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ट्रांसजेंडरों को मोदी सरकार का तोहफा: आयुष्मान भारत योजना के तहत करा सकेंगे लिंग परिवर्तन, उत्थान-पुनर्वास के लिए ₹500 करोड़

मोदी सरकार ने ट्रांसजेंडरों को बड़ा तोहफा देते हुए उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत शामिल किया है। इस योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को मेडिकल कवर के साथ ही अपना सेक्स चेंज कराने का भी ऑप्शन मिलेगा। आयुष्मान भारत योजना को प्रधानमंत्री जन आरोग्य के नाम से भी जाना जाता है और इसके अंतर्गत 5 लाख रुपए तक का कवर मिलता है।

केंद्र सरकार ने इसे सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज (SMILE) योजना के तहत बढ़ाते हुए ट्रांसजेंडरों को भी इस योजना में शामिल करने का प्रयास किया है।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव आर सुब्रह्मण्यम ने ईटी को बताया, “नई योजना के पाँच घटक निर्धारित किए गए हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पुनर्वास और आर्थिक संबंध शामिल हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से ट्रांसजेंडरों के लिए आयुष्मान भारत के तहत पैकेज पर काम किया जा रहा है। यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा आवश्यक सर्जरी और चिकित्सा सहायता को कवर करेगा।”

12 अक्टूबर को लॉन्च होगी स्माइल योजना

उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय 12 अक्टूबर को SMILE शुरू करने जा रहा है। इस योजना की दो उप योजनाएँ हैं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना और भीख माँगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। अम्ब्रेला योजना के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भीख माँगने वालों के लिए कल्याणकारी उपायों समेत उनके पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाओं के प्रावधान, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास, आर्थिक संबंधों के समर्थन पर व्यापक रूप से ध्यान दिया जाएगा। इसमें राज्य सरकारें और गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का भी सहयोग लिया जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र ने ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण और उत्थान के लिए पंचवर्षीय योजना में 500 करोड़ रुपए की राशि आवंटित किया है। आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। प्रधानमंत्री इसके जरिए हर गरीब तबके तक स्वास्थ्य योजना का लाभ पहुँचाना चाहते हैं।

‘अगला निशाना शाहरुख खान… NCB नहीं भाजपा वालों ने पकड़ा था आर्यन को’ – NCP के बड़े नेता ने लगाया गंभीर आरोप

बॉलीवुड में काम करने वाले शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को NCB (Narcotics Control Bureau) वालों ने नहीं पकड़ा है। क्रूज पर ड्रग्स मामले में आर्यन खान को भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) वालों ने पकड़ा है। यह व्यंग्य नहीं है। शुद्ध खबर है। राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने यह गंभीर आरोप लगाया है।

एक और खबर पढ़िए (कसम से यह भी व्यंग्य नहीं है) – आर्यन खान की गिरफ्तारी फर्जी है। अगला निशाना शाहरुख खान हैं। इसके लिए पिछले एक महीने से क्राइम रिपोर्टरों को सूचना प्रसारित की जा रही थी।

शरद पवार वाली NCP (Nationalist Congress Party) के प्रवक्ता नवाब मलिक ने आर्यन खान को लेकर भाजपा को घेरा। एनसीपी के अनुसार आखिर कैसे आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट जैसे हाईप्रोफाइल लोगों को NCB दफ्तर ले जा सकती है। मतलब इनके अनुसार हाईप्रोफाइल लोगों को कोई भी संस्था पकड़ नहीं सकती है। वैसे इनके तर्क में दम है क्योंकि खुद शरद पवार दंगे जैसी चीज को लेकर झूठ बोल गए थे और कोई कानूनी कार्रवाई आज तक नहीं हुई है।

खैर। एनसीपी प्रवक्ता यहीं नहीं रूके। उन्होंने आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को भाजपा से जोड़ दिया। इनके अनुसार जिन दो लोगों ने इन दोनों को पकड़ कर NCB के ऑफिस पहुँचाया, उनमें से एक भाजपा कार्यकर्ता है। जबकि दूसरा एक फ्रॉड है, वो खुद को प्राइवेट डिटेक्टिव बताता है।

मीडिया में अब तक जितनी भी रिपोर्ट आई थी, वो सब गलत थी – ऐसा डायरेक्ट NCP प्रवक्ता नवाब मलिक ने नहीं कहा। लेकिन आशय पूरा का पूरा यही था। क्योंकि बिना नाम लिए नवाब मलिक ने NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और उनकी पूरी टीम के किए कराए पर भी पानी फेर दिया।

