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चचेरी बहन से निकाह करेंगे PAK कप्तान बाबर आजम: स्कूल फ्रेंड ने लगाया था यौन शोषण और जबरन गर्भपात का आरोप

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम अक्सर किसी न किसी वजह से चर्चा में रहते हैं। इस बार मामला उनके निकाह से जुड़ा है। खबर है कि वह अपनी चचेरी बहन से निकाह करने वाले हैं। बाबर और उनकी चचेरी बहन के घरवालों ने इसके लिए रजामंदी दे दी है। बताया जा रहा है कि दोनों की सगाई हो चुकी है और निकाह अगले साल पढ़ा जाएगा।

इस खबर के सोशल मीडिया पर आते ही प्रतिक्रियाएँ आने लगी हैं। केके सागर ने कहा, “इनके लिए रिश्ते की कोई अहमियत नहीं। अपनी ही चचेरी बहन से शादी करने जा रहा है, पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का कप्तान बाबर आजम। पहले से यौन शोषण का आरोप है इस पर।”

एक अन्य यूजर का कहना है कि पाकिस्तान में एक निकाह ही है जहाँ अमीर और गरीब में बराबरी का सलूक होता है। कोई मतलब नहीं है कि आप कितने मशहूर हैं या अमीर। आपकी शादी रिश्ते की बहन से ही होनी है।

बता दें कि पाक कप्तान पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लग चुके हैं। हमिजा मुख्तार ने पिछले साल बाबर पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि बाबर ने शादी का झाँसा देकर शोषण किया। प्रेगनेंट होने पर मारपीट कर बात दबा दी।

पीड़िता ने बताया था कि वह और बाबर एक साथ स्कूल में थे। दोनों एक मोहल्ले में रहते थे। उसने कहा था, “एक दिन बाबर आजम ने मुझे प्रपोज किया। मैंने उसे कबूल कर लिया था। उस वक्त बाबर आजम ने क्रिकेट खेलना शुरू नहीं किया था।”

महिला के मुताबिक बाबर आजम ने निकाह का वादा कर 10 साल तक उनका यौन शोषण किया। जब उन्होंने प्रेगनेंट होने की बात बताई, तो बाबर ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर उनका गर्भपात करवा दिया। आखिर में साल 2020 में निकाह करने से इनकार कर दिया।

पांडव से जुड़ा उत्तराखंड का तुंगनाथ मंदिर, जो हैं पंच केदार में से एक

ऑपइंडिया की मंदिरों की श्रृंखला में हमने आपको उत्तराखंड के पंच बद्री में से एक भविष्य बद्री के बारे में जानकारी दी थी। भविष्य बद्री, भविष्य का तीर्थ कहलाता है। उत्तराखंड में पंच बद्री ऐसे पाँच तीर्थ हैं जो भगवान विष्णु को समर्पित हैं। वहीं हिमालय की गोद में स्थित पंच केदार उन तीर्थ स्थलों का समूह है जो भगवान शिव को समर्पित हैं। आज आपको इन्हीं पंच केदार में से एक तुंगनाथ के बारे में बताएँगे।

पंच केदार

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित हैं पंच केदार के पाँच पवित्र मंदिर। ये मंदिर हैं, केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मद्महेश्वर और कल्पेश्वर। प्राचीन हिन्दू शास्त्रों के अनुसार महाभारत में भीषण युद्ध में विजयी होने के बाद भी पांडव रक्तपात के पाप से मुक्ति चाहते थे। इसके लिए उन्हें हिमालय में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कहा गया। पांडव जब हिमालय पहुँचे तब भगवान शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे इसलिए उन्होंने बैल का रूप (कई जगह भैंस का रूप धारण करने का भी उल्लेख है) धारण कर लिया। हालाँकि भीम ने भगवान शिव को पहचान लिया। इसके बाद बैल का रूप धारण किए हुए भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए।

अंतर्ध्यान होने के बाद भगवान शिव पाँच जगहों पर अपने शरीर के अंगों के रूप में प्रकट हुए जहाँ पंच केदार की स्थापना हुई। भगवान शिव की पीठ एक त्रिकोण आकृति के रूप में केदारनाथ में प्रकट हुई जो द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक है। इसके अलावा भगवान शिव की भुजाएँ तुंगनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में, मुख रुद्रनाथ में और जटाएँ कल्पेश्वर में प्रकट हुईं। ये पाँचों स्थान ही पंच केदार कहलाए।

सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिरों में से एक

केदारनाथ के बाद हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण शिव मंदिर है तुंगनाथ। यहाँ भगवान शिव की भुजाएँ प्रकट हुई थीं। तुंगनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह शिव मंदिर विश्व भर में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिरों में से एक है। चंद्रशिला चोटी के नीचे स्थित यह मंदिर काले पत्थरों से बना है। मंदिर में भगवान शिव का प्रतीक जो शिवलिंग है उसके विषय में मान्यता है कि यह स्वयंभू है, अर्थात स्वयं प्रकट है। मंदिर की स्थापना पांडव ने ही की थी। कई स्थानीय मान्यताएँ यह भी हैं कि भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने यहीं कठिन तपस्या की थी।

