Home Blog Page 3733

दुआ माँगने आई थी, स्वयंभू ‘Prophet’ ने जिंदा साँप का डर दिखाकर कार में किया रेप

जिम्बाब्वे के बुदिरिरो में 38 साल के एक स्वयंभू ‘प्रोफेट’ को महिला से रेप के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। लक्सन मपुरिसा (Luckson Mapurisa) नाम के इस ‘प्रोफेट’ पर आरोप है कि उसने जिंदा साँप का डर दिखाकर महिला से कार में रेप किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 मई को मपुरिसा ने महिला के साथ उस समय दुष्कर्म किया जब वह उसके श्राइन पर दुआ पढ़ने आई थी। इसी दौरान आरोपित ने उसे अपने साथ पास ही में होने वाले दुआ कार्यक्रम में चलने को कहा। दोनों वहाँ से मुफाकोस उपनगर के चेमहंजा मैदान में गए, जहाँ आरोपित ने कार में रेप करने से पहले महिला को डराने के लिए उसके सामने जिंदा साँप रख दिया।

पुलिस के अनुसार, जब वह चेमहंजा ग्राउंड पर पहुँचे तो लक्सन ने गाड़ी रोकी और पिछली सीट पर कूद गया जहाँ महिला बैठी हुई थी। उसने महिला के प्राइवेट पार्ट में ऊँगली डाली। महिला के मना करने पर उसने अपने बैग से लंबा सा साँप निकाला और उसे डराने लगा।

कई दिन तक यौन शोषण झेलने के बाद महिला ने इन सबके बारे में अपने चचेरे भाई को बताया। फिर 29 मई को ग्लेन व्यू पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत हुई। उसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपित ने अपना गुनाह कबूल करते हुए खुलासा किया कि उसे ये साँप अपने दादा से मिला था जिसका इस्तेमाल वह महिलाओं को डराकर उनका रेप करने के लिए करता था। हरारे पुलिस ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि वह पादरियों से या प्रोफेट के पास जाते वक़्त किसी न किसी करीबी रिश्तेदार को साथ ले जाएँ।

बता दें कि पिछले साल ऐसा ही यौन उत्पीड़न का एक मामला करीबा से प्रकाश में आया था। वहाँ एक प्रोफेट ने 15 साल की बच्ची का एक लॉज में कई बार रेप किया था। बच्ची को उसके माता-पिता आरोपित के पास छोड़ कर गए थे ये सोचकर कि वह उसके भीतर से बुरे साए को निकालेगा। 

यौन उत्पीड़न के बाद लड़की को धमकाया गया था कि वह इस बारे में किसी को न बताए। लेकिन 6 साल बाद उसने इस संबंध में अपने बॉयफ्रेंड को बताया। मामला अब भी जाँच के दायरे में हैं। जिम्बाब्वे पुलिस ने घटना के बाद बच्चों के माता-पिता को चेतावनी देते हुए कहा था कि किसी भी आध्यात्मिक उपचार के लिए अपने बच्चों को प्रोफेट के हाथों में न छोड़े। खासकर लड़कियों को तो बिलकुल भी नहीं। पुलिस के मुताबिक कई बच्चे बुरे साए को बाहर निकलवाने के नाम यौन उत्पीड़न का शिकार हुए हैं।

डिजिटल कृषि के लिए केंद्र सरकार ने पतंजलि के साथ किया करार: किसानों को मिलेगी यूनिक आईडी, बनेगा डेटाबेस

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मंगलवार (जून 1, 2021) को किसानों के लिए डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की ओर बढ़ने और कृषि में तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 4 कंपनियों के साथ करार किया, जिनमें योग गुरु बाबा रामदेव से जुड़ी ‘पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टिट्यूट’ और बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS)’ भी शामिल है। कृषि क्षेत्र में इन कंपनियों की सेवाएँ ली जाएँगी।

इन प्राइवेट कंपनियों को कृषि क्षेत्र में काम करने के लिए अपने साथ लाने के पीछे केंद्र सरकार का उद्देश्य ये है कि किसानों के लिए एक सेन्ट्रलाइज्ड डेटाबेस तैयार किया जाए और इस पर आधारित सेवाओं को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाया जाए। इस डेटाबेस में किसानों की जमीनों से जुड़े रिकॉर्ड्स रखे जाएँगे और उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी। 4 कंपनियों के साथ MoU पर हस्ताक्षर हुए।

अगले एक साल के भीतर इस ‘किसान डेटाबेस’ के प्रयोग का काम शुरू हो जाएगा। इसी तरह अप्रैल 2021 में भी केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ करार किया था, ताकि फसल कि कटाई के बाद प्रबंधन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक ‘किसान इंटरफेस’ का निर्माण किया जाए। इस तरह पायलट प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट कंपनियों को जोड़ा जा रहा है। ताज़ा मौके पर केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र को साथ लेकर ही डिजिटल व आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न पूरा होगा।

इन 4 कंपनियों में ‘ESRI इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘एग्रीबाजार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ भी शामिल है। एग्रीबाजार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनेगा। वहीं ‘पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टिट्यूट’ डिजिटल व तकनीकी रूप से कृषि प्रबंधन में सहयोग करेगा और उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना में किसानों की मदद करेगा। इसी तरह ESIR ‘नैशनल एग्रीकल्चर जियो हब’ के निर्माण में सहायता करेगा।

अमेजन डिजिटल एग्रीकल्चर के लिए कंटेन्ट बनाएगा और इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का काम करेगा। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने इसका खाका तैयार किया है। डिजिटल एग्रीकल्चर के लिए पिछले साल केंद्र सरकार ने उनकी अध्यक्षता में एक विशेषज्ञों की समिति का गठन भी किया था। किसानों के डेटाबेस में उनके लिए बनाई गई योजनाओं, इसका लाभ लेने कि पात्रता से लेकर सारे रिकॉर्ड्स मेंटेन किए जाएँगे।

