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पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है: द टेलीग्राफ को भी लक्षद्वीप में पेड़ों पर ‘लाल’ नहीं, दिख रहा है ‘भगवा’

अखबार के नाम पर ट्रोल खबरें चलाने वाला द टेलीग्राफ इस समय बेहद भयभीत है। कारण लक्षद्वीप के पेड़ों के तने पर हुई रंगाई है।

टेलीग्राफ में प्रकाशित लेख

हिंदी में कहावत है, पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति चीजों को वैसे ही देखता है जैसे उसके दिमाग ने पहले से सोचा हुआ है।

यही कारण है कि जब लक्षद्वीप प्रशासन ने पेड़ों को सफेद और लाल से रंगवाया तो टेलीग्राफ उसमें अपने मन से ‘भगवा’ रंग देखकर रोने लगा। टेलीग्राफ ने मुस्लिम बहुल इलाके में इसे ‘संघ परिवार’ का ‘एजेंडा’ करार दिया और सोचा कि ये भयानक हरकत तो एक द्वीप को ‘दूसरा कश्मीर’ बना देगी।

कॉन्ग्रेस नेता थाहा मल्लिका (Thaha Mallika) ने द टेलीग्राफ को बताया कि पूरे भारत में बहुत सारे पेड़ ऐसे लाल रंग में रंगे हुए हैं, लेकिन यह ‘रंग के चुनाव’ (जो वास्तव में ईंट जैसा लाल रंग है और मल्लिका को उसमें भगवा दिखता है।) का एक ‘उद्देश्य’ है कि इससे वह इस द्वीप की आबादी को भड़काएँ।

कॉन्ग्रेस नेता के अनुसार सामान्य परिस्थतियों में पेड़ का रंग मायने नहीं रखता, लेकिन ‘पटेल के एजेंडे’ के कारण लोग रंग के चुनाव से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह केसरिया रंग से पेड़ों को रंग देना बिलकुल गलत है वो भी तब जब कोविड के कारण लोग घरों में बैठे हुए थे।

हकीकत में द टेलीग्राफ में यह घटिया लेख केरल विधानसभा में लक्षद्वीप प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा को वापस बुलाने के लिए पारित किए गए प्रस्ताव के बाद सामने आया है। जिसे विपक्ष ने समर्थन दिया। इनकी समस्या ये है कि संघ परिवार लक्षद्वीप के उन लोगों पर अपने एजेंडा थोपने का प्रयास कर रही है जो महात्मा गाँधी की प्रतिमा भी नहीं लगने देना चाहते थे वो भी अनकहे शरीयत कानून के कारण। समझ रहे हैं आप, एक बुत किसी की धार्मिक भावनाएँ आहत कर सकता है!

पिनराई विजयन इस मामले में पहले हैं जिन्होंने लाल को केसरिया बताने की गलती की और बताया कि अब नारियल के पेड़ भी केसरिया रंग से रंगे जा रहे हैं। विजयन का इस तरह अपनी पार्टी के रंग को न पहचान पाना हास्यास्पद होता अगर भगवा पर निशाना साधने का अर्थ हिंदुओं से घृणा नहीं होती। आज निश्चित तौर पर भगवाकरण सभी हिंदुओं के लिए एक व्यंजना है।

अब पहली बात तो यही है कि पेड़ों का रंग केसरिया नहीं बल्कि लाल और सफेद है। 

लाल और केसरिया रंग में अंतर

ऊपर देखें तो पता चलेगा कि दाएँ वाला केसरिया है और बाएँ वाला केसरिया नहीं है। तो दूसरी बात ये कि आखिर कौन सी आबादी इन रंगों को देख नाराज होगी। क्या ये बयान ये नहीं बताता कि वहाँ के लोग कितने सहिष्णु हैं कि वो एक रंग मात्र से भड़क जाते हैं।

तीसरा, सबसे महत्तवपूर्ण, फुटपाथ के पेड़ों पर इस तरह लाल और सफेद रंग से रंगाई दशकों से होती आ रही है। इसे निगम जैसे प्रशासनों द्वारा किया जाता है। पेड़ के तने को सिनोपिया (गेरू) और चूने की मदद से रंगा जाता है।

इसका सबसे महत्तवपूर्ण कारण होता है कि पेड़ को कीड़े-मकौड़ों से बचाया जा सके। उन पर रंग का कोट होता है ताकि फंगस न लगे। वहीं सफेद रंग एक रिफ्लेक्टर के तौर पर मेन रोड और हाईवे पर काम करता है। कई बार फफूंद नाशकों (फंगीसाइड्स) और कीटनाशकों (इंसेक्टीसाइड्स) को फफूंद जनित रोगों (फंगल डिसीज) से बचाने के लिए पेंट के साथ मिलाया जाता है।

इसलिए, इस मसले पर टेलीग्राफ हो सकता है आज जागा हो, लेकिन लोगों ने सालों से फुटपाथ के पेड़ों को ऐसे रंगों में देखा है। कई बार इन्हें इसलिए भी रंगा जाता है कि लोगों को पता चले कि रंगे हुए पेड़ संरक्षित हैं और उन्हें बिना सक्षम प्राधिकारी को सूचना दिए काटा नहीं जा सकता।

इंदिरा गाँधी के ‘गुरु’ चाहते थे गिरा दी जाए संसद, ‘नई संसद अंधविश्वास का नतीजा’ से पहले भी आई थी एक थ्योरी

सेंट्रल विस्टा पर तमाम प्रोपेगेंडा के बीच यह बात सामने आई है कि 60 पूर्व नौकरशाह नई संसद के निर्माण को अंधविश्वास का नतीजा मानते हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार यह बात पूर्व नौकरशाहों ने उस पत्र में कही थी जो उन्होंने पिछले साल इस परियोजना का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी थी। बकौल पुरी, “ये बड़ा दिलचस्प है कि हमारे 60 पढ़े-लिखे मूर्खों ने कहा है कि यदि रिपोर्ट्स पर विश्वास किया जाए तो अंधविश्वास के कारण नए संसद भवन का निर्माण किया जा रहा है, क्योंकि पुरानी इमारत अशुभ है।”

दीगर है कि नई संसद के निर्माण की जरूरत अरसे से महसूस की जा रही थी। आज इस परियोजना पर दुष्प्रचार कर रही कॉन्ग्रेस भी इसके हक में थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना बताते हुए इस पर रोक लगाने की याचिका खारिज की है। एक दिलचस्प तथ्य यह है कि राजनीतिक गलियारों में संसद के ‘वास्तु’ के तार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से जुड़ती है।

