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AAP विधायक राघव चड्ढा का चड्डा उतार देंगी यह हिरोइन: अपने नाम की राजनीति पर भड़कीं राखी सांवत, दी धमकी

बॉलीवुड एक्ट्रेस राखी सावंत ने आम आदमी पार्टी पंजाब के सह प्रभारी और दिल्ली से विधायक राघव चड्ढा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ‘बिग बॉस’ की एक्स कंटेस्टेंट राघव चड्ढा द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की पॉलिटिक्स का राखी सावंत बताने पर भड़क गईं। उन्होंने राघव चड्ढा को चेतावनी देते हुए कहा, “मुझसे दूर रहो, नहीं तो मैं तुम्हारा चड्ढा उतार दूँगी।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहा है।

‘द खबरी’ ने अपने ट्विटर हैंडल पर राखी सावंत का यह वीडियो शेयर किया है। इसमें आप देख सकते हैं कि जब राखी सावंत को मीडियाकर्मियों से पता चलता है कि आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने उन्हें (नवजोत सिंह सिद्धू को) पॉलिटिक्स का राखी सावंत कहा है, तो वह इस पर काफी भड़क जाती हैं। राखी सावंत कहती हैं:

”राघव चड्ढा मुझसे और मेरे नाम से दूर रहो। मेरा नाम लिया तो तुम्हारा चड्ढा उतार दूँगी। अभी मैं ट्रेंडिग में हूँ मिस्टर चड्ढा। आप खुद देखिए आपको ट्रेंडिग में आने के लिए मेरे नाम की जरूरत पड़ गई।”

इस दौरान एक्टेस के साथ एक शख्स भी नजर आया, जिसने कहा, ”मैं राखी का भाई हूँ। राखी सावंत एक ही है, इसका कोई कॉम्पिटिशन नहीं है।” वीडियो में एक्ट्रेस ने उन्हें सपोर्ट करने वाली कविता कौशिक की तारीफ की।

इसके अलावा राखी ने राघव चड्ढा को आड़े हाथों लेते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, ”मेरे पति ने राघव चड्ढा को जवाब दिया है। मुझे अभी तक अकेले जान कर लोग सताते थे। आज ये कहते हुए मेरी आँखों में आँसू हैं कि आज मेरा भी कोई है, जो मेरे मान-सम्मान की रक्षा के लिए खड़ा है। धन्यवाद मेरे प्यारे पति।”

राखी सावंत की इंस्टाग्राम पोस्ट

इसमें राखी जिन्हें अपना पति कह रही हैं, उन्होंने केजरीवाल और राघव चड्ढा को टैग करते हुए ट्वीट किया है, ”अपनी राजनीति के लिए किसी को व्यक्तिगत रूप से निशाना मत बनाएँ। अरविंद ​केजरीवाल अपने विधायक को एजुकेट कीजिए। अगर मैंने इसे एजुकेट किया तो ‘आप’ कहीं भी नजर नहीं आएगी।”

गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने शुक्रवार (17 सितंबर) को नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की पॉलिटिक्स का राखी सावंत करार दिया था। चड्ढा ने ट्वीट किया, ”सिद्धू बेतुके बयान देने की बीमारी से पीड़ित हैं, इसलिए आदत से मजबूर होकर इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धू की कही कोई भी बात गंभीर नहीं होती और हर जगह वह हँसी के पात्र ही बनते हैं।”

रात भर नहीं सोए थे पर्रिकर-डोभाल, सुबह से दफ्तर में थे PM मोदी: उरी हमला और ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ के बाद क्या बदला?

उरी में हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह से पलटवार करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक्स को अंजाम दिया, उसके बाद क्या कुछ बदल गया? जब हम सितंबर 2016 में उरी में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत की प्रतिक्रिया की बात करते हैं तो हमें फरवरी फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा दी गई कड़ी प्रतिक्रिया की बात भी करनी पड़ेगी। दोनों में अंतर है, लेकिन दोनों जुड़े हुए हैं।

सबसे पहले बात उरी सर्जिकल स्ट्राइक की। जम्मू कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को सुबह के 5:30 बजे पाकिस्तान पोषित ‘जैश-ए-मुहम्मद’ के आतंकियों ने भारतीय सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर को ग्रेनेड से निशाना बनाया। हमारे 19 जवान बलिदान हो गए। हालाँकि, 4 आतंकी भी मारे गए लेकिन 30 से अधिक लोग घायल भी हुए। जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों पर इसे दो दशकों का सबसे भीषण आतंकी हमला बताया गया था।

लेकिन, इसके 11 दिन बाद जो हुआ उसने इतिहास को बदल कर रख दिया। भारत ने पलटवार किया। ऐसा पलटवार, जिसकी यहाँ के नेताओं व नेतृत्व को अब तक आदत नहीं थी। तभी, AAP के अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने सेना से भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के सबूत माँगने में संकोच नहीं किया। बदलाव ये हुआ कि पुलवामा हमले के बाद हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक्स के बाद इन नेताओं ने सेना को बधाई देने में देरी नहीं की।

