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‘आपकी सरकार को 15 मिनट नहीं 60 साल मिले थे..’: 16 साल के अर्जुन और उसकी दादी ने राहुल गाँधी को सिखाई देशभक्ति, देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ ‘कुछ बोलने’ की अपनी जिम्मेदारी के कारण राहुल गाँधी अक्सर कई ऐसी बातें कर जाते हैं जिसे सुनकर किसी के भी मन में सवाल उठने लाजिमी हैं। हाल में उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर उनकी सरकार होती तो 15 मिनट में चीन के सैनिकों को खदेड़ देते। 

अब उनके इस बयान ने तूल पकड़ा हुआ है। जगह-जगह जहाँ उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। वहीं एक 16 साल का बच्चा उन्हें सोशल मीडिया के जरिए समझाने के लिए सामने आया है। इस बच्चे का नाम अर्जुन भाटी है। करीब 49 हजार फॉलोवर्स के साथ ट्विटर पर सक्रिय इस बच्चे ने अपनी दादी के साथ मिल कर राहुल गाँधी को संदेश दिया है। 

अपनी वीडियो शेयर करते हुए अर्जुन ने लिखा, “आदरणीय राहुल गाँधी जी कोशिश करता हूँ कि आपका दिल से सम्मान करूँ। लेकिन जब आपकी बात सुनता हूँ तो दुःख होता है, आप राजनीति करो सवाल करो सरकार की ग़लत बातों का विरोध करो ये सही है लेकिन आपको ख़ुद ही नहीं पता आप नरेन्द्र मोदी जी की ख़िलाफ में देश के लिए भी ग़लत बोलते हो। ऐसा ना करो।”

वीडियो में अर्जुन सीधे राहुल गाँधी से सवाल पूछते हैं। वह कहते हैं, “कल मैंने एक वीडियो देखी जिसमें आपने देश, देश की सेना और आदरणीय प्रधानमंत्री जी के बारे में गलत शब्दों का प्रयोग किया।”

अर्जुन ने कहा, “मुझे भी दुख होता है कि पूरा देश आपकी बातों और भाषणों पर आपका मजाक उड़ाता है, आपके जोक्स बनाता है और आपको ट्रोल करता है। और इसका कारण भी है, क्योंकि देश देश की सेना की तौहीन करते हैं, उसका मनोबल तोड़ते हैं और आप ये भी कहते हैं कि अगर आपकी सरकार को 15 मिनट मिल जाते तो आप चाइना को उखाड़ कर फेंक देते। आप उनको पीछे हटा देते।”

अर्जुन भाटी वीडियो में राहुल से सवाल करते हैं, “आपकी सरकार को तो 60 साल मिले थे फिर आखिर 15 मिनट की ही क्या कमी रह गई? आप हमारी देश की सेना को सबसे कमजोर समझते हैं। सबसे कायर समझते हैं और आप चाइना की तारीफ करते हैं। आप कैसे देशभक्त हैं? आप अपने आपको भारत माँ का सच्चा बेटा कैसे कह सकते हैं? अगर आप रिसर्च करेंगे, तो आपको पता चलेगा कि हमारे देश की सेना सबसे बहादुर है। भारत बहादुर है, था और रहेगा। बेशक मैं अभी 16 साल का हूँ, बेशक मैं छोटा हूँ। लेकिन अगर कोई मेरे देश की तौहीन करेगा, कोई मेरे परिवार के बारे में कुछ बोलेगा तो मैं चुप नहीं बैठूँगा। ऐसा कभी नहीं होता कि कोई कभी किसी के बारे में गलत बोले और वो उसे बड़े होने का इंतजार करे।”

अर्जुन बताते हैं कि उनके दादाजी फौज में थे और उन्होंने जब अपनी दादी को वीडियो दिखाई तो उन्हें भी बहुत गुस्सा आया और उन्हें भी बहुत दुख हुआ। अर्जुन की दादी इस वीडियो में कहती हैं, “राहुल गाँधी देश के लिए बहुत उल्टी सीधी बातें करते हैं। फौजियों को भी कहते हैं। उन्हें यह सब नहीं करना चाहिए। फौजी अपनी जान की बाजी लगाते हैं। अपने बच्चों को छोड़कर सीमा पर रहते हैं। देशभक्ति ऐसे नहीं होती है। आप उल्टी सीधी बात करते हो।”

बता दें कि अर्जुन की वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। देखने वाले उनकी तारीफ और राहुल गाँधी की आलोचना करते नहीं थक रहे औ। एक यूज़र का कहना है, “राहुल गाँधी सुन रहे हो इन्हें, एक बच्चे को भी पता है देशभक्ति व देशप्रेम क्या होता है, सीख लेनी चाहिए आपको इस नौजवान से और शर्म आनी चाहिए आपको खुद पर, आपको इस देश से प्रेम नहीं है ये बात कई बार आप अपने बयान से साबित कर चुके हो.. खूबसूरत बात कही है अर्जुन आपने व दादीजी ने।”

13,000 कर्मचारियों के बाद अब CEO को भी पद से निकाला, कोरोना महामारी के कारण ब्रिटिश एयरवेज संकट में

कोरोना महामारी के कारण कई क्षेत्रों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। हालत ये आ पहुँची है कि ब्रिटिश एयरवेज ने पहले 13,000 नौकरियों को समाप्त करने का ऐलान किया और अब घोषणा कर दी कि वह एक और व्यक्ति की जॉब छीन रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जॉब किसी सामान्य कर्मचारी की नहीं है बल्कि ब्रिटिश एयरवेज (British Airways) के सीईओ एलेक्स क्रूज (Alex Cruz) की है। इसकी जानकारी एयरलाइन्स की पेरेंट कंपनी आईएजी ने सोमवार (अक्टूबर 12, 2020) को दी।

