Home Blog Page 4561

आखिर क्यों अपनी माँ का नाम बदलवाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती की बेटी ?

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती की छोटी बेटी अपने पासपोर्ट में माँ का नाम बदलकर महबूबा सैयद कराना चाहती है। इस संबंध में महबूबा मुफ्ती की बेटी इर्तिका जावेद ने एक स्थानीय न्यूज पेपर में नोटिस भी प्रकाशित करवाया है।

इस नोटिस में लिखा गया है, “मैं इर्तिका जावेद, पुत्री जावेद इकबाल शाह, निवासी फेयरव्यू हाउस गुपकर रोड, श्रीनगर, कश्मीर-190001, अपने पासपोर्ट में अपनी माँ का नाम महबूबा मुफ्ती से बदलकर महबूबा सैयद कराना चाहती हूँ।”

नोटिस में आगे लिखा गया है, “अगर किसी को इससे संबंधित कोई आपत्ति है, तो कृपया सात दिनों की अवधि के भीतर संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। उसके बाद कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाएगी।”

बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने साल 1984 में जावेद इकबाल से शादी की थी, लेकिन यह शादी लंबे समय तक नहीं चली और 1987 में दोनों अलग हो गए। फिलहाल, दोनों साथ नहीं रहते हैं। महबूबा और जावेद की दो बेटियाँ हैं, जिनका नाम इर्तिका और इल्तिजा है। 

महबूबा की बड़ी बेटी इल्तिजा अपनी माँ के नक्शेकदम पर चली और उसने अपने नाम के पीछे मुफ्ती लगाने का फैसला किया। इर्तिका अपने पिता के काफी करीब है और उसने पिता के सरनेम को चुना।

खैर राजनीति की बात करें तो इन दिनों महबूबा मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास में नजरबंद हैं। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया। अब वे 5 नवंबर तक हिरासत में रहेंगी। उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही वे नजरबंदी में हैं। पिछले महीने पूर्व मंत्री और पीपुल्स काॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन को 360 दिनों बाद नजरबंदी से रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म करने के दिन 5 अगस्त 2019 को सरकार ने तमाम राजनेताओं को हिरासत में लिया था। इस दौरान पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, डॉ. फारूख अब्दुल्ला सहित कई अन्य राजनेता भी हिरासत में लिए गए थे। बीते दिनों उमर, फारूक समेत कई नेताओं को रिहा कर दिया गया था, लेकिन महबूबा व शाह फैसल अब भी हिरासत में ही हैं।

अब्बू अनजान-बीवी को करतूतों का भान, चाहिए माफी: युसूफ जैसा ही होता है आतंकी का ‘आदर्श’ परिवार

करीम। बेचारा करीम। वो तो गाड़ी से जा रहा था, लेकिन आतंकरोधी दस्ते ने घेर कर मार डाला। वो करीम, जिसने ISIS आतंकियों के कई ऑफर्स को ठुकरा दिया था, उसे इसी संगठन का आतंकी पेंट कर दिया गया। करीम की एक गर्लफ्रेंड भी है, जो सच्चाई का पता लगाती है। आतंकवाद में बहन-बीवी वाला तड़का लगता है और तैयार हो जाती है एक उम्दा कहानी।

फ़िल्मी दुनिया और वास्तविकता: आतंकियों को ‘आम आदमी’ बनाने की कहानी

अमेज़न प्राइम की एक बड़ी ही लोकप्रिय सीरीज आई थी, ‘द फॅमिली मैन’, इस घटना को उसी में दिखाया गया है। ये दिखाता है कि कैसे एक खा समझब का व्यक्ति ‘बेचारा’ किसी मंत्री की पार्टी के खाने में बीफ मिलाने जा रहा था और उसके साथी ने बस गोली क्या चला दी, सुरक्षा एजेंसियों ने उसका सम्बन्ध ISIS से घोषित कर दिया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाला अधिकारी ये सोच-सोच कर शोकाकुल हो जाता है।

हाथीराम चौधरी एक ऐसा पुलिस अधिकारी है, जिसे उसके वरिष्ठ अक्षम मानते हैं। कुछ लोगों की गिरफ़्तारी का मामला उसे जाँच करने के लिए दिया जाता है लेकिन अचानक से मामला उसके हाथ से ले लिया जाता है और सीबीआई इसमें घुसती है। सीबीआई तुरंत उन ‘साधारण अपराधियों’ को आईएसआईएस का बता कर मामले को रफा-दफा करती है। इन अपराधियों की भी गर्लफ्रेंड है और ‘उच्च जाति’ के क्रूर अत्याचार की पुरानी कहानी है।

ये कहानी दिखाई गई है अमेज़न प्राइम की ही एक दूसरी सीरीज ‘पाताल लोक’ में, जिसमें दिखाया गया है कि सीबीआई कितनी जल्दी-जल्दी मामले को सुलझाने के लिए किसी अपराध में किसी को बचाने के लिए ISIS से जोड़ देती है। आतंकियों का बाप होता है, भाई-बहन-बीवी-गर्लफ्रेंड सब होते हैं, वो भी आम आदमी हैं- ये सब अब फिल्मों से निकल कर वास्तविक दुनिया में आ गया है और कुछ पत्रकार इसके सिद्धहस्त हैं।

लेकिन, वास्तविकता ये है कि असलियत इसके एकदम उलट है। यहाँ किसी करीम की गर्लफ्रेंड ये साबित करने के लिए नहीं संघर्ष करती है कि उसका मृत बॉयफ्रेंड आतंकी नहीं था, बल्कि यहाँ किसी अशफाक की बीवी अपने ‘जान’ को एक हिन्दू नेता की क्रूर हत्या के बाद वापस आने के लिए बड़े प्यार से बोलती है। असलियत में किसी युसूफ की बीवी अपने आतंकवादी पति के गुनाहों को माफ़ करने को कहती है।

