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कवर्धा में फिर स्थापित किया गया भगवा महावीरी ध्वज, मुस्लिम भीड़ ने उखाड़ कर फेंक दिया था: बघेल सरकार के खिलाफ हिन्दुओं का प्रदर्शन

कवर्धा में जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू झंडे को उखाड़ के फेंक दिया था, वहाँ हिन्दू समाज ने फिर से भगवा महावीरी ध्वज स्थापित कर दिया है। चौराहे पर जहाँ से हिन्दू ध्वज को उखाड़ कर न सिर्फ फेंका गया था, बल्कि अपमानित भी किया गया था – वहाँ हिन्दू युवाओं ने चढ़ कर फिर से भगवा रंग का ध्वज स्थापित किया, जिस पर भगवान हनुमान जी की तस्वीर भी बनी हुई है। हिन्दुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी जगह हासिल की। वीडियो में देखें:

कवर्धा में हिन्दू ध्वज को पुनः स्थापित करते युवक

कबीरधाम के कवर्धा में हिन्दू संगठनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध भी किया। बड़ी संख्या में हिन्दू भगवा ध्वज लेकर पहुँचे और पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में उस घटना के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान ‘जैस श्री राम’ के नारों के साथ-साथ ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ जैसे राष्ट्रभक्ति नारे भी गूँजे। माँ विंध्यवासिनी देवी मंदिर में पूजा कर के लोगों ने विरोध प्रकट किया।

कवर्धा में शांतिपूर्ण ढंग से आक्रोश जताते हिन्दू

इस दौरान माँ कर्मा चौक पर बड़ी संख्या में हिन्दुओं का जुटान हुआ। जहाँ एक तरह भूपेश बघेल अपने राज्य को छोड़ कर लखनऊ एयरपोर्ट पर धरने पर बैठे हुए हैं और प्रियंका गाँधी की गिरफ़्तारी के खिलाफ वीडियो बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके राज्य में हिन्दू पुलिस-प्रशासन व सरकार से आक्रोशित है। भाजयुमो ने भी घटना की न्यायिक जाँच की माँग लिए बेमेतरा बस स्टैंड के पास विरोध प्रदर्शन किया।

कबीरधाम के कवर्धा में बड़ी संख्या में हिन्दुओं का जुटान

आरोप है कि मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू युवकों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था। कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर लोगों ने राज्य सरकार की आलोचना की। भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि इस घटना निंदा करते हुए कहा की उपद्रवियों के द्वारा हिंदू युवक के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार किया गया है, जिसका भाजपा विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसक भीड़ पर कार्रवाई की बजाए पुलिस ने उलटा हिन्दुओं पर ही लाठीचार्ज किया।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस पर उपद्रवियों को बचाने के लिए कानून-व्यवस्था के इस्तेमाल के आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस को सरकार का अधीन बताते हुए कहा कि घटना की न्यायिक जाँच में भी प्रशासन ना-नुकुर कर रहा है। महामंत्री विकासधर दीवान ने भी कानून-व्यवस्था को बदतर बताते हुए कहा कि सरकार अपराधियों के साथ है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए कहा कि लोहारा नाका चौक पर मुस्लिम भीड़ ने कहर बरपाया पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बताते चलें कि जब हिन्दू ध्वज उखाड़ के फेंका जा रहा था और भीड़ उसका अपमान कर रही थी, तब वहाँ कुछ पुलिसकर्मी भी तमाशबीन बन कर खड़े थे। मौके पर पुलिस के अतिरिक्त बल पहुँचे, जिसके बाद स्थिति को शांत किया गया। पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और मौके पर भारी संख्या में जवानों की तैनाती भी की गई है। तनाव इतना ज्यादा था कि आज शहर में सभी शैक्षिक संस्थानों को एक दिन के लिए बंद कर के रखा गया है।

भाजपा नेता व दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी इस घटना पर विरोध जताते हुए लिखा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, छत्तीसगढ़ के कवर्धा में जो भगवा झंडा हटाने, सांप्रदायिक तनाव का वीडियो और पुलिस द्वारा एकतरफा कार्यवाही की बातें अत्यंत चिंताजनक व गंभीर हैं। किसी एक पक्ष के साथ धर्म के आधार पर अन्याय नहीं होना चाहिए – आपको ये सुनिश्चित करना होगा।” कई अन्य हिन्दुओं ने भी इस घटना पर विरोध दर्ज कराया।

पहले छेड़छाड़ का आरोप लगाने की धमकी, अब उड़ता ड्रोन: प्रियंका गाँधी को यूपी में ‘पीड़ित’ दिखाने को कॉन्ग्रेस लाई एक और कथा

सियासी रोटी सेंकने की कोशिश में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश करने वाली कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गाँधी को करीब 30 घंटे हिरासत में रखने के बाद यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर उनके हर कदम की ‘निगरानी’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने की धमकी भी दी थी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रियंका गाँधी की निगरानी किए जाने का दावा उनके सचिव ने किया है। उनका दावा है कि उन्होंने सीतापुर में एक ड्रोन देखा, जहाँ कॉन्ग्रेस महासचिव को यूपी पुलिस ने PAC गेस्ट हाउस में रखा है। प्रियंका गाँधी रविवार की देर रात लखनऊ पहुँची थीं और ‘किसानों’ के साथ ‘एकजुटता’ व्यक्त करने के लिए लखीमपुर खीरी जा रही थीं। लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ की भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वफादार भूपेश बघेल ने भी एक वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “30 घंटे से अधिक से हिरासत में रखी गई प्रियंका गाँधी जी के कमरे के ऊपर ये ड्रोन किसका है और क्यों है? जवाब कौन देगा?”