एयरलाइन्स की पेरंट कंपनी आईएजी ने कहा कि ब्रिटिश एयरवेज के अध्यक्ष व सीईओ एलेक्स क्रूज को उनकी भूमिका से तुरंत हटाया जा रहा है। वह इस पद पर साढ़े 4 साल तक कार्यरत थे। उनकी जगह सीन डोएल (Sean Doyle) लेंगे, जो एर लिंगस (Aer Lingus) का संचालन करते हैं और अब यहाँ चेयरमैन पद को भी संभालेंगे।

सीन ने आइरिश एयरलाइन से जुड़ने से पहले ब्रिटिश एयरवेज में करीब दो दशक तक काम किया था। बता दें कि सीन के पद संभालने के बाद एलेक्स बीए के नॉन एग्जीक्यूटिव पद पर तैनात रहेंगे।

कहा जा रहा है कि साल के दूसरे क्वार्टर में एयरलाइन को पैसंजर ट्रैफिक में एक साल पहले के मुकाबले 95% की गिरावट हुई जिससे उन्हें 4.04 बिलियन यूरो का घाटा हुआ। सितंबर में आईएजी के चीफ एग्जिक्यूटिव की भूमिका संभालने वाले लुइस गैलगो ने इस संबंध में कहा –

“हम अपने उद्योग में सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं और मुझे विश्वास है कि आंतरिक पदोन्नति यह सुनिश्तित करेगी कि आईएजी को एक मजबूत स्थिति में पहुँचाने के लिए सही तरह से रखा गया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल माह में ब्रिटिश एयरवेज ने यह घोषणा की थी कि ब्रिटिश एयरवेज एक पुनर्गठन कार्यक्रम के बारे में श्रम संघों को सूचित कर रहा है जो अधिकांश कर्मचारियों को प्रभावित करेगा और जिससे करीब 12,000 लोगों की नौकरियाँ जा सकती है। इस खबर के बाद ब्रिटिश एयरवेज की बहुत आलोचना हुई थी।

IAG, जिसमें स्पैनिश एयरलाइन Iberia भी शामिल है, उसने कहा कि इसकी पहली तिमाही के राजस्व में 4.6 अरब यूरो ( करीब 5 अरब डॉलर) से 13 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे उन्हें 535 करोड़ यूरो (579 करो़ड़ यूरो) का घाटा हुआ। एयरलाइन समूह ने चेतावनी दी थी कि दूसरी तिमाही में नुकसान काफी खराब होगा और यह उम्मीद की जाती है कि 2019 में यात्रियों की माँग को भरने में कई साल (2023 तक) लगेंगे।

उस दौरान ब्रिटिश एयरवेज के सीईओ एलेक्स क्रूज़ने CNN बिजनेस को जारी किए गए एक पत्र में कहा था कि जो हम एक एयरलाइन के रूप में सामना कर रहे हैं, वह अब कोई सामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा कि कल, ब्रिटिश एयरवेज ने हीथ्रो एयरपोर्ट से केवल एक मुट्ठी भर विमान उड़ाया। एक सामान्य दिन में हम 300 से अधिक उड़ान भरते थे।

‘कमलनाथ बड़े उद्योगपति..शिवराज भूखे नंगे’: कॉन्ग्रेस नेता के बयान पर CM चौहान ने कहा- भूखा नंगा हूँ तभी गरीबों का दर्द समझता हूँ

मध्य प्रदेश में उपचुनावों के मद्देनजर राजनीति तेज हो गई है। ऐसे में कई नेताओं के विवादित बयानों की वीडियो वायरल हो रही है। पिछले दिनों कॉन्ग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया इस कारण चर्चा में थे और अब कॉन्ग्रेस नेता दिनेश गुर्जर का नाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ विवादित बयान देने के कारण सामने आया है। कॉन्ग्रेस नेता ने कमलनाथ को ‘बड़ा उद्योगपति’ और राज्य के CM शिवराज सिंह चौहान को ‘भूखा-नंगा’ बताया है।

दिनेश गुर्जर की एक वीडियो आज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह राजनीति करने के चक्कर में न केवल प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए अपशब्द कह रहे हैं बल्कि उस किसान समुदाय पर भी उंगली उठा रहे हैं, जिसका सीधा सम्बन्ध सीएम शिवराज सिंह चौहान की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं।

इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता दिनेश गुर्जर मुख्यमंत्री शिवराज को भूखे नंगे घर का बताते हैं और कमलनाथ की तारीफ करते हुए कहते हैं कि वह दूसरे बड़े उद्योगपति हैं। वह सीएम पर तंज कसते हुए कहते हैं कि पहले शिवराज सिंह चौहान के पास 5 एकड़ की जमीन थी लेकिन अब उनके पास हजारों एकड़ में जमीन है।

उन्हें वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “कमलनाथ दूसरे बड़े उद्योगपति हैं, वो शिवराज सिंह चौहान की तरह भूखे नंगे नहीं है। शिवराज सिंह चौहान के पास पहले 5 एकड़ की जमीन हुआ करती थी लेकिन अब उनके पास हजारों एकड़ में जमीन है।” कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के खून पीने का काम किया, इसलिए आज इतनी जमीन के मालिक हैं।

