Home Blog Page 5429

NRC, बैंकिंग-सिस्टम से लेकर सावरकर तक… मनमोहन ने सच बोलकर कॉन्ग्रेस का कर दिया छीछालेदर

विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनैतिक गलियारों में बयानबाजी की बयार तेज हो गई है। अभी तक जहाँ एनआरसी लागू करने से लेकर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की बात का कॉन्ग्रेस खुलकर विरोध कर रही थी, वहीं उसी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक आयोजन में 3 बार पार्टी लीक से हटकर बिलकुल अलग बयान दे डाले।

उन्होंने बताया कि पार्टी ने इंदिरा गाँधी के समय में वीर सावरकर पर पोस्टल स्टैंप जारी किया था। उन्होंने ये भी कहा कि वे NRC के ख़िलाफ नहीं हैं। उन्होंने माना कि उनके कार्यकाल में बैंकिग सिस्टम में गलतियाँ हुईं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर मोदी और राज्य की फडणवीस सरकार को फेल करार दिया। लेकिन इस बीच कई मौक़े आए जब उनकी बातों में विरोधाभास दिखा।

दरअसल, इस दौरान एनआरसी पर अपनी राय रखते हुए बताया कि वे NRC के ख़िलाफ़ नहीं हैं। लेकिन उनका ये भी मानना है कि कानून मुस्लिमों के साथ भेदभाव करता है। इसलिए एनआरसी के संदर्भ में मानवता का पक्ष नहीं भूलना चाहिए।

इसके बाद उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉन्ग्रेस कार्यकाल में बैंकिंग सिस्टम हुई गड़बड़ी पर लगाए आरोपों को स्वीकारा। उन्होंने मान लिया कि कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में गलती हुई। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के राज में जो हुआ, वह कमजोरियाँ थीं। लेकिन वर्तमान सरकार को हमारी कमजोरियों से सीखकर अर्थव्यवस्था की समस्याओं से निबटना चाहिए।

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता मनमोहन सिंह ने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में सावरकर को भारत रत्न देने की माँग उठाने पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कॉन्ग्रेस सरकार ने सावरकर पर इंदिरा गाँधी के समय पोस्टल स्टैंप जारी किया था। हालाँकि, उन्होंने ये भी साफ किया कि इसके बावजूद वो हिन्दुत्व की उस विचारधारा का समर्थन नहीं करते, जिसके पक्षधर वीर सावरकर थे।

यहाँ वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने की माँग उठने पर बता दें जहाँ कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता उन्हें गाँधी जी की मौत के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं, वहीं उनकी पार्टी को एक नए आयाम देने वाली इंदिरा गाँधी साल 1980 में उनकी तारीफ कर चुकी हैं।

इस संबंध में कॉन्ग्रेस की पूर्व और शिवसेना की वर्तमान प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी इंदिरा गाँधी का एक लेटर ट्वीट कर चुकी हैं। इसमें तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के हस्ताक्षर भी दिख रहे हैं। जिसके में वीर सावरकर की जमकर तारीफ कर रही हैं।

कश्मीर: दो सेब व्यापारियों पर आतंकियों ने बरसाईं गोलियाँ, 1 की मौत, दूसरे की हालत नाजुक

आतंकियों ने कश्मीर के शोपियां में पंजाब के अबोहर ज़िले के दो सेब व्यापारियों को गोली मार दी। इनमें से एक की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। हमले में मृतक की पहचान चरणजीत सिंह के रूप में हुई है, वहीं घायल की पहचान संजीव कुमार के रूप में की गई है। संजीव को चार गोलियाँ लगी हैं, उन्हें श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आतंकी फ़रार हैं। 

पुलिस ने बताया कि सेब व्यापारी चरणजीत सिंह और संजीव पर शोपियां ज़िले के ट्रेंज़ में शाम साढ़े सात बजे 3-4 आतंकवादियों ने हमला किया था। दोनों को पुलवामा के ज़िला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ सिंह की मौत हो गई, जबकि संजीव की हालत गंभीर थी और वहाँ से उन्हें श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भेज दिया गया।

इससे पहले, छत्तीसगढ़ के ईंट भट्ठा कार्यकर्ता सेठी कुमार सागर की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह पुलवामा के नेहामा इलाक़े में अपने कार्यस्थल के पास अपने दोस्त के साथ टहलने गए थे। घटना के बाद सेना ने उस इलाक़े की घेराबंदी की और घटनास्थल के पास आवासीय कॉलोनियों की तलाशी ली।