उल्लेखनीय है कि लखीमपुर खीरी में राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति उत्पन्न होने पर वहाँ पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखना राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में जब प्रियंका गाँधी वाड्रा ने पुलिस के अनुरोध को अनसुना कर दिया और उल्टे पुलिस को धमकी दे डाली तो उनके पास उन्हें हिरासत में लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था। हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य अपने नेता की गिरफ्तारी को राजनीतिक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रियंका गाँधी ने इससे पहले लखनऊ की महिला पुलिस अधिकारी डॉ. अर्चना सिंह पर गला दबाने और धक्का देकर गिराने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वे दारापुरी की फैमिली से मिलने जा रही थी। पुलिस ने उन्हें बार-बार रोका। गाड़ी रोके जाने पर उन्होंने पैदल जाने की कोशिश की तो उन्हें घेर कर रोका और उनके गले पर हाथ लगाया, एक बार तो उन्हें गिरा भी दिया था। बाद में प्रियंका गाँधी गला दबाने की बात से पलट गईं।

प्रिंयका के इन आरोपों परअर्चना सिंह ने कहा था, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं उनकी (प्रियंका गाँधी) फ्लीट इंचार्ज थी। उनके साथ किसी ने भी अभद्रता नहीं की। मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी की। इस घटना के दौरान मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई थी।”

‘कार से निकल कर भाग रहे हैं मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा’: 10 सेकेंड के वायरल वीडियो का FACT CHECK

सोशल मीडिया पर लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का एक 10 सेकेंड का वीडियो शेयर कर के आरोप लगाया जा रहा है कि इसमें गाड़ी से निकल कर भाग रहा व्यक्ति केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष ‘मोनू’ हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के अलावा इसके समर्थकों व ‘गिरोह विशेष’ के पत्रकारों ने इस वीडियो को आगे बढ़ाया। आरोप लगाया गया कि किसानों को कुचलने के बाद आशीष मिश्रा गाड़ी से निकल कर भाग रहे हैं।

मणिपुर प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “ये एक आतंकवादी कृत्य है। अगर इस मामले में कोई अल्पसंख्यक समाज का व्यक्ति दोषी होता तो पूरी दुनिया की मीडिया इसे चलाती। लेकिन, यहाँ एक मंत्री का बेटा है। उस मंत्री को बरख़ास्त करो और उसके बेटे को गिरफ्तार करो।”

कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार आदेश रावल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “और भी सबूत चाहिए?”

यहाँ तक कि सेवानिवृत्त IAS सूर्य प्रताप सिंह ने भी इस वीडियो को आगे बढ़ाया। उन्होंने लिखा, “देखो, वो भागा जा रहा है। नया वीडियो।”

कॉन्ग्रेस के सचिव और उत्तर प्रदेश में पार्टी के इंचार्ज तौकीर आलम ने इस वीडियो को आगे बढ़ाते हुए लिखा, मंत्री जी अगर आपका बेटा वहाँ नहीं था, तो ये जो गाड़ी से भाग रहा है, वह कौन है? अजय मिश्रा। तेरी झूठ पकड़ी गयी। मोदी, लखीमपुर आओ। मोदी, अजय मिश्रा का इस्तीफा लो।”

लखीमपुर खीरी हिंसा: जानिए क्या है ‘आशीष मिश्रा’ बताए जाने वाले वीडियो की सच्चाई

अब हम आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। लखीमपुर के ही रहने वाले NBT के पत्रकार शिवम भट्ट ने स्पष्ट कहा है कि ये व्यक्ति आशीष मिश्रा नहीं हैं। NBT की खबर के अनुसार, अगर दोनों की कद-काठी की तुलना की जाए तो पता चलता है कि जहाँ आशीष का कद सामान्य है और थोड़े मोटे हैं, जबकि वीडियो में भागते दिख रहे व्यक्ति की लंबाई करीब 5 फीट 10 इंच है और इकहरा बदन है।

वीडियो में कार से निकल कर भाग रहे व्यक्ति आशीष मिश्रा नहीं, बल्कि उसकी पहचान सुमित जायसवाल के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। सुमित के बारे में बता दें कि वो स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता हैं और नगर पालिका परिषद लखीमपुर में शिवपुरी वॉर्ड से सभासद हैं। ये भी पता चला है कि घटना के दिन सुमित जायसवाल भी बनबीरपुर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित थे।

