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कुरान फाड़ने के बाद अब अर्मिन नवाबी ने किया हिन्दू देवी का अपमान, लोगों ने कहा- यह नास्तिकता नहीं बलात्कारी मानसिकता है

कुरान के पन्नों पर थूकने और उन्हें फाड़ने के एक दिन बाद एथीस्ट रिपब्लिक के संस्थापक अर्मिन नवाबी ने हिन्दुओं की आस्था को अपमानित करने का काम किया है। अर्मिन नवाबी ने हिन्दुओं की आराध्य माँ काली की एक भद्दी और बेहूदा तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है।

अर्मिन नवाबी ने ट्विटर पर माँ काली की एक बेहूदा तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, “मैं हिन्दू धर्म से प्यार करने। मुझे पहले नहीं पता था कि तुम्हारी देवियाँ इतनी कामुक हैं। कोई व्यक्ति कोई और धर्म क्यों अपनाएगा?”

जिस तरह से इस तस्वीर में देवी काली को चित्रित किया गया है और अर्मिन नवाबी ने सन्देश दिया है, उस ओर कई लोगों ने आपत्ति जताई है कि यह नास्तिकता नहीं बल्कि बलात्कारी मानसिकता को दर्शाता है। एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा है कि अर्मिन नवाबी यह सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह भी जानता है कि उसे हिन्दुओं से कभी भी जान का खतरा नहीं हो सकता। इस ट्विटर यूजर ने लिखा है कि उसे इस बात पर गर्व भी है, और अर्मिन नवाबी अब हिन्दुओं को सिर्फ इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह कुरान को अपमानित करने के बाद मुस्लिम्स का ध्यान भटकना चाहता है।

गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले अर्मिन नवाबी, जो कि एक पूर्व ईरानी मुस्लिम और AtheistRepublic.com (एथीस्ट रिपब्लिक) का संस्थापक है, ने मुस्लिमों की पाक किताब कुरान पर थूककर उसे फाड़ दिया था और साथ ही लोगों से अपनी निजी जिम्मेदारी पर ऐसा ही करने की सलाह भी दी थी।

अर्मिन नवाबी ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को ट्विटर पर एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें वह कुरान के पन्नों पर थूकते हैं और फिर उसके पन्ने फाड़ देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक हैशटैग लिखा है – “कुरान का अपमान करो।”

अर्मिन नवाबी का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब स्वीडन और नॉर्वे मुस्लिमों द्वारा भड़काए गए दंगों का शिकार हुए और इसी समय पर पेरिस की शार्ली एब्दो मैगजीन पर वर्ष 2015 में हुए आतंकी हमले की सुनवाई शुरू हो रही है।

USISPF को मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के फायदे गिनाए, कहा- भारत दुनिया के लिए निवेश का सबसे अच्छा केंद्र

पीएम नरेंद्र मोदी आज भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी के लिए कार्य करने वाले गैर लाभकारी संगठन ‘अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी फोरम’ (USISPF) के तीसरे वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं।

31 अगस्त से शुरू हुए इस पाँच दिवसीय शिखर सम्मेलन की इस बार की थीम ‘यूएस-इंडिया: नेविगेटिंग न्यू चैलेंजेज़’ (US-India Navigating New Challenges) है। USISPF एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी के लिए काम करता है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे हैं।

बृहस्पतिवार (सितम्बर 03, 2020) शाम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और CDS बिपिन रावत ने भी समिट को सम्बोधित किया। CDS रावत ने USSIPF के कार्यक्रम में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर कहा कि हमें ताजा हालात से निपटने की और आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने की तैयारी करने की जरूरत है। इसके साथ ही CDS रावत ने पाकिस्तान को भी चेताते हुए कहा कि किसी भी तरह का दुस्साहस उसके लिए ठीक नहीं होगा।