अजेय भारत पार्टी नाम से एक राजनीतिक दल हुआ करता था। इस पार्टी का मान्यता नहीं मिल सकी, क्योंकि वह इसके लिए तय मापदंडों पर खरी नहीं उतर पाई। लेकिन, 90 के दशक में इस पार्टी के बड़े-बड़े विज्ञापन अखबारों में छपा करते थे जिनमें मोटे अक्षरों में लिखा होता था कि यदि अजेय भारत पार्टी सत्ता में आई तो संसद भवन को गिरा दिया जाएगा, क्योंकि इसमें वास्तु दोष है।

अजेय भारत पार्टी खड़ी करने वाले शख्स का नाम था महेश योगी। महर्षि महेश योगी पर इंदिरा के भरोसे का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि 1977 में चुनावी पराजय के बाद खुद को दोबारा से राजनीतिक परिदृश्य पर खड़ी करने के लिए इंदिरा ने जिन तीन लोगों के साथ मुलाकात की थी, उनमें एक वे भी थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि यह मुलाकात दिल्ली के अशोका होटल में हुई थी।

अजेय भारत पार्टी वैसा राजनीतिक प्रभाव कभी हासिल नहीं कर पाई कि संसद भवन को लेकर अपनी सोच मुकम्मल कर पाती। अब जगह की कमी के कारण नई संसद का निर्माण भले हो रहा हो, लेकिन पुरानी संसद अपनी जगह खड़ी रहेगी। उसका इस्तेमाल संसदीय आयोजनों के लिए किया जाएगा।

वैसे कुछ रिपोर्टों की मानें तो संसद के ‘वास्तु’ पर तब भी चर्चा हुई थी जब शिवसेना नेता मनोहर जोशी लोकसभा के अध्यक्ष हुआ करते थे। कहा जाता है कि वास्तु विशेषज्ञ अश्विनी कुमार बंसल ने इस संबंध में एक रिपोर्ट भी सौंपी थी। उसके कॉन्ग्रेस की मीरा कुमार के लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद नई संसद को लेकर चर्चाओं का दौर दोबारा शुरू हुआ था।

क्या दिलचस्प संयोग है कि आज नई संसद को ‘अंधविश्वास’ से जोड़ने वाले नौकरशाह भी सेंट्रल विस्टा पर कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं, संसद के ‘वास्तु’ पर सवाल भी कॉन्ग्रेस काल के हैं, ‘वास्तु’ पर एक रिपोर्ट पाने वाले लोकसभा अध्यक्ष की पार्टी भी आज कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर एक प्रदेश में सरकार चला रही है!

‘हमें एक बार में ही मार दे CPM’: केरल में वामपंथी प्रताड़ना से त्रस्त महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

केरल की सत्ताधारी माकपा (CPI-M) के समर्थकों पर एक बड़े मलयालम चैनत की पूर्व पत्रकार ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। महिला पत्रकार के मुताबिक वामपंथी उन्हें और उनके पति को सोशल मीडिया के जरिए जान-बूझकर निशाना बना रहे हैं। विनिता वेणु नामक की इस पत्रकार का कहना है कि पुलिस महकमे में कार्यरत उनके पति को बदनाम करने के लिए सीपीआई-एम के समर्थक झूठी कहानियाँ गढ़ रहे हैं।

विनिता के अनुसार उनके पति कोजीकोड़े जिले के चोंबाला पुलिस थाने में पोस्टेड हैं। एक दिन उनके पति घर लौट रहे थे तो सेना में कार्यरत उनके एक मित्र जो फिलहाल नॉर्थ-ईस्ट में तैनात हैं, उनसे कहा कि वह कन्नूर जिले के पयाम में जाकर उनके (दोस्त के) माता-पिता का हाल जान लें। महिला पत्रकार के अनुसार उनके पति अपने दोस्त के माता-पिता के घर के पास बाइक खड़ी कर फोन पर बात कर रहे थे तो शराब के नशे में धुत लोग आए और सवाल करने लगे। इस बीच इरिट्टी से पुलिस ने आकर उन्हें बचाया।

इसके बाद सीपीआई-एम के समर्थकों ने सोशल मीडिया ग्रुप्स में परिवार को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उनके पति पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के आरोप लगाए जाने लगे। अगले दिन से उनके पति के बारे में कई कहानियाँ कही जानी लगीं। सीपीआई-एम के मुखपत्र देशाभिमानी में इसे लेकर एक खबर भी छपी। फेसबुक पोस्ट में महिला पत्रकार ने बताया है कि उनके पति ने कभी शराब तक नहीं पी। वायरल हो चुके इस पोस्ट में वह सीपीआईएम नेतृत्व से कहती हैं कि उन्हें इस प्रताड़ना से एक ही बार में छुटकारा दे दिया जाए।

हत्या की रिपोर्ट के बाद से शुरू हुई प्रताड़ना

IANS से बात करते हुए विनिता ने बताया कि उन्होंने यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता शुहैब की नृशंस हत्या की सूचना दी थी। शुहैब पर 12 फरवरी 2018 को कथित तौर पर माकपा के कुछ लोगों ने हमला किया था और घटना के बाद अगले दिन उसकी मौत हो गई थी। विनित के अनुसार इसके बाद से वह माकपा और उसके कार्यकर्ताओं के निशाने पर हैं।

उन्होंने बताया, “एक अन्य मामले में की गई रिपोर्टिंग के कारण भी सीपीआई-एम उनसे नाराज है। उस समय वह एक बड़े न्यूज चैनल में काम करती थीं। उन्होंने कोविड पॉजिटिव मरीज की जानकारी लीक होने पर रिपोर्ट की थी। बाकी चैनलों ने भी इस पर रिपोर्ट किया था।”

विनिता के अनुसार सीपीआई एम के समर्थकों ने सोशल मीडिया में दावा किया था कि यह सब जानकारी उन्हें अपने पति से मिली थी। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से बदनाम करने के लिए है। मैंने स्टोरी तब की थी जब दो मलयालम चैनलों ने लीक पर रिपोर्ट कर ली थी। ये दावा कि मेरे पति ने मुझे इस पर जानकारी दी, बिलकुल गलत है। मेरे पति कनिष्ठ स्तर के पुलिसकर्मी हैं और बड़े अधिकारियों के पास हर मामले की जानकारी होती है।”