बात में दम न हो तो बात कैसी? NCP वाले नवाब मलिक ने अपनी बात को साबित करने के लिए दो वायरल वीडियो क्लिप्स भी दिखाए। वीडियो दिखा कर यह भी बताया कि उसमें कौन है। नवाब मलिक के अनुसार एक वीडियो में केपी गोसावी है, जो आर्यन खान को NCB ऑफिस ले जा रहा है जबकि दूसरे वीडियो में मनीष भानुशाली अरबाज मर्चेंट को ले जा रहा है।

नवाब मलिक ने बताया कि भानुशाली भाजपा के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने माँग की, “भाजपा और NCB को स्पष्ट करना चाहिए कि ये दो व्यक्ति कौन हैं, उन्हें जहाज के छापे में क्यों देखा गया? उन दोनों के साथ भाजपा के कनेक्शन क्या हैं?”

नवाब मलिक के अनुसार NCB केवल हाई-प्रोफाइल फिल्मी हस्तियों को निशाना बना रहा है, महाविकास अघाड़ी सरकार को बदनाम किया जा रहा है।

छाती नोंची, प्राइवेट पार्ट छुआ, नंगी पीठ पर मारी डंडी: बिहार के छपरा में महिला के साथ दिनदहाड़े बदसलूकी, Video वायरल के बाद 4 गिरफ्तार

बिहार के छपरा से एक शर्मनाक वीडियो वायरल हुई है। इसमें 6 लड़के बाइक पर पीछे बैठी महिला को बुरी तरह नोंच रहे हैं। उसके प्राइवेट पार्ट पर हाथ मारते हुए, बार-बार उसकी छाती दबा रहे हैं और एक लड़का उनमें से घटना का वीडियो बना रहा है। महिला लगातार खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन बदमाश न मान रहे हैं और न ही महिला की स्थिति पर दया खा रहे हैं। घटना के संबंध में पुलिस ने 4 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो दरियापुर थाना क्षेत्र के दरियापुर रेल कारखाना से दरिहरा चवंर होकर दरिहरा सरैया गाँव जाने वाली मुख्य सड़क का है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है और मौजूदा सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं छेड़खानी करने वालों की पहचान अकिलपुर निवासी गुड्डू राय, आमोद राय, राकेश कुमार और धर्मेंद्र कुमार के तौर पर हुई है। इसके अलावा दो अन्य आरोपित अरविंद कुमार और नीतीश कुमार हैं जो कि सामनचक गाँव के निवासी हैं। 

पुलिस ने आरोपितों में 4 पर शिकंजा कस लिया है लेकिन पीड़िता का पता नहीं चल सका है। पूरी घटना 27 सितंबर 2021 की कही जा रही है। 45 सेकेंड की इस वीडियो में दिख रहा है कि पहले एक बाइक को रोका गया और फिर महिला के साथ बदसलूकी की गई।

वीडियो में क्या है?

घटना संबंधी वीडियो को हम अपनी खबर में नहीं जोड़ रहे हैं। लेकिन बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि पहले औरत की साड़ी खींची जा रही है। जब वो पल्ला ठीक करती है तो उसकी छाती दबा दी जाती है और जैसे ही वो छाती पर हाथ रखती है उसके प्राइवेट पार्ट पर मारा जाता है। महिला बहुत कोशिश करके भी इस हैवानियत से खुद को नहीं बचा पाती। फिर कोई दूसरा शख्त उसकी खुली पीठ पर डंडी मारता है।

महिला चिल्लाती है चीखती है दया की भीख माँगती है लेकिन न वीडियो बनाने वाला रुकता है और न ही कुकर्म करने वाले। महिला को लेकर बाइक पर बैठा शख्स भी कुछ नहीं बोलता, वो भी बस कोशिश करता है कि कैसे भी वो उन बदमाशों के चंगुल से गाड़ी को आगे भगाए। पर, जैसे ही वो थोड़ा चलाता है बदमाश महिला को और ज्यादा नोचते हैं। जब बाइक आगे जाती तो उसे पत्थर डंडे मारे जाते हैं और जाते-जाते माँ की गाली दी जाती है।

पुलिस के बयान में क्या कहा गया?

