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‘यूपी पुलिस की गाड़ी में नहीं जाऊँगा’: लखनऊ एयरपोर्ट पर ड्रामे के बाद दूसरे रास्ते से लखीमपुर खीरी निकले राहुल गाँधी, देखें वीडियो

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पर कॉन्ग्रेस, सपा सहित सहित सभी विपक्षी दलों द्वारा जबरदस्त राजनीति हो रही है। यूपी में पार्टी में नई जान फूँकने में लगी कॉन्ग्रेस इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की घेराबंदी में जुट गई है। जिसका परिणाम यह हुआ है कि लखीमपुर खीरी जाने का परमिशन मिलने के बाद भी राहुल गाँधी लखनऊ एयरपोर्ट पर धरने पर बैठ गए हैं। माहौल गरमाता हुआ देखकर अपनी जिद पर अड़े राहुल गाँधी फिलहाल खुद की गाड़ी और अपनी शर्तों पर लखीमपुर के लिए रवाना हो गए हैं।

हालाँकि उन्हें सीतापुर होते हुए जाना था लेकिन अभी खबर आ रही है कि यूपी प्रशासन को हलकान करने के लिए उन्होंने कोई दूसरा रुट ले लिया है। यूपी पुलिस लगातार उनके साथ बनी हुई है क्योंकि मसला सुरक्षा व्यवस्था का भी है।

दरअसल खबर है कि यूपी पुलिस उन्हें अपने वाहन से सीतापुर ले जाना चाहती है, जबकि कॉन्ग्रेस नेता की माँग है कि वे अपने वाहन पर ही सीतापुर और फिर वहाँ से लखीमपुर खीरी जाएँगे। इसी मसले पर नया ड्रामा क्रिएट करते हुए राहुल एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गए थे।

वहीं लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए 8 लोगों के परिजनों को पंजाब और छत्तीसगढ़ सरकार ने 50-50 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की है।

छ्त्तीसगढ के सीएम भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लखनऊ एयरपोर्ट पहुँचते ही इसका ऐलान किया है।

बता दें कि यूपी सरकार ने विपक्ष के नेताओं को लखीमपुर जाने की इजाजत दे दी है। प्रियंका गाँधी, राहुल समेत कॉन्ग्रेस के पाँच नेताओं को लखीमपुर जाने की इजाजत मिली है। इसमें छ्त्तीसगढ के सीएम भूपेश बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सचिन पायलट शामिल हैं।

वहीं सीतापुर की अस्थाई जेल में बंद प्रियंका गाँधी वाड्रा को यूपी सरकार ने रिहा कर दिया है। खबर थी कि राहुल गाँधी के सीतापुर पहुँचते ही प्रियंका उनके साथ लखीमपुर जाएँगी। लेकिन अब कॉन्ग्रेस की सियासत ने इस मामले में नया मोड़ ले लिया है और लखनऊ एयरपोर्ट पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि हम कोई कानून नहीं तोड़ रहे हैं। हम तो प्रियंका गाँधी और लखीमपुर के किसानों से मिलने जाना चाहते हैं। उनसे मिलकर उनके आँसू पोंछना चाहते हैं। इसके लिए हमको बार-बार रोका गया है। मैं अधिकारियों से आग्रह कर रहा कि हमको जाने दें।

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी की घटना पर एडीजी (क़ानून-व्यवस्था), उत्तर प्रदेश प्रशांत कुमार ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी कीमत पर दोषियों को बख्शा न जाए और पूरे पारदर्शी तरीक से कार्रवाई की जाए। प्रदेश सरकार ने अब 5-5 के समूह में लोगों को लखीमपुर खीरी जाने की अनु‍मति दे दी है। दरअसल, राज्‍य सरकार ने कानून व्‍यवस्‍था कायम रखने के लिए पाबंदी लगाई थी, किसी आंदोलन को रोकने के लिए नहीं। लेकिन अब जो शख्‍स वहाँ जाना चाहता है, वो जा सकता है।

‘लावारिस लाश तिरछी पड़ी थी, सीधा किया तो वो मेरा बेटा ही था’: पत्रकार रमन कश्यप के पिता ने दी घटना वाले दिन की जानकारी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसान प्रदर्शनकारी और भारतीय जनता पार्टी के नेता व कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर मीडिया में हर रोज अलग-अलग दावे हो रहे हैं। किसी में कहा जा रहा है कि पहले प्रदर्शनकारियों ने गाड़ी पर हमला किया, जिससे गाड़ी अनियंत्रित हो गई तो कोई कह रहा है कि वाहनों को जानबूझकर किसानों पर चढ़ाया गया। इन सबके बीच सच यह है कि इस हिंसक झड़प के कारण 8 लोगों की जान चली गई, जिसमें एक नाम पत्रकार रमन कश्यप का भी है।

रमन न तो भाजपा से थे और न ही किसान प्रदर्शन का हिस्सा। फिर भी उन्हें उस मनहूस दिन की बलि चढ़ना पड़ा। इसकी वजह बस ये है कि पत्रकार होने के नाते वह वहाँ अपना काम करने गए थे। न उनको मालूम था कि स्थिति ऐसी भयावह हो सकती है और न ही उनके घरवालों को अंदाजा था कि काम पर निकले रमन अब कभी नहीं लौटेंगे। इस हिंसा ने 12 साल की एक बेटी और ढाई साल के बेटे के सिर से पिता के साए को छीन लिया है। वहीं उनके पीछे रह गई हैं कि उनकी रोती-बिलखती पत्नी, माता-पिता और खेती करने वाले दो छोटे भाई- पवन कश्यप और रजत कश्यप।

रमन कश्यप के पिता और उनके बच्चों की तस्वीर

रमन कश्यप के पिता राम दुलारे से ऑपइंडिया की बात

रमन के साथ जो अनहोनी हुई, उसे लेकर ऑपइंडिया ने उनके पिता राम दुलारे कश्यप से बात की। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन प्रदेश उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का एक कार्यक्रम होने वाला था और दूसरी ओर किसान काले झंडे दिखा रहे थे। यही सब देखते हुए निंघासन के रहने वाले रमन 12 बजे तैयार होकर अपने काम पर (कवरेज करने) गए थे। मगर, 4 बजे के करीब उनके छोटे बेटों (जो नैनिताल से लौट रहे थे) का उन्हें फोन आया और पता चला कि रमन का फोन स्विच ऑफ आ रहा है।

