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सुशील और उसके गैंगस्टर साथियों का वहशीपना: वीडियो बनवाने के शौक ने ही दिखाया घिनौना रूप

देश की राजधानी में जिस समय शर्मनाक कुकृत्य को अंजाम दिया जा रहा था, उस समय तक शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जिसे वह आज तक सिर आँखों पर बिठाते रहे हैं, वह अगले ही दिन उनकी नजरों से गिर जाएगा। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह से छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में सुशील कुमार और उसके गैंगस्टर साथी उन चारों (सागर और उसके दोस्त) को अलग-अलग जगह पर गिराकर मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान वीडियो में एक-दो बार कुछ अन्य युवक अपने हाथ में रिवाल्वर और अन्य चीजें लहराते हुए भी नजर आ रहे हैं।

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले इस वीडियो में सुशील कुमार सागर पहलवान को डंडे से बुरी तरह पीटते हुए दिखाई दे रहा है। उसके ठीक पीछे एक अन्य युवक पर उसी तरह से डंडे से वार किया जा रहा है। वहीं, कुछ लोग सुशील को पकड़कर रोकने की कोशिश भी करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। मगर सुशील के सिर पर तो मानो खून सवार है। वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। सागर खून से लथपथ है, फिर भी सुशील का मन नहीं भर रहा है उसे मारने से।

कोई व्यक्ति ऐसा घिनौना कृत्य व अपराध तभी करता है, जब उसे कानून का कोई खौफ नहीं होता। 4-5 मई 2021 की उस रात को सुशील ने भी यही सोचा होगा कि पैसा, पॉवर और एक रसूखदार व्यक्ति तक कानून के हाथ शायद ही पहुँच पाए। लेकिन कानून के हाथ तो लंबे होते हैं, जिसने आखिरकार सुशील को अपनी गिरफ्त में ले ही लिया।

दरअसल, जब सुशील अपने गैंगस्टर साथियों के साथ मॉडल टाउन के फ्लैट से सागर और उसके साथियों को गाड़ी में डालकर स्टेडियम ले आया था, तब ये सभी डंडे और हथियारों से लैस थे। घटना के बाद से पुलिस ने सुशील समेत 9 आरोपितों को अब तक गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, सुशील ने अजय सहरावत के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया था। सात कारों में 20 से अधिक बदमाश थे, जिन्होंने सागर, सोनू महाल, भक्तु, अमित, रविन्द्र व विकास को छत्रसाल स्टेडियम के बाहर पार्किंग एरिया में 4 मई की देर रात एक बजे बुरी तरह से पीटा था।

ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार और उनके दोस्तों ने जमकर उन लोगों पर लाठी-डंडे बरसाए, लेकिन उस रात वहाँ पर एक व्यक्ति और भी था, जो सुशील का दोस्त प्रिंस था। वो उस दौरान घटना का वीडियो बना रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुशील ने ही प्रिंस को वीडियो बनाने को कहा था, ​बस फिर क्या था उसको उसी का शौक इतना भारी पड़ेगा, उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा। सुशील के चाहने वाले भी उनके इस वीडियो को देखकर बेहद आहत होंगे। आखिर हो भी क्यों ना। अब कोई नहीं कहेगा मैं अपने बेटे को सुशील कुमार जैसा बनाऊँगा। हरियाणा की मिट्टी में जन्मे जिस शेर को लोग अपना मार्गदर्शक समझते थे, आज उसका राक्षस रूपी घिनौना चेहरा देखकर डर गए हैं। अब तो हर कोई यही कह रहा होगा, अगले जन्म मोहे ऐसा बेटा ना दीजो।

भारत सरकार के सामने झुका ट्विटर: नई IT गाइडलाइन का पालन करने के लिए हुआ राजी

भारत सरकार और ट्विटर के बीच नए आईटी नियमों को लेकर विवाद अब थम गया है। दरअसल, तमाम विरोधों के बाद माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन का पालन करने के लिए राजी हो गया है। ट्विटर के एक प्रवक्ता ने सोमवार (31 मई 2021) को कहा, ”ट्विटर भारत में लागू कानूनों का पालन करने का प्रयास करता है। हम पारदर्शिता के सिद्धांतों, हर आवाज को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता और भारतीय कानून के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गोपनीयता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

आज दोपहर में इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस रेखा पल्ली की एकल न्यायाधीश पीठ ने ट्विटर को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई में जवाब देने के लिए कहा था। बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को है। कोर्ट ने यह आदेश वकील अमित आचार्य की उस याचिका पर दिया है, जिसमें उन्होंने तय समय सीमा में ट्विटर इंडिया और ट्विटर आईएनसी को केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नए आईटी नियमों 2021 को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश देने की माँग की थी।

