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अपने जीजा को पर्दे पर कैप्टन विक्रम बत्रा बनाना चाहते थे सलमान खान: ‘शेरशाह’ के निर्माता का खुलासा, सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाया है किरदार

कारगिल युद्ध के हीरो शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘शेरशाह’ दर्शकों को खासी पसंद आ रही है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा जोश, जुनून और जज्‍बे से भरी ‘शेरशाह’ फिल्म में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए क्रिटिक्स के साथ-साथ दर्शकों से भी खूब वाहवाही लूट रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान इस फिल्म में अपने जीजा आयुष शर्मा को मुख्य किरदार में देखना चाहते थे।

इस बात का खुलासा शेरशाह के निर्माता शब्बीर बॉक्सवाला ने एक इंटरव्यू में किया है। उन्होंने बताया कि सलमान ने उनसे संपर्क किया था और फिल्म में लीड रोल के लिए आयुष को लेने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘शेरशाह’ बॉलीवुड में आयुष शर्मा की पहली फिल्म हो सकती है, लेकिन उस वक्त निर्माता ने पहले ही सिद्धार्थ मल्होत्रा का नाम फाइनल कर लिया था।

शब्बीर ने मिड-डे दिए इंटरव्यू में कहा, “सलमान मेरे साथ ‘शेरशाह’ का निर्माण करना चाहते थे। उनकी दिली तमन्ना थी आयुष शर्मा फिल्म में लीड निभाएँ। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि मैं बायोपिक में सिद्धार्थ की भूमिका को लेकर बत्रा के परिवार से पहले ही बात कर चुका था।”

शब्बीर ने आगे कहा, “सलमान ने मुझसे उस समय संपर्क किया जब मैं जंगली पिक्चर्स के साथ बातचीत कर रहा था। वह चाहते थे कि शेरशाह आयुष की पहली फिल्म हो और इसमें मेरे साथ पार्टनरशिप करना चाहते थे। परमवीर चक्र से सम्मानित विक्रम बत्रा के परिवार वालों ने भी सिद्धार्थ के नाम पर हामी भर दी थी। इसके अलावा अभिनेता और परिवार के बीच एक मीटिंग की व्यवस्था पहले ही कर दी गई थी। ऐसे में किसी और एक्टर के लिए सिद्धार्थ को फिल्म से निकालना बेहद गलत होता। सिद्धार्थ पहले से ही फिल्म के पोस्टर में आ गए थे और उन्हें रिप्लेस कर परिवार का भरोसा तोड़ना मुझे सही नहीं लगा।”

निर्माता ने कहा, “कैप्टन बत्रा के परिवार का मुझ पर भरोसा करना मेरे लिए बहुत बड़ा क्षण था। उन्होंने मुझ पर बहुत भरोसा दिखाया और मैं किसी भी कदम पर गलत नहीं होना चाहता था। मैंने अपनी स्थिति के बारे में सलमान को बताया और वो समझ गए।”

बता दें कि ‘शेरशाह’ 12 अगस्‍त को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी ने लीड रोल निभाया है। इसके अलावा शिव पंडित, राज अर्जुन, प्रणय पचौरी, हिमांशु और अशोक मल्होत्रा ने भी फिल्म में बेहतरीन किरदार निभाया है। ‘शेरशाह’ कैप्टन विक्रम बत्रा के भारतीय सेना के सफर के साथ उनकी मोहब्‍बत की अधूरी दास्‍तां को भी दिखाती है।

लाहौर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा फिर तोड़ी, रिजवान ने ‘या अली’ के नारे लगाते दिया अंजाम: देखें Video

19वीं सदी के महानायक ‘शेर-ए-पंजाब’ महाराजा रणजीत सिंह की पाकिस्तान के लाहौर में स्थित प्रतिमा को मंगलवार (17 अगस्त 2021) को तीसरी बार एक कट्टरपंथी ने तोड़ दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वहीं आरोपित रिजवान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पत्रकार शिराज हसन द्वारा अपलोड वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति (रिजवान) आता है औऱ मूर्तियों को तोड़ने लगता है। उसने घोड़े पर बैठे महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा के हाथ को पकड़कर नोच लिया। इसके बाद आरोपित ने पूरी की पूरी प्रतिमा को ही घोड़े से नीचे फेंक दिया, जिससे वो क्षतिग्रस्त हो गई। इस दौरान आरोपित ‘या अली-या अली’ के नारे भी लगा रहा था।