बाद में मालूम हुआ कि लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा में 4 किसानों की मृत्यु हो गई है और रमन का कुछ पता ही नहीं है। राम दुलारे बताते हैं कि पूरा वाकया (हिंसा) दोपहर 3 से 3:30 बजे का है और उनको रात के 3 बजे जाकर पता चला कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। वह कहते हैं कि उनके बेटे को 6:30 बजे के करीब सीधे लखीमपुर खीरी पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। उन्हें न तो तिकोनिया में और न ही निंघासन में इलाज मिला। अगर कहीं भी थोड़ी कोशिश की जाती तो रमन जिंदा होते।

पिता के अनुसार, “रमन के शव को सीधे लखीमपुर खीरी भिजवाया गया। बीच में अस्पताल थे लेकिन वहाँ नहीं दिखाया गया। हमने शव देखा था इतनी भी चोट नहीं थी। एक टक्कर का निशान था, थोड़ी रगड़ थी, हाथ-पाँव की खाल छिली थी और सड़क का तारकोल लग गया था। इतने सारे पत्रकार लोग यहाँ से गए थे साथ में, किसी ने न तो कुछ बताया और न ही पूछा कि तुम्हारा बेटा आया या नहीं। 3 बजे जाकर तिकोनिया कोतवाल ने मेरे बेटे के दोस्त को फोन किया और कहा कि एक बॉडी की शिनाख्त नहीं हो पाई है जाकर पहचान लो।”

रमन कश्यप और लखीमपुर खीरी हिंसा की तस्वीर (साभार: आजतक)

राम दुलारे सारी घटना को बताते हुए भावुक होते हैं और कहते हैं, “दिन के तीन बजे की घटना पर ये लोग रात के तीन बजे फोन करके बताए। 12 घंटे बाद। हम लोग पहुँचे तो हमें मॉर्चरी ले जाया गया। वहाँ दरवाजा खुला तो एक लावारिस लाश पड़ी थी। तीन शव के पोस्टमॉर्टम हो गए थे। मेरा बेटा तिरछा हुआ पड़ा था। मैंने कपड़े देखे और जब उसे सीधा किया तो देखा वो मेरा ही बेटा मरा पड़ा था। (पिता ने सिसकते हुए कहा) अगर उसको कहीं दिखाया गया होता तो हो सकता है वो बच जाता है।”

प्रशासन की ओर से मिले समर्थन पर राम दुलारे कहते हैं कि जब चौराहे पर वह लोग और उनके बेटे के दोस्त इकट्ठा हुए तो एसडीएम ने आकर उनसे कहा कि वो आश्वासन देते हैं कि जो मदद मृत किसानों के परिवार को दी जाएगी, वो उनके परिवार को भी मिलेगी। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से घोषणा हुई कि मृतकों के घरवालों को 45-45 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर और एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस पर एसडीएम निंघासन ने उन्हें फिर कहा कि जितनी अधिक मदद होगी, इसके अतिरिक्त उसमें भी वो रमन के परिवार का साथ देंगे।

पत्रकार रमन कश्यप (परिवार द्वारा साझा की गई तस्वीर)

अपने पत्रकार बेटे की मृत्यु के बाद राम दुलारे माँग करते हैं कि सरकार पहले तो दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करे और दूसरा सरकार कोई ऐसा कानून लाए कि उनके बेटे जैसे लोग यानी कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। वो नहीं चाहते कि जो भी रमन के साथ हुआ, वो दोबारा किसी के साथ हो।

राम दुलारे ये भी जानकारी देते हैं कि उन्हें उनके बेटे का फोन मिल गया, जिसमें उनके द्वारा कवर की गई सारी वीडियोज हैं। इसमें दिख रहा है कि किसान प्रदर्शन कर रहे थे, काले झंडे दिखा रहे थे और गाड़ियाँ आ रही थीं। वह पूछते हैं कि इतनी भीड़ होने के बावजूद गाड़ियों को इतनी तेज आने की क्या जरूरत थी। उनके मुताबिक रमन को फॉर्च्यूनर गाड़ी से टक्कर लगी थी जबकि किसान प्रदर्शनकारी थार की चपेट में आए थे।

राम दुलारे यह भी स्पष्ट करते हैं कि उन्होंने अभी ऐसी कोई वीडियो नहीं देखी है, जिसमें गाड़ियों पर हमला होता दिखा हो, इसलिए वह इस बारे में नहीं जानते हैं।

बता दें कि थार से निकल कर अपनी जान बचाने वाले बीजेपी नेता सुमित जायसवाल का कहना है कि जब वो लोग रास्ते से जा रहे थे तो सैंकड़ों की भीड़ ने उन्हें घेरा और धारधार हथियारों के साथ उन पर हमला किया था। इसके बाद ड्राइवर को चोट आई और गाड़ी अनियंत्रित हो गई। उनके मुताबिक शायद इसी दौरान गाड़ी के आगे दो तीन लोग आ गए।

बच्चियों के साथ ईसा मसीह वाले क्रॉस से रेप, बच्चों को सेक्स के लिए मजबूर: चर्च में नन-पादरियों ने किया 3 लाख+ यौन शोषण

बर्नार्ड प्रीनैट नाम का एक पादरी था। मरा नहीं है, पादरी की पदवी छीन ली गई है। फिलहाल जेल में है। नाबालिग लड़कों के साथ यौन शोषण करता था। कोर्ट में उसने खुद माना कि दशकों तक उसने चर्च के भीतर 75+ लड़कों का यौन उत्पीड़न किया है।

यह आम खबर है। हर समाज में कोई न कोई अपराधी होता है। अब खास खबर। जब बर्नार्ड प्रीनैट (Bernard Preynat) पकड़ाया और दोषी पाया गया, उसके बाद की। एक स्वतंत्र आयोग ने बर्नार्ड प्रीनैट जैसे को अकेला नहीं माना। उसने जाँच की। जाँच की रिपोर्ट आई तो पता चला कि साल 1950 के बाद से लेकर 2020 तक चर्च के भीतर पादरी, अधिकारी व अन्य लोगों ने मिलकर लगभग 3 लाख 30 हजार बच्चों का यौन शोषण किया है।

इतनी बड़ी संख्या को सुन कर चौंक गए हों तो दिल थामिए। बच्चे-बच्चियों के साथ चर्च के भीतर क्या-क्या होता था, किन-किन तरीकों से रेप किया जाता था, जरा उसे भी जान लीजिए। क्या सिर्फ पादरी और अधिकारी (मतलब मर्द लोग) ही करते थे यौन शोषण या महिला पादरी (इन्हें नन कहा जाता है) भी शामिल थीं इस गैंग में? अगर नन भी रेप करती थीं, तो उनका तरीका क्या था?