क्योंकि तब विपक्ष, बल्कि पाकिस्तान भी समझ चुका था कि नया भारत हर एक आतंकी हमले के प्रत्युत्तर में आतंकी संगठनों के सफाए के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उसने उरी हमले के बाद वाले ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ को देख लिया। ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ की खासियत ये थी कि इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में अंजाम दिया गया था, जो भारत का ही हिस्सा है। इस तरह से हमारी सेना ने अपनी ही जमीन में रह कर आतंकियों के दाँत खट्टे किए थे।

भारत ने बड़ी चालाकी से उरी आतंकी हमले के बाद किए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अंतर्गत साबित किया और NSA अजीत डोभाल ने बाद में पाकिस्तान को स्पष्ट कहा भी कि चूँकि पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान आतकियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में अक्षम रहा था, इसीलिए अपनी सुरक्षा से जुड़े हितों के लिए भारतीय सेना ने आतंकी हमलों को रोकने हेतु अपनी ही जमीन में ये कार्रवाई की।

पूँछ और उरी में हुए हमलों और इसके आसपास के समय में ही भारतीय सेना ने 20 बार पाकिस्तान की घुसपैठ को नाकाम किया था। अतः, भारत ने दुनिया को बताया कि अन्य हमलों की साजिश रचे जाने की पूर्व-सूचना के बाद उसने कार्रवाई की। भारत ने स्पष्ट कहा कि उसने पाकिस्तान की सेना को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि सिर्फ उन्हें टारगेट किया है जो ‘नॉन-स्टेट एक्टर्स’ हैं, आतंकवादी हैं।

‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ का प्रभाव ये हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में बनी, जो ‘मुँहतोड़ जवाब’ दे सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सख्त निर्णय लेने वाले नेता हैं, लोगों ने जाना। भाजपा और RSS पहले भी ऐसे हमलों के बाद चुप बैठने के पक्ष में नहीं थी, ताकि आगे इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की हिमाकत दुश्मनों की न हो। पीएम मोदी ने न सिर्फ देश की रक्षा का वादा निभाया, बल्कि अपनी छवि व पार्टी की विचारधारा के हिसाब से कार्य किया।

वहीं राजग सरकार ने मनमोहन सिंह सरकार की कॉन्ग्रेस वाली नीति को भी बदला, जब मुंबई में हुए बड़े आतंकी हमले (26/11) के बाद भारत ने कोई कड़ी कार्रवाई न करते हुए कॉन्ग्रेस की सरकार ने ‘कड़ी निंदा’ से काम चलाया था। नरेंद्र मोदी ने दिखाया कि अब कॉन्ग्रेस वाली नीति नहीं चलेगी। उस समय NDA सरकार ने ये बयान देकर दुनिया को आश्वस्त किया कि ऑपरेशन को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन ढाई साल बाद पाकिस्तान ने फिर वही हिमाकत पुलवामा में की तो उसे और जोरदार सबक सिखाया गया।

पाकिस्तान भी काफी कन्फ्यूज हो गया क्योंकि अगर वो स्वीकार करता कि ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ हुआ है तो वहाँ की सरकार को जनता की तगड़ी आलोचना झेलनी पड़ी और उसकी बेइज्जती होती, वहीं अगर वो कहता कि कुछ नहीं हुआ है तो दुनिया के सामने ‘विक्टिम कार्ड’ वो नहीं खेल पाता। इसीलिए, वो इन दोनों के बीच फँसा रह गया। अब जम्मू कश्मीर में नियमित रूप से आतंकियों का सफाया हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हमें भविष्य के लिए योजनाएँ ज़रूर बनाई पड़ेंगी, हम हर चीज को राजनीतिक चश्मे से नहीं देख सकते। ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की वो रात थी, जब तत्कालीन केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर रात भर सोए नहीं थे। पीएम मोदी की भी यही स्थिति थी। पीर पांजाल रेंज के आसपास लगभग 75 आतंकियों को मार गिराने के बाद जब हमारे जवान सुरक्षित वापस लौट आए, तब जाकर इन नेताओं को चैन में चैन आई।

29 सितंबर के अगले दिन सुबह के 8 बजे पीएम मोदी अपने दफ्तर में थे और सुरक्षा समिति के सभी मंत्री सुबह-सुबह साउथ ब्लॉक पहुँच चुके थे। मीडिया को तब तक कुछ पता नहीं था। रक्षा विशेषज्ञ नितिन ए गोखले अपनी पुस्तक ‘Securing India The Modi Way: Pathankot, Surgical Strikes and More’ में लिखते हैं कि बैठक में तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने जब पूरे ऑपरेशन के बारे में बताया, तब पीएम मोदी ने इसे सार्वजनिक करने का निर्णय लेते हुए कहा कि हमारे बहादुर सैनिकों की गाथाएँ दुनिया तक जानी चाहिए।

अगले एक घंटे के भीतर प्रेस नोट रिलीज कर दिया गया। 11:30 बजे लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने इसकी घोषणा की। गोखले लिखते हैं कि पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की थी, जो ‘रिस्क टेकर’ की उनकी छवि को मजबूत बनाता है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि इसमें अगर जरा भी चूक होती तो भारत और प्रधानमंत्री की आलोचना होती और राजनीतिक रूप से न सिर्फ उन पर, बल्कि कूटनीति में देश पर भी इसका बुरा असर पड़ता।