बता दें कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा खेमे में हड़कंप मच गया है। एक ओर जहाँ सोशल मीडिया यूजर्स इसे सुनकर चुटकी ले रहे हैं कि अब कमलनाथ को ईडी और इनकम टैक्स का डर सताएगा। वहीं भाजपा नेता इसे देखने के बाद नाराज हैं।

शिवराज सिंह चौहान पर की गई टिप्पणी को सुनने के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “क्या गरीब परिवार में जन्म लेना कोई पाप है और गरीब का दर्द वही जान सकता है जो गरीबी का एहसास कर चुका हो। कमलनाथ जैसे लोग तो सोने की चम्मच लेकर मुँह में पैदा हुए। वे गरीबों का दर्ज क्या जानें? कमलनाथ जैसे उद्योगपति तो केवल गरीब से ज्यादा सलमान और जैकलीन की चिंता रहती है।”

वहीं मध्य प्रदेश की भाजपा ईकाई ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस की सोच पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा मध्यप्रदेश के ट्विटर पर लिखा गया, “यही कॉन्ग्रेस की मानसिकता है, यही इनकी पीड़ा और यही इनकी सोच। एक ‘किसान पुत्र’ कैसे किसी ‘नामी उद्योगपति’ के सामने खड़ा हो सकता है? वो ‘किसान पुत्र’ जो सिर्फ जनता के आगे झुकता हो, जिसका जीवन ही जनसेवा को समर्पित हो। ग़ुलाम मानसिकता के कॉन्ग्रेसियों का असली चेहरा सामने आ गया।”

इस पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “हाँ, मैं भूखे-नंगे परिवार से हूँ, इसलिए उनका दुख-दर्द समझता हूँ। हाँ मैं गरीब हूँ इसी लिए गरीब बेटे-बेटियों को मामा बन पढ़ाता हूँ। गरीब हूँ इसलिए गरीब माँ-बाप की बेटियों का कन्यादान करता हूँ। गरीब हूँ, इसलिए हर गरीब का दर्द समझता हूँ और प्रदेश को समझता हूँ।”

200 km पैदल चल दिल्ली से हाथरस पहुँची 17 साल की लड़की, फँस गई थी मानव तस्करों के बीच

राजधानी दिल्ली में सक्रिय मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक 17 वर्षीय लड़की परेशान अवस्था में मिली। कथित तौर पर लड़की दिल्ली के मानव तस्करों के चंगुल से भाग निकली थी और दिल्ली से हाथरस पहुँचने के लिए तीन दिन तक लगातार 200 किलोमीटर पैदल चलती रही। उसने हाथरस पहुँचने के लिए रास्ते में कुछ लोगों से लिफ्ट भी लिया। 

हाथरस के राहगीर और वहाँ तैनात पुलिस अधिकारियों को गाँव में लड़की को देखने पर कुछ गलत होने का शक हुआ। पुलिस ने जब लड़की से पूछताछ की, तो उसने दिल्ली में मानव तस्करी के नेटवर्क के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए।

हाथरस के एसपी विनीत जायसवाल ने कहा कि लड़की के बारे में पुलिस को सूचित किए जाने के बाद शनिवार रात को लड़की को बचा लिया गया। लड़की ने उन्हें बताया कि वह मध्य प्रदेश में मंडला जिले के तोगल गाँव से है। एक हफ्ते पहले, उसके गाँव का एक व्यक्ति झूठे आश्वासन देकर कम से कम 12 लड़कियों को दिल्ली ले गया था। उन्हें दिल्ली में सिलाई-कढ़ाई का काम मिलेगा, यह झाँसा दिया गया था।

लड़की की गवाही के अनुसार, वह लगभग तीन दिन से पैदल चल रही थी और 200 किलोमीटर की दूरी तय कर हाथरस पहुँची। उसने बताया कि एक व्यक्ति ने रोजगार देने के बहाने लड़कियों को अपने साथ दिल्ली ले जाने का लालच दिया। उसने रास्ते में उन लोगों को किसी शहर में एक कमरे में कई दिनों तक भूखे-प्यासे बँधक बनाकर रखा। इस दौरान लड़कियों को उस शख्स पर शक हुआ तो मौका पाकर लड़कियाँ वहाँ से भाग निकलीं।

विनीत जायसवाल ने आगे कहा कि लड़की सही स्थान नहीं बता पा रही थी, जहाँ उसे और अन्य लड़कियों को बंदी बनाया गया था। उन्होंने कहा कि लड़की परेशान और भूखी थी। वो पिछले तीन दिनों से पैदल चल रही थी। जायसवाल ने यह भी कहा कि मामले में जाँच शुरू कर दी गई है।

एसपी ने कहा कि लड़की को चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया गया है। लड़की ने कहा, “मेरा परिवार बहुत गरीब है और पैसे की जरूरत है। कुछ ग्रामीणों ने उन्हें सलाह दी कि कुछ पैसे के बदले में मुझे कुछ अन्य लड़कियों के साथ दिल्ली भेज दें।

योगी सरकार का पूर्व सैनिकों के लिए 5% आरक्षण का ऐलान, ₹25 लाख से बढ़कर ₹50 लाख होगी बलिदानियों के परिवार को मिल रही आर्थिक मदद

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के पूर्व सैनिकों को अहम पदों पर चयनित होने का बड़ा अवसर दिया है। योगी सरकार ने ऐलान किया है कि ग्रुप ‘B’ के पद पर पूर्व सैनिकों को 5% आरक्षण दिया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से बताया गया कि थल सेना, नौसेना, वायु सेना- तीनों सेवाओं से सेवानिवृत्त और पूर्व सैन्यकर्मी 5% आरक्षण के पात्र होंगे।