2500 पन्नों की रिपोर्ट पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि महिला पादरी (नन) बच्चियों का रेप करने के लिए क्रूस (क्रॉस, जिस पर ईसा मसीह भी चिपके हों) का इस्तेमाल करती थी। चर्च में रहने वाले नाबालिग लड़कों को वो खुद के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर करती थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यौन शोषण के शिकार हुए बच्चे-बच्चियों में से 80% की उम्र 10 से 13 साल के बीच थी। मतलब 2 लाख 64 हजार नाबालिगों का यौन शोषण 10 से 13 की उम्र में किया गया।

क्या होता था ननों-पादरियों का खौफ चर्च के भीतर, जानना हो तो पढ़िए ‘मैरी’ को। ‘मैरी’ (बदला हुआ नाम) नाम की एक पीड़िता ने कोर्ट में गवाही दी कि उसके साथ 11 साल की उम्र में दुर्व्यवहार किया गया था। जब उसने अपने माता-पिता से इसकी शिकायत की तो उन्होंने विश्वास करने से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि एक नन ऐसा काम कर ही नहीं सकती है। अफसोस यह कि ‘मैरी’ के साथ यह दुर्व्यवहार एक और साल तक जारी रहा। ‘मैरी’ बताती हैं,

“मैं उस नन के लिए एक खिलौना थी… वह अच्छी तरह जानती थी कि उसका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। उसने कोई भी जोखिम नहीं उठाया है।”

बच्ची और नन वाली इस खौफनाक कहानी से आगे बढ़ते हैं। अब कहानी ‘ओलिवर’ (बदला हुआ नाम) की। इनके साथ 13 साल की उम्र में वो सब हुआ, जिससे इनका भरोसा टूट गया – सदा के लिए। ‘ओलिवर’ बताते हैं:

“उस रात से पहले पादरी मेरे लिए वो हुआ करता था, जो कभी नुकसान नहीं पहुँचा सकता है। उसके बिस्तर पर आधी रात को जब मेरी नींद खुली, खुद को अधनंगा पाया और वो मुझे जगह-जगह छू रहा था… तो मैं टूट गया और यह कई सालों तक चलता रहा।”

हम सब जब इतनी बड़ी संख्या में किसी धर्म स्थान के अंदर हुए संस्थागत यौन उत्पीड़न की खबर पढ़ रहे हैं, तो उससे कुछ देर पहले – “पीड़ितों के लिए दुख, बोल कर पोल खोलने के साहस के लिए आभार” – पोप ने दुख जाहिर कर दिया है।

लखीमपुर खीरी में गोली लगने से किसान की मौत नहीं, 2 बार पोस्टमॉर्टम; फिर भी 26 जनवरी वाली हिंसा की तरह प्रोपेगेंडा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए कथित किसान की दूसरी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी आ गई है। बहराइच के जिलाधिकारी दिनेश चंद्रा ने बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को बताया कि लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए कथित किसान की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली लगने की बात सामने नहीं आई है।

इससे पहले मृतक के परिवार ने दावा किया था कि गोली लगने से ‘किसान’ की मौत हुई है। इसके साथ ही परिवार ने पहली पोस्टमार्टम को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें मौत का कारण चोट, सदमा और ब्रेन हेमरेज बताया गया था। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए उसका दोबारा से पोस्टमार्टम कराने की माँग की थी। परिवार के अनुरोध के बाद सरकार ने शव का दूसरी बार परीक्षण कराने का आदेश दिया था। इसके लिए विशेषज्ञ टीम लखनऊ से भेजी गई थी।

डीएम चंद्रा ने कहा, “लखीमपुर घटना में मरने वाले एक व्यक्ति के परिवार ने पोस्टमार्टम पर संदेह जताया था और दोबारा पोस्टमार्टम का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने अनुपालन किया और यह सुनिश्चित करने के लिए फिर से पोस्टमॉर्टम किया गया कि यह निष्पक्ष और पारदर्शी है।”

उन्होंने आगे बताया, “पोस्टमॉर्टम की निगरानी के लिए डॉक्टरों का एक विशेषज्ञ पैनल लखनऊ से आया था, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेशों के अनुपालन में भेजा गया था।”

कथित तौर पर मृतक का परिवार अब ऑटोप्सी रिपोर्ट से संतुष्ट है। परिवार के एक सदस्य ने इसको लेकर कहा, “मुझे अब कोई शिकायत नहीं है। पोस्टमार्टम के लिए लखनऊ से टीम आई थी। हम इसे स्वीकार करेंगे। कुछ अनुष्ठानों के बाद दाह संस्कार किया जाएगा।”

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को फेक बताने पर तुले किसान संगठन

मृतक किसान के परिवार के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मानने से इनकार कर रहा है। संगठन ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि प्रदर्शन कर रहे किसान की मौत गोली लगने से ही हुई है।

एसकेएम ने कहा, “हमने अपने पहले के बयान को कायम हैं कि एक प्रदर्शनकारी किसान को मंत्री के बेटे की टीम ने गोली मारी थी।” भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने भी दावा किया, “सुखविंदर की गोली मारकर हत्या की गई। हालाँकि, पहले पोस्टमॉर्टम में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। उनका पोस्टमार्टम एम्स, बीएचयू, पीजीआई के डॉक्टरों की एक टीम और बहराइच में एसकेएम प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक वरिष्ठ फोरेंसिक डॉक्टर द्वारा किया जाए।”

गणतंत्र दिवस पर हुई घटना

लखीमपुर खीरी में हुई घटना ने गणतंत्र दिवस पर हुई घटना की यादें ताजा कर दी हैं। वामपंथियों ने इस घटना में भी वही कार्ड खेला है कि किसानों को ‘फासीवादी सरकार’ द्वारा गोली मार दी जा रही है।

इसी तरह से 26 जनवरी के दंगों के दौरान वामपंथियों ने दिल्ली पुलिस को एक प्रदर्शनकारी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, जबकि ट्रैक्टर के पलटने के कारण उसने अपनी जान गंवा दी थी। इसमें दावा किया गया था कि प्रदर्शनकारी को पुलिस ने गोली मार दी थी। उस घटना में कई पत्रकारों ने झूठ को हवा दी थी। दरअसल मृतक व्यक्ति ट्रैक्टर से स्टंट कर रहा था और उसी दौरान ट्रैक्टर पलटने से उसकी मौत हो गई।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि व्यक्ति की मौत एक दुर्घटना के कारण हुई थी, न कि गोली लगने से। ऑटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक्टर रैली के दौरान दंगाई की मौत हो गई थी, जैसा कि घटना के वायरल वीडियो में देखा गया था।

इसके बावजूद वामपंथी तंत्र तथाकथित किसान की मौत पर फर्जी खबरें फैलाता रहा। द वायर ने लिखा, “ऑटोप्सी करने वाले डॉक्टर ने मुझे बताया कि उसने बुलेट इंजरी को देखा है, लेकिन उसके हाथ बंधे हुए हैं।” एक लेख में मृतक के दादा ने आरोप लगाया था कि प्रशासन उसकी मौत की असली वजह छुपा रहा है।