मालूम हो कि इससे पहले व्हाट्सएप भी भारत सरकार के नए नियमों को लागू करने के पक्ष में नहीं था। हालाँकि, बाद में उसने भी नई गाइडलाइन को लागू कर लिया है। वहीं, फेसबुक और गूगल ने भी बिना किसी विरोध के नई गाइडलाइन को लागू किया है।

बता दें कि नई गाइडलाइन को मानने से पहले ट्विटर का कहना था कि नए आईटी नियमों में ऐसे तत्व हैं जो स्वतंत्र बातचीत को रोकते हैं। ट्विटर ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा मानते हुए चिंता जताई थी। वहीं, केंद्र सरकार ने गुरुवार (27 मई 2021) को ट्विटर पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा था कि अमेरिका स्थित माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म भारत में अपनी शर्तों को निर्धारित करने की कोशिश कर रहा है और देश की कानूनी व्यवस्था को भी कमजोर करना चाहता है।

कोरोना को मात देने वालों को वैक्सीन की एक डोज ही काफी: BHU के वैज्ञानिकों ने PM मोदी को भेजा शोध पत्र

कोरोना संक्रमण को मात देकर कोरोना टीके की पहली खुराक लेने वालों में 10 दिन में ही पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती है। ऐसे लोगों को कोरोना टीके की एक ही डोज लगे तो वह भी पर्याप्त है। बीएचयू जूलॉजी डिपार्टमेंट के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में यह परिणाम सामने आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेज कोरोना से उबरने वालों को बस एक ही डोज लगाने का सुझाव दिया है।

जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे, आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग से प्रो.विजय नाथ मिश्रा, डाक्टर अभिषेक पाठक की टीम ने ये अध्ययन किया है। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि ऐसे 20 लोगों पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि जिनको कभी संक्रमण न हुआ हो उन लोगों की तुलना में जो कोरोना संक्रमित रहे हैं और उनको टीके की पहली डोज लगी हो उनमें तेजी से एंटीबॉडी बनती है।

उन लोगों में जो कभी कोरोना संक्रमित नही हुए है, उनके एंटीबॉडी बनने में कम से कम 3 से 4 हफ्तों का समय लगता है। इस शोध में यह भी पता चला है कि कोरोना से ठीक होने के कुछ महीनों के बाद एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी एंटीबॉडी खो देता है तो उसकी बी और टी कोशिकाएँ दोबारा संक्रमण के मामले में तेजी से प्रतिरक्षा उत्पन्न करने में मदद करती हैं।

वैक्सीन की किल्लत को कर सकते हैं कम

यह शोध कोरोना वायरस के खिलाफ प्राकृतिक एंटीबॉडी की भूमिका और लाभ पर भी प्रकाश डालता है। पीएम मोदी को पत्र लिखकर माँग की गई है कि जो लोग कोरोना से उबर चुके हैं उनके लिए टीके की एक ही डोज काफी है।

प्रोफेसर चौबे ने बताया कि वर्तमान में देश में करीब दो करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना से उबर चुके हैं और ऐसा करके वैक्सीन की किल्लत को भी कम किया जा सकता है। यह शोध अमेरिका के जनरल साइंस इम्यूनोलॉजी में प्रकाशन के लिए स्वीकृत भी हो चुका है। इस कार्य में जूलॉजी डिपार्टमेंट से प्रज्वल सिंह, प्रणव गुप्ता भी शामिल हैं।

देश में अब तक कोरोना वैक्सीन की कितनी डोज लगी

देश में अगर टीकाकरण की बात करें तो स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक लोगों को 21 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है, जिसमें पहली और दूसरी डोज शामिल है और यह एक बड़ी उपलब्धि है। हर दिन लाखों लोगों को टीका लगाया जा रहा है। चूँकि हाल के कुछ दिनों में संक्रमण के मामले काफी बढ़ गए थे, लेकिन अब एक बार फिर इसमें कमी देखने को मिल रही है। 

हालाँकि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि मामले कम हो रहे हैं, लेकिन कोरोना खत्म नहीं हुआ है। लिहाजा सतर्क और सुरक्षित रहने की जरूरत है। साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए मास्क जरूर पहनें। सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें और हाथों को साबुन-पानी से धोते रहें या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। 

केंद्र और ममता बनर्जी के बीच जारी टकराव में अलपन बंद्योपाध्याय ने लिया रिटायरमेंट, ‘दीदी’ ने बनाया सलाहकार

