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वानखेड़े में सचिन को सलाम, अनुष्का को चुम्मा… विराट कोहली के घर फिर से गूँजने वाली है किलकारी? बेबी बंप छुपाती नजर आईं पत्नी

वर्ल्ड कप 2023 में भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार प्रदर्शन के साथ विराट कोहली को दोबारा से पिता बनने की खुशखबरी मिलने वाली है। बेंगलुरु में टीम इंडिया की दीवाली पार्टी तो कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। दरअसल इस पार्टी में अनुष्का शर्मा बेबी बंप छुपाते हुए नजर आई थीं। बता दें कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में विराट कोहली ने वनडे में शतकों का अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद उन्होंने ऑडिएंस में बैठी अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को किस दिया, और सचिन तेंदुलकर को सलाम किया।

अनुष्का शर्मा ने पिंक कलर के सूट पर प्याजी कलर के दुपट्टे वाला खूबसूरत सूट पहन रखा था तो विराट कोहली हरे रंग के कुर्ता पायजामा में थे। विराट ने उनके कंधे पर हाथ रखा था। इस दौरान पार्टी के वेन्यू में आते वक्त अनुष्का बार-बार अपना इस दुपट्टा आगे की तरफ सही करते दिखाई दे रही थीं।

वो कैमरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थीं, लेकिन उनका फोकस अपने दुपट्टे पर अधिक था। उन्हें ऐसा करते देख लग रहा था कि जैसे कि वो बेबी बंप को छुपाने की कोशिश कर रहीं हों। इसे देख लग कयास लगाते दिखे की वो अपनी प्रेग्नेंसी छुपाने के लिए ऐसा कर रही थीं।

यहीं नहीं, उन्होंने टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ जो ग्रुप फोटो खिंचवाया। उसमें उन्होंने सामने देखते हुए नहीं बल्कि थोड़ा सा तिरछी खड़ी होकर पोज दिया। जब वो पार्टी के लिए गेट से अंदर हॉल में आ रही थी तो उनकी चाल भी कुछ ऐसी नजर आ रही थी कि जैसे वो प्रेग्नेंट हो। हालाँकि, इस दौरान इसे लेकर दोनों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है।

हालाँकि हिन्दुस्तान टाइम्स ने बीते महीने अक्टूबर में सूत्रों के हवाले से लिखा था कि विराट और अनुष्का के घर दूसरा नन्हा मेहमान आने वाला है और जल्द ही वो इसका आधिकारिक ऐलान करने वाले हैं।

क्रिकेट और बॉलीवुड जगत की ये दोनों मशहूर हस्तियाँ साल 2017 में इटली में शादी के बंधन में बंधी थीं। इस वक्त जहाँ इस वर्ल्ड कप में विराट कोहली का मैदान पर दमदार प्रदर्शन जारी है तो वहीं निजी जिंदगी में भी उनके लिए खुशियाँ बाँहे पसार रही हैं।

11 जनवरी, 2021 को अनुष्का शर्मा ने बेटी को जन्म दिया। दोनों ने अपने प्यार को यादगार बनाने के लिए विराट और अनुष्का के नाम के संयुक्त नाम पर बेटी का नाम वामिका रखा। अनुष्का शर्मा शादी के बाद आखिरी बार फिल्म ‘जीरो’ में देखी गई थी। अब उनकी अगली फिल्म क्रिकेटर झूलन गोस्वामी के जीवन पर बनी बॉयोपिक चाकदा एक्सप्रेस है।

‘डबल सेंचुरी’ से भारत ने ठोके 397 रन, विराट कोहली ने सचिन को पीछे छोड़ा: न्यूजीलैंड की धुलाई रोहित ने शुरू की, राहुल ने किया खत्म

क्रिकेट विश्वकप 2023 के पहले सेमीफाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड के सामने जीत के लिए 398 रनों का पहाड़ सरीखा लक्ष्य रखा है। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 4 विकेट खोकर 397 रन बनाए हैं। भारत के लिए विराट कोहली ने अपना रिकॉर्डतोड़ पचासवाँ शतक बनाया है। विराट कोहली ने 113 गेंदों पर 117 रनों का शानदार पारी खेली। विराट कोहली ने अपनी पारी में 9 चौके और 2 गगनचंबी छक्के लगाए। विराट कोहली के अलावा श्रेयस अय्यर ने भी शानदार शतकीय पारी खेली। श्रेयस अय्यर 105 रन बनाकर आउट हुए।

भारत के लिए के एल राहुल नाबाद 39 रन और शुभमन गिल नाबाद 80 रन बनाकर पवैलियन लौटे। इससे पहले, भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। वानखेड़े के मैदान पर खेले जा रहे इस मैच में रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने भारतीय टीम को शानदार शुरुआत दी। रोहित शर्मा के रूप में भारत का पहला विकेट कुल 71 रनों के स्कोर पर गिरा। रोहित शर्मा 29 गेंदों पर 47 रन बनाकर आउट हुए।

रोहित शर्मा ने अपनी पारी में 4 चौके और 4 छक्के लगाए। इसके बाद शुभमन गिल ने तेज बल्लेबाजी का जिम्मा अपने ऊपर लिया। शुभमन गिल 65 गेंदों पर 79 रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट होकर पवैलियन लौटे थे, लेकिन पारी की पाँच गेंदे बाकी थी, तभी वो वापस मैदान पर लौट लाए और नाबाद लौटे।