भगवान शिव के प्रसिद्ध तीर्थों में से एक तुंगनाथ श्रद्धालुओं का पसंदीदा तीर्थ स्थल है, क्योंकि एक तो इसका प्राचीन धार्मिक महत्व है जो हजारों साल पुराना है और इसकी दूसरी विशेषता है इसका प्राकृतिक सौन्दर्य। बर्फ की चादर से आच्छादित यह मंदिर जनवरी और फरवरी की ठंड में भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

तुंगनाथ मंदिर (फोटो साभार : दिल्ली प्लैनेट)

मक्कूमठ के मैठाणी ब्राह्मण यहाँ के पुजारी होते हैं। मई से नवंबर तक मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खुले रहते हैं। उसके बाद मंदिर बंद हो जाता है, जिसके बाद मक्कूमठ में भगवान तुंगनाथ की पूजा होती है।

कैसे पहुँचे?

तुंगनाथ दो मार्गों से पहुँचा जा सकता है। ऋषिकेश से गोपेश्वर होते हुए चोपता पहुँचना होता है जहाँ से तुंगनाथ पहुँचने के लिए 4 किमी की पैदल यात्रा करनी होती हैं। इस पैदल यात्रा में हिमालय की नीलकंठ, चौखम्बा और नंदा देवी के दर्शन होते हैं। इसके अलावा ऋषिकेश से उखीमठ होते हुए भी चोपता पहुँचा जा सकता है।

ऋषिकेश से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून है, जिसकी दूरी लगभग 25-30 किमी है। इसके अलावा ऋषिकेश में ही रेलवे स्टेशन भी है जहाँ से स्थानीय साधनों के माध्यम से चोपता पहुँचा जा सकता है। हालाँकि पर्वतीय इलाका होने के कारण उत्तराखंड में परिवहन के साधन सीमित हैं, लेकिन फिर भी सरकार के प्रयासों के कारण आज कई तीर्थ स्थानों तक पहुँचने में बहुत कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।   

भगोड़े मेहुल चोकसी को लाने की तैयारी? डोमिनिका में प्राइवेट जेट, सीबीआई-ईडी-सीआरपीएफ और तेज तर्रार IPS शारदा

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपित भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने के लिए आठ सदस्यीय टीम डोमिनिका में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस टीम में विदेश मंत्रालय, सीबीआई, ईडी और सीआरपीएफ से दो-दो लोग शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि यह टीम शनिवार को ही (29 मई 2021) को ही एक प्राइवेट जेट से डोमिनिका पहुँच गई थी। इसी विमान से चोकसी को लाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस टीम में आईपीएस अधिकारी शारदा राउत भी शामिल हैं। 2005 बैच की अधिकारी राउत बैकिंग फ्रॉड मामलों में सीबीआई की अगुआ हैं। उनके ही देखरेख में पीएनबी घोटाले की जाँच हुई थी।

गौरतलब है कि चोकसी 4 जनवरी 2018 को एंटीगुआ भाग गया था। उसने वहाँ की नागरिकता ले रखी थी। पिछले दिनों उसके एंटीगुआ से ‘लापता’ होने की खबरें आई थी। बाद में वह डोमिनिका में गिरफ्तार हो गया। एंटीगुआ ने उसे वापस लेने से इनकार करते हुए कहा था कि डोमिनिका उसे सीधे भारत को सौंप सकता है। हालाँकि भारत प्रत्यर्पित होने से बचने की कोशिश में यह भगोड़ा कारोबारी अब भी लगा हुआ है।

इस बीच, विपक्षी दल डोमिनिका और एंटीगुआ की सरकारों पर इस मामले में मिलीभगत का आरोप भी लगा रहे हैं। डोमिनिका के प्रमुख विपक्षी नेता लेनॉक्स लिंटन ने आरोप लगाया है कि डोमिनिका की सरकार चोकसी के कथित अपहरण में शामिल है और इसमें भारत सरकार की भूमिका भी हो सकती है। लिंटन ने यह भी कहा कि चोकसी का डोमिनिका में पकड़ा जाना इस बात का संकेत देता है कि यह नवंबर 2021 में सूचित प्रत्यर्पण की सुनवाई के पहले ही उसे भारत को सौंपने कार्रवाई का हिस्सा है। डोमिनिका और एंटीगुआ की सरकारों ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। ब्राउन ने विपक्षी पार्टियों पर चोकसी से फंड लेने का आरोप लगाया है।

इससे पहले एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने एक स्थानीय रेडियो स्टेशन के साथ साक्षात्कार में पुष्टि की कि भारत सरकार ने अदालती दस्तावेजों के साथ एक जेट भेजा है। ये दस्तावेज चोकसी के भगोड़ा होने से संबंधित हैं। चोकसी से संबंधित दस्तावेज बुधवार (02 जून) को डोमिनिका अदालत में पेश किए जाएँगे।