वो रिस्क ले सकते थे, क्योंकि उन्होंने अजीत डोभाल के नेतृत्व में योग्य लोगों की टीम बनाई थी जो ये सब करने में सक्षम थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शांति के पक्षधर हैं। उन्होंने अपने पहले शपथग्रहण समारोह में भी कई पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया था, जिसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ भी शामिल थे। वो नवाज शरीफ के घर भी अचानक पहुँचे थे। लेकिन, पाकिस्तान तब भी नहीं समझ पाया।

उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरजते हुए कहा था कि हमारे जवानों का बलिदान बर्बाद नहीं जाएगा। उन्होंने कहा था, “आतंकी कान खोल कर सुन लें, भारत कभी भी उरी हमले को नहीं भूल सकता। मैं पाकिस्तान के नेतृत्व को बताना चाहता हूँ कि हमारे 18 जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।” मनोहर पर्रिकर ने भी स्पष्ट कहा था कि वो खुद सुनिश्चित करेंगे कि ऐसा दोबारा न हो। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के बयान को सिर्फ एक बयान न समझा जाए।

‘पलायन के लिए मजबूर हैं हिन्दू’: राजस्थान विधानसभा में गूँजा टोंक में ‘लैंड जिहाद’ का मुद्दा, अब तक 600 परिवारों का पलायन

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार (सितंबर 17, 2021) को शून्यकाल के दौरान भाजपा ने ‘लैंड जिहाद’ (Land Jihad) का मुद्दा उठाया। भाजपा विधायकों ने कहा कि टोंक जिले का मालपुरा अति संवेदनशील कस्बा है। यहाँ 1950 से लेकर अब तक हुए सांप्रदायिक दंगों में 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

मालपुरा शहर के विधायक कन्हैया लाल ने कहा कि इस शहर में हिंदू पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं क्योंकि मुस्लिम लगातार जमीन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि मालपुरा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जमीन जिहाद चला रखा है। इसके तहत हिंदुओं की जमीन प्रीमियम रेट में खरीदी जाती है और फिर आसपास के लोगों को परेशान किया जाता है। उन्हें धमकी दिया जाता है।

विधायक कन्हैयालाल ने कहा कि मालपुरा में जमीन जिहाद के कारण हालात खराब हो चुके हैं। समुदाय विशेष के लोग हिंदू परिवारों को प्रताड़ित कर रहे हैं। बहन-बेटियों की तरफ अश्लील इशारे करते हैं। हिंदुओं के घरों में हड्डियाँ फेंकी जाती हैं। मालपुरा में अब तक 600 से ज्यादा हिंदू परिवारों का पलायन हो चुका है। उन्होंने कहा कि एक कड़ा कानून लाने की जरुरत है, ताकि हिंदू और जैन समुदाय से जुड़े लोग असुरक्षा की वजह से जबरन पलायन करने के लिए मजबूर ना हों

पिछले दिनों प्रताड़ित हिंदुओं ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर जमीन जिहाद रोकने की माँग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो वहाँ हालात विस्फोटक हो जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि मालपुरा में हिंदू परिवारों के पलायन का मुद्दा भाजपा पहले भी उठा चुकी है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया तो उसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक टीम मालपुरा का दौरा कर के आई थी। राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा था कि मालपुरा के लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर लगाए हैं ताकि वो इस मुद्दे को हाईलाइट कर सकें। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों खबर आई कि राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में एक बार फिर हिंदू परिवार अपने मकान और दुकान बेचने को मजबूर हैं। मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले हिंदुओं ने घरों के बाहर ‘पलायन’ का पोस्टर लगा कर अपना जीवन खतरे में बताया। इस बाबत पीएम मोदी और सीएम गहलोत को पत्र भी लिखे गए हैं जिसमें बताया गया है कि असुरक्षा के कारण मजबूरी में इलाके के हिंदुओं को पलायन करना पड़ रहा है। 

इसके बाद अलवर के भाजपा सांसद बाबा बालकनाथ ने भिवाड़ी, बहरोड़, नीमराना और बानसूर में मुस्लिम समुदाय के अत्याचारों के मुद्दे को उठाया है। इनके अनुसार इन इलाकों से हिंदू पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। साथ ही उद्योगपति लोग परेशान होकर अपनी फैक्ट्री/इकाइयाँ बंद कर रहे हैं।

सांसद बाबा बालकनाथ ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता बदमाशों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की माँग भी रखी। उनका तर्क था कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग होने के कारण यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है।

न्यूजीलैंड के झटके के बाद अब इंग्लैंड भी रद्द कर सकता है Pak दौरा, ECB ने अपनी सुरक्षा टीम से किया संपर्क: ऐलान जल्द

सुरक्षा कारणों की वजह से न्यूजीलैंड का पाकिस्तान दौरा रद्द होने के बाद अगले महीने इंग्लैंड का पाकिस्तान दौरा भी संशय में पड़ गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड भी अपना पाकिस्तान दौरा रद्द कर सकता है। हालाँकि, अभी इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की तरफ से कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बताया जा रहा है कि ईसीबी अगले 24 से 48 घंटो में इस पर फैसला करेगा

