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‘काहे नाराज़ हैं सर?’: पत्रकारों को देखते झुक कर प्रणाम करने और आरती उतारने लगे CM नीतीश कुमार, ‘पानी जाता है’ वाले बयान के बाद मीडिया से बनाई दूरी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार चर्चा में हैं। कभी सदन के भीतर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के मामले में, तो कभी जीतन राम माँझी पर गलतबयानी के मामले में। राजनीतिक मामलों में तो वो हमेशा सुर्खियाँ बटोरते रहे हैं, लेकिन कुछ दिनों से गैर-राजनीतिक कामों के चलते चर्चा बटोर रहे हैं। इस बार नीतीश कुमार का ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो पत्रकारों से हाथ जोड़ते और उन्हें प्रतीकात्मक आरती करते दिख रहे हैं।

मीडिया को अवॉइड कर रहे हैं नीतीश कुमार?

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एक कार्यक्रम में पहुँचे थे। यहाँ से जब वो बाहर निकल रहे थे, तो पत्रकारों ने उन्हें आवाज लगाई। नीतीश कुमार ने सभी को किनारे कर दिया और पत्रकारों के आगे हाथ जोड़ लिया। इसके बाद वो प्रतीकात्मक तौर पर पत्रकारों की आरती भी उतारने लगे। उन्होंने अपने मुँह से एक शब्द भी नहीं कहा। इसके बाद न तो वो रुके और न ही नीतीश कुमार के डिप्टी तेजस्वी यादव ही रुके। पत्रकारों ने कुछ देर इंतजार किया, फिर वो भी आगे बढ़ गए।

वरिष्ठ पत्रकार राजन सिंह ने इसे नीतीश कुमार की नौटंकी करार दिया है। उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, “बिहार के सीएम #नीतीशकुमार की नौटंकी! जब पत्रकार ने पूछा : काहे नाराज हैं सर? तो सुशासन बाबू ने नीचे झुक कर हाथ जोड़ना शुरू कर दिया… ऐसे प्रणाम कौन करता है भाई…? @yadavtejashwi ने भी मीडिया की अनदेखी की…”

इन्हीं नीतीश कुमार ने पत्रकारों को आजादी देने की कही थी बात

बता दें कि इंडी गठबंधन के ऐलान के दौरान नीतीश कुमार ने खूब दम भरा था और कहा था कि आप लोगों (मीडिया वालों) को भी इंडी गठबंधन के राज में सवाल पूछने की आजादी मिलेगी। वो बहुत दूर के भविष्य की बात कर रहे थे शायद, क्योंकि विधानसभा की गैलरी हो या कोई और जगह, वो मीडिया वालों को डिक्टेट ही करते दिखते हैं। वहीं, इंडी गठबंधन ने जब कुछ पत्रकारों का बहिष्कार किया था, तब भी नीतीश कुमार ने कहा था कि वो पत्रकारों का समर्थन करते हैं। उनका बहिष्कार करना गलत बात है। हालाँकि उनकी अब की हरकतें कुछ और ही कह रही हैं।

आजादी की जगह डिक्टेट करते दिखे हैं नीतीश कुमार

कुछ दिन पहले ही वो विधानसभा में अपने पूर्व साथी जीतन राम माँझी को जब बेइज्जत कर रहे थे, तब भी उन्होंने मीडिया को डिक्टेट करने की कोशिश की थी और कहा था कि आप लोग (मीडिया वाले) इसे फालतू ही जगह देते हैं। इसे कुछ नहीं आता। नीतीश कुमार ने पत्रकारों की तरफ इशारा करके कहा कि वो मांझी को भाव ना दिया करें। नीतीश कुमार बोले, “आप बिना मतलब के इसको (मांझी) को रोज पब्लिश करते हो। कोई सेंस है इसमें?”

इसके अलावा भी कई बार विधानसभा से लेकर अन्य जगहों पर मीडिया को राय देते दिखे हैं। वहीं, माँझी ने कुछ समय पहले आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को धीमा जहर दिया जा रहा है, इसीलिए वो ऊल-जलूल हरकतें कर रहे हैं।

‘राजस्थान में बुरी तरह हार रही कॉन्ग्रेस’: अशोक गहलोत के बेटे ने ही लाल डायरी में की भविष्यवाणी, कहा- ‘पापा सरकार रिपीट नहीं कर पाएँगे लिखकर देता हूँ’

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में कॉन्ग्रेस को बुरी हार मिल रही है। ये भविष्यवाणी कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत ने 2020 में ही कर दी थी। उनकी भविष्यवाणी का खुलासा हुआ है लाल डायरी के उन चार नए पन्नों से, जिसे मीडिया के सामने रखा है गहलोत के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने। दावा किया जाता है कि यह लाल डायरी राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के घर से कुछ महीनों पहले बर्खास्त किए गए मंत्री राजेंद्र गुढ़ा लेकर आए थे।

राजेंद्र गुढ़ा ने अशोक गहलोत के उदयपुरवाटी दौरे से ठीक पहले इस डायरी के चार पन्ने जारी किए हैं, इसके एक पन्ने में कथित रूप से राजेंद्र राठौड़ वैभव गहलोत के एक फोन का जिक्र कर रहे हैं। इसमें वैभव गहलोत ने कहा- “पापा सरकार रिपीट नहीं कर पाएँगे ये लिखकर दे देता हूँ।”

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पन्ने पर लिखा है, ”वैभव गहलोत का फोन आया कि पापा इसलिए वापिस सरकार नहीं बना पाते हैं… हर बार… इस बार भी… मैं इसलिए लिख के दे सकता हूँ। सरकार बुरी तरह हारेगी। इसका कारण वे स्वंय हैं। अधिकारियों से ऐसे घिर जाते हैं। उन्हें राजनैतिक व्यक्ति बहुत बुरा लगने लग जाता है। वैभव जी के कहने पर सवाईमाधोपुर में एक स्वीपर का भी ट्रांसफर नहीं किया। जिला के अधिकारियों में मेरा बहुत गलत मैसेज गया है। दानिश के सीएम साहब के भारी खिलाफ होते हुए भी उसके कहने पर मेरी बेईज्जती की। तब मैंने वैभव जी द्वारा भेजे ह्वाट्सऐप मैसेज सीएम साब के ओएसडी शशिकांत को भेजकर कहा कि सीएम साहब को कहना वैभव जी बहुत नाराज हैं।”