हालाँकि, आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन इससे पहले जब तक उसे रोका जाता वो प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर चुका था। इस दौरान उसने पंजाब के पूर्व शासक के खिलाफ नारेबाजी भी की। ठंडे कांसे से बनी इस प्रतिमा का अनावरण वर्ष 2019 में किया गया था। यह करीब 9 फीट ऊँची है। इसमें सिख सम्राट एक घोड़े पर बैठे हैं और उनके हाथ में तलवार थी।

इससे पहले भी तोड़ी गई है प्रतिमा

पाकिस्तान में ऐसा तीसरी बार है जब महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को उपद्रवियों ने तोड़ा है। इससे पहले अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में लाहौर स्थित महाराजा रणजीत सिंह की 9 फीट ऊँची प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इस मामले में एक मौलाना को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2020 में लाहौर में ही महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

इस मामले में भी एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया था और पूछताछ के दौरान उसने बताया था कि नफरत और कट्टरपंथ के कारण उसने ऐसा किया था। इस दौरान आरोपित युवक ने बताया था कि मौलाना खैम हुसैन रिज़वी ने अपने भाषणों में महाराजा रणजीत सिंह पर मुसलमानों की हत्या का आरोप लगाया था। इसी कारण वो उनसे घृणा करता था।

तालिबान के डर से कार-हेलीकॉप्टर में पैसे भर कर भागे थे राष्ट्रपति गनी, इधर दिल्ली में ‘फ्रेंच फ्राइज’ तल रहा अफगान सैनिक

जहाँ एक तरफ अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी मुल्क छोड़ कर भाग खड़े हुए, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान का एक सैनिक दिल्ली में ‘फ्रेंच फ्राइज’ तल कर अपने जीवनयापन कर रहा है। कभी स्पेशल फोर्स में रहा उमेद अब आलू की ‘फ्रेंच फ्राइज’ तल कर रोज 300 रुपए कमा रहा है। उसका कहना है कि हिंदी सीखने की कोशिश है, लेकिन भविष्य और काम का कुछ पता नहीं कि क्या होगा।

उमेद भी अब कोई अच्छा काम करना चाहता है, लेकिन किसी तरह परिवार चलाने के लिए अभी उसे ‘फ्रेंच फ्राइज’ तल कर बेचने पड़ रहे हैं। तालिबान के साथ लड़ाई में उसके कई दोस्त मारे गए, जिन्हें अब भी याद कर वो भावुक हो उठता है। उमेद के माता-पिता तभी एक दुर्घटना में गुजर गए थे, जो वो दो साल का था। फ़िलहाल रिफ्यूजी कार्ड पर भारत रह रहे उमेद का कहना है कि अब तो वापस अपने मुल्क अफगानिस्तान में भी नहीं लौट सकते।

लाजपत नगर की एक स्ट्रीट फूड पॉइंट पर काम करने वाले उमेद को अफगानिस्तान की हालिया खबरें सुन कर तब के दिन याद आ जाते हैं, जब वो सेना में था। कई जगह उसकी तैनाती हुई थी और उसने कई तालिबानियों को मार भी गिराया था। उसके मिशन के कई वीडियो अब भी तालिबान के पास हैं। इसीलिए, उसे तालिबान ने ब्लैकलिस्ट भी कर रखा है। उमेद को डर है कि अफगानिस्तान जाते ही उसे मार डाला जाएगा।

उमेद के सिर, हाथ और चेहरे पर भी जख्म के निशान हैं। ये निशान केवल गोली के छर्रे से हुए, उनका नसीब ठीक था कि उन्हें गोली नहीं लगी। उन्होंने अपने सामने कई दोस्तों को मरते और गोली खाते देखा। उमेद का कहना है कि अफगानिस्तान सरकार कुछ नहीं कर पाती थी और तालिबान ही सबसे ऊपर था। उसने बताया कि भागने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर तालिबान की फौज में जाने के सिवा और कोई विकल्प नहीं था।

