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3 घंटे में 3 हमले: कश्मीरी पंडित को दुकान में घुस मारी गोली, आतंकियों ने बिहार के स्ट्रीट वेंडर और स्थानीय ड्राइवर को भी मार डाला

जम्मू-कश्मीर में कई बड़ी आतंकी साजिशों को सुरक्षा बलों ने हाल में नाकाम किया है। इससे बौखलाए आतंकी अब आम लोगों को निशाना बनाने लगे हैं। मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) को आतंकियों ने अलग-अलग हमलों में तीन आम नागरिकों की हत्या कर दी। इन हमलों को 3 घंटे के भीतर अंजाम दिया गया।

आतंकियों ने कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू की श्रीनगर के इकबाल क्षेत्र में शाम के करीब 7:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी। वह प्रसिद्ध फार्मेसी के मालिक थे। आतंकियों ने दुकान में घुसकर उन्हें गोली मारी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट किया है, “श्रीनगर के इकबाल पार्क में बिंदरू मेडिकेट के मालिक कश्मीरी पंडित- माखन लाल बिंदरू (70) की आज शाम (मंगलवार) कश्मीर में आतंकियों ने हत्या कर दी। इसके बाद श्रीनगर के लालबाजार में सड़क किनारे गैर स्थानीय भेलपुरी विक्रेता की हत्या कर दी गई।”

अगले ट्वीट में कौल ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि श्रीनगर में अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदरू उन कुछेक कश्मीरी पंडितों में से एक थे जिन्होंने 1990 के दशक में कश्मीर नहीं छोड़ा।

दूसरी घटना में श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में शाम के करीब साढ़े आठ बजे बिहार के गोलगप्पा बेचने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, श्रीनगर के मदीन साहब लालबाजार के पास आतंकियों द्वारा मारे गए शख्स की पहचान वीरेंद्र पासवान के तौर पर हुई है। वे बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी इसे टारगेटेड अटैक करार दिया है।

वहीं तीसरी घटना कश्मीर के बांदीपोरा के शाहगुंड इलाके में हुई। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, नायदखाई निवासी मोहम्मद शफी लोन की आतंकियों ने हत्या कर दी। फिलहाल आतंकियों की तलाश की जा रही है। वह बांदीपोरा के हाजिन में टाटा सूमो चलाते थे।

लखीमपुर खीरी हिंसा में योगी सरकार के तुरंत एक्शन के बाद राकेश टिकैत पर भड़के कॉन्ग्रेसी, खालिस्तानी भी नाराज: ये है बड़ी वजह

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘प्रदर्शनकारी किसानों’ ने रविवार (अक्टूबर 3, 2021) को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया, जिसके बाद 8 लोगों के मरने की खबरें आईं। भीड़ इतनी हिंसात्मक थी कि उन्होंने कार ड्राइवर को और भाजपा कार्यकर्ता तक को जिंदा नहीं छोड़ा। श्याम सुंदर नामक बीजेपी कार्यकर्ता की एक वीडियो भी आई थी। इसमें वह किसानों से जान की भीख माँग रहे थे, लेकिन ‘किसान’ उनसे उगलवाना चाहते थे कि वो बोलें कि वो किसानों को मारने आए थे। हालाँकि, श्याम इन बातों से इनकार करते रहे। पूरा वाकया कैमरे में कैद हुआ और बाद में श्याम की लाश मिली।

मामले में जहाँ राजनेताओं ने परेशानी बढ़ाने का काम किया। वहीं भड़काऊ बयानबाजी करने वाले और अक्सर समस्या बढ़ाने वाले राकेश टिकैत यूपी पुलिस के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आए। वहाँ पुलिस हिंसा में मारे गए भाजपा नेता और ‘किसानों’ के लिए 45 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा कर रही थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने कहा था कि शांति बनी रहेगी और आरोपितों को हिरासत में लिया जाएगा।

लखीमपुर खीरी की इस घटना में जहाँ किसानों के उग्र होने के कारण और भाजपा द्वारा जवाबी हिंसा में शामिल होने की वजह से क्षेत्र में तहलका मच सकता था। वहीं यूपी पुलिस ने सुनिश्चित किया कि राजनेता क्षेत्र में प्रवेश कर बात को ज्यादा न बिगाड़ें। उन्होंने राकेश टिकैत के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सारी स्थिति पर काबू पाया।

हालाँकि, इस दौरान राजनेता और कॉन्ग्रेस समर्थित मीडिया राकेश टिकैत से खुश नहीं दिखा और ये नाराजगी उस समय सामने आई जब प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर पत्रकार विनोद कापड़ी ने अपना ट्वीट किया। पहले फेक न्यूज के कारण फँस चुके विनोद ने बताना चाहा कि ‘उग्र’ किसानों की भीड़ पर गाड़ी चलाने वाला कोई और नहीं बल्कि भाजपा नेता का बेटा आशीष मिश्रा था

विनोद ने ट्वीट में कहा कि इस ‘नरसंहार’ के बाद हुए समझौते पर राकेश टिकैत से सवाल होना चाहिए कि आखिर हत्यारों की गिरफ्तारी से पहले उन्होंने ऐसा किया क्यों।