लाल डायरी का पन्ना, जिसमें वैभव कॉन्ग्रेस के हार की वजह बता रहे हैं। फोटो साभार : भास्कर

राजेंद्र गुढ़ा को मंत्रिमंडल से कर दिया गया था बर्खास्त

बता दें कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने राजस्थान विधानसभा में इस डायरी को लहराया था। उन्होंने राजस्थान सरकार को आईना दिखाते हुए कहा था कि राजस्थान सरकार पहले राजस्थान की समस्याओं पर बात करे, बाद में किसी और जगह की। इसके बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। राजेंद्र गुढ़ा ने कहा था कि वो लाल डायरी को विधानसभा स्पीकर की टेबल पर रखना चाहते थे, लेकिन कॉन्ग्रेसी विधायकों ने उसका आधा हिस्सा उनसे छीन लिया। राजेंद्र गुढ़ा ने दावा किया था कि इस लाल डायरी में विधायकों की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ क्रिकेट के चुनाव में किसे कितने रुपए दिए और क्या काले कारनामे हुए गए इन सबका हिसाब है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया था इस डायरी का जिक्र

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 27 जुलाई 2023 को इस लाल डायरी का जिक्र अपनी एक सभा में किया था। उन्होंने कहा था, “कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है और झूठ का बाजार चलाया है। झूठ की दुकान का सबसे ताजा प्रोजेक्ट है, राजस्थान की ‘लाल डायरी’। कहते हैं इस ‘लाल डायरी’ में कॉन्ग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे। कॉन्ग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस ‘लाल डायरी’ का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुँह पर ताला लगा लें, लेकिन ये ‘लाल डायरी’ इस चुनाव में कॉन्ग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है।”

कर्नाटक में भर्ती एग्जाम में ‘हिजाब’ पर बैन, मंगलसूत्र-बिछ‍िया की इजाजत: भड़के INDI गठबंधन के उमर अब्दुल्ला, कहा- ‘मुस्लिमों को बनाया जा रहा निशाना, कॉन्ग्रेस से उम्मीद नहीं

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने भर्ती परीक्षाओं में सिर ढकने (हिजाब) पर बैन लगा दिया है। हालाँकि, एग्जाम हाल में अन्य तरह के जेवरों को छोड़कर मंगलसूत्र-बिछ‍िया पहनने की इजाजत दी गई है। केईए ने फोन ब्लूटूथ, इयरफ़ोन जैसे किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को लाने पर भी रोक लगा दी है।

जहाँ परीक्षा ड्रेस कोड में लड़कियों को ऊँची एड़ी के जूते, जींस और टी-शर्ट पहनने पर बैन लगाया गया है। वहीं पुरुषों को आधी आस्तीन वाली शर्ट पहनने की मंजूरी दी गई है, लेकिन वो शर्ट उनके पैंट में अंदर टक की गई नहीं होनी चाहिए।

हालाँकि, कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण के ड्रेस कोड में प्रतिबंधित कपड़ों की सूची में हिजाब का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन भर्ती परीक्षाओं के दौरान सिर ढकने के खिलाफ नियम इस पर रोक लगाएँगे। वहीं भर्ती परीक्षा में हिजाब बैन को लेकर उमर अब्दुल्ला का भी बयान आया है।

सिर ढकने पर कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण के प्रतिबंध पर एनसी उपाध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला कहते हैं, “यह निराशा की बात है। सरकार क्या पहनने और क्या नहीं पहनने में हस्तक्षेप क्यों करेगी? मुस्लिमों को निशाना बनाकर विशेष तौर पर जारी किए गए। जब पहले कर्नाटक में ऐसा होता था, तो हमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि उस समय भाजपा सरकार थी। यह निराशाजनक है कि कॉन्ग्रेस शासन में ऐसे आदेश जारी किए जा रहे हैं… मैं अपील करूँगा वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी से कि कर्नाटक में जो जारी आदेश जारी हुआ है इस पर दोबारा सोच लें और इसे वापस लेने का काम करें।” 

बता दें कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण ने राज्य में कई बोर्डों और निगमों की आगामी भर्ती परीक्षाओं को लेकर ये फैसला लिया है। क्योंकि प्रदेश भर में कई बोर्ड और निगमों में भर्ती के लिए परीक्षा 18 और 19 नवंबर को होनी हैं।

कहा जा रहा है कि कुछ छात्रों के ब्लूटूथ डिवाइस के इस्तेमाल की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने इस बार बैन लगाने का फैसला लिया है। दरअसल, अक्टूबर 2023 में केईए की आयोजित परीक्षाओं में कलबुरगी और यादगीर परीक्षा केंद्रों में उम्मीदवारों के कथित तौर पर ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करने की घटना सामने आई थी। इस घटना को लेकर राज्य सरकार ने 11 नवंबर, 2023 को राज्य सीआईडी को इसकी जाँच का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि कर्नाटक में हिजाब पर विवाद जनवरी 2022 में भड़का था। तब उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज ने कथित तौर पर हिजाब पहनने वाली छह लड़कियों को प्रवेश से रोक दिया। इसे लेकर इन लड़कियों ने कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

इसके बाद उडुपी के कई कॉलेजों के लड़के भगवा स्कार्फ पहनकर क्लास में जाने लगे थे। धीरे-धीरे ये विरोध राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल गया और इसने विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों का रूप ले लिया। इस मामले के कोर्ट में पहुँचने पर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के अंतर्गत आने वाली कक्षाओं में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के कर्नाटक सरकार के फैसले को बरकरार रखा था।