उमेद ने 18 साल की उम्र में ही फौज जॉइन कर लिया था। उसका कहना है कि भारत अच्छा देश है, लेकिन काम मिलना मुश्किल है क्योंकि पुलिस से लेकर एमसीडी तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। काबुल से लौटे एक अन्य फौजी ने बताया कि सुरक्षा बलों के लिए वहाँ स्थिति और भी गड़बड़ है। उसे बस इसका डर है कि उसके घर तालिबान न पहुँच जाए। परिवार डरा हुआ है। फ़ौज के लोग सबसे ज्यादा अफगानिस्तान के निशाने पर हैं।

उधर रूसी दूतावास ने बताया कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति (अब पूर्व) अशरफ गनी अपनी कार और हैलीकॉप्टर में रुपए भर कर तजाकिस्तान ले गए हैं। हालाँकि, ये किसी को नहीं पता है कि अशरफ गनी फ़िलहाल कहाँ पर हैं। रूस का कहना है कि उनकी 4 कारों व एक हैलीकॉप्टर में पैसे भरे हुए थे। कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान के हालिया बजट में से जो भी रुपए बचे, वो सब वो अपने साथ ले गए।

ट्विटर अकाउंट अनलॉक करवाने को राहुल गाँधी ने बोला झूठ? दिल्ली की कथित रेप पीड़िता की माँ का सहमति देने से इनकार

क्या कॉन्ग्रेस के पूर्व राहुल गाँधी ने ट्विटर अकाउंट अनलॉक करवाने के लिए झूठ बोला था? यह सवाल दिल्ली की उस 9 वर्षीय बच्ची की माँ के एक बयान से खड़ा हुआ है, जिसकी कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। पीड़ित माँ का कहना है कि तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले राहुल गाँधी ने उनसे कोई अनुमति नहीं माँगी थी।

POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट नाबालिग रेप पीड़िता या उसके माता-पिता की तस्वीर साझा करने को प्रतिबंधित करता है ताकि उनकी पहचान उजागर न हो। बावजूद इसके राहुल गाँधी ने पीड़िता के माता-पिता की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी, जिसके बाद उनका अकाउंट लॉक कर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में पीड़िता की माँ ने खुलासा किया है कि उसने राहुल गाँधी के साथ बातचीत की थी। लेकिन सोशल मीडिया पर पहचान उजागर करने के लिए किसी तरह की कोई सहमति नहीं ली गई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इंटरव्यू लेने वाले ने पीड़िता की माँ से पूछा कि क्या उसने अपनी पहचान उजागर करने के लिए किसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, तो उसने कहा कि उसने ऐसे किसी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पीड़िता की माँ के मुताबिक, “न तो मैंने और न ही मेरे पति ने किसी कागजात पर हस्ताक्षर किए है।” उसने कहा कि उसे नहीं पता था कि उसकी तस्वीर साझा की जा रही थी। महिला का कहना है कि उसकी एकमात्र चिंता यह है कि उनकी बेटी को न्याय मिले और अपराधियों को मौत की सजा मिले।

टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में बच्ची की माँ ने बताया कि राहुल गाँधी ने उन्हें न्याय दिलाने में मदद करने का वादा किया था, लेकिन किसी तरह की कोई इजाजत नहीं ली थी। महिला ने कहा, “हमने अपनी तस्वीर नहीं दी, उन्होंने खुद ली।” इसके साथ ही पीड़िता की माँ ने इस बात का भी खुलासा किया कि वो और उनके पति दोनों अनपढ़ हैं। उन्होंने न तो किसी कागज पर हस्ताक्षर किए हैं और न ही किसी पर अपना अँगूठा लगाया है।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के अकाउंट ‘INC_Television’ ने 14 अगस्त को ट्वीट किया था कि पीड़िता के माता-पिता ने इमेज शेयर करने के लिए लिखित में अपनी सहमति दी थी। राहुल गाँधी के ट्विटर अकाउंट को अनलॉक करने के लिए इसी दावे का इस्तेमाल किया गया था।