बताते चलें कि मेडिकल लॉबी के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण बाबा रामदेव विवादों में हैं और अस्पतालों के सहारे ईसाई मिशनरी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कोरोना महामारी को माध्यम बनाने वाले JA जयलाल की अध्यक्षता वाला IMA उनके पीछे पड़ा हुआ है। बाबा रामदेव को 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का लीगल नोटिस भी भेजा गया। संस्था ने उनके द्वारा पूछे गए 25 सवालों के अब तक जवाब नहीं दिए हैं।

‘टीचर छाती दबाते, कहते- नंगे या सिर्फ अंडरवियर में रिहर्सल करो’: ब्रिटेन के ड्रामा स्कूलों में यौन शोषण की शिकायतों का अंबार

हाल में चेन्नई के पद्म शेषाद्री बाला भवन (PSBB) के पूर्व और वर्तमान छात्रों ने एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद इस दक्षिण भारतीय शहर के कई स्कूलों, स्पोर्ट्स एकेडमी, यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने इसी तरह की आपबीती साझा की थी। ऐसे ही मामले ब्रिटेन से भी सामने आए हैं। वहाँ के कई कई नामी ड्रामा स्कूलों के पूर्व छात्रों ने शिक्षकों पर यौन शोषण के गंभीर इल्जाम लगाए हैं।

डेलीमेल की खबर के अनुसार, ब्रिटेन के ड्रामा स्कूल के पूर्व छात्रों ने बताया है कि स्कूल में टीचर उनकी छाती दबाते थे, उनसे नंगे होकर परफॉर्म करने को कहते थे और क्लास में अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे। ड्रामा स्कूलों में यौन शोषण की ये शिकायतें एक्टर और डायरेक्टर नोल क्लार्क पर लगे गंभीर इल्जामों के बाद कुछ हफ्ते बाद ही आई हैं। क्लार्क पर 20 महिलाओं के साथ गलत ढंग से बर्ताव के आरोप हैं, जिसे वे खारिज कर चुके हैं।

अब एकेडमी ऑफ लाइव एंड रिकॉर्ड आर्ट्स (ALRA) के पूर्व स्टाफ पर दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। इस मामले में एक पूर्व शिक्षक जाँच के दायरे में हैं। वहीं एसेक्स विश्वविद्यालय और सरे यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि वे अपने संस्थानों पर लगे आरोपों पर गौर करेंगे। इन यूनिवर्सिटी की गिल्डफोर्ड स्कूल ऑफ एक्टिंग (GSA) और ईस्ट 15 एक्टिंग स्कूल को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें मिली है।

बता दें कि ये वो ड्रामा स्कूल हैं जहाँ से बड़े-बड़े कलाकार निकले हैं। ALRA की बात करें तो यहाँ से एक्टर-कॉमेडियन मिरांडा हार्ट पास होकर निकले हैं। गिल्डफोर्ड स्कूल से एमा बार्टम और सीलिया इमरी निकली हैं। हालाँकि किसी नामचीन शख्सियत के साथ यौन शोषण की बात फिलहाल सामने नहीं आई है।

ब्रिटिश एक्टर्स नेटवर्क का कहना है कि उन्हें कम से कम 300 ऐसी शिकायतें मिली हैं जिसमें प्रताड़ना, यौन शोषण के पीड़ितों ने बताया कि उन्हें या तो ड्रामा स्कूल या इंडस्ट्री में में ये सब झेलना पड़ा।

लंदन के ALRA का कहना है कि इस मामले में वह जाँच कर रहे थे और कई लोगों से इस विषय में जानकारी देने की अपील की गई थी। स्कूल के बयान के मुताबिक छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने इस संबंध में सभी स्टाफ और छात्रों को मेल किया है कि वह इसमें समर्थन दें।

स्कूल की ओर से ऐसी शिकायतों के लिए एक ऐसा ऑनलाइन पोर्टल चलाया रहा है जहाँ अपनी पहचान उजागर किए बिना लोग शिकायत कर सकते हैं। स्कूल का कहना है कि वह कोई भी जानकारी होते ही संबंधित अधिकारियों से उसे साझा करेंगे और उचित लोगों से बात करेंगे। स्कूल ने यौन उत्पीड़न पर अपनी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी बताई है। 

इसी तरह गिल्डफोर्ड स्कूल पर भी एक पूर्व छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने कहा था कि एक टीचर ने उसका घर पर यौन उत्पीड़न किया। दावा था टीचर ने उसे नंगे होकर या फिर सिर्फ अंडरवियर में रिहर्सल करने को कहा था। जब लड़की ने इस पर हिचक दिखाई तो दोबारा उसे वही करने को कहा गया।

टेलीग्राफ को एक पीड़िता ने बताया, “पढ़ाई के दौरान मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। नंगा होना आम था। मुझे नहीं लगता हम में से किसी को वो अलग लगा हो।” एसेक्स यूनिवर्सिटी के ईस्ट 15 ड्रामा स्कूल के बच्चों ने कहा है कि उन पर क्लास के दौरान सेक्सुअल कमेंट किए जाते थे। वहीं द पूअर स्कूल में जो 3 वर्ष पहले बंद हो चुका है, वहाँ लड़कियों की ब्रेस्ट को दबाया जाता था और बड़े लोग उनका उत्पीड़न करते थे। 

पाकिस्तान ने चीन की मदद से लॉन्च की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन PakVac, मंत्री ने कहा – हमारे मुल्क के लोगों को चीन पर भरोसा

पाकिस्तान ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए PakVac नामक स्वदेशी वैक्सीन के निर्माण का दावा किया है। पड़ोसी मुल्क को उम्मीद है कि उससे देश भर में टीकाकरण को तेज करने में मदद मिलेगी। पाकिस्तानी वैक्सीन PakVac को बनाने में चीन ने उसकी मदद की है। पाकिस्तान ने मंगलवार (जून 1, 2021) को इसकी घोषणा की। स्पेशल असिस्टेंट हेल्थ डॉक्टर फैसल सुल्तान ने कहा कि पाकिस्तान कठिन चुनौतियों को पार करने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ‘दोस्तों’ की मदद से उन कठिन चुनौतियों को मौके में बदलने की कोशिश की है। उन्होंने लॉन्च समारोह में कहा कि इस वैक्सीन के लिए कच्चा माल भले ही चीन से आया, लेकिन फिर भी इसका निर्माण और उत्पादन एक दुष्कर कार्य था। डॉक्टर सुल्तान ने अपने देश के लोगों को आश्वासन दिया है कि आने वाले दिनों में वैक्सीन का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने जा रहा है।

