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‘मेरी जुबान फिसल गई, गलती से ऐश्वर्या राय का नाम ले लिया’: अब्दुल रज्जाक ने माँगी माफी, भद्दी बात पर हँसी को लेकर शाहिद अफरीदी ने भी दी सफाई

अभिनेत्री ऐश्वर्या राय पर भद्दी टिप्पणी करने वाले पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक ने माफी माँग ली है। वहीं उनकी बात पर हँसने को लेकर शाहिद अफरीदी ने भी सफाई दी है। अफरीदी का कहना है कि रज्जाक की बात समझे बिना ही वे हँसने लगे थे।

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटरों की यह माफी और सफाई बयान को लेकर थू थू होने के बाद आई है। रज्जाक ने कराची के मैरियट होटल में 12 नवंबर 2023) को एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए ऐश्वर्या राय पर भद्दी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ऐश्वर्या से शादी करने से बच्चे नेक और अच्छे पैदा नहीं हो जाएँगे। मंच पर उनके साथ अफरीदी और उमर गुल भी थे।

बयान पर विवाद बढ़ने के बाद अब्दुल रज्जाक ने एक वीडियो जारी कर माफी माँगी है। समा टीवी ने माफी वाला यह वीडियो पोस्ट किया है। इसमें रज्जाक का कहना है कि उनकी जुबान फिसल गई थी और उन्होंने गलती से ऐश्वर्या राय का नाम ले लिया था।

माफी वाले वीडियो में रज्जाक ने कहा है, “प्रेस क्रॉन्फ्रेस में क्रिकेट, कोचिंग और इरादों की बात हो रही थी। मेरी जबान फिसल गई। मैंने उदाहरण कोई और देना था पर ऐश्वर्या जी का नाम मुँह से निकल गया। मैं वास्तव में माफी माँगता हूँ। उनसे सॉरी बोलता हूँ। ये मेरा इरादा नहीं था। मैंने मिसाल कोई और देनी थी पर ये निकल गया। मैं दिल से माफी माँगता हूँ।”

वहीं शाहिद आफरीदी ने समा टीवी से इस घटना पर बात करते हुए कहा, “हम बैठे हुए थे स्टेज पर, प्रोग्राम चल रहा था। रज्जाक ने कोई बात कर ली वहाँ पर, जब उसने बात की तो मुझे समझ नहीं आया कि उसने क्या कहा मैं बस हँस दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे पता था इसके हाथ में माइक है इसने कुछ न कुछ कहना ही है। इसे जूतों का बहुत शौक है आप यकीन करें वहाँ पर लोग भी हँस रहे थे सारे। मैं जब घर आया तो मुझे किसी ने क्लिप शेयर की उसने बात क्या की है। जब मैंने गौर से सुना कि रज्जाक ने तो ये कहा था तो मुझे बड़ी अजीब लगा। मैं अभी रज्जाक मैसेज भी करूँगा कि सॉरी करे सबसे।”

अफरीदी ने आगे कहा, “वो बड़ा गलत मजाक था। इस तरह का मजाक बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए था। वैसे रज्जाक मासूम बंदा है। डर किस बात का डर? हम अपनी नफ़रत और कमअक्ली में किसी को भी इल्ज़ाम लगा देते हैं, किसी को भी जज कर लेते हैं। जहाँ तक निंदा की बात है तो मैंने नेशनल टीवी पर भी इसकी निंदा की है।”

मलबे में डाला जा रहा पाइप ताकि बाहर आ सके मजदूर, उत्तरकाशी के रेस्क्यू ऑपरेशन से सेना भी जुड़ी: सुरंग में 12 नवंबर से फँसे हैं 40 लोग

उतराखंड के उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में फँसे मजदूरों के रेस्क्यू में सेना और वायुसेना की टीमें भी जुड़ गई हैं। वायुसेना दिल्ली से नई मशीन लेकर उत्तरकाशी पहुँचाएगी। सुरंग के अंदर ड्रिलिंग का काम जारी है, जिससे जल्दी से जल्दी से 40 मजदूरों को निकाला जा सके।

12 नवम्बर की सुबह करीब 5:30 बजे सिल्क्यारा सुरंग में मलबा आने से 40 मजदूर फँस गए थे। तब से उनको निकालने के प्रयास जारी हैं। मलबा काट कर मजदूरों को निकालने के प्रयास सफल नहीं होने के कारण अब मलबे के भीतर से स्टील के पाइप डाले जा रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे अधिकारियों का कहना है कि वे 3 फीट व्यास वाली पाइप को मलबे से गुजारेंगे और इसके रास्ते ही मजदूर बाहर आएँगे। मजदूरों से लगातार संपर्क बना हुआ है। सभी मजदूर सुरक्षित और स्वस्थ हैं।

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में प्राकृतिक कारणों से समस्या आ रही है। इसी कारण इसकी गति भी धीमी है। वायुसेना की सहायता से भारी ड्रिलिंग मशीन को यहाँ लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मजदूरों के जल्द ही बाहर निकलने की उम्मीद जताई है।

अंदर फँसे मजदूरों को खाना-पानी भी एक पाइप के माध्यम से पहुँचाया जा रहा है। उन्हें इसी पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई भी हो रही है। घटनास्थल पर NDRF, SDRF और राज्य पुलिस समेत अन्य टीमें मौजूद हैं।