राहुल गाँधी बनाम ट्विटर

बलात्कार पीड़िता की पहचान बताकर राहुल गाँधी द्वारा कानून का उल्लंघन करने के बाद एनसीपीसीआर ने ट्विटर को पत्र लिखा था कि अगर खुद राहुल गाँधी इसे नहीं हटाते हैं, तो माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 24 घंटे के भीतर ट्वीट को हटा दे। इसके बाद ट्विटर ने ट्वीट को हटा दिया और राहुल गाँधी के खाते को बंद कर दिया था। नियमों के मुताबिक, पहली बार अपराध करने के कारण उनके अकाउंट को 12 घंटे के लिए बंद किया गया। हालाँकि, बाद में रिपोर्ट आने के बाद कि उन्हें पीड़िता के माता-पिता से तस्वीर का उपयोग करने की ‘अनुमति’ मिली थी, ट्विटर ने पलक झपकते ही राहुल गाँधी के अकाउंट को बहाल कर दिया था।

ट्विटर द्वारा राहुल के अकाउंट पर कार्रवाई होने के बाद कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने POCSO अधिनियम का उल्लंघन करने वाले राहुल गाँधी के साथ बलात्कार पीड़िता के माता-पिता की ‘एकजुटता’ वाली तस्वीर ट्वीट की। हालाँकि, उन ट्वीट्स को भी ट्विटर ने अंततः हरी झंडी दिखा दी, लेकिन कुछ खातों को बंद भी किया गया। इस बीच कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने एकजुटता दिखाने के लिए अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर और नाम बदलकर राहुल गाँधी कर लिया। हालाँकि, यह भी ट्विटर नीति का उल्लंघन था और फिर से कई नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लॉक कर दिया गया।

इसके बाद कॉन्ग्रेस ने अपना रोना शुरू करते हुए ट्विटर पर भारत सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। इस बीच कई नेटिज़न्स ने ये अनुमान लगाया कि ये ट्विटर और कॉन्ग्रेस के बीच शैडोबॉक्सिंग हो सकती है, ताकि ट्विटर खुद को तटस्थ दिखा सके और आने वाले चुनावों के दौरान भाजपा नेताओं के ट्विटर अकाउंट्स को निलंबित कर सके। अब जबकि ट्विटर ने राहुल गाँधी का अकाउंट अनलॉक कर दिया है, उन्होंने अभी तक कोई ट्वीट नहीं किया है।

‘दारुल उलूम’ वाले देवबंद में ATS कमांडो सेंटर खोलेगी योगी सरकार, इसी इस्लामी विचारधारा से प्रेरित है तालिबान

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निर्णय लिया है कि देवबंद में ATS (Anti-Terrorism Squad) का सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसे ‘आतंक निरोधी दस्ता’ कहा जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा है,”तालिबान की बर्बरता के बीच यूपी की खबर भी सुनिए। योगीजी ने तत्काल प्रभाव से ‘देवबंद’ में ATS कमांडो सेंटर खोलने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने जानकारी दी है कि इसके लिए युद्धस्तर पर काम शुरू भी हो गया है और प्रदेश भर से चुने हुए करीब डेढ़ दर्जन तेज-तर्रार ATS अधिकारियों की यहाँ तैनाती की जाएगी। बता दें कि देवबंद में ही ‘दारुल उलूम’ स्थापित है, जहाँ से इस्लामी देवबंदी अभियान शुरू हुआ था। तालिबान को भी इसी विचारधारा से प्रेरित बताया जाता है। आतंक के मामले में भी देवबंद बदनाम रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने दो हजार वर्गमीटर जमीन पहले ही एटीएस को एलॉट कर दी है।

जानकारी दे दें कि देवबंद से पहले लखनऊ और नोएडा में एटीएस का कमांडो ट्रेनिंग सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। लखनऊ में अमौसी और नोएडा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास इन सेंटर्स की स्थापना का निर्णय लिया गया है। दोनों स्थानों पर जमीन भी फाइनल कर ली गई है। फरवरी 2019 में देवबंद के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ISI के एजेंट्स भी यहाँ से दबोचे गए थे। यहाँ से कुछ ही दूरी पर सहारनपुर से भी कई आतंकी पकड़े जा चुके हैं।

