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जैश की साजिश, टारगेट महंत नरसिंहानंद: भगवा कपड़ा और पूजा सामग्री के साथ जहाँगीर गिरफ्तार, साधु बन मंदिर में घुसता

दिल्ली पुलिस ने महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की साजिश का पर्दाफाश करते हुए एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। यति नरसिंहानंद दिल्ली से सटे गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार (मई 17, 2021) को जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को पहाड़गंज के एक होटल से दबोचा। उसके पास से भगवा कपड़ा भी बरामद हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार वह महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की सुपारी लेकर आया था। वह जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है और पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं से निर्देश ले रहा था। पड़ोसी मुल्क में बैठे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक सरगना ने उसे इस हत्याकांड के लिए भेजा था। उसे साधु के वेश में मंदिर में घुस महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी। दिल्ली पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल और 2 मैगजीन के अलावा 15 कारतूस भी बरामद की है।

उसने पूछताछ में आबिद नाम के अपने एक आका के बारे में बताया है, जो उसे पाकिस्तान से निर्देशित कर रहा था। व्हाट्सएप्प के जरिए वह उसके संपर्क में रहता था। आबिद ने उसे महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक वीडियो दिखाया था और फिर उनकी हत्या के लिए भड़काया था। इसके लिए जहाँगीर को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दिलवाई गई थी। आबिद ने काम हो जाने पर रुपए देने की बात भी कही थी।

जहाँगीर अप्रैल 23, 2021 को ही कश्मीर से दिल्ली के लिए निकला था। दिल्ली में उमर नाम का एक शख्स उसका इंतजार कर रहा था, जिससे उसकी मुलाकात होनी थी। उमर और जहाँगीर टेलीग्राम के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। उमर ने ही दिल्ली में उसके लिए ठहरने की व्यवस्था करने का जिम्मा उठाया था। जहाँगीर जब दिल्ली के लिए निकला, उसी दिन उसके बैंक खाते में 35,000 रुपए भी डाले गए थे।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँगीर से अब भी पूछताछ कर रही है जिसमें कई नए राज खुल कर बाहर आने की संभावना है। गाजियाबाद पुलिस के कान भी इस सूचना के बाद खड़े हो गए हैं। आरोपित के पास से जिस तरह पूजा सामग्री, कलावा और कुमकुम मिला है, उससे साफ़ है कि वह साधु के वेश में मंदिर में घुसने में कामयाब हो सकता था। लखनऊ में हिन्दू नेता कमलेश तिवारी की हत्या भी भगवा कपड़ा पहने आरोपितों ने की थी।

जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर पुराना दहशतगर्द है और 2016 में पत्थरबाजी के मामले में वो अनंतनाग में गिरफ्तार भी किया गया था। आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद उसने भारतीय सेना पर पत्थरबाजी की थी। अक्टूबर 2019 में युसूफ खान और हाशिम अली ने जिस तरह कमलेश तिवारी की हत्या की थी, उसी तर्ज पर जहाँगीर की भी तैयारी थी। फ़िलहाल ये दोनों भी जेल में बंद हैं। दोनों भगवा कपड़ा पहन बातचीत के बहाने तिवारी के दफ्तर में घुसे थे।

हाल के दिनों में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक बयान को ‘रसूल अल्लाह की शान में गुस्ताखी’ बता कर भारत के कई शहरों में कट्टर मुस्लिमों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। बांग्लादेश और पाकिस्तान तक में उनके खिलाफ भड़काऊ बातें की गईं। बांग्लादेश के कट्टर मौलानाओं ने कहा था कि नरसिंहानंद ने ‘रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’ की शान में गुस्ताखी की है और इसी की ‘सज़ा’ कोरोना की मौतों के रूप में मिल रही है।

विनोद दुआ की बेटी ने ‘भक्तों’ के मरने की माँगी थी दुआ, माँ के इलाज में एक ‘भक्त’ MP ने ही की मदद