उन्होंने बताया कि उनके पति का 7 बार ट्रांसफर हुआ जो कि आमतौर पर केरल पुलिस में नहीं होता। जब उन्होंने पुलिस चीफ से इसकी शिकायत की तब जाकर यह सिलसिला रुका उन्हें कोजीकोड़े जिले में पोस्ट किया गया। ये जिला उनके गृह जिले कन्नूर से नजदीक है।

इस मामले में विनिता को वकील केके रेमा का भी समर्थन मिला। रेमा के पति भी सीपीआईएम के गुंडों द्वारा 4 मई 2012 को मारे गए थे। IANS से बात करते हुए उन्होंने कहा है, “चुनावों में जीत से उन्हें लग रहा है कि वे कुछ भी कर सकते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि एक महिला और उसके परिवार को प्रताड़ित करने से उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और वे इतिहास के गर्त में चले जाएँगे। मैं विनीता वेणु और न्याय के लिए उनकी लड़ाई के साथ मजबूती से खड़ी हूँ।”

चीन में एक और वायरस की दस्तक, सामने आया इंसान में H10N3 बर्ड फ्लू के संक्रमण का पहला केस

कोरोना वायरस को लैब में तैयार किए जाने के आरोपों से घिरे चीन में H10N3 एवियन (बर्ड) इंफ्लुएंजा से इंसान के संक्रमित होने का दुनिया में पहला मामला सामने आया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चीन के जिआंगसु प्रांत में H10N3 एवियन इंफ्लुएंजा से इंसान के संक्रमित होने का पहला मामला दर्ज किया गया है।

चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार (1 जून, 2021) को कहा कि यह मुर्गे से ह्यूमन ट्रांसमिशन का कभी-कभार होने वाला केस है और इसके बड़े पैमाने पर फैलने का जोखिम बेहद कम है।

चीन में मिला H10N3 वायरस से संक्रमित दुनिया का पहला व्यक्ति

H10N3 वायरस से संक्रमित मरीज जियांग्सू प्रांत के एक शहर झेनजियांग का रहने वाला 41 वर्षीय व्यक्ति है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग द्वारा मंगलवार को जारी एक नोटिस के अनुसार, उस व्यक्ति को 23 अप्रैल को बुखार और अन्य लक्षण थे और उसे 28 अप्रैल को इलाज के लिए एक स्थानीय चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराया गया था।

रोगी से प्राप्त वायरस के पूरे आनुवंशिक विश्लेषण से पता चला कि उसका H10N3 वायरस का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया, जिससे वह H10N3 से संक्रमित होने वाला पहला इंसान बन गया।

अभी तक, चीन के स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) के विशेषज्ञों का दावा है कि वायरस के पूरे आनुवंशिक विश्लेषण से पता चलता है कि H10N3 वायरस का मूल पक्षियों का हैऔर इसमें मनुष्यों को प्रभावी ढंग से संक्रमित करने की क्षमता नहीं थी।

कितना घातक है H10N3 वायरस?

एनएचसी ने कहा, “दुनिया में इंसानों में H10N3 का कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है, और मुर्गे (पोल्ट्री) के बीच H10N3 वायरस कम रोगजनक है। यह मामला पोल्ट्री-टू-ह्यूमन क्रॉस-स्पीशीज ट्रांसमिशन का है, और इसके बड़े पैमाने पर फैलने का जोखिम बेहद कम है।”

एक चिंताजनक बात ये है कि वुहान विश्वविद्यालय में पैथोजेन बायोलॉजी विभाग के उप निदेशक यांग झानकिउ ने कहा कि H10N3 इंफ्लुएंजा A वायरस का एक सबटाइप है, जिसे बर्ड फ्लू वायरस भी कहा जाता है। H10N3 आमतौर पर जंगली पक्षियों और मुर्गे-मुर्गियों के लिए घातक होता है, क्योंकि यह फ्लू और कोविड-19 की तरह जानवरों के बीच सांस की छोटी बूंदों के माध्यम से फैल सकता है,

यांग ने कहा कि यह अज्ञात है कि यह व्यक्ति कैसे संक्रमित हुआ, लेकिन संभवत: वह मुर्गे की साँस की छोटी बूंदों या बीमार जीवित मुर्गे के सीधे संपर्क से संक्रमित हो गया।

इंसानों के लिए कितना बड़ा खतरा है H10N3?

यांग ने कहा कि यह मनुष्यों के लिए कम खतरा पैदा करता है और यह इंगित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि H10N3 वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि हमें मामले पर अधिक प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए, और यह देखने के लिए अधिक निगरानी की जानी चाहिए कि यह कैसे फैलता है।

अन्य प्रकार के एवियन (बर्ड)) इंफ्लुएंजा से मनुष्यों के संक्रमित होने के मामले आम हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने फरवरी में दुनिया में एवियन इन्फ्लूएंजा ए (H5N8) वायरस से मानव संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि की थी। मध्य चीन के हुनान प्रांत ने दिसंबर 2020 में H5N6 बर्ड फ्लू वायरस के एक मानव संक्रमण मामले की पुष्टि की थी। विभिन्न प्रकार के एवियन (बर्ड) इंफ्लुएंजा के बीच, यांग ने कहा कि H5N1 प्रकार अत्यधिक रोगजनक है, जिसकी मृत्यु दर 40 से 50 प्रतिशत के बीच है।

एनएचसी ने जिआंगसु को महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय करने का निर्देश दिया है। मरीज के सभी करीबी संपर्कों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। स्थानीय अधिकारियों ने आपातकालीन निगरानी की है, जिसमें अब तक कोई असामान्यता नहीं पाई गई है। एनएचसी की घोषणा में कहा गया है कि मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है और वह अस्पताल से छुट्टी के लिए तैयार है। एनएचसी ने जनता को बीमार या मृत मुर्गे के संपर्क से बचने और जीवित मुर्गे के सीधे संपर्क से बचने की कोशिश करने की चेतावनी दी।

दिल्ली में दारू की होम डिलिवरी, लेकिन पुलिसकर्मी की विधवा को सालभर बाद भी मदद नहीं: पत्र लिख केजरीवाल से पूछा- भेदभाव क्यों