पाकिस्तान के ‘नैशनल कमांड एंड ऑपरेशन्स सेंटर (NCOC)’ के मुखिया और वहाँ के प्लानिंग मंत्री असद उमर ने कहा कि वैक्सीन लॉन्च होने के कारण ये पाकिस्तान के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने इसे ‘बड़ी क्रांति’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में वैक्सीन की माँग काफी ज्यादा है, लेकिन पाकिस्तान में लोग चीन में बनी वैक्सीन को तवज्जोह दे रहे हैं। उक्त वैक्सीन को पाकिस्तान से कंसन्ट्रेटेड रूप में लाकर इस्लामाबाद के ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH)’ में रखा गया है।

पाकिस्तान में सबसे पहले चीन की CanSino वैक्सीन को मान्यता दी गई थी। पाकिस्तान ने दिसंबर 2021 के अंत तक 70% नागरिकों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। पिछले 24 घंटों में वहाँ कोरोना संक्रमण के 1771 मामले सामने आए हैं। वहाँ पिछले 3 महीनों में पहली बार पॉजिटिविटी रेट 4% से कम हुआ है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों की मानें तो अब तक वहाँ कोरोना के 922,824 मामले सामने आए हैं।

साथ ही 20,930 लोगों ने पाकिस्तान में अब तक कोरोना के कारण जान गँवाई है। पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि उसका टीकाकरण अभियान भी अच्छा चल रहा है, जिसके तहत अब तक 73 लाख वैक्सीन लगाई जा चुकी है। कुल 53 लाख लोगों को वैक्सीन दी गई है, जिसमें से 20 लाख लोगों ने दोनों डोज ले लिए हैं। अब चीन की कंपनी CanSino Bio की मदद से PakVac वैक्सीन का निर्माण किया गया है।

केन्या की मदद 12 टन प्यार है, इससे भारत भिखमँगा नहीं बन गया… 9/11 के बाद अमेरिका को भी दी थी 14 गायें

जब से अफ़्रीकी देश केन्या ने कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से जूझते भारत को मदद भेजी है, तभी से कुछ लोग लगातार ये कहते हुए हंगामा मचा रहे हैं कि एक छोटे से देश से भारत को मदद की जरूरत पड़ गई। GDP के मामले में भारत से 30 गुना छोटे केन्या ने अगर मदद में कुछ भेजा है तो उसकी दरियादिली का स्वागत करने की बजाए लोग भारत को दोष दे रहे हैं। ज्ञात हो कि केन्या ने स्वेच्छा से ये मदद भेजी है, भारत ने उससे माँगी नहीं थी।

सोशल मीडिया पर जवाहर सरकार और नीरज भातेजा जैसे लोगों ने भारत की तुलना बांग्लादेश से करते हुए कहा कि केन्या से भारत को मदद कि जरूरत पड़ गई है, ये बड़े ही शर्म की बात है। सबसे पहले जानने वाली बात ये है कि केन्या ने भारत को असल में भेजा क्या है। असल में हिन्द महासागर के किनारे पूर्वी अफ्रीका में बसे इस देश ने भारत के लिए 12 टन खाद्य सामग्री भेजी है। इसमें चाय-कॉफी और मूँगफली शामिल हैं।

ऐसे में कुछ लोगों द्वारा ये नैरेटिव बनाना कि ‘अब केन्या जैसे देश से भारत को मदद कि जरूरत पड़ गई’ का आशय न सिर्फ भारत को बदनाम करना है, बल्कि केन्या जैसे एक गरीब देश की दरियादिली को गाली देना भी है। आइए, एक कहानी से शुरू करते हैं। जब बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले सचिन तेंदुलकर के सबसे बड़े सुधीर कुमार गौतम हर साल उन्हें लीची देने जाते हैं, तो क्या हम ये मान लें कि सचिन जैसे करोड़पति पूर्व क्रिकेटर को एक साधारण व्यक्ति से मदद की जरूरत पड़ गई?

क्या 1100 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक सचिन तेंदुलकर के पास इतना रुपया नहीं है कि वो लीची खरीद सकें? लेकिन, वो अपने फैन द्वारा हर साल ले जाने वाले गिफ्ट को स्वीकार करते हैं, ये न सिर्फ उनका बड़प्पन है बल्कि सुधीर कुमार गौतम का उनके प्रति प्यार भी है। इसी तरह केन्या ने अपने दिल में भारत के लिए प्यार को दर्शाते हुए ये मदद भेजी है और भारत ने इसे स्वीकार करते हुए अपना बड़प्पन दिखाया है।

केन्या की दरियादिली को समझने के लिए भी एक और कहानी सुनिए। केन्या में एक मसाई जनजातीय समुदाय है, जिनकी आबादी 20 लाख के आसपास है। ये तब की बात है, जब अमेरिका में ट्विन टॉवर्स पर हमला हुआ था। ये वो गरीब समुदाय है, जिसने गगनचुंबी इमारतों में रहना तो दूर, कइयों ने इसे देखा तक नहीं होगा। आज से 20 साल पहले तो स्थिति और भी खराब थी। केन्या के इस जनजातीय समूह के लिए अकिशिआ के पेड़ और जिराफ़ ही सबसे लंबी चीजें हुआ करती थीं।