सुरंग में 14 नवंबर की रात से ही पाइप अंदर डालने का प्रयास किया जा रहा है। हालाँकि पहले पाइप को डालते समय नया मलबा गिरने लगा, जिसके कारण रेस्क्यू धीमा हो गया। दोबारा अब तेज गति से काम किया जा रहा है। घटनास्थल पर सेना की एक टीम भी पहुँची है। मलबा दोबारा गिरने से दो अन्य मशीनें भी फँस गई हैं।

विशेषज्ञों ने आशा जताई है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो मजदूर आज बाहर आ जाएँगे। घटना पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नजर बनाई हुई है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय भी इस मामले की जानकारी लगातार राज्य सरकार से ले रहा है।

जानकारी के अनुसार, सुरंग के अंदर फँसे मजदूरों में 15 झारखंड, 8 उत्तर प्रदेश, 5 ओडिशा, 4 बिहार और 2-2 मजदूर उत्तराखंड तथा असम के हैं। एक मजदूर हिमाचल का भी है। झारखंड ने अपने अफसरों की एक टीम भी भेजी है।

यह सुरंग आल वेदर रोड परियोजना के तहत बन रही है। इस प्रोजेक्ट की यह सबसे लंबी सुरंग लगभग साढ़े चार किलोमीटर की है। इसका करीब 4 किलोमीटर निर्माण हो गया है। सुरंग के निर्माण में करीब 1000 मजदूर दिन-रात जुटे रहते हैं। वे अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे हैं, क्योंकि फरवरी 2024 तक इसकी खुदाई पूरी करने का लक्ष्य है। 

बता दें कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा और जंगल चट्टी के बीच इस सुरंग के निर्माण से गंगोत्री और यमुनोत्री के बीच की दूरी 26 किमी कम हो जाएगी। यह सुरंग करीब 853 करोड़ की लागत से बन रही है।

‘हरभजन मुस्लिम बनने वाले थे’ – इंजमाम को तो AAP सांसद ने लताड़ा लेकिन सोशल मीडिया पर लोग याद दिला रहे उनका ‘पाकिस्तान-प्रेम’

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह ने पाकिस्तानी क्रिकेटर इंजमाम उल हक को ‘नशेबाज’ कहा, बकवास करने वाला इंसान बताया। यह इंजमाम उल हक के उस वायरल वीडियो के बाद प्रतिक्रिया में कहा गया, जिसमें पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर यह दावा कर रहे हैं कि हरभजन सिंह इस्लाम कबूल करने वाले थे।

एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल एक वीडियो में इंजमाम कहते हुए दिखते हैं, “मौलाना तारिक जमील साहब हैं ना, ये हर रोज हमारे पास आते थे। हमने एक कमरा बना रखा था, जिसमें हमें मौलाना मगरिब की नमाज पढ़ाते थे। इंडिया से कुछ प्लेयर जैसे इरफ़ान पठान, ज़हीर खान और मुहम्मद कैफ को हम दावत देते थे कि हमारे साथ नमाज पढ़ो।”

इसी वीडियो में आगे इंजमाम ने दावा किया, “कुछ लोग नमाज पढ़ते नहीं थे लेकिन बैठ के देखते थे। इसमें हरभजन भी था। मेरे से एक दिन हरभजन सिंह ने कहा कि ये जो आदमी है ना मौलाना, मेरा दिल करता है कि इसकी बात मान लूँ, लेकिन तुम्हें देख कर रुक जाता हूँ।” ये सारी बातें इंजमाम हरभजन के इस्लाम कबूल करने को लेकर बता रहे थे।

इंजमाम का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। अब इस पर हरभजन सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। हरभजन ने इंजमाम के इस दावे पर कहा, “ये कौन सा नशा पीकर बात कर रहा है? मैं गर्व से एक भारतीय और सिख हूँ, ये बकवास लोग कुछ भी बकते हैं।”

गौरतलब है कि तारिक ज़मील एक कट्टरपंथी पाकिस्तानी मौलाना है। पूर्व में भी उसके कई ऐसे वीडियो सामने आ चुके हैं, जिसमें वह हिन्दुओं को धमकाते हुए इस्लाम में परिवर्तित होने को कहते हुए दिखा है। तारिक जमील के पाकिस्तान में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।

हरभजन सिंह ने इंजमाम उल हक को हालाँकि करारा जवाब दिया लेकिन सोशल मीडिया पर लोग हरभजन को उनके पाकिस्तान-प्रेम के लिए लताड़ रहे हैं। आपको बता दें कि हरभजन सिंह कोरोना महामारी के समय शाहिद अफरीदी के फाउंडेशन को सहायता की अपील की थी। उनके इस कदम का काफी विरोध हुआ था। बाद में उन्होंने इस पर पछतावा भी जताया था।

एक यूजर ने लिखा, “डोनेशन देते टाइम याद नहीं आई थी इनकी बकवास।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “इन्हीं बकवास लोगों के लिए ही तो तुम क्राउडफंडिंग कर रहे थे हरभजन।”

एक अन्य ने लिखा कि हरभजन तुम्हारा कोई भरोसा नहीं है।

हालाँकि कुछ लोगों ने हरभजन का समर्थन भी किया। उनके समर्थन में एक यूजर ने लिखा, “भज्जी इन लोगों की पूरी जिन्दगी ही मजहब के आसपास घूमती है, पगला गए हैं ये सब।”

सोशल मीडिया पर ज्यादातर रिएक्शन लेकिन हरभजन को टारगेट करते हुए ही आए हैं, उनके पाकिस्तान-प्रेम को लेकर तंज कसते हुए।

एक यूजर ने कहा, “कुछ तो हुआ होगा भज्जी पाजी, धुँआ वहीं से आता है, जहाँ आग होती है। इतनी बड़ी बात ऐसे थोड़े ना बोलेगा कोई।”

सुब्रत रॉय पर संकट आते ही पत्नी और बेटे ने छोड़ दी भारत की नागरिकता, जानिए क्या सहाराश्री के निधन के बाद डूब जाएगा निवेशकों का पैसा?

