कोरोना संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र में मुहर्रम को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 अगस्त 2021) को शिया मुस्लिम समुदाय को जुलूस निकालने इजाजत दे दी। हालाँकि कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी स्पष्ट किया है कि जुलूस के दौरान लोगों को कोरोना के मद्देनजर शर्तों और गाइडलाइंस का पालन करना होगा।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस केके टेट और पीके चव्हाण की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल के अलावा भी कई नियमों का पालन करना होगा। फैसले के मुताबिक, 20 अगस्त 2021 को 3 घंटे तक चलने वाले इस जुलूस में प्रति ट्रक 15 व्यक्ति और 7 ऐसे ट्रक शामिल हो सकेंगे। इन ट्रकों में उन्हीं लोगों को चढ़ने की इजाजत होगी, जिन्होंने कोरोना के सभी डोज लगवाए होंगे। इस दौरान केवल 5 ताजिया को ही निकलने दिया जाएगा। इसके अलावा 105 व्यक्तियों में से केवल 25 को ही कब्रिस्तान के अंदर जाने की अनुमति होगी।
बता दें कि इस मामले में ऑल इंडिया इदारा तहफ़ाज़-ए-हुसैनियत नाम के एक एनजीओ ने याचिका दायर की थी। इसमें उसने महाराष्ट्र सरकार द्वारा लोकल ट्रेनों, दुकानों, मॉल और रेस्तराँ के आसपास प्रतिबंधों में ढील देने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दरअसल, ये लोग 18 से 20 अगस्त 2021 तक प्रतिदिन 2 घंटे के लिए लगभग 1,000 व्यक्तियों के जुलूस की अनुमति चाहते थे।
एनजीओ की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील राजेंद्र शिरोडकर ने अदालत में कहा कि इमाम हुसैन के मकबरे की प्रतिकृति के रूप में ताजिया निकालना और भोजन और पानी के स्टॉल वाले सबील स्थापित करना “शिया धर्म का आंतरिक हिस्सा”, जिसके बिना मुहर्रम की रस्में अधूरी रहेंगी। उन्होंने बताया कि भले ही 1000 व्यक्तियों के लिए प्रार्थना की गई हो, लेकिन कोर्ट के हर आदेश का पालन करेंगे।
सरकार के फैसले पर उठाया सवाल
एडवोकेट शिरोडकर ने अदालत में तर्क देते हुए सरकार के प्रतिबंधों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में महामारी का प्रकोप इस बार अलग है। वकील ने दावा किया कि पिछले साल जब उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में इस तरह का जुलूस निकाला गया था, तब पुलिस द्वारा किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं दी गई थी।
जुलूस को नियंत्रित कर पाना मुश्किल
एनजीओ की याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील पूनम कंथारिया ने सर्कुलर पर भरोसा करते हुए कहा कि नवीनतम परिपत्र में जुलूस की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर लोग बड़ी संख्या में सड़क पर निकलते हैं तो इससे शहर के पुलिस थानों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा, “भीड़ और जुलूस को नियंत्रित करना मुश्किल है, विशेष रूप से एक धार्मिक जुलूस।”
हालाँकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनजीओ को यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है कि प्रत्येक ट्रक में धर्म का कोई न कोई मुखिया हो या कोई जिम्मेदार व्यक्ति हो जो जुलूस के दौरान भीड़ को नियंत्रित कर सके। इसके साथ ही कोर्ट ने शिरोडकर से एक वचन भी लिया कि 20 अगस्त, 2021 को निकाले जाने वाले जुलूस के दौरान इस तरह के सभी अनुपालनों का अक्षरश: पालन किया जाएगा।
कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। देश में सोमवार (16 अगस्त 2021) को देश में 88.13 लाख लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। यह एक दिन में टीकाकरण का सबसे हाईएस्ट रिकॉर्ड है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अपडेट के अनुसार, भारत में अब तक 55 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है।