ऑनलाइन वेब पोर्टल या ऐप के जरिए लोगों के घरों में देसी और विदेशी दारू पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार शायद भूल गई है कि उन्होंने कोविड महामारी में फ्रंटलाइन पर काम करने के दौरान जान गँवाने वाले वॉरियर्स के परिवारों से कुछ वादे किए थे। लिहाजा एक पुलिसकर्मी की विधवा को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को खत लिखना पड़ा है। वे सालभर से दिल्ली सरकार के मुआवजे की बाट जोह रही हैं। उन्होंने अपने साथ भेदभाव की वजह भी पत्र में पूछी है।

इसी क्रम में पूरे एक साल के इंतजार के बाद दिवंगत पुलिस कॉन्सटेबल अमित राणा की पत्नी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिख कर अधूरे वादे पर उनका ध्यान आकर्षित करवाया है। उन्होंने हाल में मुआवजा पाने वाले परिवारों का नाम लिए बिना केजरीवाल से इस भेदभाव की वजह पूछी है।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि अमित कुमार राणा का निधन कोविड से 5 मई 2020 को हुआ था। पुलिस बल में कोविड से होने वाली ये पहली मृत्यु थी। अब इस घटना को 1 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन सीएम केजरीवाल को याद नहीं कि अमित राणा के परिवार को उन्हें 1 करोड़ का मुआवजा देना है।

अरविंद केजरीवाल को लिखा गया पत्र

मुख्यमंत्री को उनकी कही बात याद दिलाते हुए राणा की पत्नी पूजा लिखती हैं, “मेरे पति अमित राणा शहीद कोरोना वॉरियर थे और दिल्ली के लोगों की सेवा व रक्षा करते हुए कोरोना से ग्रसित होकर उनकी मृत्यु हो गई। मेरे ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उस दुख की घड़ी में मेरे पति की सेवाओं को याद करते हुए आपने एक करोड़ रुपए की सहायता राशि की घोषणा की थी। उस दुख की घड़ी के अंधेरे में वो मेरे लिए आशा की किरण था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी मुझे सहायता राशि नहीं मिल पाई है जिसकी आपने मीडिया पर ट्विटर से घोषणा की थी। कुछ लोगों को आपने दस दिन के अंदर ही सहायता राशि प्रदान कर दी थी फिर मेरे साथ ऐसा भेदभाव क्यों?”

पूजा लिखती है, “मेरा 1 साल का बेटा और एक चार माह की बेटी है। आज उनके भविष्य की चिंता सता रही है। यदि मुख्यमंत्री अपने किए वादे को पूरा नहीं करते तो शायद मैं किसी पर विश्वास नहीं कर पाऊँगी।”

बता दें कि इस वर्ष जनवरी में अमित राणा की विधवा पूजा ने बताया था कि अमित की फाइल को दिल्ली सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है, क्योंकि यह उनके मापदंडों को पूरा नहीं करती जबकि उन्होंने सरकारी विभाग द्वारा माँगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे, फिर भी उन्हें कहा गया कि अमित कोविड ड्यूटी में तैनात नहीं थे।

इस बीच दिल्ली के जीटीबी अस्बताल के डॉक्टर अनस मुजाहिद के रिश्तेदारों तथा कुछ अन्य लोगों को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 1 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है। आँकड़ों पर बात करें तो दिल्ली में 100 डॉक्टरों और 92 टीचर्स की मौत हुई है। इसके बावजूद केजरीवाल चुनिंदा लोगों को मुआवजा देने में लगे हैं। 23 मई को केजरीवाल ने डॉ. अनस के पिता से मिल कर उन्हें 1 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। 

मालूम हो कि दिल्ली के सीएम बार-बार कहते हैं कि उन्हें कोविड वॉरियर्स की मौतों का खेद हैं और वह उन्हें आर्थिक सहायता मुहैया करवाएँगे। लेकिन हकीकत ये है कि कोविड में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जान गँवाने वाले 15 में से 12 पुलिसकर्मियों के परिवारों की फाइल दिल्ली सरकार दिसंबर 2020 में रिजेक्ट कर चुकी है। वहीं 3 अभी दिल्ली सरकार के पास पेंडिंग पड़ी है।

अब किस कठघरे में होगा सेंट्रल विस्टा… क्योंकि प्रोपेगेंडा ही उनकी फितरत

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। साथ ही इसे फाइल करने वाले पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी किया है। अब आने वाले दिनों में इस प्रोजेक्ट के विरुद्ध प्रोपेगेंडा की शक्ल क्या होगी, वह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके विरोध की योजना को आगे कौन सी दिशा मिलती है।

वैसे तो इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट भी इस प्रोजेक्ट की वैधता को लेकर दाखिल पीआईएल हले ही खारिज कर चुका है पर देखना यह होगा कि प्रोजेक्ट के विरुद्ध प्रोपेगेंडा करने वाले किसी और रास्ते एक बार फिर से शीर्ष अदालत जाते हैं या इस शोर शराबे से काम चलाते हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला साबित करता है कि न्यायालय स्वतंत्र नहीं रहे और मोदी सरकार ने इन पर कब्जा कर रखा है।

यदि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली किसी याचिका को स्वीकार कर लेता है तो टूलकिट के अनुसार से चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा को और आगे ले जाना आसान होगा, क्योंकि केंद्र सरकार के लिए फिर से वही सब कुछ करना आवश्यक हो जाएगा जो उसने दिल्ली हाई कोर्ट में किया है। यदि ऐसा न हुआ तो न्यायालयों पर सरकार के कब्जे वाला आरोप दोहराया जाएगा ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ चल रहे प्रोपेगेंडा को और आगे ले जाया जा सके। 

यह प्रोजेक्ट टूलकिट प्रधान प्रोपगेंडा में विशेष स्थान रखता है। यही कारण है कि पिछले पाँच महीनों में इसे लेकर बार-बार प्रश्न उठाए गए और यह साबित करने की कोशिश की गई कि इसे जारी रखने का अर्थ यह है कि केंद्र सरकार ने कोरोना की समस्या को छोड़ अपना सारा ध्यान, ऊर्जा और संसाधन इसी प्रोजेक्ट पर लगा रखा है। महामारी के दौरान इस प्रोजेक्ट को जारी रखने के खिलाफ बार-बार उलटे-सीधे सवाल उठाकर यह बताने की कोशिश की गई जैसे यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट, नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी महत्वाकांक्षाओं का प्रोजेक्ट है। जैसे इसकी आवश्यकता ही नहीं है और केंद्र सरकार इसे जबर्दस्ती जारी रखना चाहती है। इसकी तुलना मुगल बादशाह द्वारा बनवाए गए ताजमहल से करने का प्रयास भी किया गया।

प्रोपेगेंडा में भी कॉन्ग्रेसियों की दौड़ मुगलों पर ही जाकर रूकती है!