प्रमुख बातें –

  1. USISPF विविधता से भरे लोगों को एक साथ लेकर आया था। इसका काम प्रशंसनीय है।
  2. जब 2020 शुरू हो रहा था तो किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसी महामारी आएगी। जनवरी में हमारे पास कोरोना का 1 टेस्टिंग लैब था, अभी देशभर में 1600 टेस्टिंग लैब हैं। हमारे यहाँ डेथ रेट दुनियाभर के मुकाबले काफी कम है। हम अभी दुनिया के दूसरे सबसे बड़े पीपीई किट के निर्माता हैं।
  3. पूरे कोरोना पीरियड के दौरान लॉकडाउन के समय भारत सरकार का एक ही मकसद था – गरीबों की रक्षा करना। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पूरे विश्व की सबसे बड़ी समर्थन प्रणाली है। इसके तहत लगभग 800 मिलियन लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया।
  4. भारत में 80 करोड़ लोगों को फ्री में अनाज दिया जा रहा है। फ्री कुकिंग गैस 80 मिलियन लोगों को दिया जा रहा है।
  5. महामारी ने कई चीजों के प्रभावित किया है, लेकिन भारत के लोगों की आकांक्षाओं को यह प्रभावित नहीं कर सका है।
  6. वर्तमान स्थिति एक नई मानसिकता की माँग करती है। एक मानसिकता जिसका दृष्टिकोण विकास के लिए मानव केंद्रित हो।
  7. हालिया महीनों में काफी सारे सुधार हुए हैं। इनसे बिजनस को आसान बनाया है। विश्व के सबसे बड़ें हाउसिंग प्रोग्राम पर काम जारी है। रेल, रोड और एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी काम हो रहा है।
  8. हम बेहतरीन फाइनेंसियल टेक्नॉलजी का इस्तेमाल लोगों तक बैंकिंग, क्रेडिट, डिजिटल पेमेंट और इंश्योरेंस की सुविधा पहुँचाने के लिए कर रहे हैं।
  9. इस महामारी ने दुनिया को दिखाया है कि ग्लोबल सप्लाई चैन को विकसित करने में केवल कॉस्ट ही नहीं बल्कि ट्रस्ट भी महत्वपूर्ण है।
  10. हमारा टैक्स सिस्टम पारदर्शी है। हमारा सिस्टम ईमानदार टैक्सपेयर्स को आगे बढ़ाया है। हमारा जीएसटी एकीकृत है।
  11. भारत अमेरिकी संबंध को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हमने अपने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत किया। आज दुनिया हम पर भरोसा कर रही है। भारत दुनिया के लिए निवेश का सबसे अच्छा केंद्र है।
  12. 1.3 अरब भारतीय ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मिशन में जुटे हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ लोकल और ग्लोबल के साथ मर्ज करता है।
  13. आगे का रास्ता पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में अवसरों से भरा पड़ा है। इसमें कोर इकनॉनमिक सेक्टर और सोशल सेक्टर भी शामिल है। हाल ही में रेलवे, डिफेंस, स्पेस और अटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र को खोला गया।
  14. भारत में चुनौतियों के लिए आपके पास एक सरकार है जो परिणाम देने में विश्वास रखती है जिसके लिए जीवन जीने में आसानी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना व्यवसाय करने में आसानी। आप एक युवा देश को देख रहे हैं जिसकी 65% आबादी 35 वर्ष से कम है।
  15. 2019 में भारत में FDI 20% बढ़ा, ऐसा ऐसे वक्त में हुआ जब दुनिया में इसमें फीसदी की गिरावट देखी गई है। यह हमारी FDI स्कीम की सफलता को दिखाता है

‘Kill नरेंद्र मोदी’: पीएम की हत्या की रची जा रही साजिश, NIA ने गृह मंत्रालय को सतर्क किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या को लेकर बड़ी साजिश रची जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में राष्ट्रीय जॉंच एजेंसी (NIA) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर आगाह किया है। गृह मंत्रालय ने इससे एसपीजी को अवगत कराया है जिस पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

एनआईए को धमकी भरे कुछ ई-मेल मिले हैं। इनमें PM मोदी की हत्या की बात कही गई है। इस ई मेल में 3 शब्द लिखे गए हैं- किल नरेंद्र मोदी (Kill Narendra Modi)। फिलहाल ई-मेल के कंटेंट की जाँच की जा रही है।