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने कहा कि वे अगले 48 घंटे में तय करेंगे कि अगले महीने होने वाला दौरा आगे बढ़ेगा या नहीं। एक प्रवक्ता ने कहा, “हम सुरक्षा अलर्ट के कारण पाकिस्तान दौरे से हटने के न्यूजीलैंड के फैसले से अवगत हैं। हम स्थिति को पूरी तरह से समझने के लिए अपनी सुरक्षा टीम से संपर्क कर रहे हैं, जो पाकिस्तान में मौजूद हैं। इसके बाद ईसीबी बोर्ड अगले 24-48 घंटों में तय करेगा कि हमारा नियोजित दौरा आगे बढ़ना चाहिए या नहीं।”

बता दें कि इंग्लैंड क्रिकेट टीम को अगले महीने टी20 सीरीज खेलने के लिए पाकिस्तान दौरे पर जाना है। इंग्लिश टीम को 13 और 14 अक्टूबर को पाकिस्तान के साथ दो मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है। ये दोनों मैच रावलपिंडी में खेले जाने हैं। यह 2005 के बाद पाकिस्तान का उनका पहला दौरा होगा।

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान के साथ वन डे मैच शुरू होने से पहले खत्म कर दिया। न्यूजीलैंड ने सुरक्षा के लिहाज से ये फैसला लिया। बताया जा रहा है कि न्यूजीलैंड की टीम ने टॉस से कुछ देर पहले मैदान में जाने से मना किया और फिर खबर आई कि ये दौरा रद्द हो रहा है।

न्यूजीलैंड टीम ने शुक्रवार (17 सितंबर) को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को इसकी सूचना दी कि उनको पाकिस्तान में खतरा है। इसके बाद पीएम इमरान खान और पीसीबी के अधिकारियों ने न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों को मनाना शुरू किया। लेकिन टीम नहीं मानी और अब वह अपने देश लौटने को तैयार हैं।

इससे पाकिस्तान की एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बेईज्जती हुई है। इससे पहले साल 2002 में कराची में होटल के बाहर हुए बम विस्फोट के बाद न्यूजीलैंड ने अपना पाकिस्तान दौरा छोड़ दिया था। वहीं 2003 में उन्होंने 5 वनडे मैच खेले था और वही पाकिस्तान में उनका आखिरी दौरा था।

‘मैंने बिकनी पहन गणपति के सामने डांस नहीं किया’: उर्फी जावेद ने कहा – ‘मैं इस्लाम का पालन नहीं करती, जो मन पहनती हूँ’

बिग बॉस ओटीटी में दिखाई देने वाली और पहले ही हफ्ते में ही घर से बेघर होने के बाद से ही उर्फी जावेद चर्चाओं में हैं। जिसके बाद से ही उर्फी जावेद लगातार इंटरनेट सेंसेशन बन चुकी हैं। एयरपोर्ट पर गुलाबी रंग की ब्रा के साथ क्रॉप जैकेट पहनने से लेकर जावेद अख्तर की पोती कहलाने तक, वो अक्सर विवादों में रहती हैं। हाल ही में ‘News 18’ के साथ बातचीत में उर्फी जावेद ने अपने कपड़ों की पसंद के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्हें ट्रोल होने की परवाह क्यों नहीं है।

गणेश चतुर्थी पर कुर्ता पहनने को लेकर ट्रोल किए जाने पर उनकी प्रतिक्रिया के पूछे जाने पर उर्फी ने कहा कि वो अब इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती। उन्होंने लोगों को भगवान के सामने और भी ज्यादा रिवीलिंग कपड़े पहने देखा है। उन्होंने स्कर्ट या बिकनी पहनकर गणपति की मूर्ति के सामने डांस नहीं किया था। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि वह एक दकियानूसी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती है।

उन्हें जींस पहनने की इजाजत नहीं थी। सीने को हमेशा दुपट्टे से ढँक कर रखने के लिए कहा जाता था। यही सब वजह है कि आज वो विद्रोही चुकी हैं और जो चाहती हैं, वह पहनती हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि उनको उनके मजहब के लिए निशाना बनाया जा रहा है? इस पर उर्फी ने जवाब देते हुए कहा, “मुझे ऐसा लगता है। मैं एक मुस्लिम लड़की हूँ, इसलिए जब मैं कुछ करती हूँ या कुछ खास तरह के कपड़े पहनती हूँ, तो यह बहुत से लोगों को रास नहीं आता है। मुझे याद है कि मुंबई में एक घर की तलाश करना एक बहुत बड़ा टास्क था क्योंकि बहुत से लोग अपने अपार्टमेंट मुसलमानों को किराए पर नहीं देना चाहते थे। मैं इस्लाम या किसी अन्य धर्म का पालन नहीं करती हूँ। साथ ही जब मेरे कपड़ों की बात आती है, तो मैंने एयरपोर्ट पर कुछ भी असामान्य नहीं पहना था। यह एक सामान्य स्पोर्ट्स ब्रा और उसके ऊपर एक जैकेट थी। मैंने महिला कलाकारों को छोटे कपड़े पहने देखा है। मुझे नहीं पता कि लोगों ने इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना दिया। मैं जो चाहूँ पहन सकती हूँ। सच कहूँ तो मुझे इन टिप्पणियों की कोई परवाह नहीं है।”