इसी साल जनवरी में शुरू हुए दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के 213वें दिन (16 अगस्त 2021) को 70.76 लाख लाभार्थियों को पहला शॉट मिला और 17.37 लाख लोगों को दूसरी खुराक दी गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कार्यक्रम की सफलता पर टिप्पणी करते हुए बताया कि देश को 10 करोड़ का आँकड़ा छूने में 85 दिन लगे, 20 करोड़ का आँकड़ा पार करने में 45 दिन और 30 करोड़ तक पहुँचने में 29 दिन और लगे। भारत ने अगले 24 दिनों में 40 करोड़ का आँकड़ा छू लिया और 50 करोड़ टीकाकरण को पार करने में 20 दिन और लग गए।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र क्रमशः 5,98,06,936 और 5,00,55,493 खुराक के साथ चार्ट में सबसे आगे हैं। इसके बाद गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक का नंबर आता है। CoWIN पोर्टल पर जारी आँकड़ों के अनुसार, देश ने अगस्त के महीने में प्रति दिन (कुछ दिनों को छोड़कर) औसतन 50 लाख लोगों का टीकाकरण किया है।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी 2 करोड़ से अधिक टीके
एक अपडेट में स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुलासा किया है कि कोरोना टीकों की करीब 2.25 करोड़ खुराक अभी भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास उपलब्ध हैं, जिन्हें लगातार लोगों को लगाया जा रहा है।
इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है, “सभी स्रोतों के माध्यम से अब तक राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को 56.81 करोड़ (56,81,32,750) से अधिक वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 1,09,32,960 डोज अभी भी खुराक पाइपलाइन में हैं।” मंत्रालय का कहना है कि केंद्र द्वारा प्रदान की गई कुल वैक्सीन में खराब हुए डोज समेत कुल खपत 55,11,51,992 है।
CoWIN डैशबोर्ड के अनुसार, इस रिपोर्ट के समय मंगलवार (17 अगस्त 2021) की सुबह 1 लाख से अधिक वैक्सीन खुराक दी जा चुकी है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण पिछले कुछ दिनों से अपने पुराने कपड़े नीलाम कर रही हैं। इस नीलामी से होने वाली कमाई को वह ‘Live Love Laugh Foundtaion’ को डोनेट करेंगी। हालाँकि, ये नेक काम करने के बाद भी वह विवादों में हैं। दरअसल, कपड़ों की नीलामी के बीच कुछ सोशल मीडिया यूजर्स की नजर दीपिका पादुकोण के उन कपड़ों पड़ी, जो उन्होंने जिया खान और प्रियंका चोपड़ा के पिता के अंतिम संस्कार के दौरान पहने थे।
इसके बाद से वह नेटिजेंस के निशाने पर आ गई हैं। ट्विटर पर कुछ यूजर्स दीपिका की इस हरकत को चीप बता कर उन्हें जमकर खरी खोटी सुना रहे हैं। ट्विटर पर एक यूजर को दीपिका पादुकोण के कपड़ों की नीलामी का पोस्ट देखकर काफी गुस्सा आया। उनका दावा है कि ‘छपाक’ फिल्म की अभिनेत्री ने ये कपड़े जिया खान और प्रियंका चोपड़ा के पिता के अंतिम संस्कार के वक्त पहने थे।
शरण्या शेट्टी के अकाउंट से ट्वीट किया गया, ”मैं बहुत हैरान हूँ, मेरी पसंदीदा दीपिका पादुकोण ने अपने 2013 के ऐसे कपड़े नीलाम किए हैं जो कि डिजाइनर नहीं हैं। फिर से बताती हूँ 2013 में उन्होंने ये कपड़े अलग-अलग अंतिम संस्कारों में पहने थे।”
I am so shocked.. my favourite Deepika Padukone has auctioned her non couture clothes from 2013.. I repeat 2013 that she wore to different funeral events. ?? Low blow! pic.twitter.com/2vFPoVEeWV
इस ट्वीट पर कई यूजर ने दीपिका पादुकोण को लेकर नेगेटिव कमेंट किए हैं। भुजंग नाम के यूजर ने लिखा, ”आप क्रोनोलॉजी समझे…कोई नई फिल्म नहीं आ रही है, जो आ भी रही है, वो चीनी वायरस के कारण फ्लॉप हुई। जेएनयू में कोई आंदोलन नहीं। आय के सभी स्रोत खत्म हो गए हैं। बेवड़ा दूसरी हिरोइन पर सारा पैसा खर्च कर रहा है। अब गाँजा का पैसा कहाँ से लाए बेचारी।”
Aap Chronology samajhiye..No new films coming, whichever came flopped(damn Sanghis), due 2 Chinese virus, no agitation at JNU. All sources of income dried up. Bewada is spending all savings on other Heroin(e) Ab Gaanjaa ka paisa kaha see laye bechari @deepikapadukone
वहीं, जोगेंद्र शेखावत नाम के यूजर ने शरण्या शेट्टी की पोस्ट पर कमेंट किया, ”ये JNU में जाकर टुकड़े टुकड़े गैंग, अफजल गुरु, सफूरा जरगर, अरफा खानुम की राजनीति चमकाने के साथ-साथ अपने दुबई बैठे आकाओं को भी खुश कर आई थी।”
एक अन्य यूजर ने लिखा, “इतनी घटिया हरकत.. हर चीज के लिए वो पीआर के साथ दान करने के लिए जाती हैं, लेकिन वह अपने पुराने कपड़े भी दान नहीं कर सकतीं? किस तरह के लोग हैं ये, जाओ सेकेंड हैंड सामान खरीदो.. पागल।”
Such a cheap act.. For everything they go for donations with PR all over but she couldn’t even donate her old clothes?? What kind of ppl go and buy these second hand stuff.. crazy ..