देवबंद में 300 से ज्यादा मदरसे हैं। ‘दारूल उलूम’ के यहाँ होने की वजह से देश-दुनिया के मुस्लिम छात्र शिक्षा लेने यहाँ आते हैं। देवबंद के बारे में देश-विदेश के मुस्लिम जानते हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से यहाँ आतंकी गतिविधियाँ होने के कारण इसका नाम अब बदनाम हो गया है। देवबंद के इस कमांडो सेंटर से देवबंद, सहारनपुर, मेरठ तक का एरिया कवर हो सकता है। इन जिलों में कई संवेदनशील क्षेत्र हैं। 

…तो अलीगढ़ हो जाएगा हरिगढ़: 1992 में नाम बदलने के कल्याण सिंह की कोशिशों में कॉन्ग्रेस ने डाला था अड़ंगा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का नाम बदलकर हरिगढ़ किया जा सकता है। इस संबंध में सोमवार (16 अगस्त 2021) को नवगठित जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया। नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा गया है।

गोविंद वल्लभ सभागार के किसान भवन में आयोजित हुई बैठक की अध्यक्षता विजय सिंह ने की। इस दौरान सदस्य केहरी सिंह और उमेश यादव ने अलीगढ़ का नाम बदलने की माँग की। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा पंचायत सदस्यों ने धनीपुर मिनी एयरपोर्ट का नाम पूर्व सीएम कल्याण सिंह पर रखने की माँग भी की। जिले में एक नई चीनी मिल बनवाने का भी प्रस्ताव रखा गया। साथ ही स्वर्गीय राजा बलवंत सिंह के नाम से एक द्वार का निर्माण करने का भी प्रस्ताव सदन में लाया गया। इस दौरान केवल तीन मिनट के भीतर अध्यक्ष ने सात प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ जिले का नाम बदलकर हरिगढ़ रखने का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले 1992 में पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने भी ऐसी ही कोशिश की थी, लेकिन उस दौरान केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके अलावा साल 2015 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हरिगढ़ नाम रखने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।

इससे पहले अक्टूबर 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था। इसका पुराना नाम प्रयागराज ही था। सीएम योगी ने प्रयागराज नाम रखने का समर्थन करते हुए कहा था कि जहाँ दो नदियों का संगम होता है, उसे प्रयाग कहा जाता है। उत्तराखंड में भी ऐसे कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग स्थित है। इसके अलावा फैजाबाद का भी नाम बदला गया है।

‘जब मुल्ले चाटे जाएँगे, भक्त जीजा-जीजा चिल्लाएँगे’: कंगना के साथ ‘रिजवान’ की तस्वीरों पर वकील ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी ने अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनके स्टाफ ‘रिजवान’ की शेयर की जा रहीं तस्वीरों का सोशल मीडिया में गलत इस्तेमाल करने वालों को चेताया है। रिजवान सिद्दीकी ने कहा, “जिन लोगों ने भी मेरे क्लाइंट की इन तस्वीरों का बुरी नीयत से और शरारतपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया है, इनका इस्तेमाल कर अफवाह और झूठ फैलाया है, उन्हें पता होना चाहिए कि अगर ऐसे पोस्ट्स को नहीं हटाया गया तो ऐसा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करूँगा।”

साथ ही उन्होंने आशा जताई कि इन तस्वीरों को गलत नीयत से पोस्ट करने वाले अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देंगे और इन्हें हटाएँगे। बता दें कि सोशल मीडिया में कई हैंडल्स ने इन तस्वीरों को शेयर कर के ‘कंगना रनौत द्वारा रिजवान को किस करने’ की बात कही थी और दोनों को बदनाम करने की कोशिश की थी। कंगना रनौत विरोधी इन सोशल मीडिया हैंडल्स ने उनके फैंस को नाराज़ करने के लिए जानबूझ कर ऐसा किया था।

बता दें कि कंगना रनौत के साथ जिस रिजवान की तस्वीर है और जो अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी हैं, ये दोनों अलग-अलग लोग हैं। हाल ही में कंगना ने अपने स्टाफ रिजवान को 29वीं जन्मदिन की बधाई दी थी और तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा था, “तुमने अपने जीवन का हर एक मिनट मेरे पैशन को दे दिया है। कितना भी कठिन लोकेशन हो या कितने घंटे भी काम करन हो, तुम हमेशा डटे रहे। मैं आशा करती हूँ तुम इसी तरह आगे बढ़ते रहो और तुम्हारी शादी भी हो जाए।”