कापड़ी ऐसा अकेला शख्स नहीं है जिसने राकेश टिकैत पर अविश्वास जाहिर किया। सूत्र बताते हैं कि कई कॉन्ग्रेस नेता और खालिस्तानी तत्व भी राकेश टिकैत से मुँह बना कर बैठे हुए हैं और उनके ऊपर से अपना विश्वास खो रहे हैं कि वो यूपी चुनाव से पहले आग लगाने में, हिंसा भड़काने में सफल रहेंगे।

कॉन्ग्रेस पार्टी का एक सूत्र, जिसने पहले ऑपइंडिया से बात करने से मना किया ये कहते हुए कि हम कॉन्ग्रेस विरोधी हैं लेकिन फिर मान भी गए, सिर्फ इस शर्त पर कि हम उनका नाम छिपाए रखें। सूत्र ने कहा, “हमें ये पूछना चाहिए कि आखिर प्रियंका गाँधी और अन्य जैसे अखिलेश यादव गिरफ्तार किए गए जबकि राकेश टिकैत यूपी पुलिस के साथ बैठ कर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे।” उन्होंने पूछा, “ये एक नरसंहार था और राकेश टिकैत ने यूपी पुलिस के साथ बैठकर किसानों का हित बेचा। क्या राकेश टिकैत अब बीजेपी नेता बन गए हैं?”

एक अन्य समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, “हम यूपी चुनावों के साथ जमीन पर काम कर रहे हैं। ये नेता बाहर से आते हैं और बीजेपी से हाथ मिला लेते हैं। हमारे नेताओं को ऐसे साँपों से सावधान रहना चाहिए।”

कॉन्ग्रेस के कई प्रोपगेंडाबाज लखीमपुर खीरी में प्रियंका गाँधी की हिरासत को उनके राजनैतिक करियर का एक नया जन्म और यूपी की राजनीति में कॉन्ग्रेस का पुनरुत्थान मान रहे हैं। बिलकुल वैसे जैसे इंदिरा गाँधी ने 1977 में बिहार में बेलची की यात्रा के बाद एक मरणासन्न कॉन्ग्रेस पार्टी को पुनर्जीवित किया था।

पत्रकार राजदीप सरदेसाई जिनका कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए झुकाव अक्सर देखने को मिलता है, उन्होंने एक ट्वीट पोस्ट किया और प्रियंका गाँधी के इस लखीमपुर खीरी के दौरे को ‘बेलची क्षण’ बताया। इसके बाद कई मीडिया हस्तियों ने इसे प्रियंका का ‘बेलची क्षण’ करार देना चाहा जिससे साबित हो कि प्रियंका को वह राजनैतिक गति मिल गई है जिसकी उन्हें जरूरत थी।

इसके बाद सिख फॉर जस्टिस का खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी की और बताया कि कैसे वो इस मामले में और हिंसा चाहता है।

यह साफ है कि खालिस्तानी, कॉन्ग्रेसी, सपा और विपक्षी समर्थक राकेश टिकैत में अपना विश्वास खो रहे हैं कि वो हिंसा को जारी रख सकते हैं और अब इस काम के लिए वो अलग हथकंडे आजमा रहे हैं- विनोद कापड़ी जैसे कॉन्ग्रेस प्रेमी पत्रकारों ने मामले में झूठी जानकारी दी कि भाजपा नेता किसानों को मार रहे हैं।

लखीमपुर खीरी हिंसा में 8 लोगों की मृत्यु की खबरों ने प्रियंका गाँधी वाड्रा, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव आदि जैसे राजनेताओं के बीच गहरी मिलीभगत को प्रदर्शित किया। मामले में जहाँ सच्चाई यह थी कि कार पर ‘किसानों’ द्वारा हमला किया जा रहा था और ड्राइवर का कंट्रोल खोने से कार चार किसानों पर चढ़ी। बाहर जो नैरेटिव गढ़ा गया वो एकदम अलग था, जिसका श्रेय विपक्षी राजनेताओं, लिबरल मीडिया के निहित स्वार्थों को जाता है। इन लोगों ने जोर देकर यह फैलाया कि भाजपा नेता की कार जानबूझकर किसानों पर चढ़ी थी और उसके बाद भाजपा नेताओं की लिंचिंग कार में नेता द्वारा ‘क्रूरता’ का प्रत्यक्ष परिणाम थी।

हालाँकि, हकीकत तब सामने आई जब एक नई वीडियो ने सारी पोल खोली और दिखाया कि कैसे कार ने संतुलन खो दिया था और वह किसानों के ऊपर चढ़ गई थी और इसी के बाद किसानों ने भाजपा कार्यकर्ता की पीट पीट कर हत्या कर दी।

लखीमपुर खीरी- प्रियंका गाँधी का बेलची क्षण: क्या हैं इसके मायने

साल 1977 में इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ जनता की भावनाएँ चरम पर थीं। आपातकाल के कारण लोगों में गुस्सा था। इसी बीच बिहार के बेलची में 14 दलितों का नरसंहार हुआ। इंदिरा गाँधी को इस घटना में अवसर दिखाई दिया और उन्होंने जनभावना को अपने साथ करने के लिए इसका इस्तेमाल किया।