दक्षिणी कश्मीर में पिछले 48 घंटों में यह तीसरी घटना है, जिनमें आतंकियों ने दहशत फैलाने के मंशा से हमले किए। इन तीन घटनाओं में जम्मू-कश्मीर के बाहर के तीन लोग संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा मारे गए। सोमवार (14 अक्टूबर) की रात शोपियां के शिरमाल के सुंधु गाँव में राजस्थान के एक ट्रक चालक शेरी ख़ान की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने ट्रक में सेब के डिब्बे लोड कर रहा था।

हत्या से प्रवासी श्रमिकों और ट्रक चालकों में दहशत फैल गई है जो घाटी से सेब की ढुलाई के लिए कश्मीर में बड़ी संख्या में मौजूद हैं। पिछले सप्ताह शनिवार (12 अक्टूबर 2019) को श्रीनगर के हरि सिंह हाई स्ट्रीट इलाक़े में ग्रेनेड हमला किया था, इसमें एक महिला समेत सात लोग घायल हुए थे। इससे पहले, पाँच अक्टूबर अनंतनाग में डीसी कार्यालय के बाहर भी ग्रेनेड से हमला किया गया था, जिसमें 14 लोग घायल हो गए थे। 

श्रीनगर के नवाकदल इलाक़े में 28 सितंबर को ग्रेनेड हमला किया गया था, इसमें सीआरपीएफ की 38वीं बटालियन के जवानों को निशाना बनाया था।

‘सावरकर नहीं होते तो 1857 का स्वतंत्रता संग्राम सिर्फ विद्रोह बनकर रह जाता, सही इतिहास लिखने की जरूरत’

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज (अक्टूबर 17, 2019) 1857 के विद्रोह के ऐतिहासिक होने के पीछे वीर सावरकर को वजह बताया। उन्होंने कहा अगर आज सावरकर नहीं होते तो 1857 का विद्रोह कभी स्वतंत्रता संग्राम में दर्ज नहीं हो पाता।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया कि वे सावरकर को भारत रत्न देने की माँग करेंगे। जिसके बाद कॉन्ग्रेसी नेताओं ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। जिस पर अमित शाह ने आज वाराणसी की रैली के दौरान खुलकर जवाब दिए।

उन्होंने कहा, “अगर सावरकर नहीं होते तो हम 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को अंग्रेजों के नजरिए से देख रहे होते। वीर सावरकर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने 1857 की क्रांति को पहले स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया था।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “वक्त आ गया है, जब देश के इतिहासकारों को इतिहास नए नजरिए से लिखना चाहिए। उन लोगों के साथ बहस में नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने पहले इतिहास लिखा है। उन्होंने जो कुछ भी लिखा है, उसे रहने दीजिए। हमें सत्य को खोजना चाहिए और उसे लिखना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपना इतिहास लिखें। हम कितने वक्त तक अंग्रेजों पर आरोप लगाते रहेंगे?“

बता दें कि गृहमंत्री से से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महाराष्ट्र के अकोला में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सावरकर पर अपना पक्ष साफ बता चुके हैं। जहाँ उन्होंने कहा था, “ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं कि राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा। वीर सावरकर को आए दिन गालियाँ देने वाले, उनका अपमान करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का कदम-कदम पर अपमान किया। उनको दशकों तक भारत रत्न से वंचित रखा।”

‘वीर सावरकर थे भारत के महान सपूत’ – पढ़ें वो खत जिसे इंदिरा गाँधी ने खुद लिखा था

लोक सभा चुनावों के ठीक पहले कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता का पद छोड़ कर शिव सेना में जाने वालीं प्रियंका चतुर्वेदी ने कॉन्ग्रेस को आईना दिखाते हुए ट्वीट किया है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर लिखा गया पत्र ट्वीट करते हुए उन्होंने आज की कॉन्ग्रेस को कम्युनिस्ट और वामपंथी [(Commie/Left)”] करार दिया है।

सावरकर थे ‘remarkable son of India’

प्रियंका द्वारा ट्वीट किए गए पत्र में इंदिरा गाँधी ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक’ संस्था के सचिव श्री पंडित बाखले को सावरकर की जन्म शताब्दी को लेकर उनकी योजनाओं के लिए सफलता की कामना की थी। साथ ही उन्होंने न केवल सावरकर को “भारत का विशिष्ट पुत्र” बताया था, बल्कि यह भी कहा था कि उनका ब्रिटिश सरकार से निर्भीक संघर्ष स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में अपना खुद का महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यह पत्र 20 मई 1980 का है, और इंदिरा गाँधी के हस्ताक्षर पत्र पर साफ़ देखे जा सकते हैं।