26 मई को डोमिनिका में पकड़े जाने के बाद यह बात भी सामने आई थी कि चोकसी ‘गर्लफ्रेंड’ के साथ वहाँ गया था। बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि कथित गर्लफ्रेंड दरअसल हनीट्रैप था।

पिछले साल दायर एक चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने बताया था कि चोकसी ने न केवल भारतीय बैंकों को बल्कि दुबई और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी ग्राहकों और ऋणदाताओं को धोखा दिया। इस क्रम में अब तक उसकी 2,500 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क हो चुकी है। 13,578 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में चोकसी का भतीजा नीरव मोदी भी भगोड़ा है। वह इस समय लंदन जेल में हैं। वहाँ कई बार उसकी जमानत अर्जी रद्द हो चुकी है। वह भी खुद को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए लगातार कानून लड़ाई लड़ रहा है।

महाराष्ट्र के एक ही जिले अहमदनगर में मिले 8,000 बच्चे Covid+, थर्ड वेव की आशंका के बीच बढ़ा लॉकडाउन

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कहर से जूझ रहे महाराष्ट्र में एक और लॉकडाउन लगाया गया है। कोरोना की दूसरी लहर से जंग में केवल मई के महीने में अहमदनगर जिले में लगभग 8000 बच्चे संक्रमित पाए जा चुके हैं।

प्रदेश में मंडरा रहे नए खतरे से निपटने के लिए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। डीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई में अहमदनगर जिले में हजारों बच्चों और किशोरों को कोरोना संक्रमित पाया गया जो जिले के कुल संक्रमितों की संख्या 10 फीसदी है।

इस कठिन हालात की पुष्टि करते हुए अहमदनगर जिले के प्रमुख राजेंद्र भोसले ने कहा, “अकेले मई में 8,000 बच्चे पॉजिटिव मिले जो कि काफी चिंताजनक है।” कोरोना की भयावहता को देखते हुए राज्य के सांगली जिले में बच्चों के लिए एक नया कोविड वार्ड तैयार किया गया है, जिसमें फिलहाल पाँच बच्चों का इलाज चल रहा है।

बच्चों को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए एक स्थानीय नगरसेवक अभिजीत भोसले ने बताया, “हमने बच्चों के लिए यह कोविड वार्ड तैयार किया है ताकि जब तीसरी लहर आए, तो हम उसके लिए पहले से तैयार रहें। ये कुछ इस तरीके से बनाया गया है कि यहाँ बच्चों को लगेगा ही नहीं कि वे अस्पताल में हैं, उन्हें लगेगा कि वे स्कूल या फिर नर्सरी में हैं।”

इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। तीसरी लहर का असर बच्चों पर पड़ने की बात कही गई है।

महाराष्ट्र में बढ़ाया गया लॉकडाउन

कोरोना की दूसरी लहर के कहर से कराह रहे महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार (30 मई 2021) को फेसबुक पर लॉकडाउन को 15 जून तक बढ़ाने का ऐलान किया था। बता दें कि महाराष्ट्र कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आने वाले राज्यों में से एक था, जो कि इससे बुरी तरह से प्रभावित हुआ।

मुख्यमंत्री ठाकरे ने लॉकडाउन में कुछ ढील का ऐलान करते हुए कहा, “सरकार कोरोनी की तीसरी लहर के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मुझे नहीं पता कि तीसरी लहर कब और किस तारीख को आएगी। इसलिए हमें अपनी सुरक्षा को कमजोर नहीं होने देना है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मई 2021 को ही महाराष्ट्र में 15,077 नए कोरोना के केस सामने आए थे और 500 लोगों की मौत भी हो गई थी।

मई माह में एक लाख से अधिक बच्चे संक्रमित

मई की शुरुआत में प्रकाशित न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में 10 साल से कम उम्र के 1,34,470 बच्चे संक्रमित पाए गए जोकि 3 अप्रैल के 88,827 के मुकाबले काफी अधिक है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संक्रमितों में 10 वर्ष की आयु तक के 3.04 प्रतिशत बच्चे थे। 11-20 आयु वर्ग के 6.80 प्रतिशत और 21-30 आयु वर्ग के 15.51 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमित मिले थे।

राजस्थान में भी संक्रमित बच्चों के सर्वाधिक मामले

मई 2021 में राजस्थान में हजारों बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए। इसे मामले में ऑपइंडिया ने पहले ही बताया था कि बीते तीन सप्ताह में भरतपुर गाँव में 18 साल से कम आयु वर्ग के 600 से अधिक पॉजिटिव केस मिले थे।

ताजा अपडेट के मुताबिक, दौसा जिले में भी 10-12 वर्ष की आयु के 345 से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा डूंगरपुर जिले में भी 300 से अधिक बच्चे कोविड पॉजिटिव मिले हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में 7000 से अधिक नाबालिग ऐसे हैं, जो कोरोना संक्रमित हैं। ये सभी गैर-लक्षण वाले मामले हैं। बहरहाल सभी राज्य कोरोना वायरस की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

रक्षा के आत्मनिर्भर मोर्चे पर ‘108 कदम’ और चली मोदी सरकार, UPA जमाने में गोला-बारूद का भी था टोटा

