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वायरल Video: दया की भीख माँगते गार्ड्स को सलीम ने जूते तले रौंदा, 4 साथियों समेत गिरफ़्तार

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। दरअसल, किसी मामूली सी ग़लती के कारण एक प्राइवेट कंपनी के मालिक सलीम ख़ान ने अपने दो कर्मचारियों को सज़ा देने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। सज़ा देने को आतुर सलीम जूते समेत उनकी गर्दन-मुँह पर चढ़ गया और उन्हें अपने जूते के नीचे पूरी ताक़त से दबाने लगा। कथित तौर पर दोनों कर्मचारियों ने कोई ग़लती कर दी थी, जिसकी ये ख़ौफ़नाक सज़ा उन्हें भुगतनी पड़ी। 

इस घटना का वीडियो बड़ी तेज़ी से लोगों तक अपनी पहुँच बना रहा है। इसमें आप देख सकते हैं कि सलीम ख़ान अपने ओहदे और ताक़त का इस्तेमाल कर कितनी बेदर्दी के साथ अपने कर्मचारियों को सज़ा दे रहा है। पता चला है कि दोनों कर्मचारी सिक्योरिटी गार्ड के रूप में सलीम के यहाँ नौकरी करते हैं। इस दौरान दोनों कर्मचारी दया की भीख माँगते रहे, लेकिन हैवान बने उनके मालिक को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। पता चला है कि सलीम ख़ान की फ़र्म का नाम बेंगलुरू सुरक्षा बल है, जोकि शहर के एचएसआर इलाक़े में स्थित है। 

बेहद गंभीर मुद्रा में ज़मीन पर पड़ा कर्मचारी पिटते हुए कहता है कि हम जीवन में दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे, लेकिन सलीम उसकी इस गुहार को नज़रअंदाज़ करता हुआ उसकी गर्दन पर चढ़कर क्रूरता के साथ अपने जूते के नीचे उसे दबाए रहता है। ख़ुद को बचाने की कोशिश में कर्मचारी उसे हटाने की भरपूर कोशिश करता है, लेकिन वो नाक़ामयाब रहता है। वहीं, दूसरा कर्मचारी यह कहता दिख रहा है कि चाहे कितना भी पीट लो, लेकिन उसे इस बारे में कुछ नहीं मालूम’। इस तरह की घटना यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि भला ऐसी भी कौन-सी ग़लती इन कर्मचारियों से हो गई होगी जिसके लिए उनका मालिक इस हैवानियत पर उतर आया।

कहने को तो यह वीडियो क्लिप महज़ 1 मिनट 5 सेकंड की है, लेकिन ऐसी क्रूरता बर्दाशत करने के लिए लिए पीड़ितों को एक लम्हा… सौ सदियों के बराबर लगा होगा। छटपटाहट के उस क्षण की पीड़ा को उनसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता, ऐसी बर्बरता जानवरों से भी बदतर व्यवहार है। सलीम ख़ान जैसे लोग इस तरह की हरक़तों से अपनी विकृत मानसिकता को उजागर करते हैं। ऐसे लोग समाज के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं, जो किसी व्यक्ति के साथ इतना बुरा बर्ताव करते हों।

फ़िलहाल, बेंगलुरू पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज कर सलीम ख़ान और उसके चार साथियों को गिरफ़्तार कर लिया है। घटना के बाद से ही दोनों सिक्योरिटी गार्ड ग़ायब हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

BJP के विरोध में जिसने लड़ा चुनाव, उसी के बेटे को PM मोदी ने दिया आशीर्वाद: देखें Viral Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग के बेटे निहाल को आज सुबह ट्विटर के जरिए आशीर्वाद भेजा। प्रधानमंंत्री ने गुल पनाग द्वारा शेयर की गई एक वीडियो को अपने अकॉउंट से रिट्वीट करते हुए निहाल के प्रति ये प्रेम दिखाया।

दरअसल, 16 अक्टूबर को यानी कल गुल पनाग ने अपने बेटे निहाल के साथ एक वीडियो ट्विटर पर डाली। इसके कैप्शन में उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “तो अब निहाल मैगजीन और न्यूजपेपर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहचानने लगा है। अधिकतर सुबह वह खुशी से मुझे उनकी तरफ इशारा करते बताता है। मैंने बड़ी मुश्किल से कैमरे के सामने उससे ऐसा करवाया।”