कॉन्ग्रेस के लिए असहज स्थिति

इंदिरा गाँधी का यह पत्र कॉन्ग्रेस के लिए असहज स्थिति है, क्योंकि पार्टी पिछले कुछ समय से सावरकर को साम्प्रदायिक और फासीवादी के अतिरिक्त ‘गद्दार’ और ‘कायर’ भी बताने में लगी है। अगस्त में कॉन्ग्रेस के दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र नेताओं ने सावरकर की प्रतिमा पर कालिख पोतने के अलावा उस पर जूतों की माला पहनाई थी। एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने ट्विटर पर लिखा था कि सावरकर की प्रतिमा उन स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा के साथ नहीं लगाई जानी चाहिए, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी। सुरभि ने लिखा था कि सावरकर अंग्रेजों को क्षमा याचिकाएँ लिखा करते थे।

ऐसे में कॉन्ग्रेस की 1947 के बाद की सबसे बड़ी नेत्रियों में गिनी जाने वाली इंदिरा गाँधी के शब्दों और अपने स्टैंड में साम्य समझा पाना कॉन्ग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगी।

जल्द पता चलेगा कि 1993 के मुंबई विस्फोट के अपराधियों को भागने की अनुमति किसने दी: PM मोदी

नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र के अकोला में अपनी रैली में प्रफुल्ल पटेल के दाऊद-सहयोगी इक़बाल मिर्ची के साथ कथित लिंक सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों पर निशाना साधा। रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब महाराष्ट्र में आये दिन बम धमाके होते रहते थे। उस समय जिन भी लोगों पर सवाल उठे, धमाकों के वे मास्टरमाइंड बचकर निकल गए और दुश्मन देशों में जाकर बसेरा बना लिया। आज हिन्दुस्तान उन लोगों से पूछता है आख़िर ये कैसे हुआ, देश के इतने बड़े गुनाहगार कैसे भाग गए?

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पर हमला जारी रखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब कोई क्षेत्र विकास के पथ पर बढ़ता है, शहरीकरण तेज़ होता है तो उसे अक्सर बिल्डर माफ़िया की बीमारी भी पकड़ लेती है। 2014 से पहले महाराष्ट्र और मुंबई की स्थिति यही थी। रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डर माफ़िया और अंडरवर्ल्ड का क्या रिश्ता रहा है, कैसे-कैसे काम यहाँ हुए हैं, उसके दाग आज तक कॉन्ग्रेस और NCP के नेताओं पर हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र को ख़ून के रंग से रंग देने वालों के साथ इन लोगों की डीलिंग चलती थीं। इन्हें पता था कि इनकी पोल खुलने वाली है, इनके कारनामें सामने आएँगे। इसलिए ये डरे हुए थे और इसलिए पिछले कुछ दिनों से इन्होंने जाँच एजेंसियों और केंद्र सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया, लेकिन वक़्त अब बदल चुका है। हर कारनामें का जवाब देश लेकर रहेगा, महाराष्ट्र की जनता लेकर रहेगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के साथ जुड़ी सम्पतियों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। मुंबई पुलिस के सूत्रों के अनुसार कई राजनेताओं, कई फ़र्मों और निजी कंपनियों के लिंक उन संपत्तियों के साथ पाए गए।

सूत्रों के अनुसार, ED ने इक़बाल मेमन उर्फ़ मिर्ची नाम के दाऊद के एक प्रमुख सहयोगी की सम्पत्तियों को शून्य कर दिया है। भारत और ब्रिटेन में मिर्ची के व्यापारिक उपक्रमों और सम्पत्तियों पर नज़र रखते हुए, ED को एक ऐसी फ़र्म का पता चला है जिसके तार UPA के पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और उनकी पत्नी वर्षा पटेल से जुड़े हुए है।

NCP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के साथ वित्तीय लेन-देन से जुड़े पुख़्ता दस्तावेज़ OpIndia के पास मौजूद हैं। हमारे द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेज़ों जिन पर प्रफुल्ल पटेल के हस्ताक्षर हैं उनसे पता चला है कि उन दस्तावेज़ों का संबंध दाऊद इब्राहिम के प्रमुख इक़बाल मेमन से जुड़ा है।