वह फौरन 35 गाड़ियों के काफिले के साथ बेलची के लिए रवाना हुईं और एक हाथी की सवारी कर वह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहीं। चुनावों में हार के बाद भी स्थानीय उनके लिए तालियाँ पीट रहे थे क्योंकि उन्हें वह पिछड़े वर्ग की रक्षक लग रहीं थी। इसका परिणाम अगले चुनाव में देखने को मिला और इंदिरा गाँधी दोबारा से सत्ता में लौट आईं।

इंदिरा, जिनका राजनैतिक करियर बिलकुल नीचे गिर गया था उन्होंने 14 दलितों की मौत को अपने लिए सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया और दोबारा राजनीति में उठ खड़ी हुईं। इस यात्रा का मीडिया में खूब बखान हुआ जिसे इंदिरा की बची हुई परेशानियों को भी दूर कर दिया। ताकतवर मीडिया और उनके पक्ष में तैयार इकोसिस्टम ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखने में मदद की और 1980 में सत्ता वापसी की नींव रखी।

साढ़े 4 दशक बाद, कॉन्ग्रेस पार्टी दोबारा उसी हाल में है। कुछ दिन पहले पंजाब में जो कुछ हुआ उसने लोगों के मन से उस भरोसे को भी मिटा दिया जो उन्हें कॉन्ग्रेस के युवा नेताओं और उनके नेतृत्व कौशल पर था।

एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर गाँधी के दावों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरे ओर पक्षपाती मीडिया व कॉन्ग्रेसी चाटुकारों को पूरी उम्मीद है प्रियंका गाँधी की लखीमपुरी खीरी यात्रा को उतनी ही सहानुभूति और समर्थन मिलेगा जितना उनकी दादी को बेलची यात्रा पर प्राप्त हुआ था और ये कॉन्ग्रेस की हारी हुई बाजी को पलट देगा।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि कॉन्ग्रेस नेता भी इस दौरे को बेलची क्षण के तौर पर देख रहे हैं और राकेश टिकैत द्वारा नैरेटिव को तूल न देने पर उनसे लोगों में विश्वास कम होता जा रहा है।

नोट: यह आर्टिकल ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपूर शर्मा के लेख पर आधारित है। मूल लेख आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

‘वो मुझे भी मार देते… उनके पास तलवार थी’: लखीमपुर खीरी हिंसा में बचे सुमित जायसवाल, लिबरल गिरोह ने बताया था ‘मंत्री का बेटा’

लखीमपुर खीरी में किसानों की उग्र भीड़ से खुद को बचाने में सफल हुए भाजपा नेता सुमित जायसवाल ने हाल में आजतक से बातचीत में 3 अक्टूबर की घटना पर आँखो-देखा हाल बताया। सुमित जायसवाल वही बीजेपी नेता हैं जो घटना संबंधी एक वीडियो में गाड़ी से निकल कर भागते दिखे थे और कॉन्ग्रेस समेत लिबरल गिरोह ने फैलाया था कि ये तो केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष ‘मोनू’ हैं।

जायसवाल बताते हैं कि उस दिन एक कार्यक्रम में प्रदेश उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या आने वाले थे और वह लोग उनके स्वागत में ही जा रहे थे। हालाँकि, बीच रास्ते में ‘दंगाइयों’ की भीड़ उन्हें मिली और लाठी-डंडे व धारधार हथियारों से गाड़ी पर हमला किया जाने लगा। 

देखते ही देखते गाड़ी के शीशे टूट गए और ड्राइवर हरिओम की आँख या सिर में न जाने कहाँ जाकर चुभे। मगर, इसके बाद गाड़ी अनियंत्रित हो गई और किनारे में जाकर लग गई। सभी लोग मारो-मारो चिल्लाकर उनकी ओर भागे। सुमित के मुताबिक, माहौल ऐसा था जैसे वो लोग सोच के बैठे हों कि वो किसी बड़ी घटना को अंजाम देकर रहेंगे।

हालातों को देख सुमित ने अपनी जान बचाने की कोशिश की और गाड़ी छोड़ कर भाग निकले। सुमित से जब पूछा गया कि आखिर वो लोग कौन थे। क्या वह किसान थे या कभी उन्हें लखीमपुर में देखा गया था। इस पर सुमित ने कहा कि वो उस भीड़ को किसान नहीं कह सकते। उनके मित्र शुभम मिश्रा की उसी भीड़ ने जान ली और जब उन्होंने उसका शव देखा तो उसे बेरहमी से मारा गया था। ये सब किसान नहीं कर सकता। वह इतना निर्दयी नहीं हो सकता। 