भारतीय टीम का दूसरा विकेट 327 रनों के कुल स्कोर पर गिरा था। विराट कोहली इसी स्कोर पर पवैलियन लौटे थे। इसके बाद 381 रनों के कुल स्कोर पर श्रेयस अय्यर तीसरे विकेट के तौर पर आउट हुए। अय्यर ने अपनी 105 रनों की पारी में 4 चौके और 8 छक्के लगाए। टीम का चौथा विकेट आखिरी ओवर में सूर्या के तौर पर गिरा, वो 2 गेंदों पर 1 रन बनाकर आउट हो गए। न्यूजीलैंड के लिए टिम साउदी ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए तो ट्रेंट बोल्ट को एक विकेट मिला।

विराट कोहली ने तोड़े कई रिकॉर्ड

विराट कोहली ने अपनी 117 रनों की पारी के दौरान कई रिकॉर्ड तोड़े। अब विराट कोहली के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा 50 शतक हो गए हैं। उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ा। विराट कोहली ने 291मैच की 279वीं पारी में 50वाँ वनडे शतक लगाया। इस पारी के दौरान ही विराट कोहली ने किसी भी एक विश्वकप में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी सचिन तेंदुलकर से छीन लिया। सचिन तेंदुलकर ने साल 2002-2003 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका में सर्वाधिक 673 रन बनाए थे। विराट कोहली इस विश्वकप में 711 रन बना चुके हैं। उनके पास इस रिकॉर्ड को और भी बेहतर करने का मौका है।

कश्मीर में 300 फीट गहरी खाई में गिरी बस, 36 की मौत: कई नाजुक, PM मोदी ने जताया दुख; मृतकों के परिजनों को ₹ 2 लाख

जम्मू-कश्मीर में बुधवार (15 नवंबर 2023) को हुए एक भयानक बस हादसे में 36 लोगों की जान चली गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए हैं। घायलों में से 6 लोगों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। ये बस कश्मीर के किश्तवाड़ से जम्मू के लिए निकली थी। हादसा इतना भयानक था कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जम्मू जाने के कारण बस डोडा जिले के असार क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होकर 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी। मौके पर मौजूद डोडा के डीसी हरविंदर सिंह के मुताबिक, घायलों को डोडा के सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। घायलों को शिफ्ट करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली गई है।

इस हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवदेना जताई है। पीएम ऑफिस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई बस दुर्घटना दुखद है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। मैं घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करता हूँ।”

पोस्ट में आगे कहा गया है, “इस बस दुर्घटना में जान गँवाने वाले हर मृतक के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं, प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी।”

दुर्घटनाग्रस्त बस में 55 यात्री सवार थे। किश्तवाड़ से जम्मू की तरफ जाते वक्त ये बस डोडा जिले के असार इलाके में हाईवे पर मोड़ पर मुड़ने के दौरान संतुलन बिगड़ने से लुढककर तुंग्राल के पास गहरी खाई में गिर गई।

जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने दुख जताते हुए कहा, “डोडा के असर में दुखद बस दुर्घटना में लोगों की मौत से बेहद दुखी हूँ। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ और दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए मंडलायुक्त एवं जिला प्रशासन को निर्देशित कर दिया गया है।”

स्टाफ रूम सार्वजनिक जगह नहीं, यहाँ ‘चमार’ कहना SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो लोगों को किया दोषमुक्त

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि दफ्तर के भीतर किसी को ‘चमार’ कहना अपराध नहीं है, क्योंकि यह एक सार्वजनिक स्थान नहीं है। यह निर्णय देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो व्यक्तियों को दोषमुक्त करार दे दिया।

वर्ष 2010 में एक व्यक्ति ने शहडोल के जैतपुर पुलिस थाने में यह मामला दर्ज करवाया था कि कमलेश शुक्ला और आशुतोष तिवारी ने एक स्कूल के स्टाफ रूम में एक मीटिंग के दौरान उसे ‘चमार’ कहा। इन दोनों के खिलाफ SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। दोनों व्यक्तियों पर SC/ST एक्ट की धारा 3(1)x के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दोनों व्यक्तियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में यह याचिका डाली थी कि उनके विरुद्ध चल रहे इस मामले को खत्म कर दिया जाए। इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट कर रहे थे। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सार्वजनिक और जगह की परिभाषा स्पष्ट करते हुए निर्णय दिया।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थान कोई ऐसा स्थान होता है, जहाँ जनता आ जा सकती है। स्कूल का स्टाफ रूम कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ आम जनता आ-जा सके। ऐसे में यह एक सार्वजनिक स्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इसके सार्वजनिक स्थान ना होने के कारण मामला भी नहीं बनता और यहाँ यदि चमार कहा गया है तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

कोर्ट ने कहा कि अश्लील गाने या कृत्य यदि सार्वजनिक स्थान पर नहीं हुए हैं तो उन पर भी दंड नहीं दिया जा सकता। ऐसे में दोनों व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत मामला भी नहीं बनता है। इन दोनों व्यक्तियों पर आरोप था कि उन्होंने स्टाफरूम में अश्लील गाने बजाए हैं।

इन दोनों व्यक्तियों पर मामला दर्ज करवाने वाले ने यह भी कहा था उसे धमकी दी गई। कोर्ट ने इस पर कहा कि धमकी से ना ही शिकायतकर्ता को कोई नुकसान पहुँचा और ना ही वह चिंतित हुआ ऐसे में यह मामला भी नहीं बनता है।

जिस ‘थप्पड़’ के लिए नाना पाटेकर को बताया ‘बेहूदा’, कहा – इसकी फिल्म मत देखो; जानिए क्या है उस वायरल Video की सच्चाई

फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर हाल ही में ‘द वैक्सीन वॉर’ में दिखे थे। अब वो उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुँचे हैं। वहाँ का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसे लेकर उनकी खासी आलोचना की जा रही है। वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि एक युवक नाना पाटेकर के साथ सेल्फी लेने के लिए आया, जिसे उन्होंने थप्पड़ मार कर भगा दिया। इसके बाद उनके व्यवहार की आलोचना होने लगी। इस वीडियो को धड़ल्ले से शेयर किया जाने लगा।

नाना पाटेकर ने वाराणसी में फैन को मारा थप्पड़? शेयर हो रहे वीडियो

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “नाना पाटेकर का उनका फ़ैन के प्रति व्यवहार देखें। इन स्टार को यह समझ नहीं होती है कि इनके जो लटके झटके हैं, इनका जो स्टारडम है,इनके पास जो शोहरत-पैसा है वह इन्हीं फैंस की बदौलत है जिसे वह तुच्छ समझते हैं।”

वहीं भारत समाचार’ ने भी इस वीडियो को चलाते हुए लिखा, “वाराणसी में नाना पाटेकर ने अपने फैंस को जड़ा थप्पड़। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेल्फी लेने पहुँचा था फैन। नाना पाटेकर ने थप्पड़ जड़कर फैंस को भगाया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ थप्पड़ मारने का वीडियो। वाराणसी में नाना पाटेकर कर रहे हैं फिल्म ‘जर्नी’ की शूटिंग।”

पत्रकार अभिषेक ने आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “नाना पाटेकर बेहूदे इंसान हैं। ऐसे लोगों की फ़िल्में देखना बंद कीजिए।”

एक अन्य पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने भी वीडियो डालते हुए लिखा, “इन्हीं सेल्फी लेने वालों ने नाना पाटेकर को हीरो बनाया। इन्हीं ऑटोग्राफ लेने वालों ने नाना पाटेकर को हीरो बनाया। नाना जूस का धंधा करके हीरो नहीं बने। लोगों के प्यार की वजह से हीरो बने। बनारस में शूटिंग के दौरान सेल्फी लेने आए बच्चे को थप्पड़ जड़ दिया। बच्चे को हटाने का दूसरा तरीका भी हो सकता था। हिंसा निंदनीय है।”

इसी तरह कई अन्य हैंडलों से भी ऐसे ही दावे करते हुए इस वीडियो को शेयर किया गया और नाना पाटेकर की निंदा की गई। बता दें कि नाना पाटेकर को सीधा-सादा जीवन जीने के लिए जाना जाता है और वो बड़े-बड़े कार्यक्रमों में भी इसी सादे ड्रेस में पहुँचते हैं। जमीन पर बैठ कर भोजन करते हुए उनकी तस्वीर भी सामने आती है। साथ ही उन्हें किसानों के लिए महाराष्ट्र में कई काम करने के लिए जाना जाता है। सरकारी समाजिक कल्याण के कार्यक्रमों में वो बतौर अतिथि बुलाए जाते रहे हैं।

नाना पाटेकर केविरल वीडियो पर क्या बोले डायरेक्टर

इस वायरल वीडियो पर फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। अनिल शर्मा ‘ग़दर’ और ‘ग़दर 2’ के अलावा ‘अपने’ जैसी सफल फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। सनी देओल के साथ उनकी जोड़ी खूब जमती है। अनिल शर्मा का कहना है कि वाराणसी का ये वीडियो उनकी ही फिल्म की शूटिंग के दौरान का है। उनकी मानें तो ये वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि फिल्म की शूटिंग के दौरान का है और दृश्य ही कुछ ऐसा था।

दशाश्वमेध घाट के इस वीडियो पर ‘आज तक’ से बात करते हुए अनिल शर्मा बोले, “मुझे भी इस खबर के बारे में जानकारी मिली है। मैंने वीडियो देखा है। नाना पाटेकर ने किसी को नहीं मारा है। ये मेरी फिल्म का शॉट है। इस दृश्य में नाना पाटेकर को उनके पास आने वाले लड़के को सिर पर मारना होता है। शूटिंग चालू थी और ऐसा ही फिल्माया गया। भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति ने इस दृश्य को अपने फोन से शूट कर के लीक कर दिया।”

अनिल शर्मा ने कहा कि इस वीडियो के जरिए नाना पाटेकर की नकारात्मक छवि बनाई जा रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि फैंस इस वीडियो को समझें। साथ ही कहा कि ये फिल्म का शॉट है, नाना पाटेकर ने किसी को नहीं मारा है।

गुज्जरों की नाराजगी, खिसकता आधार, खिलता कमल… पोस्टर पर लौटे पायलट राजस्थान में कॉन्ग्रेस की बचा पाएँगे लाज?

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में हर तरफ कॉन्ग्रेस बैकफुट पर दिख रही है। टिकट को लेकर हर सीट पर लड़ाई है तो नेतृत्व को लेकर सालों से राजस्थान में चल रही कॉन्ग्रेसी लड़ाई से कौन वाकिफ नहीं है। इस चुनाव में सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने अब तक एक भी रैली साथ में नहीं की है। ऐसे में माना जा रहा था कि दोनों ही नेता अपनी-अपनी ताकत अपनी मजबूत सीटों पर दिखा रहे हैं। सचिन को कॉन्ग्रेस खारिज नहीं कर सकी थी। यही वजह है कि सचिन ने अपने समर्थक सभी 19 विधायकों को इस बार भी टिकट दिलवा लिया है। कॉन्ग्रेस को लग रहा है कि सचिन को अलग-थलग करके काम नहीं चलेगा। ऐसे में उनकी कॉन्ग्रेस के पोस्टरों पर वापसी कराई गई है।

जयपुर में कॉन्ग्रेस की ओर से गृह लक्ष्मी गारंटी योजना के पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के साथ ही करीब 4 साल बाद सचिन पायलट की कॉन्ग्रेस के पोस्टरों में वापसी हुई है। दरअसल, 12-13 जुलाई 2020 को जयपुर से जो तस्वीरें आई थीं, वो सचिन पायलट को नीचा दिखाने के लिए थीं। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, लेकिन संगठन की कमान तब भी सचिन पायलट के ही हाथों में थी। उस समय सचिन पायलट के जन्मदिन पर जयपुर स्थित पार्टी के कार्यालय में जब उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाए थे तो उन्हें हटा दिया गया था।

पुरानी है लड़ाई, लेकिन अब क्यों याद आई?