भारत के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक शरद पवार, जो 1993 के मुंबई बम धमाकों के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, उस समय उन्होंने सेक्यूलरिज्म को बढ़ावा देने और दो सम्प्रदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के नाम पर एक ऐसे बम विस्फोट का आविष्कार कर दिया, जो हुआ ही नहीं था। 

मुंबई में हमलों के तुरंत बाद शरद पवार दूरदर्शन स्टूडियो पहुँचे और घोषणा की कि कुल 13 विस्फोट हुए। उन्होंने जिस विस्फोट का अविष्कार किया उसके बारे में उन्होंने बताया कि वो एक मस्जिद में हुआ था। श्रीकृष्ण आयोग के सामने गवाही देते हुए, पवार ने LTTE पर बम विस्फोट का आरोप मढ़ने कोशिश की। जोकि सरासर झूठ था, उन्होंने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया गया था, जिससे दोनों मजहबों की झड़पों से बचा जा सके।

बता दें कि हरियाणा और महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएँगे।

‘रेप सीन के रिहर्सल के बहाने सुदीप्तो चटर्जी ने मेरे साथ किया रेप’ – छात्रा एंजेला ने लगाया आरोप

अमेरिका के न्यू यॉर्क, टफ्ट्स, कैलिफ़ोर्निया, बर्कले जैसे नामचीन विश्वविद्यालयों से लेकर भारत के जेएनयू में पढ़ाने वाले प्रोफेसर सुदीप्तो चटर्जी यौन शोषण के आरोपों में घिर गए हैं। यह मामला तब सामने आया जब चटर्जी की ही एक छात्र ने फेसबुक पर एक लम्बी पोस्ट लिखकर विस्तार से बताया कि यौन शोषण के एक नाट्य सीन की रिहर्सल के दौरान सुदीप्तो द्वारा असलियत में छात्रा (एंजेला मोंडल) को यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा।

अपनी पोस्ट में इस मामले को विस्तार से लिखते हुए मोंडल ने बताया कि जब वह अपने इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित ‘लिसिस्त्राते (Lysistrata)’ नामक नाटक के लिए ऑडिशन देने गईं तो चटर्जी ने उन्हें अपने निर्देशन में बनने वाली फिल्म भाद्रोजा में अभिनय करने के लिए फ़ाइनल कर लिया।

मोंडल ने बताया, “भाद्रोजा के लिए तीन शो करने के बाद एक दिन अचानक से चटर्जी ने कहा कि शायद एक सीन कारगर नहीं हुआ है और वे मुझसे उम्मीद कर रहे थे कि इसमें मैं उनकी मदद करूँ। फिर उन्होंने (चटर्जी ने) मुझे अभिनय सिखाने के बहाने अपने यहाँ बुलाया। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें डायफ्राम ब्रीदिंग और साइकोफिजिकल एक्टिंग सिखाऊंगा। इसके बाद उन्होंने मुझसे नाटक के एक सीन के सम्बन्ध में बात करते हुए बलात्कार और उसके आघात की बात की। फिर उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ लिया और कहा कि इसे शारीरिक सम्बन्ध से जोड़कर नहीं देखो क्योंकि अगर वो ऐसा कर रहे होते तो मुझे उनके लिंग के हार्डनेस से पता चल जाता।

एंजेला ने इसके आगे बताया, “इसके बाद सुदीप्तो ने मुझे आँखे बंद कर लेट जाने को कहा। साथ ही ऊपर के रेप सीन संबंधी डायलॉग बोलने को कहा। इसके बाद उन्होंने मुझे उंगलियों से छूना शुरू किया और कहा कि उनकी छुअन को सेंस करते हुए डायलॉग बोलूँ। फिर अचानक से उस शख्स ने (बिना मुझे बताए) अपनी उँगलियों से मेरे अंदर पेनिट्रेट किया। इतना ही नहीं, इसके बाद पेनिट्रेशन के दौरान यह भी बोला कि मैं अपनी डायलॉग और ऊंची आवाज़ में बोलूँ।”

पीड़ित एंजेला ने अपनी पोस्ट में अपन आपबीती बयाँ करते हुए लिखा, “मैं इस घटना के बाद एकदम टूट गई, मेरा बदन अकड़ गया था, मेरी आवाज़ जैसे कहीं खो गई हो। मेरी हालत एकदम एक लाश जैसी हो गई थी, मेरे घुट-घुटकर रोने पर वह एकदम से पीछे हट गया। उसने मुझसे कहा कि नाटक के सीन के लिए मैं तुम्हें जिस मानसिक और भावनात्मक स्थिति में लाना चाहता था, यह उसकी एक प्रक्रिया थी, जो पूरी हुई।”