बीवी, अब्बू और भाई: आतंकी को बचाने के लिए सब आ जाते हैं साथ

ये सब बावजूद इसके होता है कि उसे अपने शौहर की करतूतों के बारे में सब कुछ पता है। दिल्ली से गिरफ्तार किया गया युसूफ खान राम मंदिर भूमिपूजन का बदला लेने के लिए दिल्ली में आतंकी हमला करने वाला था। लेकिन IED विस्फोटकों के साथ ही पकड़ा गया। इसके बाद उसकी बीवी कहती है कि उसका शौहर लगभग दो साल से थोड़ा-थोड़ा कर के सामान (बारूद) लाता था और एक खाली बक्से में रखता था।

बीवी ये भी कहती है कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है कि इसकी ट्रेनिंग उसने मोबाइल से ली या किसी और से और युसूफ ये सब किसके लिए कर रहा था। उसकी बीवी कहती है कि उसे बाबरी मस्जिद से कोई लगाव नहीं था। अफ़सोस जताने की बात करते हुए उसने कहा कि युसूफ उसके ऊपर सख्ती कर रहा था कि ये सब किसी को भी मत बताना। इसके बाद फिर वही ‘इमोशनल अत्याचार’ शुरू होता है।

ISIS के आतंकी युसूफ खान की बीवी अपने 4 बच्चों की बात करते हुए पूछती है कि वो उन्हें लेकर कहाँ जाएगी? वो कहती है कि उसके शौहर की गलती को माफ़ कर दिया जाए। ये काफी अजीबोगरीब और हास्यास्पद है। दुनिया के सबसे खूँखार आतंकी संगठन से जुड़े आतंकवादी, जो हिन्दुओं के प्रति घृणा के कारण खतरनाक विस्फोटकों के साथ हमले की तैयारी में धरा गया, उसे माफ़ करने की अपील उसकी बीवी कर रही है, जिसे उसकी सच्चाई पता थी।

आतंकियों के छोटे-छोटे बच्चे, गरीब माँ-बाप, सीधी-सादी गर्लफ्रेंड, मासूम बीवी, उसकी दर्दनाक कहानी और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसके साथ की गई ‘बर्बरता’- ये सब फिल्मों में कहानियों के लिए अच्छे मटेरियल होते हैं और वास्तविकता में मीडिया का प्रपंच होता है। हाँ, ये बिकता दोनों जगह है। युसूफ की बीवी को ये सब पता है। इसीलिए, वो अपने आतंकी पति के आतंकवाद को माफ़ करने की बात इतनी आसानी से कर देती है।

और पत्नी ही क्यों, ऐसे मामलों में अब्बू भी क्यों पीछे रहे? उत्तर प्रदेश स्थित बलरामपुर के इस ISIS आतंकी अबू युसूफ खान का अब्बा कहता है कि उसके बेटे की रीढ़ की हड्डी खिसकी हुई है, जिसका 2 साल से लखनऊ में इलाज चल रहा है। उसका कहना है कि वो शुक्रवार को लखनऊ अपने मामा के बेटे की किडनी के इलाज के लिए गया था। उसने अपनी बहन को बताया कि वो उसके घर पर रुकेगा पर वहाँ पहुँचा नहीं और उसका फोन बंद आने लगा।

फिल्म ‘वेलकम’ में भी एक किरदार होता है, जो मजनूँ शेट्टी के ‘बता इसे’ बोलते ही ‘मेरी एक टाँग नकली है…’ वाली बात दोहराने लगता है। आप याद कीजिए कमलेश तिवारी का मामला। ‘स्क्रॉल’ ने तो कमलेश तिवारी के दो हत्यारों के अब्बू खुर्शीद आलम का दो कमरे का छोटा फ्लैट है, ये तक बता दिया। उसने दावा किया था कि ‘बेचारे’ परिवार का आज तक पुलिस का सामना नहीं हुआ, लेकिन अब उन्हें बताया जा रहा है कि उनका दो बेटा आतंकी है।

उस बुजुर्ग आदमी को ये तक पता था कि प्रोपेगेंडा कैसे खेलना है, जैसे उसे कोई ट्रेनिंग दी गई हो। 75 साल के उस आदमी ने पूछा था कि कमेलश तिवारी की माँ के आरोपों के आधार पर भाजपा नेता को हत्या के आरोप में क्यों नहीं गिरफ्तार किया जा रहा है? इसके बाद ‘स्क्रॉल’ जैसा मीडिया संस्थान है ही इन चीजों को आगे बढ़ाने के लिए। बस यही किस्सा ISIS आतंकी युसूफ के अब्बू का भी है।

वो कहता है कि उसने अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखवाई थी। वो बताता है कि उसे कुछ पता नहीं था, वरना वो उसको रोकता, घर से निकाल देता। अब तो जो भी करेगी पुलिस करेगी। साथ ही वो ये भी कहता है कि वो माफ़ी चाहता है। उसकी माँग है कि एक मर्तबा उसे माफी दे दें और वो दोबारा करे तो कुछ भी कर दीजिएगा। ये अजीब बयान है क्योंकि एक तरफ वो उसे घर से निकालने की बात करता है, दूसरी तरफ प्रशासन से कहता है कि उसे छोड़ दो।

ये अच्छी-अच्छी बातें हैं, जिन्हें मीडिया तुरंत लपक लेता है और दिखाता है कि कैसे एक आतंकी का बाप अपने बेटे के आतंकी निकल जाने के बाद उसे घर से निकालने की बातें करता है और एक अच्छा नागरिक का धर्म निभाता है। भले ही सच्चाई इससे कोसों दूर हो। जहाँ बीवी को सब पता है, अब्बू को कुछ नहीं पता। लेकिन हाँ, माफ़ी दोनों चाहते हैं। इस मामले में भाई इन दोनों के बीच में है।

ISIS आतंकी युसूफ खान का भाई कहता है कि उसे ISIS के झंडे की पहचान नहीं है पर रात को झंडा देखा। काले रंग के झंडे पर सफेद रंग से अरबी में ‘अल्लाह हू अकबर ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह‘ लिखा था। आकिब ने बताया कि उसका भाई सऊदी और अन्य जगहों पर रहा था। ये बात पुलिस ने भी बताई है। सऊदी में कमाने के बाद वो आतंकियों के संपर्क में आया था, जहाँ से वो सीधे टॉप कमांडर्स से बातें करता था।