पत्रकारिता की कक्षा का मशहूर जुमला है कि कुत्ता आदमी को काट ले, तो ख़बर नहीं, लेकिन आदमी कुत्ते को काट ले तो वह खबर है। यानी, नकारात्मकता को ही पत्रकारिता का मूल समझने की भूल हम सभी करते रहे हैं। हालाँकि, यह किसी समाज या देश के स्वास्थ्य के लिए तो कतई अच्छा नहीं है। हम भारतीय वैसे भी भूलने में माहिर हैं। हमने गजनी का खँजर भुला दिया, मुगलों का जजिया भुला दिया, गुरुओं के कटे सिर और बलिदानी बच्चे भुला दिए, पाकिस्तान का बनना भुला दिया, चीन का घात भुला दिया, सिखों का नरसंहार भुला दिया और सोनिया गाँधी के दस वर्षीय कुशासन को भी भुला दिया। लिहाजा हमें बार-बार याद दिलाना पड़ेगा कि इस देश में आखिर चल क्या रहा है?

रक्षा मंत्रालय की तरफ से 31 मई 2021 को एक प्रेस-रिलीज जारी हुई, छोटी सी। इस रिलीज में 108 उन सैन्य साजों-सामान की सूची थी, जो अब देश में ही बनाए जाएँगे। यह प्रेस रिलीज जाहिर तौर पर एक झन्नाटेदार तमाचा था, ‘जमानत पर चल रहे’ देश के चिर-अधेड़ युवा नेता राहुल गाँधी के लिए, जो कभी राफेल में भ्रष्टाचार तो कभी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को पंगु बनाने का बाजा लेकर मैदान में उतर जाते हैं। दरअसल, राहुल वही सोचते हैं, जो वह जानते हैं, जो उन्होंने बचपन से देखा है- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। जिस आदमी की माँ, जीजा सहित जो खुद जमानत पर चल रहा हो, सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में सना हो, उसे भला यकीन कैसे हो सकता है कि कोई भी सौदा बिना कमीशनखोरी के हो सकता है। आखिर उनके मरहूम पापा राजीव गाँधी के समय के मशहूर बोफोर्स तोप-दलाली का भी मामला तो उनको गाहे-बगाहे याद आता ही होगा, परनाना नेहरू के समय का जीप-घोटाला भी उनको याद होगा ही।

लोगों को थोड़ा सा दिमाग पर जोर डालना होगा, फिर उन्हें याद आ जाएगा कि हरेक चुनाव के समय राहुल गाँधी कैसे तरह राफेल-राफेल चिल्लाने लगते थे। हालाँकि कोर्ट से फटकार के बाद इन्होंने माफी भी माँगी, लेकिन इनका राग राफेल बंद नहीं हुआ। ठीक उसी तरह, जैसे चीन से हमेशा फटकार खाई कॉन्ग्रेसी सरकारें चीन की सरकार के साथ अदृश्य और अबूझ समझौता करती रही। चीन को कश्मीर का बड़ा हिस्सा सौंपा नेहरू ने, लेकिन गलवान-घाटी की झड़प और उसके बाद चीन के वापस लौटने के बाद भी राहुल गाँधी का चीखना-चिल्लाना जारी रहा।

अस्तु, कल केंद्र द्वारा जारी यह सूची कुछ आस जगाती है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग की 108 सैन्य साजोसामानों की ‘दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची’ को अधिसूचित करने वाले प्रस्ताव को मँजूरी दे दी गई है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार इन 108 वस्तुओं की खरीद स्वदेशी स्रोतों से की जाएगी।

यह सूची उन हथियारों/प्रणालियों पर विशेष ध्यान देती है जो वर्तमान में विकास/ परीक्षणों के अधीन हैं और जिनके भविष्य में पक्के आदेशों में परिणत होने की संभावना है। ध्यान रहे कि रक्षा मंत्रालय इससे पहले बीते साल भी एक सूची जारी कर चुका है और उसमें 101 वस्तुओं के आयात पर रक्षा मंत्रालय ने प्रतिबंध लगाया था।

‘दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची’ में जटिल प्रणालियाँ, सेंसर, सिम्युलेटर, हथियार और गोला-बारूद जैसे हेलीकॉप्टर, नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट, एयर बोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यूएंडसी) सिस्टम, टैंक इंजन, पहाड़ों के लिए मीडियम पावर रडार, एमआरएसएएम हथियार प्रणालियाँ और भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसी अनेक और चीजें शामिल हैं।

यदि सब कुछ मौजूदा सरकार की योजना के मुताबिक चलता रहा तो 2025 तक देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की स्थिति आ जाएगी। अब, जरा इसकी तुलना राहुल गाँधी की माताजी के परोक्ष शासन काल से करें, जब रक्षामंत्री एके एंटनी ने खुलेआम कहा था कि भारत के पास असलहे खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। जब 10 वर्षों तक राफेल की खरीद को लटका कर रखा गया। जब हमारे सैनिकों के पास बुलटेप्रूफ जैकेट तक नहीं थे। जब वन रैंक, वन पेंशन की बात भी गुनाह-ए-अज़ीम समझी जाती थी। जब देश के महान अर्थशास्त्री और नाममात्र के प्रधानमंत्री यह ज्ञान देते थे कि- पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं।