मीटू (MeToo) के आरोपित पत्रकार विनोद दुआ कोरोना संक्रमित होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी पत्नी चिन्ना दुआ भी गुरुग्राम के मेदांता में COVID के कारण भर्ती हैं। चिन्ना दुआ को रविवार (16 मई 2021) को टोसिलिजुमैब (Tocilizumab) इंजेक्शन की जरूरत थी। कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली यह एक महत्वपूर्ण दवा है। उनकी बेटी, अभिनेत्री और ‘कॉमेडियन’ मल्लिका दुआ दवा के लिए मदद माँगने इंटरनेट पर पहुँच गईं।

मल्लिका दुआ का ट्वीट और उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ

मल्लिका ने अभिनेता सोनू सूद और कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा जैसी विभिन्न हस्तियों और नेताओं को मदद के लिए ट्वीट किया। लेकिन, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर सहित किसी भी भाजपा नेता से संपर्क नहीं किया था। फिर भी भाजपा सांसद और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने उन्हें अपना नंबर दिया और बताया कि दवा का इंतजाम हो गया है।

गौरतलब है कि मोदी समर्थक भाजपा नेताओं को ‘भक्त’ बताते हुए मल्लिका पूर्व में उनके मरने की दुआ माँग चुकी हैं। लेकिन, जब मुश्किल वक्त आया तो एक ‘भक्त’ ने ही उनकी मदद की।

सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में दुआ से ट्विटर अकाउंट के बारे में पूछा गया था कि वह चाहती हैं कि उन्हें सस्पेंड कर दिया जाए। इसमें वह कहती हैं, “सभी ‘भक्त’ हाँ। ये सभी आईटी सेल f*cks उन्हें बस मर जाना चाहिए।”

इससे पहले मल्लिका दुआ ने पुलवामा में वीरगति प्राप्त करने वालों के साथ एकजुटता दिखाने वाले लोगों के खिलाफ अपशब्द कहे थे। नृशंस हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानियों और उनके शोक संतप्त परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाते हुए दुआ ने कहा था कि ‘लोग हर दिन मरते हैं’। उन्होंने कहा था, “मैं उनसे पूछना चाहती हूँ कि लोग हर दिन भूख, भुखमरी, बेरोजगारी और कई अन्य कारणों से मरते हैं, क्या हम उन सभी पर शोक करते रहते हैं, क्या हम पूरे साल शोक मनाते रहते हैं। यह बकवास है।”

हालाँकि, भाजपा समर्थकों ने इन अमीरों की मदद करने पर बीजेपी के मंत्री का विरोध भी किया है। उनका कहना है कि आम लोग भी समान रूप से पीड़ित हैं और हायर क्लास ने उनसे मदद भी नहीं माँगी थी।

ट्विटर यूजर अंकित जैन ने ऐसे वक्त में जब हर किसी को चिकित्सकीय मदद की जरूरत है दुआ जैसे खास लोगों की मदद पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एलीट क्लास को तब भी मदद मिल जाती है जब उन्होंने मंत्री को टैग तक नहीं किया था।

वहीं ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने ने इस पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि कैसे मल्लिका के पिता पत्रकार विनोद दुआ ने पूर्व पीएम और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर श्रद्धांजलि देने को ‘पाखंड’ बताया था।

इस बीच मल्लिका दुआ ने मदद के लिए पुरी का शुक्रिया अदा किया है और पुरी ने दुआ को दवा देने वाला अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।

TMC के 2 मंत्री और 1 विधायक को CBI ने किया गिरफ्तार: पीछे-पीछे पहुँचीं बंगाल की CM ममता बनर्जी भी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नारदा स्टिंग मामले में आरोपित नेताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जाँच एजेंसी सोमवार (मई 17, 2021) को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं फिरहाद हाकिम, सुब्रत चटर्जी और मदन मित्रा के अलावा कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर लेकर आई।