गाड़ी से उतर कर भागने की बात पूछे जाने पर सुमित ने बताया कि गाड़ी का घेराव इस तरह कर दिया गया था कि वो लोग गाड़ी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। उनका मकसद था कि कैसे भी गाड़ी पर चढ़कर अंदर बैठे लोगों को मार दें या फिर गाड़ी को जला दें। इसी के बाद गाड़ी अनियंत्रित हुई और किनारे जाकर रुक गई। उग्र भीड़ ने हरिओम को उतारकर मारना शुरू किया। सबके हाथ में तलवार, नुकीले चीजें, धारधार हथियार थे।

ये सब देख सुमित कहते हैं कि उनकी रूह कांप गई और खुद को बचाने के लिए वह गाड़ी से निकल कर भाग निकलें। ड्राइवर की तरह शुभम को भी गाड़ी से उतार कर मारा गया। सिर्फ वही थे जो गाड़ी से निकल भाग पाए। शुभम को मौका ही नहीं दिया गया कि वो अपनी जान बचा पाएँ। बीजेपी नेता के अनुसार, उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली कि उनके दोस्त को मार दिया गया है। हमले के बहुत देर बाद तक उन्हें नहीं पता था कि शुभम के साथ ऐसी घटना हुई है।

सुमित कहते हैं कि वो खुद गाड़ी से निकलकर केवल सड़क की ओर भागे थे। वहाँ उन्हें कोई गाड़ी मिली और उसने उनकी मदद की। इस तरह उनकी जना बची। गाड़ी से रौंदे गए किसानों पर जवाब देते हुए सुमित ने कहा कि उन्होंने वीडियो नहीं देखी है कि क्या दिखाया जा रहा है लेकिन, वो चूँकि गाड़ी में थे इसलिए वह वही बता रहे हैं जो उन्होंने देखा।

आँखो देखा हाल सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गाड़ी पर आगे से हमला हुआ। एक डर का माहौल बनाया जा रहा था। सैंकड़ों की संख्या में वहाँ उग्र लोग थे जो लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग और पथराव कर रहे थे। ऐसे में वो किस तरह से निकलते तो ड्राइवर ने वहाँ स्पीड बढ़ाई होगी और हो सकता है तभी कुछ लोग गाड़ी के नीचे आए हों।

उल्लेखनीय है कि ‘उग्र’ किसानों से बचकर निकले सुमित जायसवाल ने ही प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध एफआईआर कराई है। शिकायत में 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और बलवा सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। सुमित कहते हैं कि जिस तरह भीड़ ने ड्राइवर और शुभम को मारा, कहीं से नहीं लगा कि वो किसान थे। इन सबके पीछे बड़ी साजिश थी, वो बाहर के उपद्रवी थे, जो धारधार हथियार के साथ मारो-मारो चिल्ला रहे थे। अगर वह नहीं भागते तो भीड़ उन्हें भी मार देती।

‘या अल्लाह शैतान के भटकावे से बचा आमीन’: बॉलीवुड छोड़ चुकीं जायरा वसीम ने 2 साल बाद बुर्के में शेयर की तस्वीर, हुईं ट्रोल

साल 2019 में बॉलीवुड को अलविदा कह चुकी पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। दरअसल, दंगल गर्ल के नाम से मशहूर जायरा वसीम ने अपने इंस्टाग्राम पर बुर्का पहने हुए एक तस्वीर शेयर की है। इसमें वह एक पुल पर टहलती हुई नजर आ रही हैं। इसमें उनका चेहरा नहीं दिखाई दे रहा है। जायरा ने अपनी तस्वीर के कैप्शन में लिखा है “द वार्म अक्टूबर सन।”

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के साथ फिल्म ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ और प्रियंका चोपड़ा के साथ ‘द स्काई इज पिंक’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाली जायरा वसीम ने अचानक फिल्मों में काम करना छोड़ दिया था। उन्होंने मजहब का हवाला देते हुए बॉलीवुड से दूरी बना ली थी। अब 2 साल बाद अपनी फोटो शेयर करने पर वह सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। एक यूजर ने कहा, ”मैम साहब आपका हाथ दिख रहा है। इसे भी कवर किजिए।” एक अन्य ने लिखा, ”आप इतनी पतली कैसी हो गई हैं।”

साभार: जायरा वसीम का इंस्टाग्राम

एक ने लिखा, ”मैम एक बार अपने फेस की फोटो डाल दिजिए।” फैजल खान नाम के यूजर ने लिखा, ”अभी धीरे-धीरे फोटो पोस्ट हो रहे हैं। या अल्लाह नफ्स और शैतान के भटकावे से बचा आमीन।”

साभार: जायरा वसीम का इंस्टाग्राम

एक और ने लिखा, ”प्लीज अपनी फोटो अपलोड मत करो। मेरे विचार से आपका फैसला सबसे अच्छा था। अल्लाह आपकी रक्षा करे और आपका मार्गदर्शन करे। अल्लाहु-अकबर।”