सुदीप्तो चटर्जी पर छात्रा ने लगाए यौन शोषण के आरोप

एंजेला ने आरोप लगाते हुए कहा कि सुदिप्तो चटर्जी ने उनके साथ यह हरकत एक बार फिर दोहराने की कोशिश की थी मगर इस बार एंजेला ने हिम्मत जुटाकर चटर्जी को दूर करने में ज़रा भी देर न लगाई। इसके बाद चटर्जी फिर कभी उसके साथ दुर्व्यवहार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका बल्कि और एंजेला से दूर हो गया।

बीते कल में छिपे रूह को कँपकँपा देने वाले अपने इतिहास को याद करते हुए एंजेला ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि इस घटना के बाद वे सदमे और अस्वीकार्यता में जी रही थी। हालाँकि इन सब के बावजूद वे मानसिक कष्ट से जूझते हुए भी चटर्जी से बचते-बचाते उन्हीं की भाद्रोजा फिल्म में काम भी कर रही थीं। अंततोगत्वा मोंडल ने भद्रोजा फिल्म के इस काम से बाहर निकलने फैसला किया।

मोंडल का दावा है कि सुदीप्तो चटर्जी से इतना बचने-बचाने के बावजूद आख़िरकार जब व्हाट्सएप पर दोनों का आमना-सामना हुआ तो लड़की एंजेला ने चैट में अपना स्टेटमेंट रखा मगर इसके तुरंत बाद ही चटर्जी ने उन्हें व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया। पीड़ित लड़की ने लिखा कि इस पूरे घटनाक्रम के बारे में चटर्जी की पत्नी अनीशा चक्रवर्ती को शुरुआत से ही मालूम था। लेकिन उसने एंजेला से इस पूरे मामले को भूल जाने को कहा था। अनीशा ने कहा था कि इसके चलते उनके रिश्ते ख़राब हो सकते हैं।

एंजेला मोंडल ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा है कि उसने इस बात को चटर्जी के थियटर वाले समूह ‘स्पेक्टेटर्स’ के उसके करीबी लोगों से साझा करने की भी पहल की थी। सबने व्यग्तिगत रूप से मामले को लेकर पीड़िता से हमदर्दी तो जताई मगर सिर्फ पर्सनल चैट में, क्योंकि सुदीप्तो चटर्जी की पहुँच और उसके कद के चलते किसी ने भी खुलकर पीड़िता का पक्ष नहीं लिया और न ही कोई उसके समर्थन में बोला।

पीड़िता एंजेला मोंडल ने बताया कि चटर्जी के खिलाफ उसने अपने संस्थान में शिकायत कर दी है जिसके बाद सोमवार 16 अक्टूबर को उसे इस सम्बन्ध में मीटिंग के लिए बुलाया गया था। मीटिंग में उन्हें बताया गया कि चटर्जी ने मामले की सुनवाई के एक ही दिन पहले परोक्ष रूप से संस्थान में अपनी सेवाओं से इस्तीफ़ा दे दिया है। इस पर एंजेला ने अपनी राय रखते हुए कहा, “क्या मैं इस तरह का न्याय डिज़र्व करती हूँ? यह एक खुला राज़ है कि सुदिप्तो चटर्जी आदतन यौन शोषण करने वाला व्यक्ति है। कई कई ऐसी लड़कियाँ और भी हैं, जिन्हें उसने अपना शिकार बनाया है मगर उस पर इसका कभी कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि शायद ज़्यादातर लड़कियां इस पर खुलकर कभी बोलने के लिए आगे नहीं आईं।”

अपनी पोस्ट के आखिर में एंजेला मोंडल ने लिखा, “मैं अपनी आवाज़ बुलंद कर रही हूँ, खासकर उन महिलाओं के लिए जो यौन शोषण झेलती हैं। लोगों को यह जानना बहुत ज़रूरी है कि एक बलात्कारी एक मशहूर और सभ्य, संभ्रांत वर्ग के लोगों के बीच खुले-आम घूम रहा है जिससे कि वह इस सन्दर्भ में ज़रूरी कदम उठा सकें। न ही मैं उसकी पहली शिकार थी और न ही उसकी आखिरी, लेकिन हमें उसको रोकना होगा।”

मदरसों में 1 महीने में तीसरी बार छापेमारी: यौन उत्पीड़न, घोर प्रताड़ना, 1000 छुड़ाए गए