फिरहाद और सुब्रत बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री हैं। वहीं मदन मित्रा TMC विधायक हैं। इन नेताओं को सीबीआई दफ्तर ले जाने की खबर आने के बाद ममता बनर्जी भी जाँच एजेंसी के दफ्तर पहुँच गईं। समाचार एजेंसी ANI द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि वे सुरक्षा कर्मियों व कई नेताओं के साथ CBI दफ्तर पहुँचीं।

मुख्य सूचना आयुक्त आरसी जोशी ने बताया है कि सीबीआई ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर 16 अप्रैल 2017 को मामला दर्ज किया था। अब इस मामले में फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया है। ये सभी उस समय बंगाल सरकार में मंत्री थे।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति CBI को पहले ही दे दी थी। फिरहाद हाकिम TMC के बड़े नामों में से एक हैं और जब CBI उन्हें अपनी गाड़ी से लेकर जा रही थी, तभी बाहर भारी भीड़ जुट गई और लोगों ने उनके पक्ष में नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्कामुक्की भी की।

सोवन चटर्जी तृणमूल कॉन्ग्रेस से ही कोलकाता के मेयर रहे थे, लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें उनके इलाके से टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वो भाजपा से भी अलग हो गए। नारदा स्टिंग टेप मामले में आरोपित ये चारों नेता घोटाले के समय मंत्री थे, इसीलिए उनके खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल की अनुमति ली गई। ये टेप 2014 में बनाए गए थे।

हालाँकि, 2016 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले ये सार्वजनिक रूप से सबके सामने आए थे। इसके वीडियो फुटेज के आधार पर दावा किया गया था कि इन चारों मंत्रियों के घूस में मोटी रकम ली थी। आरोप है कि एक फर्जी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए उसके प्रतिनिधियों से TMC नेताओं ने घूस लिया। वहीं राज्यपाल द्वारा कार्रवाई की अनुमति दिए जाने के बाद फिरहाद हाकिम ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा था कि वो व्यक्तिगत रूप से इससे चिंतित नहीं हैं।

उन्होंने खुद को क्लीन चिट मिलने की उम्मीद जताई थी। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा बिना ज़रूरत के उनके करियर और छवि को धूमिल करने में लगी हुई है। कोलकाता के निज़ाम पैलेस स्थित CBI दफ्तर में इन चारों से पूछताछ की जा रही है। मदन मित्रा नॉर्थ 24 परगना के कमरहटी से विधायक बने हैं। TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने इसे बदले की कार्रवाई बताया है। वहीं भाजपा नेता शमीक भट्टाचार्जी ने कहा कि इस मामले का उनकी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।

10 महीने की वेदिका, ₹15 करोड़ की दवा: SMA और दुनिया की सबसे महँगी दवा Zolgensma के बारे में जाने सब कुछ

सौरभ और स्नेहा महाराष्ट्र के पुणे में रहते हैं। इनकी 10 महीने की बेटी है। नाम है वेदिका। यह छोटी सी बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से जूझ रही है। यह दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इसके कारण शरीर की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं।

इलाज नहीं मिलने पर दो साल की उम्र से पहले ही ये बीमारी वेदिका के जीवन का अंत कर सकती है। वेदिका के माता-पिता बताते हैं, “हमने इससे पहले स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) टाइप 1 के बारे में कभी नहीं सुना था। जब डॉक्टर ने हमें इस स्थिति की जाँच के लिए वेदिका का टेस्ट करने को कहा, तो मैं घबरा गई। जाँच के लिए मैंने नर्स को उसके शरीर से 10 एमएल खून निकालते देखा, तो एक माँ के रूप में मैंने महसूस किया कि इससे उसे काफी दर्द हो रहा होगा। उस दौरान उसका सारा शरीर हिल-डुल नहीं सकता था। मेरी बच्ची जोर से रो भी नहीं पा रही थी। तब मुझे अहसास हुआ कि ये कितनी घातक बीमारी है।”