देश दो वर्षों से महामारी की चपेट में है और यह सोचकर ही सिहरन हो जाती है कि अगर गलती से कॉन्ग्रेस और उसके लगुए-भगुए शासन में रहते तो क्या होता? याद कीजिए जब उत्तराखंड में राहत-सामग्री केवल इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि राहुल-सोनिया को उसे हरी झंडी दिखानी थी। जब राहत-सामग्रियों से भरे ट्रक इधऱ-उधर रह गए, क्योंकि उनको पेट्रोल का पैसा नहीं मिला था।

एक के बाद एक आपदाएँ आ रही हैं, पर नरेंद्र मोदी की सरकार उनका डटकर सामना कर रही है। साथ ही रक्षा क्षेत्र में जो यह आत्मनिर्भरता हम हासिल करने वाले हैं, इसके लिए एक ही बात कही जा सकती है- देर आएद, दुरुस्त आएद।

हाजी रफअत अली के जनाजे में 15000 की भीड़, कॉन्ग्रेस नेता बने हिस्सा, राजस्थान पुलिस ने दी सुरक्षा: देखें Video

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार (31 मई, 2021) को हार्ट अटैक के कारण समाजसेवी हाजी रफअत अली के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा में जमकर कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ीं। हैरानी की बात ये है कि राजस्थान पुलिस ने यहाँ इकट्ठा हुई 15 हजार की भीड़ को रोकने या तितर-बितर करने की बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान की और अन्य लोगों की तरह वह खुद भी जनाजे के साथ-साथ चलते रहे। इनके अलावा कॉन्ग्रेस के दो नेता भी इस अंतिम यात्रा का हिस्सा बने।

अब इस पूरी घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। हाजी रफअत अली की अंतिम यात्रा में देख सकते हैं कि भीड़ कैसे बिना किसी सोशल डिस्टेंसिंग के खुली सड़क पर चल रही है और इनमें कइयों के मुँह पर मास्क तक नहीं है।  वीडियो के वायरल होने के बाद रामगंज पुलिस ने नियमों का उल्लंघन व कोरोना महामारी अधिनियम के तहत विधायक रफीक खान सहित 11 लोगों पर नामजद व अन्य के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया है।

बता दें कि समाजसेवी के तौर पर पहचाने जाने वाले हाजी रफअत अली के ही कहने पर ही कुछ दिन पहले ईद का जुलूस टाला गया था। ऐसे में शर्मनाक बात ये है कि उनकी ही अंतिम यात्रा में उनके अनुयायियों ने न केवल कोविड नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाईं बल्कि उनकी बात का भी अनादर किया। इस दौरान पुलिस ने किसी भी व्यक्ति को नहीं रोका। बस जनाजे के साथ-साथ मजहबी भावनाओं का ख्याल करते हुए चलते रहे। खुद डीसीपी अनिल पारिस देशमुख, आरपीएस सुमित शर्मा, सुनील शर्मा, रामगंज थानाधिकारी बीएल मीना, सुभाषचौक थानाधिकारी भूरी सिंह मौजूद रहे।

इससे पहले राजस्थान के जैसलमेर में सालेह मोहम्मद के अब्बा के निधन के बाद भी उनके जनाजे में कई लोग शामिल हुए थे। लेकिन राज्य सरकार या प्रशासन ने वहाँ भी अपनी आँख में पट्टी बाँधे रखी। करीब 5 हजार की भीड़ होने के बावजूद राजस्थान पुलिस ने न किसी पर कोई एक्शन लिया और न ही कोविड नियमों का पालन करने को कहा।

आमजन पर पुलिस की दबंगई

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ मजहबी उलेमाओं के निधन पर राजस्थान पुलिस को 10 से 15 हजार की भीड़ जुटने से भी आपत्ति नहीं हो रही। वहीं आम जन या दूसरे पक्ष के लिए इस पुलिस का रवैया बर्बर मालूम पड़ता है।

उदाहरण के लिए जिस दिना राज्य मंत्री सालेह मोहम्मद के अब्बा का निधन हुआ और मना करने के बावजूद 5 हजार की भीड़ उसमें जुटी उसी दिन धौलपुर में भाजपा विधायक सुखराम खोली ने हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखंड रामायण का पाठ कराया। इसमें 500 से अधिक लोग जुट गए। सीएम गहलोत ने एक बैठक में यहाँ के DM-SP को सबके सामने फटकार लगा डाली। 

इसी प्रकार पिछले महीने की बात है कि जोधपुर में पुलिसकर्मी अपनी वर्दी की धौंस दिखा कर लॉकडाउन में बंद पड़े रेस्टोरेंट को खुलवाकर खाना खाते और स्टाफ से मारपीट करते पाए गए थे। इन पुलिसकर्मियों ने जोधपुर चिकन सेंटर पर दुकान को हमेशा बंद कराने की धमकी देते हुए उसे खुलवाकर चिकन पार्टी की थी।