दिल्ली हाई कोर्ट ने पीआईएल को खारिज करते हुए इसको राष्ट्रीय महत्व की परियोजना बताते हुए कहा कि यह पीआईएल जेन्युइन नहीं है, इसलिए चल रहे निर्माण को रोकने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हाई कोर्ट का मानना था कि पीआईएल फाइल करने वाला यह साबित नहीं कर सका कि इसकी वजह से कोरोना के विरुद्ध सरकार की लड़ाई किसी तरह से प्रभावित होती है।

पीआईएल के सहारे निजी या सार्वजनिक उद्योगों का निर्माण रोकना कोई नई बात नहीं है। ऐसा करना कुछ एनजीओ और आन्दोलनजीवियों के लिए जीवन-यापन जैसा है पर इंफ्रास्ट्रक्चर के एक आवश्यक राष्ट्रीय परियोजना को रोकने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? आखिर सरकारी परियोजना से किसे दिक्कत है? केंद्र सरकार पहले भी यह बता चुकी है कि इस परियोजना की आवश्यकता सरकार को है और इसके निर्माण के पश्चात किराए की शक्ल में किए जाने वाले सरकारी खर्च की बचत होगी। इसके अलावा भविष्य में यदि योजना के अनुसार चुनाव सम्बन्धी सुधार किए गए और सांसदों की संख्या बढ़ी तो भी देश को एक नए संसद भवन की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में क्या यह आवश्यक नहीं कि नए संसद भवन का निर्माण समय पर हो जाए?

इन कारणों के अलावा इस प्रोजेक्ट की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में आई मंदी के दिनों में इंफ्रास्ट्रक्चर सम्बन्धी ऐसी परियोजनाओं से लोगों को रोजगार मिलता है जो मज़दूरों के लिए आवश्यक है। यह एक ऐसा तरीका है जो आवश्यकता पड़ने पर दुनिया भर की सरकारें अपनाती हैं। यदि हम इतिहास में झाँके तो इसका सबसे बड़ा उदहारण द ग्रेट डिप्रेशन के समय जब रूज़वेल्ट 1933 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने मंदी से जूझ रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का एक दीर्घकालीन अभियान चलाया जिसकी वजह से लोगों को रोजगार भी मिला और एक बहुत बड़ा निर्माण कार्य हुआ जिसपर अमेरिकी अर्थव्यवस्था आज भी चलती है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पीआईएल करने वालों पर जो जुर्माना किया है वह मात्र एक लाख रुपया है। मेरा ऐसा मानना है कि जब कोर्ट का मानना था कि इस पीआईएल के पीछे किसी तरह की बदनीयती प्रमुख कारण है तो उसे जुर्माने की रकम ऐसी लगानी चाहिए थी ताकि भविष्य में बदनीयती लेकर किए जाने वाले किसी तरह के पीआईएल लेकर कोर्ट पहुँचने से पहले लोग दस बार सोचें। जिन लोगों ने यह केस किया था उनके लिए एक लाख रुपए का जुर्माना कुछ नहीं है। यह जुर्माना न तो इस केस की सुनवाई में खर्च किए गए कोर्ट के समय के अनुरूप है और न ही भविष्य में बदनीयती के साथ दायर किए जाने वाले ऐसे किसी पीआईएल को हतोत्साहित करने के लिए काफी है।

हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए इस जुर्माने की बात पर मुझे साल 2012 का इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच का एक फैसला याद आता है जिसमें बेंच ने एक विपक्षी नेता के विरुद्ध बलात्कार का आरोप लगाने वाली एक याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर पचास लाख रुपयों का जुर्माना लगाया था ताकि भविष्य में कोई ऐसा न कर सके।

यह देखना दिलचस्प रहेगा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ अब प्रोपेगेंडा का स्वरूप क्या होगा? इतिहास को देखें तो पाएँगे कि राफेल की खरीद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके अनुसार माफी माँगने के बाद भी राहुल गाँधी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। ऐसे में हाई कोर्ट का निर्णय प्रोपेगेंडा करने वालों को किसी तरह से हतोत्साहित करेगा, इस बात की संभावना न के बराबर है। 

‘क्या से क्या हो गया…’: सैफ अली खान के साथ जो ‘गोवा’ में हुआ, वही खेला डोमिनिका में मेहुल चोकसी के साथ?

भगोड़े बिजनेसमैन मेहुल चोकसी के एंटीगुआ से लापता होने और दो दिन बाद डोमिनिका में जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो उसके साथ एक लड़की भी थी। चोकसी जिस अंदाज में गायब हुआ और जैसे उसकी गिरफ्तारी हुई उसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही वह है मिस्ट्री गर्ल जिसे इस पूरी कहानी का एक अहम किरदार कहा जा रहा है।

मेहुल चोकसी के गायब होने से लेकर गिरफ्तारी और इस महिला के भी उसमें जुड़ने से पूरी पटकथा किसी बॉलीवुड फिल्म सरीखी बन गई।

‘गर्लफ्रेंड’ या ‘मिस्ट्री’ गर्ल के चक्कर में अरेस्ट हुआ मेहुल चोकसी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस महिला के साथ मेहुल चोकसी डोमिनिका ‘रोमांटिक ट्रिप’ पर गया था वह एंटीगुआ में रह रही थी। उसने चोकसी से इवनिंग वॉक के दौरान मुलाकात शुरू की और जल्द ही उसकी दोस्त बन गई। बाद में 23 मई को महिला ने चोकसी को एक अपार्टमेंट में मिलने के लिए बुलाया। जब मेहुल चोकसी उस अपार्टमेंट में पहुँचा तो वहाँ पहले से ही कई लोग मौजूद थे जिन्होंने कथित तौर पर उसे बंधक बना लिया और उसका अपहरण करके डोमिनिका ले गए, जहाँ से बाद में वह गिरफ्तार हुआ।