अमेरिका में 9/11 के हमले में वहाँ के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को नुकसान पहुँचाया था, जिसमें करीब 3000 लोग मारे गए थे और इससे कई गुना अधिक घायल हुए थे। इस कहानी में एक किमेली नाइयोमह नाम के एक मसाई शख्स हैं, जो किसी तरह पढ़ाई के लिए अमेरिका तक जाने में कामयाब रहे थे। वहाँ से लौटने के बाद उन्होंने पाया कि दूर न्यूयॉर्क में क्या हुआ था, इस बारे में वहाँ के लोगों को कुछ पता ही नहीं था।

किसी-किसी को खबरों से कुछ पता चल जरूर था, लेकिन तब भी वो इस घटना कि भयानकता से अनजान थे। रेडियो से जो भी जानकारी मिली, उन्होंने इकट्ठी कर ली। कुछ मसाई जनजातीय समूह के लोगों के घरों में कुछ ही दिनों पहले बिजली आई थी, तो उन्होंने टीवी पर इस घटना को देखा। उनके बीच आज भी मौखिक रूप से ही घटनाओं के बारे में जानने की आदत है, इसीलिए किमेली ने उन्हें अपने ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए घटना के बारे में सब कुछ कह सुनाया।

धीरे-धीरे 9/11 और इसकी भयवाहता को लेकर एक कान से दूसरे कान ये खबर फैली और समुदाय के बीच एक उदासी सी छ गई, क्योंकि वो दूर देश में हुई इस घटना के बारे में जान कर स्तब्ध थे। बस वो इस बात से संतुष्ट थे कि उनके बीच का व्यक्ति किसी तरह बिना नुकसान के अमेरिका से निकल आया। वो कुछ करना चाहते थे, पीड़ितों के लिए। उन्होंने एक बैठक बुलाई। घास के एक मैदान में मसाई जनजाति की सभा लगी।

उस सभा में उन्होंने अपने जानवर भी लाए थे। मसाई जनजाति के लोग जानवरों को पवित्र मानते हैं और उनसे प्यार करते हैं। उसी सभा में उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका को उनकी तरफ से 14 गायें दी जाएँगी। ‘मा’ शब्द का उद्घोष करते हुए मसाई जमा हुए और जानवरों को पूरे रीति-रिवाज के बाद अमेरिका को दान दिया गया। तब नैरोबी में अमेरिका के उप-उच्चायुक्त विलियम ब्रांकिक भी वहाँ मौजूद थे।

विलियम ब्रांकिक को वहाँ पहुँचने के लिए मसाई माराय गेम प्रिजर्व के लिए उड़ान भरनी पड़ी और फिर वहाँ से कच्चे-पक्के रास्तों से 2 घंटे ड्राइव भी करना पड़ा। वहाँ उन्हें भी समारोह का हिस्सा नया गया। मसाई बुजुर्गों ने एक रस्सी उनके हाथ में थमा दी, जो एक साँड से बँधी हुई थी। उन्होंने मसाई जनजाति को इस मदद के लिए धन्यवाद दिया। गायों को अमेरिका ले जाना कठिन था, इसीलिए उन्हें बेच कर उन्होंने अमेरिका में मसाई आभूषण ले जाने की घोषणा की।

क्या अमेरिका के पास गायों या कुछ रुपयों की कमी हो गई थी जो उसने अपने उप-उच्चायुक्त को इतनी दूर भेज कर इस समारोह का हिस्सा बनाया? इसके लिए हमें अमेरिका की तारीफ करनी चाहिए क्योंकि उसने जनजातीय समूह के प्यार को स्वीकार किया और उनके दान का मान रखा। इसके लिए हमें केन्या और उसके लोगों को धन्यवाद देना चाहिए, जिन्होंने आपदा के बारे में जान कर जो हो सका और जो समझ आया, अपनी तरफ से उसे पूरे जी-जान से किया।

नाइयोमह इस पूरे प्रकरण में मसाई लोगों का अमेरिका से संपर्क कराने में काम आए थे। उन्होंने ही उच्चायुक्त के दफ्तर से संपर्क किया था। उनके लिए गायें जीवन का हिस्सा रही हैं, केंद्र में रही हैं, इसीलिए उन्होंने अपनी तरफ से अपनी सबसे कीमती उपहार अमेरिका को मदद के रूप में दिया। गायों को नाम दिया जाता है। उनकी पूजा की जाती है। उनसे बातें की जाती हैं। रीति-रिवाजों में हिस्सा बनाया जाता है।

ठीक इसी तरह, आज जब केन्या ने ये कहते हुए मदद भेजी है कि उनके चाय-कॉफी से कठिन समय में लगातार काम में लगे भारत के मेडिकल कर्मचारी और डॉक्टर जब केन्या की चाय-कॉफी पियेंगे, तो तरोताजा महसूस करेंगे और उन्हें कुछ आराम मिलेगा – तो ये उनके प्यार को सम्मान देने का वक़्त है। क्या आपको पता है कि केन्या की कॉफी दुनिया की 5 सबसे बेहतरीन कॉफी में से एक है? एसिडिटी और फ्लेवर के लिए ये दुनिया भर में विख्यात है।

इसीलिए, ये कहना कि केन्या ने प्यार से मदद भेज दी तो भारत भिखमँगा हो गया है, बिल्कुल ही गलत है। गिरोह विशेष को समझना चाहिए कि रुपए के आधार पर ही केवल ये नहीं तय किया जाता कि कौन किसकी मदद कर सकता है, कभी-कभी ये किसी के लिए दिल में मान-सम्मान की मात्रा के आधार पर तय होता है। आज हमें केन्या का उसके प्यार के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए, वरना साल में 3.42 लाख मीट्रिक टन कॉफी का उत्पादन होता है।

भारत के बारे में एक और बात जानने लायक है कि इसने दुनिया के देशों के समक्ष हाथ फैलाना बंद कर दिया है और पिछले दो दशकों से इसने विभिन्न आपदाओं के समय किसी देश से मुफ़्त में कुछ नहीं माँगा। उलटे भारत ने पिछले साल अमेरिका को भारी मात्रा में दवाओं की खेप भेजी थी। भारत ने केन्या को भी वैक्सीन दी थी। केन्या में भारत की वैक्सीन सप्लाई रुकने के बाद टीकाकरण ही बंद हो गया था।