अब इसके बाद आज सुबह (17 अक्टूबर) पीएम मोदी ने इस वीडियो को रीट्वीट किया और लिखा कि उन्हें ये वीडियो बहुत प्यारा लगा। फिर उन्होंने निहाल को आशीर्वाद भी दिया। उन्होंने ट्वीट में लिखा,”बेहद प्यारा! निहाल को मेरा आशीर्वाद। वह भविष्य में जो भी करे, उसके लिए शुभकामनाएँ। मुझे पूरा विश्वास है कि उसे आपके रूप में एक अच्छा गुरु और गाइड मिलेगा।”

गुल पनाग अक्सर अपने बेटे निहाल के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियोज डालती रहती हैं। लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें तरह-तरह की प्रतिक्रिया मिल रही हैं।

अधिकतर लोग निहाल की क्यूटनेस पर फिदा हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो बॉलिवुड एकट्रेस की वीडियो के नीचे राजनीति से जुड़े प्रश्न करने से नहीं कतरा रहे। चूँकि गुल पनाग 2014 में AAP की ओर से चंडीगढ़ में चुनाव लड़ चुकी हैं, इसलिए लोगों का पूछना है कि आम आदमी पार्टी की नेता ऐसा क्यों कर रहे हैं? कहीं वो भाजपा से तो नहीं जुड़ने वाले?

वहीं दूसरे यूजर का कहना है कि उसे ऐसा महसूस हो रहा है कि गुल पनाग किसी भी वक्त भाजपा ज्वाइन कर सकती हैं।

खैर, गुन पनाग के बारे में बता दें कि वह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं और बीते दिनों वह अपनी 20 साल पुरानी तस्वीर शेयर करने के कारण चर्चा में आईं थी।

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गुल पनाग की बीस साल पुरानी तस्वीर

आने वाले में समय में वह 1 नवंबर को रिलीज होने वाली फिल्म ‘बायपास रोड’ में नजर आएँगी। जबकि अभी हाल ही में उन्हें ‘फैमिली मैन’ सीरीज में देखा गया था।

लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी के हज हाउस का नाम बदलें: योगी सरकार के मंत्री का हज समिति को निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा ने योजना भवन में आयोजित बैठक में लखनऊ हज हाउस का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। फ़िलहाल, हज हाउस का नाम मौलाना अली मियाँ के नाम पर है। इसके अलावा उन्होंने ग़ाज़ियाबाद और वाराणसी हज हाउस के नाम बदलने के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश हज समिति को दिया है।

इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से दी। इसमें उन्होंने लिखा, “लखनऊ में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की बैठक में हज हाउस लखनऊ का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने तथा ग़ाज़ियाबाद एवं वाराणसी हज हाउस के भी नाम बदलने के लिए हज समिति से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।”

ख़बर के अनुसार, वाराणसी और ग़ाज़ियाबाद के हज हाउस का नाम शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां और देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल आज़ाद के नाम पर रखा जाएगा। राज्यमंत्री रज़ा का कहना है कि हज हाउस का नामकरण महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए, जो पूरे देश में आदर्श हों। इन महापुरुषों के ज़रिए आम लोगों और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, उनसे प्रेरित होकर लोगों के मन में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा पैदा होगा।  

उन्होंने कहा कि जहाँ लखनऊ के हज हाउस का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार हो गया है, वहीं वाराणसी और ग़ाज़ियाबाद के हज हाउस नए बने हैं। उनका नाम भी मशहूर हस्तियों के नाम पर रखने का फ़ैसला किया गया है। बता दें कि हज समिति का यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा। इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट ही लगाएगी।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में मुस्लिम धर्म गुरू मौलाना ख़ालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हज हाउस के नामकरण में ऐसी प्रथा रही है कि जिस शख़्स ने जिस क्षेत्र में ख़्याति प्राप्त की हो, उसके नाम पर ही उस क्षेत्र के संस्थानों और इमारतों आदि का नाम रखा जाता है। मौलाना अली मियाँ नदवी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक क्षेत्र में नदवी ने कई बड़े काम किए हैं, उनकी लिखीं तमाम धार्मिक किताबें आज भी संस्थानों में पढ़ाई जाती हैं। इस वजह से लखनऊ के हज हाउस का नाम उनके नाम पर रखा गया था।