अभी इस बात पर सस्पेंस कायम है कि आखिर वह महिला कौन थी, क्या वह मेहुल चोकसी की गर्लफ्रेंड है? या फिर वह हनीट्रैप था, जिसके चक्कर फँसकर मेहुल चोकसी डोमिनिका पहुँचा और फिर गिरफ्तार हुआ। लेकिन एक बात तो तय है कि डोमिनका पहुँचने पर चोकसी के साथ एक महिला जरूर थी, जिसकी पुष्टि खुद एंटीगुआ के पीएम गैस्टन ब्राउन ने भी की।

चोकसी के साथ डोमिनिका पहुँची वह महिला कौन थी और उसकी गिरफ्तारी में उसकी क्या भूमिका थी, इस पर भले ही अभी सस्पेंस कायम हो , लेकिन सोशल मीडिया में लोगों ने मेहुल चोकसी के साथ जो खेल हुआ उसको लेकर मजेदार कमेंट्स की झड़ी जरूर लगा दी।

कौन है मेहुल चोकसी की कथित गर्लफ्रेंड?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल चोकसी की कथित गर्लफ्रेंड बबारा जराबिका एक प्रॉपर्टी इन्‍वेस्‍टमेंट सलाहकार है और उसने लंदन स्‍कूल ऑफ इकनॉमिक्‍स से पढ़ाई की है। चोकसी के वकीलों का दावा है कि मेहुल 23 मई को अपनी गर्लफ्रेंड बबारा जराबिका से मुलाकात करने वाले थे। लेकिन इससे पहले कि वह बबारा से मिलने रेस्टोरेंट पहुँच पाते उससे पहले ही जॉली हार्बर इलाके से ऐंटीगुआ पुलिस और भारतीय अधिकारियों ने उनका अपहरण कर लिया।

मेहुल चोकसी के साथ भी हुआ दिल चाहता है के सैफ अली खान जैसा खेल?

कुछ यूजर्स ने चोकसी और इस महिला की कहानी की चोकसी की तुलना ‘दिल चाहता है’ के सैफ अली खान से की। उस फिल्म में सैफ का किरदार समीर एक रूसी लड़की की खूबसूरती से बेहद प्रभावित था, जब वह अपने दोस्तों (आमिर खान और अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए रोल) के साथ गोवा जाता है, तो उस लड़की के साथ और वक्त बिताने के लिए अपनी छुट्टियाँ बढ़ाने का फैसला करता है, जबकि उसके दोनों दोस्त वापस लौट आते हैं। हालाँकि, बाद में वह मुश्किल में पड़ जाता है क्योंकि वह लड़की अपने रूसी प्रेमी के साथ उसका अपहरण कर लेती है, जो उसके सारे पैसे, और कीमती सामान और यहाँ तक कि उसके कपड़े भी लेकर भाग जाती है।

चोकसी की ‘बेचारगी’ पर लोगों ने लिए मजे

मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी में उस महिला की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने कई मजेदार कमेंट्स किए। गब्बर नामक यूजर ने चोकसी की गिरफ्तारी की कहानी को किसी ओटीटी सीरीज जैसा बताया।

गब्बर ने ट्वीट किया, ”शाम की सैर पर एक आकर्षक महिला ने मेहुल चोकसी से दोस्ती की, उसे आकर्षित किया और फिर उसे अपने पास आमंत्रित किया। चोकसी ने सोचा कि कुछ कार्रवाई होगी, जब वह उसके यहां पहुंचा, तो उसका अपहरण कर लिया गया, फिर पीटा गया और गिरफ्तार कर लिया गया। के के मेनन अभिनीत एक ओटीटी सीरीज की तरह लगता है :)”

इस ट्वीट के बाद कई और यूजर ने मेहुल चोकसी की दुर्दशा पर मजेदार कमेंट किए।

मेहुल चोकसी सीबीआई और ईडी दोनों की जाँच के घेरे में है। अपने भाँजे नीरव मोदी के साथ, उस पर कथित तौर पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। खुदरा आभूषण कंपनी गीतांजलि समूह के मालिक, चोकसी ने निवेश कार्यक्रम द्वारा नागरिकता के जरिए नवंबर 2017 में एंटीगुआ और बारबूडा की नागरिकता हासिल कर ली थी और जनवरी 2018 में देश छोड़कर कैरेबियाई देश भाग गया था।

‘अस्सलाम वालेकुम मोदी साहब’: 6 साल की कश्मीरी बच्ची ने PM से की गुजारिश, एक्शन में LG, 48 घंटे में माँगी नई पॉलिसी

सोशल मीडिया में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की एक छोटी बच्ची का वीडियो वायरल होने के बाद उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्कूली शिक्षा विभाग को 48 घंटों के भीतर नई नीति बनाने का निर्देश दिया है। उप राज्यपाल कार्यालय के ट्विटर अकाउंट से इस बच्ची का वीडियो शेयर कर इसे बेहद प्यारी शिकायत कहा गया है।

ट्वीट में कहा गया है, “बहुत ही प्यारी शिकायत है। स्कूली बच्चों पर होमवर्क का बोझ कम करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को 48 घंटे के भीतर नीति बनाने का निर्देश दिया है। बचपने की मासूमियत भगवान का उपहार है और उनके दिन जीवंत, आनंद और सुख से भरे होने चाहिए।”

बता दें कि जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल ने 29 मई को शेयर की गई वीडियो को रीट्वीट करके ये ऐलान किया। अपनी शिकायत में बच्ची बताती दिख रही है कि ऑनलाइन क्लास में छोटे बच्चों की हालत क्या हो जाती है और कैसे उन पर काम का बोझ बढ़ जाता है। ये वीडियो 1 मिनट 11 सेकंड का है। इसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। वहीं सैंकड़ों की तादाद में लोग इसे शेयर भी कर रहे हैं। वीडियो में बच्ची कहती है,

“अस्सलाम वालेकुम मोदी साहब, मैं एक लड़की बोल रही हूँ। मैं 6 साल की हूँ। मैं जूम क्लास की बातें बोल सकती हूँ। छोटे बच्चे जो होते हैं, जो 6 साल के होते हैं, उन्हें मैडम और सर ज्यादा काम क्यों देते हैं। इतना काम तो बड़े बच्चों का होता है। मैं सुबह उठती हूँ 10 बजे से लेकर 2 बजे तक क्लास होती है। पहले अंग्रेजी, गणित, उर्दू, ईवीएस और उसके बाद कंप्यूटर की क्लास होती है। इतना काम तो बड़े बच्चों का होता है, जो सिक्स, सेवन क्लास में होते हैं। छोटे बच्चों को इतना काम क्यों देते हैं मोदी साहब। अब क्या करें। अस्सलाम वालेकुम मोदी सर।”