इस्लामिक शिक्षा और नशामुक्ति के नाम पर नाइजीरिया के मदरसों में यौन उत्पीड़न का घिनौना खेल धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। खबर है कि बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को उत्तरी नाइजीरिया के मदरसों में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 500 बच्चों और पुरुषों को आजाद करवाया। इनमें से अधिकतर को जंजीरों से बाँधकर रखा गया था। इनका यौन शोषण किया जाता था। इनसे मारपीट की जाती थी। इसके अलावा इन्हें हर अकल्पनीय प्रताड़ना दी जाती थी।

बुधवार को कातसिना में हुई ये छापेमारी एक महीने में लगातार तीसरी छापेमारी है। जिसमें अब तक 1000 से ज्यादा पुरूष और बच्चे आजाद करवाए जा चुके हैं। इससे पहले 29 सितंबर को नाइजीरिया के कादुना में छापेमारी के दौरान 300 बच्चों और पुरुषों को आजाद करवाया गया था। उस समय भी खुलासा हुआ था कि बंधक बनाए लोगों को जंजीरों से बाँधकर हर तरीके से प्रताड़ना दी जा रही थी। उन्हें भूखा रखा जाता था। उनका शोषण होता था। उनकी स्थिति इतनी खराब थी कि आजाद होने के बाद भी उन्हें चलने के लिए मदद की जरूरत पड़ रही है।

लेकिन, बुधवार को प्रकाश में आए मामले में पुलिस के बयान का हवाला देकर कहा जा रहा है कि मुक्त कराए गए 500 में से 300 लोग ऐसे हैं जिन्हें नियमित तौर पर प्रताड़ित नहीं किया गया लेकिन 200 लोग ऐसे हैं जिनको प्रतिदिन प्रताड़ना दी गई।

पुलिस ने बताया कि मदरसे की दूसरा बिल्डिंग सबसे ज्यादा खतरनाक थी। वहाँ बच्चों का शोषण होता था। क्योंकि कई नए छात्रों और लोगों को पहले मदरसे में रखा जाता, फिर उन्हें उस दूसरी बिल्डिंग में भेज दिया जाता। जहाँ उनका यौन शोषण होता।

उल्लेखनीय है कि नाईजीरिया के उत्तरी इलाके में इस्लामिक स्कूलों को अलमाजिरिस कहा जाता है। ये मुस्लिम अधिकारों पर केंद्रित क्षेत्रीय संस्था होती है, जिसमें 10 लाख के करीब बच्चे जाते हैं। लोग अपने बच्चों को यहाँ शिक्षा लेने भेजते हैं, कुछ बुरे बर्ताव में सुधार के लिए भेजते हैं, और कुछ अपने बच्चों के अनुशासन में रहने के लिए भेजते हैं। लेकिन यहाँ इनके साथ क्या होता है, इसका खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है।

बता दें है कि कातसिना के निवासी और नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी ने जून में कहा था कि वह अलमाजिरिस को बैन करने की सोच रहे हैं, पर अभी वो ऐसा करेंगे नहीं। लेकिन, मंगलवार को उन्होंने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि वे जाकर ऐसे सभी केंद्रो की तलाश करें और जहाँ भी ये हों, उन्हें बैन कर दिया जाए। प्राप्त जानकारी के मुताबकि ये आदेश सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर लागू करने के लिए कहा गया है जहाँ धर्म के नाम पर लोगों से दुर्व्यवहार होता है। अन्य अलमाजिरिस पर नहीं।

वेटिकन ने नन के निष्कासन को सही ठहराया: बलात्कार आरोपित बिशप के विरोध का खामियाज़ा भुगतना पड़ा

कैथोलिक ईसाईयों की सबसे बड़ी संस्था वैटिकन चर्च ने बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुल्लकल के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली नन के निष्कासन को सही ठहराते हुए उनकी अपील नामंजूर कर दी है। इसके पीछे कारण बताया गया कि उनकी जीवनचर्या “FCC नियमों के खिलाफ” थी, और नियमों के उललंघन का एक हिस्सा बिशप मुल्लकल के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से बोलना भी था। FCC (फ्रैंसिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन) रोमन कैथोलिक चर्च का ही एक अंग है।

‘मेरी समझ के परे पत्र की भाषा, नहीं छोड़ूंगी हॉस्टल’