वैसे आपको फिर से याद दिला देते हैं कि राजस्थान में सचिन पायलट की अगुवाई में 2018 में जीत हासिल करने वाली कॉन्ग्रेस ने उन्हें सत्ता नहीं सौंपी तो सचिन पायलट ने कुछ महीनों के इंतजार के बाद बगावत का झंडा उठा लिया था। इसके बाद अशोक गहलोत की अगुवाई में कॉन्ग्रेस हाईकमान ने भी सचिन को किनारे लगा दिया। सचिन पायलट के डिप्टी सीएम पद पर रहते हुए बगावत को देखकर अशोक गहलोत के इशारे पर उनके पोस्टर फड़वा दिए गए, वो भी तब जब खुद सचिन पायलट ही राजस्थान प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे।

इस घटना ने सचिन पायलट को इस कदर निराश कर दिया था कि उन्होंने अगले ही दिन डिप्टी सीएम का पद छोड़ दिया और खुलकर सरकार से अलग हो गए। अभी इस चुनाव की बात करें तो अब तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत कॉन्ग्रेस पार्टी में दो ध्रुव की तरह काम करते दिख रहे हैं। इस चुनाव में दोनों की एक रैली तक साथ नहीं हुई है। अब जबकि मतदान से पहले चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ एक सप्ताह का समय बचा है तो कॉन्ग्रेस पार्टी के पोस्टरों पर सचिन पायलट की वापसी हुई है।

कॉन्ग्रेस के पोस्टर पर सचिन पायलट की सवा तीन साल बाद वापसी (फोटो साभार : अमर उजाला)

पोस्टरों पर सचिन पायलट की वापसी हुई है तो उसके पीछे की वजह विशुद्ध राजनीतिक है। सचिन पायलट का राजस्थान के गुज्जर समुदाय पर पर मजबूत पकड़ माना जाता है। इस चुनाव में मीडिया रिपोर्ट्स ये बता रही हैं कि गुज्जर बहुल इलाकों में कॉन्ग्रेस का तीखा विरोध हो रहा है। गुज्जर अब भी ये बात पचा नहीं पा रहे हैं कि जिस सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरे समाज ने अपना जोर लगा दिया था, उसे मुख्यमंत्री बनाना तो दूर, कॉन्ग्रेस हाई कमान ने डिप्टी सीएम पद से भी हटा दिया था। ऐसे में अब जब प्रचार के लिए कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार गुज्जर बहुल इलाकों में पहुँच रहे हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में स्थानीय गुज्जर नेताओं ने बकायदा भाजपा का झंडा उठा लिया है।

गुज्जरों का दबाव कर रहा काम?

राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से 40-50 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिस पर सचिव पायलट का सीधा प्रभाव रहता है। इन सीटों पर गुज्जर समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। ये उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी सटी सीटें हैं। इन इलाकों में अशोक गहलोत ने एक भी रैली नहीं की है। अब चूँकि कॉन्ग्रेस अपने 7 वादों को लेकर जनता तक पहुँचने की कोशिश कर रही है तो उसे गुज्जर बहुल इलाकों में भी जाना ही होगा। ऐसे में नाराजगी कम करने के लिए अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस हाईकमान ने फैसला किया है कि सचिन पायलट को फिर से पोस्टरों पर जगह दी जाए, वर्ना बहुत देर हो जाएगी। क्योंकि, सचिन पायलट के पास इतना समय है कि वो अगले 5 साल इंतजार कर सकते हैं, लेकिन ये समय अब अशोक गहलोत के पास नहीं है।

अभी तक की रणनीति सफल रही, लेकिन आगे क्या?

अभी तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत को एक साथ मंच पर न लाकर कॉन्ग्रेस ने समझदारी का ही परिचय दिया है। इसकी वजह साफ है कि सचिन पायलट का विरोध करने वाले गहलोत के समर्थकों को पायलट समर्थक सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत कर चुके हैं। इसीलिए कॉन्ग्रेस की कोशिश रही है कि वो दोनों नेताओं को एक साथ एक मंच पर न लाएँ। ऐसे में कॉन्ग्रेस अब तक इस स्थिति को संभाल पाने में सफल रही है। यही नहीं, कॉन्ग्रेस ने दोनों ही नेताओं को एक-दूसरे के मजबूत इलाकों में भी जाने से रोक रखा है। हालाँकि, पूरे चुनाव में कॉन्ग्रेस ये बैलेंस बनाकर रख पाएगी, इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता।

वैसे, अशोक गहलोत जानते हैं कि सचिन पायलट का साथ रहना कॉन्ग्रेस के लिए जरूरी है। दोनों साथ मिलकर ही भाजपा को टक्कर दे सकते हैं, सरकार भले ही न बना सके। इसलिए इतने समय बाद अशोक गहलोत ने एक तस्वीर अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर शेयर की है, जिसमें सचिन को सम्मानजनक तरीके से बैठा दिखाया गया है। हालाँकि, फोकस में वो खुद ही हैं और सचिन का चेहरा तक नहीं दिख रहा है। उन्होंने कैप्शन दिया है, “एक साथ, जीत रहे हैं फिर से…”

बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते!