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी, कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित 6 नेताओं के खिलाफ यौन शोषण के मामले को अपने हाथों में ले लिया है। सीबीआई ने मंगलवार (17 अगस्त) को इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इस संबंध में केरल में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में भी FIR दर्ज की गई थी।
The CBI has officially taken over the cases of sexual abuse filed by a woman entrepreneur against six prominent politicians, including Kerala’s former CM Oommen Chandy, AICC gen secy KC Venugopal. The FIR in this regard was filed before the Chief Judicial Magistrate Court here.
धोखाधड़ी के कई मामलों में आरोपित महिला ने चांडी, एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल, कॉन्ग्रेस विधायक एपी अनिल कुमार, कॉन्ग्रेस सांसद हिबी ईडन, अदूर प्रकाश और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एपी अब्दुल्लाकुट्टी के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। आरोपितों के खिलाफ आर्थिक शोषण, भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न की धाराएँ लगाई गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की जाँच पहले क्राइम ब्रांच ने की थी, जिसने आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने 24 फरवरी को मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की। क्राइम ब्रांच ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट देते हुए कहा था कि उन्हें चांडी को इस मामले में फँसाने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं, यूडीएफ ने आरोप लगाया था कि इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करना राजनीति से प्रेरित कदम था।
गौरतलब है कि शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह सौर परियोजनाओं से संबंधित मुद्दे पर इन नेताओं से मिलने गई तब इन सभी ने उसका यौन शोषण किया था। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी बताया था कि दुर्व्यवहार ज्यादातर मंत्रियों के आधिकारिक आवास, विधायक छात्रावासों और होटल के कमरों में हुआ था। वहीं, केरल के पूर्व सीएम ओमन चांडी ने कहा था कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और वे कानूनी रूप से इसका सामना करने के लिए तैयार हैं।
अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा हो चुके कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन तालिबान पर सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने कार्रवाई की है। फेसबुक ने तालिबान को आतंकी करार देते हुए उस पर बैन लगा दिया है। कंपनी ने कहा है कि तालिबान एक आतंकवादी संगठन है ऐसे में अब उसकी सभी सेवाओं को खत्म किया जाएगा।
The Taliban are sanctioned as a terrorist organization under US law & we’ve banned them from our services under our Dangerous Organisation Policies.This means we remove accounts maintained by/on behalf of the Taliban& ban their praise,support,&representation: Facebook Spox to ANI
कंपनी के मुताबिक, तालिबान और उसके समर्थकों के अकाउंट और पेज को भी रोका जाएगा। फेसबुक के प्रवक्ता के मुताबिक कंपनी के पास पश्तो दरी भाषा की जानकारी रखने वाले लोगों की टीम है, जो कि वहाँ से होने वाले सभी पोस्ट पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। ये टीम फेसबुक को तालिबान से जुड़े पोस्ट को लेकर सूचित करती है। इसके अलावा ये लोग इस मामले में अमेरिका को भी अलर्ट करते हैं।
We also have a dedicated team of Afghanistan experts, who are native Dari and Pashto speakers and have knowledge of local context, helping to identify and alert us about emerging issues on the platform: Facebook Spokesperson to ANI
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच तालिबान ने मंगलवार (17 अगस्त 2021) को पूरे अफगानिस्तान में आम माफी की घोषणा करते हुए महिलाओं को अपनी सरकार में शामिल होने का न्योता दिया है। तालिबानी कब्जे के कारण समूचे अफगानिस्तान में अराजकता का माहौल है। ऐसे में सारा कामकाज ठप है। इस बीच तालिबानी अधिकारियों ने सरकारी कर्मचारियों से काम पर वापस लौटने की अपील की है।