बता दें कि आम जन के साथ बदसलूकी और मजहबी नेताओं के इंतकाल के समय भीड़ को सुरक्षा देने वाली राजस्थान पुलिस को लेकर कुछ दिन पहले दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित हुई थी जो बताती है कि राज्य में रियायतें मात्र एक तरह की स्थिति में मिल रही है। वरना 17 मई की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान पुलिस राज्य में नियमों का उल्लंघन करने पर आम जन से 21 लाख 51 हजार रुपए इकट्ठा कर चुकी हैं। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर मास्क नहीं लगाने पर 4 लाख 57 हजार 138, बिना मास्क लगाए सामान बेचने पर 20,849 लोगों के खिलाफ चालान किए गए हैं। 

त्रिपुरा: CPIM नेता और पूर्व वित्त मंत्री ने लोगों को भड़काया, बीजेपी के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता भानूलाल साहा ने रविवार (30 मई 2021) को त्रिपुरा में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा भड़काने के लिए फेसबुक का सहारा लिया। पूर्व वित्त मंत्री साहा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सभी आयु वर्ग के लोगों से लाठी, दरांती, कुदाल, फावड़ा और लोहे की रॉड को सँभालकर रखने को कहा।

उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के ईंटों, लाठियों और पेट्रोल बम हमलों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की जरूरत है।

सीपीआईएम (CPIM) नेता ने कहा कि बाहरी हमलावरों से लड़ने के लिए खुद को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएँ। भानूलाल साहा ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए आप रक्षात्मक हथियारों को सँभालकर रख सकते हैं। यह कोई अपराध नहीं है।

भानु लाल साहा की फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

भानूलाल साहा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लोगों को हिंसा के लिए उकसाते हुए लिखा, “मोकाबिला छड़ा जान-माल रोका असोम्भोब, जौबों तुम आगुन हो (एक मजबूत लड़ाई के बिना, आप अपने जीवन और संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकते। युवाओं की आग धधकने दो”)।” पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा कि युवाओं को तैयार रहना चाहिए। सत्ताधारी दल (भाजपा) के गुंडों से मजबूती से लड़ें। अपने पड़ोसियों को इकट्ठा करें और जन आंदोलन का नेतृत्व करें।

माकपा नेता ने कहा कि लोगों की जान को खतरा है। उन्होंने इसे एक प्रलोभन के रूप में इस्तेमाल करते हुए लोगों को अराजकता फैलाने और सत्ताधारी सरकार के खिलाफ हथियार उठाने के लिए उकसाया।

‘पिद्दी आजाद’: राहुल गाँधी ने AltNews वाले प्रतीक सिन्हा, कुणाल कामरा सहित 8 को ट्विटर पर किया अनफॉलो

हाल ही में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्विटर पर 8 लोगों को अनफॉलो कर दिया। इन 8 में से दो ऐसे लोग हैं जो कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए जाने जाते हैं।

राहुल गाँधी ने जिन 8 लोगों को अनफॉलो किया है उनमें से एक हैं प्रतीक सिन्हा, जो प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक हैं। ऑल्ट न्यूज वही न्यूज पोर्टल है जो खुद को एक फैक्ट-चेकर के रूप में दिखाता है। ऑल्ट न्यूज टूलकिट विवाद के बाद कॉन्ग्रेस को क्लीन चिट देने के लिए उतावला हो गया था और तरह-तरह के तर्क पेश करने लगा था।

राहुल गाँधी के सोशल मीडिया आँकड़े

कुछ समय पहले तक राहुल गाँधी ट्विटर पर प्रतीक सिन्हा को फॉलो कर रह थे लेकिन अचानक से कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ऑल्ट न्यूज के प्रतीक सिन्हा को अनफॉलो कर दिया। हालाँकि ऑल्ट न्यूज पूरे समर्पण के साथ कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करता है और मोदी सरकार के खिलाफ फेक न्यूज फैलाता रहता है।

प्रतीक सिन्हा की ट्विटर प्रोफाइल जहाँ दिख रहा है कि राहुल गाँधी प्रतीक को फॉलो कर रहे हैं
राहुल गाँधी द्वारा प्रतीक सिन्हा को अनफॉलो किया जाना

राहुल गाँधी ने प्रतीक सिन्हा को ऐसे समय अनफॉलो किया है जब देश में टूलकिट विवाद चल रहा है और कॉन्ग्रेस का उसमें सक्रिय रूप से नाम सामने आ रहा है। भाजपा नेता ने कथित तौर पर कॉन्ग्रेस से संबंधित एक दस्तावेज सबके सामने रखा और कॉन्ग्रेस पर यह आरोप लगाया गया कि उसके द्वारा Covid-19 महामारी का उपयोग मोदी सरकार के खिलाफ साजिश करने के लिए किया जा रहा है।    