यूपी सरकार का इस फैसले पर कहना है कि यह आरक्षण प्रत्येक श्रेणी में क्षैतिज रूप से प्रदान किया जाएगा। इस फैसले से भारतीय सेना के भूतपूर्व अधिकारियों तथा कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और उनके परिवार को प्रभावी संबल प्राप्त होगा।

नौकरी के पात्र होने के लिए, उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक सरकारी प्रवक्ता ने इस पर बताया है कि, यह कदम पूर्व अधिकारियों और कर्मियों को प्रोत्साहित करेगा और उनके परिवारों की आर्थिक रूप से मदद करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भी रक्षा सेवाओं में अधिकांश लोगों को भेजता है और वर्तमान में, राज्य में बड़ी संख्या में पूर्व सैन्यकर्मी रहते हैं।

इसके अलावा यह भी घोषणा हुई कि यूपी के मूल निवासी भारतीय सेना, केंद्रीय अर्द्ध सैन्य बलों/प्रदेशों के अर्द्ध सैन्य बलों के बलिदानियों के परिवार को दी जा रही ₹25 लाख की अनुग्रह आर्थिक सहायता बढ़ाकर ₹50 लाख की गई है।

प्रवक्ता ने बताया कि सरकार वीरगति प्राप्त हुए जवानों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी प्रदान कर रही है। यह निर्णय लिया गया है कि किसी भी रक्षा सेवाओं और अर्धसैनिक बल से जुड़े 1 अप्रैल 2017 के बाद वीरगति प्राप्त हुए सैनिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

इस आशय से संबंधित एक आदेश 19 मार्च, 2018 को जारी किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के शासन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। वहीं योगी सरकार के ट्विटर पर भी जानकारी दी गई कि इससे पहले वीरगति प्राप्त सैनिकों एवं अर्द्धसैनिक बलों के आश्रितों को शासकीय सेवा में लिए जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

‘अजमल की सेना ने हमारी महिलाओं को छुआ, तो उनके लिए सजा-ए-मौत’: लव जिहाद पर असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

भाजपा के वरिष्ठ नेता और असम सरकार में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने रविवार (अक्टूबर 11, 2020) को कहा कि अगर उनकी पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो राज्य सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘कठोर लड़ाई’ शुरू करेगी।

असम में विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित है। डिब्रूगढ़ में भाजपा महिला मोर्चा की एक बैठक में उन्होंने कहा, ‘‘हमें असम की जमीन पर लव जिहाद के खिलाफ एक नई और कड़ी लड़ाई शुरू करनी होगी। अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो हम यह निर्णय लेंगे कि अगर कोई भी लड़का धार्मिक पहचान छुपाता है और असम की बेटियों और महिलाओं पर कुछ भी नकारात्मक टिप्पणी करता है तो उसे कड़ी सजा मिले।” 

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘‘लव जिहाद ने असम की बेटियों के लिए पहाड़ जैसी बड़ी समस्या खड़ी की है। कई लड़कियों की तो तलाक की नौबत आ गई क्योंकि उन्हें गलत नाम बताकर लड़कों ने धोखा दिया।”

बैठक के दौरान ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल पर निशाना साधते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ‘अजमल की सेना’ के पुरुष अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती कर रहे हैं और फिर उनसे शादी कर रहे हैं।

यह दावा करते हुए कि फेसबुक पर अन्य धर्मों की लड़कियाँ ‘अजमल की संस्कृति-सभ्यता’ का शिकार हो रही हैं, उन्होंने कहा, “हमने शपथ ली है कि अगर अजमल की सेना हमारी महिलाओं को छूती है, तो उनके लिए एकमात्र सजा मौत की सजा होगी, इससे कम कुछ भी नहीं।” हम ऐसे संकल्प के साथ काम कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि पूरे देश भर में लव जिहाद के ऐसे तमाम मामले सामने आ चुके हैं जिनमें हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फँसा कर पहले उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया, उनसे निकाह किया गया और फिर या तो उन्हें मार दिया गया या उन्हें साथ रख कर प्रताड़ित किया जाता रहा। 

लव जिहाद कोई काल्पनिक संकल्पना नहीं है बल्कि वास्तव में कट्टरपंथियों की रची गई साजिश का हिस्सा है, जो आज हिंदू समाज के लिए नासूर बन गई है और न जाने कितनी हिंदू लड़कियों की जिंदगी तबाह कर रही है।

‘जमीनी सच्चाई से दूर पार्टी में ऊपर बैठे लोग, चलाते हैं हुक्म’: अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने छोड़ी कॉन्ग्रेस, तमिलनाडु में झटका

नब्बे के दशक की शुरुआत में ही ‘सारे लड़कों की करवा दो शादी’ गाने से चर्चा में आने वाली दक्षिण भारतीय अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपने 6 साल के साथ को तोड़ दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया है। कॉन्ग्रेस में आने से पहले वो 4 सालों तक डीएमके में थीं। जहाँ मई 2010 में करूणानिधि ने उन्हें डीएमके की सदस्यता दिलाई थी, वहीं नवंबर 2010 में सोनिया गाँधी ने उन्हें कॉन्ग्रेस जॉइन कराया था।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र लिख कर खुशबू सुंदर ने अपने इस्तीफे के बारे में सूचित किया है और आरोप लगाया है कि पार्टी में ‘ऊपर बैठे कुछ लोग’ उन पर दबाव बना रहे थे और उन्हें धकेलने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि वो पार्टी में तब आई थीं, जब इसके सबसे बुरे दिन चल रहे थे और इसे 2014 के आम चुनावों में करारी शिकस्त मिली थी।

अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में एक चर्चित चेहरे का जाना पार्टी के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं और कहा जा रहा है कि इसकी घोषणा कभी भी हो सकती है। उन्होंने सोनिया गाँधी को पार्टी में काम करने के हेतु मौका देने के लिए धन्यवाद देते हुए लिखा,

“पार्टी के अंदर ही ऊपर कुछ ऐसे तत्व बैठे हुए हैं, जिनका जमीनी वास्तविकता से कोई संपर्क ही नहीं है और न ही उनकी कोई सार्वजनिक पहचान है। और ऐसे लोग पार्टी में काम करने के तौर-तरीके को लेकर फैसले लेते हैं और हम जैसे उन लोगों पर हुक्म चलाते हैं, जो पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम करना चाहते हैं। हमारे जैसे लोगों को दबाया जा रहा है, पीछे धकेला जा रहा है। कई दिनों तक लम्बी चली सोच-विचार की बृहद प्रक्रिया के बाद मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपना जुड़ाव ख़त्म करने का निर्णय लिया है।”

सोनिया गाँधी के नाम अभिनेत्री खुशबू सुंदर का पत्र (फोटो साभार: India Today)

बता दें कि खुशबू सुंदर एक समय तमिल सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री हुआ करती थीं और उनके नाम पर इडली, राइस केक, झुमकी, साड़ी, शरबत, कॉफी, कॉकटेल सहित कई चीजें बिका करती थीं। वो भारत की पहली अभिनेत्री हैं, जिनके नाम पर फैंस ने एक डेडिकेटेड मंदिर बनवाया था। वो रजनीकांत, कमल हासन, मोहनलाल, गोविंदा, चिरंजीवी और अम्बरीष जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुकी हैं और तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़ व हिंदी की 200 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है।

चीनी सेना से संघर्ष में बलिदानी तिब्बती सैनिक की पत्नी ने बच्चों की शिक्षा के लिए PM मोदी से माँगी मदद

भारतीय सेना के गोपनीय रेजिमेंट के लिए कार्य करने वाले एक तिब्बती सैनिक ने देश के लिए बलिदान दे दिया। चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ के खिलाफ भारत की तरफ से ये किसी तिब्बती सैनिक का पहला ऐसा बलिदान था, जिसकी सार्वजनिक रूप से चर्चा हुई।

जिस पहाड़ी चोटी को 1962 युद्ध में भारत ने खो दिया था, उसे वापस दिलाने में जिन सैनिकों का अहम योगदान था, स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के कमांडो नीमा तेंजिन उनमें से एक थे। एसएफएफ की स्थापना 1962 में चीन से युद्ध के बाद हुई थी और इसमें अधिकतर तिब्बती शरणार्थी सैनिक के रूप में शामिल हैं।

51 वर्षीय नीमा तेंजिन की पैंगोंग झील क्षेत्र के पास 29-30 अगस्त की रात एक बारूदी सुरंग पर पैर पड़ जाने से मौत हो गई थी। भारत-चीन के बीच पिछले 5 महीनों से तनाव चल रहा है और सीमा पर कई स्तर की वार्ताओं के बाद भी कोई परिणाम निकले नहीं हैं। ‘The Epoch Times’ ने लेह के बाहरी इलाके के तिब्बती शरणार्थी कॉलोनी में स्थित बलिदानी सैनिक के घर जाकर परिजनों का हालचाल जाना।

ये जगह वहाँ से 125 मील की दूरी पर है, जहाँ नीमा तेंजिन वीरगति को प्राप्त हुए। नीमा तेंजिन के परिजन धुमुप ताशी ने बताया कि उन्होंने ‘ब्लैक टॉप’ को कब्जे में ले लिया था और अगले मोर्चे को फतह करने के लिए पेट्रोलिंग में लगे हुए थे, उसी में उनकी मृत्यु हुई। बलिदानी सैनिक के घर में 49 दिन का शोक मनाया जा रहा है। उनकी पत्नी नायमा ल्हामो और 14 वर्षीय बेटे तेंजिन दौड रोज की प्रार्थनाओं और अंतिम-संस्कार के बाद होने वाली प्रक्रियाओं में व्यस्त रहते हैं।

परिवार का कहना है कि 1962 में खोए ‘ब्लैक टॉप’ पर फिर से कब्जा जमाने के क्रम में वो बलिदान हुए। उसी सुबह उन्होंने अपनी माँ और पत्नी को फोन कर उन्हें खास ‘श्लोक’ पढ़कर प्रार्थना करने को कहा था। उन्होंने तभी बताया था कि कुछ खतरे हैं और उन्हें एक ‘विशेष कार्य’ हेतु प्रस्थान करना है। अगस्त 30, 2020 को भारतीय सैन्य अधिकारियों ने तिब्बती प्रतिनिधियों के साथ नीमा के घर जाकर परिजनों को उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना दी।

इसके 3 दिन बाद भारतीय तिरंगे (बाद में साथ में तिब्बती झंडे) में लिपटा हुआ उनका शव आया। चीन में तिब्बत के झंडे पर पूर्णरूपेण प्रतिबंध लगा हुआ है। उनके दर्शन के लिए भाजपा के नेता व स्थानीय सांसद भी पहुँचे थे। नीमा तेंजिन ‘स्पेशल फ्रंटियर फोर्स’ के लिए काम करते थे, जिसे ‘विकास रेजिमेंट’ भी कहा जाता है। इस गुरिल्ला दस्ते को 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद गठित किया गया था और ये देहरादून में आधारित है।