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान यास अब थम चुका है, लेकिन इसका सियासी असर बंगाल की राजनीति पर दिख रहा है। बंगाल की ममता बनर्जी और केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को लेकर आमने-सामने हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय सोमवार (मई 31, 2021) सुबह 10 बजे दिल्ली आकर रिपोर्ट करना था, लेकिन ममता सरकार ने उन्हें रिलीव नहीं किया। 

केंद्र सरकार और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के बीच जारी रस्साकशी के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय ने सोमवार को रिटायरमेंट ले लिया। 31 मई को ही उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था जो तीन महीनों के लिए बढ़ाया गया था। उन्हें केंद्र सरकार ने वापस बुला लिया था, लेकिन वे नहीं गए। अब ममता बनर्जी ने उन्हें अपना विशेष सलाहकार नियुक्त किया है। वह अगले तीन साल तक इस पद पर रहेंगे। वहीं, अपर मुख्य सचिव गृह एचके द्विवेदी को बंगाल का नया मुख्‍य सचिव बनाया गया है।

ममता बनर्जी ने कहा, “हमें अभी आईएएस कैडर नियमों से एक पत्र मिला है। भारत सरकार ने अलपन को कल ज्वाइन करने के लिए कहा। सेवा विस्तार का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है।” वहीं अलपन के एक्सटेंशन पर ममता ने कहा, “ये मेरे हाथ में नहीं है। समय आने पर इस मामले पर जवाब दूँगी।”

ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान कहा, “गरीब लोग याद रखें कि मैं आप सबके लिए हूँ, उकसावे में शामिल न हों।” पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चक्रवात यास पर समीक्षा बैठक के दौरान कहा, “मैंने (चक्रवात यास प्रभावित) दीघा का दौरा किया है, यहाँ मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय की जिम्मेदारी है। मछुआरों के मुआवजे के बारे में सोचा जाना चाहिए।” बता दें कि बैठक में मुख्य सचिव थे, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान कहा कि COVID कोविड मामलों की दैनिक संख्या घटकर 11,000 हो गई है। दैनिक पॉजिटिविटी रेट घटकर 18 -19% हो गई। मृत्यु दर 0.56% है, जो पहली लहर से कम है, और डिस्चार्ज दर 91% है। उन्होंने कहा कि उन्हें चक्रवात के लिए न तो कोई राहत पैकेज मिला है और न ही उन्होंने इसके लिए कहा है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चक्रवाती तूफान Yaas से प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल का दौरा करने के बाद एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके करीबी माने जाने वाले मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय करीब आधे घंटे देर से पहुँचे थे और थोड़ी देर रुकने के बाद वहाँ से निकल गए थे। इसे सर्विस रूल्स के खिलाफ माना जा रहा है। इसके बाद केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव बंद्योपाध्याय के ट्रांसफर को लेकर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूलन (CAT) और कलकत्ता हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल किया।

हालाँकि, ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 पन्नों का पत्र लिखकर राज्य के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को कार्यमुक्त कर दिल्ली भेजने से इनकार कर दिया। अपने पत्र में ममता ने बंद्योपाध्याय को सोमवार ( 31 मई 2021) को सुबह 10 बजे तक नॉर्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करने के केंद्र सरकार के आदेश को ‘पूरी तरह से असंवैधानिक’ बताया। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार द्वारा हमें भेजे गए एकतरफा आदेश से स्तब्ध हूँ, जिसमें हमें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय कार्यमुक्त करने के लिए कहा गया है, ताकि वो भारत सरकार की सेवा में शामिल हो सकें।”

…तो ट्विटर देश के भी PM नहीं रहेंगे राहुल गाँधी, ट्रेंड में अब पटक ना दें बंगाली दीदी

आए दिन ट्विटर पर चलने वाले ट्रेंड किसी नेता, अभिनेता या राजनीतिक दल के समर्थकों, सलाहकारों और शुभचिंतकों के लिए मन की बात कहने का एक लोकप्रिय जरिया है। आज ट्विटर पर एक ट्रेंड चला #BengaliPrimeMinister जिसमें ट्वीट के जरिए ममता बनर्जी को 2024 में प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने को लेकर ट्वीट देखे गए। किसी नेता को राष्ट्रीय या राज्य के स्तर पर इस तरह से प्रोजेक्ट करने के लिए ऐसा ट्रेंड चलाने का यह पहला मौका नहीं था। ऐसा पहले भी देखा गया था। ऐसे ट्रेंड कई बार राहुल गाँधी के समर्थकों ने भी पहले चलाया है। बिहार चुनावों के समय तेजस्वी यादव को भी ट्रेंड चलाकर मुख्यमंत्री बताया गया था। चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में आते और सफल हो जाते तो ट्रेंड भी सफल हो जाता। 