‘रोफ़ल स्वरा 2.0’ नाम के ट्विटर हैंडल ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “भक्तो तुम्हारी दीदी के बाजू में जो लड़का है उसका नाम “रिज़वान” है।”

वहीं निदा फातिमा नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “कंगना रनौत और रिज़वान भाई के लिए एक शब्द।”

जुनैद अहमद खान ने भी इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “हिंदू मुस्लिम एकता की ज़बरदस्त मिसाल कायम करती कंगना और रिज़वान। जब जब मुल्ले चाटे जाएँगे, अंधभक्त जीजा-जीजा चिल्लाएँगे।”

दाऊद नदाफ नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा था, “बरनोल मोमेंट्स फ़ॉर गोब्बरभक्त, कंगना विथ रिज़वान ख़ान।” साथ ही उसने भी इन तस्वीरों को शेयर किया था।

रविंद्र सिंह आनंद नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “रिज़वान के खिलाफ़ धर्म और संस्कृति बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करती हुई कट्टर हिन्दू संस्कृति की रक्षक कंगना रनौत!”

कंगना रनौत आजकल लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने ‘धाकड़’ की शूटिंग ख़त्म की है, जिसके बाद एक पार्टी की कई तस्वीरें उन्होंने पोस्ट की थीं। कुछ दिनों पहले गीतकार जावेद अख्तर ने आरोप लगाया था कि बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने जानबूझकर अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुरोध वाली याचिका में अदालत से कुछ तथ्य छिपाए हैं। लेकिन, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

2024 में समाप्त हो जाएगा मोदी का कार्यकाल, कानून के मुताबिक फिर नहीं बन पाएँगे PM: दावे में कितना दम

भारतीय कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2024 का चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देता है। यह दावा ट्विटर पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता एंड्रिया डिसूजा उर्फ रिया ने किया है। उनका कहना है कि 2024 में मोदी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इसके बाद वह कानूनन प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी नहीं कर सकते। इस कांस्पीरेसी थ्योरी को हवा देते हुए रिया ने यह भी पूछ लिया है कि बीजेपी का अगला पीएम चेहरा कौन होगा।

रिया का ट्वीट

हालाँकि, एंड्रिया के दावे पूरी तरह से गलत हैं। भारत का संविधान किसी भी भारतीय नागरिक को देश का प्रधानमंत्री बनने का अधिकार देता है, बशर्ते वह व्यक्ति लोकसभा या राज्य सभा का सदस्य हो। इसके अलावा भारत में लोकसभा और राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु क्रमशः 25 और 30 वर्ष निर्धारित है।

एक प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा करने की कोई सीमा नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में इन चीजों को इस तरह से समझा जा सकता है कि जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत के अंतरिम प्रधान मंत्री थे और उन्हें 1952, 1957 और 1962 के चुनावों में तीन बार फिर से चुना गया था।

हालाँकि, अमेरिका में कार्यकाल सीमित है। लेकिन भारत अपने संविधान से चलता है न कि अमेरिकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 का आम चुनाव भी लड़ सकते हैं और विजय हासिल करने पर तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ भी ले सकते हैं। ऐसे में जाहिर है कि एंड्रिया उर्फ रिया एक काल्पनिक कानून की बात कर रही हैं।

कुछ लोगों ने तो यहाँ तक ​​कह दिया कि अगर रिया और अमीबा के बीच (बुद्धि का) मुकाबला हुआ तो अमीबा जीत जाएगा।

ऐसे कठिन समय में रिया की बदौलत नेटिज़न्स को खुलकर हँसने का मौका मिला, इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए।

एंड्रिया उर्फ ​​रिया खुद को पूर्व आरजे और वीजे बताती है जो ज़ी टीवी में काम कर चुकी हैं। वह वर्तमान में भारतीय युवा कॉन्ग्रेस से जुड़ी हुई हैं। वह ‘कामसूत्र 3डी’ और ‘फॉर एडल्ट्स ओनली’ के साथ ही पाकिस्तानी धारावाहिक ‘माटी’ में भी काम कर चुकी हैं।

