसाने का काम इसी तरह कर चुका है। बजरंग दल के कार्यकर्ता भी इसमें लव जिहाद का आरोप लगाते हुए दावा कर रहे हैं कि साबिर पहले भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है।

CAA विरोधी प्रदर्शनों का हिस्सा था मथुरा के नंदबाबा मंदिर में घुस कर नमाज पढ़ने वाला फैजल खान, लोगों को भड़काया था

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में घुस कर जबरन नमाज पढ़ने वाले फैजल खान के बारे में पता चला है कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहा था। ‘टाइम्स नाउ’ चैनल ने कई तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें फैजल खान को CAA विरोधी प्रदर्शनों को सम्बोधित करते हुए देखा जा सकता है। आशंका जताई जा रही है कि अयोध्या के बाद मथुरा के लिए जो लड़ाई शुरू हुई है, उसी कारण फैजल खान ने नंदबाबा मंदिर में जाकर नमाज पढ़ी।

पता चला है कि फैजल खान ने दिल्ली के शाहीन बाग़ में हुए CAA विरोधी उपद्रवों से लेकर कई अन्य प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया था। उसके संगठन ‘खुदाई ख़िदमतगार’ ने भी CAA के खिलाफ लोगों को भड़काया था, जिसका वो खुद ही संस्थापक है। उसने देश भर में कई जगह CAA विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। इससे अब ये आशंका जताई जा रही है कि मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ने के पीछे इनकी मंशा ठीक नहीं थी।

बता दें कि अब उसने दावा किया है कि जब नमाज का वक्त हो गया तो मंदिर के ही लोगों ने उसे नमाज पढ़ने के लिए जगह दी और खाना भी खिलाया। उसका दावा है कि उसे वहाँ खाना भी खिलाया गया। इसके 3 दिन बाद इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और फैजल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ कर दिल्ली भी लौट चुका था। सोमवार (नवंबर 2, 2020) को उसे जामिया नगर से गिरफ्तार किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि जिस फेसबुक आईडी से तस्वीरें वायरल की गई थी, वह वह पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कट्टरपंथी इस्लामवादियों का मुखर वकील है, जिन्हें हाथरस के रास्ते में पकड़ा गया था। इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में ट्रांसफर होने से पहले इस मामले को बरसाना थाने ने उठाया था। इसके साथ ही इस बात की भी जाँच शुरू कर दी गई है कि तस्वीर को वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी।

चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए The Hindu के खिलाफ आयकर जाँच शुरू, HT पर भी शिकायत दर्ज: रिपोर्ट

अंग्रेजी समाचार पत्र द हिंदू के ख़िलाफ़ आयकर विभाग ने अपनी जाँच शुरू कर दी है। द हिंदू पर चीन के साथ आर्थिक लेन-देन के आरोप हैं। Sputnik की रिपोर्ट के अनुसार, इस मीडिया समूह के ख़िलाफ़ 2 अक्टूबर को शिकायत दर्ज हुई थी। यह शिकायत महाराष्ट्र के ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेट्री (Legal Rights Observatory)’ ने गृह मंत्रालय को भेजी थी।

इस शिकायत में चीन और समाचार पत्र के बीच हुए आर्थिक ट्रांजैक्शन को लेकर जाँच करने की माँग की गई थी। यह माँग द हिंदू अखबार में प्रकाशित चीन एम्बेसी के एक विज्ञापन से संबंधित थी, जिसे अखबार ने पूरे पेज पर पब्लिश किया था, वो भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की 71वीं वर्षगाँठ पर। इस कारनामे को केवल प्रोपेगेंडा की तरह देखा गया था।

18 अक्टूबर को इस संबंध में गृह मंत्रालय ने शिकायत आयकर विभाग को भेजी थी और 30 दिन का समय देकर इस पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा था। दरअसल, एलआरओ की ओर से दायर शिकायत में समाचार पत्र के इस कारनामे को एलएसी पर बढ़े विवाद से जोड़कर देशद्रोही कार्य कहा गया था।

संगठन ने दावा किया था कि मामले में जाँच से ही खुलासा हो पाएगा कि क्या द हिंदू को विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए चीन एम्बेसी से कोई राजस्व प्राप्त हुआ या नहीं? अगर नहीं हुआ तो भी यह परेशानी का कारण है।

हिंदुस्तान टाइम्स के ख़िलाफ़ लिखित शिकायत

एलआरओ (LRO) ने एक लिखित शिकायत करके हिंदुस्तान टाइम्स के ख़िलाफ़ भी जाँच शुरू करने की माँग की है। दरअसल, अंग्रेजी समाचार पत्र ने अपने 30 अक्टूबर के संस्करण में चीन मुखपत्र को जगह दी थी। इसी वजह से संगठन ने यह माँग उठाई। शिकायत में अखबार की इस हरकत को यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के प्रोपेगेंडा के आगे भारतीय हितों को कमतर बताने वाला कहा गया।

भारतीय अखबार चला रहे चीन का प्रोपगेंडा

यहाँ बता दें कि 1 अक्टबूर को द हिंदू ने चीन के लिए एक पूरे पेज में विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह अखबार का तीसरा पृष्ठ था। दिलचस्प चीज यह थी कि द हिंदू ने जिसे अपने अखबार की हार्ड कॉपी में तीसरे पेज पर पब्लिश करवाया, वह पेज डिजिटल वेबासइट पर कहीं नहीं था।

द हिंदू के बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने चाइना डेली वाले चार पृष्ठ के सप्लीमेंट को आठवें पेज पर जगह दी थी। साथ ही अखबार ने डिस्क्लेमर के साथ लिखा था, “यह सप्लीमेंट पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के चाइना डेली द्वारा तैयार किया गया है। इसमें हिंदुस्तान टाइम्स की न्यूज व संपादकीय नहीं शामिल किए गए हैं।”

इस सप्लीमेंट में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बारे में सूचना दी गई थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि कैसे वैश्विक स्तर पर चीन के युवा सक्रियता से काम कर रहे हैं और किस प्रकार विकास के समांतर चीन ने अपनी संस्कृति का संरक्षण किया हुआ है।