आतंकियों के प्रति सब कुछ जानते हुए भी उनके परिवारों की सहानुभूति को समझने के लिए एक बार फिर से कमलेश तिवारी वाली घटना को देखते हैं। लीक हुए फोन कॉल में बीवी ने अशफाक को ‘जान’ कहते हुए घर आने की गुजारिश की थी और कहा था कि वो उसके बाद परिवार उसे बचाने के लिए बाकी प्रक्रिया करेगा। वही फोन पर अब्बा अल्लाह का बार-बार नाम लेते हुए कहता है कि सब ठीक होगा।

युसूफ खान भी अलग नहीं है। हिन्दुओं के प्रति घृणा उसके मन में भी थी, क्योंकि वो राम मंदिर का बदला लेना चाहता था। साथ ही उसने अपने गाँव के कब्रिस्तान में बम का ट्रायल भी किया था। वो अंतररष्ट्रीय आतंकियों के संपर्क में था। उसके पास खतरनाक विस्फोटक थे। कोई बड़ी हस्ती उसके निशाने पर थी। उसकी फिदायीन हमले की योजना थी। क्या ऐसा आतंकी माफ़ी के लायक है?

असल में समस्या ये है कि जब तक ये लोग पकड़ में नहीं आते हैं, तब तक सब एक होते हैं। जैसे ही इनकी करतूत पकड़ी जाती है और इनके पास क़ानून की कार्रवाई से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता, इन्हें गरीब का बेटा बना दिया जाता है। जब ये मारे जाते हैं तो कहना ही क्या… ये गणित के शिक्षक भी हो सकते हैं। वामपंथियों का ये फेवरेट सब्जेक्ट है। उन्हें आतंकी के आतंक के अलावा बाकी सभी चीजों को उछालने से मतलब होता है, क्योंकि उनका लगाव तो आतंकी के साथ होता है, लेकिन दुनिया के सामने उसे बचाने के लिए अन्य चीजें सामने लानी होती है।

ISIS आतंकी युसूफ खान की गिरफ़्तारी: अब तक क्या-क्या हुआ?

ज्ञात हो कि ISIS आतंकी अबू युसूफ खान को दिल्ली के करोलबाग और धौलाकुआँ के बीच रिज रोड इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसने पुलिस पर फायरिंग भी की थी। पुलिस ने उस पिस्टल को भी जब्त कर लिया है, जिसका इस्तेमाल कर उसने गोली चलाई थी। गिरफ्तार करने से पहले पुलिस और आतंकी के बीच कुछ देर तक शूटआउट भी चला। उसे आधी रात 12 बजे के करीब गिरफ्तार किया गया। 

ISIS आतंकी अबू युसूफ खान के घर से दो मानव बम जैकेट, विस्फोटक और भड़काऊ साहित्य के अलावा पत्नी तथा चार बच्चों के पासपोर्ट बरामद करने में पुलिस ने सफलता पाई है। बलरामपुर में तलाशी के बाद देर रात दिल्ली पुलिस आतंकी को लेकर वापस राष्ट्रीय राजधानी के लिए निकल गई। उससे जुड़े 3 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पूरी यूपी अलर्ट पर है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार देर रात एनकाउंटर के बाद वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के अबू यूसुफ खान को गिरफ्तार किया था। अब जो जानकारी सामने आई है उससे पता चला है कि वह लोन वुल्फ अटैक की फिराक में था। निशाने पर कोई बड़ी हस्ती थी। एक आतंकी के फरार होने की बात भी कही जा रही है। अबू बाइक पर विस्फोटक लेकर दिल्ली में आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश में था। पुलिस ने 15 किलो IED और कुकर बम बरामद किया था।

नेपाल से तीन पाकिस्तानी आतंकियों के घुसने की आशंका, बिहार में बॉर्डर पर हाई अलर्ट

सुरक्षा एजेंसियों ने 3 पाक आतंकियों के नेपाल के रास्ते भारत में घुसने की सूचना दी है। इसके बाद बिहार में नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण के रक्‍सौल तथा सीतामढ़ी के बैरगनिया के पास सीमा पर चौकसी विशेष तौर पर बढ़ा दी गई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताब़िक इसके मद्देनजर इंडो-नेपाल बॉर्डर पर विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सीतामढ़ी के एसपी अनिल कुमार ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण सीमा सील है। पूर्व से सुरक्षा सख्त है। ग्रामीण क्षेत्र के रास्तों पर सशस्त्र सीमा बल ( एसएसबी) के जवान तैनात हैं। सीमावर्ती थानों को सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। 

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के कारण अब ISI नेपाल के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले की साजिश रच रही है। बताया गया था कि अब आतंकियों को नेपाल में मौजूद स्लीपर सेल के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के निर्देश दिए जा रहे हैं।

वहीं राम मंदिर पर फैसला आने से तकरीबन 10 दिन पहले खबर आई थी कि अयोध्या में बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का एक जत्था घुस गया था, जो राम मंदिर मामले के बीच दहशत फैलाना चाहता था।

बताया गया कि नेपाल के रास्ते 7 आतंकवादी उत्तर प्रदेश में घुस चुके थे। ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा था कि ये सभी पाकिस्तानी आतंकवादी थे, जिन्हें अयोध्या में आतंक फैलाने के लिए भेजा गया था। सात में से पाँच आतंकियों की पहचान भी हो गई थी। पहचाने गए आतंकियों के नाम मोहम्मद याकूब, अबू हमजा, मोहम्मद शाहबाज, निसार अहमद और मोहम्मद कौमी चौधरी थे।

इसके अलावा पाकिस्तान, नेपाल के सहारे भारत में कोरोना फैलाने की भी साजिश रच रहा था। इसका पूरा प्लान जालिम मुखिया ने तैयार किया था, जो हथियारों का तस्कर होने के साथ ही नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति में भी सक्रिय था। जालिम की योजना भारत में नेपाल की सीमा से कोरोना पॉजिटिव लोगों की एंट्री कराने की थी। इसके लिए करीब तीन सौ लोग नेपाल के चंदनबसरा तथा खैरवा की मस्जिद और मदरसे में जमा किए गए थे। इनमें कुछ भारतीय थे, तो कुछ पाकिस्तानी थे।