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी टाइप-1

वेदिका की ये हालत जिस स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी-टाइप 1 (SMA) नामक आनुवांशिक बीमारी की वजह से हुई है उसमें शरीर में प्रोटीन बनाने वाला एक जीन के न होने के कारण रोगी की सभी मांसपेशियाँ काम करना बंद कर देती हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो उसके शरीर की हर मांसपेशी काम करना बंद कर देगी और अंततः, उससे संचालित अंग भी। इसी वजह से इससे पीड़ित वेदिका के हाथ, पैर और धड़ पहले ही काम करना बंद कर चुके हैं।

इसी कारण से अब वेदिका न तो अपने आप उलट-पलट सकती है, न बैठ सकती है, न खड़ी हो सकती है और न ही जमीन पर घुटनों के पल चल पाती है। समय पर इलाज नहीं हुआ तो उसके रोने की आवाज भी धीरे-धीरे शांत हो जाएगी, क्योंकि उसकी वोकल कॉर्ड कमजोर हो रही है। निगलने, सांस लेने और उसके हृदय द्वारा रक्त पंप करने जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ भी बंद हो जाएँगी, जिससे वेदिका के लिए जीना भी मुश्किल हो जाएगा। महज एक साल की वेदिका इतनी कम उम्र में उस दर्द से गुजर रही है, जिससे बड़ों का भी दिल काँप जाए।

वेदिका के माता-पिता के मुताबिक, अभी हाल ही में पहले वेदिका को साँस लेने में तकलीफ होने लगी थी। उसके फेफड़े में बलगम जमा होने के कारण उसके माता-पिता को नेबुलाइजेशन थेरेपी को देविका की दिनचर्या बनाना पड़ा। उसकी हालत ऐसी है कि उसकी साँसों की देखभाल करने के लिए उसके माता-पिता हफ्तों से सोए नहीं हैं।

क्या है इस बीमारी का इलाज

वेदिका के निष्क्रिय होते शरीर का एक मात्र इलाज जोलगेन्स्मा (Zolgensma) है, जिसे वर्तमान में दुनिया की सबसे महँगी दवा के रूप में जाना जाता है। इसकी कीमत 2.1 मिलियन डॉलर (करीब 15 करोड़ रुपए) है। यह केवल 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों या 13.5 किलोग्राम से कम वजन के बच्चों को ही दी जा सकती है।

भारत में इसी साल मुंबई की एक पाँच महीने की स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA Type 1) से ही पीड़ित बच्ची तीरा कामत को इसका इंजेक्शन दिए जाने को लेकर यह दवा चचार् में आई थी। पीएम मोदी ने तीरा के माता-पिता की अपील पर इस दवा पर लगने वाले 6.5 करोड़ रुपए का इम्पोर्ट टैक्स माफ कर दिया था।

जोलगेन्स्मा स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी नामक जेनेटिकल बीमारी के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा है, जिसकी कीमत करीब 15-16 करोड़ रुपए है। इस दवा को पहली बार 24 मई, 2019 को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने स्वीकृति दी थी। इसे यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) द्वारा 9 मार्च, 2020 को स्वीकृति मिली थी। यह यूएस स्थित स्विस बायो-फार्मास्यूटिकल कंपनी, नोवार्टिस जीन थेरेपी (Novartis Gene Therapies) द्वारा बनाई जाती है।

‘गाजा में जीवन नर्क बन जाएगा’: हमास को UAE ने चेताया, इजरायल के साथ शांति नहीं तो इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश नहीं

जहाँ भारत ने इजरायल-फिलस्तीन विवाद में सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए दोनों पक्षों से शांति से काम लेने की अपील की है, वहीं इस्लामिक मुल्क संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हमास को चेतावनी दी है। UAE ने हमास से कहा है कि वो गाजा पट्टी क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाए, क्योंकि इसके बिना उस क्षेत्र में जा रहे निवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा। अरब समझौते के तहत UAE पिछले कुछ महीनों से लगातार हमास के संपर्क में है।