पुलिस द्वारा जारी बयान में वीडियो वायरल की बात है। पुलिस ने ये भी जानकारी दी कि उन्होंने वीडियो संज्ञान में आने के 8 घंटे बाद घटनास्थल को पहचान कर 6 में से 4 आरोपितों को पकड़ लिया है। पुलिस को अब तक की जाँच में पता चला है कि पीड़िता की ओर से कहीं भी कोई शिकायत नहीं दी गई। उसकी पहचान के लिए कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति

भारत के चर्च, पादरियों, धर्मांतरण वाले मिशनरियों की जाँच के लिए बने आयोग: VHP की माँग, विदेशी चर्चों में बच्चों का यौन शोषण

फ्रांस के एक स्वतंत्र आयोग ने अपनी जाँच में कैथोलिक चर्च में हुए तीन लाख से अधिक बच्चों के यौन शोषण को लेकर जो आँकड़े दिए हैं वो वाकई खौफनाक हैं। जिसे देखते हुए अब भारत के चर्चों की भी जाँच की माँग विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा उठाई गई है। आए-दिन चर्चों में ननों के यौन शोषण के मामले आते रहते हैं उसका उदाहरण देते हुए ऐसे घृणित कार्यों की जाँच के लिए विहिप ने पत्र लिखकर अनुशंसा की है।

विश्व हिन्दू परिषद् ने कहा है कि चर्च के पादरियों व धर्मांतरण में लिप्त मिशनरियों के कुकृत्यों का पर्दाफास करने तथा भारतीयों के इनके घिनौने षणयंत्रों से मुक्ति दिलाने के लिए नियोगी कमीशन की तरह भारत में भी एक जाँच आयोग बनाए जाने की आवश्यकता है।

विहिप द्वारा जारी किया गया पत्र

विहिप के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन आज अपने एक वक्तव्य में कहा कि फ़्रांस की तरह भारतीय चर्चों की घिनौनी करतूतें भी किसी से छिपी नहीं हैं। अब पादरियों के पापों से भारतीयों को मुक्ति मिलनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि चर्च द्वारा किए जा रहे हैं अवैध धर्मांतरण के अभिशाप से भी भारत की मुक्ति हेतु कठोर कानून जरुरी है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में फ्रांस की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बेहद चौकाने वाला समाचार है कि केवल फ्रांस में पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न के 3 लाख 30 हजार बच्चे शिकार हुए हैं।

दरअसल फ्रांस में हुई एक स्वतंत्र आयोग की जाँच ने सभी को हैरत में डाल दिया है। आयोग का अनुमान है कि फ्रांस के कैथोलिक चर्च में पादरी, अधिकारी व अन्य लोगों ने मिलकर 1950 के बाद से 216,000 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया। हालाँकि कुछ रिपोर्ट में इन आँकड़ों को 3 लाख 30 हजार के करीब बताया जा रहा है।

रिपोर्ट जारी करने वाले आयोग के अध्यक्ष ज्यां मार्क सौवे ने कहा कि यह अनुमान वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित है। इसमें पादरियों और चर्च से संबद्ध लोगों और अन्य व्यक्तियों द्वारा उत्पीड़न के मामले शामिल हैं। सौवे ने कहा कि यौन उत्पीड़न के शिकार होने वालों में 80 प्रतिशत लड़के थे जबकि बाकी अन्य लड़कियाँ थीं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि बच्चों का उत्पीड़न 3000 से ज्यादा पीडोफाइल द्वारा किया गया। इनमें से दो तिहाई पादरी थे।

एक स्वतंत्र आयोग बर्नार्ड प्रीनैट की जाँच की रिपोर्ट आई तो पता चला कि साल 1950 के बाद से लेकर 2020 तक चर्च के भीतर पादरी, अधिकारी व अन्य लोगों ने मिलकर लगभग 3 लाख 30 हजार बच्चों का यौन शोषण किया है। इतनी बड़ी संख्या को सुन कर शायद आप चौंक गए होंगे। इतना ही नहीं बच्चे-बच्चियों के साथ चर्च के भीतर क्या-क्या होता था, किन-किन तरीकों से रेप किया जाता था, वो तो और भी डरावना है। क्या सिर्फ पादरी और पुरुष अधिकारी ही करते थे यौन शोषण या नन भी शामिल थीं इस गैंग में, तो उनका तरीका और भी हैरत में डाल देने वाला है।