NDTV से बात करते हुए सिस्टर लूसी ने कहा कि वैटिकन के पत्र की अधिकाँश भाषा उनकी समझ के परे है, इसलिए वे इस इंतज़ार में हैं कि कॉन्ग्रेगेशन के वरिष्ठ सदस्य उन्हें अपनी ओर से उनकी समझ में आने वाली भाषा में पत्र लिखें। पत्र का केवल पहला हिस्सा अंग्रेजी में है, बाकी का पत्र चर्च की मूल भाषा लैटिन में है। उन्होंने उस पत्र में किसी द्वितीय अपील की संभावना और उसकी अंतिम तिथि की भी संभावना तो जताई, लेकिन साथ ही साफ़ किया कि वे क़ानूनी विकल्पों के संभावना भी तलाश रहीं हैं। “किसी भी परिस्थिति में मैं हॉस्टल छोड़ कर जाने की इच्छुक नहीं हूँ।”

गाने, किताबें प्रकाशित करना भी ‘गुनाह’

जीवन के छठे दशक में मौजूद सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को निकालने का निर्णय उनका पक्ष सुने बिना ही लिए जाने की बात मीडिया में कही जा रही है। न्यूज़ 18 ने उनके हवाले से लिखा है, “अगर वे चाहते, तो मेरा पक्ष कम-से-कम फ़ोन पर सुन सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मेरे साथ इंसाफ नहीं हुआ है।”

अगस्त में किए गए उनके निष्कासन के पीछे जो आरोप हैं, उनमें बिशप फ्रैंको मुल्लकल पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नन के पक्ष में सार्वजनिक बयान देने और उनका समर्थन करने के अतिरिक्त किताबों और गानों का प्रकाशन और उनसे कमाई, कार खरीदने और चलाने जैसे आरोप शामिल हैं।

यह साफ़ कर देना ज़रूरी है कि कैथोलिक चर्च के नन और पादरी गरीबी की शपथ (vow of poverty) अवश्य लेते हैं, जिसके आधार पर सिस्टर लूसी ने यदि पैसे कमाए या कार खरीदी हो तब तो उन पर मामला बनता है, लेकिन किताबों और गानों के महज़ प्रकाशन की बात करें, तो चर्च और चर्च के सदस्यों की मज़हबी प्रचार गतिविधियों का यह खुद हिस्सा है। इसी तरह, कैथोलिक चर्चों के कई पादरी कार चलाते हुए देखे जा सकते हैं।

फ़िलहाल सिस्टर लूसी वायनाड के कॉन्वेंट में रह रहीं हैं, जहाँ उन्हें अन्य ननों द्वारा सामाजिक रूप से बहिष्कृत किया जा चुका है। न केवल सामाजिक बहिष्कार, बल्कि उन्हें चर्च की मूल मज़हबी गतिविधियों, जैसे बाइबिल की शिक्षा और उसका प्रचार, चर्च में ईसा मसीह से प्रार्थना करना आदि, जोकि हर ईसाई के पंथिक अधिकार हैं, से भी रोक दिया गया है।

फ्रैंसिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन ने अगस्त में ही उनकी माँ को पत्र लिख कर उन्हें कॉन्वेंट से ले जाने को कह दिया था।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना ‘चर्च के नियमों’ का उल्लंघन?

कार चलाने के अलावा उन पर कार चलाना सीखने और लाइसेंस बनवाने का भी आरोप है। इसे चर्च ने ‘grave violations’ (गंभीर उल्लंघन’) की संज्ञा दी है। उन पर ऐसे ही कुल 14 आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें उन्होंने जाबूझकर अपनी छवि खराब करने की साजिश के रूप में ख़ारिज कर दिया है।

मुख्य आरोप, बिशप फ्रैंको मुल्लकल के खिलाफ नन के समर्थन, के बारे में उनका कहना है, “मैंने केवल अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। यह मेरा दायित्व था कि अपनी ईसाई यात्रा में ऐसा भयावह अनुभव झेलने वालीं असहाय सिस्टर्स को सांत्वना और सहायता देना। इसे विद्रोह के रूप में देखा और प्रस्तुत किया जाना गलत है।”

विपक्षी नेताओं को मोदी का चैलेंज: कश्मीर जाना है तो मुझे बताएँ, मैं करूँगा इंतजाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के प्रचार में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। आज मोदी ने बीड के परली में रैली को सम्बोधित करते हुए कॉन्ग्रेस व एनसीपी को कई मुद्दों पर घेरा। पीएम मोदी ने कहा कि युवा कॉन्ग्रेस-एनसीपी का साथ छोड़ रहे हैं और बुजर्ग वहाँ निराश हैं। इसके अलावा पीएम ने कश्मीर के मसले पर भी विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर आपको कश्मीर जाना है तो मुझे बताइए, मैं इंतजाम करूँगा।