यह विवाद तब और बढ़ गया जब कॉन्ग्रेस ने यह दस्तावेज फैक्ट-चेकर का दावा करने वाले ऑल्ट न्यूज के साथ शेयर किया और ऑल्ट न्यूज ने किसी तरीके से टूलकिट को फर्जी बताते हुए कॉन्ग्रेस को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद यह आशंका व्यक्त की गई कि ऑल्ट न्यूज, कॉन्ग्रेस के हितों के लिए कार्य करता है।

इस टूलकिट विवाद में भारत सरकार ने ट्विटर पर भी नकेल कसी क्योंकि ट्विटर ने भी बिना किसी सबूत के भाजपा नेताओं द्वारा ट्वीट किए गए टूलकिट के दस्तावेजों पर ‘मैनीपुलेटेड मीडिया’ टैग लगा दिया। ट्विटर द्वारा की गई ऐसी हरकतों के बाद अब यह अंदाजा लगाया गया कि संभवतः ऑल्ट न्यूज ही नहीं बल्कि ट्विटर भी कॉन्ग्रेस के साथ मोदी सरकार के खिलाफ काम कर रहा है। ऐसे में राहुल गाँधी द्वारा ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा को अनफॉलो किया जाना एक रणनीति मानी जा रही है ताकि ये फैक्ट-चेकर अपने आपको तटस्थ दिखा सके।

राहुल गाँधी ने जिस एक और व्यक्ति को ट्विटर में अनफॉलो किया है वह है, मोदी-विरोधी, प्रोपेगेंडाबाज और स्व-घोषित कॉमेडियन कुणाल कामरा। कामरा की इन्हीं कुछ विशेषताओं के चलते शायद राहुल गाँधी उसे फॉलो करते थे। हालाँकि आज सुबह (01 जून) को राहुल ने अपने चाटुकार कामरा को भी अनफॉलो कर दिया।

कुणाल कामरा की प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट
राहुल गाँधी द्वारा कुणाल कामरा को अनफॉलो किया जाना

सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया :

राहुल गाँधी द्वारा प्रतीक सिन्हा और कुणाल कामरा को अनफॉलो किए जाने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कई कयास लगाए।

एक ट्विटर यूजर ने कहा कि राहुल गाँधी ने अनफॉलो करके अपने एक पिद्दी को आजादी दे दी।

एक दूसरे यूजर ने कहा कि राहुल गाँधी ने संभवतः एक फैक्ट-चेकर को इसलिए अनफॉलो किया क्योंकि वह टूलकिट मामले में उचित तर्क नहीं पेश कर पाए।

हालाँकि ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि राहुल गाँधी ने अपने वफादारों को इसलिए अनफॉलो किया क्योंकि वो पूरे समर्पण के साथ कॉन्ग्रेस के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं रहे।

‘जनता की सेवा पर अहंकार हावी हो गया’: पीएम मोदी की बैठक में देर से पहुँचीं ममता बनर्जी पर बंगाल गवर्नर धनखड़ का वार

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने यास तूफान की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीटिंग में शामिल नहीं होने को लेकर कहा है कि सीएम ममता बनर्जी ने उनसे बातचीत में पहले ही इस बैठक में न शामिल होने के संकेत दे दिए थे।

राज्यपाल धनखड़ ने सोमवार (31 मई 2021) को ट्वीट कर कहा था, “झूठी कहानियों से विवश होकर अब सीधा रिकॉर्ड रख रहा हूँ। ममता बनर्जी ने 27 मई 2021 की रात 11:15 बजे मुझे मैसेज किया था। उन्होंने कहा था कि क्या मैं आपसे अभी बात कर सकती हूँ? बहुत जरूरी है। इसके बाद फोन पर उन्होंने संकेत दिया कि वह और उनके अधिकारी पीएम नरेंद्र मोदी की मीटिंग का बायकॉट कर सकते हैं, यदि इसमें नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी इसमें शामिल होते हैं। इस तरह जनता की सेवा पर अहंकार हावी हो गया।”

एक अन्य ट्वीट में गवर्नर धनखड़ ने लिखा कि ममता के संवैधानिक दायित्वों के आगे उनका अहंकार खड़ा हो गया है।

पीएम मोदी की मीटिंग में शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी से नाराज थीं ममता

28 मई को Yaas तूफान की समीक्षा के लिए ओडिशा और बंगाल दौरे पर पहुँचे पीएम मोदी की कलाईकुंडा में हुई समीक्षा बैठक में सीएम ममता बनर्जी और राज्य के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय 30 मिनट की देरी से पहुँचे थे। इस बैठक में ममता बनर्जी पीएम नरेंद्र मोदी को चक्रवात से हुए नुकसान की ब्यौरा रिपोर्ट देकर निकल गई थीं। उनके इस रवैये की तीखी आलोचना हुई थी और बीजेपी ने इसे संघीय व्यवस्था के खिलाफ बताया था।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार (31 मई 2021) को ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्य सचिव रहे अलपन बंद्योपाध्याय के ट्रांसफर का विरोध करते हुए पीएम मोदी को लिखे खत में भी शुभेंदु को यास तूफान समीक्षा बैठक में बुलाए जाने को लेकर ऐतराज जाहिर किया था।