2500 पन्नों की रिपोर्ट पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि महिला पादरी (नन) बच्चियों का रेप करने के लिए क्रूस (क्रॉस, जिस पर ईसा मसीह भी चिपके हों) का इस्तेमाल करती थी। चर्च में रहने वाले नाबालिग लड़कों को वो खुद के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर करती थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यौन शोषण के शिकार हुए बच्चे-बच्चियों में से 80% की उम्र 10 से 13 साल के बीच थी। मतलब 2 लाख 64 हजार नाबालिगों का यौन शोषण 10 से 13 की उम्र में किया गया।

इसी रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद हालाँकि पोप फ्रांसिस ने सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। इस रिपोर्ट की बाबत मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को पोप ने दुख जाहिर किया और घटना के संबंध में पीड़ितों से माफी माँगी। वेटिकन प्रवक्ता ने बताया कि पोप ने स्वतंत्र आयोग की जाँच में सामने आए निष्कर्ष को दर्दनाक कहा। फ्रेंच में जारी एक बयान में प्रवक्ता माटेओ ब्रूनी ने कहा, “उनके विचार सबसे पहले पीड़ितों की ओर जाते हैं, उनके (पीड़ितों के) दर्द पर बहुत दुख है और बोलने के उनके साहस के लिए आभार है।”

लेकिन, इन कुकृत्यों की आग अब यहीं नहीं रुकने वाली भारत में आज चर्च, पादरियों और मिशनरियों की आयोग बनाकर जाँच की माँग विश्व हिन्दू परिषद् ने की है। क्या पता ऐसे माँग और भी देशों में उठे, जाँच हो और फिर जो आँकड़ा आए उससे इस पूरे कुचक्र की भयावहता का पता चले।

‘9 अक्टूबर को योगी और अजय मिश्रा को घेरो, ड्रोन-ट्रैक्टर आतंक का इस्तेमाल करो’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने लोगों को उकसाया

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 3 भाजपा कार्यकर्ताओं सहित 8 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन विपक्षी दलों और भारत विरोधी तत्वों के साथ-साथ आतंकी संगठनों ने भी इसमें भी अवसर तलाशना शुरू कर दिया है। वो इन घटनाओं का लाभ उठाने की कोशिशें कर रहे हैं। 4 अक्टूबर को खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो और एक पत्र जारी किया था। इसमें पन्नू ने सिखों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ 9 अक्टूबर को ड्रोन और ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था।

अपने बयान में पन्नू ने कहा, “आज यूपी के लखीमपुर में चार किसानों की हत्या कर दी गई। किसानों के विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। अब खालिस्तान ही एकमात्र रास्ता है। किसान हल खालिस्तान।” वीडियो में उसने आगे कहा, “योगी आदित्यनाथ और अजय मिश्रा की गाड़ियों का इस्तेमाल हमारे भाइयों को मारने के लिए किया गया था, अब 9 अक्टूबर को इन दोनों की घेराबंदी करें। ड्रोन और ट्रैक्टर का इस्तेमाल करें। योगी और अजय मिश्रा को घेरो। हथियार मत उठाओ। कानूनी आतंक का प्रयोग करो। उन्हें घर में ही नजरबंद कर दो। केवल खालिस्तान ही आपकी समस्याओं का समाधान कर सकता है। अगर सैकड़ों मौतें आजादी के लिए होतीं तो हम अब तक आजादी पा चुके होते।”

लखीमपुर खीरी की घटना का फायदा अपने कथित हितों के लिए करने की कोशिश कर रहे खालिस्तानी संगठन एसएफजे के प्रमुख पन्नू ने एक पत्र जारी कर घटना में मारे गए हर किसान के परिवार को 7,500 डॉलर देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उसने यह भी उल्लेख किया कि 9 अक्टूबर ही वह दिन है, जब सुखा और जिंदा को जनरल एएस वैद्य की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने के बाद फाँसी दी गई थी।

सिख फॉर जस्टिस और किसान आंदोलन

उल्लेखनीय है कि देश में जब से किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है, तभी से आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस भारत में हिंसा भड़काने के फिराक में है। भारत सरकार द्वारा आतंकी घोषित किया जा चुका एसएफजे प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वालों के लिए नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। 26 जनवरी को ठीक ऐसा ही हुआ था और ‘किसानों’ का विरोध करने वाले एक समूह ने लाल किले में घुसकर दो अनजाने झंडे फहराए थे।