बहरहाल, सचिन पायलट की कॉन्ग्रेस के पोस्टरों पर वापसी को दोनों ही रूपों में देखा जा सकता है। एक ओर यह एक मजबूरी भी हो सकती है, क्योंकि कॉन्ग्रेस को राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पायलट की लोकप्रियता की जरूरत है। दूसरी ओर, यह कॉन्ग्रेस के लिए एक जरूरी कदम भी हो सकता है, क्योंकि इससे पार्टी एकता का संदेश देने में सफल हो सकती है।

वैसे, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने काफी देर कर दी है। जो संदेश आम जनता तक जाना था, वो पहले ही जा चुका है। ऐसे में कॉन्ग्रेस को इन पैतरों से क्या फायदा मिलेगा, आने वाले 3 दिसंबर को इसका पता चल ही जाएगा। इन सबके बीच महत्वपूर्ण बता ये है कि भाजपा को हर तरफ बढ़त हासिल होती दिख रही है।

हमास की जिस बर्बरता से दुनिया स्तब्ध, उसे अमेरिका के 60 फीसदी मुस्लिम मानते हैं जायज: सर्वे से सामने आई इस्लामी सोच

हमास द्वारा इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को किए गए हमले को दुनिया में आतंकी हमला बताया जा रहा है। वहीं, अगर 60 फीसदी अमेरिकन मुस्लिम ये कहें कि हमास का इजरायल पर किया हमला पूरी तरह से जायज था तो हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हमले के बाद से ही दुनिया का मुस्लिम समुदाय फिलिस्तीन के पक्ष में खड़ा दिख रहा है।

ये खुलासा इस साल अक्टूबर 2023 की शुरुआत में इज़रायल-हमास संघर्ष पर मुस्लिम अमेरिकियों के नजरिए के बारे में साइग्नल (Cygnal) के किए सर्वे से हुआ है। ये सर्वे 16 से 18 अक्टूबर को 2,020 लोगों के बीच किया गया था। इस सर्वे का मकसद मुस्लिम-अमेरिकी समुदाय में इजरायल-हमास संघर्ष पर उनकी राय जानना था।

गौरतलब है कि हमास के इज़रायल पर किए गए आतंकवादी हमले के बाद ही संयुक्त राज्य अमेरिका के कई शहरों में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसके बाद ही यह सर्वे कराया गया था। हमास के आतंकवादी हमले के जवाब में जब इज़रायल ने गाजा पर हमला तो अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थकों के हिंसक प्रदर्शन की कई घटनाएँ हुईं।

2,020 लोगों पर किए गए सर्वे के नतीजों से पता है चला कि 57.5 फीसदी मुस्लिम अमेरिकी मानते हैं कि हमास का इज़रायल पर हमला सही था। मुस्लिम अमेरिकियों में ये भावना इस्लामिक उम्मा के मुताबिक है, जो ये मानता है कि दुनिया में सभी मुस्लिमों को एक-दूसरे के समर्थन में खड़ा होना चाहिए।

अमेरिकी मुस्लिम कॉन्ग्रेस सदस्य रशीदा तालिब इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। उन्होंने हमास के कामों को इजरायल के नस्लवाद वाले मुल्क के खिलाफ प्रतिरोध बताकर हमास का समर्थन किया है। अमेरिकन मुस्लिमों का हमास के लिए ये प्यार वहाँ के राष्ट्रपति जो बायडेन पर भी भारी पड़ता नजर आता है।

सर्वे बताता है कि मुस्लिम अमेरिकन वहाँ के राष्ट्रपति जो बायडेन के मुकाबले हमास नेता इस्माइल हानियेह सहित इस्लामी नेताओं को अधिक पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि केवल 31.9 फीसदी मुस्लिम अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन को पसंद करते हैं तो 44 फीसदी फिलिस्तीनी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास का समर्थन करते हैं।

सर्वे में ये भी खुलासा हुआ है कि हमास के हमलों के बाद मुस्लिम अमेरिकियों नजरिए में वहाँ की राजनीतिक पार्टियों को लेकर भी थोड़ा बदलाव आया है। दिलचस्प बात ये है कि इसमें रिपब्लिकन पार्टी (25.2%) के मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी (31.1%) को अधिक तवज्जो दी गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति बायडेन डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के मुकाबले अमेरिकन मुस्लिम हमास के लीडर के अधिक प्रशंसक हैं। इस सर्वे में इजरायल के खुद की रक्षा के अधिकार पर अमेरिकन मुस्लिमों की राय जानने की कोशिश की गई। इसमें 68.8 फीसदी ने माना कि इजरायल को हमास से अपनी रक्षा का हक है, लेकिन 69 फीसदी अमेरिकन मुस्लिम मानते हैं कि गाजा में फिलिस्तीनियों की इजरायल को लेकर शिकायतें जायज हैं।

जहाँ पॉलिसी के तहत इस मसले की समाधान निकालने की बात आती है तो 46.8% मुस्लिम अमेरिकी हमास का गाजा से खात्मा करने के लिए इजरायल को वहाँ हमले करने का सुझाव देते हैं। वहीं 75.8% इजरायल के बंधकों की रिहाई के लिए इज़रायल और हमास के बीच बातचीत की वकालत करते दिखते हैं।