गाँव में कोई आपदा आने पर लोग परस्पर सहयोग नहीं करते ये एक-दूसरे की सहायता नहीं करते हैं? क्या दुनिया के देशों के बीच परस्पर सहयोग की ये भावना गायब हो जानी चाहिए, गिरोह विशेष ऐसा चाहता है? गायों की रक्षा के लिए शेर तक से लड़ जाने वाले मसाई जब उन्हीं गायों को अमेरिका को दान में देते हैं, तो इससे अमेरिका का मान घट तो नहीं जाता? ठीक इसी तरह, केन्या के प्यार को स्वीकार करने से भारत कंगाल नहीं हो गया।

मछुआरों को ‘व्हेल की उल्टी’ से मिले 11 करोड़ रुपए, ‘तैरते सोने’ से बदल गई जिंदगी

दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल यमन के 35 मछुआरों की जिंदगी एक व्हेल की वजह से अचानक ही बदल गई और वे रातोंरात अमीर बन गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी यमन के 35 मछुआरों को एडेन की खाड़ी में एक स्पर्म व्हेल के शव की जानकारी मिली थी। इस मृत व्हेल के अंदर से उन्हें ऐसी चीज मिली जिसकी कीमत करोड़ों में थी और इससे उनका जीवन ही बदल गया।

दरअसल, यमन के इन मछुआरों को उस व्हेल के अंदर से ambergris या व्हेल की उल्टी (Whale vomit) मिली, जिसकी कीमत 11 लाख पाउंड यानी कि 11 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। इसकी कीमत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि व्हेल की उल्टी के एक किलो की कीमत 36 लाख रुपए से भी ज्यादा होती है।

स्पर्म व्हेल की उल्टी की कीमत 11 करोड़ रुपए

एडेन की खाड़ी से मृत व्हेल को छोटी नावों के जरिए किनारे तर खींचकर लाने के बाद मछुआरों को उसके शरीर से आ रही तेज गंध से लग गया कि इसके अंदर कुछ है।

एक मछुआरे ने कहा, ”हम व्हेल को हुक में फँसाकर किनारे ले गए और उसके पेट के अंदर क्या है इसे देखने के लिए उसे काटा, और हाँ, ये ambergris था। महक बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन ये बहुस सारा पैसा था।”

इन मछुआरों को उस व्हेल के पेट से 127 किलो का ambergris या व्हेल की उल्टी (Whale vomit) का टुकड़ा मिला, जिसे बेचने पर उन्हें 11 लाख पाउंड यानी 11 करोड़ रुपये से भी अधिक मिले।

इतनी बड़ी रकम को इन मछुआरों ने आपस में बाँट लिया, साथ ही कुछ पैसे ambergris खोजने में मदद करने वालों और गाँव में जिनके पास घर नहीं है उन्हें भी दिए गए। इन पैसों को जहाँ कुछ मछुआरे घर बनाएँगे और कार और नाव खरीदने में खर्च करेंगे, तो वहीं कुछ की योजना गरीबी से उबरने के बाद अब शादी करने की है।

क्या है Ambergris या व्हेल की उल्टी (Whale vomit)

ये व्हेल के अंदर पाया जाने वाला पदार्थ होता है, जो बहुत कीमती होता है। इसका उपयोग खासतौर पर सेंट बनाने में किया जाता है, जिससे इसकी खुशबू लंबे समय तक बरकरार रहती है।

Ambergris ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील तत्व होता है, जो व्हेल की किसी ऐसे शिकार से रक्षा करती हैं जिसका कोई हिस्सा नुकीला होता है। Ambergris के होने से किसी नुकीले शिकार को खाने पर भी व्हेल के अंदरूनी हिस्से में चोट नहीं लगती है।

Ambergris इतना कीमती होता है कि इसे ‘तैरता सोना’ भी कहा जाता है और इसकी तस्करी के लिए व्हेल का अवैध शिकार भी होता है। भारत में भी Ambergris की कीमत काफी अधिक है।

‘यहूदियों से ज्यादा नफरत किसी से नहीं… स्कूलों को टारगेट कर बच्चों को निशाना बनाओ’: क्या मिया खलीफा ही हैं ‘SarahJoe93’

ट्विटर पर इजरायली लोगों के नरसंहार के लिए हमास को उकसाने का काम ‘Sarah Joe’ नाम का एक ट्विटर यूजर साल 2014 से कर रहा। इसके स्क्रीनशॉट ब्रिटिश पत्रकार रहीम जे कसम ने अपने अकाउंट से बुधवार (जून 2, 2021) को शेयर किए और पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा को टैग कर पूछा कि क्या वह साराह को जानती हैं।

2014 के एक ट्वीट में साराह ने इजरायली प्रोपेगेंडा को घटिया बताते हुए हमास के आतंकियों से अपील की कि वह इजरायल के कुछ स्कूलों को टारगेट कर वहाँ के बच्चों को निशाना बनाएँ ताकि दुनिया को भविष्य में यहूदियों से बचाया जाए।

इसके बाद रहीम ने साराह का 2014 का एक और ट्वीट शेयर किया। इसमें साराह ने बताया था कि उन्हें किसी मानव जाति से इतनी नफरत नहीं है, जितनी यहूदियों से है। ये ट्वीट साराह ने 24 जुलाई 2014 को किया था।

अगले ट्वीट में रहीम ने साराह का एक फोटो वाला ट्वीट शेयर किया। इसे साल 2014 में इसी हैंडल पर अपलोड किया गया था और इस पर हैशटैग में ‘sterlingneverlovedu’ लिखा था। तस्वीर में नजर आने वाली महिला बिलकुल मिया खलीफा जैसी दिख रही है। उनके साथ एक पुरुष भी हैं।

अब इन ट्वीट्स और रहीम द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स को देख कर माना जा रहा है कि मिया खलीफा का असली नाम साराह जो है और चूँकि उनका जन्म भी फरवरी 1993 में हुआ। ऐसे में संभव है कि खलीफा ने ये (@sarahjoe93) अकाउंट पॉर्न स्टार बनने से पहले बनाया हो। 