सहारा इंडिया परिवार के मुखिया और सहाराश्री के नाम से लोकप्रिय सुब्रत रॉय का निधन हो गया है। मंगलवार (14 नवंबर 2023) की रात उन्होंने आखिरी साँस ली। गोरखपुर से महज 2000 रुपए में कारोबार शुरू करने वाले रॉय के दुनिया के फलक पर छा जाने के कई किस्से मशहूर है। उनके जाने से सहारा परिवार और कारोबार जगत में भी माहौल गमगीन है।

सहारा समूह के प्रबंध कार्यकर्ता और अध्यक्ष सुब्रत रॉय की मौत रात 10.30 बजे दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई। वे कैंसर से जूझ रहे थे। हाइपरटेंशन, डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रस्त सुब्रतो रॉय को हालत बिगड़ने की वजह से रविवार (12 नवंबर,2023) को मुंबई के कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल और मेडिकल इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था।

सहाराश्री निवेशकों का पैसा न लौटाने की वजह से काफी समय जेल में रहे थे। इस मामले में उन पर संकट आते ही उनके परिवार ने भारत की नागरिकता छोड़ दी थी। उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय और बेटे सुशांतो रॉय ने बॉल्कन देश मैसेडोनिया की नागरिकता ले ली थी। ऐसा सहाराश्री के खिलाफ चल रहे मामलों को देखते हुए भारतीय कानून से बचने के लिए किया था।

दक्षिण-पूर्वी यूरोप का देश मैसेडोनिया अपने देश में निवेश और रोजगार देने वाले अन्य देश के लोगों को आसानी से नागरिकता दे देता है। सहाराश्री के इस देश से अच्छे रिश्ते थे।

गोरखपुर से 1978 में अपने दोस्त एसके नाथ के साथ फाइनेंस कंपनी शुरू करने वाले सहाराश्री तक का सफर करने वाले सुब्रतो राय ने कपड़ों और पंखों की छोटी फैक्ट्री खोली। इस दौरान वे दुकानदारों को छोटी बचत के फायदे गिनाते। यहीं वजह रही कि सहारा की ‘गोल्डेन की’ योजना खासी लोकप्रिय रही। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपनी अलग कंपनी खोली थी, लेकिन गोरखपुर से उनका हमेशा खास लगाव रहा।

क्या सुब्रत रॉय के निधन के बाद मिलेगा सहारा का पैसा

सुब्रत रॉय के निधन बाद सहारा में आपकी गाढ़ी कमाई के निवेश का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का पैसा ब्याज के साथ लौटाने को कहा था। इसके बाद मोदी सरकार ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ लॉन्च किया था। इस पोर्टल पर पैसा वापस पाने के लिए लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं। इसी पोर्टल के जरिए निवेशकों का पैसा वापस मिलेगा।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी पूर्व में कह चुके हैं कि सहारा निवेशकों का पैसा ब्याज के साथ वापस मिलेगा। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने 29 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सहारा की 4 समितियों के निवेशकों को 9 माह में पैसे लौटा दिए जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह के निवेशकों को राहत देने की अर्जी केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने लगाई थी। इस अर्जी के बाद उच्चतम न्यायालय ने ‘सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट’ से 5000 करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (CRCS) में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे।

‘हर-हर मोदी’ से गूँजा भारत का सबसे स्वच्छ शहर, गणेश मंदिर से शुरू होकर 1.5 km चला प्रधानमंत्री का रोडशो: रानी अहिल्याबाई होल्कर को दी श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदौर में रोड शो किया। इस रोड शो में जनता हर तरफ उमड़ पड़ी। हर तरफ से मोदी-मोदी की आवाज आ रही थी। हर तरफ भगवा लहरा रहा था। पीएम मोदी के इस रोड शो के दौरान मानों इंदौर ने भगवा चादर ओढ़ ली हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये रोड शो करीब डेढ़ किमी लंबा रहा, जो बड़े गणेश मंदिर से राजबाड़ा तक चला

प्रधानमंत्री मोदी ने साझा की रोड शो की तस्वीरें

दरअसल, मध्य प्रदेश में बुधवार (15 नवंबर 2023) को चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। उससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इंदौर में रोड शो किया। ये रोड शो काफी लंबा रहा और इंदौर की बड़ी आबादी इस रोड शो में शामिल हुई दिखी। आखिर लोग इस रोड शो में शामिल क्यों न हो, लंबे समय से भाजपा के गढ़ रहे इंदौर में खुद प्रधानमंत्री का रोड शो करना ये दिखाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में इंदौर के लिए खास जगह है। प्रधानमंत्री ने रानी अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धांजलि दी।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रैली की तस्वीरें अपने एक्स हैंडल पर साझा की हैं। पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “इंदौर की ये झलकियाँ शहर के प्रति भाजपा के मजबूत लगाव को उजागर करती हैं। चुनावों में भाजपा के लिए वोट कॉन्ग्रेस की वोटबैंक राजनीति के विपरीत, निरंतर प्रगति के लिए वोट है।”