भारत-पाकिस्तान में हुए 1971 के युद्ध के दौरान 3000 SFF के जवानों को लगाया गया था। इसी युद्ध के बाद पाकिस्तान से टूट कर बांग्लादेश नामक नए मुल्क का गठन हुआ। इनमें से 56 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। SFF को शुरू में अमेरिकी CIA और फिर भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षित किया गया। नीमा तेंजिन के घर में रोज सुबह-शाम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होती है, जिसमें आसपास के लोग भी जुटते हैं।

‘The Epoch Times’ में वीनस उपाध्याय की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बलिदानी सैनिक 5 साल का बेटा इन चीजों से बेखबर गली में खेलता रहता है, इस बात से अनजान कि वो अब अपने पिता को कभी नहीं देख पाएगा। उनकी 17 साल की बेटी तेंजिन ज़म्पा ने बताया कि उनके पिता ने 36-37 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवाएँ दी हैं वो हमेशा कहा करते थे कि वो भारत और तिब्बत से इतना प्यार करते हैं कि इसके लिए जान भी दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अगले साल ही रिटायर होने वाले थे।

उन्होंने बताया कि वो डॉक्टर बनना चाहती हैं और अगले साल रिटायरमेंट के बाद उनके पिता उनकी शिक्षा के लिए योजना बनाने वाले थे। हाल ही में परिवार ने एक कार खरीदा था और नीमा तेंजिन के वापस आने के बाद उस कार से हिमालय की सुंदरता को देखने की योजना भी बनाई गई थी। उनकी 76 साल की माँ कमरे में स्थित बैठी रहती हैं। उनकी पत्नी ने बताया कि जब वो लोग तिब्बत से हनले स्थित चैंथल आए थे, तब वो गर्भवती थीं और मात्र 22 साल की थीं।

वो उन 1 लाख शरणार्थियों में से एक हैं, जो माओ के आदेश से चीन की सेना द्वारा तिब्बत पर कब्ज़ा के लिए दमनकारी अभियान शुरू किए जाने के बाद भारत आ गए थे। धर्मगुरु दलाई लामा को भी ल्हासा में शरण लेनी पड़ी थी। वो लेह की 11 तिब्बती शरणार्थी कॉलनियों में से एक में रहती हैं। उनके बेटे ने बताया कि नीमा तेंजिन हमेशा कहा करते थे कि न कभी झूठ बोलो और न ही कोई बुरा काम करो।

साथ ही वो सलाह देते थे कि कभी भी ड्रग्स का सेवन नहीं करना चाहिए। उनके बेटे ने बताया कि तेंजिन जब भी घर आते थे, वो उसकी पसंदीदा चीजें खरीद दिया करते थे। पत्नी ने बताया कि घर-परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले उनके पति अब नहीं रहे, ऊपर से उनके छोटे बच्चे भी हैं। उन्होंने कहा कि वो हमेशा अपने बच्चों को कभी हार न मानने और अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने की सलाह देती हैं।

बच्चों की शिक्षा के लिए PM मोदी से माँगी मदद

उनकी पत्नी ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बस इतना ही निवेदन करती हैं कि वो उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पूरी करने में परिवार की सहायता करें। वो चीन को राक्षस बताते हैं और कहती हैं कि उसमे अब जरा भी मानवता नहीं बची है। बता दें कि तिब्बती आस्था के अनुसार, अगर अप्राकृतिक मृत्यु होने पर 49 दिनों के कर्मकांड का विधान है और इस दौरान लोग प्रार्थनाएँ करते हैं। आसपास के लोग भी जुटते हैं और उन्हें खिलाया-पिलाया जाता है।

ज्ञात हो कि नीमा तेंजिन की अंतिम विदाई में भारत और तिब्बत के झंडे साथ-साथ दिखे थे और इस मौके पर लेह में तिब्बत की आज़ादी का भी नारा गूँजा था। इस दौरान लेह में तिब्बती नागरिकों ने वहाँ के स्थानीय गीत गाए थे और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगे थे। नीमा तेंजिन की अंतिम यात्रा में राम माधव जैसे बड़े भाजपा नेता का शामिल होना और उनका ससम्मान अंतिम संस्कार होने चीन के लिए एक कड़ा सन्देश था।

2020 में साधुओं पर हमले के 11 मामले: कहीं जलाकर तो कहीं गोलियों से भूनकर उतारा गया जिन्हें मौत के घाट

पिछले साढ़े छ: सालों में यानी भाजपा के सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यधारा मीडिया में ‘धर्म और जाति’ की खबरें प्रमुखता से दिखाई जाने लगी। केवल हमारे देश में ही नहीं, विदेशों तक में सबको ऐसे केसों के बारे में पता चलने लगा, जहाँ अल्पसंख्यकों पर हमला हुआ।

अब चाहे बुद्धिजीवियों के कारण कहें या राजनेताओं की वजह से, दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों तक को मुस्लिमों के ख़िलाफ साजिश बता दिया गया। इसके अलावा जब-जब कोई अल्पसंख्यक या कोई दलित समुदाय के लोगों पर हमला हुआ, तो उसे फौरन आग की तरह फैलाया गया। वहीं किसी सवर्ण पर हमले की घटना पर हर जगह बस मौन पसरा दिखा। नतीजतन सवर्णों पर हुए हमलों की घटनाओं के बारे में विदेशों में तो छोड़िए, भारत तक में भी अधिकांश लोगों ने आवाज नहीं उठाई।