टाइम्स नाउ की रिपार्ट के अनुसार, एनआईए ने गृह मंत्रालय एक पत्र लिखकर पीएम मोदी को हत्या वाले ई-मेल की जानकारी दी है। एजेंसी ने अपने पत्र में लिखा, “एनआईए को एक ईमेल आईडी मिली है जिसमें कुछ गणमान्य लोगों की हत्या की बात कही गई है। ई-मेल में मौजूद कंटेंट इसकी तस्दीक करते हैं। इस पत्र के साथ ही ई-मेल की कॉपी भी लगाई गई है। इस मामले में एनआईए ने उचित कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया है।

बता दें यह मेल 8 अगस्त को जारी किया गया था। जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के साथ प्रधानमंत्री के जीवन पर भी सीधे खतरे की बात की गई है। ई-मेल का पता लगने के बाद सुरक्षा एजेन्सियाँ चौकन्नी हो गई हैं। खतरे के मद्देनजर पीएम मोदी की सुरक्षा कवच को बढ़ा दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार एनआईए ने इस मामले में अपनी ओर से किसी भी प्रकार से की जाँच नहीं की है। बता दें इस पूरे मामले से गृह मंत्रालय ने एसपीजी को अवगत कराया है। स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ही पीएम मोदी की सुरक्षा करता है।

एनआईए कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के भी संपर्क में है। इनमें रॉ, खुफिया ब्यूरो (आईबी), डिफेंस इंटेलिजेंस के प्रतिनिधि शामिल हैं। गौरतलब है कि यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पीएम मोदी के प्रति नफरत की राजनीतिक को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-मेल का खुलासा होने के बाद बाहरी तत्वों पर सख्ती से नजर रखी जा रही है। आतंकी हमलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियॉं पहले ही अलर्ट कर चुकी हैं।

सुशांत को मानसिक बीमार साबित करना चाहता है इंडिया टुडे? बगैर लाइसेंस वाली मनोवैज्ञानिक का बयान लीक किया

इंडिया टुडे ने एक बार फिर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को मानसिक तौर पर अस्वस्थ दिखाने की कोशिश की है। उसने सुशांत के कथित मनोवैज्ञानिक सुसैन वॉकर (Susan Walker) के उन बयानों की रिपोर्ट सार्वजनिक की है, जो वॉकर ने मुंबई पुलिस को दिए थे। उन्होंने तीन मनोचिकित्सकों और एक मनोवैज्ञानिक के बयान दर्ज किए हैं, जो कथित तौर पर सुशांत का इलाज कर रहे थे।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत को ‘बायपोलर डिसऑर्डर’ था, और उनकी हालत अक्टूबर और नवंबर 2019 में बिगड़ गई थी। कथित तौर पर, वॉकर ने कहा कि रिया ने बताया कि सुशांत के विचार आत्मघाती हैं। वह नवंबर 2019 में पहली बार सुशांत से मिलीं। हालाँकि पहली अपॉइंटमेंट रद्द कर दी गई थी। जब वॉकर को सुशांत की स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने रिया को तुरंत सलाह दी।

सुशांत से बात करने के बाद, उसने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें गंभीर बेचैनी (एंग्जाइटी) होती है। यहाँ तक ​​कि दवाइयाँ भी काम नहीं कर रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि जब वह युवा थे, तब ‘अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर’ (एडीएचडी) के लिए दवा लेते थे।

उन्होंने जिक्र किया है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की माँ की भी घबराहट और बेचैनी के कारण ही मृत्यु हुई थी। वॉकर ने कहा कि उसे यकीन है कि सुशांत बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि उन्हें इसके इलाज के के लिए डॉ. परवीन दादाचंजी से मिलना चाहिए।

अपने बयान में, उन्होंने कहा कि सुशांत बिना किसी कारण के रोते थे। वह मूडी प्रवृति के थे और अक्सर ड्राइविंग के दौरान ओवर स्पीडिंग करते थे। जब वो अपनी इस बीमारी के चरम पर थे, तब वह लगातार 4-5 दिनों तक सो नहीं पा रहे थे। जून 07, 2020 को, रिया चक्रवर्ती के सुशांत के जाने से एक दिन पहले, उसने डॉ. वॉकर को फोन किया और राजपूत के बिगड़ते स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। उसने उन्हें 8 जून का समय दिया, लेकिन रिया ने बाद में अपॉइंटमेंट रद्द कर दिया।