तब बीजेपी की सीएम बसवराज सोमप्पा बोम्मई की सरकार ने इस आदेश को 10वीं और 12वीं कक्षा जैसी अन्य बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ केईए की आयोजित होने वाली सामान्य प्रवेश परीक्षा तक भी बढ़ा दिया था।

नेहरू नहीं मौलाना आज़ाद तय करते थे भारत की मिडिल-ईस्ट पॉलिसी: मुस्लिमों को खुश करने के लिए नेहरू ने जिस इजरायल को किया परेशान, 1962 में उसी ने दिए हथियार

हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला बोल दिया। इजरायल में जल, थल और नभ के माध्यम से घुसे इन आतंकियों ने डेढ़ हजार लोगों का कत्लेआम किया। यहूदी राष्ट्र पर 5000 मिसाइलों से वार किया गया। एक महिला की हत्या के बाद उसकी नग्न लाश का ‘अल्लाहु अकबर’ नारे के साथ हथियारबंद इस्लामी आतंकियों द्वारा परेड कराए जाने का वीडियो भी सामने आया। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग, क्या निरीह पशु – इस्लामी आतंकियों ने सबको अपनी गोलियों का शिकार बनाया।

भारत ने इस्लामी आतंकियों की निंदा की। उधर इजरायल ने इस नरसंहार के बाद हमास के कब्जे वाले गाजा पट्टी पर हमला कर वहाँ अपना नियंत्रण स्थापित किया। लेकिन, इसी बीच दुनिया भर का वामपंथी और इस्लामी गिरोह उग्र हो उठा और उसने इजरायल की निंदा करनी शुरू कर दी। अपने लोगों की रक्षा कर रहे एक छोटे से देश को गाली देते हुए फिलिस्तीनी बच्चों की चिंता जताई जाने लगी। ये अलग बात है कि हमास ने खुद फिलिस्तीनी बच्चों और महिलाओं को खुद को बचाने के लिए ढाल बनाया।

इजरायल हमेशा से भारत के साथ रहा है, चाहे हथियारों के माध्यम से युद्ध के दौरान हमारी मदद करनी हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ देना हो – इजरायल ने कभी भारत का साथ नहीं छोड़ा। इसके उलट हमें जानने की ज़रूरत है कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का इजरायल के प्रति रुख क्या था। जवाहरलाल नेहरू की प्राथमिकता थी – अरब देशों को खुश करना। ये अलग बात है कि अरब ने जहाँ भी बात इस्लाम की आई वहाँ भारत के खिलाफ जाने से भी गुरेज नहीं किया।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की कुलपति, राज्यसभा की उप-सभापति और राज्यपाल रहीं नज़मा हेपतुल्ला ने अपनी पुस्तक ‘Indo-West Asian Relations: The Nehru Era‘ में लिखा है कि अपने गठन के साथ ही पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीन और फ्रांस के खिलाफ मोरक्को और ट्यूनीशिया का साथ देना शुरू कर दिया था (दोनों देश कभी फ्रेंच नियंत्रण में हुआ करते थे)। और हाँ, इन मामलों में उसे भारत का साथ भी मिलता था। पाकिस्तान ने अपने गठन के साथ ही ‘उम्माह’ का नेता बनने के लिए प्रयास शुरू कर दिया था।

इजरायल का पूरा प्रयास था कि भारत एक देश के रूप में उसे मान्यता दे और इसके लिए उसने महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू को मनाने की पूरी कोशिश की। उस समय तक अमेरिका, UK और सोवियत रूस तक ने इजरायल को मान्यता दे दी थी, लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने नहीं दी। जवाहरलाल नेहरू का कहना था कि इजरायल के संबंध में भारत को न सिर्फ आदर्शवादी विमर्शों को ध्यान में रखना चाहिए, बल्कि वास्तविक परिस्थियों से उपजी चेतावनियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

खुद जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि भारत की नीति इतिहास में सामान्यतः अरब के प्रति झुकाव वाली रही है और साथ ही उन्होंने ये भी सफाई दी थी कि हम यहूदियों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने माना था कि उनके समय में भी यही नीति चली आ रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भारत ने इजरायल को मान्यता नहीं दी है। साथ ही वो UN के अंतिम निर्णय के बाद इस पर पुनर्विचार की बातें भी करते थे। याद दिलाते चलें कि 4 मई, 1949 को UN ने उसे मान्यता देने संबंधी याचिका स्वीकार की थी।

इसके एक सप्ताह बाद ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इजरायल को मान्यता देने संबंधी याचिका को पारित कर दिया। आप जानते हैं उस समय वोटिंग के दौरान नेहरू सरकार का रुख क्या था? तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आदेश दिया कि भारत इजरायल को मान्यता दिए जाने के खिलाफ वोट करे, क्योंकि हमारी नीति अरब के साथ सहयोग वाली रही है। उन्होंने कहा था कि वैसे इजरायल को मान्यता नहीं दी जा सकती जो बातचीत के माध्यम से नहीं, बल्कि हथियारों के बल से स्थापित हुआ है।

जवाहरलाल नेहरू इसके बाद भी इजरायल को मान्यता दिए जाने का विरोध करते रहे। 17 सितंबर, 1950 को आखिरकार नेहरू सरकार ने इजरायल को मान्यता दी। इसका कारण था कि बगल में पाकिस्तान खुद को इस्लाम का रहनुमा बना कर पेश कर रहा था और अरब देशों की उससे घनिष्ठता थी। लेकिन, इजरायल को मजबूरी में मान्यता दिए जाने के बाद भी नेहरू का जोर अरब और इस्लाम को खुश करने में लगा रहा। उन्होंने अरब को सफाई दी कि भारत फिलिस्तीनी शरणाथियों की माँगों का समर्थन करता रहेगा।