तेजस्वी यादव की पार्टी सफल नहीं हुई इसलिए ट्रेंड भी सफल नहीं हो सका पर वह पहले की बात है। ममता बनर्जी के पक्ष में आज जो ट्रेंड चला वह चूँकि 2024 में उन्हें प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट करने के विषय में था ऐसे में यह ट्रेंड सफल होगा या नहीं, यह जानने के लिए हमें अभी तीन वर्ष की प्रतीक्षा करनी होगी पर आज उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की इस इच्छा से कुछ प्रश्न उठ रहे हैं जिन्हें आने वाले समय में राजनीतिक विमर्शों का हिस्सा बनाए जाने की कोशिश होगी।

यह कोशिशें किस तरफ से होंगी वह तो समय बताएगा पर ट्रेंड में इस्तेमाल हैशटैग को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी ने जिस बंगाली अस्मिता को आगे रखकर राजनीति करने की कोशिश की, यह ट्रेंड उसी सोच को आगे बढ़ाता है।

जो प्रश्न उठेंगे उनमें एक प्रमुख प्रश्न होगा कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कोलकाता में ही ममता बनर्जी की कोशिशों पर विपक्ष की जिस एकता के दर्शन तस्वीरों में हुए थे यदि वही एकता एक बार फिर से हो जाती है तो फिर वह तस्वीरों तक ही सीमित रहेगी या वहाँ से आगे तक जाएगी? और यदि आगे तक जाएगी तो क्या विपक्ष के बाकी नेताओं के साथ राहुल गाँधी भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री पद के लिए ममता बनर्जी के दावे को स्वीकार करेंगे? यदि ऐसा संभव होगा तो फिर कॉन्ग्रेस और उसके इकोसिस्टम की योजनाओं का क्या होगा? 

दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठेगा कि बंगाल विधानसभा चुनावों के समय कॉन्ग्रेस और लेफ्ट ने ममता बनर्जी को जो समर्थन दिया वे उसकी क्या कीमत वसूलना चाहेंगे? और यदि ऐसी कोई कीमत वसूली की बात भविष्य में उठेगी तो क्या ममता बनर्जी को वह स्वीकार्य होगा? इसमें कोई दो राय नहीं कि कॉन्ग्रेस और लेफ्ट ने योजनाबद्ध तरीके से अपने वोट ममता बनर्जी को ट्रांसफर किए। जिस तरह से अधीर रंजन चौधरी को चुनाव प्रचार से हटाया गया, वह ममता बनर्जी के साथ कॉन्ग्रेस और लेफ्ट की किसी न किसी तरह की डील ही साबित करता है। ऐसे में यदि पश्चिम बंगाल मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की कोई योजना बनी तो फिर एक दल के रूप में कॉन्ग्रेस पार्टी और एक नेता के रूप में राहुल गाँधी खुद को कहाँ पाएँगे? 

महत्वपूर्ण बात और है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर ममता बनर्जी की भूमिका की चर्चा अब केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रही है और यह अब देश के लगभग हर कोने तक फ़ैल चुकी है। उनके सलाहकार मुस्लिम तुषिकरण की उनकी पुरानी नीति को क्लब हाउस जैसे सार्वजनिक मंच पर स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में मुस्लिम तुष्टिकरण की उनकी नीति क्या राष्ट्र स्तर पर अलग-अलग राज्यों के मतदाताओं को स्वीकार्य होगी?

और यदि ऐसा मान भी लिया जाए कि स्वीकार्य होगी तो फिर उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान जो चंडी पाठ और मंत्रोच्चार किया था, उस मेहनत का क्या होगा? यदि कॉन्ग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए ममता बनर्जी के दावे को स्वीकार कर भी लेगी तो राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के भी पूजा-पाठ वाली तस्वीरों का क्या होगा? उन्होंने पिछले तीन-चार वर्षों में खुद को जिस तरह से हिन्दू साबित करने के लिए मेहनत की है, उस मेहनत का असर तो ममता बनर्जी को नेता स्वीकार करने के बाद क्षण भर में खत्म हो जाएगा। 

ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो उठेंगे और किसी भी संभावित विपक्षी एकता के लिए इन प्रश्नों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। समर्थकों, सलाहकारों और शुभचिंतकों की अभिलाषा अपनी जगह पर 2024 आने में अभी बहुत देर है। उसके पहले ममता बनर्जी की परीक्षा अपने राज्य में म्युनिसिपल इलेक्शन और पंचायत इलेक्शन के समय होनी है। इसी तरह राहुल गाँधी की परीक्षा अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के समय होनी है। ये चुनाव तय करेंगे कि किसे किसके दावे का समर्थन करना पड़ेगा। तब तक ट्विटर ट्रेंड चलते रहने चाहिए। ऐसे ट्रेंड केवल समर्थकों की अभिलाषा के लिए ही नहीं नेताओं के उत्साह के लिए भी ऑक्सीजन का काम करते हैं। 