मौलाना महली ने तर्क़ देते हुआ कहा कि लखनऊ हज हाउस का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने की बजाए अच्छा होता अगर उनके नाम से कोई नया साइंटिफ़िक सेंटर बनाया जाता।

‘5 साल तक उस औरत की तरह अत्याचार झेला, जिसका पति शराबी होता है’ – कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद तंवर

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कॉन्ग्रेस पार्टी में चल रही गुटबाजी से परेशान होकर अशोक तंवर का आखिरकार पार्टी से मोहभंग हो गया। उन्होंने खुलेआम घोषणा कर दी कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़कर जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) को समर्थन देने वाले हैं। हालाँकि उन्होंने इस दौरान ये भी साफ किया कि वो जेजेपी को सिर्फ़ समर्थन देंगे, पार्टी में शामिल होने का उनका कोई विचार नहीं हैं।

बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को अपने निवास स्थान पर एक प्रेस वार्ता के दौरान अशोक तंवर ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उन्हें पार्टी (कॉन्ग्रेस) के शीर्ष ने अध्यक्ष पद से हटाया, जो कि एक आसामान्य प्रक्रिया थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “5 साल पार्टी में उस औरत की तरह अत्याचार सहन किया, जिसका पति शराबी होता है, जो उसे पीटता है। मगर वो औरत जुल्म सहती रहती है क्योंकि उसे बच्चे पालने होते हैं। हमें भी अपने साथियों के भविष्य की खातिर वो जुल्म सहने पड़े।”

इस कॉन्फ्रेंस के दौरान जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला भी उनके साथ मौजूद रहे। चौटाला की उपस्थिति में तंवर ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “मैंने बड़े दुख के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़ा है। अब मैं दुष्यंत और उनकी पार्टी को समर्थन दूँगा”

तंवर की मानें तो उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी से कोई नाराजगी नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ बीमारियाँ है, जिनका इलाज होना चाहिए। उन्होंने टिकट वितरण का मुद्दा उठाते हुए कहा, “ इन चुनावों में टिकट बाँटते वक्त हमारे जुझारू नेताओं की अनदेखी हुई। अब आगे की लड़ाई में हम अच्छे साथियों व उम्मीदवारों को समर्थन देंगे।” तंवर के अनुसार जेजेपी पार्टी में टिकट वितरण बड़े सरीखे से हुआ है। उनके अनुसार इन चुनावों में कॉन्ग्रेस का घमंड चूर-चूर होने वाला है। वह प्रदेश में तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई लड़ रहे हैं।

तंवर ने इस वार्ता में साफ किया कि उन्होंने जेजेपी को ज्वाइन नहीं किया और न ही इस मामले को लेकर उनका फिलहाल कोई इरादा है। उनके मुताबिक आईएमएलडी व जेजेपी के टूटने से प्रदेश में वोट बिखर गए, वरना भाजपा का हरियाणा में कोई औचित्य नहीं था।

इसके बाद समर्थन में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया कि हालातों के अनुसार अपने साथियों से पूछकर इस पर जवाब देंगे। उनके मुताबिक उन्होंने जेजेपी को समर्थन देने का फैसला भी साथियों से पूछकर ही किया है।

बता दें कि इस वार्ता में शामिल हुए जेजेपी नेताओं के जाने बाद इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला भी तंवर के निवास स्थान पर पहुँचे। जिसके बाद अशोक तंवर मे ऐलानाबाद में अभय सिंह का समर्थन किया। इस दौरान तंवर को चौटाला ने 19 अक्टूबर को ऐलानाबाद में होने वाली जनसभा के लिए आमंत्रित भी किया।