नेपाली गर्लफ्रेंड वाले तारिक से लेकर कवर बिजनेस देखने वाले फिरोज तक: दाऊद इब्राहिम गैंग के 11 गुर्गों की पूरी डिटेल

हाल ही में ख़बर आई थी कि आतंकी दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है, ऐसा खुद इस्लामी मुल्क ने स्वीकार किया है। इसके बाद पाकिस्तान अपने ही कहे से पलट गया। इधर ड्रग से क्राइम सिंडिकेट तक दाऊद इब्राहिम का काम देखने वाले उसके गैंग के आतंकियों की एक सूची ‘मिड डे’ ने समाचार एजेंसी IANS के हवाले से प्रकाशित की है, जिसे हम सूचीबद्ध तरीके से आपके समक्ष पेश कर रहे हैं।

  • डॉक्टर जावेद चुटानी: ये पाकिस्तानी है, जो दाऊद के साथ लगातार संपर्क में रहता है। वो एक बुकी है लेकिन रियल एस्टेट में खासी दिलचस्पी रखता है। दाऊद इब्राहिम के साथ इसका पारिवारिक रिश्ता भी है। वो कराची में उसी क्षेत्र में रहता है, जहाँ उसका आका। उसकी बेटी यूके में रहती है। वो भी यूके का नंबर यूज करता है।
  • अमीस इब्राहिम: ये दुबई के नंबर का इस्तेमाल करता है। जब छोटा शकील की बेटी की शादी के लिए होटल नहीं मिल रहा था तो इसी ने उसके लिए जुगाड़ करने का प्रयास किया था। उसने मुंबई के किसी चौधरी से इस बारे में बात की थी। काफी ज्यादा अतिथियों के कारण होटल बुकिंग में दिक्कतें आ रही थीं। वह मनी ट्रांजैक्शंस भी करता रहा है।
  • छोटा शकील: ये दाऊद इब्राहिम का सबसे क़रीबी गुर्गा है। वह पाकिस्तान में ही रहता है। कुछ दिनों पहले वह अपने आके के जन्मदिन पर किसी को इन्वाइट करते हुए सुना गया था। वो लगभग डी-कम्पनी के सभी सदस्यों से संपर्क में रहता है।
  • जावेद भाई: ये ज्यादातर मौकों पर दाऊद के साथ ही रहता है। दाऊद के व्यक्तिगत फ़ोन कॉल्स भी यही रिसीव करता है। उसे मोती भाई या जवार भाई के नाम से भी जानते हैं। ये दाऊद के बैंकिंग और पेमेंट्स की भी डीलिंग करता है। ये दाऊद के बनाए सोसाइटीज और अपार्टमेंट्स को देखता है। एक फोन कॉल में वो तारिक के साथ एक डील की बातें करता हुआ सुना गया था।
  • तारिक: दाऊद का ये गुर्गा दुबई में रहता है। वो छोटा शकील और गैंग के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में रहता है। वो दुबई में उसके बिजनेस को देखता है। 2014 में उसके एक फोन कॉल से पता चला था कि दाऊद का भाई अनीस शारजाह में है। वो भी छोटा शकील के बेटी की शादी के बारे में बात करते सुना गया था। उसकी एक नेपाली गर्लफ्रेंड है, जो फ़िलहाल मुंबई के एक ब्यूटी पार्लर में कार्यरत है। वो दाऊद को यूके के किसी मित्र (म्यूजिक डायरेक्टर्स नदीम?) की गिरफ़्तारी की सूचना देते हुए सुना गया था। उसने दाऊद के लिए टोयटा लैंडक्रूजर्स को खरीद कर पाकिस्तान भेजा था। ये गाड़ियाँ बुलेटप्रूफ हैं। तारिक का अस्सिस्टेंट अल्ताफ है।
  • इकबाल: ये दुबई और पाकिस्तान में कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करता है। एक इंटर्सेप्टेड कॉल के अनुसार, उसने दाऊद इब्राहिम के घर की मरम्मत का काम कराया था और इसके लिए कश्मीर से मजदूर मँगाए गए थे। इसका घर भी शायद कराची में ही है और वो दाऊद से मिलता-जुलता रहता है। वो अफ्रीकन देशों में डी-कम्पनी का काम देख रहा है। आसिफ और मुस्तफा उसके बेटे हैं। वो पाकिस्तान में रहता है। उसकी बेटी का नाम सना है।
  • अहमद जमाल: दाऊद का करीबी, जो कराची में रहता है। 2014 में उसकी बेटी की शादी हुई थी। अगस्त 2014 में 2 दिन दाऊद ने उसे किसी शादी के फंक्शन में बुलाया था। वो एक भारतीय माजिद बाबा के संपर्क में भी रहता है।
  • फिरोज: दाऊद गैंग का अहम सदस्य, जो उसका कवर बिजनेस देखता है और देश-विदेश में कम्पनियाँ चलाता है। उसे तमिल, अरबी, हिन्दू और अंग्रेजी में बात करते सुना गया है, जिससे पता चलता है कि वो दक्षिण भारतीय है और काफी शिक्षित है। वो अफ्रीका से हीरे की स्मगलिंग करता है। मुंबई में उसके कॉन्टेक्ट्स हैं।
  • सिराज: दाऊद, छोटा शकील और तारिक के बीच एक कड़ी है और इन तीनों का करीबी है। वो दाऊद के जन्मदिन पर 650 लोगों की उपस्थिति वाली एक पार्टी के आयोजन की बातें करते हुए सुना गया था।
  • अहमद: छोटा शकील का आदमी जो व्यापारियों से रुपए वसूलता है। हाल ही में ये किसी कम्पनी में रुपए के हेरफेर के लिए कर्मचारियों से बात करते हुए सुना गया था।
  • फहीम: छोटा शकील के साथ कराची में रहता है। वो जवाहर और रमेश के बीच रुपयों के विवाद को थामने के लिए किसी श्याम केशवानी से संपर्क में था।

ज्ञात हो कि आतंकी फंडिंग की निगरानी रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्‍तान ने एक और कवायद की है। पाकिस्तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाऊद इब्राहिम समेत उनके आकाओं पर और तथाकथित कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। यह पहली बार है जब पाकिस्‍तान ने खुले तौर पर स्‍वीकार किया है कि दाऊद उसके यहाँ है (बाद में मुकर गया, वो अलग बात है)।

माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने यह कार्रवाई एफएटीएफ द्वारा ब्‍लैक लिस्‍ट किए जाने की आशंका से घबराकर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और हाफिज, मसूद और दाऊद जैसे आतंकी आकाओं की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। उनकी विदेश यात्रा पर भी बैन लगा दिया गया है। हालाँकि, बाद में पाकिस्तान दाऊद को लेकर अपने दावों से पलट गया।

‘भारत में हिंदू 60% से कम, मेरे रास्ते पर चलो, जीत हमारी है… इंशाल्लाह’ – जाकिर नायक ने दिया देश-तोड़ आइडिया

भारत से भाग कर मलेशिया में छिपा है इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक। वो वहीं से वीडियो संदेश जारी करता है। भारत में संप्रदाय विशेष के दिग्भ्रमित लोग यहाँ के अपने ही संप्रदाय के पढ़े-लिखे प्रोफेसरों या स्कॉलरों से सवाल-जवाब के बजाय भगोड़े जाकिर नाइक पर विश्वास करते हैं। इस्लामी किताबों का हवाला देकर वो ऐसे ही लोगों को भड़काने का काम करता है।

जाकिर नाइक ने 21 अगस्त 2020 को यूट्यूब पर अपना एक वीडियो अपलोड किया। भारत के प्रति इस इंसान की क्या सोच है, इस वीडियो से जाहिर होती है। वीडियो की शुरुआत भारत के अब्दुर्ररहमान के सवाल से होती है।

अब्दुर्ररहमान पूछता है – “अभी के भारत में रहना संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए कठिन हो गया है। सत्ता पार्टी के द्वारा शायद अल्लाह हमारी परीक्षा लेना चाहता है। हमें ऐसे हालात में क्या करना चाहिए, जहाँ झूठे केसों में फँसा कर कई लोगों को UAPA में जेल में डाल दिया गया?”

जाकिर नाइक इस सवाल के जवाब में क्या-क्या जहर उगलता है, 17 मिनट 50 सेकंड का यह वीडियो उसी को दर्शाता है। नीचे उन हिस्सों का जिक्र आपको मिलेगा, जहाँ भगोड़े जाकिर ने जहर उगला है। पाठक की सुविधा के लिए टाइम सहित जानकारी ब्रैकेट में दी गई है।

2 मिनट 10 सेकंड से लेकर 2 मिनट 35 सेकंड तक

पिछले 4-6 साल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। संप्रदाय विशेष के लोगों की मॉब लिंचिंग हुई है। उनके लिए जीना तक दूभर हो गया है भारत में। जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे एक भी मामले में पुलिस ने अभी तक कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश नहीं किए हैं।

5 मिनट 30 सेकंड से लेकर 8 मिनट 20 सेकंड तक

2011 की जनसंख्या के अनुसार इस्लाम मानने वाले 14.2% हैं। और करीब 2 साल पहले भारत की सरकार ने कहा कि वहाँ 20 करोड़ से ज्यादा इस्लाम धर्म के हैं। लेकिन मुझे विश्वास है कि वो असम, बंगाल के संप्रदाय विशेष को संख्या मान ही नहीं रहे होंगे।

अनुमान से भारत में करीब 25 करोड़ से लेकर 30 करोड़ तक इस्लाम मानने वाले हैं। सरकार इस आँकड़े को दबाती है। लोग इंडोनेशिया को सबसे ज्यादा इस्लामी आबादी वाला देश मानते हैं लेकिन मेरे अनुसार भारत दुनिया का सबसे ज्यादा इस्लामी आबादी का देश है।

इसी आबादी में हल छुपा है। भारत में संप्रदाय विशेष के लोगों को सिर्फ एक पार्टी बनानी चाहिए, ऐसी पार्टी जो सिर्फ उनकी हो। इस पार्टी को दलितों से हाथ मिलाना चाहिए, जिनकी संख्या भारत में करीब 30 करोड़ है।

इस तरह से हम करीब 60 करोड़ की संख्या हो जाएँगे। क्योंकि दलित हिंदू नहीं हैं, उन्हें सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए हिंदू की श्रेणी में रखा जाता है।

13 मिनट से लेकर 16 मिनट 10 सेकंड तक

अगर किसी को इस्लाम का पालन करने में दिक्कत हो रही है तो उसे हिजरा (पलायन) करना चाहिए इस्लामिक देश में। लेकिन सारे लोग भारत से हिजरा कर जाएँ, यह समाधान नहीं है। समाधान हमारी राजनीतिक एकता है।

लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्य में भी हिजरा किया जा सकता है, जहाँ संप्रदाय विशेष के लोगों को लेकर सोच अच्छी है। केरल ऐसा एक राज्य है। केरल में हिंदू भी एक तिहाई हैं, मुस्लिम भी एक तिहाई और ईसाई भी एक तिहाई हैं। केरल के लोग धर्मांध भी नहीं हैं।

भारत की सरकार केरल में राजनीतिक रूप से बहुत सशक्त भी नहीं है। इसलिए दूसरे राज्य में हिजरा करना है तो केरल सबसे बढ़िया है। बॉम्बे (मुंबई) और हैदराबाद भी कम कम्युनल हैं। कुछ हद से ज्यादा कम्युनल हैं, जैसे – उत्तर प्रदेश।

एक राज्य से दूसरे राज्य में हिजरा के अलावा एक ही राज्य के कम कम्युनल शहर में या एक ही शहर के ज्यादा सेफ जगह या कॉलनी में भी हिजरा कर सकते हैं। जैसे मुंबई में डोंगरी या बायकला सबसे सेफ है, जहाँ 80-90 प्रतिशत आबादी संप्रदाय विशेष के लोगों की है।

अंत में जाकिर नाइक कहता है कि अगर संप्रदाय विशेष के लोग राजनीतिक तौर पर, धार्मिक तौर पर एक हो जाएँ तो इनका पुराना गौरव लौट आएगा। गौरव कौन सा, यह नहीं बताया भगोड़े ने।