गौरतलब है कि हाल ही में उर्फी ने आज तक से बात करते हुए बताया कि मुस्लिम होने की वजह से मुस्लिम उन्हें टारगेट करते हैं, गाली देते हैं, जान से मारने की धमकी देते हैं और फतवा भी जारी करते हैं। वो कहती हैं कि उन्हें अक्सर उनकी ड्रेस को लेकर बुर्का और हिजाब पहनने की नसीहतें दी जाती है। हालाँकि इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो कहती हैं कि फतवा जारी करना है तो कर दें, वो ऐसे ही कपड़ें पहनेंगी।

इससे पहले शबाना आजमी ने सोशल मीडिया पर उन अफवाहों को खारिज किया था, जिसमें कहा जा रहा था कि बिग बॉस ओटीटी की कंटेस्टेंट रहीं उर्फी जावेद जावेद अख्तर की पोती हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था, “उर्फी जावेद का हमसे किसी भी तरह से कोई संबंध नहीं है।” दरअसल उर्फी जावेद को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वहाँ पर उन्हें बिकनी टॉप के साथ क्रॉप डेनिम जैकट और डेनिम जींस में स्पॉट किया गया था। तस्वीरें सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर उर्फी को बुरी तरह ट्रोल किया जाने लगा था और कहा गया था कि उर्फी जावेद, जावेद अख्तर की पोती हैं।

‘फर्जी प्रेम विवाह, 100 से अधिक ईसाई लड़कियों का यौन शोषण व उत्पीड़न’: केरल के चर्च ने कहा – ‘योजना बना कर हो रहा आतंकवाद’

केरल में चल रहे ‘लव जिहाद’ और ‘नारकोटिक जिहाद’ की टिप्पणियों के बाद, थमारसेरी सूबा के कैटेसिस विभाग ने आरोप लगाया है कि 100 से अधिक ईसाई लड़कियों का फर्जी प्रेम विवाह के नाम पर यौन शोषण किया गया।

थमारसेरी सूबा के धार्मिक शिक्षा निदेशक फादर जॉन पल्लीक्कवयालिल ने एक प्रेस रिलीज में दावा किया, “हमें ईसाई महिलाओं और लड़कियों को टारगेट करने के यौन आतंकवाद के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद हमने पाया कि 100 से अधिक ईसाई लड़कियों का फर्जी प्रेम विवाह के जरिए यौन शोषण और उत्पीड़न किया गया। यह अलग-अलग घटनाओं के बजाय निश्चित उद्देश्य के साथ एक संगठित और योजनाबद्ध प्रयास था।” 

दिलचस्प बात यह है कि विवाद पैदा होने के बाद विभाग द्वारा जारी हैंडबुक पर स्पष्टीकरण देने के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। इस पुस्तिका में मुस्लिम विरोधी सामग्री थी, जिसमें मुस्लिम मौलवियों द्वारा लड़कियों के धर्मांतरण की बात कही गई है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पुस्तिका का उद्देश्य किसी भी धर्म या विश्वास की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाले सभी प्रचारकों से बचना है। कई मुस्लिम संगठनों ने इस हैंडबुक का विरोध किया और गुरुवार (सितंबर 16, 2021) को बिशप के घर तक मार्च निकाला था।

मुस्लिम संस्थाओं ने कहा कि किसी भी जाँच एजेंसी को ‘नारकोटिक्स जिहाद’ जैसा कुछ नहीं मिला है। मुस्लिमों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगा कर रोका, जिसके बाद उनमें झड़प भी हुई। केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) ने कहा है कि बिशप का बयान किसी समुदाय को निशाना बना कर नहीं दिया गया था, इसकी गंभीरता पर बहस होनी चाहिए। संस्था ने नारकोटिक्स माफिया के खिलाफ जाँच की भी माँग की।

इस बीच राज्यसभा सांसद सुरेश गोपी ने इस मुद्दे पर पाला बिशप के साथ एक घंटे तक बैठक की। बैठक के बाद, सुरेश गोपी ने कहा कि बिशप द्वारा उठाई गई चिंताएँ बेहद गंभीर हैं और बिशप ने विशेष रूप से किसी धर्म के बारे में बात नहीं की है। केवल कुछ आतंकी संगठनों की ओर इशारा कर रहे थे।

इस बयान पर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भड़क गए थे। उन्होंने कहा था कि समाज में धर्म के आधार पर विभाजन पैदा करने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “पाला बिशप एक काफी प्रभावशाली व धार्मिक विद्वान हैं। हमलोग पहली बार ‘नारकोटिक्स जिहाद’ नाम का कोई शब्द सुन रहे हैं। नारकोटिक्स की समस्या किसी एक खास धर्म को ही निशाना नहीं बनाती। ये पूरे समाज पर अपना दुष्प्रभाव डालती है। इसे लेकर हम काफी चिंतित हैं।”

डॉ जुमाना ने किया 9 बच्चियों का खतना, सभी 7 साल की: चीखती-रोती बच्चियों का हाथ पकड़ लेते थे डॉ फखरुद्दीन व बीवी फरीदा

अमेरिका में एक मुस्लिम डॉक्टर को 9 बच्चियों का खतना करने के मामले में आरोपित बनाया गया है। इनमें से सभी केवल 7 साल की बच्चियाँ थीं। गुरुवार (16 सितंबर 2021) को उसे कोर्ट में पेश किया गया। फेडरल अभियोजकों के मुताबिक, डॉ जुमाना नागरवाला डॉक्टरों के उस गैंग का हिस्सा है जो इस तरह के घृणित कार्य करने के लिए देश भर की यात्राएँ करते हैं।