इससे पहले प्रधानमंत्री को लिखे 5 पन्नों के पत्र में ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी को शामिल करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पीएम पर बैठक के स्ट्रक्चर को बदलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री से शांति से बात करना चाहती थीं। सीएम ने कहा, “मेरा विचार है (राज्य के मामलों के बारे में मेरे 40 वर्षों की जानकारी के आधार पर) कि सुवेंदु अधिकारी के पास पीएम-सीएम की मीटिंग में बैठने के लिए कोई जगह नहीं थी।”

केजरीवाल की तरह पलटे हेमंत सोरेन: पहले की झारखंड में सभी के लिए मुफ्त वैक्सीन की घोषणा, अब चाहते हैं केंद्र करे भुगतान

एक महीने पहले 18-45 आयु वर्ग के सभी लोगों को फ्री में वैक्सीन लगाने की घोषणा करने वाले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का अनुसरण करते हुए अब यू-टर्न ले लिया है। मुख्यमंत्री सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य को मुफ्त टीका उपलब्ध कराने को कहा है।

दरसअल, एक महीने पहले (22 अप्रैल, 2021) हेमंत सोरेन ने खुद ट्वीट कर 18-45 आयु वर्ग के सभी लोगों को फ्री में वैक्सीन लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, ”झारखंड राज्य में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क लगाया जाएगा। इस विकट संक्रमण में लोगों को मदद के लिए सरकार दिन-रात काम कर रही है। मुझे विश्वास है सभी के सहयोग से हम कोरोना को फिर मात देंगे। कोरोना हारेगा, झारखंड जीतेगा।”

मालूम हो कि टीकाकरण अभियान के विकेंद्रीकरण की वकालत करने वाले दिल्ली के सीएम ने हाल ही में (26 मई 2021) इस मामले पर यू-टर्न लिया था। केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करते हुए केजरीवाल ने कहा था, ‘‘आज हम कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं, जिसमें केंद्र और राज्यों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ हैं। केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ रही है और राज्यों से अपने लिए खुद व्यवस्था करने को कह रही है। यह गलत है।’’

यू-टर्न लेते हुए हेमंत सोरेन ने कोरोना टीकाकरण के लिए माँगी केंद्र की मदद

इसी तरह, सोरेन ने प्रधानमंत्री मोदी को सोमवार (31 मई 2021) को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया कि राज्य के 18 से 45 आयु वर्ग के लगभग एक करोड़ 57 लाख लोगों के लिए कोविड-19 के मुफ्त टीकों का इंतजाम कराया जाए।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी का दंश झेल रहे झारखंड के लिए लगभग 1100 करोड़ रुपये व्यय करना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 वर्ष से 45 वर्ष के राज्य के नागरिकों को दिए जाने वाले कोविड-19 के टीकों की संख्या लगभग एक करोड़ 57 लाख होगी और इतने टीके खरीदने के लिए राज्य को कम से कम 1100 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। ऐसे में कोरोना महामारी के चलते पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे झारखंड के लिए अपने संकुचित संसाधनों में से इतना धन अलग से व्यय करना बहुत कठिन होगा।

उन्होंने अपने पत्र में दोहराया कि राज्य में कोरोना के खिलाफ चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में कम टीकों की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती बन गई है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य ने भारतीय वैक्सीन निर्माताओं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक दोनों को 25 लाख वैक्सीन की खुराक का ऑर्डर दिया था, लेकिन निर्माताओं पर भी अधिक बोझ है। हालाँकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, झारखंड ने 37.3% टीकों को बर्बाद किया है।

पत्र में यह भी लिखा गया गया है कि झारखंड सहित सभी राज्यों को पल्स पोलियो और नियमित टीकाकरण जैसे अन्य सभी कार्यक्रमों के लिए केंद्र सरकार से हमेशा मुफ्त में टीके मिले हैं। यह कोविड-19 टीकों के लिए भी लागू होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त सोरेन ने राज्यों को लाभार्थियों को प्राथमिकता देने के सामान्य ढाँचे से अलग होने और राज्य सरकारों को टीकाकरण कवरेज की प्राथमिकताओं को परिभाषित करने की स्वतंत्रता देने का आग्रह किया। तो कुल मिलाकार सोरेन चाहते हैं कि केंद्र सरकार सभी टीकों की आपूर्ति करे, लेकिन यह वो तय करेंगे कि इसे पहले किसे दिया जाना चाहिए।

राज्य में कोरोना के मामले

झारखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 831 नए मामले सामने आए हैं और 13 लोगों की मौत हुई है। वहीं मरीजों के ठीक होने की दर में भी सुधार हुआ है। अब तक राज्य में 95.27 प्रतिशत कोरोना से ठीक होने की दर रही है, जबकि मृत्यु दर 1.47 प्रतिशत पर बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, राज्य में कई प्रतिबंधों और इंट्रा और इंटर-सिटी बस सेवाओं के सस्पेंशन के साथ 3 जून 2021 तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है।