गौरतलब है कि इससे पहले स्कूल में छोटे बच्चों की हालत बयान करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर साल 2019 में वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक लड़की कह रही थी कि अगर उसे स्कूल शुरू करने वाला व्यक्ति मिल गया तो वह उसे धोकर, पूरे पानी में डालकर इस्त्री कर डालेगी। बड़ी मासूमियत के साथ बच्ची को कहते सुना गया था “भगवान ने दुनिया इतनी अच्छी बनाई, बस पढ़ना क्यों गंदा बनाया? पढ़ना थोड़ा अच्छा ही बना देता। हमको भी तो थोड़ा मजा आता।”

‘ये पढ़े-लिखे मूर्ख… देश के लिए अपमान’: अंधविश्वास से नई संसद को जोड़ने वाले पूर्व नौकरशाहों को पुरी ने लताड़ा

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (मई 31, 2021) को सेंट्रल विस्टा पर रोक को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसका विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया। इसी दौरान उन्होंने खुलासा किया कि 60 सेवानिवृत्त नौकरशाहों के एक समूह ने इस परियोजना के विरोध में पत्र लिखा था जिसमें दावा किया था कि नए संसद का निर्माण अंधविश्वास का नतीजा है। पुरी ने इन पूर्व नौकरशाहों को पढ़ा-लिखा मूर्ख करार दिया।

इन पूर्व नौकरशाहों ने परियोजना के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा था। इस को सबके सामने पढ़ते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ये बड़ा दिलचस्प है कि हमारे 60 पढ़े-लिखे मूर्खों ने कहा है कि यदि रिपोर्ट्स पर विश्वास किया जाए तो अंधविश्वास के कारण नए संसद भवन का निर्माण किया जा रहा है, क्योंकि पुरानी इमारत अशुभ है।”

ब्यूरोक्रेट्स को फटकारा

पुरी ने कहा है कि यदि आपका 40 सालों का अनुभव हो, तो क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि रिपोर्ट्स क्या कहती हैं? इसके बाद लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व ब्यूरोक्रेट्स पर निशाना साधते हुए कहा, “आप उस समय कैबिनेट सेक्रेट्री थे, जिन्होंने इस पर साइन किया। आपकी सरकार ने उस समय 2012 में कहा था कि नई संसद की जरूरत है। अब 2021 में ये क्यों कह रहे हैं कि ये नई संसद इसलिए बनाई जा रही है क्योंकि इसके पीछे अंधविश्वास है।”

पुरी ने इन पूर्व नौकरशाहों के लिए सख्त लहजे में कहा, “ये पढ़े-लिखे मूर्ख नहीं हैं। ये देश के लिए अपमान हैं। मैं कभी भी अपने हस्ताक्षर ऐसे पत्र पर न करूँ जिसमें अंधविश्वास की बात लिखी गई हो।”

केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि ऐसे लोगों से कैसे निपटें जो कहते हैं कि पुरानी संसद शुभ नहीं थी, इसलिए नई संसद बन रही है। उन्होंने कहा, “आप अंदर जाकर देखो, मैं 69 साल का हूँ, मेरे घुटने अब भी काम करते हैं, लेकिन वहाँ बैठने वाली जगह पर फ्रंट-बैक में स्पेस नहीं है। पुरानी संसद बहुत कम लोगों के लिए बनी थीं। इसलिए हम भारत के लोगों के लिए बड़ी संसद बना रहे हैं।”

पूर्व नौकरशाहों के पत्र में लिखी गई बातों को अविश्वसनीय करार देते हुए उन्होंने कहा, ” ये ओपन लेटर है? 18 मई को लिखा हुआ, मुझको तो मिला ही नहीं है। ये सोशल मीडिया पर घूम रहा है। आज जब मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी कर रहा था तब मेरा ध्यान इस बात पर दिलवाया गया। मैंने फोन करके लिखने वाले को कहा भी या तो तुम राजगुरू बनना चाहते हो या फिर तुम पागल हो गए हो। ये सब क्या है।”

कॉन्ग्रेस के पूर्व राहुल गाँधी पर पुरी ने कहा कि उनके बारे वे जितनी कम बात करें उतना ही ठीक होगा। लेकिन ये जरूर है कि चुनौतियों और परेशानियों के समय लोग उनकी (मोदी) सरकार को याद रखेंगे। विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने स्वदेशी वैक्सीन और उसके निर्माताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वालों को भी आड़े हाथों लिया।

सेंट्रल विस्टा पर विपक्ष की बातों को करार दिया झूठा

गौरतलब है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर ब्यूरोक्रेट्स ने पिछले साल प्रधानमंत्री को अपना यह पत्र लिखा था। इसी पर केंद्रीय मंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ऐसे लोगों को आइना दिखाने की बात कही। पुरी ने बताया कि ये सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर झूठी जानकारियाँ फैलाई जा रही हैं।  इस पर महामारी के बहुत पहले फैसला ले लिया गया था। संसद का नया भवन बनाना इसलिए जरूरी है क्योंकि पुराना भवन सेस्मिक ज़ोन 2 में आता था। अब ये भवन सेस्मिक ज़ोन 4 में है।

हरदीप पुरी ने बताया कि राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे तब से यह माँग की जा रही है। कुल खर्चा 1300 करोड़ रुपए के आसपास है। इसके अलावा जब 2012 में मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष थीं तो उनके एक OSD थे, जिन्होंने आवास मंत्रालय के सचिव को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि एक फैसला ले लिया गया है कि एक नई संसद भवन बननी चाहिए।

मंत्री ने कहा कि कहा जा रहा है 20,000 करोड़ रुपए महामारी के दौरान खर्च कर रहे हैं, ये वैक्सीनेशन कार्यक्रम में लगाइए। केंद्र ने वैक्सीनेशन के लिए 35,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। वैक्सीनेशन के लिए पैसे की कमी नहीं है, पर्याप्त पैसा है। वैक्सीन की उपलब्धता दूसरी बात है।

पुरी ने कहा, “पहली बात तो 20,000 करोड़ रुपए का आँकड़ा कहाँ से आया? जिसके मन में जो आता है बोलता है। 51 मंत्रालयों के लिए ऑफिस, मेट्रो के साथ जोड़ना, नया संसद भवन, 9 ऑफिस के भवन, न्यू इंदिरा गाँधी सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट्स सब मिलाकर खर्चा शायद 13,000-15,000 करोड़ आएगा।”