सुमित जायसवाल ने ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ के विरुद्ध FIR भी दर्ज करवाई है। उनकी ही तहरीर पर 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और बलवा सहित की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। उधर आशीष मिश्रा समेत 14 के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने कई वीडियो की जाँच करते हुए 24 लोगों को चिह्नित किया है। इन सब के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

दादी जैसी नाक बचे न बचे, बेलची मोमेंट जिंदाबाद… क्योंकि सेंटर और स्टेट की हाईवे-सड़कें भी साजिश का हिस्सा हैं

पॉलिटिकल टूरिज्म का दिन आ गया। नेत्री घटनास्थल पर पहुँच गई। घटनास्थल होते ही हैं पहुँचने के लिए। जहाँ न रहे वहाँ बनवा लिए जाते हैं। ऑर्डर देकर। टूलकिट के अनुसार। नेताजी और नेत्रीजी को पहुँचना है, एक ठो घटनास्थल तैयार करवा दो। क्या करें, थमी हुई राजनीतिक जीवन यात्रा को गति देनी है। तैयार हो गया तो नेत्री पहुँच गई। आस-पास सहायकों और लघु मानवों की फौज। ये साथ न रहे तो न जाने कितने लोगों को अपने जीवित रहने पर शंका होने लगे। 

सब साँसें रोक खड़े हैं। किसी कोने से आवाज़ आई- नाक तो सही में मिलती है। दूसरी ओर से आवाज़ आई- एकदम्मै! बस करम मिल जाएँ तो नाक बचे। पहुँची तो सामने पुलिस को खड़े पाया। पुलिस ने पूछा- कैसे पधारीं? 

वे बोली- फॉर्चूनर से। दरोगा बोला- वो तो ठीक देख रहे हैं कि फॉर्चूनर से आई हैं। मेरे कहने का मतलब था कारण क्या है आने का? प्रयोजन! प्रयोजन! वे बोलीं- संघर्ष करने। संघर्ष करने आई हूँ। आज देश में फ़ासिस्ट ताकतें बढ़ गई हैं। तुम्हारे मंत्री से नहीं डरती। पास खड़ा एक सहयोगी बोला- नाक चेक कर लो और जाने दो। समझ लो कौन हैं और क्या कर सकती हैं। दरोगा बोला- पर मैडम, आपको आगे जाने की इजाजत नहीं है। हमें ऑर्डर है आपको रोकने का।   

पास खड़ा लघु मानव (इससे पहले कि कोई मानवाधिकार की बात कर दे, मैं स्पष्ट कर देता हूँ कि लघु मानव अंग्रेजी शब्द मिनियन का सीधा अनुवाद है) बोला- सन उन्नासी में भी एक दरोगा यही करने की कोशिश किया था। बाद में बहुत दुर्गति हुई थी उसकी। और सुनो, मैडम प्रदेश की भावी सीएम हैं।  

मैडम तुरंत संघर्ष पर उतर आईं। दरोगा को हड़काते हुए कहा- मुझे जाने दो। रोकने की कोशिश की तो मैं तुम्हारे ऊपर किडनैपिंग, मोलेस्टेशन और अटैक का मुकदमा कर दूँगी। और हाँ, खबरदार जो महिला पुलिस को आगे किया तो। 

वीडियो वायरल हो गया। संपादक ने कॉफ़ी पीते हुए वीडियो देखा और उछल पड़ा। अगले ही क्षण ट्वीट करते हुए लिखा- ये मैडम का बेलची मोमेंट है।

कॉफी ब्रेक में पास बैठा एक सह संपादक, जिसकी छवि राष्ट्रवादी की थी, बोला- फिर से! संपादक बोला- क्या फिर से? सह संपादक बोला- अरे, मेरा मतलब फिर से बेलची मोमेंट! कितनी बार होगा बेलची मोमेंट? 

संपादक क्षण भर के लिए झेंप गया पर दूसरे ही उसके मन में आया कि झेंपने से अच्छा है कि लज्जा तज दे। तज कर बोला- जितनी बार मैं चाहूँगा उतनी बार आएगा बेलची मोमेंट। बार-बार आएगा बेलची मोमेंट क्योंकि दादी की नाक मैडम की नाक से मिलती है। 

सह संपादक भी मजे लेने के मूड में था। बोला- लेकिन अभी तक जितने बेलची मोमेंट आपने बताए हैं उनमें हाथी एक बार भी दिखाई नहीं दिया। संपादक के मन में आया कह दे कि हाथी तो बहन जी के पास है, पर कह नहीं पाया। बोला- हाथी कैसे दिखाई देगा? दादी हाथी की सवारी इसलिए कर पाई थी क्योंकि उन्होंने सड़क बनने ही नहीं दिया था। जीनियस पॉलिटिकल माइंड ऐसे ही होते हैं। उन्हें पता रहता है कि कभी-कभी पिछड़ेपने की भी जरूरत पड़ जाती है।

सह संपादक बोला- यही अचीवमेंट था? संपादक बोला- अचीवमेंट ये नहीं था। अचीवमेंट था बेलची मोमेंट क्रिएट करके फिर से सत्ता में आना। वैसे भी जनता पर राज करना है तो कुछ मत बनवाओ। सह संपादक मुस्कुराते हुए बोले और यहाँ तो सेंटर और स्टेट, दोनों ने सड़क ही सड़क बनवा दी है ताकि बेलची मोमेंट तो आए पर बिना हाथी के। 

संपादक बोला- बिलकुल। यही तो मैडम के खिलाफ साज़िश है। इन लोगों ने मैडम को सत्ता से रोकने के लिए सड़कें और हाई वे का जाल बिछा रखा है। इसलिए बेलची मोमेंट बार-बार आता तो है लेकिन अधूरा। सह संपादक ने कहा- झाड़ू वाला वीडियो भी बेलची मोमेंट की श्रेणी में आता है? 