लखीमपुर खीरी में क्या हुआ था

3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं सहित आठ लोगों की जान चली गई थी। वहाँ विरोध कर रहे किसान अचानक से हिंसक हो गए। उन्होंने भाजपा के काफिले पर पथराव कर दिया। सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता अजय मिश्रा के बेटे द्वारा किसानों को कुचलने की खबरों की भरमार थी। हालाँकि, बाद में इस बात का पता चला कि घटना के समय अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा वहाँ थे ही नहीं। सियासी लाभ उठाने के लिए कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी रविवार शाम दीपिंदर हुड्डा के साथ लखीमपुर के लिए रवाना हुईं, जहाँ उन्होंने हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस अधिकारियों को धमकाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

रविवार और सोमवार को लखीमपुर की घटना को लेकर जब और भी वीडियो सामने आए तो हकीकत साफ हुई, जिनमें प्रदर्शनकारियों को काफिले पर हमला करते देखा गया। एक वीडियो में दिख रहा है कि किसान सफेट शर्ट पहने एक व्यक्ति को धमकाते हुए कह रहे हैं कि अजय मिश्रा ने उसे किसानों को मारने के लिए भेजा है। इसके तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई। युवक की पहचान श्याम सुंदर निषाद के रूप में हुई है।

इस हिंसा में मरने वाले दो अन्य भाजपा कार्यकर्ता शुभम मिश्रा और हरिओम मिश्रा हैं, जो उस दिन स्थानीय कुश्ती मैच देखने गए थे। शुभम के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि शुभम की हत्या करने वाले प्रदर्शनकारियों ने उसकी सोने की चेन, मोबाइल और पर्स चोरी कर लिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के तजिंदर सिंह विर्क और किसान यूनियन के नेता को सबसे प्रमुख अपराधियों में से एक बताया। सरकार ने घटना में मारे गए सभी लोगों के परिजनों को 45 लाख मुआवजे और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इसके साथ ही लखीमपुर खीरी के आसपास के क्षेत्रों को खालिस्तान हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है।

‘Sissy men’ समाज को भ्रष्ट बना रहा है: चीन की सरकार ने ‘फैन-कल्चर’ से लेकर ‘स्टार से प्यार’ तक को किया बैन

चीन के युवा अपने पसंदीदा सितारों और मशहूर हस्तियों को फॉलो और ट्रेंड करवाने के लिए वीबो जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घंटों समय बिताते हैं। इसको देखते हुए चीन की सरकार ने सोशल मीडिया पर स्टार को फॉलो करने, ऑनलाइन सेलिब्रिटी रैंकिंग आदि जैसे ऑनलाइन उपक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

चीन की सरकार ने पिछले महीने (सितंबर 2021) “irrational star-chasing” नाम की इस ऐक्टिविटी पर बैन लगा दिया है। पूरी दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देश ने ‘नैतिकता की कार्रवाई’ के तहत स्टार को फॉलो करने, ऑनलाइन सेलिब्रिटी रैंकिंग, पैसों के लिए इसके इस्तेमाल और प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी फोटो को ट्रेंड करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले अन्य उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इस फैसले को उचित ठहराते हुए वहाँ के अधिकारियों ने कहा कि फैंन्स कल्चर अब एक एक्सप्लोइटेटिव इंडस्ट्री (शोषणकारी उद्योग) बन गया है, जिसका उद्देश्य नाबालिगों से लाभ कमाना है। यह कनेक्शन आर्टिफिशल तरी​के से सोशल मीडिया के जरिए बनाया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि फैन्स कल्चर के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिए इन नए नियमों की आवश्यकता थी। इसमें फ़ैन्डम के बीच साइबरबुलिंग, पीछा करना, डॉकिंग और ऑनलाइन वॉर शामिल हैं।

एक अन्य कार्रवाई में चीन के प्रसारण नियामक ने पिछले महीने ‘lapsed morals‘ और ‘विभिन्न राजनीतिक विचारों’ वाले कलाकारों पर बैन लगा दिया। इसके अलावा उन्होंने ‘sissy men’ पर भी बैन लगाया। उन्हें चीन के लोगों द्वारा androgynous अभिनेता जिओ (जो लड़का और लड़की दोनों की तरह दिखते हैं) को पसंद करना और फॉलो करना पसंद नहीं आया है।

दरअसल, गुड लुकिंग जिओ ने साल 2019 में fantasy drama The Untamed में दमदार भूमिका निभाकर लोगों को अपना दीवाना बना दिया था। इस दौरान उनकी फीमेल फैन्स की संख्या काफी बढ़ गई थी। अकेले वीबो पर उनके 29 मिलियन (2,90,00,000 यानी 2 करोड़ से अधिक) से अधिक फॉलोअर्स हैं।