मालूम हो कि पिछले साल मिया खलीफा ने अपने पूर्व पति और पूर्व प्रेमी की तस्वीर को शेयर किया था, जिन पर उन्होंने मानसिक और यौन शोषण के आरोप मढ़े थे। ये तस्वीर भी उस शख्स से मिलती-जुलती हैं जिसकी तस्वीर साल 2014 में साराह के अकाउंट से शेयर हुई।

उल्लेखनीय है कि मिया खलीफा ने साल 2014 से पॉर्न इंडस्ट्री में काम शुरू किया था। उनके पति ने ही उनकी अश्लील तस्वीरें रेडिट पर डाली थीं। फिर वह अक्टूबर 2014 से पॉर्न इंडस्ट्री में घुस गईं। आज रहीम द्वारा शेयर किया गया साराह का विवादित ट्वीट, मिया के 2014 में पॉर्न स्टार बनने से ठीक कुछ माह पहले का है।

फिलहाल साराह ने अपना अकाउंट प्रोटेक्ट कर लिया है। लेकिन ह्यूमन इवेंट के जैक पॉसोबिएक ने खुलासा किया है कि @the chive पर sarahjoe93 नाम से जो अकाउंट है उस पर सारे पोस्ट मिया खलीफा ने किए हैं। बता दें कि द शिवे एक तस्वीर साझा करने वाली वेबसाइट है, जहाँ साराह जो की तस्वीरों में मिया खलीफा दिख रही हैं।

मस्जिद में पानी लेने आई थी 12 साल की बच्ची, मौलवी इलियास ने किया बलात्कार: दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद से दबोचा

दिल्ली में एक मौलवी पर मस्जिद के भीतर एक नाबालिग लड़की का बलात्कार करने का आरोप लगा है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (जून 1, 2021) को इस घटना के सम्बन्ध में जानकारी दी। पुलिस ने इस मामले की FIR दर्ज करने के बाद आरोपित मौलवी को अदालत में पेश किया। कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है।

पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद ये कार्रवाई की गई। साथ ही आश्वासन दिया कि इस मामले में तुरंत न्याय मिले, इसीलिए जाँच के बाद जल्द से जल्द चार्जशीट दायर करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित नाबालिग लड़की ने अपने बयान में बताया है कि रविवार (मई 30, 2021) को रात 10 बजे ये घटना तब हुई, जब वो पानी भरने के लिए मस्जिद के भीतर गई थी।

आरोप है कि वहीं पर 48 वर्षीय आरोपित मौलवी ने उसे रोका और उसके बाद उसका बलात्कार किया। पीड़िता ने घर जाने के बाद परिजनों को इस घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया। पीड़िता में मेडिकल एग्जामिनेशन कराया जा रहा है। इस घटना की सूचना मिलने के बाद मस्जिद के बाहर आक्रोशितों की भीड़ इकट्ठी हो गई, जिन्हें शांत कराने के लिए वहाँ पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा।

लड़की से जब परिजनों ने रात इतनी देर से आने का कारण पूछा, तब उसने इस घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिजन कुछ पड़ोसियों को लेकर मस्जिद में पहुँचे, लेकिन वो लोगों को देख कर मस्जिद के पिछले दरवाजे से निकल कर भाग खड़ा हुआ और गाजियाबाद के लोनी में शरण ली। आरोपित की पहचान मोहम्मद इलियास के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार करने के लिए टेक्नीकल सर्विलांस का सहारा लिया।

पुलिस की एक टीम को उसके लोकेशन पर भेजा गया, जहाँ से वो धराया। उसे गाजियाबाद से दबोचा गया। 12 वर्षीय नाबालिग पीड़िता की काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की गई है। आरोपित के खिलाफ IPC की धारा-376 (रेप) के साथ-साथ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (POCSO Act)’ के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित मौलवी मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर का निवासी है।

‘दिल्ली की लड़की से फिजिकल अफेयर… मेरे ऊपर कई बार हाथ उठाया’: करण मेहरा का दावा- निशा ने खुद दीवार पर सिर मारा

स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में नैतिक का किरदार निभाकर मशहूर हुए करण मेहरा अब अपनी पत्नी निशा रावल के आरोपों के कारण चर्चा में हैं। गोरेगाँव पुलिस थाने में निशा ने उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने के बाद मीडिया में कई खुलासे किए हैं। 

निशा ने अपनी कुछ तस्वीरें दिखाते हुए करण पर दूसरी लड़की से संबंध होने के आरोप लगाए। साथ ही उन्हें घरेलू हिंसा करने वाला करार दिया। इस बीच करण ने पूरी उलटी कहानी बताई। उनका कहना है कि जो कुछ भी दिख रहा है वो निशा ने खुद किया है। रिश्ते में दिक्कतें थी, लेकिन उन्हें नहीं लगा था कि ये सब थाने पहुँचेगा।

बता दें कि करण-निशा से जुड़ा पूरा विवाद सोमवार (31 मई 2021) रात से मीडिया में आया। पहले निशा ने पति करण पर मारपीट के आरोप में एफआईआर करवाई। करण की गिरफ्तारी हुई। कुछ देर बाद जमानत मिलते ही करण बाहर निकले और उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए निशा रावल पर गंभीर आरोप मढ़े।

निशा के आरोप

निशा रावल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने 14 साल के रिश्ते को इस तरह मीडिया में आने को बेहद शर्मिंदा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वह मीडिया के सामने सिर्फ अपने बच्चे (काविश) के कारण आई हैं। ये सब उनके साथ बहुत समय से हो रहा था। मगर किसी को कुछ पता नहीं चला। वह करण से प्यार करती थीं, इसलिए अब तक चुप थीं।