रूसी दूतावास ने बताया कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति (अब पूर्व) अशरफ गनी अपनी कार और हैलीकॉप्टर में रुपए भर कर तजाकिस्तान ले गए हैं। हालाँकि, ये किसी को नहीं पता है कि अशरफ गनी फ़िलहाल कहाँ पर हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही उसने राष्ट्रपति भवन को भी अपने कब्जे में ले लिया। वहीं भारत में अफगानिस्तान के दूतावास के प्रेस सचिव अब्दुल आजाद ने कहा था कि उन्होंने भारत में अफगानिस्तान दूतावास के ट्विटर हैंडल पर से अपना कंट्रोल खो दिया है। अफगानिस्तानी दूतावास की ओर से कहा गया था कि उन सभी का सिर शर्म से झुक गया है।
120 भारतीय स्वदेश लाए गए
अफगानिस्तान में बिगड़े हालातों के बीच भारतीय वायुसेना का विमान दूतावास के राजनयिकों समेत 120 लोगों को लेकर गुजरात के जामनगर एयरपोर्ट पर पहुँच गया है।
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के पीछे जिन बड़े सरगनाओं का नाम सामने आ रहा है, उसमें खैरुल्लाह खैरख्वाह भी शामिल है। ये वही व्यक्ति है, जिसे बराक ओबामा के कार्यकाल में ग्वांतानामो वे जेल से छोड़ा गया था। 2014 में ओबामा प्रशासन द्वारा छोड़े गए तालिबानी कैदी ने अब काबुल में तालिबान की सत्ता की पूरे रूपरेखा तय की और इसकी रणनीति तैयार की है। उसके साथ-साथ कई अन्य आतंकी भी छोड़े गए थे।
इनमें से एक मोहम्मद नबी है, जो कलात में तालिबान का ‘सिक्योरिटी चीफ’ हुआ करता था। एक अन्य का नाम मोहम्मद फ़ज़ल था। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ संस्था के अनुसार, 2000-2001 में अफगानिस्तान में जो शिया मुस्लिमों का नरसंहार हुआ था, उसके पीछे इसकी ही भूमिका थी। एक अन्य का नाम अबुल हक़ वासिक था, जो ‘इंटेलिजेंस’ में तालिबान का डिप्टी मिनिस्टर था। मुल्ला नरुल्लाह नोरी इसमें अगला नाम था।
वो 2001 में मजार-ए-शरीफ में तालिबान का ‘सीनियर कमांडर’ हुआ करता था। इन्हें उस समय ‘Gitmo Five’ कहा गया था। अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना था कि ये ‘हार्डकोर में भी सबसे बड़े सरगना’ हैं। हालाँकि, ओबामा प्रशासन ने ख़ुफ़िया सूचनाओं को नज़रअंदाज़ कर दिया और दावा किया कि इन्हें क़तर में रखा जाएगा। ऐसा इसीलिए, ताकि ये अफगानिस्तान की सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकें।
How Khairullah Khairkhwa, released from Guantanamo Bay, planned Taliban’s return https://t.co/4zDK6Byqeo
अब पता चला है कि खैरुल्लाह खैरख्वाह सहित इन पाँचों सरगनाओं ने वहीं से तालिबान से संपर्क किया और फिर 20 साल से अफगानिस्तान में जमी अमेरिकी सेना को वहाँ से हटाने के लिए रणनीति तैयार की। खैरुल्लाह खैरख्वाह ने खासकर तालिबान की ‘शांति वार्ताओं’ और काबुल में सत्ता के गठन में बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के प्रतिनिधि के साथ दोहा में जो तालिबान की वार्ता हुई, उसमें खैरुल्लाह खैरख्वाह भी मौजूद था।
साथ ही मॉस्को में हुई वार्ताओं में भी तालिबान की तरफ से वो उपस्थित था। अब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि खैरुल्लाह खैरख्वाह को अन्य सरगनाओं के साथ वापस अफगानिस्तान लाया जा सकता है। साथ ही सरकार में भी किसी बड़े पद पर उसे बिठाया जा सकता है। तालिबान को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है, जो विदेश में उसकी छवि को चमका सकें और उसकी अलग इमेज पेश कर सकें।
उधर अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि अमेरिका अपने लक्ष्य में कामयाब रहा और अलकायदा को एकदम सीमित कर दिया गया। उन्होंने याद किया कि कैसे ओसामा बिन लादेन के लिए अमेरिका ने तलाश जारी रखी और अंत में उसे मार गिराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का अफगानिस्तान मिशन कभी वहाँ एकीकृत व केंद्रीयकृत लोकतंत्र की स्थापना या फिर राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं था।
बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में हिंदू स्टडीज के नाम से पूर्णत: हिंदू धर्म व संस्कृति पर आधारित कोर्स की विधिवत शुरूआत इसी सत्र से हो रही है। आधुनिकता के साथ सनातन प्राचीन परंपरा की थाती संजोए BHU में छात्र अब वेद, पुराण, ब्राह्मण और श्रमण परंपरा के साथ रामायण, महाभारत, दर्शन, ज्ञान मीमांसा सहित हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।