बयान और रिपोर्ट के साथ समस्याएँ

‘मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017’ के अनुसार, असाधारण परिस्थितियों में, जैसे कि जीवन या मृत्यु, या न्यायालय के आदेशों के सम्बन्ध में, किसी व्यक्ति की बीमारी के विवरण को बिना पूर्व अनुमति के इस्तेमाल करना या प्रकाशित करना गैरकानूनी है। समाचार एजेंसी द्वारा प्राप्त बयान को ‘इंडिया टुडे’ द्वारा प्रकाशित किया जाना अनैतिक और गैरकानूनी था।

सुसैन वॉकर एक क़्वालिफ़ाइड मनोचिकित्सक नहीं, बल्कि एक कंसल्टिंग मनोवैज्ञानिक है। उन्हें पेशेवर और कानूनी रूप से एक संभावित मानसिक विकार वाले रोगियों का इलाज करने की अनुमति नहीं है। वह दवाओं को बदलने, या जाँच के बारे में जानकारी नहीं दे सकती हैं। उन्होंने सुशांत को एक क्लिनिकल चेकअप के लिए जाने के लिए कहा, जो वह नहीं कर सकती। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि क्या वह सुशांत की दवाओं या मनोचिकित्सक को बदलने वाली थी?

अपने बयान में, उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि जब से सुशांत सिंह ने दवाइयाँ लेनी बंद कर दी है, तब से बायपोलर डिसऑर्डर व्यापक स्तर तक बढ़ गया था और हो सकता है कि उन्हें बीमारी से छुटकारा मिल गया हो, क्योंकि दवाइयाँ नहीं लेने से यह बीमारी हर बार बढ़ती रहती है। मेरे अनुभव के अनुसार यह और भी गंभीर हो जाता है।”

उन्होंने बार-बार सुशांत को बताया कि उसे ठीक किया जा सकता है, लेकिन बायपोलर डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है, और मरीज को जीवन भर इस बीमारी के नियमित इलाज से गुजरना पड़ता है। रोग का कोई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षण, उचित दवा और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ इसका इलाज किया जा सकता है, जैसा कि डॉक्टर द्वारा राय दी गई है।

इंडिया टुडे ने भी सुसैन वॉकर के हवाले से कहा कि रिया चक्रवर्ती ने उन्हें बताया था कि सुशांत को आत्मघाती विचार आते हैं। ऐसे समय में, जब रिया सुशांत की मौत के मामले में जाँच का सामना कर रही है और उनकी भूमिका पर सवाल उठाया गया है, इंडिया टुडे रिया चक्रवर्ती के दावों के आधार पर फिर से यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि सुशांत मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। हाल ही में रिया चक्रवर्ती को राजदीप सरदेसाई के साथ दिए गए कुख्यात इंटरव्यू में कई मुद्दों पर झूठ बोलते हुए पाया गया है, और इसलिए उनके दावे वर्तमान में विश्वसनीय नहीं हैं।

गौरतलब है कि इस इंटरव्यू में भी राजदीप सरदेसाई ने सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया था। उन्होंने इसे इस तरह पेश किया जैसे मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य हो। जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। सुशांत पर मानसिक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है। इसके अलावा वॉकर का ऐसा दावा है, जिनके पास ऐसे मामलों को देखने के लिए उचित योग्यता तक नहीं है।

चीन के साथ पाकिस्तान को भी CDS जनरल बिपिन रावत ने चेताया, कहा- भारी नुकसान झेलना पड़ेगा

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ तनाव के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने पाकिस्तान को भी चेताया है। उन्होंने गुरुवार को पाकिस्तान के मंसूबों को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि हम सीमा पर शांति चाहते हैं। पर चीन की उकसावे वाली कार्रवाईयों से निपटने में सक्षम हैं। हमारे तीनों अंग (थल सेना, वायु सेना और जल सेना) खतरों से निपटने में समर्थ हैं।