दुबई में चीन ने बना रखी है ‘गुप्त जेल’, चीनी महिला का दावा- उइगर मुस्लिमों को रखकर किया जाता है टॉर्चर

उइगर मुस्लिमों को चीन किस तरह प्रताड़ित करता है यह अब छिपा नहीं है। शिनिजियांग प्रांत में इनके लिए बनाए गए यातना शिविरों को वह ‘रि एजुकेशन’ कैंप कहता है। यहाँ उइगर मुस्लिमों को अपनी परंपरा, मजहबी तौर-तरीकों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। अब एक चीनी महिला ने दावा किया है कि उइगरों को प्रताड़ित करने के लिए चीन ने दुबई में भी इस तरह की एक गुप्त जेल बना रखी है। इस महिला की पहचान वू हुआन के तौर पर हुई है।

चीन प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए इधर-उधर भाग रही वू हुआन (26) ने दावा किया है कि उसे दुबई की इस खुफिया जेल में 8 दिनों तक रखा गया था। उसने ये भी बताया कि उसका मंगेतर चीन की सरकार के असंतुष्ट था। वू हुआन के मुताबिक, उसे दुबई में चीन की ‘सीक्रेट जेल’ में दो अन्य उइगर मुस्लिम बंदियों के साथ रखा गया था।

यूक्रेन स्थित एक सेफ हाउस में 30 जून, 2021 को एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान वू ने बताया कि दुबई के एक होटल से चीनी अधिकारियों ने उसे किडनैप कर लिया था। इसके बाद वे उसे एक विला में ले गए, जिसे उन्होंने सीक्रेट जेल बना रखा था। यहीं पर वो दो अन्य उइगर मुस्लिमों से मिली थी। नीदरलैंड में शरण माँगने वाली वू ने मीडिया को बताया कि 8 दिनों तक डिटेंशन कैंप में रखने के बाद उसे 8 जून को रिहा कर दिया गया था। महिला ने बताया कि इन 8 दिनों के दौरान उसे धमकी दी गई औऱ उसके मंगेतर पर उसे परेशान करने का आरोप लगाते हुए कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।

हालाँकि, चीन द्वारा उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न किए जाने की खबरें नई नहीं हैं। लेकिन वू और उनका 19 वर्षीय मंगेतर वांग जिंग्यु उइगर नहीं, बल्कि हान चीनी हैं और ये समुदाय चीन का बहुसंख्यक समाज है। रिपोर्ट के मुताबिक, वांग ने चीनी अधिकारियों द्वारा साल 2019 के हांगकांग विरोध-प्रदर्शनों के दौरान चीनी मीडिया के कवरेज की आलोचना करने और भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के आचरण पर सवाल उठाया था। इसी कारण चीनी अधिकारियों ने उन्हें वांटेड करार दे दिया था।

एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, वो वू के बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता है क्योंकि चीनी अधिकारियों ने उन्हें जिस स्थान पर रखा था, वो उस स्थान के बारे में सटीक जानकारी नहीं दे पा रही हैं। हालाँकि उनके पासपोर्ट के मुहर, एक चीनी अधिकारी द्वारा पूछताछ की फोन रिकॉर्डिंग और उनके द्वारा जेल से पादरी दंपति को भेजे गए मैसेज उनके दावे को प्रमाणित करते हैं। इस संबंध में चीन के विदेश मंत्रालय और दुबई स्थित उसके वाणिज्य दूतावास ने कई बार संपर्क करने के बावजूद जवाब नहीं दिया।

चीनी क्षेत्र में ब्लैक साइट्स चल रही हैं ये तो सभी जानते थे। लेकिन चीन ने विदेशों में भी ऐसे डिटेंशन कैंप बना रखे हैं इसका खुलासा केवल वू के ही बयानों से होता है। ब्लैक साइट्स ऐसी खुफिया जेल होती है जहाँ कैदियों पर अपराध का आरोप नहीं लगाया जाता है। यही कारण होता है कि यहाँ बंद कैदियों के पास कोई भी कानूनी सहारा भी नहीं होता है। इस तरह की खुफिया जेलें अक्सर होटल या गेस्टहाउस के रूप में होती हैं। चीन से असंतुष्ट या चीनी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए इस तरह का जगहों का इस्तेमाल किया जाता है।