ये सर्वे इसलिए आयोजित किया गया, क्योंकि फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस, ओक्लाहोमा के गवर्नर केविन स्टिट और टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट जैसे रिपब्लिकन गवर्नरों के इज़रायल और यहूदी का समर्थन किया था। गर्वनर एबॉट और स्टिट इजरायल को समर्थन देने के लिए वहाँ गए भी थे। दरअसल फ्लोरिडा अकेला ऐसा राज्य है, जो अब तक इज़रायल में फँसे कम-से-कम 700 अमेरिकियों को घर वापस लाया है।

बताते चलें कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने बीते हफ्ते फिलिस्तीन के पक्ष में बोलने वाली फिलीस्तीनी-अमेरिकी मूल की रशीदा तालिब को सेंसर करने के लिए वोटिंग की थी। तालिब ने हमास के युद्ध नारे ‘नदी से समुद्र तक, फिलिस्तीन आजाद होगा’ का समर्थन किया था। इसके बाद तालिब ने इस पर माफी माँगने से भी इंकार कर दिया था।

तालिब ने इसके पीछे तर्क दिया था कि वो इसके लिए माफी नहीं माँगेंगी, क्योंकि नदी से समुद्र तक आजादी का मतलब मानवाधिकार और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की आकांक्षापूर्ण पुकार है, मौत, विनाश या नफरत की नहीं। तालिब ने ये भी कहा था, “मेरा काम और वकालत हमेशा सभी लोगों के लिए इंसाफ और इज्जत पर फोकस है, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों।”

इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन की 1988 की हमास संधि की प्रस्तावना में ये है कि इजरायल का अस्तित्व तब तक ही रहेगा, जब तक मुस्लिम उसे खत्म नहीं कर देते। ये ऐलान मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड की नींव रखने वाले इमाम हसन अल बन्ना ने किया था। उसने कहा था, “इजरायल अस्तित्व में रहेगा और तब तक अस्तित्व में रहेगा जब तक कि इस्लाम इसे खत्म नहीं कर देता, जैसे उसने इससे पहले दूसरों को मिटा दिया था।”

‘इंजमाम उल हक को डॉक्टर के पास ले जाओ’: हरभजन सिंह बोले – पता नहीं क्या पीते क्या फूँकते हैं वे, बताया था – मुस्लिम बनने वाले थे भज्जी

‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इंजमाम उल हक को मानसिक रूप से बीमार बताया है। उन्होंने कहा है कि किसी को इंजमाम को डॉक्टर के पास ले कर जाना चाहिए।

गौरतलब है कि इंजमाम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह दावा कर रहे थे कि हरभजन सिंह पाकिस्तान दौरे के समय इस्लाम कबूल करने वाले थे। उन्होंने कहा था कि हरभजन सिंह मौलाना तारिक जमील के प्रभाव में आकर यह काम करने वाले थे। उन्होंने दावे पर ‘इंडिया टुडे‘ से कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि कोई इंजमाम को डॉक्टर के पास लेकर जाए। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, कृपा करके उनको डॉक्टर के पास पहुँचाएँ। उन्होंने अजीब बयान दिया है। मैं सिख होने और सिख परिवार में जन्म लेने पर बहुत प्रसन्न हूँ।”

आगे उन्होंने कहा, “वो मीडिया के सामने यह सब ड्रामा कर रहे हैं। मुझे नहीं मालूम उन्होंने यह सब बयान देने का निर्णय क्यों लिया है। मुझे यह भी नहीं मालूम कि वो क्या पीते हैं या फिर क्या फूँकते हैं। इतना मुझे ज़रूर पता है कि वह नशे में जो कुछ कहते हैं उन्हें अगले दिन उसका कुछ भी याद नहीं रहता।”

इंजमाम ने अपने वीडियो में कहा था, “मौलाना तारिक जमील साहब हैं ना, ये हर रोज हमारे पास आते थे। हमने एक कमरा बना रखा था, जिसमें हमें मौलाना मगरिब की नमाज पढ़ाते थे। इंडिया से कुछ प्लेयर जैसे इरफ़ान पठान, ज़हीर खान और मुहम्मद कैफ को हम दावत देते थे कि हमारे साथ नमाज पढ़ो।”

इसी वीडियो में आगे इंजमाम ने दावा किया था, “कुछ लोग नमाज पढ़ते नहीं थे लेकिन बैठ के देखते थे। इसमें हरभजन भी था। मेरे से एक दिन हरभजन सिंह ने कहा कि ये जो आदमी है ना मौलाना, मेरा दिल करता है कि इसकी बात मान लूँ, लेकिन तुम्हें देख कर रुक जाता हूँ।”

हरभजन सिंह ने सुबह इस पर कहा था, “ये कौन सा नशा करके बात कर रहा है? मैं गर्व से एक भारतीय और सिख हूँ, ये बकवास लोग कुछ भी बकते हैं।” इसके बाद फैन्स ने हरभजन सिंह पर भी प्रश्न उठाए थे।

भाई-भौजाई का झगड़ा, करीना बोली – एक और बच्चा कर ले आलिया भट्ट: ‘डर्टी पिक्चर’ से चर्चा में लौटी हैं तैमूर-जहाँगीर की अम्मी

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और अभिनेता रणबीर कपूर ने 14 अप्रैल, 2022 को शादी रचा ली थी। वहीं 6 नवंबर, 2023 को आलिया भट्ट ने अपने अपनी बेटी राहा को जन्म दिया। बाकी बॉलीवुड हीरोइनों से तुलना करें तो आलिया भट्ट ने अपेक्षाकृत कम, यानी 30 से कम उम्र में ही शादी रचा ली थीं और वो अपने करियर के भी शिखर पर थीं। शादी के बाद भी उनका करियर बढ़िया चल रहा है। अब करीना कपूर ने दोनों की शादी और उनके बच्चे के जन्म को लेकर खुलासा किया है।