भारत-अमेरिका रणनीति साझेदारी मंच से जनरल रावत ने पाकिस्तान की तरफ से की जा रही नापाक कोशिशों के बारे में बताते हुए कहा, “पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) छेड़ा हुआ है। वह जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ के अलावा भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद फैलाने की कोशिश कर रहा है। वह उत्तरी सीमा पर हमारे लिए कुछ मुश्किल खड़ा करना चाहता है, लेकिन वह इसमें नाकाम होगा और उसे भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”

सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि हमने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उभरते खतरों से निपटने की रणनीति की परिकल्पना कर ली है। भारत को उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई का खतरा है। इसका पाकिस्तान फायदा उठा सकता है और हमारे लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। भारतीय सशस्त्र बलों को फौरी संकट से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए और साथ ही भविष्य के लिए भी तैयारी करनी चाहिए।

जनरल रावत ने कहा कि चीन की ओर से पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को दी जा रही आर्थिक सहायता और पाक को लगातार उपलब्ध कराया जा रहा सैन्य व राजनयिक सहयोग यह माँग करता है कि हम उच्च स्तर की तैयारियाँ करें और रक्षा योजना के बारे में हमें विचार करना चाहिए।

जनरल रावत ने भारत-अमेरिका के संबंधों को लेकर कहा, “जहाँ तक भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की बात है तो 2+2 वार्ता से यह मजबूत हुआ है। दोनों देश स्वतंत्र हिंद प्रशांत क्षेत्र की वकालत करते हैं। इस साल फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दरम्यान दोनों देशों के बीच 3 अरब डॉलर के रक्षा समझौते हुए थे। इसके तहत भारत अपाचे हेलिकॉप्टर, चिनूक जैसे अमेरिकी रक्षा उपकरण हासिल करेगा। अभी हम अमेरिका से निरंतर सूचना साझा करने की उम्मीद करते हैं।”

लोक कल्याण के लिए ‘दानवीर’ बने PM मोदी: बचत और उपहारों की नीलामी से मिले 103 करोड़ रुपए किए दान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक कल्याण के उद्देश्य से विभिन्न माध्यमों से दिए गए दान की कुल राशि 103 करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी हैं। दान की गई रकम पीएम मोदी ने अपनी बचत और उन्हें मिले उपहारों की नीलामी से इकट्ठा की थी। यह बात अक्सर देखी गई है कि जब पीएम मोदी सार्वजनिक कारणों से दान करते हैं तो उनके दिल में एक उदारता होती है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में पीएम केयर्स फंड के लिए 2.25 लाख रुपए दान किया था। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए मार्च में पीएम केयर्स की स्थापना की गई थी, तब पीएम मोदी ने शुरुआती फंड के तहत 2.25 लाख रुपए का योगदान दिया था। 31 मार्च, 2020 तक फंड में कुल 30,76,62,56,047 रुपए जमा हो गए थे। उनके द्वारा दिए गए दान की कुल राशि और उनके द्वारा प्राप्त उपहार की नीलामी से प्राप्त धनराशि 103 करोड़ रुपए से अधिक है।

पीएम मोदी ने अपनी बचत में से बालिकाओं की शिक्षा से लेकर गंगा की सफाई जैसे कार्यों के लिए दान दिया है। पिछले साल 2019 में कुंभ मेले में सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाए गए कोष में प्रधानमंत्री ने अपनी निजी बचत में से 21 लाख रुपए दान दिए थे। वहीं मोदी ने 2014 में गुजरात सरकार में कार्यरत एक कर्मचारी की बेटी की शादी के लिए भी अपनी निजी बचत में से 21 लाख रुपए दान किए थे।

दक्षिण कोरिया में 2019 में सियोल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री ने पुरस्कार में मिली 1.30 करोड़ रुपए की पूरी राशि को नमामि गंगे परियोजना में दान दे दिया था। इस परियोजना का उद्देश्य गंगा की सफाई करना है। वहीं प्रधानमंत्री ने 2015 में उपहारों की नीलामी शुरू की थी, जिससे प्राप्त 8.35 करोड़ रुपए की राशि को भी नमामि गंगे परियोजना में दान दे दिया था।

मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर मिले उपहारों की नीलामी से प्राप्त 89.96 करोड़ रुपए कन्या केलवणी कोष’ में दान दे दिए थे, जो कि बालिकाओं की शिक्षा के लिए शुरू की गई एक योजना है। वहीं हाल ही में उन्होंने बतौर पीएम मिले तमाम मोमेंटोज की नीलामी कर 3.40 करोड़ उसे नमामी गंगे परियोजना मे दान कर दिया था।