इसकी शुरुआत कला संकाय के अंतर्गत भारत अध्ययन केंद्र द्वारा की गई है। इसके तहत भारत सहित दुनिया भर के छात्रों को सनातन हिन्दू धर्म की पुरातन विद्या, परंपरा, युद्ध कौशल और धर्म-विज्ञान, वैदिक परंपरा में पारंगत किया जाएगा। 2 साल के इस कोर्स के लिए 40 सीटें निर्धारित हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 7 सितंबर 2021 है। इंट्रेस एग्जाम 3 अक्टूबर को होगा, जिसमें हिंदू धर्म और शास्त्रों से संबंधित प्रश्न होंगे। विस्तृत विवरण आवेदन प्रॉस्पेक्टस में है।
बता दें कि इस वर्ष की शुरुआत में ही बीएचयू, जेएनयू, आइआइटी-कानपुर समेत देश भर के विद्वानों ने बैठक कर फैसला लिया था कि भारत में पहली बार बीएचयू में हिंदू अध्ययन की शिक्षा दी जाएगी। हिंदू स्टडीज नामक नए कोर्स को 2021-22 के इसी सत्र से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत दो वर्षीय एम ए का कोर्स होगा, जिसकी शुरुआत इसी सत्र 2021-22 से आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत के साथ आरम्भ हो चुका है।
विश्वविद्यालय में इसके लिए स्मार्ट क्लास बनाई गई है। इसमें गुरुकुल शिक्षा पद्धति भी दिखेगी और प्राचीन धर्म शास्त्र के व्यावहारिक पहलुओं पर गहन अध्ययन और प्रयोग भी होगा। प्रोफेसर राकेश उपाध्याय ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के सहारे डिजिटल दुनिया के अन्य देशों के छात्र भी इस कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।
हिन्दू अध्ययन कोर्स के लिए बना स्मार्ट क्लास (साभार -दैनिक भास्कर)
भारत अध्ययन केंद्र द्वारा स्नातकोत्तर की उपाधि देने वाले इस कोर्स का पाठ्यक्रम कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में बनारस और देश-विदेश के कई नामी-गिरामी आचार्याें द्वारा तैयार किया गया है, जिस पर इस वर्ष की शुरुआत में ही कला संकाय प्रमुख की अध्यक्षता वाली बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई थी।
भारत में यह पहला मौका है जब इस कोर्स के तहत सनातन परंपरा, ज्ञान मीमांसा सहित तत्व विज्ञान लेकर सैन्य विज्ञान जैसे प्राचीन हिंदू शास्त्रों को एकेडमिक स्वरूप प्रदान किया गया है। इस कोर्स के अंतर्गत हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम की रचना की गई है, जिसमें मुख्य रूप से तत्त्व, प्रमाण विमर्श, वाद परंपरा और शास्त्रों के अर्थ निर्धारण की पद्धति, पाश्चात्य ज्ञान मीमांसा, रामायण, महाभारत, स्थापत्य, लोकवार्ता, लोक-नाट्य कला, भाषा विज्ञान और प्राचीन सैन्य विज्ञान को विषय रूप में शामिल किया गया है।
इस कोर्स के संचालन में कला संकाय के ही भारत अध्ययन केंद्र के अलावा दर्शन शास्त्र विभाग हिन्दू धर्म का मर्म, उद्देश्य और रूपरेखा बताएगा। प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति विभाग सनातन काल से महान हिंदू सम्राटों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, हथियारों, स्थापत्य कला और प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों को पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करेगा। संस्कृत विभाग श्लोकों के माध्यम से शास्त्रों और ग्रंथों के व्यावहारिक पक्षों को विद्यार्थियों के समक्ष व्यावहारिक रूप में रखेगा।
ऑपइंडिया ने BHU में शुरू हुए हिन्दू धर्म के अध्ययन की सम्पूर्ण परिकल्पना, कोर्स, इसकी आवश्यकता और उद्देश्यों को लेकर प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से विस्तृत बातचीत की थी। उन्हीं से हमें पता चला कि हिन्दू अध्ययन के इस डिज़ाइन के पीछे कौन सी प्रमुख हस्तियाँ शामिल हैं।
विशेष रूप से पाठ्यक्रम में निर्णय लेने के दौरान बोर्ड आफ स्टडीज की बैठक में कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में जेएनयू के प्रो. रामनाथ झा, आइआइटी-कानपुर के प्रो. नचिकेता तिवारी, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. ब्रजकिशोर स्वाई (ओडिशा), बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र, लोकगायिका प्रो. मालिनी अवस्थी, प्रो. प्रद्युम्न शाह, प्रो. विमलेंद्र कुमार, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र वाराणसी के निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ल, प्रो. राकेश उपाध्याय, प्रो. केशव मिश्र, डा. अर्पिता चटर्जी, प्रो. सदा शिव कुमार द्विवेदी समेत कई अन्य प्रमुख आचार्य मौजूद थे, जिन्होंने लंबे विचार-विमर्श के बाद पाठ्यक्रम पर अपनी संस्तुति दी।