पुराने मामले छोड़ कर यदि सिर्फ़ साल 2020 की बात करें तो इस वर्ष कई साधुओं व संतों पर हमला हुआ। मगर, केवल पालघर जैसे मामलों को ही मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया, वो भी बड़े सामंजस्य के साथ। कई हमलों को तो मीडिया ने हजारों अनरगल खबरों के बीच में ही दबा दिया या यदि उन्हें कवर भी किया तो किसी छोटे से कॉलम के लिए, वो भी बिना किसी फॉलो अप आदि के। आज हम आपको ऐसे ही कुछ हमलों की जानकारी देने जा रहे हैं जो केवल साल 2020 में ही घटे हैं।

16 जनवरी 2020 को चित्रकूट के बालाजी मंदिर के महंथ अर्जुन दास को कुछ उपद्रवियों ने मार डाला। पुलिस ने इस केस में अलोक पांडे, मंगलदास, राजू मिश्रा व दो अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। रिपोर्ट्स में इस घटना को जमीनी विवाद का अंजाम बताया गया और साथ ही कहा गया कि आरोपितों ने हमले के तीन दिन पहले घटनास्थल की रेकी की थी। इसके बाद आकर महंथ को गोली मारी। गोली लगने से जहाँ महंथ की मृत्यु हो गई वहीं उनके साथी घायल हो गए।

16 अप्रैल 2020, जूना अखाड़ा के दो संतों को हिंसक भीड़ ने अपना निशाना बनाया और पालघर में उनकी लिंचिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। मृतकों की पहचान 70 साल के कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 साल के सुशील गिरी महाराज के रूप में हुई। उनके साथ हिंसक भीड़ ने उनके ड्राइवर को भी मौत के घाट उतारा।

मामले के तूल पकड़ने पर उनके ऊपर तरह तरह के इल्जाम लगाए गए। हालाँकि बाद में जब वीडियो आई तब इस हकीकत का खुलासा कि आखिर कैसे पुलिस की मौजूदगी में हिंसक भीड़ ने बेरहमी ने संतों को मारा। इस पूरे मामले की जाँच में यह भी खुलासा हुआ था कि यह हत्या जानबूझकर की गई और इससे कई राजनैतिक कोण भी जुड़े हुए थे। यह भी अंदाजा लगाया गया कि एनसीपी की शह पर ईसाई मिशनरियों ने इस घटना को अंजाम दिलवाया। 

28 अप्रैल को बुलंदशहर में दो पुजारियों पर हमला हुआ। उनका शव मंदिर के परिसर में क्षत-विक्षत मिला। पुजारियों की पहचान जगदीश उर्फ रंगी दास और शेर सिंह उर्फ सेवा दास के रूप में हुई। रिपोर्ट्स में बताया गया कि उन्होंने मुरारी नाम के व्यक्ति को चोरी करते पकड़ा था। इसी बाद मुरारी ने गुस्से में उन दोनों को धारधार हथियार से मारा और बाद में कई ग्रामीणों ने उसे तलवार के साथ गाँव के बाहर जाते देखा। पुलिस की छानबीन में आरोपित को गाँव से दो किलोमीटर दूर से पकड़ा गया था।

23 मई को महाराष्ट्र के नांदेड़ में दो साधुओं की हत्या हुई। पीड़ितों की पहचान बाल ब्रह्मचारी शिवाचार्य महाराज गुरु और भगवान शिंदे के रूप में हुई। साधुओं को शव घर के बाथरूम से बरामद हुआ। पुलिस रिपोर्ट ने बताया कि कम से कम दो आरोपित चोरी करने के लिए घर में घुसे और जब साधुओं से उनका आमना-सामना हुआ तो चार्जिंग केबल से उनका गला घोंट दिया। इसके बाद आरोपितों ने 69,000 रुपए लूटे, लैपटॉप चोरी किया और बाकी वस्तुएँ भी नहीं छोड़ीं। कुल मिलाकर साधु के कमरे से 1,50,000 रुपए गायब थे। पुलिस ने इस संबंध में साईनाथ सिंघाड़े को गिरफ्तार किया था।

13 जुलाई को मेरठ के अब्दुल्लापुर में एक शिव मंदिर के केयरटेकर कांति प्रसाद से मारपीट का मामला सामने आया। कांति प्रसाद की गलती बस यह थी कि वह भगवा धारण करते थे और इसी को देखकर एक ग्रामीण अनस कुरैशी उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करता था। 13 जुलाई को जब कांति प्रसाद बिजली का बिल जमा कराकर लौट रहे थे, तब भी अनस ने यही किया और उन्हें बीच सड़क पर मारना शुरू कर दिया।

इस बीच किसी तरह कांति प्रसाद उससे बच कर अनस के घर पहुँचे, लेकिन वहाँ भी अनस ने पीछे से आकर उन पर हमला कर दिया। जब कांति प्रसाद के घरवालों को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई और पिता को अस्पताल में भर्ती करवाया। हालाँकि हालत गंभीर होने के कारण कांति प्रसाद बच न सके और अगले दिन उन्होंने दम तोड़ दिया।

23 जुलाई को यूपी के एक मंदिर में 22 वर्षीय साधु का शव पेड़ से लटका पाया। रिपोर्ट्स में उनकी पहचान बालयोगी सत्येंद्र आनंद सरस्वती बताई गई, जो हिमाचल प्रदेश से सुल्तानुपर आए थे। वह छतौना गाँव के वीर बाबा मंदिर में लंबे समय से रह रहे थे। जब पुलिस को उनकी अप्राकृतिक मृत्यु का मालूम चला तो शव को हिरासत में ले लिया गया। हालाँकि कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या है।