अभय सिंह चौटाला के अनुसार तंवर ने कॉन्ग्रेस को मजबूत करने का काम किया। लेकिन जिस दिन तंवर ने कॉन्ग्रेस छोड़ी, मैंने उसी दिन इनका स्वागत किया। हम दोनों का मकसद कॉन्ग्रेस एवं भाजपा को सत्ता से दूर रखना है।

अयोध्या विवाद: केस लड़ते-लड़ते बिक गई मुस्लिम पक्षकार की 9 बीघा जमीन? करेंगे टैक्सी मरम्मत का काम

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। 6 अगस्त से शुरू हुई नियमित सुनवाई बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) तक चली। कुल मिला कर देखें तो 40 दिन तक इस मामले की नियमित सुनवाई चली। दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित राम मंदिर मसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के लिए अब 23 दिन और इंतज़ार करना पड़ेगा।

इस मामले में संविधान पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की सुनवाई पिछले 8 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। 2011 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया था, लेकिन इससे जुड़े संबंधित दस्तावेज़ों को निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने में 3 साल का समय लग गया। इसके अलावा इस मामले से जुड़े 7 भाषाओं में हज़ारों पेज़ के दस्तावेज़ों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद न हो पाने की वजह से भी मामले की सुनवाई कई वर्षों तक अटकी रही। सुप्रीम कोर्ट को इस संदर्भ में 11 बार आदेश जारी करने पड़े, उसके बाद 8 साल में सभी दस्तावेज़ों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद हो सका। 

दैनिक भास्कर की ख़बर के अनुसार, मुस्लिम पक्ष के पैरोकार इक़बाल अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद वो फिर से टैक्सी मरम्मत का पुराना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे भी वही काम कर रहे हैं। साथ ही कभी राजनीति में न आने की बात भी उन्होंने कही। बता दें कि इक़बाल के 5 बेटे और एक बेटी हैं। इक़बाल अंसारी को बाबरी मस्जिद की पैरोकारी उनके पिता हाशिम अंसारी की छोड़ी विरासत से मिली थी। इक़बाल की सुरक्षा में तैनात 3 सुरक्षा गार्ड उनके घर के बाहर अधूरे टिन शेड में रहते हैं। वहीं, हाजी महबूब भी बाबरी मस्जिद के पैराकार हैं। इन्हें भी पिता से पैरोकारी विरासत में मिली। महबूब का कहना है कि अब फ़ैसला आना तय है। इस मामले पर बहुतों ने बहुत कुछ बनाया, लेकिन मुझे पुरखों की ज़मीन से 9 बीघे ज़मीन इस केस के लिए बेचनी पड़ गई।

जहाँ एक तरफ़ अयोध्या विवाद मामले के फ़ैसले पर पूरे देश की नज़रें गड़ी हुईं हैं, वहीं मुस्लिम पैरोकार अपना दुखड़ा रोते नज़र आ रहे हैं… इनमें से एक अपना टैक्सी मरम्मत का काम फिर से शुरू करेंगे, तो दूसरे को पुरखों की ज़मीन बिक जाने का ग़म सता रहा है।

मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने बनाने के पूरा घटनाक्रम को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ग़ौरतलब है कि ज़मीन विवाद का टाइटलसूट श्रीराम लला विराजमान के नाम है, जो पहले गोपाल सिंह विशारद के नाम से था। गोपाल के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी राजेंद्र सिंह पैरोकार हैं। लेकिन, 1989 से हाईकोर्ट में यह मामला श्रीराम लला विराजमान बनाम सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नाम से चल रहा है। श्रीराम लला के दोस्त के रूप में केस के पक्षकार त्रिलोकीनाथ पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2010 में श्रीराम लला के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था, लेकिन 2.77 एकड़ ज़मीन को 3 हिस्सों में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड व निर्मोही अखाड़ा के बीच बाँट दिया। 

राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 दिनों के भीतर अपना फ़ैसला सुना देगा। सीजेआई रंजन गोगोई 18 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह रिटायरमेंट से पहले इस बहुप्रतीक्षित फ़ैसले की सुनवाई पूरी कर देंगे और फ़ैसला सुना देंगे।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव काेकजे को उम्मीद है कि अयाेध्या मामले में सुप्रीम काेर्ट हिंदुओं के पक्ष में फ़ैसला सुनाएगा। उन्हाेंने कहा कि जिस तरीके से मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई में व्यवधान डालने की कोशिश की, उसके मद्देनज़र 16 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक दिन होगा।

सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं पार्टी में? हमारे पास न नेता, न पैसा: दिग्गज कॉन्ग्रेसी नेता सुशील शिंदे

पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कॉन्ग्रेसी नेता सुशील कुमार शिंदे ने अपने एक बयान से राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) का विलय हो जाएगा। आपको बता दें कि शिंदे की बेटी प्रणति शिंदे सोलापुर शहर की सीट से तीसरी बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मनोज मोरे को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। इनमें से एक सवाल कॉन्ग्रेस और NCP के विलय का था, जिसे उन्होंने अपना निजी विचार बताया और कहा कि दोनों पार्टियों की विचारधाराएँ और सिद्धांत एक हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी (कॉन्ग्रेस) को छोड़कर जा चुके हैं अगर वे वापस आ जाएँ तो पार्टी देश की सबसे शक्तिशाली पार्टी बन जाएगी। कॉन्ग्रेस के लिए यह समय एकजुट होने का है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शिंदे की इन निजी टिप्पणियों पर पूर्व पार्टी सदस्यों की क्या प्रतिक्रिया रही? इस पर उन्होंने कहा उनके पास कई पूर्व नेताओं का फोन आया और उन सबने उनकी प्रशंसा की। शिंदे ने बताया कि पूर्व सदस्यों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि अगर देश भर के पार्टी नेता एकजुट होंगे तो कॉन्ग्रेस मज़ूबत होगी।  

इस संदर्भ में NCP की क्या प्रतिक्रिया है, इस पर शिंदे ने कहा,

“मैंने एक बहस शुरू की है, देखते हैं कि क्या होता है… मैंने अब तक उनके (पवार) मुद्दे पर चर्चा नहीं की है। टिप्पणी करने के बाद उन्होंने मुझे फोन नहीं किया। मैं उनसे जल्द ही पंढरपुर में मिलूँगा। देखते हैं कि उस बैठक में क्या होता है।”

सुशील कुमार शिंदे से यह पूछे जाने पर कि उनके द्वारा की गई टिप्पणी से कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना है कि नहीं, तो उन्होंने इंदिरा गाँधी के दौर का ज़िक्र करते हुए बताया कि उनके समय में भी कॉन्ग्रेस बुरे दौर से गुजरी थी। ग़रीब लोगों ने कॉन्ग्रेस का समर्थन किया और पार्टी को बुरे दौर से उबार दिया, इसके बाद पार्टी पहले से अधिक मज़बूत हुई। फ़िलहाल, पार्टी में केवल सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के रूप में दो मज़बूत नेता हैं। सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं? कॉन्ग्रेस के पास नेता या पैसा नहीं है… वहीं दूसरी तरफ़, भाजपा भावनात्मक रूप से लोगों को धर्म के नाम पर ब्लैकमेल कर रही है… राम मंदिर और अनुच्छेद-370 जैसे मुद्दों को उठा रही है।

साक्षात्कार में शिंदे से महाराष्ट्र की स्थिति के बारे में पूछा गया कि वहाँ कॉन्ग्रेस का बुरा हाल है, लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने केवल एक सीट जीती, इसके मद्देनज़र विधानसभा चुनाव से पार्टी को क्या उम्मीदें है? इस पर शिंदे ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट माँगे। उस समय VBA से प्रकाश आंबेडकर चुनावी मैदान में खड़े हुए, जिन्होंने जाति कार्ड खेला… लेकिन अब कॉन्ग्रेस में सुधार हो रहा है और हम इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमें (कॉन्ग्रेस-एनसीपी) 125 से 152 सीटें जीतने की उम्मीद है।

सीटों के लेकर किए गए शिंदे के दावे पर सवाल किया गया कि NCP के अजीत पवार ने तो कहा है कि गठबंधन 170 सीटें जीतकर सरकार बनाएँगे। इस पर शिंदे ने कहा,