निशा रावल के आरोपों का पूरा वीडियो

दूसरी लड़की से रिश्ते के आरोप लगाते हुए निशा ने कहा, “करण का दूसरी लड़की से रिश्ता है, पहले मुझे इसके बारे में नहीं पता था। लेकिन जब मालूम हुआ तो उन्होंने स्वीकारा कि उनकी जिंदगी में कोई और है। मैंने पूछा कि कोई शारीरिक संबंध, गंभीर या भावनात्मक रिश्ता है। उन्होंने कहा कि वह उसे प्यार करते हैं और उनका उसके साथ फिजिकल अफेयर है।” 

निशा के अनुसार वह लड़की दिल्ली की है और घर से दूर जाने का मौका मिलने का बाद ये सब शुरू हुआ। हालाँकि उन्हें जब पता चला तो उन्होंने अपने पति की इमेज के लिए चुपचाप उनसे बात करना सही समझा। निशा ने बैठाकर करण से बात की और करण ने उन्हें सब बताया। इसके बाद वह करण के माता-पिता के पास गईं जहाँ उन्हें समझाया गया कि वह रिश्ते पर काम करें। निशा ने कहा कि अगर करण चाहेंगे तो वह लौट जाएँगी। इसके बाद करण मिले और वह वापस आ गईं। लेकिन करण का बर्ताव नहीं बदला। उन्होंने बहुत कोशिश की।

वह कहती है कि करण की तस्वीर पिछले 14 सालों में और अब कोई नई नहीं है। लेकिन हर बार वह माफी माँग लेता था और निशा को भी लगता था कि वे एक्टर हैं, इससे इमेज खराब होगी। घटना वाले दिन की बात करते हुए उन्होंने बताया कि करण के चंडीगढ़ से लौटने के बाद उनकी बहुत बहस हुई। वो उन पर गुस्सा थीं और उन्हें बुरा-भला भी कहा। तभी करण उठे और उनका बाल पकड़कर दीवार में मार दिया जिससे खून निकलने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाती तब तक करण ने उनका गला पकड़कर सिर भी दीवार में लगा दिया था।

निशा के मुताबिक करण ने ये सब करने के दौरान घर के हर सीसीटीवी को बंद कर दिया था। मगर उनके घर में बाकी लोग मौजूद थे। इसी घटना के बाद निशा ने अपनी पुलिस में शिकायत की। वह कहती है कि उन्होंने रिश्ते को बचाने के लिए बहुत कोशिशें की। मगर करण किसी हाल में उनके साथ रहने को तैयार नहीं थे। करण ने निशा के भाई से भी ढंग से बात नहीं की, जिसे उन्होंने लखनऊ से बुलवाया था।

इसके अलावा निशा ने करण पर उनकी सारी ज्वेलरी लेने के आरोप लगाए। साथ ही मीडिया में करण के हवाले से चल रही इन बातों को खारिज किया कि उन्होंने कोई फ्रॉड किया है या वे ये सब पैसों के लिए कर रही हैं। वह कहती हैं, “करण ने मेरे ऊपर कई बार हाथ उठाया है। लेकिन वो एक्टर है। स्मार्ट है। उसे मालूम है कैमरा का हर कुछ। कई बार ऐसा हुआ मेरे चेहरे पर काला-नीला हुआ। कई बार पंच करते थे, कभी बैट से भी… लेकिन पिछली रात (घटना वाली रात) के बाद मुझे खड़ा होना पड़ा।”

अपने बायपोलर होने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसका सबूत देने की जरूरत नहीं है। ये एक मूड डिसॉर्डर है जो ट्रॉमा बढ़ने पर होता है। हाँ, वह डिप्रेस थीं, 2014 में अपने बच्चे को खोने के कारण। मगर, इस बीच भी करण उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं करते थे। उनके पास कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं था। वह डॉक्टर के पास गईं और उन्हें ये बीमारी डायगनॉस हुई। उन्होंने इसके लिए दवाई भी ली। मगर उनका आखिरी इलाज सिर्फ एंजायटी को लेकर हुआ, इससे बायपोलैरिटी का कोई लेना-देना नहीं है।

करण का क्या कहना है

घरेलू हिंसा का केस दर्ज होने के बाद करण मेहरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा बताया। साथ ही स्वीकार किया कि दोनों के रिश्ते में पिछले कुछ समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों पिछले काफी समय से अलग होने की सोच रहे थे लेकिन बात पुलिस तक पहुँच जाएगी, इसका अंदाजा भी नहीं था।

करण ने कहा, “हमारे बीच चीजों को सुलझाने के लिए निशा के भाई रोहित सेठिया भी आए हुए थे। निशा और उनके भाई ने एक एलिमनी अमाउंट माँगा लेकिन वो इतना ज्यादा था कि मैं उसे नहीं दे सकता था। रात 10 बजे फिर हमारे बीच इसी को लेकर बात हुई। तब भी मैंने साफ कहा कि ये मैं नहीं कर सकता। उसके बाद जब मैं कमरे में गया तो निशा पीछे से आ गईं। मैं माँ से बात कर रहा था और उन्होंने गाली देना शुरू कर दिया। जोर-जोर से चिल्लाई और मेरे ऊपर थूका, उसके बाद मैंने उनसे कमरे से बाहर जाने को कहा।”

करण के अनुसार, “इसके बाद निशा ने मुझे धमकी देते हुए कहती हैं, देखो अब मैं क्या करती हूँ और फिर वो बाहर चली गईं। दीवार पर अपना सिर मारा और सबको बताया कि करण ने मेरे साथ ऐसा किया है। इसके बाद निशा के भाई ने मुझपर असॉल्ट किया। मैंने उनके भाई को कहा मैंने निशा को नहीं मारा है और आप ये घर के कैमरे में चेक कर सकते हो, लेकिन कैमरे पहले से ही बंद कर रखे थे।”