जिओ के एक 16 वर्षीय जबरा फैन ने कहा, “मैं उनके वीबो (Weibo) फैन फोरम में पोस्ट को अपवोट करता था और उनके द्वारा प्रमोट किए गए प्रोडक्ट्स को खरीदता था। मैं उन्हें हर दिन नंबर एक पर ट्रेंड कराने की कोशिश करता था।” वहीं, चीन सरकार द्वारा इसे ‘गलत व्यवहार’ घोषित करने से पहले बीजिंग हाईस्कूल के एक छात्र चेन झिचु ने अभिनेता जिओ जान को ऑनलाइन ट्रेंड कराने के लिए वीबो प्लेटफॉर्म पर 30 मिनट का समय बिताया था।

हम सभी जानते हैं कि चीन ने ‘टिक टॉक’ जैसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाकर पूरी दुनिया को इसका आदी बना दिया है, लेकिन सवाल यह है कि वह अपने देश में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध क्यों लगा रहा है? हालाँकि, भारत में ‘टिक टॉक’ पर साल 2020 में ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मिल रही बिरयानी फिर भी बेटे के खाने की फिक्र में दुबली हुईं गौरी, मैकडॉनल्ड्स का बर्गर लेकर आईं; NCB ने बाहर ही रखवा लिया

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की बेगम गौरी खान इन दिनों अपने बेटे आर्यन के खाने को लेकर लेकर बेहद चितिंत नजर आ रही हैं। खबर है कि बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को वह ड्रग्स केस में गिरफ्तार अपने बेटे के लिए मैकडॉनल्ड्स से कुछ बर्गर पैक करवाकर एनसीबी दफ्तर आईं थी। लेकिन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने सुरक्षा कारणों के चलते गौरी खान को बर्गर अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी।

आर्यन खान समेत 8 आरोपित 7 अक्टूबर तक एनसीबी की कस्टडी में हैं। रेव पार्टी के आरोपितों को जाँच एजेंसी द्वारा पुरी-भाजी, दाल-चवाल, सब्जी-परांठे, पुलाव और यहाँ तक कि बिरयानी खाने के लिए दी जा रही है। जानकारी के अनुसार, आर्यन खान को अन्य आरोपितों के साथ ही एनसीबी दफ्तर के पास बने नेशनल हिन्दू रेस्टोरेंट का खाना खिलाया जा रहा है। किसी भी आरोपित को घर से मनपसंद खाना एनसीबी दफ्तर में मँगाने की अनुमति नहीं दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्यन खान ने एनसीबी अधिकारियों से कहा है कि उनके पिता इतने व्यस्त हैं कि उन्हें कभी-कभी उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। एनसीबी ने क्रूज शिप ड्रग्स मामले में आर्यन के साथ मुनमुन धामेचा, अरबाज मर्चेंट, विक्रांत छोकर, नुपुर सारिका, इस्मीत सिंह, मोहक जायसवाल और गोमित चोपड़ा को पकड़ा था। सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को आर्यन के साथ अरबाज सेठ मर्चेंट और मुनमुन धामेचा को भी 7 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेजा दिया गया था।

बता दें कि 2 अक्टूबर को मुंबई में समुद्री क्रूज पर चल रही एक ड्रग्स पार्टी में एनसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किए और 8 लोगों को हिरासत में लिया था। यह जहाज मुंबई से गोवा जा रहा था। एक पुख्ता टिप मिलने के बाद मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और अन्य एनसीबी अधिकारी जहाज में आम यात्रियों की तरह सवार हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसके बाद शाहरुख़ के बेटे आर्यन को 12 घंटे तक चली लम्बी पूछताछ के बाद उसे चरस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आर्यन खान पर अपने लेंस के डिब्बे में ड्रग्स छुपाकर रखने का आरोप है।

मुकेश अंबानी से करोड़ों वसूलने के लिए रची गई थी ‘एंटीलिया’ की साजिश, वाजे को केस सॉल्व कर बनना था हीरो: NIA चार्जशीट

एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन की हत्या मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने पिछले दिनों कई खुलासे किए थे। इस चार्जशीट से ही ये बात निकल कर सामने आई कि एंटीलिया का पूरा मामला पूर्व नियोजित था और इसे मुकेश अंबानी से करोड़ों रुपए वसूलने के लिए रचा गया था। हालाँकि बाद में साजिशकर्ताओं के मनसूबे सफल नहीं हुए और NIA के हाथ में मामला जाने के बाद सचिन वाजे को निलंबित कर दिया गया।