साथ ही उन्होंने अरब को भरोसा दिलाया कि जेरुसलम और सीमान्त क्षेत्रों में इजरायल के नियंत्रण को भारत मान्यता नहीं देता है। आज की तरह ही भारत की आज़ादी के बाद भी यहाँ के मुस्लिम इजरायल के विरोधी हुआ करते थे। यहाँ की सोशलिस्ट पार्टियाँ इजरायल के लेबर मूवमेंट के कारण यहूदी राष्ट्र का समर्थन करती थीं। वहीं जनसंघ भी इजरायल के साथ संबंध सुधारने के पक्ष में थे। लेकिन, नेहरू सरकार प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी और बिगड़ी आर्थिक स्थितियों का हवाला देते हुए कूटनीतिक संबंध स्थापित करने में देरी करती रही।

इजरायली भी नेहरू सरकार के इस रुख से निराश थे। इजरायल के प्रथम प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन ने कहा था कि वो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि इजरायल को लेकर नेहरू की नीति आखिर कैसे गाँधी की वैश्विक मित्रता के सिद्धांत के अनुरूप है। उन्होंने कहा था कि 8 साल पहले आश्वासन दिए जाने के बावजूद नेहरू ने कूटनीतिक संबंध स्थापित करने की ओर कोई कदम नहीं बढ़ाया। उन्होंने नेहरू को अपनी बात पर कायम न रहने वाला व्यक्ति करार दिया था।

कई बार इजरायल का प्रतिनिधिमंडल भारत आया, लेकिन राजनयिक संबंध बनाने की अनुमति नेहरू ने नहीं दी। उनका खुद कहना था कि चीजों को बैलेंस करने के लिए ये नीति अपनाई गई है। उन्होंने कहा था कि इजरायल के साथ राजनयिक संबंध बनाना ठीक नहीं होगा। अब बात करते हैं कि इस नीति पर मौलाना अबुल कलम आज़ाद का क्या प्रभाव था। मौलाना उस समय भारत के शिक्षा मंत्री हुआ करते थे और एक मुस्लिम होने के कारण बताने की ज़रूरत नहीं है कि वो किसके साथ थे।

कनाडा के राजनीतिक वैज्ञानिक माइकल ब्रेचर, जो भारत को लेकर कई पुस्तकें लिख चुके हैं, उन्होंने इस बारे में बात की है। मैक्गिल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे माइकल ब्रेचर ने लिखा है कि मौलाना आज़ाद नेहरू के करीबी मित्र थे और उन्होंने बलपूर्वक इजरायल नीति में हस्तक्षेप किया था। वो मानते हैं कि 1958 में अपने निधन तक वो भारत की मिडिल-ईस्ट पॉलिसी पर प्रभाव रखते रहे। माइकल ब्रेचर लिखते हैं कि मौलाना आज़ाद एक मुस्लिम होने के कारण स्वाभाविक रूप से प्रो-अरब थे।

उन्हें डर था कि अगर भारत इजरायल के साथ जाता है तो अरब का क्या रुख होगा। उस समय कश्मीर मुद्दे पर अरब के समर्थन के लिए पाकिस्तान के साथ भारत प्रतिद्वंद्विता के शिखर पर था। उन्होंने लिखा है कि नेहरू और आज़ाद को इसका भी भय था कि भारत की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी ‘असुरक्षित’ मुस्लिमों पर इजरायल के प्रति सकारात्मक रवैया रखने का क्या असर पड़ेगा। डर था कि भारत में सांप्रदायिक घृणा बढ़ेगी और पाकिस्तान इसका फायदा उठा कर हिंसा को अंजाम देगा।

नेहरू-आज़ाद को डर था कि विभाजन और दंगों के बाद भारतीय मुस्लिमों की वफादारी कहीं बदल न जाए। इजरायल के विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल रहे वालटर एटन ने इस संबंध में एक कड़वी सच्चाई लिखी है। उन्होंने लिखा था, “भारत की विदेश नीति में जितना नेहरू का प्रभाव है, दुनिया के किसी भी देश में किसी एक व्यक्ति का नहीं है। उनका प्रभाव इतना अधिक है कि भारत की विदेश नीति को लोग नेहरू की व्यक्तिगत नीति मानते हैं। उन्होंने इतनी ताकत से इसमें अपने विचार और अपना व्यक्तित्व भर दिया है कि भारत की विदेश नीति को नेहरू की प्राइवेट मोनोपोली (निजी एकाधिकार) मानी जा सकती है।”

उनका मानना था कि इसमें सरकार वल्लभभाई पटेल तक की नहीं चलती थी, जो उस समय भारत के विदेश मंत्री हुआ करते थे। जवाहरलाल नेहरू इजरायल को सकारात्मक जवाब दे चुके थे और भारत में नई सरकार के गठन के साथ ही उसे मान्यता देने का भरोसा दे चुके थे, लेकिन इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ तो इसमें मौलाना आज़ाद का प्रभाव भी माना जा सकता है। 1948 में बिहार में कुछ प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं ने फिलिस्तीन के लिए चंदा इकट्ठा करना भी शुरू कर दिया था।

उस समय जेद्दाह अरब की युद्ध गतिविधियों का केंद्र था और ये रुपए वहीं भेजे जाने थे। इतना ही नहीं, हैदराबाद का निजाम भी रुपए इकट्ठे कर रहा था। उसने 1.40 करोड़ पाउंड अरब वालों को भेजा था, ताकि फिलिस्तीन वाले इन पैसों से इजरायल से लड़ने के लिए हथियार खरीद सकें। नेहरू की बातों से ऐसा लगता है कि इजरायल को समर्थन न देने के पीछे अरब को खुश करने का कम और भारतीय मुस्लिमों के बीच विद्रोह का डर ज़्यादा था।

वहीं आज का समय देखिए। भारत की जनता खुल कर इजरायल के साथ है, हमास आतंकियों द्वारा की गई हिंसा की खुल कर यहाँ निंदा हो रही है। ऐसा नहीं है कि भारतीय मुस्लिमों ने अपना रुख बदल लिया है, बल्कि हिन्दू पुनरुत्थान के दौर में लोगों ने अपने मित्र और दुश्मन को पहचानने की क्षमता विकसित कर ली है। सोचिए, इजरायल का खुल कर साथ दिया गया होता शुरू से तो हथियारों से लेकर विज्ञान तक के क्षेत्र में भारत का कितना अधिक विकास होता।