यूएई ने गाजा क्षेत्र में कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है और वहाँ निवेश किया है। वहाँ के लोगों तक सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रयासरत यूएई के कई प्रोजेक्ट्स उस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, जिन पर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के कारण बुरा असर पड़ रहा है। खाड़ी देश इसी कारण हमास को चेता रहा है। उसके एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वो अब भी फिलिस्तीन में नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए तैयार है और इसे आगे बढ़ाना चाह रहा है।

यूएई का कहना है कि वो संयुक्त राष्ट्र व फिलिस्तीन के अधिकारियों के साथ मिलकर विकास कार्य जारी रखेगा, लेकिन उसकी सबसे पहली और बड़ी शर्त ये है कि इलाके में शांति रहनी चाहिए। यूएई ने कहा है कि अगर इलाके में शांति कायम नहीं होती है तो इसके दुष्प्रभाव गाजा पट्टी के नागरिकों को ही भुगतने पड़ेंगे। उनका जीवन नर्क बन जाएगा। यूएई के अनुसार, हमास के नेताओं को समझना चाहिए कि उनकी नीतियाँ गाजा पट्टी के नागरिकों को ही नुकसान पहुँचा रही है।

बता दें कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में कई इस्लामी मुल्कों के साथ इजरायल का शांति समझौता हुआ था। फिलिस्तीन के नेताओं ने इसे गद्दारी की संज्ञा दे डाली थी। फरवरी में यूएई ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए UN को दी जाने वाली फंडिंग में भी कटैती की थी। इजरायल के साथ उसके सम्बन्ध सामान्य होने लगे थे। यूएई गाजा में प्रतिदिन 16 घंटे बिजली देने के लिए भी एक प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है।

अभी स्थिति इतनी बुरी है कि गाजा के नागरिकों को दिन के 5 घंटे भी बमुश्किल बिजली मिल पाती है। अगले सप्ताह तक तो वहाँ बिजली के लिए हाहाकार मचने की आशंका है। इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ताजा संघर्ष शुरू होने से लेकर अब तक फिलिस्तीन के आतंकियों की तरफ से ढाई हजार रॉकेट दागे जा चुके हैं। इनमें एक नाबालिग सहित 10 नागरिकों की मौत हुई है।

वहीं भारत ने फिलिस्तीन-इजरायल सीमा पर यथास्थिति को बदलने की कोशिशों का विरोध करते हुए दोनों पक्षों को धैर्य से काम लेने को कहा है। भारत ने कहा कि पूर्वी जेरुसलम और इसके आसपास यथास्थिति बरकरार रहनी चाहिए।

इस्लामी मुल्कों के संगठन ने की इजरायल की निंदा

वहीं इस्लामी मुल्कों के संगठन OIC ने इजरायल की निंदा की है। पिछले एक हफ्ते से जारी संघर्ष को 57 देशों के संगठन ने इजरायल द्वारा किया जा रहा ‘व्यवस्थित अपराध’ करार दिया और कहा कि UN जनरल असेम्ब्ली की बैठक बुलाई जानी चाहिए। इन देशों ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया कि इजरायल ने आक्रामक तरीके से फिलिस्तीन की जमीन कब्जाई है और इस्लामी उम्माह की फिलिस्तीन के प्रति नैतिक, ऐतिहासिक व कानूनी जिम्मेदारी बनती है।

इस प्रस्ताव में कहा गया, “हम इजरायल द्वारा फिलस्तीन के पवित्र स्थलों पर किए जा रहे हमलों की निंदा करते हैं। इससे आम नागरिकों को नुकसान हो रहा है। अल-अक्सा मस्जिद और अल-हरम शरीफ जैसे पवित्र स्थलों की पवित्रता भंग नहीं की जानी चाहिए। इजरायल साम्राज्यवादी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसकी निंदा की जानी चाहिए। इलाके में स्थिति बिगड़ने के लिए केवल वही जिम्मेदार है।”