अब मुख्तार अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे पर कार्रवाई, मऊ में एक करोड़ से अधिक की संपत्ति सील

बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गैंग पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने गुरुवार (3 सितंबर, 2020) को अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे सुरेश सिंह की अवैध रूप से कमाई संपत्ति पर शिकंजा कसा। मऊ में उसकी एक करोड़ 5 लाख 40 हजार मूल्य की उसकी संपत्ति जब्त की गई है। इसमें कई वाहन शामिल हैं।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से मुख्तार गिरोह के सदस्यों में हड़कंप मचा हुआ है। दो दिन पहले भी गैंगस्टर एक्ट के तहत सुरेश सिंह की चार बसों को जब्त किया गया था, जिसकी कीमत 86 लाख रुपए है। अब तक की कार्रवाई को मिलाकर 1 करोड़ 91 लाख रुपए की वाहन को जब्त किया गया है।

सुरेश सिंह की जब्त संपत्ति में ये वाहन शामिल है:-

  1. बस नंबर यूपी 54टी 1566. (21 लाख)
  2. हुंडई क्रेटा यूपी 54एवी 5004. (17 लाख)
  3. टाटा इंडिका यूपी 54 टी 5004. (09 लाख)
  4. हीरो ग्लैमर यूपी 54 एन 3444. (90 हजार)
  5. हीरो ग्लैमर यूपी 54 क्यू 4144. (80 हजार)
  6. बस यूपी 54 डी 1399. (23 लाख)
  7. बस यूपी 61 एटी 0702. (23 लाख)
  8. स्प्लेंडर यूपी 54 जे 1703. (70 हजार)
  9. स्कार्पियो यूपी 54 जे 5004. (10 लाख)

इससे पहले 4 बसों को जब्त किया गया था:-

  1. बस नंबर यूपी 54टी 0874
  2. बस नंबर यूपी 54टी 2995
  3. बस नंबर यूपी 54टी 0360
  4. बस नंबर यूपी 54टी 0137

पुलिस अधीक्षक ने सुरेश सिंह ने बताया कि वह वसूली गैंग डी-32 का गुर्गा है। मऊ में लोग उसे वसूली माफिया के रूप में पहचानते हैं। उसके विरुद्ध थाना सरायलखंसी पुलिस द्वारा बीती 31 मई को 3(1) गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही की गई थी। फिलहाल वह जेल में बंद है।

गौरतलब है इससे पहले मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलवाया था। इसकी कुल कीमत करीब 40 लाख रुपए थी। पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया था।

वहीं लखनऊ प्रशासन ने अगस्त 27 को माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया था। इसके बाद खबरों में बताया गया था कि अवैध निर्माण को गिराने का खर्च भी यूपी सरकार मुख्तार अंसारी से ही वसूलेगी। अवैध आवासीय परिसर को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था।

बता दें, इन सबसे पूर्व यूपी पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस भी निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाया था।

पालघर में साधुओं की लिंचिंग करने वाली भीड़ में मौजूद थे NCP नेता: फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य का दावा

महाराष्ट्र के पालघर में हुई साधुओं की हत्या के मामले में एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के सदस्य संतोष जनाठे (Santosh Jnathe) का दावा है कि एक एनसीपी नेता को उस भीड़ के बीच देखा गया था, जो पालघर में साधुओं की लिंचिंग की घटना में शामिल थे। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिस NCP नेता को इस भीड़ हिंसा के बीच पाया है, उसका नाम काशीनाथ चौधरी है।

काशीनाथ चौधरी शरद पवार की ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी’ का जिला सदस्य है। उन पर आरोप लगे हैं कि साधुओं की लिंचिंग कर उनकी निर्मम हत्या करने वाली भीड़ में वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य व उसके साथ विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी शामिल थे।

इस भीड़ में एनसीपी और सीपीएम नेताओं की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। एनसीपी महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी है और शिवसेना के साथ गठबंधन में मिल कर सरकार चला रही है।