ऑपइंडिया ने इसी कोर्स से जुड़े और बोर्ड ऑफ़ स्टडीज में शामिल प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से बातचीत करके जानना चाहा इस कोर्स के उद्देश्यों के बारे में तो उनका साफ कहना था कि भारत में हिन्दू धर्म और शास्त्रों को लेकर मनमानी व्याख्या चल रही है। खासतौर से हमारे इतिहासकार जिनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिनको संस्कृत भाषा तक नहीं पता लेकिन वो व्याख्या कर रहे हैं हिन्दू धर्म, शास्त्र और सनातन परंपरा की, जिनके अध्ययन का स्रोत ही विकृत है तो क्या व्याख्या करेंगे यह कोई भी समझ सकता है।
प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय का कहना था, “ज़्यादातर ऐसे विचारधारा के लोग हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य हिन्दू धर्म और सनातन परंपरा से द्रोह के कारण अपने नैरेटिव के लिए हर जगह अनावश्यक डिबेट खड़ा करके उसे ख़ारिज करना है न कि उसे समझाना और उस पर वास्तविक विमर्श करना।”
उन्होंने कुछ इतिहासकारों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “कई ऐसे प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ बने हुए हिन्दू धर्म पर व्याख्यान देते फिर रहे हैं। इन्हें खुद मूल ग्रंथों का ज्ञान नहीं है। जो परंपरा से ऋग्वेद पढ़ रहे हैं उन्हें उसमें गाय काटने का वर्णन नहीं मिलेगा लेकिन जिन्हें हिन्दू धर्म को सिर्फ बदनाम करना है वह ऐसा कोई भी क्षेपक-प्रक्षेपक के सहारे जो भारत का है, जो इस राष्ट्र का गौरवशाली तत्व है उसे विकृत और दुष्प्रचारित करने में लगे हैं।”
साथ ही उन्होंने यह जोड़ा कि इस सम्पूर्ण अध्ययन का उद्देश्य किसी के साथ विवाद करना नहीं बल्कि आगे आने वाले दिनों में सनातन और हिन्दू धर्म को केंद्र में रखकर प्राचीन शास्त्रों से लेकर, योग, ज्ञान, सैन्य और शास्त्र परम्पराओं का समावेशन करते हुए अपनी विशिष्टताओं को उभारना है। इस पर शोध और लेखन को बढ़ाना है ताकि आगे आने वाली पीढ़ी अपनी विशिष्टतता को जानकर गौरवान्वित हो न कि ऐसे किसी भी दुराग्रह के कारण खुद को हीन समझे। हमारे मूल शास्त्रों ग्रंथों में बहुत कुछ ऐसा विशिष्ट है जिससे आज भी वह सनातन परंपरा इतना कुछ झेलते हुए भी अक्षुण्य है।
ऑपइंडिया से बातचीत में बुद्ध और जैन साहित्य पर भी चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाद में जो भी धर्म, मत या विचारधारा निकले उनका भी मूल सनातन ही है। उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ब्राह्मण से लेकर श्रमण परम्पराओं का अध्ययन भी इस अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। कैसे इस प्राचीन भूमि पर सनातन से ही बाकी परम्पराएँ किस तरह से निकली, कहाँ तक यात्रा की, उनके मूल में क्या था, उनके ज्ञान मीमांसा का स्रोत क्या रहा है इन सबको लेकर न सिर्फ शास्त्रीय बल्कि व्यावहारिक और प्रयोगात्मक दृष्टि से भी अध्ययन पर जोर दिया जाएगा।
प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि इसकी लोकप्रियता के साथ आगे चलकर इसमें नेट-जेआरएफ के साथ शोध को भी बढ़ावा मिले और आने वाली पीढ़ियाँ अपने वैशिष्ट्य को उसके मूल रूम में जान और समझ सकें न कि उसके विकृत स्वरुप को ही सत्य मानकर भ्रमित हों। ऐसा इस दिशा में तमाम विद्वानों का मत है।
प्रो. राकेश उपाध्याय ने बताया कि हिन्दू अध्ययन केंद्र में 2 साल की पढ़ाई के बाद देश भर के आध्यात्मिक स्थलों पर सनातन धर्म विशेषज्ञ गाइड, विदेशों में प्रोफेसर, धर्म उपदेशक और विभिन्न धार्मिक और अध्यात्मिक संगठनों में हिंदू रिसर्च के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे।
दिल्ली के मुस्लिम स्टूडेंट्स (muslim_students_of_delhi) नामक इंस्टाग्राम अकाउंट से सोमवार (16 अगस्त 2021) को भड़काऊ स्टोरी पोस्ट कर उन लोगों को निशाना बनाया गया जो तालिबान की निंदा कर रहे हैं। साथ ही इन्हें कुफ्र (kuffars) बताया गया। इस अकाउंट से मुस्लिमों को क्लोज्ड ग्रुप्स में तालिबान का समर्थन करने का सुझाव भी दिया गया। हालाँकि सोशल मीडिया पर विवाद होने के बाद 8600 फॉलोअर्स और 449 पोस्ट वाला यह अकाउंट डिलीट कर दिया गया।