बता दें कि करीना कपूर, रणबीर कपूर की चहेरी बहन हैं। करीना का पिता रणधीर और रणबीर के दिवंगत पिता ऋषि भाई थे। दोनों राज कपूर के बेटे थे। इस हिसाब से करीना कपूर, आलिया भट्ट की ननद हुईं। अब दोनों ननद-भौजाई निर्देशक करण जौहर के शो ‘कॉफी विथ करण’ के 8वें सीजन में बतौर गेस्ट साथ में आ रही हैं। इसी चैट शो में ‘बेबो’ के नाम से जानी जाने वाली करीना कपूर ने अपने भाई की पत्नी आलिया भट्ट को अपना परिवार बढ़ाने का सुझाव दिया।

मनोरंजन की खबरें देने वाले पोर्टल ‘पिंकविला’ की एक रिपोर्ट की मानें तो करीना कपूर ने आलिया भट्ट को सलाह दी कि वो एक और बच्चा करें। आलिया भट्ट ने बताया कि उनके और रणबीर कपूर के बीच अक्सर मीठी नोकझोंक होती रहती है और दोनों राहा के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए प्रतिद्वंद्विता करते हैं। आलिया भट्ट ने कहा कि घर में राहा के लिए दोनों लड़ते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों एक-दूसरे से कहते हैं कि अब तुमने उसे रख लिया, अब उसे मुझे दो।

इस दौरान करीना कपूर ने कहा कि ये इसका बहाना है कि दोनों एक और बच्चा करें। करीना कपूर ने कहा कि 2 बच्चे होने पर दोनों एक-एक रख सकते हैं। बता दें कि करीना कपूर भी सैफ अली खान से निकाह के बाद 2 बच्चों तैमूर और जेह को जन्म दे चुकी हैं। करीना तब्बू और कृति सेनन के साथ ‘द क्रू’ में दिखाई देने वाली हैं। हाल ही में वो ‘डर्टी’ मैगजीन में फोटोशूट के कारण भी चर्चा में हैं। वहीं आलिया भट्ट ‘जिगरा’ फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म का वो करण जौहर के साथ मिल कर निर्माण कर रही हैं।

गाजा पर सऊदी अरब ने फोड़ दिया ‘उम्माह’ का गुब्बारा तो नाचने-गाने वाले फेस्टिवल से आहत हो गए इस्लाम के ठेकेदार

इस्लामी आतंकी संगठन हमास (HAMAS) के 7 अक्टूबर 2023 इजरायल पर चौतरफा हमला करके 1400 लोगों की हत्या कर दी थी और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया था। ऐसी कई तस्वीरें सामने आईं, जिनमें साफ तौर पर दिखा कि हमास के आतंकियों में मानवीय संवेदना नाम की कोई चीज नहीं है। इसके बाद अपने लोगों को छुड़ाने और आतंकियों का खात्मा करने के लिए इजरायल ने गाजा पट्टी पर कार्रवाई शुरू कर दी।

इजरायल ने आतंकियों पर जैसे ही कार्रवाई शुरू की, सारे मुस्लिम मुल्क उम्माह के नाम पर खलबलाने लगे। उन्होंने इजरायल पर प्रतिबंध लगाने को लेकर एक बैठक आयोजित की। हालाँकि, इस बैठक में इजरायल की आलोचना की गई, लेकिन संंबंध तोड़ने और बैन लगाने का सऊदी अरब सहित 7 मुस्लिम देशों ने विरोध किया। ये वही मुस्लिम देश हैं, जो फिलिस्तीन में मानवीय राहत कार्य पहुँचा रहे हैं। इतना ही नहीं, एक तरफ इजरायल इस्लामी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय राहत कार्य भी पहुँचा रहा है।

दूसरी तरफ सऊदी अरब में स्पोर्ट्स एंड म्यूजिक फेस्टिवल को लेकर कट्टरपंथी सऊदी अरब सहित इन सात देशों पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि एक तरफ फिलिस्तीन में मुस्लिम मारे जा रहे हैं और सऊदी अरब रंगारंग कार्यों में डूबा हुआ है। दरअसल, सऊदी अरब में यह कार्यक्रम साल 2019 से आयोजित किया जा रहा है। MDLBEAST साउंडस्टॉर्म ने बड़े नाम वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में अरब कलाकार और संगीतकार मेजबानी कर रहे हैं। इनमें डेविड गुएटा, मार्टिन गैरिक्स, स्टीव आओकी, ब्रूनो मार्स, डीजे खालिद, अम्र डायब, नैन्सी अजराम, डीजे अहमद आलममरी (बालू) जैसे कलाकार शामिल हो रहे हैं।

MDLBEAST के सीईओ रमज़ान अल्हरतानी ने महोत्सव को एक वैश्विक कलात्मक मंच कहा है, जो मध्य पूर्व में संगीत, कला और संस्कृति को फिर से परिभाषित करता है। उन्होंने कहा कि आयोजकों का मुख्य लक्ष्य संगीत को सुनाना और स्थानीय एवं क्षेत्रीय प्रतिभाओं पर मंच प्रदान करना है। साल 2022 के फेस्टिवल हेडलाइनर डीजे खालिद का कहना है कि एमडीएलबीईएएसटी रियाद के विविध संगीत परिदृश्य का जश्न मनाते हुए विभिन्न संस्कृतियों के बीच सहयोग का माहौल बनाना है।