फैक्ट फाइंडिंग समिति पहले भी इस निष्कर्ष पर पहुँच चुकी है कि क्षेत्र में काम करने वाले वामपंथी संगठन आदिवासियों के मन में सरकार और हिंदू धर्म गुरुओं, साधुओं और सन्यासियों के खिलाफ नफरत पैदा कर रहे हैं।

उनकी जाँच से यह निष्कर्ष निकला था कि कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया, काश्तकारी संगठन, भूमिसेना, आदिवासी एकता परिषद, सीपीएम जैसे संगठनों के बढ़ते प्रभाव के साथ क्षेत्र में बढ़ती हिंसा, साधुओं की हत्या के रूप में सामने आई थी।

इसके साथ ही इस केस को अभी तक भी सीबीआई के पास नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस केस में अपनी क्षेत्रीय गौरव को आगे रखा है और वह इसलिए भी नहीं चाहती कि यह केस सीबीआई के पास ट्रांसफर हो क्योंकि सीबीआई गृह मंत्रालय के दायरे में आती है। महाराष्ट्र सरकार की इस केस को लेकर बरती गई उदासीनता पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें फटकार लगा चुकी है।

उल्लेखनीय है महाराष्ट्र स्थित पालघर के गढ़चिंचले गाँव में गत 16 अप्रैल को दो साधुओं और उनके वाहन चालक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बाद में यह कहा गया कि वह बच्चों की चोरी होने के संदेह में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जबकि, ये दोनों साधु ड्राइवर के साथ अपने गुरुभाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे थे।

भारत-नेपाल सीमा पर विवाद भड़काने के लिए कई संगठनों को पैसा दे रहा है चीन

एक ओर भारत और चीन की सेनाएँ पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कुछ महीनों से आमने-सामने हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि चीन इस बीच भारत-नेपाल सीमा पर भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग कर रहा है। चीन अक्सर नेपाल का इस्तेमाल अपनी वर्चस्ववादी नीतियों की संतुष्टि के लिए बफर जोन के रूप में मोहरे की तरह करता आया है।

ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा कि चीन ने भारत-नेपाल सीमा पर भारत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए नेपाल के कई संगठनों को 2.5 करोड़ रुपए तक का भुगतान किया है। बताया जा रहा है कि काठमांडू स्थित चीन की एंबेसी नेपाल को भारत विरोधी अभियानों के लिए उकसा रही है। ज्ञात हो कि भारत-नेपाल सीमा 1,700 किमी तक फैली हुई है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के हवाले से समाचार पोर्टल ‘टाइम्स नाउ’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, “नेपाल में चीनी दूतावास ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में भारत विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन के लिए 2.5 करोड़ रुपए (NPR) की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे कि नेपाल के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में भारत के हालिया सीमा विवादों और हस्तक्षेपों का भी खुलासा होता है।”

मई 08, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उत्तराखंड स्थित धारचूला से जुड़े लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सामरिक उद्देश्यों से बनी सड़क का उद्घाटन करने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में खटास देखी गई थी। ऐसे में ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा किया गया यह खुलासा कई कड़ियों को जोड़ता नजर आता है। हाल ही में नेपाल ने बिहार से लगे बॉर्डर पर भारतीयों पर गोलीबारी भी की है।

नेपाली सरकार ने इस सड़क के उद्घाटन के खिलाफ अपने अधिकार की आवाज उठाई थी और नए नक्शे के साथ लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने इलाके के रूप में दिखाया। वहीं, पड़ोसी देश नेपाल के उच्च सदन ने जून में सर्वसम्मति से तीन भारतीय क्षेत्रों को शामिल करते हुए देश के नक्शे को अपडेट करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक भी पारित किया।

नेपाल द्वारा जारी किया गया यह नया नक्शा विवाद का विषय बना था जिस पर भारत सरकार ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है। गौर करने की बात है कि नेपाल सरकार द्वारा यह सभी विवाद ठीक उसी दौरान उठाए गए, जब भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध को लेकर कई प्रकार की तनातनी और बैठकें आयोजित की जा रहीं थीं।