साभार: जायरा वसीम का इंस्टाग्राम

गौरतलब है कि इससे पहले जून 2020 में उन्होंने देश भर में टिड्डियों के आक्रमण को अल्लाह का आजाब बताया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें खूब ट्रोल किया था। बाद में जायरा ने अपना इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट को डिलीट कर दिया था। जायरा वसीम ने अपने ट्विटर पर कुरान की एक आयत का जिक्र करते हुए लिखा था, “इसलिए हमने उन पर बाढ़ भेजे, और टिड्डे भेजे, और भेजे जूएँ-चीलड़, और मेंढक भेजे, खून भेजा: ये वैसी चेतावनियाँ हैं जो स्वविश्लेषित हैं: लेकिन वो सब अपने अज्ञान में गहरे डूबे हुए थे- वैसे लोग जो पापी हैं।”

तालिबान ने गुरुद्वारे पर किया हमला, सीसीटीवी कैमरे तोड़े; 3 मुस्लिम गार्ड्स समेत कई लोगों को बनाया बंदी

अफगानिस्तान के काबुल में स्थित ‘करता परवन गुरुद्वारे’ पर तालिबान ने मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) दोपहर को हमला बोल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हथियार बंद तालिबानियों ने यहाँ गार्ड्स समेत कई लोगों को बंदी बना लिया। उन्होंने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी तोड़ डाला। इसके बाद वे वहाँ से चले गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज दोपहर को 15-16 हथियारबंद अज्ञात लोग गुरुद्वारे के अंदर दाखिल हुए। इन लोगों ने तीन मुस्लिम गार्ड्स के हाथ-पैर बाँध उन्हें बंदी बना लिया। साथ ही गुरुद्वारे से बाहर जाते हुए सीसीटीवी भी तोड़ दिए। स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में सूचित कर दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। इससे पहले इंडिया वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने बताया कि हथियारबंद तालिबानी अधिकारी गुरुद्वारे में दाखिल हुए थे।

उनका कहना है कि तालिबानियों ने हमारे पवित्र स्थान का अपमान किया है और उसे नुकसान भी पहुँचाया है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से इस मामले में दखल देने की अपील की है। उन्होंने माँग की है कि देश में हिंदू और सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

काबुल का करता परवन गुरुद्वारा वही स्थान है, जहाँ सिखों के गुरु नानक देव जी आए थे। यह गुरुद्वारा तालिबानी शासन आने के बाद सिखों और हिंदुओं के लिए पनाहगाह बना था। उस दौरान तालिबान ने इन लोगों को भरोसा दिलाया था कि यहाँ के लोगों की सुरक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से वहाँ के स्थानीय निवासी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 220 से अधिक अफगान महिला जज तालिबानियों की सजा के भय से अभी भी खुफिया जगहों पर छिपी हुई हैं। उनका कसूर केवल इतना है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ी। ये उन लोगों की रक्षक रही हैं, जो देश में हाशिए पर थे और न्याय चाहते थे।

अयोध्या से भी बड़ा रिकॉर्ड- आवास योजना के 9 लाख लाभार्थी जलाएँगे दिवाली पर 18 लाख दीये: PM मोदी ने CM योगी को दिया नया लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (5 अक्टूबर) को अखिलेश यादव को गरीबों को झूठे सपने दिखाने और उन्हें धोखा देना पर आड़े हाथों लिया। साथ ही उन्होंने दिवाली से पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने एक कड़ी चुनौती पेश की।

पीएम मोदी ने आज लखनऊ में 4737 करोड़ की 75 परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ”यूपी आया हूँ तो कुछ होमवर्क देने का मन कर रहा है। इस बार दिवाली पर अयोध्या में कहते हैं कि 7.5 लाख दीये का कार्यक्रम है। मैं यूपी को कहता हूँ कि रोशनी के लिए प्रतिस्पर्धा के मैदान में आगे आएँ। देखें अयोध्या ज्यादा दीये जलाता है कि ये जो 9 लाख घर दिए गए हैं, वो 9 लाख घर 18 लाख दीये जलाकर दिखाते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे भगवान राम प्रसन्न होंगे। उन्होंने कहा, “पिछले 7 वर्षों में जिन 9 लाख परिवारों को पीएमएवाई के तहत घर उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हें दिवाली पर अपने घरों के बाहर 2 दीये जलाने चाहिए। अयोध्या में करीब साढ़े सात लाख दीये जलाए जाएँगे। लेकिन, मेरे गरीब भाइयों और बहनों के घरों में 18 लाख दीये जलाए जाएँगे।” प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 75,000 PMAY लाभार्थियों को डिजिटल रूप से चाबियाँ भी सौंपीं। पीएम ने कहा कि वे अब अपने नए घर में सभी त्योहार मना पाएँगे।

कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “मुझे वह समय याद है जब सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद उत्तर प्रदेश घरों के निर्माण में पिछड़ रहा था। आज जब मैं लखनऊ में हूँ, लगता है कि मुझे आपको अपनी कहानी शुरू से बतानी चाहिए। यूपी के लोगों को यह समझने के लिए पता होना चाहिए कि कैसे पहले की सरकारों ने राज्य में क्षुद्र राजनीति की है।”