23 अगस्त को बिहार के लखीसराय में नक्सलियों ने नीरज झा को किडनैप किया और 1 करोड़ की फिरौती माँगी। जब परिवार वालों को पुजारी का शव मिला तो वो इतनी बुरी तरह से क्षत विक्षत था कि परिवार वाले उन्हें पहचान ही नहीं पाए। बाद में उनके भाई पंकज झा ने जनेऊ के कारण उन्हें पहचाना।

11 सिंतबर को मंड्या शहर के बाहरी इलाके में आरकेश्वर मंदिर में 3 पुजारियों की हत्या की गई। पुलिस ने इनकी पहचान गणेश, प्रकाश, आनंद के रूप में की। तीनों का शव पुलिस को खून से लथपथ बरामद हुआ। रिपोर्ट्स से पता चला कि पुजारियों का सिर पत्थर से कुचला गया था। हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के बाद मंदिर में लूटपाट भी की और दानपेटी में बस कुछ सिक्के छोड़े। 15 सितंबर को पाँचों हमलावरों को पकड़ा गया। इनकी पहचान अभिजीत, रघु, विजि, मंजा और गाँधी के रूप में हुई।

8 अक्टूबर को राजस्थान के करौली जिले के बोकना गाँव में 6 लोगों ने एक मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण की कोशिश करते हुए 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जलाके मार डाला । उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल में गंभीर हालात में भर्ती करवाया गया और 9 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।

10 अक्टूबर को राम जानकी मंदिर के तिर्रे मनोरमा गाँव में इटियाथोक थाने में पुजारी को गोली मारी गई। यह वारदात भी जमीन विवाद पर हुई। अभी उनका इलाज लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि पुजारी सम्राट दास जिस राम जानकी मंदिर के पुजारी थे, उसकी जमीन पर भू माफियों की नजर थी। उन पर इस बाबत पिछले साल भी हमला हुआ ता। पुलिस ने अब इस संबंध में एफआईआर रजिस्टर कर ली है और अपनी पड़ताल भी शुरू कर दी है।  

‘क्रिकेटर राशिद खान की पत्नी हैं अनुष्का शर्मा?’: IndiaToday ने खुद बनाया झूठ, खुद कर डाला फैक्ट-चेक

आजकल फैक्ट-चेक का चलन है और अगर कुछ ना मिले तो पहले एक झूठ बनाया जाता है और फिर उसके फैक्ट-चेक कर के दिखाया जाता है कि ये झूठ है। और ‘इंडिया टुडे’ ने तो पूरा का पूरा ‘एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AWFA)’ बना रखा है, जिसके माध्यम से वो खुद को सबसे बड़ा फैक्ट-चेकर प्रदर्शित करते हैं। अब उन्होंने राशिद खान और अनुष्का शर्मा को लेकर एक अजीबोगरीब फैक्ट-चेक किया है।

दरअसल, ‘इंडिया टुडे’ ने दावा किया कि गूगल पर राशिद खान की पत्नी का नाम सर्च करने पर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का नाम दिखाया जाता है। बता दें कि जहाँ राशिद खान अफगानिस्तान के लेग स्पिनर हैं, वहीं अनुष्का शर्मा हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की पत्नी हैं। हाल ही में दोनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीर डाल कर अनुष्का की प्रेग्नेंसी की सूचना भी फैंस को दी थी।

‘इंडिया टुडे’ का नया फैक्ट-चेक

साथ ही ‘इंडिया टुडे’ ने अपने फैक्ट-चेक में बताया कि चूँकि राशिद खान ने 2018 के एक चैट सेशन में बताया था कि अनुष्का शर्मा और प्रीति जिंटा उनकी पसंदीदा अभिनेत्री हैं, इसीलिए गूगल सर्च में ऐसा दिखाया जा रहा है। फिर बताया गया है कि ‘राशिद खान की फेवरिट अभिनेत्री हैं अनुष्का शर्मा’ जैसी बातें लिख कर कई खबरें प्रकाशित हुईं, जिसके बाद गूगल अनुष्का को राशिद की पत्नी के रूप में वेब रिजल्ट्स दिखाने लगा।

कीवर्ड्स डाल कर ‘इंडिया टुडे’ कर गया खेल

हालाँकि, जब हमने गूगल पर ‘Rahid Khan Wife’ टाइप कर के सर्च किया तो हमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला। परिणाम में सबसे ऊपर ‘Google search shows Afghan cricketer Rashid Khan’s wife is Anushka Sharma’ लिखा मिला और साथ ही ‘इंडिया टुडे’ का वो लेख भी, जिसमें से ये पंक्ति उठाई गई थी। इससे पता चलता है कि ट्रैफिक, पब्लिसिटी और कुछ भी फैक्ट-चेक करने की ललक के कारण ऐसा किया गया। जानबूझ कर इसमें अनुष्का शर्मा का नाम डाला गया।

इसके बाद मीडिया संस्थान पर कई लोगों ने निशाना साधते हुए ये भी दावा किया कि ‘दलाल’ लिखने पर गूगल राहुल कँवल और राजदीप सरदेसाई का नाम दिखाता है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस तरह की चीजों की पुष्टि नहीं करता है। इस तरह से ‘इंडिया टुडे’ ने फैक्ट चेक के नाम पर क्रिकेट और बॉलीवुड की दो चर्चित हस्तियों का नाम लेकर ट्रैफिक बटोरने की कोशिश की है, और इसे फैक्ट-चेक का रूप दे दिया है।