उल्लेखनीय है कि चीन और भारत के सैनिक 29-30 अगस्त को चीनी सैनिकों द्वारा की गई घुसपैठ की कोशिश के बाद एक बार फिर आमने-सामने हैं। बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान भारतीय सेना ने चीन के करीब 500 सैनिकों को घेर लिया। इसके बाद भारतीय सैनिक 4 किलोमीटर अंदर घुस गए जहाँ पहले चीन का कब्जा हुआ करता था। चीन अब लगातार भारतीय सेना से इस इलाके से हटने की माँग कर रहा है।

‘नाक से बोलता है, हाइट भी कम…’: आदिपुरुष में सैफ अली खान के रावण बनने की खबर सुन बिफरे नेटिजन्स

ओम राउत फिल्म ‘आदिपुरुष’ के प्रोड्यूसर और निर्देशक हैं। हाल ही में उन्होंने इस फिल्म का एक पोस्टर साझा किया था। साथ ही जानकारी दी थी कि फिल्म में सैफ अली खान रावण का किरदार निभाएँगे।

आदिपुरुष पिछले काफी समय से सुर्ख़ियों में बनी हुई है। फिल्म में मुख्य भूमिका दक्षिण भारत के सुपरस्टार प्रभास की है। फिल्म की कहानी रामायण पर आधारित होगी। लोग बेसब्री से इस फिल्म का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन सैफ के रावण बनने की खबर ने बहुतों को नाराज कर दिया है।

करीना कपूर ने अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए लिखा, “पेश करती हूँ इंडस्ट्री का सबसे सुंदर दानव।”

लेकिन सोशल मीडिया पर तमाम लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सैफ अली खान का रावण की भूमिका अदा करना पसंद नहीं आ रहा। इसके लिए उन्होंने कई तरह की वजहें भी दी है और बताया है कि क्यों सैफ इस किरदार के लिए सही कलाकार नहीं हैं। इसमें सैफ का अभिनय कौशल, आवाज़, ऊँचाई और सबसे अहम इतिहास पर उनका नज़रिया है।

तान्हा जी रिलीज़ होने के बाद सैफ ने अनुपम चोपड़ा को एक साक्षात्कार दिया था। इसमें उन्होंने कहा था अंग्रेज़ों के आने के पहले तक ‘भारत’ शब्द का कोई वजूद ही नहीं था। इसके अलावा सैफ ने यह भी कहा था कि तान्हा जी काल्पनिक इतिहास पर आधारित है।   

सैफ के मुताबिक़ उन्हें तान्हा जी फिल्म की स्क्रिप्ट पर बिलकुल भरोसा नहीं था, क्योंकि उसका भारतीय इतिहास से कोई संबंध नहीं था। भारत के बहुसंख्यक रामायण में विश्वास करते हैं, वह रामायण को भारत के इतिहास की तरह ही देखते हैं। इसलिए लोगों के लिए यह बात हजम करना मुश्किल है जो इंसान अंग्रेज़ों के आने से पहले भारत की अवधारणा में भरोसा नहीं रखता था, वह लंकेश का किरदार निभा रहा है।       

कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा सैफ का व्यक्तित्व ही ऐसा नहीं है कि वह रावण का किरदार निभा सके। इनका कहना है कि सैफ बोलने की दौरान नाक का सहारा लेते हैं और उनकी ऊँचाई भी कम है। लोगों का कहना है कि प्रभास 6 फीट 2 इंच लम्बे हैं, उनके सामने सैफ बिलकुल मज़बूत नहीं नज़र आएँगे। इसके अलावा भी नेटिजन्स ने कई तरह की वजहें बताई कि क्यों वह सैफ को रावण के किरदार में नहीं देखना चाहते हैं।   

कई लोगों ने इस बारे में राणा डग्गुबाती की तारीफ़ की जिन्होंने बाहुबली फिल्म में भल्लाल देव का किरदार निभाया था। इसी ब्लॉकबस्टर फिल्म में प्रभास ने महेंद्र बाहुबली का किरदार निभाया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था।   

आदिपुरुष का आधिकारिक रूप से ऐलान 18 अगस्त को हुआ। कुछ ही समय बाद यह पता चला था कि प्रभास इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले हैं। यह फिल्म 2021 तक सिनेमाघरों में नज़र आ सकती है।