संपादक बोला- देखा जाए तो इट कैन टर्न आउट टू बी द रीयल बेलची मोमेंट। यू नेवर नो! इसीलिए मैं हर मोमेंट को बेलची मोमेंट बताता हूँ। किसे पता कौन सा सही निकल आये! सह संपादक हँसते हुए बोला- ये तो है। झाड़ू वाला मोमेंट भी बेलची मोमेंट हो सकता है। वैसे भी जादूगरी वाले किस्से कहानियों में जादूगरनी झाड़ू पर बैठकर उड़ती है। मैडम भी झाड़ू के सहारे उड़ना चाहती हैं। फिर भी हाथी होता तो बेलची मोमेंट एक बार के लिए कम्पलीट हो जाता। 

संपादक चिंतित होते हुए बोला- वही, सड़क और हाईवे, यू सी! उसके बाद चुप हो गया। इस आशा के साथ कि अगला बेलची मोमेंट जल्दी ही आएगा। 

NCB के 25 अधिकारी, साथ में CISF… बीच समंदर ड्रग पार्टी पर ऐसे पड़ा छापा: आर्यन खान ड्रग्स केस में जानें सब कुछ

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को मुंबई की ड्रग्स पार्टी का भंडाफोड़ करने और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार करने में एक सप्ताह का समय लगा है। मिड-डे ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई तट से दूर कॉर्डेलिया क्रूज में रेव पार्टी का भंडाफोड़ करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक प्लान बनाया था।इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के लिए NCB ने अपने 25 अधिकारियों को काम पर लगाया था।

मिड-डे के अनुसार, उनमें से 6 अधिकारी पार्टी के कपड़े पहनकर क्रूज शिप पर चढ़े थे। इस दौरान उन्हें आर्यन काफी घबराए हुए लग रहे थे, जिससे एनसीबी के अधिकारियों का शक और बढ़ गया कि समुद्र के बीच ये आरोपित ड्रग्स लेने की तैयारी कर रहे हैं। एक हफ्ते पहले NCB को सूचना मिली थी कि अमीर परिवारों के कुछ बच्चे क्रूज शिप पर ड्रग्स लेने की योजना बना रहे हैं, जिसे वे मिड-सी पार्टी में ले सकते हैं। जैसे-जैसे अधिकारी इस मामले की तह तक गए उन्हें पता चला कि ड्रग्स लेने की तैयारी कॉर्डेलिया क्रूज़ पर की जा रही है।

एनसीबी के एक अधिकारी ने कहा, “उस समय हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि ये बच्चे कौन थे। हमने तय किया था कि एनसीबी अधिकारी पार्टी में जाने वालों लोगों के बीच शामिल होंगे, क्योंकि यही ड्रग्स लेने वालों को रंगे हाथों पकड़ने का एकमात्र तरीका था।”

उन्होंने आगे बताया, ”कई बार नशीले पदार्थों की छापेमारी में अधिकारियों के पहुँचने से पहले ही अपराधियों को अक्सर सतर्क कर दिया जाता है। इससे वह ड्रग्स को ठिकाने लगाने में कामयाब हो जाते हैं और हमें मामले को साबित करने के लिए अदालत में बहुत मुश्किल हो जाती है।”

एनसीबी ने छह अधिकारियों को रेवेलर्स के रूप में क्रूज लाइनर में जाने के लिए तैयार किया था। इसके लिए हर एक अधिकारी ने टिकट के लिए 80,000 रुपए खर्च किए थे। किसी को उन पर शक न हो इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन तीन अलग-अलग स्लॉट पर टिकट बुक किए थे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने समुद्र के बीच में छापेमारी करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से भी मदद माँगी थी।

वीआईपी मेहमानों को फ्री पास देने पर CISF हुआ राजी

योजना के अनुसार, एनसीबी अधिकारी दक्षिण मुंबई में ग्रीन गेट के जरिए क्रूज जहाज पर चढ़े। बैकअप टीम स्थिति पर नजर रखने के लिए किनारे पर इंतजार करती रही। इसके तुरंत बाद, अंडरकवर अधिकारियों ने एंट्री गेट पर मेहमानों की बॉडी लेंग्वेज को नोट करना शुरू कर दिया। एक अधिकारी के अनुसार, एनसीबी ने इन्वाइट किए गए लोगों पर कड़ी नजर रखी।