प्रोजेक्ट को मिली हाई कोर्ट से हरी झंडी

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी सेन्ट्रल विस्टा पुनरोद्धार परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए इसके लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका में कोरोना महामारी के मद्देनजर इस प्रोजेक्ट को रोकने की अपील की गई थी, जिसके तहत नए संसद भवन का निर्माण होना है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए कहा कि ये राष्ट्रीय महत्व की एक अत्यावश्यक परियोजना है।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि ये एक राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट है जिसे पृथक कर के नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे जनता का हित होना है। साथ ही हाई कोर्ट ने इस याचिका को एक वास्तविक जनहित याचिका (PIL) न मानते हुए ‘मोटिवेटेड’ याचिका करार दिया। हाई कोर्ट ने नोट किया कि निर्माण कार्य नवंबर 2021 से पहले पूरा किया जाना है, ऐसे में हर एक क्षण ज़रूरी है।

‘…बहुत नंगी लड़कियाँ देखी हैं’: बॉलीवुड के 9 हाई प्रोफाइल पर मॉडल ने कराई FIR; रेप, काम के बदले उत्पीड़न का आरोप

28 वर्षीय पूर्व मॉडल ने बॉलीवुड की नौ हस्तियों के खिलाफ बांद्रा थाने में रेप और छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई है। आरोपियों में अभिनेता-निर्माता जैकी भगनानी, फोटोग्राफर कॉलस्टन जूलियन, टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी क्वान एंटरटेनमेंट के संस्थापक अनिर्बान ब्लाह और टी-सीरीज के कृष्ण कुमार शामिल हैं।

मॉडल ने दावा किया है कि कथित यौन उत्पीड़न 2014 और 2019 की अवधि के बीच उसे एक्टिंग का काम दिलाने के बहाने हुआ था। इससे उसे मानसिक आघात पहुँचा।

पुलिस ने जैकी भगनानी, 8 अन्य के खिलाफ दर्ज किया रेप, छेड़छाड़ का केस

पुलिस ने मॉडल की शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 376 (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार करना) और 354 (छेड़छाड़) के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

एफआईआर में शामिल अन्य नाम निखिल कामत, शील गुप्ता, अजीत ठाकुर, गुरुज्योत सिंह, कृष्ण कुमार और विष्णु इंदुरी हैं। मॉडल ने दावा किया कि वह कई मौकों पर आरोपी से मिली थीं। एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि कॉलस्टन जूलियन द्वारा उसके साथ रेप किया गया था जबकि अन्य पर शिकायतकर्ता द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है।

जैकी भगनानी मशहूर निर्माता वाशु भगनानी के बेटे हैं। उन्होंने 2009 में आई फिल्म ‘कल किसने देखा’ में लीड एक्टर के रूप में रुपहले पर्दे पर अपनी पहली भूमिका निभाई थी। इसके बाद से, उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया है।

वहीं, निर्माता अजीत ठाकुर ने पूर्व मॉडल के दावों का खंडन किया है और उसके ऊपर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। अपने वकील के माध्यम से ईटाइम्स को दिए एक बयान में, ठाकुर ने कहा, “मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और प्रेरित हैं। यह मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है। वास्तव में, मेरे पास सबूत हैं जो इंगित करते हैं कि शिकायतकर्ता कई अन्य लोगों के साथ ही मुझे भी ब्लैकमेल करने का प्रयास कर रही थी और जब उसके प्रयास विफल हो गए, तो उसने आधारहीन आरोपों के साथ एफआईआर दर्ज करने का सहारा लिया। मैं उसके खिलाफ सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई करूँगा और मुझे यकीन है कि सच्चाई की जीत होगी।”

मॉडल ने फोटोग्राफर के खिलाफ दर्ज कराई रेप की शिकायत

मॉडल ने 12 अप्रैल 2021 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये आरोप लगाया था कि एक प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान उसे शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया था। उसने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस मामले में पत्र लिखकर आरोपित फोटोग्राफर के खिलाफ यौन उत्पीड़न और मारपीट का केस दर्ज करने की माँग की। बांद्रा पुलिस ने 26 मई को मामले में एफआईआर दर्ज की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मॉडल ने अपनी शिकायत में कहा कि फोटोग्राफर जूलियन ने उसका फायदा उठाते हुए 2014 से 2018 के बीच बांद्रा में रेप किया था।

मॉडल ने 10 मई 2021 को डिप्टी कमिश्नर (जोन एक्स, एमआईडीसी, अंधेरी ईस्ट) को लिखे पत्र में कहा था, “वह आदमी जिसने कई मॉडलों और अभिनेत्रियों के साथ ठीक उसी तरह से मारपीट की है, जैसे एक साइको सीरियल किलर करता है, लेकिन कोई भी उस पर चर्चा नहीं करना चाहता क्योंकि उसका काम अच्छा है? मारपीट को छोड़ दें तो उस मानसिक और मनोवैज्ञानिक आघात पर विचार करें, जो उसने वर्षों से झेले हैं। एमएफ ने मुझे बहुत समय पहले ब्लॉक कर दिया था और कभी भी मेरी कोई भी तस्वीर पोस्ट नहीं की थी, न किसी मैगजीन में छपवाई। इसलिए मैंने सोचा कि शायद यही सही समय है उनके “स्त*” की सराहना करने का।”

इसके अलावा मॉडल ने 12 अप्रैल को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा था कि उन्हें फैशन इवेंट्स और पार्टियों में शामिल होना इसलिए बंद करना पड़ा था क्योंकि वह जहाँ भी जाती थीं, वो (जूलियन) मिलता था, परेशान करता था और कहता था कि इस लड़के से बात मत करो, उससे बात मत करो।”

फोटोग्राफर ने आरोपों को नकारा

हालाँकि, फोटोग्राफर जूलियन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोपों को झूठा करार दिया है। जूलियन ने लिखा, “मेरे संज्ञान में आया है कि एक सोशल मीडिया पोस्ट और उसके आधार पर न्यूज आर्टिकल किया जा रहा है। इनमें मेरे खिलाफ पूरी तरह से झूठे और द्वेषपूर्ण आरोप लगाए गए हैं। मेरे वकील आधिकारिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और कानूनी रूप से इन हालातों का जवाब दे रहे हैं।”