राहुल और प्रियंका को लखीमपुर जाने की मिली इजाजत, लखनऊ में लगे पोस्टर- ‘सिख दंगों के जिम्मेदारों से नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति’

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर यूपी में पार्टी में जान फूँकने में लगी कॉन्ग्रेस लगातार भाजपा और योगी सरकार पर हमलावर है। लखीमपुर खीरी जा रहीं महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने के बाद अब आज (6 अक्टूबर, 2021) कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ वहाँ जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव आरके तिवारी और पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल को पत्र लिखकर इसके लिए अनुमति माँगी है। हालाँकि सरकार ने राहुल गाँधी को लखीमपुर जाने की पहले अनुमति नहीं दी थी लेकिन अब शासन द्वारा परमिशन दे दिया गया है।

यूपी सरकार के गृह विभाग के हवाले से ANI ने बताया है कि राज्य सरकार ने कॉन्ग्रेस नेताओं राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और 3 अन्य लोगों को लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी है।

लखीमपुर खीरी की घटना पर प्रशांत कुमार, ADG (क़ानून-व्यवस्था) ने बताया कि राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी कीमत पर दोषियों को बख्शा न जाए और पूरे पारदर्शी तरीक से कार्रवाई की जाए। वहीं उन्होंने आगे इस बात की पुष्टि की है कि अब लखीमपुर खीरी में 5-5 के ग्रुप में लोगों को जाने की अनुमति दे दी गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य हर हाल में शांति व्यवस्था बनाए रखना है।

बता दें की लखीमपुर जाने की तैयारी कर रहे कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में राहुल गाँधी के अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह ‘चन्नी’ और केसी वेणुगोपाल शामिल हैं हालाँकि अब प्रियंका गाँधी के साथ कुल पाँच नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति यूपी सरकार की तरफ से मिल चुकी है। जबकि मंगलवार (5 अक्टूबर, 2021) को दिल्ली से लखनऊ आए भूपेश बघेल को पुलिस ने एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया था और उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा। वहीं राहुल के लखनऊ पहुँचने से पहले ही कई जगह पोस्टर लगे हैं जिसमें राहुल और प्रियंका गाँधी के लखीमपुर जाकर सिख परिवारों व मारे गए किसानों के प्रति संवेदना व्यक्त करने को फर्जी सहानुभूति बताया गया है।

लगाए गए पोस्टर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरदार त्रिलोचन सिंह और सटल सिंह मीत की तरफ से लगाए गए इन पोस्टर्स में 1984 के सिख दंगों का जिक्र करते हुए कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधियों का विरोध शुरू हो गया है। पोस्टर में लिखा है, “1984 के सिख दंगों के जिम्मेदारों से लखीमपुर खीरी के किसानों को फर्जी सहानुभूति नहीं चाहिए।” वहीं दूसरे पोस्टर में लिखा है, “1984 सिख दंगों के जिम्मेदार सिखों के जख्मों पर नमक न डालें।”

लगाए गए पोस्टर

वहीं इन विरोधों को दरकिनार करते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्र में लिखा है कि राहुल गाँधी की अगुआई में कॉन्ग्रेस का 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को लखीमपुर खीरी में शोक संतप्त परिवारों से मिलकर अपनी शोक संवेदनाएँ व्यक्त करने के साथ ही वहाँ की घटना के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता है।

हालाँकि राहुल गाँधी के लखनऊ आने से पहले ही यूपी सरकार ने कहा कि माहौल बिगाड़ने नहीं देंगे। सरकार की ओर से प्रवक्ता व एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने राहुल गाँधी के लखनऊ दौरे को लेकर कहा कि लखीमपुर खीरी आपको जाना है तो कुछ दिन बाद चले जाइएगा। आप दुखी परिवारों से मिलें, इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन माहौल बिगाड़ने के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि हम चीजों को नियंत्रण में रखने के लिए काम कर रहे हैं और जल्द ही राजनीतिक नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति देंगे, लेकिन फिलहाल जो जरूरी है वही किया जा रहा है। योगी सरकार दोषियों को गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की माँगे मान ली हैं। मृतकाश्रित को मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जा रही है।

वहीं रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गाँधी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद लखीमपुर आने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट के लिए निकल चुके हैं। राहुल के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी आ रहे हैं। जबकि यूपी सरकार ने राहुल को लखीमपुर जाने की अनुमति नहीं दी है। बावजूद इसके कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता उन्हें रिसीव करने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट पर पहुँच रहे हैं।

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी हिंसा पर आज राहुल गाँधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र व योगी सरकार पर निशाना साधा। राहुल गाँधी ने कहा कि आज हम दो मुख्यमंत्रियों के साथ उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जाएँगे और वहाँ की स्थिति को समझेंगे और किसानों के परिवारों का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा प्रियंका को नजरबंद किया गया है, लेकिन यह किसानों से जुड़ा मामला है। किसानों को जीप से कुचला जा रहा है, उनकी हत्या की जा रही है, इस घटना में एक केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे का नाम सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री लखनऊ गए लेकिन लखीमपुर खीरी नहीं गए। यह किसानों पर सुनियोजित हमला है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस मुद्दे को उठाने की आपकी जिम्मेदारी है, लेकिन जब हम सवाल पूछते हैं, इस मुद्दे को उठाते हैं, तो आप कहते हैं कि हम राजनीति कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने आगे कहा, “लखीमपुर खीरी में धारा 144 लागू है, जो केवल पाँच लोगों को रोकती है। हम तीन लोग जा रहे हैं। हमने उनको चिट्ठी लिख दिया है। विपक्ष का काम दबाव बनाने का है ताकि कार्रवाई हो। पूरे देश के किसानों पर योजना बद्ध तरीके से हमला हो रहा है। जो किसानों का हक है उनसे छीना जा रहा है। यह चोरी खुलेआम सबके सामने हो रही है। इसीलिए देश के किसान दिल्ली के बाहर बैठे हैं।”

राहुल गाँधी की जिद को देखते हुए लखनऊ के पुलिस आयुक्त ने कहा था कि सरकार ने राहुल गाँधी को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अगर वह लखनऊ आते हैं, तो हम उनसे हवाई अड्डे पर लखीमपुर खीरी और सीतापुर नहीं जाने का अनुरोध करेंगे। लखीमपुर और सीतापुर के एसपी और डीएम ने हमें कानून-व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर उन्हें आने से रोकने का आग्रह किया है। जिस पर बाद में शासन द्वारा जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