एक और बात जानने लायक है, जब भारत पर 1962 में चीन ने हमला किया तो इसी इजरायल ने भारत की मदद की। भारत के निवेदन पर इजरायल ने हथियारों की सप्लाई की। इजरायल के प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन ने स्पष्ट लिखा कि इस युद्ध में इजरायल भारत के साथ है। उस समय नेहरू ही भारत के प्रधानमंत्री थे। बाद में 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ तब भी इजरायल के भारत की मदद की। ऐसे देश को नेहरू मान्यता देने और राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए बार-बार परेशान करते रहे थे।

UN में भारत ने कनाडा को धोया, मंदिरों पर हमले के लिए घेरा: बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी लताड़ा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की रिव्यू मीटिंग में कनाडा को जमकर फटकार लगाई है। यही नहीं, भारत ने कनाडा को आईना दिखाते हुए उसके खिलाफ प्रस्ताव भी पेश किया है। अकेले भारत ही नहीं, बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी इस मामले में भारत का साथ दिया और कनाडा को कटघरे में खड़ा किया। साथ ही भारत ने प्लेस ऑफ़ वर्शिप का मुद्दा उठाते हुए कनाडा को धार्मिक स्थानों पर हमले के लिए भी कटघरे में खड़ा किया।

बता दें कि ये तीनों ही देश अतीत में भी कनाडा को घेरते रहे हैं। कुछ समय पहले ही बांग्लादेश और श्रीलंका ने कनाडा को जमकर धोया था और अब संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार के मामलों को लेकर सबसे बड़े मंच पर कनाडा को बेपर्दा कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की समीक्षा बैठक के दौरान भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के राजनयिकों ने अपनी कूटनीटिक एकता की मिशाल पेश करते हुए कनाडा को बेपर्दा कर दिया। भारत ने कनाडा में पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने, घृणा फैलाने वाले भाषणों पर प्रभावी रोक लगाने की माँग करने वाली कूटनीतिक प्रस्ताव रखा, जिस पर श्रीलंका और बांग्लादेश ने भी कनाडा को जमकर खरी-खोटी सुनाई। भारत के इस काम को कूटनीतिक स्तर पर बड़ा प्रभावी कदम माना जा सकता है।

भारतीय राजनयिक मोहम्मद हुसैन ने परिषद की बैठक में कनाडा के नेशनल हाउसिंग स्ट्रेटजी एक्ट और एक्सेसिबल कनाडा एक्ट को लेकर विशेष रुप से अपनी बात रखी। भारत ने यह भी सिफारिश की कि कनाडा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग, विशेषकर हिंसा भड़काने को रोकने के लिए अपने घरेलू ढाँचे को मजबूत करे।

इसके अतिरिक्त, भारत ने कनाडा से चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले समूहों की गतिविधियों को अस्वीकार करने, धार्मिक और नस्लीय अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने और घृणा फैलाने वाले अपराधों और नफरत भरे भाषणों पर रोक लगाने का आग्रह किया। भारत ने कनाडा से नस्लीय हिंसा को भी रोकने की अपील की और उसे अपने सुझाव के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया।

बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी कनाडा को लगाई फटकार

वहीं, बांग्लादेश के राजनयिक अब्दुल्ला अल फोरहाद ने कनाडा से नस्लवाद, हेट स्पीच, हेट क्राइम और प्रवासियों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव से निपटने के अपने प्रयासों को तेज करने का आग्रह किया। अल फोरहाद ने कहा कि मानवाधिकार के मामलों में कनाडा के सहयोग के बावजूद काफी कुछ किया जाना बाकी है। बांग्लादेश ने अपनी सिफारिशों में ‘नस्लवाद, हेट स्पीच, हेट क्राइम और प्रवासियों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव से निपटने के अपने प्रयासों को तेज करने’ की माँग की। साथ ही प्रवासियों, श्रमिकों और उनके परिवारों के सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।

श्रीलंकाई राजनयिक थिलिनी जयासेकरा ने भी कनाडा को सभी प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर कन्वेंशन में शामिल होने, आप्रवासियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले नस्लीय भेदभाव के खिलाफ उपाय करने, अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ फेक न्यूज़ का मुकाबला करने, व्यापक रिपोर्टिंग और पालन के लिए अपने राष्ट्रीय तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश की। श्रीलंका ने कुछ मामलों में कनाडा को जमकर घेरा। इसमें नस्लीय भेदभावों का मामला भी शामिल रहा।

तीनों देश पहले भी कनाडा को दिखा चुके हैं आईना

भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका पहले भी कनाडा को खालिस्तानी आतंकवाद और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर आईना दिखा चुके हैं। भारत ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने के लिए कड़ा विरोध किया था। भारत ने कनाडा से खालिस्तानी आतंकवादियों को प्रत्यर्पण करने का आग्रह किया था। इस मामले में बांग्लादेश ने कनाडा में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर कड़ा विरोध किया था।

बांग्लादेश ने कनाडा से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था। वहीं, 2023 में ही श्रीलंका ने कनाडा में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर कड़ा विरोध किया था। श्रीलंका ने कनाडा से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था।

निज्जर की मौत के बाद से तनाव, राजनयिक संकट जारी

बता दें कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से दोनों देशों में राजनयिक तनाव बढ़ा है। भारत और कनाडा ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था। इस मामले में कनाडा ने भारत पर विएना कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगाया था, जिसपर भारत ने करारा जवाब दिया था।

भारत ने कहा था कि कनाडा के राजनयिकों की भारत में संख्या सीमा से अधिक है और वो भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय ने कनाडा को आड़े हाथों लिया था। इसके बाद वीजा सेवाएँ भी रुक गई थी, लेकिन अब सीमित मात्रा में वीजा सेवाएँ शुरू हो गई हैं।