बताते चलें कि सऊदी अरब एक इस्लामी मुल्क है। आमतौर पर इस्लामी देशों में गीत-संगीत और नृत्य पर पाबंदी होती है, लेकिन सऊदी अरब इन रूढ़िवादी से निकलने की कोशिश में लगा हुआ है। सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इसको लेकर अपने मुल्क में कई सुधार भी किए हैं। उन्होंने रूढ़िवादी इस्लाम से मुल्क को निकालने के लिए विजन 2023 भी सामने रखा है। चूँकि, इस्लाम के प्रमुख मस्जिद काबा का सऊदी अरब कस्टोडियन है, इसलिए भी कट्टरपंथी मुल्क सऊदी अरब पर हमलावर है।

सऊदी अरब में फेस्टिवल को एन्जॉय करते लोग (साभार: https://www.visitsaudi.com)

दरअसल, इजरायल के खिलाफ आयोजित बैठक में इस्लामिक सहयोग संगठन के 57 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान प्रस्ताव पेश किया गया कि वो लोग इजरायल को मिल रही सैन्य-आर्थिक मदद रोककर अलग-थलग करेंगे। कई देशों ने इस पर हामी भरी, लेकिन जब बात इस्लामिक देशों के नेता माने जाने वाले सऊदी अरब की बारी आई तो उसने इस प्रस्ताव से किनारा ही कर लिया। यानी वह इजरायल से संबंध न तोड़ने के समर्थन में आ खड़ा हुआ।

जब हर तरफ से छिछालेदर हुई तो खुद को इस्लाम का संरक्षक कहने वाला सऊदी अरब इस्लामी देशों का साथ देने से मना कर दिया। दरअसल, हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई से दुनिया भर के कट्टरपंथी खफा हैं। वे चाहते हैं कि दुनिया भर के मुस्लिम मुल्क एकजुट होकर इजरायल का बहिष्कार करें। इस संबंध में 11 नवंबर 2023 रियाद में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन भी हुआ, जहाँ इजरायल को अलग-थलग लाने का प्रस्ताव पेश किया गया।

सऊदी अरब के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात और अन्य 7 मुस्लिम देश भी इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हुए। नतीजा ये निकला कि इजरायल के खिलाफ बुलाई बैठक में इजरायल के विरुद्ध ही प्रस्ताव पास नहीं हो सका। प्रस्ताव का विरोध करने वालों में सऊदी अरब और UAE के अलावा जॉर्डन, इजिप्ट, बहरीन, सुडान, मोरोक्को, मॉरिशानिया और द्जिबूती जैसे देश शामिल थे।

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन के तत्वाधान में इस्लामी मुल्क की बैठक में हमले की आलोचना तो की गई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसको लेकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, बहरीन आदि देशों का आलोचना भी हो रही है। इस बीच सऊदी अरब में स्पोर्ट्स एंड म्यूजिक फेस्टिवल का रंगारंग आयोजन किया जा रहा है। कट्टरपंथियों का कहना है कि एक तरफ फिलिस्तीन में लोग मारे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ सऊदी अरब रंगारंग कार्यक्रम में डूबा हुआ है।

सम्मेलन की शुरुआत में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने युद्धविराम की बात की। वहीं ईरानी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के दौरान इजरायली सेना को आतंकी संगठन घोषित करने की माँग की। हालाँकि, सऊदी अरब के इससे पीछे हटने के पीछे कहा जा रहा है कि प्रिंस सलमान क्षेत्रीय झगड़ों में पड़कर देश के संसाधनों को बर्बाद नहीं होते देखना चाहते। उनका मकसद विजन 2030 में है। यही वजह है कि वो अपनी विदेशी निवेश पर ज्यादा केंद्रित है।

इसके पीछे इजरायल के साथ इन देशों का अब्राहम समझौता भी है। मूल अब्राहम समझौते पर संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 15 सितंबर 2020 को हस्ताक्षर किए थे। इज़राइल में संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत मोहम्मद अल खाजा 1 मार्च 2021 को इजरायल पहुँचे थे। समझौते का नाम पैगंबर इब्राहिम के नाम पर रखा गया है, जो यहूदी और इस्लाम दोनों में एक पैगम्बर के हैं।

अब्राहम समझौते के अनुसार, यूएई और बहरीन इजरायल में अपने-अपने दूतावास स्थापित करेंगे और पर्यटन, व्यापार और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में उसके साथ मिलकर काम करेंगे। इसमें धार्मिक महत्व को भी रेखांकित किया गया था। यह मुस्लिमों को इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक यरूशलेम में अल-अक्सा मस्जिद की अनुमति देगा। इस समझौते का एक उद्देश्य इस्लामी देशों में शिया मुल्क ईरान के बढ़ते प्रभाव को कम करना भी था। यही कारण है कि इजरायल के खिलाफ किसी तरह के प्रतिबंध से इन देशों ने हाथ खींच लिए।

सऊदी अरब और अरब लीग के इन देशों के निर्णय के बाद कट्टरपंथियों ने इन देशों पर हमले करने शुरू कर दिए हैं। मिडिल ईस्ट मिरर में डॉक्टर आमीरा अबू अल फतह ने एक लेख लिखकर सऊदी अरब की खूब आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इजरायल फिलिस्तीन में स्कूलों-अस्पतालों पर हमले कर रहा है और अरब मुल्क खाली भाषण दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सम्मेलन सऊदी अरबिया ने सिर्फ अपनी ओर ध्यान खींचने के लिए आयोजित किया था।

आमिरा ने कहा कि सऊदी अरब और अरब लीग ने अन्य देश फिलिस्तीन के बारे में चिंता करने के बजाय संगीत और खेल समारोहों में व्यस्त थे। रियाद का आयोजन महत्वहीन था। उन्होंने इस्लामी सहयोग संगठन को बिना दांत वाला शेर बताया और कहा कि ये देश यहूदी मुल्क से डरते हैं। उन्होंने इजरायल की कार्रवाई को बर्बर बताया।