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार गरीबों के लिए घर बनाने के लिए पैसा भेज रही थी। इसके बावजूद 2017 से पहले UP में जो सरकार थी, वो गरीबों के लिए घर बनवाना ही नहीं चाहती थी। 2017 से पहले पीएम आवास योजना के तहत UP के लिए 18 हजार घरों की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन यहाँ 18 घर भी नहीं बने।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तत्कालीन राज्य सरकार ने लोगों के लिए 18 घर भी नहीं बनाए थे। ये बातें आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी। घर बनाने के लिए धन उपलब्ध था, लेकिन राज्य सरकार जानबूझकर अड़चने पैदा कर रही थी। यूपी के लोग अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के इन कार्यों को कभी नहीं भूल सकते।”

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मंगलवार (5 अक्टूबर, 2021) को लखनऊ में देश की आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर ‘न्यू अर्बन इंडिया’ थीम के साथ केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय व नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ट्रांसफॉर्मिंग अर्बन लैंडस्केप सम्मेलन-सह-एक्सपो का उद्घाटन किया। साथ ही प्रधानमंत्री ने लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, झाँसी, प्रयागराज, गाजियाबाद व वाराणसी के लिए 75 स्मार्ट इलेक्ट्रिक बसों का फ्लैग ऑफ भी किया।

मूडीज ने सुधारी भारत की रेटिंग, नेगेटिव से हुई स्टेबल: राहुल गाँधी के अनुमान हुए फेल, लिबरल गिरोह ने साधी चुप्पी

कोरोना संक्रमण के दस्तक देने के बाद भारत की बिगड़ती अर्थव्यवस्था ने मोदी सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया था। हालाँकि, अब स्थिति सुधर रही है। मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग की पुष्टि करते हुए इसे नेगेटिव से बदलकर स्थिर यानी कि स्टेबल कर दिया। ये भारत की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर है।

मूडीज ने बयान में कहा, “मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने आज भारत सरकार की रेटिंग को लेकर आउटलुक को नेगेटिव से स्टेबल कर दिया है। साथ ही देश की विदेशी मुद्रा तथा स्थानीय मुद्रा दीर्घकालीन निर्गमकर्ता रेटिंग और स्थानीय मुद्रा रेटिंग (सीनियर अनसिक्योर्ड) बीएए3 पर बरकरार रखी गई है।”

हालातों में सुधार को लेकर मूडीज ने अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में गिरावट के जोखिम में कमी का हवाला दिया। रेटिंग एजेंसी ने कहा, “बेहतर पूंजी और नकदी की अच्छी स्थिति से बैंक तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के स्तर पर जोखिम पूर्व के अनुमान के मुकाबले कम हुए हैं।”

मूडीज ने कहा, “अधिक कर्ज बोझ और ऋण वहन को लेकर कमजोर स्थिति के चलते जोखिम बना हुआ है। लेकिन मूडीज को उम्मीद है कि आर्थिक परिवेश अगले कुछ वर्षों में केंद्र एवं राज्यों सरकारों के राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने में मददगार होगा। इससे सरकारी साख में और गिरावट को रोका जा सकेगा।”

उल्लेखनीय है कि मूडीज इनवेस्टर्स ने पिछले वर्ष भारत के स्तर को ‘बीएए2’ से कम कर ‘बीएए3’ कर दिया था। उस दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट किया था, “मूडीज ने मोदी द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने को कबाड़ (जंक) वाली रेटिंग से एक कदम ऊपर रखा है। गरीबों और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन की कमी का मतलब है कि अभी और अधिक खराब स्थिति आने वाली है।” इसके अलावा लिबरल गिरोह ने भी इस मुद्दे को जमकर उछाला था।

हालाँकि, राहुल गाँधी के अनुमानों से उलट अब भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार होता दिख रहा है। लेकिन विपक्षी दल, लिबरल गिरोह या कॉन्ग्रेस नेता की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। अपने एजेंडे के हिसाब राहुल इस साल लखीमपुर खीरी मामले में बात कर रहे हैं। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस विषय पर चुप है।

फ्रांस के कैथोलिक चर्च में 3,30,000 मासूम बच्चे हुए यौन शोषण का शिकार, दो तिहाई पादरी शामिल: खुलासे के बाद पोप ने माँगी माफी

फ्रांस के एक स्वतंत्र आयोग ने अपनी जाँच में कैथोलिक चर्च में हुए बच्चों के यौन शोषण को लेकर जो आँकड़े दिए हैं वो वाकई खौफनाक हैं। आयोग का अनुमान है कि फ्रांस के कैथोलिक चर्च में पादरी, अधिकारी व अन्य लोगों ने मिलकर 1950 के बाद से 216,000 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया। कुछ रिपोर्ट इन आँकड़ों को 3 लाख 30 हजार के करीब बता रही हैं।

रिपोर्ट जारी करने वाले आयोग के अध्यक्ष ज्यां मार्क सौवे ने कहा कि यह अनुमान वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित है। इसमें पादरियों और चर्च से संबद्ध लोगों और अन्य व्यक्तियों द्वारा उत्पीड़न के मामले शामिल हैं।