क्या तमिलनाडु के वित्त मंत्री पलानीवेल त्यागराजन अमेरिकी नागरिक हैं? सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर किए कई दस्तावेज

तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी.टी.आर. पलानीवेल त्यागराजन को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ली हुई है। न्यूज पोर्टल मेडियान (Mediyaan) के संपादकीय सदस्य सरवनप्रसाद बालासुब्रमण्यम ने एक ट्विटर पोस्ट में आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिकता रिकॉर्ड को स्कैन करने पर पता चला कि त्यागराजन अमेरिका के नागरिक हैं। त्यागराजन ने इसी तरह के आरोपों का 20 मई 2021 को भी जवाब दिया था। उन्होंने आरोप लगाने वाले नेटिजन्स को जवाब देने के लिए ‘गोमूत्र’ का इस्तेमाल किया था, जो बेहद शर्मनाक था। हम इसका जिक्र आगे करेंगे।

पोस्ट में बालासुब्रमण्यम ने कहा, ”अमेरिकी नागरिकता रिकॉर्ड स्कैन से पता चलता है कि तमिलनाडु के वर्तमान वित्त मंत्री पलानीवेल त्यागराजन एक अमेरिकी नागरिक हैं। भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी विदेशी नागरिक को भारत में चुनाव लड़ने और वोट डालने का अधिकार नहीं है।”

अगले ट्वीट में, उन्होंने नरेनथिरन पीएस (Narenthiran PS) के एक फेसबुक पोस्ट का उल्लेख किया, जहाँ उन्होंने दावा किया था कि त्यागराजन का अमेरिकी नागरिक के रूप में रिकॉर्ड पाया गया था।

तमिल में लिखे गए एक फॉलो-अप पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आमतौर पर अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक या एच 1-बी वीजा जैसी जानकारी लेना संभव है। यदि आप इसके लिए पहले से ही बताए अनुसार पेमेंट करते हैं तब। मैंने तमिलनाडु के एक वित्त मंत्री के बारे में जो जानकारी ली है, वह भी इसी तरह की कंपनी से ही ली गई है। मैं इस पर रुक रहा हूँ, क्योंकि इसके जरिए मुझे अधिक जानकारी मिल सकती है।”

उन्होंने डिटेल में बताया कि कोई कैसे अमेरिकी नागरिकता ले सकता है। उन्होंने आगे कहा, ”और मंत्री भी खुद को इस तरह से साबित कर सकते हैं। सच तो यह है कि इसमें 5 मिनट भी नहीं लगते, लेकिन आइए इंतजार करें और देखें कि वह क्या करते हैं।”

जब हमने इंस्टेंटचेकमेट डॉट कॉम (instantcheckmate.com) पर अमेरिकी नागरिकता डेटाबेस की खोज करने की कोशिश की, तो हमें पलानीवेल त्यागराजन नाम से जुड़ा एक रिकॉर्ड मिला। हालाँकि, ये सच है कि एक ही नाम के कई लोग हो सकते हैं, लेकिन जिस बात ने हमारा ध्यान उस ओर खींचा वह था रिश्तेदारों का नाम, जिसमें मार्गरेट राजन (Margaret Rajan) का नाम भी शामिल था।

गौर करें कि त्यागराजन की शादी अमेरिकी नागरिक मार्गरेट से हुई है और उनके दो बच्चे भी हैं। 1987 में भारत छोड़ने के बाद त्यागराजन 20 साल तक अमेरिका में ही रहे थे। मार्गरेट उनकी क्लास मेट थीं, जिससे उन्होंने बाद में शादी कर ली थी। 2007 में अपने पिता के निधन के बाद वह वापस भारत लौट आए। 2011 में, वह नौकरी के लिए सिंगापुर चले गए थे और वहाँ चार साल तक रहे। 2015 में वह फिर भारत लौट आए और 2016 में उन्होंने DMK पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

त्यागराजन इन आरोपों पर हँसे थे

खैर, यह पहली बार नहीं है जब त्यागराजन अपनी नागरिकता से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं। 20 मई 2021 को एक ट्विटर हैंडल ने इसी तरह के आरोप लगाए थे, जिसमें यूजर ने दावा किया था कि त्यागराजन के पास OCI कार्ड है।