प्रधानमंत्री ने कश्मीर के मसले पर विपक्षी नेताओं को घेरते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कि यह फैसला देश को बर्बाद कर देगा। 3 महीने हो गए हैं, क्या देश बर्बाद हो गया? एक और कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि 370 हटाकर हमने कश्मीर को खो दिया है। क्या हमने कश्मीर खो दिया है? पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आप कश्मीर जाना चाहते हैं तो मुझे बताइए, मैं इंतजाम करूँगा।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कश्मीर से 370 को हटाने का फैसला किसी की हत्या करने जैसा है। मोदी ने कहा, “एक नेता ने कहा कि ये भारत की राजनीति का काला दिन है। एक नेता ने कहा कि ये लोकतंत्र के खिलाफ है, एक और बड़े नेता ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की खत्म हो गया।”

मोदी ने यह भी कहा, “देश की एकता-अखंडता में कॉन्ग्रेस को हिन्दू मुस्ली नजर आता है और इतिहास में जब भी 370 की चर्चा होगी तो देशहित में किए गए निर्णय को विरोध करने वालों का, उनके बयानों का जिक्र जरूर होगा।”

पीएम मोदी ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा, “आज एकसाथ मुझे दो-दो भगवानों का दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। यहाँ पहुँचते ही पहले बाबा वैद्यनाथ के चरणों में चला गया, उसके बाद इस विशाल जनता जनार्दन का दर्शन करने का मौका मिला, जनता भी भगवान का रूप होती है। बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद हम सभी पर बना हुआ है। सोमनाथ से लेकर वैद्यनाथ तक, काशी विश्वनाथ से लेकर केदारनाथ तक, सम्पूर्ण विश्व पर महादेव की कृपा बनी हुई है। बाबा वैद्यनाथ का आशीर्वाद पूरे बीड पर रहा है और बीड की जनता का आशीर्वाद और विश्वास हमेशा भाजपा पर रहा है। आपने बार-बार, हर बार यहाँ कमल खिलाया है। इस बार तो मुझे लगता है कि पहले के सारे रिकॉर्ड टूट जाएँगे।”

5 बीवियों वाले दिलशाद खान ने ठगा 50 महिलाओं को: AIIMS में नौकरी लगवाने का देता था लालच

मध्य प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स ने एक गैंग का पर्दाफाश किया है। ये गैंग अब तक 50 से अधिक महिलाओं को एम्स में नौकरी दिलवाने के बहाने ठग चुका है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश में पुलिस को एक शिकायत मिली। इस शिकायत में था कि कुछ लोग मिलकर महिलाओं को नर्स की नौकरी का लालच देकर उनसे पैसे हड़प रहे हैं। बाद में ये मामला एसटीएफ को सौंपा गया।

जाँच हुई तो पता चला कि यह एक गैंग है, जिसके लीडर का नाम दिलशाद खान है और वह जबलपुर का निवासी है। जबकि उसका साथी आलोक कुमार भोपाल का रहने वाला है।

मीडिया से बातचीत में स्पेशल टास्क फोर्स के ADG अशोक अवस्थी ने बताया, “ये गैंग अब तक 50 से ज्यादा महिलाओं को AIIMS में बतौर नौकरी दिलाने का झाँसा दे चुका है।” जाँच में खुलासा हुआ है कि गैंग लीडर दिलशाद खान की पाँच बीवियाँ हैं और उसने उनके भारी खर्चें उठाने के लिए ही लोगों को छलना शुरू किया।

खान ने पूछताछ में बताया कि उसकी एक बीवी जबलपुर में एक प्राइवेट क्लिनिक चलाती है, जबकि दूसरे आरोपित आलोक कुमार की पत्नी सरकारी गर्ल्स हॉस्टल में सुप्रीटेंडेंट हैं। हालाँकि इन दोनों महिलाओं का अभी तक इस केस से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसका पता नहीं चला है। लेकिन फिर भी उनसे इस मामले के संबंध में पूछताछ करने की संभावना है।

एसटीएफ के अनुसार, ये गैंग उन पढ़ी लिखी महिलाओं को अपना शिकार बनाते थे, जिन्हें नौकरी की जरूरत होती थी। अब फिलहाल पुलिस गाँव और शहरों में उन महिलाओं को ढूँढने के लिए प्रयासरत हैं, जिन्हें इस गैंग ने बेवकूफ बनाया।