केजरीवाल के ‘रोवन’ में राहुल गॉंधी की आहुति: चीनी वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति

दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट के आदेश ने अफरा-तफरी मचाने के साथ ही केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी के विरुद्ध लड़ाई को नए राजनीतिक पैंतरे प्रदान कर दिए हैं। इसका असर यह हुआ कि वैक्सीन की कमी से लेकर वैक्सीन मैत्री के तहत भारत द्वारा अन्य देशों को दिए गए वैक्सीन को आगे रखकर नई-नई चालें चली जा रही हैं।

ऑडिट के आदेश के साथ अचानक केजरीवाल सरकार को पता चला कि दिल्ली में ऑक्सीजन सरप्लस हो गई है। जिस रफ्तार से सरप्लस ऑक्सीजन की घोषणा हुई, उसे सुनकर लगा जैसे अचानक कोई आँधी आई और दिल्ली के टैंकरों में ऑक्सीजन भर गई। लोगों ने जैसे ही बाकी के शहरों में ऑक्सीजन की डिमांड की दिल्ली की डिमांड से तुलना करना शुरू की वैसे ही 976 टन की डिमांड अचानक उतर कर 500 टन पर आ रुकी।
 
इधर सरकार के मंत्री इस बात में अड़ गए कि; देखें जी, आस-पास के राज्यों को आवश्यकता हो या न हो, हम तो उन्हें सरप्लस ऑक्सीजन देकर रहेंगे। आप ये समझ लें कि हम जिम्मेदार सरकार चलाते हैं जो केवल दिल्ली नहीं बल्कि और राज्यों की समस्याएँ समझने और उन्हें हल करने की क्षमता रखती है। हाल ही में हमने पोस्टर लगाकर उत्तर प्रदेश के घर-घर में ऑक्सीजन पहुँचाने का सफल वादा भी किया था। ये कोरोना की दूसरी लहर न आती तो लोग उस वादे पर विश्वास भी कर लेते और हम विज्ञापनों में यूपी के घरों को ऑक्सीजन पहुँचाने का दावा ठोंक चुके होते। दावों को ऑक्सीजन देते रहने का हमारा पुराना रिकॉर्ड खँगाल लें। विश्वास न हो तो किसान आंदोलन को ऑक्सीजन पहुँचाने का हमारा रिकॉर्ड चेक कर लें, हम ऑक्सीजन देने से नहीं हिचकते। हमने विज्ञापन से कोरोना पर विजय प्राप्त करने का मॉडल तैयार किया है और अपने राज्य में उसका सफल परीक्षण भी किया है। 

दो दिनों तक इस ऑफर का प्रचार किया गया पर जैसे ही लगने लगा कि इसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, वैक्सीन की कमी का रोना शुरू किया गया। यह सरकार विज्ञापन के अलावा जिस एक बात पर सबसे अधिक भरोसा करती है, वह है ‘रोवन’। रोवन इस सरकार का ऐसा कर्म है जिसे एक लम्बे समय तक प्रैक्टिस करके इसने अपना दर्शन बना लिया है। हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है से लेकर हमें काम करने से रोका जा रहा है तक, यह सरकार हर बात के सहारे रो सकती है।

जैसे ही मीडिया में कोविड की संभावित तीसरी लहर की बातें चलने लगीं और यह चर्चा शुरू हुई कि तीसरी लहर तो बारह से अठारह वर्ष के लोगों को प्रभावित करेगी, तब से केजरीवाल का रोवन शुरू हो गया; हमें तो जी दिल्ली के बच्चों की बड़ी चिंता है। इसी रोवन ने आम आदमी पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को एक नया नैरेटिव थमा दिया गया जिसमें उस तीसरी लहर के प्रति चिंता प्रकट की गई जो अभी तक आई नहीं है। 