बता दें कि लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद अब यूपी पुलिस शांति-व्यवस्था कायम कराने में जुटी है। रिपोर्ट के अनुसार आइजी लखनऊ रेंज लक्ष्मी सिंह ने घटना को लेकर दर्ज कराए गए मुकदमों की निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण विवेचना कराने के लिए एएसपी लखीमपुर खीरी अरुण प्रताप सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। समिति में सीओ व इंस्पेक्टर स्तर के अन्य अधिकारी भी शामिल हैं, जिनके पर्यवेक्षण में विवेचना होगी। वहीं सोमवार को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। तो मंगलवार को सुमित जायसवाल की ओर से अज्ञात लोगों के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दोनों ही मुकदमों की गहनता से छानबीन कराई जा रही है।

शाहरुख-गौरी के करीबी कुणाल जानी ने NCB को दी ड्रग्स पार्टी की टिप? कस्टडी में राष्ट्रीय हिंदू रेस्टोरेंट का खाना खा रहे आर्यन खान

मुंबई में कॉर्डेलिया क्रूज पर हाई-प्रोफाइल ड्रग्स पार्टी की जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को कैसे मिली? एजेंसी को कहाँ से इसके पुख्ता सुराग मिले, जिसके बाद उसने समंदर में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया? इस तरह के कई सवालों के जवाब लोग जानना चाहते हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो होटल कारोबारी कुणाल जानी से एनसीबी को इस पार्टी की खबर हाथ लगी थी। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कुणाल के फोन की जाँच के दौरान इस पार्टी का सुराग मिला था। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद आमने आए ड्रग्स केस में कुणाल को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह एनसीबी की कस्टडी में है।

कुणाल के अभिनेता शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान से बेहद करीबी रिश्ते बताए जाते हैं। इसके अलावा अन्य लोगों से भी उसके बॉलीवुड में अच्छे कनेक्शन हैं। उसने बिपाशा बासु, करण सिंह ग्रोवर जैसे सितारों के साथ इंस्टाग्राम पर कई फोटो भी शेयर कर रखे हैं।

मुंबई की एक अदालत ने मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) को कुणाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। NCB ने उसे 30 सितंबर को खार इलाके से गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि उसी ने एनसीबी को पूछताछ में क्रूज पर ड्रग्स पार्टी की जानकारी दी।

इसके बाद एनसीबी की टीम यात्री बनकर क्रूज शिप पर सवार हुई और बीच समंदर में पहुँची थी। मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई तट से दूर कॉर्डेलिया क्रूज में रेव पार्टी का भंडाफोड़ करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक प्लान बनाया था। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के लिए NCB ने अपने 25 अधिकारियों को काम पर लगाया था। उनमें से 6 अधिकारी पार्टी के कपड़े पहनकर क्रूज शिप पर चढ़े थे। इस दौरान उन्हें आर्यन काफी घबराए हुए लग रहे थे, जिससे एनसीबी के अधिकारियों का शक और बढ़ गया कि समंदर के बीच ये आरोपित ड्रग्स लेने की तैयारी कर रहे हैं। जैसे-जैसे अधिकारी इस मामले की तह तक गए उन्हें पता चला कि ड्रग्स लेने की तैयारी कॉर्डेलिया क्रूज़ पर की जा रही है। NCB के अधिकारियों ने क्रूज पर सवार होने के लिए 80-80 हजार रुपए के टिकट भी लिए थे।

फिलहाल शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान 7 अक्टूबर 2021 तक के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्यन को जाँच एजेंसी ने विज्ञान की किताब पढ़ने को दी हैं, जिसकी माँग उन्होंने खुद की थी। इसके अलावा आर्यन खान और अन्य आरोपितों को एनसीबी मुख्यालय के पास राष्ट्रीय हिंदू रेस्तरां में रोजाना खाना खिलाया जा रहा है।

बता दें कि शनिवार को मुंबई के समुद्री क्रूज पर चल रही एक ड्रग्स पार्टी में एनसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किए और 8 लोगों को हिरासत में लिया था। यह जहाज मुंबई से गोवा जा रहा था। एक पुख्ता टिप मिलने के बाद मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और अन्य एनसीबी अधिकारी जहाज में आम यात्रियों की तरह सवार हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

बीवी से हो गया था तलाक, मारने के लिए बन गया मानव बम: सिगरेट जलाई और भरे बाजार में लिपट दबा दिया ट्रिगर… धमाके में उड़े

पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्य मिजोरम से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ अपनी पूर्व पत्नी की हत्या करने के लिए एक व्यक्ति मानव बम बन गया। धमाके में दोनों की मौत हो गई। घटना मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) की है।

रिपोर्ट के अनुसार लुंगलेई शहर में हुए इस धमाके में 61 साल की तलांग थियांगलिमि की मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य 62 साल के रोहमिन्गलियाना ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। शुरुआत में लगा कि किसी उग्रवादी संगठन ने इस घटना को अंजाम दिया है। प्रशासनिक अमला और सुरक्षा एजेंसियाँ भी अलर्ट हो गईं। बाद में पता चला कि रोहमिन्गलियाना ने ही इस धमाके को अंजाम दिया और थियांगलिमि उसकी पूर्व पत्नी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना लुंगलेई जिले के चन्मारी लेंग स्थित हाई पॉवर कमेटी के दफ्तर के पास हुई। जिले के एसपी रेक्स वनछावन्ग ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वारदात में मरने वाले दोनों बुजुर्ग थे। रोहमिन्गलियाना और थियांगलिमि का एक साल पहले ही तलाक हुआ था। आरोपित उसका दूसरा पति था।

चन्मारी लेंग बाजार में मृतक महिला की सब्जी की दुकान थी। पास में ही उसकी बेटी भी अपना स्टाल लगाती थी। घटना वाले दिन आरोपित महिला की सब्जी दुकान पर आया और उससे एक सिगरेट रोल कर देने को कहा। महिला ने आपत्ति जताई तो उसने खुद से ही सिगरेट जलाया और तबीयत खराब होने की बात कह महिला से लिपट गया। इसके बाद उसने बम का ट्रिगर दबाकर खुद को ब्लास्ट कर लिया।

पुलिस अधिकारी वनछावन्ग के मुताबिक, वारदात में जिलेटिन का इस्तेमाल किया गया था। घटना के बाद आरोपित को इलाज के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी का अलग होना मिजोरम में बहुत ही सामान्य है, लेकिन ऐसी वारदात असामान्य है।

गौरतलब है कि बीते सितंबर में मुंबई में शाहनवाज सैफी ने बीवी की हत्या उसके मुँह में एलपीजी गैस की पाइप डाल कर दी थी। बीवी की दर्द से तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इसके बाद वह अपनी 2 साल की बच्ची को लेकर फरार हो गया था। बाद में उसे मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से पकड़ा गया था।