सौवे ने कहा कि यौन उत्पीड़न के शिकार होने वालों में 80 प्रतिशत लड़के थे जबकि बाकी अन्य लड़कियाँ थीं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि बच्चों का उत्पीड़न 3000 से ज्यादा पीडोफाइल द्वारा किया गया। इनमें से दो तिहाई पादरी थे।

इस रिपोर्ट की बाबत मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को पोप ने दुख जाहिर किया और घटना के संबंध में पीड़ितों से माफी माँगी। वेटिकन प्रवक्ता ने बताया कि पोप ने स्वतंत्र आयोग की जाँच में सामने आए निष्कर्ष को दर्दनाक कहा। फ्रेंच में जारी एक बयान में प्रवक्ता माटेओ ब्रूनी ने कहा, “उनके विचार सबसे पहले पीड़ितों की ओर जाते हैं, उनके (पीड़ितों के) दर्द पर बहुत दुख है और बोलने के उनके साहस के लिए आभार है।”

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले फ्रांस के स्वतंत्र आयोग ने अपनी जाँच में कैथोलिक चर्चों में 2,900 से 3,200 पीडोफाइल (एक प्रकार की मानसिक बीमारी, जिसमें व्यक्ति बच्चों के साथ सेक्स करने की इच्छा रखता है) की उपस्थिति का अनुमान लगाया था। फ्रांस के चर्चों के स्कैंडल और बाल शोषण के मामलों की जाँच के लिए इस आयोग को 2018 में गठित किया गया था। इस बात की जानकारी अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी ने दी थी।

करीब 2500 पन्नों की आयोग की रिपोर्ट में साल 1950 से चर्चों में काम करने वाले पीडोफाइल के न्यूनतम अनुमानों को दिखाया गया। एएफपी ने बताया कि आयोग का गठन फ्रेंच कैथोलिक चर्च और दुनिया के अन्य चर्चों में हुए सेक्स स्कैंडल के बाद किया गया था। आयोग में कानून, चिकित्सा, इतिहास, समाजशास्त्र और धर्मशास्त्र सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ 22 सदस्य शामिल हैं।

फ्रांस के बिशप कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एरिक डी मौलिन्स-ब्यूफोर्ट ने बताया था कि आयोग की रिपोर्ट ‘महत्वपूर्ण’ और ‘भयावह’ आँकड़े उजागर करेगी। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कैथोलिक चर्च संदिग्ध पीडोफाइल के खिलाफ किस तरह की प्रतिक्रिया देगा। एएफपी के मुताबिक, ऐसे मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने की संभावना बहुत कम होती है।

धर्मांतरण रैकेट: ATS ने दिल्ली और यूपी में की छापेमारी, मौलाना कलीम सिद्दीकी के 4 ठिकानों की तलाशी में मिले कई सबूत

अवैध धर्मांतरण मामले में मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को यूपी एटीएस की टीम ने दिल्ली में सर्च ऑपरेशन चलाया। यूपी एटीएस की टीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है। जानकारी के मुताबिक, यूपी एटीएस की टीम मंगलवार सुबह 9 बजे दिल्ली पहुँची और मौलाना कलीम सिद्दीकी के 4 ठिकानों पर तलाशी ली। 

प्रेस रिलीज के मुताबिक इस दौरान एटीएस मौलाना कलीम सिद्दीकी के जामिया नगर शाहीन बाग स्थित आवास भी पहुँची। वहीं, टीम ने शाहीन बाग स्थित अब्दुल रहमान के घर की भी तलाशी ली। यूपी एटीएस ने ग्लोबल पीस सेंटर, वर्ल्ड पीस ऑर्गेनाइजेशन में भी छापेमारी की। इस तलाशी में यूपी एटीएस पश्चिमी जोन की टीम समेत कुछ 6 टीमों का गठन किया गया। तलाशी के दौरान डेस्कटॉप, टैबलेट, महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट्स मिले हैं। इन्हें एटीएस ने अपने कब्जे में लिया है। जब्त किए गए सबूतों को एटीएस कोर्ट में पेश करेगी। 

UP ATS का प्रेस रिलीज

यूपी एटीएस अवैध धर्मांतरण मामले में कलीम सिद्दीकी समेत 15 लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। उत्तर भारत में कई इस्लामिक ट्रस्ट चलाने वाले और 30 साल से देश के सबसे बड़े अवैध धर्मांतरण गिरोह को संचालित करने वाले मौलाना करीम सिद्दीकी को यूपी एटीएस की टीम ने बुधवार (22 सितंबर 2021) को मेरठ से गिरफ्तार किया था। मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड देता है। इसके लिए उसे विदेशों से भारी फंडिंग मिलती है।

पिछले दिनों एक ऑडियो से खुलासा हुआ था कि मौलाना कलीम द्वारा ब्राह्मण-क्षत्रिय लड़कियों को खास कर के निशाना बनाया जा रहा था। ‘जिहादी’ सोच वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी का पाकिस्तान से भी कनेक्शन सामने आया था। वो चाहता था कि हर एक हिंदू को धर्मांतरण करके इस्लाम अपना लेना चाहिए। इसके अलावा विदेशी फंडिंग का भी खुलासा हुआ था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण कराने के मामले में मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी को जून में दिल्ली के जामिया नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उन पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से कथित फंडिंग के साथ बधिर छात्रों और गरीब लोगों को इस्लाम में कन्वर्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगा था।