“अगर अजीत पवार ऐसा कह रहे हैं, तो यह संभव हो सकता है। वह (शिंदे) महाराष्ट्र से बाहर हो गए हैं इसलिए वो (अजीत पवार) बेहतर जानते है। मैं ज़्यादा यात्रा नहीं कर पाया हूँ।”

पत्रकार ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा की रैलियों के संदर्भ में सवाल किया तो शिंदे ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र में चुनाव हारने का डर है। उनके मन में अभी भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव का असर है, इसलिए वो (भाजपा) इस शर्मिंदगी से बचने के लिए बाहर जा रहे हैं।

प्रकाश अंबेडकर को कॉन्ग्रेस अपने पाले में नहीं ला सकी, इसकी क्या वजह हो सकती है? इस पर शिंदे ने कहा कि यह बेहद दु:खद है कि उन्होंने बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा प्रचारित धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों के ख़िलाफ़ व्यवहार किया। शिंदे ने खेद जताते हुए कहा कि प्रकाश अम्बेडकर धर्मनिरपेक्षता की हत्या कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनके रुख़ से कॉन्ग्रेस-NCP जैसी धर्मनिरपेक्ष दलों के 9-10 उम्मीदवारों की हार हुई। अंत में उनसे शरद पवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिले नोटिस के बारे में पूछा गया, जिसे उन्होंने उत्पीड़न का नाम देते हुए पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

मुस्लिमों के सबसे पवित्र स्थल मक्का के पास दुर्घटना: 35 विदेशी तीर्थयात्रियों की मौत, 4 घायल गंभीर

सऊदी अरब से एक बड़े हादसे की खबर आई है। वहाँ बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को विदेशी यात्रियों से भरी एक निजी चार्टेड बस खुदाई करने वाली मशीन से टकरा गई। जिससे 35 विदेशियों की मौक़े पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना मुस्लिमों के सबसे पवित्र स्थल मक्का के पास घटी है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सऊदी प्रेस एजेंसी ने एक पुलिस प्रवक्ता का हवाला देकर बताया है कि बुधवार को एक खुदाई करने वाली मशीन से बस की टक्कर हुई, जिससे सऊदी अरब में 35 तीर्थयात्री मारे गए।

बताया जा रहा है कि यह घटना मक्का से 170 किमी दूर हिजरा रोड पर अल-अखल गाँव के करीब शाम 7 बजे घटी। इस दौरान बस में 39 विदेशी यात्री सवार थे। हादसे में 35 विदेशियो की मौत हो गई और 4 गंभीर रूप से घायल हैं।

घायलों को अल-हमना अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उनका इलाज जारी है। वहीं आला अधिकारी भी इस दुर्घटना की जाँच में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार जो विदेशी लोग घटना के दौरान बस में थे, वे सभी एशियन और अरब मूल के थे।

बता दें कि इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स बता रही थी कि इस घटना में 36 लोगों ने अपनी जानें गंवाईं हैं, लेकिन अब 35 लोगों के मरने की खबर है।

साभार: अरब न्यूज

पुलिस ने इस हादसे के कारणों को पता लगाने के लिए जाँच शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल उन्हें इसके पीछे के कारणों का पता नहीं चल सका। हालाँकि बताया जा रहा है दुर्घटना के बाद स्थिति से निबटने के लिए ऊदी रेड क्रिसेंट अथॉरिटी और अन्य आपातकालीन सेवाएँ घटनास्थल पर थीं।

‘अनिवार्य कार्यों’ के कारण चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने रद्द की अपनी विदेश यात्रा

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित जमीन पर चली 40 दिन तक सुनवाई 16 अक्टूबर को खत्म हो चुकी है। उम्मीद है 17 नवंबर से पहले 5 जजों की संवैधानिक पीठ इस पर अपना फैसला सुना देगी। इसी बीच खबर आ रही है की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने अपनी विदेश यात्रा को रद्द दिया है। इसकी वजह कुछ ‘अनिवार्य कार्य’ बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए विदेश जाना था। लेकिन कुछ ‘अनिवार्य कार्यों’ का हवाला देकर उन्होंने इस यात्रा को रद्द कर दिया।