एनसीबी अधिकारी ने आगे कहा, “हमने एंट्री गेट पर उन लोगों की बॉडी लेंग्वेज को नोट करना शुरू कर दिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे वही हैं, जिनकी हम तलाश कर रहे थे।” उन्होंने बताया कि सीआईएसएफ कर्मचारियों को वीआईपी मेहमानों को फ्री ट्रेवल करने की अनुमति देने के लिए कहा गया था। हालाँकि, सीआईएसएफ ने सभी वीआईपी मेहमानों की अनिवार्य जाँच के बाद ही इस पर सहमति जताई। जैसे ही आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट वीआईपी गेस्ट के रूप में अंदर आए उनकी जाँच शुरू कर दी गई।

नर्वस हो गए थे आर्यन खान

एनसीबी अधिकारी ने बताया कि सीआईएसएफ ने उनके आई-कार्ड की जाँच की और अरबाज मर्चेंट के जूते सहित उनके सामान को स्कैन करना शुरू कर दिया। इससे आर्यन खान घबरा गए। उनके इस व्यवहार से एनसीबी के अधिकारियों यह पता लगाने में जरा भी देर नहीं लगी कि जिनकी वे तलाश कर रहे थे, ये वही लोग हैं। एनसीबी अधिकारियों ने जब आर्यन के जूतों और बैग की तलाशी ली तो उसमें ड्रग्स पाया गया। इसके बाद अरबाज और आर्यन को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।

आर्यन और अरबाज के बताने पर कि उनके साथ 8 और लोग भी इस पार्टी का हिस्सा हैं। एनसीबी ने तुरंत उनकी तलाश शुरू कर दी। ये सभी पहले से ही क्रूज पर चढ़ चुके थे। बाद में इनको भी हिरासत में लिया गया।

अधिकारी ने कहा, ”जब एनसीबी ने क्रूज के अंदर छापेमारी शुरू की तो कुछ लोग जो एंट्री प्वाइंट पर थे, वे वहीं से ही वापस चले गए। उस दौरान जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ग्रीन गेट के पास थे। जैसे ही ड्रग्स बरामद हुआ हमने उन्हें सूचित किया और वह क्रूज में आ गए।”

कॉन्ग्रेस ने सवाल उठाए

वहीं कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपको ऐसा नहीं लगता कि एनसीबी कुछ ग्राम ड्रग्स के लिए बड़ा नाटक कर रहा है। सावंत ने भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की विशेष अदालत द्वारा रविवार को आर्यन खान को ड्रग्स मामले में एक दिन की कस्टडी दिए जाने के बाद ये सवाल उठाया था। आर्यन की कस्टडी सोमवार को 7 अक्टूबर 2021 तक बढ़ा दी गई है।

बता दें कि मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा को गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में भेजा गया है। एनसीबी के वकील ने सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को मुंबई की एक अदालत के समक्ष दावा किया कि आर्यन खान और दो अन्य आरोपितों की व्हाट्सएप चैट में चौंकाने वाली और आपत्तिजनक सामग्री मिली है। यह आपत्तिजनक सामग्री अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ”आरोपित आर्यन खान, व्हाट्सएप चैट में ड्रग्स (नशीले पदार्थों) खरीदने के लिए किए जाने वाले भुगतान के तरीकों पर बात कर रहा है। वह कई कोड वर्ड का इस्तेमाल भी कर रहा है। सभी आरोपितों का आमना-सामना कराना होगा। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की जाँच की जरूरत है।”

कॉन्ग्रेस लुप्त हो जाएगी, पाँचों राज्यों में हारेगी: राजीव गाँधी के खास रहे नटवर ने ‘गाँधी परिवार’ को बताया सत्यानाश का जिम्मेदार

पंजाब सहित कई राज्यों में कॉन्ग्रेस आंतरिक लड़ाई से जूझ रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री पद से अमरिंदर सिंह की छुट्टी करने के फैसले को लेकर कई वरिष्ठ नेता अपनी नाराजगी जता चुके है। कपिल सिब्बल जैसे पार्टी नेता तो यहॉं तक कह चुके हैं कि पार्टी में फैसले कौन ले रहा इसकी किसी को खबर नहीं। इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित एक इंटरव्यू में पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि कॉन्ग्रेस का जो हाल है उसमें वह लुप्त हो जाएगी। उनका यह भी दावा है कि अगले साल जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें कहीं भी पार्टी को सफलता नहीं मिलेगी। इस हालात के लिए उन्होंने पार्टी के शीर्ष परिवार को जिम्मेदार बताया है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के करीबी रहे नटवर सिंह का यह इंटरव्यू दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ है। नटवर सिंह से पंजाब में हुए बदलाव को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि जो पंजाब में जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देश को इस समय एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है, लेकिन कॉन्ग्रेस कुछ नहीं कर रही है। राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिनके पास पार्टी में कोई पद नहीं है, वो फैसला लेते हैं। इससे पार्टी में असंतोष फैलता है और जनता में गलत संदेश जाता है।