निशा पर आरोप लगाते हुए वह कहते हैं, “जब कैमरे बंद मिले तो मैंने रिकॉडिंग शुरू की और पुलिस को बुलाया। पुलिस ने भी कुछ नहीं किया, क्योंकि वह सच्चाई को समझ रहे थे। उन्होंने कहा अब केस किया है तो जाँच होगी और सच जल्द सबके सामने आएगा।” उन्होंने कहा कि निशा उन्हें उनके बच्चे से दूर करने की कोशिश कर रही हैं। अपनी गिरफ्तारी पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वह पुलिस स्टेशन में कुछ देर थे। पुलिस वालों ने बातचीत की और उनका पक्ष समझा फिर वहाँ से वह अपने दोस्त के घर चले गए।

मेहुल चोकसी के भाई ने डोमिनिका में विपक्षी सांसद को दी ‘रिश्वत’, अपहरण की कहानी आगे बढ़ाने पर चुनाव में मदद का वादा: रिपोर्ट

भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी डोमिनिका में विपक्षी नेताओं को चंदे के जरिए प्रभावित करने की कोशिशों में लगा हुआ है। कैरेबियाई मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल चोकसी के भाई चेतन चीनूभाई चोकसी ने डोमिनिका में विपक्ष के नेता लेनॉक्स लिंटन के साथ दो घंटे तक मुलाकात की।

डोमिनिकन मीडिया आउटलेट एसोसिएट्स टाइम्स ने बताया कि चेतन चोकसी ने लिंटन को 2,00,000 डॉलर की टोकन मनी दी है और साथ ही आगामी आम चुनावों में उन्हें एक मिलियन डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता देने का वादा किया है।

अपहरण की कहानी के बदले चोकसी का विपक्ष को पैसे का वादा

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मेहुल चोकसी के छोटे भाई चेतन चीनूभाई चोकसी ने डोमिनिकन विपक्षी नेता के साथ एक समझौता किया और अपहरण की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए चुनावी फंडिंग का वादा किया। पता चला कि चोकसी के चचेरे भाई ने बातचीत के दौरान खुलासा किया कि चोकसी अपने दम पर डोमिनिका पहुँचा है, लेकिन उसे अदालत में डोमिनिका सरकार के खिलाफ मामले से निपटने और यह विश्वास दिलाने के लिए कि उसे एंटीगुआ और भारतीय पुलिस द्वारा अगुवा किया गया, के लिए विपक्ष की मदद की आवश्यकता है।

चोकसी का मामला डोमिनिका के हाई कोर्ट के समक्ष बुधवार (2 जून) सुनवाई के लिए आएगा। सीबीआई डीआईजी के नेतृत्व में कई-एजेंसी के अधिकारियों की एक टीम चोकसी को वापस लाने के लिए डोमिनिका गई है। ऐसे में यदि कैरेबियाई द्वीप देश भारत को चोकसी के निर्वासन की अनुमति देता है तो उसके भारत लाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

चोकसी, 23 मई को एंटीगुआ और बारबूडा से रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था, जहाँ वह 2018 से एक नागरिक के रूप में रह रहा है। चोकसी को डोमिनका में अवैध प्रवेश के लिए हिरासत में लिया गया था, जहाँ वह कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गया था।

चोकसी के वकीलों ने आरोप लगाया था कि एंटीगुआ और भारतीय जैसे दिखने वाले पुलिसकर्मियों ने उनका एंटीगुआ के जॉली हार्बर से अपहरण कर लिया और एक नाव पर डोमिनिका ले गए।

डोमिनिकन विपक्षी नेता ने उठाए चोकसी की गिरफ्तारी पर सवाल

चोकसी की गिरफ्तारी और निर्वासन के परिणामस्वरूप डोमिनिका में राजनीतिक द्वंद्व छिड़ गया और डोमिनिका के विपक्षी नेता लिंटन ने इसे लेकर प्रधान मंत्री रूजवेल्ट स्केरिट पर निशाना साधा। लिंटन ने कहा कि पीएम को इसका जवाब देना चाहिए कि डोमिनिकन अधिकारी इसमें शामिल क्यों हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि चोकसी का एंटीगुआ में अपहरण कर लिया गया था, पीटा गया और डोमिनिका ले जाया गया, जो इशारा करता है कि इस संगठित अपराध में प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट के निर्देश में सरकारी विभाग शामिल हैं। हालाँकि, लिंटन ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत सरकार के “मुकदमा चलाने के पूर्ण अधिकार” के साथ कोई समस्या नहीं है।

इससे पहले लिंटन ने चोकसी के अपहरण में शामिल होने का आरोप लगाते हुए एंटीगुआ के प्रधान मंत्री गैस्टन ब्राउन को निशाना बनाया था। ब्राउन ने कहा था, ”भले ही चोकसी की नागरिकता अस्थिर थी, हमने एक नागरिक के रूप में उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया, और हमने उन अधिकारों को कम करने के लिए कुछ नहीं किया, जबकि वह एंटीगुआ और बारबूडा की धरती पर थे।”

मेहुल चोकसी मामले के लिए भारतीय अधिकारी डोमिनिका पहुँचे

उधर मेहुल चोकसी को भारत लाने के लिए भारत से आठ सदस्यीय टीम डोमिनिका में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस टीम में विदेश मंत्रालय, सीबीआई, ईडी और सीआरपीएफ से दो-दो लोग शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि यह टीम शनिवार को ही (29 मई 2021) को ही एक प्राइवेट जेट से डोमिनिका पहुँच गई थी। इसी विमान से चोकसी को लाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस टीम में आईपीएस अधिकारी शारदा राउत भी शामिल हैं। 2005 बैच की अधिकारी राउत बैकिंग फ्रॉड मामलों में सीबीआई की अगुआ हैं। उनके ही देखरेख में पीएनबी घोटाले की जाँच हुई थी।

इससे पहले एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने एक स्थानीय रेडियो स्टेशन के साथ साक्षात्कार में पुष्टि की कि भारत सरकार ने अदालती दस्तावेजों के साथ एक जेट भेजा है। ये दस्तावेज चोकसी के भगोड़ा होने से संबंधित हैं। चोकसी से संबंधित दस्तावेज बुधवार (02 जून) को डोमिनिका अदालत में पेश किए जाएँगे।