इससे पहले, उन्होंने शाजापुर में रैली को संबोधित किया था। उन्होंने शाजापुर में कहा, “मध्य प्रदेश इस बार के चुनाव एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। मैं बीते दिनों एमपी के अलग अलग हिस्सों में लोगों से मिला हूँ, आशीर्वाद प्राप्त किए हैं। जो भरोसा, जो विश्वास भाजपा पर दिख रहा है, वो अद्भुत है।” पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनाव की खास बात यह है कि भाजपा की जीत की जिम्मेदारी मेरी माताओं-बहनों-बेटियों और नौजवानों ने संभाल ली है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में एक ही चरण में 17 नवंबर को मतदान होगा। इस चुनाव में भाजपा प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी करना चाहेगी। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है, वहीं शिवराज सिंह चौहान ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए पूरी ताकत से पार्टी को लीड किया है।

अरविंद केजरीवाल को चुनाव आयोग का नोटिस, कहा- जवाब दो क्यों न की जाए कार्रवाई: PM मोदी का अपमान कर फँसे दिल्ली के मुख्यमंत्री

चुनाव आयोग ने भाजपा की शिकायत पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नोटिस जारी किया है। चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल को 16 नवंबर तक जवाब देने को कहा है, जिसमें उन पर आरोप है कि उन्होंने और उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अनर्गल आरोप लगाते हुए कंटेंट पोस्ट किया है। इस बारे में उनकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी।

चुनाव आयोग ने कहा कि PM नरेंद्र मोदी को निशाना बनाकर किए गए पोस्ट पहली नजर में आदर्श आचार संहिता के साथ-साथ कानून का उल्लंघन करने वाले हैं। ऐसे में उनके खिलाफ क्यों न उचित कार्रवाई की जाए?

एएनआई ने एक्स पर इसकी सूचना दी है। उसमें बताया गया है कि चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। जिसमें भाजपा ने इलेक्शन कमीशन से शिकायत की थी कि AAP ने पीएम मोदी को अपमानजनक तरीके से नीचा दिखाया है। इस मामले में चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल को जवाब देने के लिए 16 नवंबर तक का समय दिया है।

बता दें कि पिछले बुधवार को आम आदमी पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर अडाणी और पीएम मोदी से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें बताया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के लिए नहीं, बल्कि अडाणी के लिए काम करते हैं। इस बारे में 10 नवंबर को भाजपा ने चुनाव आयोग से संपर्क किया था और अपनी बात रखी थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने ये कदम उठाया है।

इस मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और पार्टी नेता ओम पाठक समेत बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से संपर्क किया था और आम आदमी पार्टी के साथ ही अरविंद केजरीवाल की शिकायत की थी।

‘अपनी नहीं तो तुम्हारी बीवी को बना देता मुख्यमंत्री?’: BJP में शामिल हुए 21000 यदुवंशी तो नित्यानंद राय पर भड़के लालू यादव, बोले – भाजपा में कंसों का जुटान

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव भारत के सबसे बड़े परिवारवादी और घोटालेबाज राजनेताओं में गिने जाते हैं। 9वीं और 11वीं तक पढ़े लड़कों को बिहार का उप-मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री बनाने वाले लालू प्रसाद यादव ने कभी अपनी अनपढ़ पत्नी को बिहार का मुख्यमंत्री भी बनाया था। अब लालू प्रसाद यादव ये कहकर अपने परिवारवाद का बचाव कर रहे हैं कि वो अपनी पत्नी को नहीं, तो क्या नित्यानंद राय की पत्नी को मुख्यमंत्री बनाते।

क्या नित्यानंद राय की बीवी को मुख्यमंत्री बनाना?

लालू यादव ने केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय को गाय-भैंस कटवाने का कारोबारी भी बता दिया। लालू यादव ने दावा किया कि नित्यानंद राय आरजेडी में शामिल होने के लिए उनके पास आए थे। उन्होंने कहा कि वे काफी अप्रोच भी किए थे। बीजेपी ने उन्हें यादवों का मुख्यमंत्री बनाने की बात की थी। लालू यादव ने कहा कि वो लोग आरोप लगाते हैं कि लालू यादव ने राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। अगर लालू यादव राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री नहीं बनाते तो क्या तुम्हारी बीवी को मुख्यमंत्री बनाते?