alloutlefties और lsab17 नाम के दो ट्विटर यूजर्स द्वारा इन इंस्टाग्राम स्टोरी के स्क्रीनशॉट शेयर किए गए। पहली स्टोरी में इंस्टाग्राम अकाउंट द्वारा फॉलोअर्स से उन लोगों से सावधान रहने के लिए कहा गया जो तालिबान की निंदा कर रहे हैं। स्टोरी में कहा गया कि अगर तालिबान शरिया का 1% भी लागू करता है तो यह ‘कुफ्र सरकारों’ और शरिया-विरोधी समूहों से कहीं बेहतर होगा।
स्टोरी में फॉलोअर्स को यह सुझाव दिया गया कि वो ‘कुफ्र दोस्तों’ के आगे तालिबान की आलोचना न करें और तालिबान के बारे में क्लोज्ड ग्रुप्स में ही चर्चा करें। साथ ही स्टोरी में यह भी कहा गया कि उनकी (कुफ्र) तालिबान से नफरत करने की एक ही वजह है कि वे इस्लाम से नफरत करते हैं और अल्लाह के कानून से नफरत करते हैं।
आगे की स्टोरी में वो इस बात का जश्न मना रहे थे कि अफगान रेडियो अब गाना नहीं बजाएगा और महिलाएँ सिर से पैर तक ढकी हुई सड़कों पर निकलेंगी। उन्होंने अफगानिस्तान में प्रतिमाओं और लोकतंत्र की बर्बादी पर भी खुशी जाहिर की।
(स्क्रीनशॉट : ट्विटर/alloutlefties)
उन्होंने अल्लाह के हाथों कुफ्र (गैर-मुस्लिम) और मुनाफिक़ीन (मुस्लिम, जिन्हें इस्लाम में यकीन नहीं) की बर्बादी की इच्छा प्रकट की साथ ही यह दुआ माँगी कि अल्लाह उन्हें (तालिबान) ताकत दे जो अल्लाह का कानून (शरिया) लागू करने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
(स्क्रीनशॉट : ट्विटर/alloutlefties)
उनके अनुसार इस्लामिक मुल्कों के लिए शरिया की माँग करना गलत नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे वामपंथी मार्क्स या लेनिन के सिद्धांतों का अनुसरण करने की माँग करते हैं और हिन्दू, हिन्दू राष्ट्र की इच्छा रखते हैं। भारत एक लोकतंत्र है न कि हिन्दू राष्ट्र।
हालाँकि ‘muslim_students_of_delhi’ नाम के इस समूह ने विवाद और आलोचना होने के बाद भी अपना रूख नहीं बदला। कई यूजर्स का कहना है कि इस समूह का एक बैकअप अकाउंट भी है जो अभी भी इंस्टाग्राम पर सक्रिय है और सिर्फ फॉलोअर ही वहाँ किए गए पोस्ट देख सकते हैं।
हाल ही में ट्विटर ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के हैंडल को लॉक कर दिया था। उन्होंने दिल्ली कैंट की 9 वर्षीय डाली रेप पीड़िता के माता-पिता की तस्वीर ऑनलाइन शेयर कर दी थी, जिस कारण उन पर ये कार्रवाई की गई। इसके बाद से ही कॉन्ग्रेस के नेता/कार्यकर्ता लगातार ट्विटर का विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के कॉन्ग्रेस नेताओं ने ‘ट्विटर बर्ड’ को पकाते हुए वीडियो जारी किया है।
वीडियो में कॉन्ग्रेस नेताओं ने दावा किया कि वो ट्विटर द्वारा राहुल गाँधी का हैंडल लॉक किए जाने के विरोध में ‘ट्विटर बर्ड’ को तेल में पका कर खा रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ ‘ट्विटर बर्ड’ को फ्राई किया, बल्कि इसे ट्विटर के मुख्यालय में कुरियर भी कर दिया। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद हर्षा कुमार के बेटे को भी देखा जा सकता है। जीवी हर्षा कुमार अमलापुरम लोकसभा क्षेत्र से 2004-14 में सांसद रहे हैं।
उक्त वीडियो में पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद हर्षा कुमार के बेटे कहते हैं, “ट्विटर, तुमने बड़ी गलती की है। तुमने न सिर्फ राहुल गाँधी का हैंडल लॉक किया, बल्कि हमारे ट्वीट्स को भी प्रमोट नहीं किया। इसीलिए, इस ‘ट्विटर बर्ड’ को पका कर मैं ट्विटर के गुरुग्राम स्थित मुख्यालय में भेज रहा हूँ। ये डिश तैयार हो रहा है।” इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने भाजपा के खिलाफ नारा भी लगाया। फिर उन्होंने स्थानीय पोस्ट ऑफिस जाकर ट्विटर के मुख्यालय को इसे कुरियर किया।
Absurd. In a parallel universe, #AndhraPradesh#Congress workers fry what they call a ‘Twitter bird’ as a protest against #RahulGandhi ‘s account being blocked.They not only fried it but also couriered it to #Twitter headquarters.The man in video is former MP Harsha Kumar’s son. pic.twitter.com/LtC4e268pN
कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि वो इसे काफी अच्छे से पैक कर के भेज रहे हैं और उम्मीद है कि ट्विटर को ये डिश प्रसंद आएगी। हाल ही में 9 वर्षीय मृत बच्ची की माँ ने कहा था कि तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले राहुल गाँधी ने उनसे कोई अनुमति नहीं माँगी थी। POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट नाबालिग रेप पीड़िता या उसके माता-पिता की तस्वीर साझा करने को प्रतिबंधित करता है ताकि उनकी पहचान उजागर न हो।