जो सामने है, उस पर बात करने से सरकार की अव्यवस्था उजागर हो रही है इसलिए ऐसी समस्या खोजो जो अभी तक पैदा नहीं हुई है और लोगों को गिफ्ट कर दो। जो पोस्टर दिल्ली में रातों-रात लॉकडाउन के समय लगाए गए, उन पोस्टरों का क्या औचित्य है जब वैक्सीन मैत्री के तहत दी जाने वाली वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार पहले ही वक्तव्य दे चुकी है? उसे उठाने का क्या औचित्य है जब उस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है?

प्रधानमंत्री से जवाब माँगने से पहले क्या केजरीवाल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की अव्यवस्था पर कोई जवाब दिया? दिल्ली हाई कोर्ट में रोज-रोज इस सरकार की छीछालेदर पूरे देश ने देखा, लेकिन क्या उस,पर केजरीवाल या उनके मंत्रियों ने कुछ कहा? देश में बनी वैक्सीन को लेकर जो बातें कही गईं और देश की जनता के बीच जो भ्रम और गलत जानकारियाँ फैलाई गई, उस पर कोई चर्चा हुई या किसी ने जवाब देने की बात की? 

प्रोपगेंडा के इस महायज्ञ में राहुल गाँधी ने भी अपनी ओर से आहुति दी। उन्होंने भी यह प्रश्न उठाया कि उनके बच्चों की वैक्सीन मोदी जी ने विदेश क्यों भेज दी? साथ ही उन्होंने माँग की कि सरकार उन्हें भी गिरफ्तार कर ले। राज्यों के विधानसभा चुनावों में वे भले ही हार गए हों पर वे कोरोना पर विजय प्राप्त करके अभी हाल ही में लौटे हैं। पता नहीं गिरफ्तार होकर क्यों रिस्क लेना चाहते हैं? वैसे आज तक यह नहीं पता लग सका कि उन्होंने वैक्सीन ली या नहीं पर अपने बच्चों की वैक्सीन को लेकर हल्ला मचा रहे हैं।

भारत में बनने वाली वैक्सीन को अपने प्रोपेगेंडा में रद्दी करार देने वाले ये लोग अब कह रहे हैं कि; जिसे हमने रद्दी बताया था वह वैक्सीन हमारे बच्चों की थी। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने भले ही भारतीय वैक्सीन को रद्दी बताया था पर उनकी सरकार ने टीकाकरण अभियान में अनुसूचित जाति, जनजाति और समाज के कमजोर वर्ग को ‘आरक्षण’ देने की माँग जरा भी देर नहीं की। अभी तक राहुल गाँधी ने नहीं बताया कि उनकी कॉन्ग्रेसी सरकार वही वैक्सीन देकर गरीबों की रक्षा कर रही है या उन्हें खतरे में डाल रही है?                  

दिल्ली यदि देश की राजधानी न होती तो बार-बार केंद्र सरकार आगे आकर केजरीवाल सरकार द्वारा खड़ी की गई समस्याओं का समाधान न कर पाती। कोरोना की पहली लहर से शुरू हुई केंद्र सरकार की मदद से केजरीवाल सरकार को बार-बार एक तरह का सुरक्षा कवच मिलता रहा है। पिछले वर्ष से ही DRDO या ITBP द्वारा बनाए गए कोविड हॉस्पिटल हों या टेस्टिंग सम्बंधित सुविधाएँ प्रदान करना हो, केंद्र सरकार ने केजरीवाल को बार-बार ऐसी सुविधाएँ दी हैं जो देश की और राज्य सरकारों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद केजरीवाल के पहले से ही निम्नस्तरीय राजनीतिक हथकंडे आए दिन गिरकर और नीचे के स्तर पर पहुँच जाते हैं। यह सन्देश देते हुए कि चीनी वायरस के विरुद्ध भारत की लड़ाई को ओछी राजनीति चीनी की तरह ही गला सकती है।