नमाज पढ़ने पर हिरासत में लिए गए

रेडियो फ्री एशिया (RFA) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में बकरीद के दौरान बिना इजाजत नमाज पढ़ने के आरोप में चीनी अधिकारियों ने 170 से अधिक उइगर मुस्लिमों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। यह घटना शिनजियांग के अक्सू शहर की अयकोल बस्ती में हुई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, 50 वर्ष से कम आयु के लगभग 170 उइगरों ने भी आदेशों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा की थी। नतीजतन, उन्हें ईद के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए हिरासत में रखा गया था।

काबुल का दूतावास खाली करेगा भारत, हिन्दुओं व सिखों से भी संपर्क में: ‘दोस्त’ अफगानों के साथ भी खड़ी रहेगी सरकार

अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि काबुल में भारतीय राजदूत के साथ ही दूतावास के अन्य कर्मचारियों को भी त्वरित रूप से वापस बुलाया जाएगा। केंद्रीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्विटर के जरिए ये जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि भारत सरकार अफगानिस्तान में फँसे हिन्दुओं, सिखों व अन्य के साथ संपर्क में है।

जैसे ही कमर्शियन फ्लाइट सेवा फिर से शुरू होती है, उन्हें वापस बुलाने के लिए कार्यवाही शुरू की जाएगी। अगले दो दिनों में कमर्शियल फ्लाइट ऑपरेशन्स शुरू किए जा सकते हैं। सोमवार (16 अगस्त, 2021) की दोपहर को एक एयर इंडिया का फ्लाइट अफगानिस्तान से 46 लोगों को लेकर भारत पहुँचा। साथ ही वहाँ से कुछ उपकरण वगैरह भी लाए गए, जो भारत के थे। दिल्ली में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में भारतीय कर्मचारियों को वापस लाने पर चर्चा हुई।

अफगानिस्तान में मौजूद भारतीय दल वहाँ के स्थानीय अधिकारियों से बात कर रहा है, ताकि एयरपोर्ट का इस्तेमाल कर के भारतीयों को वापस लाया जा सके। भारत सरकार हर गतिविधि की करीब से निगरानी कर रही है। MEA ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है और पल-पल घटनाक्रम बदल रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जा रही है।

उन्हें वापस बुलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स जारी किए गए हैं और भारतीय नागरिकों को सहायता भी मुहैया कराई जा रही है। MEA ने कहा कि अभी भी वहाँ ऐसे भारतीय नागरिक हैं जो वापस आना चाहते हैं, उनसे हम संपर्क में हैं। अफगानिस्तान के सिख व हिन्दू समुदाय के प्रतिनिधियों से भी भारत सरकार संपर्क में है। अफगानिस्तान छोड़ कर भारत आने वालों के लिए केंद्र सरकार व्यवस्था करेगी।

केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई ऐसे कई अफगानी नागरिक भी हैं जो शिक्षा, जनसंपर्क और आपसी विकास को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों और भारत के साथ मिल कर काम कर रहे थे, इसीलिए भारत सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। कमर्शियल ऑपरेशन बंद होने के कारण भारत का निकासी अभियान रुका हुआ है। भारत सरकार ने कहा है कि वो अपने नागरिकों के साथ-साथ अफगानिस्तान में अपने हितों की भी सुरक्षा करेगी।

एयर इंडिया भी फ़िलहाल अफगानिस्तान के एयरस्पेस को नज़रअंदाज़ कर के चल रहा है। इसीलिए, सोमवार को शिकागो-दिल्ली की फ्लाइट्स को UAE के ऊपर से ले जाया गया। काबुल एयरपोर्ट के अधिकारियों ने वहाँ के एयरस्पेस को नियंत्रण से बाहर बताया था। काबुल एयरपोर्ट पर फँसे हजारों लोग वहाँ से निकलने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। तालिबान के शासन संभालने के बाद वहाँ से निकलने के लिए लोग बेचैन हैं।