कुछ दिन पहले जाकिर नाइक के बेटे का भी वीडियो आया था। उसका नाम फरीक जाकिर नाइक है। उसका कहना है कि अल्लाह नॉन-इस्लामियों पर भी दया करते हैं क्योंकि उन्होंने उन लोगों को भोजन और घर दिया है। उसने कहा कि पानी या हवा, ये सब नॉन-इस्लामियों को भी दिया गया है। अल्लाह उस पर भी दया करते हैं। अल्लाह लोगों तक खुद ये संदेश पहुँचाते हैं कि हर एक बच्चा इस्लाम धर्म में ही जन्म लेता है, उसे बाद में हिन्दू या ईसाई बना दिया जाता है।

‘बीजेपी है तैयार-आत्मनिर्भर बिहार’: नड्डा का ऐलान- नीतीश के नेतृत्व में ही लड़ेंगे चुनाव, LJP भी होगी साथ

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिगुल फूॅंक दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी नीतीश कुमार की अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगी। साथ ही रामविलास पासवान की लोजपा भी साथ रहेगी। पिछले दिनों इस तरह की अटकलें लगाई जा रही थी कि जदयू से एलजीपी नाता तोड़ सकती है।

बिहार भाजपा कार्यसमिति की बैठक को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा “महामारी के बीच बिहार विधानसभा चुनाव चुनौती से कम नहीं है। हम नीतीश कुमार की अगुवाई में चुनाव लड़ेंगे। भाजपा, जदयू और लोजपा एक साथ चुनाव लड़ेगी और जीत हासिल करेगी।”  

हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और LJP के चिराग पासवान के बीच बयानबाज़ी हुई थी। इस मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा भाजपा के कार्यकर्ताओं का एक बात का विशेष ध्यान रखना है। जीत केवल एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि सभी सहयोगी दलों की होनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा तीनों दल जितनी बार साथ आए हैं उतनी बार जीत ही हुई है, भले हालात कितने विपरीत क्यों न हों।  

इसके अलावा जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के नारे को नए सिरे से दोहराया। उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी नए नारे के साथ बिहार में चुनाव लड़ेगी “बीजेपी है तैयार-आत्मनिर्भर बिहार।” 

उन्होंने आरजेडी के तेजस्वी यादव पर भी हमला बोला। उनके मुताबिक़ आरजेडी चुनाव में वर्चुअल रैली (जन सभा) का विरोध कर रही है। फिर फेसबुक और ट्विटर क्या है? अगर उन्हें वर्चुअल रैली से इतनी ही परेशानी है तो वह फेसबुक और ट्विटर पर क्यों हैं? वह इन सोशल मीडिया माध्यमों का उपयोग क्यों करते हैं, इससे इतनी ही परेशानी थी तो इसे छोड़ क्यों नहीं देते देते हैं?

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा भी किया कि बिहार के विपक्ष में बिलकुल ताकत नहीं बची है। विपक्ष का यह हाल सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि अन्य जगहों पर भी है। भाजपा इकलौता ऐसा राजनीतिक दल है जिससे लोग आशा करते हैं इसलिए भाजपा का साथ देते हैं। विपक्ष के पास न तो विचारधारा है और न ही दूसरों का भला करने की दूर दृष्टि। देश में विपक्ष का जितना भी अस्तित्व बाकी रह गया है वह सिर्फ निचले स्तर की राजनीति में उलझा हुआ है। विपक्ष के लोग जब सत्ता में थे तब उन्होंने देश के लोगों की आशाओं को पूरा नहीं किया। इसलिए जनता उन पर भरोसा नहीं करना चाहती है।  

जेपी नड्डा के मुताबिक़ बिहार सरकार ने जिस तरह बाढ़ और महामारी का एक साथ सामना किया वह सराहनीय था। बिहार सरकार की तारीफ़ करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा राज्य में 12.5 लाख बेड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उसके अलावा 2 हज़ार से अधिक कोविड उपचार संबंधी सुविधा केंद्र हैं। इतना ही नहीं प्रतिदिन 10 लाख से ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं और देश का रिकवरी रेट 74 फ़ीसदी के अधिक पहुँच चुका है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा देश के लगभग 80 करोड़ लोगों को इस योजना के ज़रिए अनाज मिला है।

नड्डा ने भाजपा कार्यकर्ताओं से निवेदन किया कि घर-घर जाकर जनसंपर्क करें। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए छोटी-छोटी जन सभाओं का आयोजन करें। महामारी के दौर में जनसंपर्क बेशक कठिन होगा इसलिए कार्यकर्ताओं को इस दौरान पूरी सावधानी बरतनी होगी। उनका कहना था कि बिहार में फ़िलहाल लॉकडाउन है। लेकिन जैसे ही यह ख़त्म होगा, वह बिहार की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे।   

IIPM के निदेशक और ममता बनर्जी के हमदर्द अरिंदम चौधरी टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तार, 14 दिन की हिरासत में भेजे गए

इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ प्‍लांनिंग एंड मैंनेजमेंट (IIPM) के डायरेक्‍टर अरिंदम चौधरी को दक्षिण दिल्‍ली के सीजीएसटी कमिशनरेट ने गिरफ्तार किया है। चौधरी पर लगभग 23 करोड़ रुपए के क्रेडिट सेवा कर के केंद्रीय मूल्य वर्धित कर (CENVAT) के कथित दावे का भुगतान न करने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अरिंदम चौधरी को दक्षिण दिल्ली के सीजीएसटी कमिशनरेट ने शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को वित्त अधिनियम की धारा 89 के तहत गिरफ्तार किया था। अरिंदम चौधरी के साथ ही उनके एक सहयोगी गुरुदास मलिक ठाकुर को भी वित्‍त अधिनियम की धारा 89 के तहत गिरफ्तार किया गया है।

इसके बाद उन्‍हें एक स्‍थानीय कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्‍हें 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को पटियाला हाउस कोर्ट में ड्यूटी मजिस्‍ट्रेट ज्‍योति माहेश्‍वरी के सामने पेश किया गया था।