योजनाओं ने कैसे बदले दिन PM मोदी को बता रही थी ललितपुर की बबीता, एडिटेड वीडियो से ‘खेला’ करते पकड़ी गई आप-कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (5 अक्टूबर, 2021) को लखनऊ में आजादी के अमृत महोत्सव से जुड़े कार्यक्रम में शिरकत की। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में ‘आवास योजना’ के 75,000 लाभार्थियों को डिजिटल रूप से घर की चाबी सौंपी। साथ ही लाभार्थियों से भी बातचीत की। इस बातचीत के एक हिस्से का इस्तेमाल सोशल मीडिया में पीएम मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार और यह बताने की कोशिश के लिए किया जा रहा है कि आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।

दरअसल पूरी बातचीत के एक हिस्से में एक लाभार्थी महिला ‘पीएम स्वनिधि योजना’ को लेकर पूछे जाने पर उसका लाभ मिलने से इनकार करती है। उसके बाद प्रधानमंत्री उसे बताते हैं कि कैसे वह इस योजना का लाभ पा सकती हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस 8 सेकंड का क्लिप शेयर कर इस तरह पेश कर रही है कि महिला ने लाभ मिलने से इनकार कर दिया और पीएम निरुत्तर रह गए।

आम आदमी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस क्लिप को शेयर कर लिखा गया, “इस वजह से पीएम मोदी ने कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की।”

इसी क्लिप को कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों ने भी शेयर किया। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया की राष्ट्रीय संयोजक हसीबा अमीन ने ट्वीट किया, “यह तब हुआ जब पीएम यूपी के लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। आप लोगों ने इसे स्क्रिप्टेड और कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन सच्चाई आखिरकार सामने आ जाती है।”

महिला से पीएम मोदी की बातचीत का पूरा वीडियो आप नीचे सुन सकते हैं। आप देख सकते हैं कि बातचीत के दौरान एक जगह महिला पीएम स्वनिधि योजना के तहत लाभ मिलने से इनकार करती है, लेकिन वह स्वीकार करती हैं कि कैसे उसके परिवार को सरकार की अन्य योजनाओं से लाभ हुआ है।

दरअसल पीएम ने तीन लाभार्थियों- आगरा के विमलेश, कानपुर के राम जानकी और ललितपुर की बबीता से बातचीत की। बबीता ने पीएम को बताया कि आवास के लिए उनके परिवार के बैंक खाते में सरकार से 2.5 लाख रुपए सीधे आए थे, जिसके कारण उनके पास पक्का घर है। इसके बाद प्रधानमंत्री बताते हैं कि कैसे जन-धन अकाउंट खोलने से लोगों को फायदा हुआ है और बिचौलिए जो सरकारी स्कीमों का पैसा खाते थे वह बंद हो गया है। इसके बाद उन्होंने बबीता से पूछा कि क्या उनके पति को पीएम स्वनिधि योजना से लाभ मिला है। बबीता के इनकार करने पर उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाते हैं कि कैसे वे इसका लाभ उठा सकते हैं।

बातचीत से साफ लग रहा है कि बबीता को इस योजना के बारे में जानकारी नहीं थी। इसके बाद उज्जवला सहित अन्य सामाजिक योजनाओं को लेकर पूछे जाने पर भी बबीता लाभ मिलने की बात स्वीकार करती है।

प्रियंका गाँधी खुद दुपट्टा में भर के ले गई थीं धूल, फिर झाड़ू लगाईं… फॉरेंसिक लैब की जाँच में 100% खुलासा

पखाना जाना, दातुन करना, घर की साफ-सफाई करना और नहाना… यह नित्य क्रिया में स्कूल में सिखाया जाता था। स्कूल सरकारी था, इसलिए नहा कर आए लड़के-लड़कियों से एक साथ सारी कक्षाओं और पूरे मैदान (स्कूल का अपना खेल मैदान था) तक को भी साफ करवाया जाता था… हर दिन। अब यह कल्चर शायद खत्म हो रहा है।

शायद क्यों? क्योंकि प्रियंका गाँधी झाड़ू लगाती हैं, धरती पर पैदा हुए नॉर्मल इंसान की तरह नॉर्मल काम करती हैं… लेकिन बवाल हो जाता है। पहला बवाल होता है कि झाड़ू क्यों लगानी पड़ी? वीडियो वायरल किया जाता है।

सुखदेव सर (हमारे स्कूल के हेडमास्टर, तब हेडमास्टर हुआ करते थे… अब स्तर गिरा/उठा के प्रभारी बना दिया गया है) वीडियो को देख कर दुखी हो जाते हैं। झाड़ू लगाने की शैली देखते ही सोशल मीडिया पर लिखते हैं – “जिस सरकार के लिए जीवन भर काम किया, उसकी पैदाइश को ही सही शिक्षा नहीं दे पाया।”

एंथनी गोंजालविस (सेंट मैरी फादर क्राइस्ट कॉन्वेंट स्कूल के प्रिंसिपल) ने सुखदेव सर की वॉल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। लिखा – “मेरे स्कूल में पढ़ी प्रियंका को झाड़ू कैसे लगाया जाए, यह सीखने की जरूरत नहीं। अगर वो चाहे तो पूरा झाड़ू खरीद सकती है। शाहरुख के बेटे की तरह पूरा क्रूज खरीद सकती है।”

खैर, शिक्षकों को प्रणाम बोल मैं कट लिया। दोनों देशी-विदेशी संस्कृति पर लड़ रहे थे, अपना वहाँ क्या काम? खबर बेच पेट पालता हूँ, उन्हीं खबरों में एक खबर आई – “प्रियंका के कमरे में कहाँ से आई धूल, क्‍यों लगानी पड़ी झाड़ू, हो रही जाँच“… खबर छाप दी गई लेकिन मेरे अंदर का रिपोर्टर जाग गया।

  1. VVIP के कमरे में धूल कहाँ से आ गई?
  2. किसने प्रियंका गाँधी तक झाड़ू पहुँचाई?
  3. झाड़ू पहुँचाने वाला सुरक्षा-व्यवस्था में भी तो सेंध कर सकता है?
  4. राज्य सरकार त्याग की मूर्ति गाँधी परिवार को लेकर इतनी बेरहम क्यों?