चार्जशीट कहती है कि एंटीलिया के बाहर बम वाली गाड़ी खड़ी करने का मकसद आंतक का डर दिखा कर पैसा वसूलना था। बाद में वाजे और उनकी गैंग ने हिरेन को मारा क्योंकि उनको लगा अब तो केस एनआईए के पास चला जाएगा। उन्हें डर था कि अगर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने पूछताछ की तो हिरेन कहीं सारी बातें उगल न दे।

NIA सूत्रों का कहना है कि अपनी और दूसरों की जेब वसूली के पैसे से भरने के अलावा वाजे अपनी बतौर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अपनी पहचान वापस पाना चाहता था और हीरो बनने की चाह रख रहे थे, इसलिए ये सारी साजिश रची गई। 

चार्जशीट में आईपीसी, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और धारा 16 (आतंकवादी अधिनियम), 18 (साजिश), 20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने के नाते) की कठोर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम की धाराएँ दायर की गई हैं जिसे आमतौर पर यूएपीए के रूप में भी जाना जाता है।

चार्जशीट में 300 से ज्यादा गवाहों की गवाही, डिजिटल और दस्तावेजी सबूत हैं। एजेंसी का कहना है कि उनके पास वाजे, पूर्व एनकाउंटर स्पेश्लिस्ट प्रदीप शर्मा, डिसमिस किए गए पीआई सुनील माने, एपीआई रियाजुद्दीन काजी समेतत 10 के ख़िलाफ़ सबूत हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले NIA द्वारा दायर 10,000 पन्नों की चार्जशीट से पता चला था कि पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह ने इस मामले में आतंकी समूह जैश-उल-हिंद की संलिप्तता का हवाला देकर जाँच को गुमराह किया था। एक साइबर एक्सपर्ट के बयान के मुताबिक सिंह ने रिपोर्ट में आतंकी संगठन की भूमिका का जिक्र करने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे।

साइबर एक्सपर्ट ने 5 अगस्त को एनआईए के समक्ष परमबीर सिंह के कहने पर रिपोर्ट में बदलाव की बात कबूली थी। उसने बताया था, “सीपी मुंबई के आग्रह पर मैंने सीपी मुंबई के कार्यालय में बैठकर अपने लैपटॉप पर एक रिपोर्ट तैयार की, जो एक पैराग्राफ में थी और मैंने इसे सीपी मुंबई को दिखाया। रिपोर्ट पढ़ने के बाद परमबीर सिंह सर ने मुझसे एंटीलिया मामले में जिम्मेदारी लेते हुए टेलीग्राम चैनल पर ‘जैश-उल-हिंद’ के पोस्टर डालने के लिए कहा।”

‘हिम्मत है तो सामने आओ, कश्मीरी पंडित कभी मर नहीं सकते’: आतंकियों को बेटी ने ललकारा, पिता की गोली मार कर दी थी हत्या

जम्मू-कश्मीर में मारे गए कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू की बेटी श्रद्धा बिंदरू ने आतंकियों को ललकारा है। मीडिया से बात करते हुए श्रद्धा ने कहा कि उनके पिता कश्मीरी पंडित थे और वे कभी मर नहीं सकते। आतंकी उनके शरीर को मार सकते हैं, लेकिन उनकी आत्मा जीवित रहेगी। श्रद्धा ने कहा, “तुम लोग केवल पत्थर फेंक सकते हो या पीछे से गोली चला सकते हो। मैं अपने पिता की बेटी हूँ। हिम्मत है तो मेरे सामने आओ और आमने-सामने बात करो।” श्रद्धा ने कहा कि उनके पिता माखनलाल बिंदरू फाइटर थे, वह कभी मर नहीं सकते।

आतंकियों को आइना दिखाते हुए श्रद्धा कहती हैं, “मैं एक हिंदू होकर भी कुरान पढ़ी हूँ और कुरान कहता है कि ये जो चोला है, ये जो शरीर का चोला है, ये बदल जाएगा लेकिन जो इंसान का जज्बा है, स्प्रिट है वह कहीं नहीं जाएगा।” उन्होंने कहा, “एक शरीर तो उड़ा दिया न तुमने, उस शरीर ने जिसको पैदा किया, वो मैं हूं, उस बाप की बेटी। आ जा सामने, इतनी औकात है न चल भाई, आ मेरे सामने और मेरे से बात कर।”