उस दौरान त्यागराजन ने एक ट्वीट को कोट किया, जिसमें ‘गोमूत्र’ के इस्तेमाल का जिक्र था। उन्होंने लिखा, “फिल्टर्ड इडियट्स बहुत अधिक गोमूत्र पीने से पागल हो गए हैं। यह आरोप लगाते हैं कि मैं ओसीआई कार्डधारक (जो वोट नहीं दे सकते) हूँ।” उस गुमनाम अकाउंट को तब से सस्पेंड कर दिया गया है।

पंचायत चुनाव में कोरोना से जान गँवाने वाले कर्मियों के आश्रितों को ₹30-30 लाख देगी योगी सरकार, रिकवरी रेट 96% पार

पंचायत चुनाव के दौरान जान गँवाने वाले शिक्षकों को लेकर अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी मृतक शिक्षकों और सरकारी कर्मियों के आश्रितों को 30-30 लाख रुपए देने का निर्णय लिया है। हालाँकि, योगी सरकार ने चुनाव आयोग की गाइडलाइन में बदलाव करते हुए पंचायत चुनाव की अवधि को 30 दिन ही माना है। उत्तर प्रदेश के शिक्षक संघ ने कोर्ट में भी याचिका दायर की थी जिसके बाद से योगी सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था।

सरकार तैयार करेगी डाटा

कोरोना के दौरान ड्यूटी पर लगे शिक्षकों की मौत के बाद योगी आदित्यनाथ के इस फैसले की जमकर सराहना हो रही है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश की सरकार पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले वैसे शिक्षकों का डेटा तैयार कर रही है, जिनकी मौत इन 30 दिनों की अवधि में हुई या फिर वे 30 दिनों की अवधि में कोरोना से संक्रमित हुए। पूरे मामले पर योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की सरकार किसी को भी निराश करने वाली नहीं है और आने वाले समय में शिक्षकों के आश्रितों को ₹30 लाख दिए जाएँगे।

रिपोर्ट निगेटिव आने वालों को भी मिलेगी मदद

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी पर लगाए गए सभी शिक्षकों का डाटा उनके पास सुरक्षित है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इन 30 दिनों की अवधि में कोरोना संक्रमित होने के बाद हुए मौतों का सरकार आकलन कर रही है ऐसे लोगों के परिवार वालों को आर्थिक मदद दी जाएगी। योगी सरकार ने स्पष्ट किया कि अगर रिपोर्ट के नेगेटिव आने के बाद भी 30 दिनों के अंदर किसी शिक्षक की मौत हुई हो तो उन्हें भी अनुग्रह राशि दी जाएगी।

गौतरतलब है कि उत्तर प्रदेश में स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी है। नए संक्रमित मरीज काफी कम मिल रहे हैं और अस्पताल से ठीक होने वाले लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है। इसी का परिणाम है कि रिकवरी रेट 96.6% हो गया है इसके पीछे सीएम योगी का 3T मॉडल भी काफी हिट हुआ है।

क्या है 3T मॉडल

दरअसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कुछ विभिन्न क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया। विशेषकर ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट को जोर देकर कोरोना से जंग जीती जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर बाहर से आने वाले लोगों की ट्रेसिंग हो रही है। कोरोना जाँच को भी काफी तेजी से बढ़ाया गया है। इसके साथ ही ट्रीटमेंट के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर अन्य सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के सभी इंतजाम किए गए।

दूसरी लहर में हालाँकि लोगों को शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है। महामारी के बीच उत्तर प्रदेश में पूर्ण लॉकडाउन न लगाकर, आंशिक कोरोना कर्फ्यू लगाने का निर्देश दिया गया था। 1 जून से कई जिलों में इससे राहत दी जा रही है। हालाँकि 20 ऐसे जिले अभी भी हैं, जहाँ पहले की तरह कोरोना कर्फ्यू जारी रहेगा।

हजारीबाग में देखा गया एलियन! ‘चुड़ैल-चुड़ैल’ कह कर भागने लगे लोग: ट्विटर पर कोई डरा तो बहुतों ने लिए मजे

झारखंड के हजारीबाग में कोविड​​-19 और फंगस के प्रकोप के बीच, अब एक ‘एलियन’ को देखा गया है। झारखंड से 30 सेकंड का एक वीडियो सामने आया है जो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक ‘एलियन जैसी’ या ‘भूत जैसी’ आकृति अंधेरे में चडवा बाँध पुल से नीचे जाते हुए देखी जा सकती है।