वहीं प्रियंका गाँधी को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि उनका पंजाब की राजनीति में हस्तक्षेप करना सही नहीं था। वो यूपी की प्रभारी हैं तो पंजाब में दखलअंदाजी करना सही नहीं था। उन्होंने बिना नवजोत सिंह सिद्धू के इतिहास को जाने उन्हें पंजाब का अध्यक्ष बना दिया। हालाँकि अमरिंदर सिंह ने इसके लिए हाइकमान को मना किया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कॉन्ग्रेस हाइकमान को ही पार्टी के सत्यानाश का कारण बताया।

भाजपा के कॉन्ग्रेस मुक्त नारे को लेकर पूछे जाने उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति आगे भी बनी रही तो कॉन्ग्रेस का लुप्त होना लाजिमी है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि अभी भी चुनाव में कॉन्ग्रेस को 20 फीसदी वोट ही मिलता है। वहीं 5 राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि अगर पार्टी जीत जाती है तो अच्छी बात है, लेकिन इसकी उम्मीद नहीं है। उनका मानना है कि पार्टी को पाँचों राज्यों में हार का मुँह देखना पड़ेगा।

उइगरों के मस्जिद को गिरा कर होटल बनाने की तैयारी: चीन 3 साल में कर चुका है 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त

चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों पर अत्याचार लगातार जारी है। हाल में, चीनी प्रशासन ने उइगरों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई में उनके मजहबी स्थल को होटल में तब्दील करने का मन बनाया है। होटन प्रांत में स्थित मस्जिद, जिसे 2018 में नष्ट किया गया था, उसे पहले हिल्टन प्लॉन का नाम दिया गया था। मगर, अब इस परियोजना का नाम ‘हैप्टन इन होटल’ हो गया है।

अलजजीरा की रिपोर्ट् के अनुसार, चीनी प्रशासन की ऐसी मनमानियों को देखते हुए 40 से ज्यादा मुस्लिम-अमेरिकी सिविल राइट संगठनों के समूह ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशन्स’ S(CAIR) ने इसका विरोध किया था। इस बाबत उन्होंने ग्लोबल बॉयकॉट का आह्वान भी किया था। संगठन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निहाद अवाद ने कहा था कि उन्हें प्रस्तावित किए गए इस प्रोजेक्ट के बारे में जून में पता चला था। उनके मुताबिक ये प्रोजेक्ट मानवाधिकारों का उल्लंघन है जो उइगरों के विश्वास और आस्था के दमन में भागीदार होगा।

वर्जीनिया में हिल्टन मुख्यालय के सामने आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, संगठन ने कहा था कि वे होटल समूह के साथ ‘अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत’ कर रहे थे कि निर्माण योजना को रद्द किया जाए। हालाँकि, इस वार्ता का कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने हिल्टन के ख़िलाफ़ ग्लोबल बॉयकॉट का आह्वान किया।

बता दें कि एक ओर चीन में उइगर मुस्लिमों का होता दमन पिछले 2-3 साल से चर्चा में बना हुआ है। उनकी संस्कृति, सभ्यता, मजहबी रिवाज, तौर-तरीके, घर की बनावट, साज-सजावट का तरीका सब बदला जा रहा है। इसके अलावा डिटेंशन कैंप में रख कर महिलाओं के साथ रेप, अबॉर्शन समेत तमाम अमानवीयता की जा रही हैं। इमाम और मौलवियों को कैद में रखा जा रहा है।

दूसरी ओर चीन इन सभी दावों को खारिज करता रहता है। उसका कहना है कि उन्होंने कोई मजहबी स्थल जबरन गिराया ही नहीं, जबकि मीडिया खबरें बताती हैं कि 2017 से 2020 के बीच में शिनजियांग के 900 क्षेत्रों में करीब 16000 मस्जिदें या तो आधी या फिर पूरी ध्वस्त हुई हैं। मीनारों को मस्जिद से हटा दिया गया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी की मानें तो हाल ऐसा है कि जब उनका पत्रकार रमजान के माह में उइगर गया तो उसने भी मस्जिदों को या तो पूरा गिरा हुआ या फिर आधा ध्वस्त पाया।

अमित शाह के गाँधीनगर में 44 में से 41 सीटों पर खिला कमल, AAP को केवल 1: गुजरात निकाय चुनावों में BJP का परचम, देखें पूरे आँकड़े

गुजरात के गाँधीनगर नगरपालिका चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली है। 44 सीटों में से 41 सीटें अपने नाम की है। कॉन्ग्रेस को 2 और आम आदमी पार्टी (AAP) को मात्र एक सीट से संतोष करना पड़ा। भाजपा के दफ्तर गुलजार हो उठे हैं और गुजरात की राजधानी में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। नए-नए मुख्यमंत्री बने भूपेंद्र पटेल की भी ये पहली चुनावी परीक्षा थी, जिसमें उन्होंने जम कर मेहनत की थी।