डॉ. जुमाना नागरवाला को नवंबर 2018 में देश के अपनी तरह के पहले मामले के दौरान महिला जननांग का खतना करने के मामले में संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस प्रथा पर रोक लगाने वाला कानून असंवैधानिक था। इसके बाद नागरवाला को छोड़ दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजकों ने कोर्ट को बताया कि नागरवाला भारतीय समुदाय में चिकित्सकों के एक गुप्त नेटवर्क का हिस्सा थी, जो मजहब और परंपराओं के नाम पर ऐसा कर रहे थे। गुरुवार अदालती सुनवाई के दौरान खुलासा किया गया कि कैलिफोर्निया और इलिनोइस में महिला चिकित्सक भारतीय मुस्लिम दाउदी बोहरा समुदाय की नाबालिग लड़कियों का खतना कर रहीं थीं। नागरवाला पर आरोप है कि उसने पाँच नाबालिग लड़कियों खतना करने के लिए वाशिंगटन गया था।

अभियोजकों का आरोप है कि नागरवाला ने लिवोनिया क्लीनिक में नौ लड़कियों का खतना किया था, उसमें से चार चार मिशिगन से, दो मिनेसोटा से और तीन इलिनोइस से थीं। क्लीनिक का मालिक डॉ. फखरुद्दीन अत्तर है। आरोप है कि खतना के दौरान फखरुद्दीन अत्तर, उसकी बीवी फरीदा अत्तर ने दर्द से चिल्लाती, रोती बच्चियों के हाथ जकड़े थे। अभियोजकों ने तर्क दिया है कि बीते एक दशक में नागरवाला ने करीब 100 नाबालिग लड़कियों का खतना किया था।

इस साल मार्च में सरकार ने मामले में नया अभियोग लगाया था, जिसके झूठे बयान देने की साजिश और गवाह से छेड़छाड़ शामिल है। अभियोजकों का आरोप है कि नागरवाला और उनके तीन साथियों ने एफबीआई से उनके समुदाय में चल रही खतना परंपरा को लेकर झूठ बोला और समुदाय के बाकी लोगों को भी ऐसा करने के लिए कहा।

खतना का दंश झेल चुकीं सामाजिक कार्यकर्ता मारिया ताहेर ने इस प्रथा को मानवाधिकारों का उल्लंघन, लैंगिक हिंसा और सांस्कृतिक हिंसा करार दिया है।

गौरतलब है कि खतना की प्रथा पर दुनियाभर के 30 से अधिक देशों में इस पर प्रतिबंध लगाया गया है।

बैंक लोन नहीं चुकाने वाली कंपनियों से वसूलेगी नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी: 2,75,000 करोड़ रुपयों पर होगा फोकस

पिछले कई वर्षों से बैंकों के लगातार बढ़ते जा रहे NPA को मैनेज करने और उन्हें आय देने वाली संपत्ति के रूप में परिवर्तित करने के लिए सरकार द्वारा स्थापित एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी की माँग लंबे समय से चल रही थी। वर्ष 2021-22 के बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार इस तरह की एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी बनाने के लिए तैयार है।

बजट घोषणा के प्रस्ताव के अनुसार ऐसी कंपनी के प्रमोटर के रूप में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक आगे आएँगे और केंद्र सरकार की ओर से इसमें इक्विटी का योगदान नहीं रहेगा और सरकार की भूमिका केवल उस सिक्यूरिटी रेसिट्स की गारंटी तक सीमित रहेगी, जिसका इस्तेमाल बैंकों के NPA की खरीद के लिए किया जाएगा। 

अब जबकि नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड की स्थापना हो गई है, अपनी तय भूमिका के अनुसार केंद्र सरकार की कैबिनेट समिति ने इसके लिए 31000 करोड़ रुपए निर्धारित कर दिया है।

क्या होती है एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी

एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई कंपनी होती है, जो बैंकों के NPA (बैंकों द्वारा दिए गए वे कर्ज, जिनका मूलधन और ब्याज कर्जदार से बैंक को वापस नहीं मिल रहे हैं) एक तय कीमत पर खरीद लेती है और फिर अलग-अलग तरीके से उस NPA की रिकवरी का प्रयास करती है। एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक और SARFAESI Act 2002 के नियमों के तहत होती है।

एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा NPA की ऐसी खरीद के परिणामस्वरुप उस NPA को लेकर बैंक के सारे अधिकार इस कंपनी के पास चले आते हैं और फिर कंपनी अपनी सहूलियत के अनुसार उन NPA की रिकवरी करती है। उदाहरण के रूप में यदि NPA बैंकों द्वारा किसी कंपनी को दिए गए कर्ज का परिणाम है तो एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी उस कंपनी (जिसे बैंक ने कर्ज दिया लेकिन कंपनी लौटा नहीं पाई) और उसके बिजनेस के लिए नया मैनेजमेंट खोज सकती है, उसे किसी और कंपनी को बेच सकती है, कंपनी की संपत्ति बेच सकती है, उन्हें लीज पर दे सकती है या फिर उसके लिए नए बॉन्ड या अन्य सिक्यूरिटी जारी कर उसे निवेशकों को भी बेच सकती है। 

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी की आवश्यकता क्यों?