UNHRC में कनाडा की बेईज्जती

UNHRC की बैठक में भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के कड़े विरोध के कारण कनाडा बेनकाब हो गया, जिसकी वजह से कनाडा को अपनी मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर सवालों का सामना करना पड़ा। यूएनएचआरसी जैसे मंच पर इस तरह की बेईज्जती से कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचा है। यह दर्शाता है कि कनाडा की मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं के प्रति विश्व समुदाय में संदेह है।

बिहार के अशफाक आलम ने केरल में 5 साल की बच्ची का किया रेप, हत्या कर नाले में फेंका: 110 दिन में कोर्ट ने सुनाई फाँसी की सजा

केरल के एक कोर्ट ने अशफाक आलम नाम के एक व्यक्ति को एक पाँच साल की बच्ची का अपहरण करके उसके बलात्कार और हत्या करने के दोष में फाँसी की सजा सुनाई है। 28 वर्षीय अशफाक ने 28 जुलाई, 2023 को एर्नाकुलम के अलुवा से एक बच्ची का अपहरण किया था और उसका बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी।

अशफाक ने बच्ची की टीशर्ट से ही उसका गला कस दिया था और उसकी लाश को फेंक दिया था। बच्ची के शरीर पर चोट के गंभीर निशान मिले थे। अब इस मामले में कोर्ट ने अशफाक को दोषी ठहराते हुए फाँसी की सजा सुनाई है और ₹7.7 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

अशफाक पर हत्या, अपहरण समेत POCSO के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए थे। कोर्ट का यह निर्णय POCSO लागू होने के 11 वर्ष पूरे होने की तिथि पर आया है। इस मामले को केरल की पुलिस ने प्राथमिकता पर रखते हुए जल्द ही ट्रायल चालू करवाया था और आज इसका निर्णय भी आ गया।

बता दें कि बच्ची के बलात्कार और हत्या का दोषी अशफाक आलम बिहार का रहने वाला है। उसने जिस बच्ची की हत्या की उसके माता-पिता भी बिहार से ही केरल काम करने के लिए गए हुए थे। बच्ची के पिता यहाँ जिप्सम बोर्ड लगाने का काम करते हैं।

28 जुलाई की शाम को अशफाक आलम बच्ची को अपने साथ ले गया और उसका बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी। अशफाक आलम ने बच्ची के शव पर पत्त्थर रख कर उसे एक नाले में डाल दिया। पुलिस ने जब अशफाक को पकड़ा तो वह उन्हें गुमराह करने लगा। हालाँकि, पुलिस ने इस मामले में जल्द से जल्द सबूत इकट्ठा करके अशफाक को सजा दिलवा दी।

यह निर्णय अपराध के 110 दिनों के भीतर आया है। हालाँकि, अशफाक की दोषसिद्धि 100वें दिन ही हो गई थी। मामले का निर्णय सुनाए जाने के समय अशफाक आलम के अब्बा और अम्मी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के कृत्य के लिए फाँसी से कम कुछ भी नहीं होना चाहिए।

केरल के एडीजीपी एम अजीतकुमार ने कहा कि पुलिस का इस मामले को गंभीरतम सिद्ध करना अशफाक को फाँसी दिलाने में सहायक रहा। उन्होंने इस मामले की जाँच को 30 दिनों में पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों की भी प्रशंसा की।

अजीत कुमार ने यह भी बताया कि अशफाक का यह कोई पहला ऐसा अपराध नहीं था बल्कि वह दिल्ली और बिहार में ऐसा ही कर चुका था। हालाँकि, यहाँ वह बचा रहा था लेकिन केरल में उसे गिरफ्तार करके सजा दिलवाई गई है। अलुवा बाजार में काम करने वाले एक व्यक्ति ने जो इस मामले का गवाह भी था, अशफाक को फाँसी मिलने पर मिठाई बाँटी।

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि ऐसे मामलों में फाँसी की सजा इस तरह के अपराध करने वालों के लिए चेतावनी का काम करेंगी। विजयन ने कहा है कि बच्ची के माता पिता के दुख को कम नहीं किया जा सकता लेकिन राज्य सरकार उनकी पूरी तरीके से सहायता करेगी।

बीवी-बच्ची के रहते दूसरी महिला के साथ रहने लगा, हाई कोर्ट ने माना अपराध: कहा- बिना तलाक लिए लिव इन में रहना दूसरी शादी जैसा

पंजाब हाई कोर्ट ने बिना तलाक दूसरी महिला के साथ लिव इन में रहने को अपराध बताया है। साथ ही अदालत ने लिव इन में रहने वाले जोड़े की पुलिस सुरक्षा की अपील भी ठुकरा दी है। अदालत ने कहा है कि बगैर तलाक शादीशुदा मर्द का दूसरी औरत के साथ लिव इन में रहना दूसरी शादी जैसा है।

जस्टिस कुलदीप तिवारी ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे पटियाला के जोड़े की याचिका ठुकराते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 494/495 के तहत द्विविवाह अपराध है। कोर्ट ने पाया कि पुरुष याचिकाकर्ता पहले से शादीशुदा है और उसकी दो साल की बेटी भी है।

याचिका खारिज करते जस्टिस तिवारी ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि व्यभिचार के किसी भी आपराधिक मुकदमे से बचने के इरादे से यह याचिका दायर की गई। याचिका के पीछे का असली इरादा अपने आचरण पर अदालती मान्यता हासिल कर लेना है।”

याचिका में लिव इन में रह जोड़े ने अदालत से सुरक्षा माँगते हुए कहा था कि उनके रिश्ते की वजह से उन्हें जान का खतरा है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि पति/पत्नी से तलाक लिए बगैर एक साथ रहने वाले जोड़े को ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में रहने या विवाह के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती है।