गुजरात के अगले विधानसभा चुनाव पर AAP की नजर थी और सूरत नगरपालिका के चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद उसे गाँधीनगर से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन यहाँ लोगों ने भाजपा को ही अपनी पहली पसंद बताया है। भाजपा ने थारा नगर पालिका में 24 में से 20 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी ने जिला पंचायत की 8 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की है। साथ ही तालुका पंचायत की 45 सीटों में से 28 पर जीत हासिल की है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने कहा कि एक बार फिर साबित कर दिया है कि गुजरात के मतदाताओं को नरेंद्र मोदी साहब पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा अपने वादे को पूरा करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि ये अमित शाह का गृह निर्वाचन क्षेत्र है। वो अक्सर कई कार्यक्रमों के जरिए यहाँ की जनता के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा गतिविधियों का भाजपा को फायदा मिला है।

कुल मिला कर देखें तो पूरे गुजरात में जहाँ-जहाँ नगरपालिका चुनाव हुए हैं, वहाँ 128 में से 99 सीटें भाजपा ने अपने नाम की है

‘पापा शाहरुख खान से मिलने के लिए लेना होता है अपॉइंटमेंट’: आर्यन खान के व्हाॅट्सएप चैट से इंटरनेशनल ड्रग तस्करी का खुलासा

मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा को गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में भेजा गया है। एनसीबी के वकील ने सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को मुंबई की एक अदालत के समक्ष दावा किया कि आर्यन खान और दो अन्य आरोपितों की व्हाट्सएप चैट में चौंकाने वाली और आपत्तिजनक सामग्री मिली है। यह आपत्तिजनक सामग्री अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ”आरोपित आर्यन खान, व्हाट्सएप चैट में ड्रग्स (नशीले पदार्थों) खरीदने के लिए किए जाने वाले भुगतान के तरीकों पर बात कर रहा है। वह कई कोड वर्ड का इस्तेमाल भी कर रहा है। सभी आरोपितों का आमना-सामना कराना होगा। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की जाँच की जरूरत है।”

दरअसल, आर्यन खान की व्हाट्सएप चैट में पैसों की लेनदेन का खुलासा भी हुआ है। चैट में सामने आया है कि उन्होंने बैंक ट्रांजैक्शन के लिए उन्होंने कैश की माँग की है। कुछ चैट 21 जुलाई की हैं तो कुछ पुरानी हैं। चैट्स में गाँजे के बारे में भी बात हुई है। प्रॉसिक्यूशन ने मजिस्ट्रेट को यह चैट्स दिखाई भी थी।

आर्यन खान पर NDPC 8 C, 20 B, 27 और 35 की धाराएँ लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत ड्रग्स का सेवन करना, जानबूझकर ड्रग्स लेना और ड्रग्स खरीदने जैसी चीजें आती हैं। इन्हीं के तहत आर्यन की गिरफ्तारी हुई है।

वहीं रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि NCB की पूछताछ में आर्यन खान ने बताया है कि उन्हें अपने पिता के बिजी शेड्यूल के कारण उनसे मिलने के लिए भी मैनेजर पूजा से अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। जिसका असर उन पर हो रहा है। जिसके पीछे की वजह यह बताया जा रहा है कि शाहरुख खान इन दिनों एक साथ अपने कई अपकमिंग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। जिसके चलते उनका शेड्यूल काफी टाइट है।

इस दौरान मजिस्ट्रेट ने एनसीबी से आर्यन की कस्टडी को लेकर सवाल किया। इस पर एनसीबी ने कहा था कि उन्हें आर्यन खान की कस्टडी की जरूरत इसलिए है, क्योंकि वह पता लगाना चाहते हैं कि उन्हें पार्टी में क्यों बुलाया गया था और वह किन केबिन में रुके थे। इस पर आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे ने कहा, ”आर्यन खान को शिप में ड्रग्स बेचने की जरूरत नहीं है। वह शिप में क्यों गए थे इस मामले में एनसीबी का कोई काम नहीं। आर्यन चाहे तो पूरा शिप खरीद सकते हैं।”

गौरतलब है कि शनिवार (2 अक्टूबर 2021) को मुंबई के समुद्री क्रूज पर चल रही एक ड्रग्स पार्टी में एनसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किए और 10 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मॉडल मुनमुन धामेचा भी शामिल हैं। यह जहाज मुंबई से गोवा जा रहा था।

एक पुख्ता टिप मिलने के बाद मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और अन्य एनसीबी अधिकारी जहाज में आम यात्रियों की तरह सवार हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया था। आर्यन खान (23), धामेचा और मर्चेंट को रविवार 3 अक्टूबर 2021 शाम को गिरफ्तार किया गया था। इस दिन उन्हें स्पेशल हॉलिडे कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें सोमवार तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया था।

मेरठ की मुमताज, हिंदुस्तानी-पाकिस्तानी दोनों से निकाह और तलाक… फिर ISI एजेंट के साथ काम: दिल्ली में लाश, भतीजा गिरफ्तार

पुरानी दिल्ली के चाँदनी महल इलाके की एक घर के भीतर से दुर्गंध आ रही थी। बाहर ताला लगा था। पुलिस को सूचना दी गई। ताला तोड़ पुलिस कमरे के भीतर दाखिल हुई तो 51 साल की एक महिला की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। बुरी तरह सड़ी-गली हालत में मिली इस शव की पहचान मुमताज परवीन के तौर पर हुई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि शव मिलने से पहले आस-पड़ोस के लोग भी इस बात से पूरी तरह वाकिफ नहीं थे कि यह महिला असल में कौन थी। ज्यादातर लोगों के लिए मुमताज एक तुनकमिजाज महिला थी जो अकेले रहती थी। बिल्लियों को ​नियमित तौर पर खाना खिलाती थी और पड़ोसियों से अक्सर लड़ती थी।