अब अरिंदम चौधरी और उनकी कंपनी की दिल्‍ली और विदेश में स्थित सभी संपत्तियों की भी जाँच की जाएगी। चौधरी की कंपनी में 90 फीसदी हिस्‍सेदारी है। बाकी की 10 फीसदी हिस्‍सेदारी उनकी पत्‍नी की है। चौधरी और उनके सहयोगी ठाकुर को अब 3 सितंबर, 2020 को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

इससे पहले अरिंदम चौधरी को 14 मार्च को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी। उस समय उन्‍हें कथित रूप से जाली मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने उन्हें 2016 के एक मामले के संबंध में जाँच में शामिल होने के लिए कहा था।

बता दें कि अरिंदम चौधरी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जाने-माने समर्थक और हमदर्द हैं। ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए संपादकीय और ब्लॉग लिख चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने चौधरी के आईआईपीएम से एमबीए की डिग्री हासिल की थी।

पिछले साल, लोकसभा चुनाव के ठीक बाद, अभिषेक बनर्जी द्वारा चुनाव के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए हलफनामे में उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत विवरण प्रस्तुत करने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। चुनाव अधिकारियों ने शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2014 के चुनावों में, बनर्जी ने हलफनामे में बताया है कि उन्होंने आईआईपीएम विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री पूरी की है, जो कि मान्यता प्राप्त नहीं है।

जब UPA सरकार में मंत्री रहे प्रफुल्ल पटेल के विरोध के बाद ब्लूम्सबरी ने वापस ले ली थी किताब

ब्लूम्सबरी इंडिया ने जनवरी 2014 में एयरलाइन के पूर्व कार्यकारी निदेशक जितेंद्र भार्गव द्वारा लिखी पुस्तक ‘The Descent of Air India’ के प्रकाशन को वापस ले लिया था। ब्लूम्सबरी इंडिया ने ऐसा पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के विरोध के बाद किया था। बता दें कि प्रफुल्ल पटेल ने पब्लिकेशन हाउस के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था।

इस पुस्तक में वरिष्ठ एनसीपी नेता और यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रहे प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रीय एयरलाइन के कमजोर वित्तीय अवस्था के लिए दोषी ठहराया गया है। पब्लिशिंग हाउस ने प्रफुल्ल पटेल से कहा था कि अगर उन्हें कंटेंट की वजह से किसी प्रकार की शर्मिंदगी हुई, तो वे माफी माँगते हैं। ब्लूम्सबरी ने एक बयान में कहा था, “किसी भी तरीके से उन्हें (प्रफुल्ल पटेल) बदनाम करना हमारा मकसद कभी नहीं था।”

अक्टूबर 2013 में प्रकाशित, ‘द डिसेंट ऑफ़ एयर इंडिया’ में बताया गया है कि कैसे बोइंग और एयरबस से 2005 से 2006 के बीच 111 विमानों की खरीद के लिए सौदा हुआ और इंडियन एयरलाइंस के साथ इसके विलय से इंडियन एयरलाइंस के लिए वित्तीय संकट उत्पन्न हुआ।

प्रफुल्ल पटेल मई 2004 से जनवरी 2011 तक नागरिक उड्डयन के लिए केंद्रीय मंत्री थे। पब्लिकेशन हाउस की माफी के बाद, पटेल ने ब्लूम्सबरी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया था।  2014 में कहा गया कि जब पटेल ने ब्लूम्सबरी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया था, तब उन्होंने जितेंद्र भार्गव के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। उनके वकील सतीश मनेशिंदे थे, जो वर्तमान में सुशांत सिंह राजपूत मामले में रिया चक्रवर्ती का केस लड़ रहे हैं।

स्टॉक में बची हुई पुस्तक की सभी प्रतियों को नष्ट कर दिया गया था। भार्गव ने कहा था कि दस्तावेजों के आधार पर उनके आरोपों की पुष्टि की जा सकती है। जितेंद्र ने बताया कि बाद में उन्होंने पुस्तक को स्वयं प्रकाशित किया।

गौरतलब है कि अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने वापस ले लिया है। प्रकाशन संस्थान ने इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर ऐसा किया।

उन्होंने इसके पीछे का एक कारण उनकी जानकारी के बिना लेखकों द्वारा आयोजित किए गए वर्चुअल प्री-पब्लिकेशन इवेंट लॉन्च करने को बताया। प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने यह बातें एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा।

अब इस्लामी कट्टरवादी आतिश तासीर ने खुलासा किया है कि स्कॉटिश इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिम्पल ही वो व्यक्ति है, जिसने इस पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगवाई है। आतिश तासीर ने मोनिका अरोड़ा की दिल्ली दंगों पर आने वाली पुस्तक को सत्ता का प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि डेलरिम्पल ने इसके प्रकाशन पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं।

उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि स्कॉटिश लेखक के बिना ये संभव नहीं हो पाता। साथ ही उन्होंने (आतिश तासीर) इस पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने के लिए ब्लूम्सबरी इंडिया का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी और इसके हिंसक लोगों द्वारा इतिहास को बदलने का प्रयास बलपूर्वक किया जा रहा है, इसीलिए इस पुस्तक को वापस लिया ही जाना था।

जिसने किया रेप उससे ही करवा दी 10 साल की बच्ची का निकाह, 6 महीने बाद दे दिया तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। 10 साल की बच्ची का निकाह का निकाह कथित तौर पर उससे करवा दिया गया जिसने उसके साथ बलात्कार किया था। फिर 6 महीने बाद आरोपित ने उसे तीन तलाक दे दिया।

इस महीने की शुरुआत में चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम मुज़फ़्फरनगर के बुढाना थाना क्षेत्र के एक गाँव में काउंसलिंग के लिए गई थी। उसके बाद यह घटना सामने आई। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन ने घटना की जानकारी पुलिस को दे दी।  

चाइल्ड हेल्पलाइन की इंचार्ज पूनम शर्मा के मुताबिक़ पीड़िता की 16 फरवरी को शादी अपनी बहन के देवर से करवा दी गई थी। कथित आरोपित उत्तर प्रदेश के ही शामली ज़िले का रहने वाला है। 4 अगस्त 2020 को आरोपित ने नाबालिग लड़की को उसके घर छोड़ा था। इसके बाद पीड़िता के परिवार वालों ने चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क करने का प्रयास किया था।