राबड़ी नहीं होती, तो आज की हमारी सरकार भी नहीं होती

लालू यादव ने कहा कि राबड़ी देवी नहीं होती तो आज RJD की हमारी सरकार नहीं होती। बिहार में नीतीश-तेजस्वी की सरकार नहीं बनी होती। उन्होंने कहा कि भाजपा में यादव के नाम पर कंस जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यादवों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बिहार में 75 प्रतिशत का आरक्षण RJD ने दिलाया है। उन्होंने कहा कि पहले कमजोर लोगों को वोट ही नहीं करने दिया जाता था, लेकिन अब सबकी भागीदारी बढ़ रही है।

21 हजार यदुवंशियों ने भाजपा ज्वॉइन किया

बिहार में भाजपा यदुवंशी सम्मेलन करा रही है। गोवर्धन पूजा के मौके पर 21 हजार यदुवंशी भाजपा से जुड़े। नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विकास की गंगा’ हर समाज, हर वर्ग, हर घर, हर गाँव और हर शहर तक पहुँची है। इसका हर समाज पर प्रभाव पड़ा है। भाजपा मिलकर काम करती है।” उन्होंने कहा कि हमारे प्रतिद्वंद्वी आरजेडी के लोग हिंदू देवी-देवताओं को गाली देते हैं। इससे लोगों को दुख होता है। 15 साल तक लालू यादव ने न तो काम किया, न ही यादव समाज का विकास किया। इसीलिए यदुवंशी भाजपा के साथ आ रहे हैं।

बता दें कि चारा घोटाले में फँसने के बाद लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा था। उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते हुए मुख्यमंत्री बना दिया था और रिमोट कंट्रोल के जरिए बिहार पर शासन चलाया था।

नेहरू ने चीन को बेच दिया था भारत का परमाणु बम बनाने का पदार्थ: अमेरिकी विदेश विभाग के कागजों से बड़ा खुलासा

17 जुलाई 1953, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बंदरगाह पर सरगर्मियाँ तेज थीं। पोलैंड के एक जहाज पर धड़ाधड़ कुछ सामान चढ़ाया जा रहा था। यह जहाज पहले श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो जाने वाला था, कोलम्बो से होकर यह चीन के टाकू बार पहुँचता। लेकिन इस जहाज पर कुछ ऐसा रख दिया गया कि एक एक सप्ताह के भीतर ही इस जहाज को समंदर में रोकने के लिए अमेरिका के राजनयिक दिल्ली की गलियों के चक्कर काटने लगे।

दरअसल, इस जहाज में 2,248 पाउंड थोरियम नाइट्रेट मुंबई में लोड किया गया था। यह वही थोरियम है जिसका उपयोग परमाणु बम बनाने में होता है। थोरियम नाइट्रेट को भारत की सरकारी कम्पनी इंडियन रेयर अर्थ मैटेरियल लिमिटेड (IREL) ने चीन को ₹40,500 में बेचा था। यह कम्पनी भारत में खनन का काम करती थी। तब तक भारत चीन युद्ध नहीं हुआ था और भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू चीन को अच्छा दोस्त मानते हुए परमाणु बम बनाने का सामान बेचने की अनुमति दे रहे थे।

जब यह जहाज भारत से निकल कर कोलम्बो के रास्ते में था तब 21 जुलाई, 1953 को अमेरिका को इसका पता चला। और दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक अमेरिकी राजनयिकों में भगदड़ मच गई।

भारत के चीन को थोरियम बेचने पर अमेरिकियों को 21 जुलाई 1953 को जानकारी हुई।
भारत के चीन को थोरियम बेचने पर अमेरिकियों को 21 जुलाई 1953 को जानकारी हुई।

अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन फोस्टर डलेस ने तुरंत 24 जुलाई, 1953 को भारत में अपने राजदूत जॉर्ज एलन को पत्र लिखा। फोस्टर ने कहा कि भारत की नेहरू सरकार ने यह परमाणु पदार्थ बेचने की अनुमति दी है तो स्थिति बहुत गंभीर है। उन्होंने अपने राजदूत एलन से कहा कि तुरंत भारत सरकार को इसके लिए राजी करो कि यह जहाज कोलम्बो से आगे ना जाने पाए।

अमेरिकी विदेश मंत्री फ़ॉस्टर अपने राजदूत एलन को आदेश देते हुए कि भारत को थोरियम ना बेचने के लिए राजी किया जाए
अमेरिकी विदेश मंत्री फ़ॉस्टर अपने राजदूत एलन को आदेश देते हुए कि भारत को थोरियम ना बेचने के लिए राजी किया जाए

पत्र मिलने के तुरंत बाद अमेरिकी राजदूत एलन ने भारतीय विदेश सचिव आर के नेहरू के पास इस संबंध में जानकारी भिजवाई। इस बीच अमेरिकी राजदूत एलन भारत के वित्त मंत्री चिंतामन देशमुख से भी मिल आए थे। आर के नेहरू का कहना था कि प्रधानमंत्री नेहरु ही अब इस जहाज को कोलम्बो में रोक सकते हैं।

अमेरिका ने इस जहाज को रोकने की अपील के साथ ही नेहरू सरकार को एक धमकी भी हल्के शब्दों में दे डाली। अमेरिका ने कहा कि यदि भारत यह जहाज नहीं रोकता और कम्युनिस्ट तानाशाही वाले चीन को परमाणु पदार्थ की आपूर्ति करता है तो वह भारत को दी जाने वाली मदद रोक सकता है।

तब की स्थितियों को देखते हुए भारत के लिए अमेरिका की यह मदद काफी जरूरी थी क्योंकि देश को आजाद हुए मात्र 6 वर्ष हुए थे और उसे विकास के लिए सहायता चाहिए थी। तब के समय में गेंहू तक विदेशों से आता था।

जब कहने से कुछ नहीं बन सका तो राजदूत एलन खुद 28 जुलाई 1953 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से शाम 6 बजे मिले। उन्होंने इस पूरी मुलाकात की जानकारी अपने देश के विदेश विभाग को एक टेलीग्राम के माध्यम से भेजी।