वीडियो में नजर आ रहा है कि कैसे आधी रात में हाईवे पर उस भूत जैसी आकृति को देखकर दूर से ही बाइक वाले रुक रहे हैं और हैरान होकर सोच रहे हैं ये आखिर क्या है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले बाइकर्स में से एक को उस अजीब चीज को ‘चुड़ैल’ कहते हुए सुना जा सकता है, जबकि अन्य दूर से ही उसे देखने के लिए रुक जाते हैं।

झारखंड हजारीबाग एलियन की इस खबर ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी और लोग हैरान रह गए हैं। जबकि कुछ ने दावा किया कि झारखंड वायरल वीडियो में ये अजीब प्राणी एक ‘भूत’ था, वही दूसरों का मानना है कि वह ‘एलियन’ भी हो सकता है। हालाँकि, कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका कहना है कि ये किसी का ‘मजाक’ है। सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो को शेयर करते हुए नासा और इसरो को भी टैग किया है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “एलियन की खोज हुई पूरी। रात को दारू पीने के बाद बिना कपड़ा और दिन में थोड़ा कम पीने के बाद कपड़ा पहन कर जाता हजारीबाग का एलियन छड़वा डैम के नजदीक से गुजरता हुआ।”

एकता कपूर ने भी यह वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि जो लोग अकेले सोते हैं उनके लिए यह बहुत डरावना हो सकता है। एकता के पोस्ट पर कुछ लोगों ने लिखा है कि वे डर गए। वहीं कई लोग इसे कैमरा ट्रिक बताकर मजाक उड़ा रहे हैं। ज्यादातर लोग इसे कैमरा का स्पेशल इफेक्ट और वीडियो बनाने वाले की शरारत बता रहे हैं।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “दो महीने कोरोना झेल लिया, अब ब्लैक फंगस भी देख लिया। बस अब एक बार एलियन और देख लूँ। फिर आराम से झोला उठाकर मास्क लगाकर हिमालय निकल लूँगा।”

‘बुढ़ापे’ से चिंतित चीन ने बदली दशकों पुरानी नीति, दी 3 बच्चों की अनुमति: घटती जनसंख्या के कारण अहम फैसला

चीन ने घटती जनसंख्या और बढ़ते बुढ़ापे को कंट्रोल करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार (31 मई 2021) को ‘तीन बच्चे’ पैदा करने की अनुमति दे दी। इस बात की जानकारी वहाँ की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने दी। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में पोलित ब्यूरो की बैठक के दौरान इस पॉलिसी को मंजूरी दी गई।

इससे पहले 2016 में, चीन ने अपनी दशकों पुरानी ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ को खत्म कर 2 बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी। गौरतलब है कि शुरुआत में दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाले देश ने जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू कर दी थी। इसका नेगेटिव असर यह हुआ कि वहाँ जन्म दर तेजी से घटी और बुजुर्गों की संख्या बढ़ने लगी थी।

मीटिंग को लेकर शिन्हुआ ने कहा, चीन में जन्म दर को अनुकूल बनाने के लिए अब एक विवाहित जोड़े तीन बच्चे पैदा कर सकेंगे।

एजेंसी ने कहा पॉलिसी में बदलाव को सहायक उपायों के साथ लाया जाएगा, जो देश की जनसंख्या के ढाँचे में सुधार के लिए अनुकूल होगा और देश की बढ़ती उम्र की आबादी से निपटने के साथ ही मानव संसाधनों के लाभ बनाए रखने में कारगर होगा। हालाँकि, किस तरह के उपायों को अपनाया जाएगा, इसे नहीं बताया गया है।

सोशल मीडिया ने नहीं दी तवज्जो

शी जिनपिंग की अगुआई वाली चीनी सरकार की थ्री चाइल्ड पॉलिसी को चीनी सोशल मीडिया पर लोगों ने खास तवज्जो नहीं दी। कई लोगों ने इस पॉलिसी को लेकर कहा कि वे एक या दो बच्चे पैदा करने का जोखिम नहीं उठा सकते।

एक यूजर ने वीबो पर पोस्ट किया, “अगर मुझे 5 मिलियन युआन (785,650 डॉलर) दिया जाता है तो मैं तीन बच्चे पैदा करने को तैयार हूँ।”

क्यों चीन को उठाना पड़ा यह कदम

इसी महीने की शुरुआत में चीन की दशक में एक बार होने वाली जनगणना के आँकड़े जारी हुए थे, जिसके मुताबिक 1950 के दशक के बाद से पिछले दशक के दौरान वहाँ की जनसंख्या बहुत ही धीमी गति से बढ़ते हुए 1.41 बिलियन हो गई है।