दरअसल, आतंकियों ने मंगलवार को कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू सहित तीन लोगों की हत्या कर दी थी। बिंदरू की हत्या श्रीनगर के इकबाल क्षेत्र में शाम के करीब 7:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी। वह प्रसिद्ध फार्मेसी के मालिक थे। आतंकियों ने दुकान में घुसकर उन्हें गोली मारी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट किया था, “श्रीनगर के इकबाल पार्क में बिंदरू मेडिकेट के मालिक कश्मीरी पंडित- माखन लाल बिंदरू (70) की आज शाम (मंगलवार) कश्मीर में आतंकियों ने हत्या कर दी। इसके बाद श्रीनगर के लालबाजार में सड़क किनारे गैर स्थानीय भेलपुरी विक्रेता की हत्या कर दी गई।”

अगले ट्वीट में कौल ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि श्रीनगर में अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदरू उन कुछेक कश्मीरी पंडितों में से एक थे, जिन्होंने 1990 के दशक में कश्मीर नहीं छोड़ा।

दूसरी घटना में श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में शाम के करीब साढ़े आठ बजे बिहार के गोलगप्पा बेचने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, श्रीनगर के मदीन साहब लालबाजार के पास आतंकियों द्वारा मारे गए शख्स की पहचान वीरेंद्र पासवान के तौर पर हुई है। वे बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी इसे टारगेटेड अटैक करार दिया है।

वहीं तीसरी घटना कश्मीर के बांदीपोरा के शाहगुंड इलाके में हुई। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, नायदखाई निवासी मोहम्मद शफी लोन की आतंकियों ने हत्या कर दी। फिलहाल आतंकियों की तलाश की जा रही है। वह बांदीपोरा के हाजिन में टाटा सूमो चलाते थे।

‘पार्क को कब्रिस्तान में बदल रहे’: चंद्रशेखर आजाद पार्क से हटेगी मस्जिद-मजार, इलाहाबाद हाई कोर्ट का ऑर्डर

प्रयागराज के कंपनी बाग में महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के नाम से एक पार्क है। यहीं पर अंग्रेजों से लड़ते हुए आजाद ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। लेकिन, इस पार्क पर कब्जा करने के लिए मस्जिद और मजार तक बना दी गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसे देखते हुए अधिकारियों को दो दिन के अंदर पार्क की हर तरह के अतिक्रमण से मुक्त करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने 8 अक्टूबर तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस मुनिश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की बेंच ने की। बेंच ने कहा कि 1975 के बाद हुए सभी अवैध अतिक्रमणों को ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए।

इससे पहले 30 सितंबर को कोर्ट ने इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए टाल दिया था। हाई कोर्ट ने मामले में जिला प्रशासन, प्रयागराज विकास प्राधिकरण, उद्यान विभाग के आला अधिकारियों को तलब किया था। अदालत ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट 1975 से पहले के सभी निर्माणों को अवैध बता चुका है तो फिर वहाँ धड़ल्ले से नए निर्माण कैसे होते गए। इन पर क्यों कार्रवाई नहीं की गई?

गौरतलब है कि इस मामले में जितेंद्र सिंह नाम के शख्स ने अधिवक्ता हरि शंकर जैन के माध्यम से याचिका दायर की थी। 23 फरवरी को दाखिल याचिका में कहा गया था कि पूरे पार्क को कब्रिस्तान में बदला जा रहा है। याचिका में कहा गया था कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पार्क की जमीन पर कब्जा करने के लिए कृत्रिम कब्रें बना रहे हैं। पार्क क्षेत्र में एक इमारत को मस्जिद में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

याचिका के मुताबिक, “मुस्लिम समुदाय के लोग अपने मजहबी उद्देश्यों के लिए भूमि पर कब्जा करने के अपने सामान्य तरीके से पार्क क्षेत्र के भीतर एक मस्जिद बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कट्टरपंथियों और वक्फ बोर्ड के संरक्षण में कुछ कृत्रिम मजारें (कब्र यार्ड) बनाई गई हैं।” इस बीच पार्क के जिमखाना क्लब से अवैध कब्जा हटवा दिया गया है। अधिकारियों ने जिमखाना को खाली करवाकर उसे खेल विभाग को सौंप दिया है।