एलन प्रधानमंत्री नेहरू से अपनी मुलाक़ात का ब्योरा देते हुए
एलन प्रधानमंत्री नेहरू से अपनी मुलाक़ात का ब्योरा देते हुए

एलन ने बताया कि मैं शाम को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मिला था और मैंने उनसे इस विषय की गंभीरता पर बात भी की। जवाहर लाल नेहरु ने इस पर जवाब दिया कि अगर भारत सरकार चाहे तो भी वह इस जहाज को नहीं रोक सकती।

नेहरू ने कहा कि यह थोरियम नाइट्रेट एक विदेशी जहाज पर लदा हुआ है जो कि एक विदेश के बंदरगाह में है। नेहरू ने यह कह कर भी अपनी असमर्थता जता दी कि अगर भारत सरकार ऐसा एक्शन लेती है तो उसके चीन से रिश्ते खराब हो जाएँगे। नेहरु ने इसे असंभव काम बताते हुए एलन को मना कर दिया।

एलन ने अपने देश में बताया कि आखिरी बार पूछने पर नेहरू ने कहा कि इस सम्बन्ध में कुछ नहीं हो सकता है। आगे ऐसी घटना ना हो इसके लिए अमेरिका को भारत के साथ ऐसे पदार्थों की खरीद बिक्री के लिए समझौता करना पड़ेगा।

दरअसल, नेहरू उस दौरान चीन के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देते थे। चीन में कम्युनिस्ट तानाशाही स्थापित हो चुकी थी और वह लगातार तिब्बत समेत अक्साई चिन के इलाकों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। हालाँकि, नेहरू इन सब बातों को नजरअंदाज कर रहे थे और देश में ‘हिंदी-चीनी-भाई-भाई’ के नारे लगवा रहे थे।

बता दें कि भारत के चीन को थोरियम बेचने से अमेरिका इतना क्रुद्ध हुआ कि उसने भारत को ‘बैटल एक्ट’ की याद दिला दी। दरअसल, बैटल एक्ट के तहत अमेरिका किसी भी ऐसे देश को दी जाने वाली सहायता बंद कर सकता था जो कि इसमें प्रतिबंधित हो। थोरियम नाइट्रेट को इसी सूची में शामिल किया गया था।

अमेरिका के विदेश मंत्री ने भारत में अपने राजदूत से कहा कि नेहरू की सरकार ने चीन को थोरियम बेच कर हमें मुश्किल में डाल दिया है। बैटल एक्ट के कारण हम उन पर एक्शन लेने को मजबूर हैं और इसलिए अमेरिका द्वारा भारत को दी जाने वाली मदद रोकनी पड़ सकती है।

भारत के चीन को थोरियम बेचने से जुड़ी समस्या को बताते अमेरिकी विदेश मंत्री
भारत के चीन को थोरियम बेचने से जुड़ी समस्या को बताते अमेरिकी विदेश मंत्री

14 अगस्त को राजदूत एलन ने वापस अपने विदेश मंत्री को लिखा कि हमें भारत को स्पष्टतया यह बता देना चाहिए कि यदि वह हम से मदद लेते हैं तो कुछ शर्तें हमारी माननी पड़ेगी। उन्होंने इससे पहले के एक खत में भारत का सारा थोरियम नाइट्रेट अमेरिका के खरीदने का भी प्रस्ताव रखा।

कई महीनों तक चले इस ड्रामे में यह थोरियम नाइट्रेट चीन पहुँच गया। नेहरू ने चीन से अच्छे संबंधों की दुहाई देते हुए इस जहाज को रोकने से मना कर दिया। इसी चीन ने नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए 1953 में तिब्बत पर भी कब्जा कर लिया और 1962 में भारत का भी इलाका हथिया लिया।

नेहरू ने इस पर संसद में कहा अक्साई चिन में तो घास का एक तिनका भी नहीं उगता।

महादेव बेटिंग एप घोटाला, शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य घोटाला, चावल घोटाला, खदान घोटाला… छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस का हिसाब-किताब

छत्तीसगढ़ में दो चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, पहला चरण समाप्त हो चुका है, दूसरे चरण के लिए 17 नवंबर को वोट डाले जाएँगे। दूसरे चरण में 70 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। राज्य में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस सरकार पर घोटालों पर घोटालों को अंजाम देने के आरोप हैं, ऐसे में जनता कॉन्ग्रेस से खफा नजर आ रही है। भूपेश बघेल सरकार पर शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य बनाने के नाम पर घोटाला, चावल घोटाला, खदान से जुड़े माल ढुलाई के काम में घोटाला के साथ ही महादेव बेटिंग ऐप जैसे घोटालों की लंबी फेहरिस्त है।

भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंंत्री बनाया गया था, तो ऐसी रिपोर्ट्स थी कि उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है, अगले ढाई साल टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ। भूपेश बघेल तमाम गतिरोधों के बावजूद पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बने रहे। टीएस सिंहदेव को आखिरी कुछ महीनों के लिए उपमुख्यमंत्री बनाकर चुप करा दिया गया। ऐसा टीएस सिंहदेव ने क्यों होने दिया, ये तो वही लोग जानें, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो भूपेश बघेल ने खुद को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की।