मुमताज की हत्या की गुत्थी सुलझने पर लोगों को पता चला कि उसके पाकिस्तानी जासूस होने का संदेह था। नकली नोट का धंधा करने और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के गुर्गों की मदद करने के आरोप में उसे गिरफ्तार भी किया गया था। 2007 में उसे इन आरोपों में दोषी भी ठहराया गया, लेकिन एक साल बाद स्वास्थ्य कारणों से जेल से रिहा कर दिया गया।

मुमताज की लाश 3 सितंबर 2021 को मिली थी। पुलिस ने हत्या के मामले में मेरठ के रहने वाले उसके भतीजे (बहन का बेटा) फरमान को गिरफ्तार किया गई। फरमान ने पूछताछ के दौरान अपनी खाला (मौसी) की हत्या करने की बात कबूल करते हुए खुलासा किया कि उसकी मौसी बाड़ा हिन्दूराव इलाके में दो राहगीरों की हत्या के मामले में उसे और उसके परिवार को फँसाने की कोशिश कर रही थी। इस बात से खफा होकर उसने हत्या कर दी। हत्या के बाद वह मेरठ भाग गया।

जाँच में पुलिस को पता चला कि फरहान ने 30 अगस्त हो मुमताज हत्या की थी। लेकिन हत्या का राज 3 सितंबर को मकान के अंदर से बदबू आने के बाद खुली। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से आरोपित की पहचान की। 30 अगस्त को ममुताज के घर के बाहर एक व्यक्ति उस गली में संदिग्ध रूप से घूमते हुए देखा गया था। उसका चेहरा ढका हुआ। इसके बाद पुलिस ने तहकीकात करते हुए आरोपित को दबोच लिया।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने बताया कि तीन सितंबर की शाम को गली बहार वाली, छत्तालाल मियाँ के एक मकान से दुर्गंध आने की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस को कमरे में बेड पर एक महिला का शव खून से लथपथ पड़ा मिला था। उसकी गर्दन की पीछे की ओर गहरे घाव के निशान थे।

जाँच के दौरान पता चला कि मुमताज पाकिस्तान की नागरिक थी। उसका परिवार तो भारत का था, लेकिन पाकिस्तान में शादी के बाद उसकी नागरिकता वहीं की हो गई थी। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली थी। 15 साल की उम्र में, उसने मेरठ के सुल्तान नाम के एक शख्स से निकाह किया। उनके तीन बच्चे हुए। लेकिन 1989 में वे अलग हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे उसके पति ने तलाक दे दिया, क्योंकि उसे उसकी हाई-फाई लाइफस्टाइल पसंद नहीं थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि परवीन पहली बार 1990 के आसपास अपनी अम्मी के साथ कराची में अपनी मौसी से मिलने गई थी। वहाँ उसने मुहाजिर कौमी आंदोलन-हकीकी के एक नेता अब्दुल वहाब खान नाम के एक व्यक्ति से निकाह की। 1993 में उसे पाकिस्तानी नागरिकता मिली। लेकिन यह निकाह भी सिर्फ 6 साल ही चल पाया, क्योंकि उसे बच्चा नहीं हो रहा था।

1996 मेंभारत आते समय समझौता एक्सप्रेस में मुमताज की मुलाकात आईएसआई जासूस कामरान गौहर से हुई। कामरान ने मुमताज से नजदीकियाँ बढ़ा ली और उसे अपने साथ रहने के लिए तैयार कर लिया। कामरान पाकिस्तान के लाहौर का रहने वाला था और नकली नोटों की तस्करी व अन्य संदिग्ध गतिविधियों में भी शामिल था।

जब वह पाकिस्तान लौटी, तो उसने तलाक के लिए अर्जी दी और खान ने उसे गुजारा भत्ता के रूप में ₹10 लाख दिया। बाद में उसने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने गौहर को एक भारतीय नागरिक के रूप में पेश करने और नकली नोटों की तस्करी करने में मदद की थी। मामले में दोनों को दोषी ठहराया गया और 10 साल की सजा सुनाई गई थी। मुमताज को स्वास्थ्य कारणों से पहले ही छोड़ दिया गया, जबकि कामरान की सजा पूरी होने के बाद पाकिस्तान भेज दिया गया।

24 जनवरी, 2000 को जब उसे गौहर के साथ गिरफ्तार किया गया थातो पुलिस को उसके पास से 8,000 रुपए की नकली मुद्रा भी मिली थी। पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि गौहर 1994 में भारत आया था और अप्रैल 1999 में उसे निर्वासित कर दिया गया था। उसने जुलाई 1999 में एक फर्जी नाम से भारत में फिर से प्रवेश किया और 2000 के अंत में उसे निर्वासित कर दिया गया।