अफगानिस्तान में तालिबान का शासन स्थापित होने के बाद से हालात अस्थिर हो चुके हैं। काबुल एयरपोर्ट पर देश छोड़ने के लिए आतुर लोगों की भीड़ लगी है। इस बीच औरतों खासकर कम उम्र की लड़कियों में एक अलग तरह का डर देखने को मिल रहा है। मीडिया से कई ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनसे पता चलता है कि तालिबानी शासन में औरतों पर नए तरह का खतरा मंडरा रहा है।
अफगानिस्तान में कई जगहों पर ब्यूटी पार्लर और शोरूम्स में लगे महिलाओं के पोस्टर को हटाया जा रहा है। साथ ही महिलाओं की तस्वीरों को हटाने के लिए उन पर सफेद रंग चढ़ाया जा रहा है।
Taliban erasing women. Women won’t be seen anywhere. They would stay at home as sex slaves and child bearing machines. Islam is a religion of misogyny. pic.twitter.com/vZpvkE0UYw
अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर जरीफा गफारी, जो कि सबसे युवा मेयर भी हैं, कहती हैं कि वो उनके (तालिबान) आने की प्रतीक्षा कर रही हैं। गफारी ने कहा कि उनकी और उनके परिवार की सहायता करने के लिए कोई नहीं है, वो अपने परिवार के साथ हैं और उन्हें पता है कि तालिबानी आएँगे और उन्हें मार देंगे। गफारी ने एक अंतरराष्ट्रीय अख़बार को इंटरव्यू देते हुए कुछ हफ़्तों पहले यह संभावना जताई थी कि उनके देश का भविष्य सुनहरा है। लेकिन रविवार (15 अगस्त 2021) को उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
गफारी की तरह ही अफगानिस्तान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान खालिदा पोपल ने द एसोसिएटेड प्रेस को टेलीफोनिक इंटरव्यू में बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वे अपनी फोटो हटा रही हैं। उन्होंने बताया कि टीम की बाकी सदस्यों को भी अब जान का खतरा हो चुका है। उन्होंने टीम की सदस्यों से कहा है कि वे अपने घर छोड़कर भाग जाएँ और अपने इतिहास को मिटाने की कोशिश करें। पोपल ने बताया कि उन्होंने कभी तालिबान का विरोध ही औरतों के लिए किया था। लेकिन अब इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान की स्थापना के बाद अपनी जान बचानी पड़ रही है और इसका एक ही रास्ता है, घर से भागना और अपनी पहचान को छिपा लेना।
हालाँकि पोपल और उनकी महिला टीम की बाकी सदस्य फिलहाल अपनी सुरक्षा की कोशिशें कर पा रही हैं। लेकिन सैकड़ों ऐसी महिलाएँ हैं जो रातों-रात गायब हो चुकी हैं। दिल्ली में रह रहे एक अफगानी नागरिक ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि अफगानी सेनाओं और तालिबान के बीच संघर्ष के चलते सैकड़ों महिलाओं ने राजधानी काबुल के शहर-ए-नाव पार्क में शरण ली थी। लेकिन अब ये औरतें गायब हैं और उनके परिवार उनकी तलाश कर रहे हैं। उस अफगानी नागरिक ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह जानकारी दे रहा है और यही हालात पूरे अफगानिस्तान में है।
चंडीगढ़ में पिछले 4 सालों से रह रही परवाना हुसैनी अफगानिस्तान के बामियान शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 4-5 सालों से महिलाओं को बाहर निकलने की आजादी मिली थी। लेकिन तालिबान के शासन और शरिया कानून लागू होने के बाद उनके जैसी लड़कियाँ अब घर के बाहर भी नहीं निकल पाएँगी। परवाना ने बताया कि तालिबान अब महिलाओं का उनके घर से अपहरण कर रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक अन्य अफगानी ने बताया कि महिलाओं का अपहरण करना उनके (तालिबान) लिए सामान्य है और अब अफगानिस्तान उसके अपने लोगों के लिए एक खतरनाक जगह बन चुका है।
इससे पहले द सन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तालिबान घर-घर जाकर लड़कियों को उठा रहा है ताकि उन्हें ‘सेक्स गुलाम (स्लेव)’ बनाया जा सके। जुलाई महीने में ही एक खबर आई थी कि तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के नाम पर ग्रामीणों को चिट्ठी लिखी गई थी जिसमें कहा गया था कि वो अपनी बेटियों और बेवा (विधवा) का निकाह तालिबानियों के साथ करें। पत्र में कहा गया था कि उनके कब्जे वाले सभी क्षेत्रों के इमामों और मौलवियों को आदेशित किया जाता है कि वे 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों और 45 वर्ष से कम उम्र की बेवा महिलाओं की सूची जारी करें, जिनका निकाह तालिबानियों के साथ किया जा सके।