उन पर भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ को कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए तिजोरी के तौर पर इस्तेमाल कराया। जिन चीजों का वादा करके वो सत्ता में आए थे, किया उसके ठीक विपरीत काम और घोटालों पर घोटालों को अंजाम दिया। कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए फंडिंग की और खुद को सत्ता में बनाए रखा। हम इस लेख में भूपेश बघेल सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की लंबी सूची प्रकाशित कर रहे हैं, जिसके बाद सारी बातें दूध और पानी की तरह स्पष्ट हो जाएंगी।

महादेव सट्टेबाजी घोटाला: भारतीय जनता पार्टी आरोप लगा रही है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल हैं। इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड और एप के मालिक ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि उसने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए हैं। ये पैसे चुनाव में इस्तेमाल किए गए हैं। उसने बताया कि एक-एक पैसों का हिसाब उसके पास है। बता दें कि महादेव सट्टेबाजी एप मामला 15000 करोड़ का अभी तो ज्ञात है, जाँच जारी है। इतने पैसों की ती मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है, जिसपर ईडी ने केस दर्ज किया है। अभी ये कितना बड़ा घोटाला है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस मामले में भूपेश बघेल के करीबी लोग जेल में बंद हैं।

इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाकायदा चुनावी सभा में भूपेश बघेल से सवाल पूछा है कि वो बताएँ कि इन पैसों को उन्होंने कहाँ इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने पूछा, “मैं कॉन्ग्रेस से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाला 508 करोड़ रुपए का है और जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। छत्तीसगढ़ के सीएम का एक करीबी सहयोगी भी जेल में है। कॉन्ग्रेस को खुलासा करना चाहिए इसमें सीएम को कितना पैसा मिला? दिल्ली दरबार कितना पैसा पहुँचा?”

छत्तीसगढ़ पीसीएस घोटाला : इस घोटाले से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारियाँ सामने आई है। छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन में नेताओं और अधिकारियों को बच्चों को सीधे एंट्री मिली, और उन्हें बड़े-बड़े पद भी दिए गए। प्रधानमंत्री ने भी इस घोटाले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस के गणितबाजों से सवाल PSC घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के युवाओं का भी है… जिन हजारों युवाओं ने दिन-रात पढ़ाई करके, परीक्षा पास की थी, उनको किस फॉर्मूले से बाहर निकाला गया? कॉन्ग्रेस नेताओं के बच्चों को गणित के किस फॉर्मूले से भर्ती किया गया?

शराब घोटाला : भूपेश बघेल ने वादा किया था कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आएगी तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी करेगी। उल्टा भूपेश बघेल और उनके बेटे पर आरोप है कि उन्होंने कमीशनखोरी करके 2161 करोड़ रुपए का घोटाला किया जबकि अभी इसकी पूरी डिटेल भी सामने नहीं आई है। जो पकड़ा गया और जिसकी रिकवरी हुई है, यह उसकी जानकारी है। सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। इस मामले में ईडी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और बताया है कि एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।

चावल घोटाला : छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पर सरकारी राशन के बँटवारे में भी घोटाले का आरोप लगा है। पीडीएस व्यवस्था के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो धान देने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कैग रिपोर्ट में आया है कि इसमें 600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की गई है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भूपेश बघेल सरकार ने लगभग 5000 करोड़ रुपये का चावल घोटाला किया है। मई माह में भाजपा ने भूपेश बघेल पर 5000 करोड़ के चावल घोटाले का आरोप लगाते हुए इस्तीफा भी माँगा था। इस मामले में भूपेश बघेल और उनसे जुड़े लोगों ने चुप्पी साधे रखी है।

खदान ढुलाई घोटाला: भूपेश बघेल सरकार ने खदानों से निकलने वाले माल पर भी घोटाला किया है। माल ढुलाई से जुड़ा 2000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप उस पर है। बताया जा रहा है कि 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई है। पिछले साल ईडी ने इस मामले में जाँच शुरू की थी और कई लोग इस मामले में भी गिरफ्तार हुए हैं। ईडी ने एक बयान में कहा कि यह मामला एक बड़े घोटाले से संबंधित है, जिसमें छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़ा एक समूह ढुलाई किये जाने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपये का कर वसूल रहा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित किए जाते हैं।

गोबर और गोईंठा घोटाला : छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने घोटाला करने मे गोईंठा और गोबर को भी नहीं छोड़ा। 1300 करोड़ रुपये का गोईंठा एवं गोबर घोटाला किया। इस मामले में भाजपा ने भी काफी हमला बोला है, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले को उठा चुके हैं। गोबर धन के नाम पर इतना बड़ा घोटाला छत्तीसगढ़ में अंजाम दे दिया गया।

छत्तीसगढ़ में चना सरकारी राशन के वितरण में घोटाला, केंद्र सरकार के पैसों का सही से उपयोग न करने के आरोप, भाई भतीजावाद के आरोप तो लगते ही रहे हैं, साथ ही आदिवासी इलाकों के साथ सौतेला व्यवहार करने के भी आरोप लगे हैं। भूपेश बघेल पर आरोप हैं कि वो छत्तीसगढ़ से मिले घोटालों के पैसों को कॉन्ग्रेस की टॉप लीडरशिप तक पहुँचाते हैं और अन्य राज्यों के चुनावी अभियान में भी खर्च करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि वो पूरे 5 साल तक अपनी सत्ता बचाने में सफल रहे हैं।