इन 4 सवालों को लेकर मैं पहुँच गया CFSL (Central Forensic Science Laboratory) ऑफिस। प्रियंका गाँधी की झाड़ू और उससे समेटे गए धूल इसी ऑफिस में जाँच के लिए भेजे गए थे। यहाँ के डायरेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर सब कुछ खोल कर रख दिया। उन्होंने जो बोला, उसका हर शब्द लिख दे रहा हूँ, पढ़िए:

“हमारे ऑफिस में प्रियंका गाँधी की झाड़ू और उससे समेटे गए धूल के अलावे उनका जूता और सेंपल के लिए उनका दुपट्टा भी भेजा गया था। कमरे के फर्श से उठाया गया धूल और उनके जूते में लगी मिट्टी-गोबर में कोई मैच नहीं है। आश्चर्य यह है कि झाड़ू से समेटे गए धूल और उनके दुपट्टे में पाए गए धूलकण का मैच 100% है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि कमरे में प्रियंका गाँधी खुद ही दुपट्टा भर कर धूल ले गई थीं।”

प्रियंका गाँधी खुद धूल क्यों ले जाएँगी? मेरे इस सवाल को राजनीतिक सवाल बोलते हुए CFSL डायरेक्टर ने जवाब देने से मना कर दिया।

पहले सवाल का उत्तर मिलते ही मैं भागा सवाल नंबर 2 और 3 के जवाब की ओर। इसके लिए मुझे जाना पड़ा ‘कैदी सुरक्षा संस्थान’ के डायरेक्टर के पास। उन्होंने भी शर्त वही रखी – नाम नहीं छापने की। फिर सब कुछ बता दिया, “नाभा जेल की तरह हमारे पास भी झाड़ू को लेकर लिखित निवेदन आया था। प्रियंका गाँधी ही नहीं बल्कि हमारे लिए हर नागरिक की तरह हर कैदी भी एक समान है। निवेदन करने की जिनकी औकात होगी, हम सबको कैदी नियमावली के तहत हर चीज मुहैया कराएँगे।”

चौथा सवाल विशुद्ध राजनीतिक था। जवाब की बिना उम्मीद किए ही मुँह उठाए पहुँच गया सत्ता पक्ष के पास। आश्चर्य यह कि उन्होंने तसल्लीपूर्वक जवाब दिया। सत्ता के प्रवक्ता ने कहा – “सरकार किसी को भी लेकर बेरहम नहीं है। लेकिन पेड़ गिरने का यह मतलब नहीं कि धरती भी काँपे ही… और हाँ, लाशों की राजनीति करने वालों को ‘त्याग की मूर्ति’ कहना बंद करे प्रेस… खुलेआम कौन जात हो पूछने वाले प्रेस को अंदर झाँकने की जरूरत है।”

चौथा खंभा को कोई ऐसे गरियाता है क्या? धंधा नहीं होता, पापी पेट का सवाल नहीं होता तो आज ही लात मार देता… EMI है, बच्चों का स्कूल फीस है, बीवी का लिपस्टिक है… कैसे कह दूँ कि TV देखना बंद कर दो!

क्या है पैंडोरा पेपर्स, लीक दस्तावेजों से क्या कुछ बदलेगा: शेल कंपनियों से लेकर टेक्स हेवन तक, जानिए सब कुछ

केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ डॉयरेक्ट टैक्सेज ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि 3 अक्टूबर को इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंटरनेशनल जर्नलिस्ट (ICIJ) द्वारा पैंडोरा पेपर्स के नाम से जारी किए गए दस्तावेजों के परिप्रेक्ष्य में सरकार उपयुक्त संस्थाओं और जाँच एजेंसियों के एक दल का गठन करेगी जो भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों द्वारा बाहर के देशों में जमा किए गए धन और संपत्ति संबंधी जाँच करेगा और कानून के अनुसार समुचित कार्रवाई करेगा। इसके लिए केंद्र सरकार अन्य देशों की सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध तरीकों से जमा किए गए धन के मामलों की समग्र जाँच और उसके अनुसार उचित कार्रवाई हो सके।

क्या है पैंडोरा पेपर्स?

पैंडोरा पेपर्स इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंटरनेशनल जर्नलिस्ट्स (ICIJ) द्वारा जारी किए गए दस्तावेज, डेटा, ई-मेल और रिकार्ड्स हैं जिनमें विश्व के विभिन्न देशों के नेताओं, उद्योगपतियों, व्यापारियों और अन्य विख्यात लोगों के कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य तरीकों से जमा किए धन और उससे बनाई गई सम्पत्तियों की सूची और उनसे सम्बंधित दस्तवेज हैं। इन दस्तावेजों को दुनिया भर के करीब 117 देशों के 600 पत्रकारों ने विभिन्न स्रोतों से हासिल किया है और उसे लगातार सार्वजनिक किया जा रहा है। हाल ही में जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार इनमें करीब 64 लाख दस्तावेज, 30 लाख दस्तावेजों की फोटोकॉपी, 10 लाख ई-मेल और 5 लाख स्प्रेड शीट्स हैं।

क्या है पैंडोरा पेपर्स में?

इन दस्तावेजों में दुनिया भर के देशों में विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों के स्वामित्व वाली सम्पत्तियों का लेखा-जोखा है जिन्हें कर चोरी, घूस या मनी लॉन्ड्रिंग से प्राप्त पैसे से शेल कंपनियों के जरिए खरीदा गया है। इन सम्पत्तियों का स्वामित्व विभिन्न देशों के नेताओं, उद्योगपतियों, सेलिब्रिटी और व्यापारियों के नाम है जिन्होंने कर चोरी, अवैध रूप से हासिल किए गए धन या अन्य साधनों से जुटाए गए और देश से बाहर रखे गए पैसे से खरीदा गया है।

अभी तक जारी दस्तावेजों में जो प्रमुख नाम सामने आए हैं उनमें कतर और जॉर्डन के शाह, इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, पकिस्तान के उद्योगपति, मंत्री और कुछ जनरल, केन्या के राष्ट्रपति और चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री का नाम प्रमुख हैं। भारत से अभी तक केवल कॉन्ग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री स्वर्गीय सतीश शर्मा का नाम आया है। साथ ही अन्य भारतीयों का नाम भी जल्द ही बाहर आने का अनुमान लगाया जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन मामले में कार्रवाई करने की घोषणा की है।

अभी तक 90 देशों के कम से कम 330 राजनेताओं के नाम सार्वजनिक हुए हैं।

क्या ऐसा पहली बार हो रहा है?

इस तरह के दस्तावेज और डेटा विभिन्न स्रोतों के माध्यम से समय-समय पर पहले भी लीक होते रहे हैं। साल 2013 में ऑफशोर लीक्स, 2016 में पनामा लीक्स और 2017 में पैराडाइज पेपर्स लीक्स इनमें प्रमुख हैं। साथ ही स्विट्ज़रलैंड और अन्य छोटे-छोटे देशों में रखे गए बैंक अकाउंट संबंधी विवरण समय-समय पर लीक होते रहे हैं।

देश से बाहर कैसे रखा जाता है धन?