ऐसा नहीं कि इस तरह की कंपनी की स्थापना देश में पहली बार हो रही है। वर्ष 2002 में SARFAESI Act आने के बाद निजी क्षेत्र द्वारा ऐसी कई कंपनियों की स्थापना हुई है। आज देश में ऐसी कुल 28 ARC काम कर रही हैं।

नई कंपनी बनाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि पहले से स्थापित और काम कर रही कंपनियों का ध्यान और क्षमता छोटे NPA के प्रबंधन पर रहा है। नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी का फोकस करीब 70 बड़े खातों में पैदा हुए लगभग 275000 करोड़ के NPA के प्रबंधन, उनकी रिकवरी और उन्हें अच्छे लोन में बदलने पर होगा। इसके अलावा COVID के कारण भविष्य में पैदा होने वाले संभावित NPA को लेकर भी विचार और उनके प्रबंधन की आवश्यकता थी।

एक अनुमान के अनुसार वर्तमान COVID संकट के कारण बैंकों के NPA तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और यह समय की माँग है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार, बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएँ पहले से तैयार रहें। 

केंद्र सरकार की भूमिका 

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी की स्थापना सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर रहे हैं। उनमें कैनरा बैंक इस कंपनी का एक प्रमुख शेयरधारक होगा। वित्त मंत्री द्वारा बजट में की गई घोषणा के अनुसार केंद्र सरकार इस कंपनी में शेयर-होल्डर नहीं रहेगी पर वह इस कंपनी द्वारा जारी की जाने वाली सिक्यूरिटी रसीदों के लिए एक गारंटर की भूमिका निभाएगी।

केंद्र की कैबिनेट समिति द्वारा 31000 करोड़ रुपए NARCL द्वारा भविष्य में बैंकों से उनके NPA की खरीद के लिए जारी की जानेवाली सिक्यूरिटी रसीदों पर गारंटी देने के लिए निर्धारित किया गया है।   

ऐसे कदम का क्या असर होगा?

इस तरह की एक बड़ी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। पहले से काम कर रही ARC सीमित वित्तीय संसाधनों और अन्य कारणों से बड़े NPA के लिए प्रभावशाली ढंग से काम करने में सक्षम साबित नहीं हो सकी हैं।

पिछले करीब 20 वर्षों में भारत सहित अन्य देशों में आए वित्तीय संकटों और उसके परिणामस्वरूप बैंकों के बढ़े NPA के प्रबंधन संबंधी अनुभव ऐसे रहे हैं, जिनके अनुसार ऐसी कंपनियों की आवश्यकता हर बड़े देश की अर्थव्यवस्था को पड़ती है। हाल में आए COVID संकट की वजह से भविष्य में आने वाले वित्तीय संकट को लेकर पहले से की गई तैयारी हमें बेहतर प्रबंधन की दिशा की ओर ले जाएगी।

पिछले कई वर्षों से NPA की वजह से बैंकों की लगातार बिगड़ रही बैलेंस शीट से यदि इस तरह के NPA को कम किया जा सके तो उनके लिए नए लोन देने और नए डिपॉजिट्स लेने के रास्ते आसान हो जाएँगे। वैसे भी भारत की लगातार उभरती अर्थव्यवस्था की माँग है कि वित्तीय संसाधनों के उपयोग, प्रबंधन और उनके बचाव के लिए आवश्यक प्रक्रिया यदि समय रहते स्थापित हो जाए तो हम गलतियों को दोहराने से बच सकते हैं।

‘राहुल गाँधी मोदी को नहीं हरा सकते’: PM के जन्मदिन पर TMC ने कॉन्ग्रेस को दिया ‘धोखा’, वामपंथियों को भी लताड़ा

लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ विपक्षी दलों के एकजुट होने की खबरें आ रही हैं। इधर, तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को विपक्ष का चेहरा नहीं मान रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेहरा बता रहे हैं। 

कोलकाता में हुई टीएमसी की आंतरिक बैठक में यह बात सामने आई। अब जब विपक्षी दलों के एक साथ आने की अटकलें तेज हो रही हैं, तो ऐसे समय में टीएमसी नेता की तरफ से आए इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है।

टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, “हम कॉन्ग्रेस के बगैर गठबंधन की बात नहीं कर रहे हैं। मैं काफी लंबे समय से राहुल गाँधी को देख रहा हूँ। उन्होंने अभी तक खुद को मोदी के विकल्प के तौर पर विकसित नहीं किया है। पूरा देश ममता को चाहता है, इसलिए हम ममता का चेहरा सामने रखेंगे और प्रचार अभियान चलाएँगे।” 

उन्होंने आगे कहा, “राहुल गाँधी नरेंद्र मोदी को नहीं हरा सकते, वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) का देश में कोई महत्व नहीं है।” हाल ही में सीएम बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने भी एक बयान के जरिए कॉन्ग्रेस को कमजोर बताया था।