मिया खलीफा के लिए एक जैसी है सेना और पॉर्न इंडस्ट्री, शरीर बेचने को आर्मी में सेवा देने से बेहतर बताया: सैनिकों की तुलना OnlyFans से कर फँसी

अपने अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाले सोशल मीडिया बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाली पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा फिर चर्चा में है। उन्होंने अब सेना और पॉर्न इंडस्ट्री को एक जैसा बताने वाला अपना बीते साल का एक पुराना वीडियो अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर शनिवार (11 नवंबर, 2023) को अमेरिका के वेटर्नस डे (Veterans Day) पर रिपोस्ट किया है।

वेटरन्स डे पर साझा किए गए इस वीडियो में, मिया खलीफा के विवादास्पद बयान के साथ एक परेशान दिख रहे आर्मी ऑफिसर की क्लिप भी थी। इससे से एक विरोधाभास पैदा हो गया। उनके इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस को बढ़ावा दिया। इराक युद्ध और अमेरिकी विरोधी भावनाओं पर कॉमेडियन मार्सेला अर्गुएलो के विचारों ने खलीफा के रिपोस्ट की इस वीडियो क्लिप को उकसा दिया है। इससे सोशल मीडिया पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई है।

हाल ही में मिया ने फिलिस्तीनियों का समर्थन करते हुए इज़रायल को बुरा-भला कहा था। इसे लेकर ‘Playboy’ मैगजीन ने मिया खलीफा को बाहर का रास्ता दिखाया तो रेडियो होस्ट, रेड लाइट हॉलैंड भी उसे काम से निकाल चुके हैं। अब उनके इस रिपोस्ट को लेकर भी खासा विवाद छिड़ गया है। सोशल मीडिया यूजर इस वीडियो पर बँट गए हैं। कई लोग खलीफा के अपने विचारों को जाहिर करने का समर्थन करते दिखते हैं।

खलीफा के वीडियो को पर एक शख्स ने जवाब दिया, “ये उस महिला का कहना है जो हमारी दी गई आजादी को भुनाते हुए पैसे के लिए अपने खुद के जिस्म को उघाड़ती है। आपने (मिया) कभी भी अपने सिवाय किसी और के लिए कुछ भी बलिदान नहीं किया है। दुखद है कि आप एक इंसान के तौर बहानेबाजी करती हैं।”

अब आलम ये है कि ये बहस सार्वजनिक हस्तियों के साथ खलीफा की बातचीत तक चली गई है। रेडियो होस्ट और रेसलिंग एक्सपर्ट पीटर रोसेनबर्ग के साथ एक निजी बातचीत को खलीफा ने खुद के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक किया था। रोसेनबर्ग ने इस मामले में खलीफा के नजरिए को बेतुका और हास्यास्पद बताया था।

इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी है जो आर्मी सर्विस और ‘ओनली फैन्स’ के बीच तुलना के खलीफा को कोस रहे हैं। दरअसल लेट नाइट टॉक शो ज़िवे में जुलाई 2022 में अपने शरीर को ‘ओनली फैन्स’ पर बेचने से जुड़े शो की होस्ट ज़िवे फुमुदोह के एक सवाल पर मिया ने ऐसा जवाब दिया था कि वो विवादों में घिर गई थीं।

दरअसल ओनलीफैन्स लंदन, यूनाइटेड किंगडम की इंटरनेट सामग्री मेंबरशिप सर्विस है। इसका इस्तेमाल खासकर पॉर्नोग्राफी के लिए सेक्स वर्कर करते हैं। हालाँकि, ये यह फिजिकल फिटनेस एक्सपर्ट्स और म्यूजिशियन के काम को भी होस्ट करता है।

तब मिया खलीफा ने ये तक कह डाला था कि इंटरनेट पर अपना शरीर बेचना सैनिक होने की मुकाबले बेहतर है। इस बयान हो हल्ला मचने पर मिया ने कहा था, “मेरे बयान पर एतराज जताने वाले सभी लोगों के लिए कि सेना में रहना में ‘ओनली फैन्स’ रहने से भी बदतर है क्योंकि आप अपना शरीर सरकार को बेच रहे हैं – हम दोनों इस देश की सेवा कर रहे हैं! आपको क्या लगता है कि उन्होंने उस वक्त हौसला बढ़ाने के लिए क्या भेजा था? अधिक सैनिक, या स्कर्ट में मर्लिन मुनरो?”

उन्होंने तर्क दिया था कि कोई भी काम अगर आप करते हैं तो वह शरीर को बेचना ही होता है। तब भी मिया के सेना में आप सरकार को अपना शरीर बेच रहे होते हैं वाले बयान पर लोगों के मिले जुले रिएक्शन थे।

हालाँकि इस सारे मामले में खलीफा ने फिलिस्तीन का समर्थन करने और अपने कारोबारी फैसलों को लेकर बचाव का रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यहूदियों को लेकर अपने कारोबारी रिश्तों को पहले ही न परखने पर उन्हें खेद हैं। खलीफा के अतीत के बयानों के फिर से सामने आने से ऐसी बातचीत फिर से शुरू हो गई है जो एडल्ट मनोरंजन के दायरे से परे पहुँच गई है। ये बहस अब राजनीतिक तौर से प्रेरित दुनिया में निजी अभिव्यक्ति की जटिलताओं पर बहस करने तक चली गई है।