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी पहली पत्नी से कानूनी तौर पर तलाक लिए बगैर ही दूसरी महिला के साथ रह रहा है। इस वजह से उसकी पहली शादी का अस्तिव अभी बना हुआ है। कोर्ट ने कहा महिला (लिव इन पार्टनर) के साथ याचिकाकर्ता पुरुष वासनापूर्ण जीवन जी रहा है। आईपीसी की धारा 494/495 के तहत यह दूसरी शादी करने जैसा अपराध माना जाएगा। इसमें जुर्माने के साथ अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है।

इस जोड़े ने हाई कोर्ट को दी याचिका में कहा था कि वे सितंबर 2023 से ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में हैं। पुरुष साथी के परिवार ने उनके रिश्ते को मान लिया है, लेकिन महिला साथी के रिश्तेदार इसके विरोध में हैं। जोड़े को उनकी तरफ से धमकियाँ दी जा रही है। अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए इस जोड़े ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने इस जोड़े के जान को खतरा होने के दावों को निराधार करार दिया।

दिवाली मना रहे हिन्दुओं पर खालिस्तानियों ने बरसाए पत्थर, फेंका कूड़ा: लगातार दूसरे साल कनाडा में उपद्रव, वीडियो वायरल

कनाडा में हिन्दू घृणा दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कनाडा के मिसीसागा शहर में वेस्टवुड शॉपिंग माल की पार्किंग में दिवाली मना रहे हिन्दुओं पर खालिस्तानियों ने पत्थर बरसाए हैं। खालिस्तानियों की इस कारस्तानी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

खालिस्तानियों ने इस दौरान शान्ति से दिवाली मना रहे लोगों पर पत्थर बरसाने के साथ ही कूड़ा भी फेंका। उन्होंने इस दौरान हो हल्ला करने के साथ ही ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। लगातार दूसरे वर्ष ऐसा हुआ है कि खालिस्तानियों ने दिवाली मनाने वालों को परेशान किया है।

स्थानीय पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें इस इलाके में कुछ हंगामे की सूचना मिली थी। इलाके के स्थानीय नेताओं ने इस दौरान पुलिस की ढीली-ढाली कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने खालिस्तानियों के हंगामे का वीडियो भी एक्स (पहले ट्विटर) पर डाला है। जिस इलाके में खालिस्तानियों ने हमला किया है वहाँ बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है।

पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट डालकर कहा है कि वह वेस्टवुड मॉल की पार्किंग में हुई घटना की जाँच कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वह शहर के प्रशासन के साथ मिलकर इस मामले में आगे की कार्रवाई करेंगे।

वर्ष 2022 में भी दिवाली के दिन खालिस्तानियों ने भारतीयों पर हमला किया था। यह घटना भी इसी मिसीसागा शहर में हुई थी। इस दौरान खालिस्तान का समर्थन करने वाले समूहों ने हिन्दुओं को परेशान किया था और ‘राज करेगा खालसा’ जैसे नारे लगाए थे।

गौरतलब है कि कनाडा में हिन्दू मंदिरों पर भी लगातार हमले होते आए हैं। अब हिन्दुओं को दिवाली

ना मनाने देना, कनाडा में बढ़ती असहिष्णुता का नया उदाहरण है। बता दें कि भारत और कनाडा के सम्बन्ध सितम्बर माह से ही खराब हैं। सितम्बर में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर एक खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था जिसका भारत ने कड़ा राजनयिक जवाब दिया था।

कितनी बार भारत पहुँचा वर्ल्ड कप के सेमीफइनल में, कैसा रहा है रिकॉर्ड: न्यूजीलैंड से बड़े मैच से पहले जान लीजिए ये बातें, वानखेड़े में क्या होनी चाहिए रणनीति

15 नवम्बर 2023 को विश्वकप 2023 का पहला सेमीफाइनल मुकाबला है। यह मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दोपहर 2 बजे से खेला जाएगा। यह मैच तय करेगा कि भारत इस बार विश्वकप का फाइनल खेलेगा कि नहीं।

वर्तमान विश्वकप 2023 को मिलाकर अब तक कुल एक दिवसीय विश्वकप आयोजित किए गए हैं। इनमें से 8 बार भारत सेमीफाइनल मुकाबलों में पहुँचने में कामयाब रहा है। हालाँकि, इनमें से जीत मात्र तीन मुकाबलों में हासिल हुई है। 4 में हार का सामना करना पड़ा है और 1 का निर्णय कल के मैच से आएगा। भारत ने जो तीन सेमीफाइनल जीते हैं, उनमें से 2 बार फाइनल मुकाबला भी जीतने में कामयाब रहा है।

भारत पहली बार वर्ष 1983 में सेमीफाइनल तक पहुँचा था। यह मुकाबला भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। इस मैच में सफल होने के बाद भारत ने विश्वकप भी जीता था। यह भारत द्वारा जीता गया पहला विश्वकप था।

इसके पश्चात भारत 1987, 1996 और 2003 में सेमीफाइनल में पहुँचा। 2003 में भी भारत जीतकर फाइनल में पहुँचने में सफल रहा था लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गया था। 2003 में भारत केन्या को हराकर फाइनल में पहुँचा था। इसके पश्चात 2007 के विश्वकप में भारत पहली स्टेज से ही बाहर हो गया था। हालाँकि, 2011, 2015 और 2019 में भारत सेमीफाइनल में पहुँचने में सफल रहा है। भारत ने वर्ष 2011 में विश्वकप दोबारा जीता था। 2011 में भारत ने पाकिस्तान को हराया था।

2015 में भारत सेमीफाइनल ऑस्ट्रेलिया से जबकि 2019 में न्यूजीलैंड से हार गया था। चार साल बाद दोनों टीमें फिर सेमीफाइनल मुकाबले में आमने-सामने हैं। इस मुकाबले के रोमांचक होने की आशा की जा रही है क्योंकि भारत पूरे विश्वकप में अविजित रहा है। यदि भारत यह मुकाबला जीतता है तो वह अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में से किसी एक से भिड़ेगा।