ख़बरों के मुताबिक़ पुलिस घटना की जाँच कर रही है। बुढाना थानाध्यक्ष केपी सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि नाबालिग पीड़िता के परिवार की तरफ से अभी तक लिखित में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। जैसे ही उनके पास लिखित में शिकायत होगी वह आगे की कार्रवाई करेंगे। थानाध्यक्ष ने यह भी कहा कि पीड़िता के परिवार वालों से इस संबंध में बात हुई थी, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा अभी तक कुछ भी कागज़ पर नहीं है, सब कुछ अनाधिकारिक है। जैसे ही पीड़िता के परिवार की तरफ से शिकायत मिलती है, वैसे ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी।  

ऑपइंडिया ने घटना के संबंध में चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) से भी बात करने की कोशिश की। हेल्पलाइन की महिला कर्मचारी ने इस संबंध में कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा हम इस घटना के बारे में जानकारी नहीं दे सकते हैं। यहाँ की लगभग सारी जानकारी गुप्त रखी जाती है। इन सारी बातों के अलावा घटना का एक पक्ष सामने आ रहा है।  

कई समाचार समूहों में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ नाबालिग पीड़िता पर उसकी बहन ने शादी का दबाव बनाया था। हैरानी की बात यह है कि 10 साल की लड़की की ऐसे व्यक्ति से शादी कराई गई जिसने उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया था। लड़की को लगभग 6 महीने तक यह सब कुछ झेलना पड़ा। अंत में नाबालिग लड़की से शादी करने वाले आरोपित ने उसे तीन तलाक दे दिया।   

अब चीन को सऊदी अरब ने दिया झटका, 10 अरब डॉलर के समझौते से खींचे हाथ; भारत में निवेश करती रहेगी अरामको

कोरोना वायरस फैलाने के लेकर चीन पूरी दुनिया के निशाने पर है। पिछले दिनों गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के बलिदान होने के बाद चीन को लेकर भारत का रुख सख्‍त होता चला गया। भारत ने एक के बाद एक कई परियोजनाओं में समझौते रद्द कर चीन को झटके दिए। अब सऊदी अरब ने भी चीन को तगड़ा झटका दिया है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको (Aramco) ने चीन के साथ हुए 10 अरब डॉलर (करीब 75 हजार करोड़ रुपए) के समझौते से हाथ खींच लिए हैं।

इस डील के तहत चीन के साथ मिलकर अरामकोएक रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स बनाने वाली थी। चीन के लिए यह बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मची तबाही के बीच तेल की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट के कारण यह फैसला लिया गया है। 

तेल की कीमतों में गिरावट से तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है और ऐसे में मौजूदा हालात को ध्‍यान में रखते हुए अरामको ने चीन के साथ इस डील को फिलहाल निलंबित करने का फैसला किया है।

सऊदी अरब और चीन के बीच हुए डील को निलंबित किए जाने का कारण हालाँकि तेल का सस्‍ता होना बताया जा रहा है, पर इसे लेकर अरामको या उनके चीनी भागीदारों चाइना नॉर्थ इंडसट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन और पंजिन सिनसेन की तरफ से कोई टिप्‍पणी नहीं की गई है। चीन और सऊदी अरब के बीच यह डील फरवरी 2019 में हुई थी, जिस पर खुद सऊदी क्राउन प्रिंस सलमान ने साइन किया था।

माना जा रहा था कि इसके इसके जरिए अरामको जहाँ एशियाई बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती थी। यह भी कहा गया था कि इस डील के बाद सऊदी अरब, चीन में बड़ा निवेश कर सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार में जारी अनिश्चितता को देखते हुए इस डील को ठंडे बस्‍ते में डाल दिया गया है। दरअसल कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनियाभर में पाबंदियाँ हैं और तेल की माँग भी काफी घट गई है।

तेल की घटती माँग का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में तकरीबन सभी कंपनियाँ प्रभावित हैं। सऊदी अरामको भी तेल की घटती माँग और कीमत में गिरावट की समस्‍या से जूझ रही है। ऐसे में उसने फिलहाल कैपिटल एक्सपेंडिचर घटाने पर फोकस किया है और इसी के तहत उसने चीन साथ इस बड़ी डील पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। इससे चीन को व्‍यापक पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक अरामको ने महाराष्ट्र में प्रस्तावित 44 अरब डॉलर के रत्‍नागिरी मेगा रिफाइनरी प्रोजेक्ट में निवेश का ऐलान किया था। आशंका जताई जा रही थी कि अगर तेल की कीमतें ऐसे ही कम होती रहीं तो कंपनी भारत में भी निवेश से पीछे हट सकती है। हालाँकि अरामको ने इस पर साफ कर दिया है कि कंपनी ने भारत में अपनी निवेश योजना में कोई बदलाव नहीं किया है। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के साथ 15 अरब डॉलर का सौदा भी शामिल है।

वहीं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने शनिवार (अगस्त 22, 2020) को कहा कि इस वर्ष ‘मेड-इन-चाइना’ गणेश की मूर्तियों का आयात शून्य रहा है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर बोलते हुए, CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, “हर साल देश भर में भगवान गणेश की लगभग 30 करोड़ मूर्तियाँ खरीदी जाती हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका ने चीन पर कोरोना संक्रमण समेत कई बातों को लेकर निशाना साधा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की एप्लीकेशन टिकटॉक और वी चैट के मालिकों से किसी भी तरह का लेन-देन करने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके साथ ही रूस ने चीन को दी जाने वाली S-400 मिसाइल की डिलीवरी पर रोक लगा दी थी।

हाल ही में भारतीय रेलवे ने 44 नए हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेन निर्मित करने के टेंडर को रद्द कर दिया है। भारत सरकार की ओर से टेंडर रद्द किए जाने का कदम चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योेंकि 44 हाई स्पीड ट्रेन की आपूर्ति के लिए 6 दावेदारों में चीनी संयुक्त उद्यम सीआरआरसी पॉयनियर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड अकेली विदेशी बोलीदाता के रूप में उभरी थी। लेकिन चीन से इसका संबंध होने के कारण टेंडर रद्द कर दिया गया।