टीएमसी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के लिए हमेशा सम्मान रखा है, लेकिन जब भी बात राहुल गाँधी की आती है, तो पार्टी के नेताओं ने आपत्ति जाहिर की है। पार्टी चाहती है कि ममता विपक्ष का चेहरा बनें और पार्टी के नेताओं ने यह माँग बार-बार दोहराई है। हालाँकि, सीएम बनर्जी अब तक यही कह रही हैं कि उनके लिए पद से ज्यादा विपक्ष की एकता मायने रखती है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ममता बनर्जी ने कहा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष बीजेपी से ज्यादा मजबूत होगा और इतिहास रचेगा। उनका कहना है कि अगला चुनाव ‘मोदी बनाम पूरा देश’ होगा। पत्रकारों के सवालों पर ममता बनर्जी ने कहा था, “हम पार्टियों से बात करेंगे। एक प्लेटफार्म होना चाहिए, जहाँ से हम साथ चलें। संसद सत्र के बाद सभी पार्टियाँ आपस में बैठ कर बात करेंगी।” उन्होंने यह भी बताया था कि उनकी राहुल और सोनिया गाँधी से मुलाकात अच्छी रही हैं। उन्हें लगता है कि भविष्य में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा। मगर अब टीएमसी की कॉन्ग्रेस के साथ बेरुखी दिखाई दे रही है।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (सितंबर 16, 2021) को जोर देकर कहा कि वह देश को पाकिस्तान या तालिबान नहीं बनने देंगी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी ने दावा किया है कि भवानीपुर में यदि टीएमसी जीती तो यह यह पाकिस्तान बन जाएगा। टीएमसी सुप्रीमो भवानीपुर से उपचुनाव लड़ रही हैं।

बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा, ”मैं बीजेपी की नीति और राजनीति पसंद नहीं करती हूँ। वे केवल धार्मिक आधार पर लोगों को बाँटने की राजनीति करते हैं। नंदीग्राम में उन्होंने कहा था कि यह पाकिस्तान बन जाएगा (यदि टीएमसी जीती) और अब वह कह रहे हैं कि यह (भवानीपुर) पाकिस्तान बन जाएगा। यह शर्मनाक है।”

धर्मांतरण करने वाले नहीं लड़ पाएँगे पंचायत चुनाव: झारखंड में आदिवासियों का ऐलान, ईसाई बने व्यक्ति का शव नहीं दफनाने दिया

झारखंड में अब धर्म परिवर्तन करने वालों को पंचायत चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा। गुरुवार (सितंबर 16, 2021) को बिरसा सरस्वती शिशु मंदिर तपकरा में जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में आयोजित बैठक में सह संयोजक सोमा उरांव ने यह बातें कही। 

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान, मुखिया, प्रमुख और जिला परिषद का पद केवल अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए ही है। जो अपने रीति-रिवाज व परंपरा का निर्वहन एवं संवर्धन करेगा, वैसे लोगों का ही साथ देना होगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है, उन्हें पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेने दिया जाएगा।

इस दौरान जनजाति रक्षा मंच के संयोजक संदीप उरांव ने अपनी धर्म संस्कृति रीति-रिवाज व परंपरा को बचाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी को शिक्षित होना होगा और अपने अधिकारों से संबंधित कानूनों को जानना होगा। उन्होंने कहा कि पाहन, महतो, मुंडा, पानी भरवा वगैरह अपनी परंपरा को छोड़ रहे हैं, उसे सही रास्ते पर लाने की जरूरत है। जो धर्मांतरण कर दूसरे समुदाय में चले गए हैं, वैसे व्यक्ति को पाहन, मुंडा, महतो, पानी भरवा के पदों से तुरंत हटाने की जरूरत है। यह बैठक जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राज्य के टोंटो थाना क्षेत्र के ग्राम दुरूला में ‘हो समुदाय’ के लोगों ने आदिवासी से ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति के शव को अपने ससनदिरी (कब्रिस्तान) में दफनाने नहीं दिया। गाँव में धर्मांतरण कर चुके अमृत लाल बोयपाई की शनिवार (सितंबर 11, 2021) रात मृत्यु हो गई। अमृत के परिवार के लोग उसके शव को हो समुदाय के वंशागत ससनदिरी स्थल पर रविवार की सुबह चुपचाप दफनाने के लिए गढ्ढा खोद रहे थे। 

इसकी भनक गाँव के लोगों को लग गई। इसके बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। शव दफनाने को लेकर दिन भर पंचायती चली। आखिरकार रविवार (सितंबर 12, 2021) देर रात मृतक को उसके घर के आंगन में ही दफनाया गया। ईसाई परिवार को हो समाज के मृत्यु संस्कार और व रीति-रिवाज के अनुसार शव को दफनाने की कोशिश पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सख्त चेतावनी दी गई।

ग्रामीणों ने थाना प्रभारी से शिकायत की कि बाहर के लोग में आकर लोगों को भड़काते हैं। लालच देकर धर्मांतरण कराते हैं और सीधी-सादे ग्रामीणों को पुलिस-प्रशासन का भय दिखाते हैं। थाना प्रभारी ने धर्म प्रचारकों को कड़ी चेतावनी दी कि वे गाँव की शांति-व्यवस्था को न बिगाड़ें, अन्यथा उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

गौरतलब है कि गाँव में लगभग 11 परिवारों ने धर्मांतरण किया है। कुछ धर्मांतरित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार भी किया गया है। इसे लेकर पहले भी कई दौर की पंचायत हुई है। मामला थाना भी पहुँचा है और थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी है।