दोनों टीमें इस मुकाबले के लिए मुंबई पहुँच चुकी हैं और तैयारियों में जुटी हुई हैं। कल पिच की स्थिति को देखते हुए भारत बड़े स्कोर खड़े करने और गेंदबाजों के जरिए न्यूजीलैंड पर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास करेगा। यदि भारत पहले बल्लेबाजी करता है तो गेंदबाजों और पहले गेंदबाजी करने पर बल्लेबाजों पर अधिक जिम्मेदारी रहने वाली है।

‘ऐश्वर्या राय से शादी करने से बच्चे नेक और अच्छे नहीं पैदा हो जाएँगे’: वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद बौखलाए पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर, ममेरी बहन से कर रखी है शादी

मौजूदा ICC वर्ल्ड कप 2023 में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम लीग मैचों में शर्मनाक हार के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गई। अब ‘खिसयानी बिल्ली खंबा नोचे’ की तरह पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक इस सब के बीच जबरन मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय को घसीट लाए हैं।

कराची के मैरियट होटल में रविवार (12 नवंबर, 2023) को पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटरों के साथ एक कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान रज्जाक ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की तुलना एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय से करने से भी गुरेज नहीं किया। रज्जाक ने कहा कि उनके ऐश्वर्या राय से शादी करने से बच्चे नेक और अच्छे पैदा नहीं हो जाएँगे।

पाक की 2009 विश्व कप जीतने वाली टी20 टीम का हिस्से रहे खिलाड़ियों की महफिल में पीसीबी के इरादों पर सवाल उठाते हुए रज्जाक ने कहा, ”मैं यहाँ उनके (पीसीबी के) इरादे के बारे में बात कर रहा हूँ। जब मैं खेल रहा था तो मुझे पता था कि मेरे कप्तान यूनिस खान के इरादे अच्छे थे। उससे मुझे आत्मविश्वास और साहस मिला और अल्लाह का शुक्र है कि मैं पाकिस्तान क्रिकेट के लिए अच्छा प्रदर्शन कर सका।”

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, फिलहाल, यहाँ पाकिस्तान टीम और विश्व कप में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। मुझे लगता है कि हमारा इरादा खिलाड़ियों को निखारने और विकसित करने का नहीं है।

उन्होंने कहा, “अगर आप सोचते हैं कि मैं ऐश्वर्या (राय) से शादी करूँगा और फिर मेरे अच्छे और नेक बच्चे होंगे, तो ऐसा कभी नहीं हो सकता। इसलिए पहले आपको अपने इरादे ठीक करने होंगे।”

इस महफिल में रज्जाक के साथ भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा से निकाह करने वाले शोएब मलिक सहित शाहिद अफरीदी, यूनिस खान, मिस्बाह उल-हक, उमर गुल, सईद अजमल और कामरान अकमल भी थे। वहाँ मौजूद लोग और दर्शकों में से कुछ लोग इस तंज पर हंस पड़े और तालियाँ बजाने लगे।

अब्दुल रज्जाक के इस बयान पर इस बयान पर भारत के लोगों ने ही नहीं बल्कि पाकिस्तानियों ने भी उनका खासा मजाक उड़ाया। पाकिस्तान के एक एक्स यूजर हमजा ने कहा, “कभी नहीं सोचा था कि अब्दुल रज्जाक जैसा खिलाड़ी अपनी जिंदगी में इतना नीचे गिर जाएगा। शर्मनाक।”

पाकटीवी के फाउंडर और एंकर सना उल्लाह खान ने भी इस बयान के लिए रज्जाक की आलोचना की और कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से भारत की ओर से जवाबी बयान आते हैं।

एक्स यूजर इनकॉगनिटो ने लिखा, “अब्दुल रज्जाक “नीयत” के बारे में बात कर रहे हैं और एक घटिया उदाहरण के लिए ऐश्वर्या राय को इसमें शामिल करके अपनी बदनीयत दिखाते हैं और शाहिद अफरीदी और अन्य लोगों को यह मनोरंजक लगता है और ताली बजाना शुरू कर देते हैं।

उन्होंने आगे लिखा, “ऐश्वर्या राय के बारे में यह टिप्पणी हिंदू महिलाओं के बारे में उनकी मानसिकता को दर्शाती है। पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं का खुलेआम अपहरण और कई दिनों तक बलात्कार और यातना के बाद उनका धर्म परिवर्तन पाकिस्तान में हिंदुओं की जीवन शैली बन गई है। इन पाकिस्तानी मर्दों की नजर हमेशा हिंदू महिलाओं पर रहती है।”

एक्स यूजर सुनील द क्रिकेटर ने पोस्ट किया, “ऐश्वर्या राय का कार ड्राइवर अब्दुल रज्जाक से ज्यादा हैंडसम दिखता है।” इसके जवाब में एक अन्य एक्स यूजर जगदीश राठौर ने रज्जाक के लिए लिखा,” सालो के पास ढंग की कोई एक्ट्रेस भी है, जिसके बारे में मैं हम बोल सके! भिखारी साले। बस एक नाम ज़रूर जानता हूँ – मियाँ खलीफा। सुना है वो भी मुस्लिम है!”

एक्स यूजर जगदीश राठौर ने ट्वीट किया, “सुना है इसने अपनी चचेरी बहन आयशा से शादी की है। इसका बेटा अली रज्जाक भी क्रिकेटर हैं। अच्छा इसके पास कोई बेटी नहीं है, वरना उससे भी शादी कर लेता!”

ये पहली बार नहीं है कि पाकिस्तानी शख्सियतों ने भारत की एक्ट्रेस के बारे में अनाप-शनाप बोला है। इससे पहले पाकिस्तानी एक्टर मोअम्मर राणा और मशहूर यूट्यूबर नादिर अली एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और अमीषा पटेल पर भद्दे कॉमेंट्स कर चुके हैं। दोनों ने पॉडकॉस्ट में हुई बातचीत के दौरान दोनों भारतीय अभिनेत्रियों के शरीर और उनकी शक्ल को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था।