देश में वैध या अवैध तरीके से कमाए गए धन को बाहर के देशों में रखने का तरीका दशकों से प्रचलित है। जिन देशों में शैल कंपनी बनाना सरल होता है, या जिन देशों में आयकर या अन्य कर लागू नहीं होता, वहाँ तमाम माध्यमों से धन ले जाकर शेल कंपनियाँ बनाई जाती हैं और फिर उनके माध्यम से संपत्तियाँ खरीदी जाती हैं। ऐसे देशों को आम बोलचाल की भाषा में टैक्स हेवन कहा जाता है। इन देशों में शेल कंपनियाँ बनाना इसलिए आसान होता है क्योंकि यहाँ ऐसी कंपनियों को बनाते समय वहाँ की सरकारों को बहुत अधिक सूचनाएँ नहीं देनी पड़ती और न ही सार्वजनिक करनी पड़ती हैं। साथ ही इन देशों में कंपनियों पर टैक्स या तो नहीं होता या फिर बहुत कम होता है। साथ ही कंपनियों के मालिकाना हक़ से संबंधी जानकारियाँ किसी के लिए भी प्राप्त करना आसान नहीं होता।

टैक्स हेवन में शेल कंपनियों को बनाने का मकसद क्या होता है?

ऐसी कम्पनियाँ बनाने के मुख्यतः दो उद्देश्य होते हैं, वैध या अवैध तरीके से कमाए गए धन को शेल कंपनियों के माध्यम से बैंकों में रखना या फिर उस धन से संपत्ति खरीदना। जैसे यदि कोई कंपनी या व्यक्ति किसी और देश में संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो वे इन शेल कंपनियों के माध्यम से खरीदते हैं। इससे लाभ यह होता है कि इन कंपनियों के मालिकाने से सम्बंधित जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं करनी पड़तीं। ऐसी कम्पनियाँ बनाने और चलाने वाले लोग होते हैं जो कंपनियों के मालिकों के लिए अपनी सेवा देने के लिए उपलब्ध रहते हैं। मालिकों के बारे में भी कम से कम सूचनाएँ देकर ऐसी कम्पनियाँ बनाई जा सकती हैं।

देश से बाहर कैसे ले जाया जाता है धन?

वैध या अवैध तरीके से कमाए गए धन को देश के बाहर ले जाने के कई साधन हैं। अवैध तरीके से कमाए गए धन को टैक्स हेवन में पहुँचाने का सबसे बड़ा साधन हवाला है। अपने देश में किसी हवाला ऑपरेटर को अपने देश की करेंसी कैश में देकर उसे किसी टैक्स हेवन में वहाँ की करेंसी में लेकर वहाँ शेल कम्पनियाँ बनाई जा सकती हैं। कम्पनियाँ एक्सपोर्ट की अंडर इन्वॉइसिंग के जरिए बाहर पैसा ले जाती हैं। जैसे यदि कोई कंपनी 100 रुपए का निर्यात कर रही है तो वो बिल केवल 90 रुपए का बनाएगी और बाकी के 10 रुपए उत्पाद के निर्यातक से उसके देश में कैश में ले लेगी। इस तरह से 10 रुपया उसे उस देश या किसी अन्य देश में मिल जाता है और वो उस 10 रुपए को टैक्स हेवन में बनी शेल कंपनी में रखकर उसे बैंक में जमा कर सकती है या फिर उससे कोई संपत्ति खरीद सकती है।

इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग जरिए पैसा बाहर ले जाया जाता है। इसमें किसी उत्पाद या सेवा के लिए बिल बनाया जाता है जो उत्पाद या सेवा कभी निर्यात या आयात होते ही नहीं। इस तरह से अनेक और साधन हैं जिनके जरिए वैध या अवैध धन इन टैक्स हेवन में ले जाकर शेल कंपनियों में रखा जाता है।

कौन से देश टैक्स हेवन हैं?

पहले केवल स्विट्ज़रलैंड को टैक्स हेवन की पहचान मिली थी, क्योंकि दुनिया भर के लोगों के लिए अवैध रूप से कमाए गए धन को वहाँ के बैंकों में रखना आसान था। कारण यह था कि वहाँ बैंक अकाउंट सम्बंधित जानकारियाँ देना अनिवार्य नहीं था। बाद में और छोटे-छोटे देशों ने स्विट्ज़रलैंड के इस मॉडल की नक़ल की और दुनिया भर की वैध या अवैध पूँजी अपने देश में लाने के साधन बना दिए। इनमें दुबई, सिंगापुर, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमन आइलैंड और अन्य देश हैं जिन्होंने पिछले लगभग ढाई दशकों में टैक्स हेवन के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

अलग-अलग देशों के लोगों ने सुविधानुसार अपने-अपने टैक्स हेवन चुन लिए हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि इन देशों में ऐसा धन रखने के लिए मिलने वाली सुविधाएँ और सेवाएँ देने वाले लोग कैसे हैं। ये देश अधिकतर दुनिया भर के नेताओं, उद्योगपतियों, सेलिब्रिटी वैगरह को ही नहीं बल्कि ड्रग ट्रेड और आतंकवाद से पैदा किए गए धन को भी अपने यहाँ शरण देते हैं।

एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष पूरी दुनिया से लगभग 600 बिलियन डॉलर को इन देशों में शरण मिलती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय प्रयास कितने गंभीर हैं?

संयुक्त राष्ट्र संघ, इंटरनेशनल मॉनेटरी फण्ड, वर्ल्ड बैंक और अन्य संस्थाएँ पिछले लगभग तीन दशक से इसे रोकने को लेकर गंभीर दिखाई देती हैं। पर विडंबना यह है कि कुछ टैक्स हेवन इसी समय में नए बने। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि अवैध धन को रोकने का यह अंतर्राष्ट्रीय प्रयास कितना गंभीर है। समस्या यह है कि इसे लेकर हर देश का कानून और हर देश की सोच एक सी नहीं है। FATF बनने के बावजूद दुनिया भर में कई देश ऐसे हैं जो उसके अनुसार काम करने का दावा तो करते हैं पर कानून बनाने या उन कानूनों को कड़ाई से लागू करने को लेकर गंभीर नहीं दिखते।

यही कारण है कि आए दिन नए-नए टैक्स हेवन बन रहे हैं। स्वतंत्र एजेंसियों और व्यक्तियों के प्रयासों से हर दो-तीन वर्षों में पनामा लीक्स या पैंडोरा लीक्स होते रहते हैं। लेकिन इनका महत्व तभी तक है जब विभिन्न देश की सरकारें इन पर कार्रवाई करेंगी।