सैनेटरी पैड्स में ड्रग्स छिपाकर क्रूज पर पहुँची थीं आर्यन खान के साथ गिरफ्तार हुईं नूपुर सारिका, ग्रुप के इस शख्स ने दी थी ऐसी सलाह

नारकोट‍िक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टीम ने मुंबई ड्रग्स मामले में आर्यन खान समेत कई आरोप‍ितों को शनिवार (2 अक्टूबर 2021) को हिरासत में लिया था। आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट, मुनमुन धामेचा, नुपूर सारिका, इस्मित सिंह, मोहक जसवाल, विक्रांत और गोमित चोपड़ा ये सभी पैंट की सिलाई के अंदर, लेडीज पर्स के हैंडल, अंडरवेअर के सिलाई वाले हिस्से, कॉलर की सिलाई और जूतों में ड्रग्स छिपाकर पार्टी में लाए थे।

इनमें आर्यन खान को छोड़कर बाकी चेहरे इतने फेमस नहीं हैं, लेकिन इस हाई प्रोफाइल मामले का खुलासा होने के बाद लोग इनके बारे में जानना चाहते हैं। इस दिनों ड्रग्स पार्टी में शामिल नूपुर सार‍िका काफी सुर्खियों में हैं, क्योंकि वह ड्रग्स को सबसे अलग तरीके यानी सैनेटरी पैड्स में छिपाकर रेव पार्टी में पहुँची थीं। यही कारण है कि वह पिछले ​दो तीन दिनों से सोशल मीडिया पर काफी सर्च की जा रही हैं। आइए आपको बताते हैं इन सभी आरोपितों के बारे में जो ड्रग्स पार्टी में शामिल हुए थे।

आर्यन खान- शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को 3 अक्टूबर 2021 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गिरफ्तार किया था। उसे 7 अक्टूबर 2021 तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया गया है।

अरबाज मर्चेंट- अरबाज आर्यन खान का स्कूल फ्रेंड हैं। दोनों पहले भी कई बार एक साथ पार्टी कर चुके हैं। दोनों को एनसीबी ने 3 अक्टूबर 2021 को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। एनसीबी ने अरबाज के फोन से एक बड़ी सेलेब्रिटी की बेटी के साथ चैट्स भी बरामद किए गए हैं। इसके पास से 6 ग्राम चरस भी मिला था।

नूपुर सार‍िका– सैनेटरी पैड्स में ड्रग्स छिपाकर चर्चा में आईं नूपुर सारिका दिल्ली के प्राइमरी स्कूल की टीचर है। आरोपित मोहक ने मुंबई के एक लोकल व्यक्ति से ड्रग्स लेकर नूपुर को दिया था। उसने ही नुपुर से कहा था कि वह सैनिटरी पैड में ड्रग्स छिपाए, ताकि वो पार्टी में उससे ड्रग्स ले सकें। रेड के दौरान NCB ने इसके पास से ड्रग्स बरामद किया था। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट में नूपुर को मॉडल बताया जा रहा है।

मोहक जसवाल- दिल्ली का रहने वाला मोहक पेशे से आईटी प्रोफेशनल है। उसने ही नुपुर को ड्रग्स दिया था।

गोमित चोपड़ा- यह दिल्ली का फेमस फैशन मेकअप आर्टिस्ट है। गोमित कथित तौर पर कॉन्टैक्ट लेंस में ड्रग्स छिपाकर ले जा रहा था। एनसीबी ने उसके पास से 4 MDMA pills और कुछ कोकीन बरामद की थी।

मुनमुन धामेचामुनमुन मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली हैं। फिलहाल अभी उनके परिवार का कोई भी सदस्य मध्य प्रदेश में नहीं रहता है। वह पेशे से एक मॉडल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके माता-पिता का निधन हो गया है। वह अपने भाई प्रिंस धमेचा के साथ दिल्ली में रहती हैं।

इस्मीत सिंह- आरोपित इस्मीत दिल्ली का रहने वाला है। यहाँ उसके होटल्स हैं। NCB ने रेव पार्टी में उनके पास से 14 MDMA Ecstasy pills बरामद की थी।

विक्रांत छोकर- दिल्ली का रहने वाला विक्रांत छोकर एक ड्रग्स एड‍िक्ट है। एनसीबी ने उसके पास से 5 ग्राम Mephedrone(intermediate quantity), 10gms cocaine (intermediate) ड्रग्स बरामद किए थे।

श्रेयस नायर- श्रेयस मुंबई के गोरेगाँव इलाके में रहता है। रेव पार्टी में अलग-अलग ग्रुप पार्टी कर रहे थे। इनमें से एक ग्रुप को श्रेयस ने ड्रग्स की सप्लाई की थी। श्रेयस को भी पार्टी में जाना था, लेकिन वो किसी वजह से नहीं जा सका था। वह इस रेव पार्टी के इवेंट मैनेजर्स में से एक हैं।