आँकड़ों के मुताबिक, 2010-2020 के बीच चीन में जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार औसत से भी कम 0.53 फीसदी थी, जबकि इससे पहले 2000-2010 के दौरान यह 0.57 प्रतिशत थी। इसके अलावा चीन में 2020 में केवल 12 मिलियन बच्चे ही पैदा हुए थे। वहीं 2016 में यह आँकड़ा 18 मिलियन था।

डेटा के मुताबिक, चीन का फर्टिलिटी रेट 2020 में प्रति महिला केवल 1.3 बच्चों का था।

‘आपकी पार्टी में महिलाएँ सुरक्षित क्यों नहीं’: AAP पार्षद की प्रताड़ना के बाद कार्यकर्ता ने केजरीवाल से किया सवाल, FIR दर्ज

केजरीवाल सरकार का महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे करना, अपने घोषणा-पत्र में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि बताना एक कोरा झूठ है। दरअसल, आम आदमी पार्टी (AAP) की एक महिला कार्यकर्ता को उनकी ही पार्टी के नेता द्वारा पिटवाने और दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। सोमवार (31 मई 2021) को मटियाला वार्ड से ‘आप’ के पार्षद रमेश मटियाला के खिलाफ दो अन्य कार्यकर्ताओं की मदद से अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ता के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। म​हिला ने बीते दिनों खुद फेसबुक पर भी अपनी आपबीती सुनाई थी।

कथित तौर पर 28 मई 2021 को हुई घटना के बाद ‘आप’ पार्षद के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। सोशल मीडिया पर पीड़िता एक वीडियो भी सामने आया है। वायरल वीडियो में पीड़िता का कहना है कि रमेश मटियाला ने पार्टी की दो महिला कार्यकर्ताओं को बुलाकर उनके सामने थप्पड़ मारने का कहा।

पीड़िता के अनुसार, जो आम आदमी पार्टी की सदस्य भी हैं, उन्होंने मटियाला में दिल्ली सरकार की मदद से आरटी-पीसीआर टेस्ट कैंप लगवाया था। महिला ने अकेले ही इस कैंप को लगवाया था, इसलिए उन्होंने अपनी फोटो वाला एक बैनर वहाँ लगा रखा था। घटना वाले दिन जब रमेश मटियाला वहाँ पहुँचे तो वह बैनर देखकर भड़क गए।

महिला कार्यकर्ता ने शुक्रवार (28 मई 2021) को बताया कि रमेश मटियाला मुझे धमकी देते हैं कि मैंने अपना बैनर यहाँ क्यों लगवाया है, जबकि ये सब कुछ आयोजित करवाने वाली मैं हूँ, विधायक जी से बात करके इस कैंप को लगवाने वाली मैं हूँ। मटियाला में केवल एक ही जाँच कैंप था, लेकिन मैंने गुलाब जी से बात करके इसे लगवाया। सुबह से मैं यहाँ थी, पब्लिक के बीच में लोगों का टेस्ट करवा रही थी। इसी बीच दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी का मुझे कॉल आया और मैं कुछ अन्य जरूरी काम से वहाँ चली गई, लेकिन जब मैं वहाँ से आई तो मैंने देखा रमेश मटियाला यहाँ आया हुआ है। उसने अपनी उपस्थिति में दो महिला कार्यकार्ताओं को बुलवाया और मुझ पर हमला करवाया। रमेश ने उन्हें मुझे थप्पड़ मारने को भी कहा। इसके अलावा मेरे पोस्टर और बैनर जो मैंने टेस्ट कैंप के लिए लगवाया था, महिलाओं से उसे फाड़ने को कहा।

‘आप’ नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (चोट पहुँचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 509 (गलत शब्दों का प्रयोग या किसी महिला को अपमानित करने का इरादा) और 506 (धमकी देना) के तहत दिल्ली के बिंदापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, डीसीपी (द्वारका जिला) संतोष कुमार मीणा ने कहा कि हमें ‘आप’ पार्टी की कार्यकर्ता से शिकायत मिली थी। हमने एफआईआर दर्ज करने से पहले एक जाँच भी की है। वास्तव में क्या हुआ, यह पता लगाने के लिए आगे की जाँच भी जारी है।

आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए रिजनल हेड की नौकरी छोड़ने पर अफसोस जताते हुए महिला ने अरविंद केजरीवाल से सवाल किया, “आपकी पार्टी में महिलाएँ सुरक्षित क्यों नहीं हैं?” इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह आने वाले दिनों में किसी भी गिरफ्तारी से पहले पीड़िता को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाएगी। इस संबंध में संपर्क किए जाने पर रमेश मटियाला का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत या एफआईआर की जानकारी नहीं है। शिकायत खुद देखने के बाद ही वे इस पर प्रतिक्रिया दे पाएँगे।