खबर के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अपनी रिटायरमेंट से पहले प्रधान न्यायाधीश कुछ दक्षिणी अमेरिकी देशों, मध्य-पूर्व और कुछ अन्य देशों की यात्रा पर जाने वाले थे, लेकिन अब उन्होंने इन यात्राओं को पूरा करने (Finalise) से पहले ही रद्द कर दिया। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश 17 नवंबर को अपने पद से रिटायर होने वाले हैं।

उल्लेखनीय है कि सीजेआई रंजन गोगोई ने 3 अक्टूबर को भारत के 46वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उनका ये कार्यकाल इसलिए भी ऐतिहासिक रहेगा क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति से पहले वो दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े राम मंदिर मामले में अपना फैसला सुनाएँगे, इसकी उम्मीद है।

बता दें कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने 40 दिनों तक अयोध्या मामले में लगातार सुनवाई की। अब कहा जा रहा है राम मंदिर और बाबरी मस्जिद वाली विवादित जमीन पर फैसला 4 नवंबर से 17 नवंबर के बीच में कभी भी आ सकता है क्योंकि चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

JNU प्रशासन ने ‘वामपंथियों’ के कब्जे वाले ‘छात्रसंघ’ को अवैध करार देते हुए भंग करने का दिया आदेश

फरवरी 2016 में जिस विश्विद्यालय के छात्रसंघ ने देशविरोधी नारे लगाने के पर सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी थीं उसे बंद कर दिया गया है। बता दें कि जेएनयू प्रशासन ने आज (16 अक्टूबर) को विश्वविद्यालय छात्रसंघ को ‘अवैध’ करार देकर भंग करने का आदेश दे दिया है। छात्रसंघ पदाधिकारियों को विश्वविद्यालय ने नोटिस थमाकर शाम 5 बजे छात्रसंघ का दफ्तर खाली करने का आदेश दे दिया गया है।

प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के छात्रसंघ को अवैध करार देते ही, उन्हें दिया गया छात्रसंघ दफ्तर तुरंत विश्वविद्यालय द्वारा अपने कब्ज़े में ले लेने की कार्रवाई तेज़ हो गई। इसपर बात करते हुए नोटिस जारी करने वाली यूनिवर्सिटी के अधिकारी और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्लू ) उमेश अशोक कदम ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में बने छात्रसंघ के दफ्तर का दुरूपयोग न हो सके इसलिए छात्रसंघ पदाधिकारियों को नोटिस थमाकर उस छात्रसंघ दफ्तर को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दे दिया गया।

हालाँकि, उम्मीद के मुताबिक दफ्तर खाली करने के नोटिस पर छात्रसंघ वाले हंगामा करते हुए छात्रसंघ दफ्तर के बहार दोपहर करीब 3:30 बजे धरने पर बैठ गए। नियम तोड़कर कुर्सी तक पहुँचने वाले और अब उसे हथियाने की कोशिश में लगे ऊंची आवाज़ में हंगामा करते पदाधिकारियों ने इस नोटिस को छात्रों की आवाज़ दबाने का वाला कदम बताया है।

प्रशासन का आरोप है कि मौजूदा JNU छात्रसंघ के चुनाव में लिंगदोह कमिटी की सिफारिशों की अनदेखी की गई। वहीं इसके उलट छात्रसंघ ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा है कि ‘छात्रसंघ का दफ्तर किसी डीन की अपनी जागीर नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व और संघिकरण (छात्रों का संघ) के लिए JNU के उनका हक है’ , उन्होंने कहा कि ‘JNU का छात्रसंघ दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त है’।

जनेवि इससे पहले भी इस साल विवादों के चलते सुर्ख़ियों छाये रहा था जबकि दो छात्रों ने छात्रसंघ में अपनी दावेदारी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने JNU को यह निर्देश दिया था कि लिंगदोह कमिटी के दायरे में हो रहे चुनाव के परिणामों को ग्रीवांस कमिटी की मंजूरी के बाद ही घोषित किया जाए।

PhonePe को मिलेंगे $1 अरब: वॉलमार्ट के कदम से बढ़ेगा पेमेंट बाज़ार में भारतीय दबदबा

वॉलमार्ट ने भारत के पेमेंट ऍप फ़ोनपे (PhonePe) में $30 बिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इस डिजिटल वॉलेट में अमेरिका के रिटेल बाज़ार की धुरंधर कंपनी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 82% करने की फ़िराक में है। वॉशिंगटन पोस्ट और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इससे वॉलमार्ट के निवेश वाली भारत की ‘यूनिकॉर्न’ ($1 अरब से अधिक बाजार मूल्य की निजी कंपनी) कंपनियों का कुल मूल्य बढ़कर $30 अरब हो गया है।

फ्लिपकार्ट पहले ही

डेढ़ साल पहले वॉलमार्ट ने $16 अरब में फ्लिपकार्ट में 77% हिस्सेदारी खरीदी थी। उस समय यह भारत की किसी स्टार्टअप कंपनी में हुए सबसे बड़े विदेशी निवेशों में गिना गया था। दिलचस्प बात यह है कि फ़ोनपे का स्वामित्व भी फ्लिपकार्ट के ही हाथों में है। फ्लिपकार्ट ने इसे दो साल पहले हासिल किया था।

वॉलमार्ट के इस प्रस्तावित निवेश के बाद फ़ोनपे का कुल अनुमानित बाजार मूल्य (valuation) $10 अरब तक जा पहुँचने की उम्मीद की जा रही है।

फ्लिपकार्ट के बाहर देखने की तैयारी

फोनपे के हालिया कमाई के आँकड़ों को देखें तो अपनी ‘स्वामी’ कंपनी फ्लिपकार्ट की छाया में से निकलने के लिए यह तैयार दिख रही है। जहाँ तीन साल पहले तक फ़ोनपे के इस्तेमाल में फ्लिपकार्ट से खरीददारी कुल खरीद की 50% के आस-पास होती थी, वहीं अब फ़ोनपे के कुल इस्तेमाल का केवल 0.5% फ्लिपकार्ट के लिए होता है।

वहीं फ्लिपकार्ट की ओर से भी फ़ोनपे को कोई विशेष प्रोत्साहन मिलता नहीं दिख रहा है। फ्लिपकार्ट की हालिया बिग बिलियन डेज़ सेल में फ़ोनपे के इस्तेमाल के लिए ग्राहकों को प्रोत्साहन देने वाली कोई ख़ास स्किम नहीं दिखी। भुगतान के कई सारे विकल्पों की भीड़ में ही फ़ोनपे की भी जगह थी।

बढ़ेगी पेमेंट बाजार की होड़?

फ़ोनपे की इस उपलब्धि से डिजिटल पेमेंट बाजार में स्पर्धा बढ़ना तय माना जा रहा है। उक्त रिपोर्ट में उसकी डिजिटल वॉलेट सेगमेंट की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी पेटीएम (Paytm) को भी सॉफ़्टबैंक समेत निवेशकों से $2 अरब की फंडिंग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे पेटीएम का भी अनुमानित मूल्य $16 अरब के आसपास हो जाएगा। इससे इन कंपनियों में नई आकर्षक स्कीमों की होड़ शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा गूगल का गूगल पे (Google Pay) और WhatsApp के प्रस्तावित पेमेंट ऍप भी इन दोनों के वृहत्तर डिजिटल पेमेंट बाज़ार में प्रतियोगी हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने WhatsApp और Google Pay के विदेशी मूल को रेखांकित करते हुए उम्मीद जताई है कि PhonePe और Paytm से उत्पन्न गति भारत के आईटी सेक्टर में वही तेज़ी लाएगी जो दो दशक पहले TCS, विप्रो, इंफ़ोसिस आदि की शुरुआत में आई थी। विदेशी कंपनियों के सामने PhonePe और Paytm कितना टिक पातीं हैं, यह बताएगा कि भारतीय सॉफ्टवेयर सेक्टर ‘पश्चिम के डिजिटल मजदूर’ का तमगा उतार कर आम भारतीयों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालने वाले सॉफ्टवेयर बनाने की दौड़ में कहाँ खड़ा है।