साले के फॉर्म हाउस में छिपा था ‘खाना चाचा’ वाला नवनीत कालरा, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी में दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली में कोरोना वायरस के कहर के बीच राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी करने के आरोपित बिजनेसमैन नवनीत कालरा को रविवार (16 मई 2021) देर रात दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया कि नवनीत कालरा गुरुग्राम में अपने साले के फॉर्म हाउस छिपा था, जहाँ से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कालरा पर अंतरराष्ट्रीय सेलुलर कंपनी मैट्रिक्स के साथ मिलकर दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी करने का आरोप है।

इससे पहले गुरुवार (6 मई, 2021) को दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स की कालाबाजारी का भंडाफोड़ होने के बाद शुक्रवार (मई 7, 2021) को दिल्ली पुलिस ने खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्टोरेंट से 96 कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए थे। पड़ताल में पुलिस को पता चला था कि जिन-जिन जगहों से मशीनें बरामद हुईं, उन सबके तार उद्योगपति नवनीत कालरा से जुड़े हुए हैं।

दिल्ली पुलिस को राजधानी के अलग-अलग कोनों से 6 मई को 450 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मिले। इनमें से 419 की बरामदगी पर एक ही व्यवसायिक संस्थान का नाम प्रकाश में आया, जिसका मालिक उद्योगपति नवनीत कालरा है। छापे के दौरान, 9 से 5 लीटर क्षमता वाले 32 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालरा की कंपनी Nege & Ju bar से मिले। पुलिस ने राजधानी के 3 नामी-गिरामी रेस्टोरेंट पर छापेमारी करके 524 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर को भी जब्त किया था।

ऑक्सीजन की कालाबाजारी से जुड़ी नवनीत कालरा की ऑडियो क्लिप भी बीते 9 मई, 2021 को लीक हुई थी। इसमें वह यह कहते सुना गया था कि उसके ऊपर “बहुत अधिक दबाव” है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकता। कालरा इस ऑडियो में कह रहा था, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।”

नवनीत कालरा पर AAP, कॉन्ग्रेस रही हैं मेहरबान

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालाबाजारी के आरोपी नवनीत कालरा पर अतीत में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस दोनों मेहरबान रही हैं। 2020 में दोबारा दिल्ली का सीएम बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने एक समारोह में 48 लोगों को “दिल्ली के निर्माता” के तौर पर सम्मानित किया था। कालरा उन्हीं 48 लोगों में शामिल एक नाम थे।

वहीं नवनीत कालरा को 2006 में केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार ने दिल्ली गोल्फ क्लब के सदस्य के तौर पर नामित किया था। कॉन्ग्रेस सरकार ने 2004-05 और 2005-06 के बीच दिल्ली गोल्फ क्लब में रॉबर्ट वाड्रा, ‘राष्ट्रीय दामाद’, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख जेएम हंस, और खान मार्केट के नवनीत कालरा को नामित किया था।

‘बाहुबल और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ताहिर हुसैन ने फैलाई हिंसा, उसके ठिकाने दंगों का हब बने’: अदालत ने नहीं दी जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में फ़रवरी 2020 में हुए दंगों के मुख्य आरोपित और आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया। एडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने प्रमोद और प्रिंस बंसल नामक पीड़ितों को गोली लगने के मामले में दर्ज 2 FIR पर सुनवाई की। ‘सुश्रत ट्रॉमा सेंटर’ से इनकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की गई।

जज विनोद यादव ने कहा कि बिना किसी पूर्व-नियोजित सोची-समझी साजिश के इतने बड़े स्तर पर इतने कम समय में दंगों का फैलना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपित इन मामलों में घिर चुका है, वो सीधा ये कह कर नहीं बच सकता कि वह शारीरिक रूप से इन दंगों में शामिल नहीं हुआ था, इसलिए इसमें उसका कोई हाथ नहीं है। कोर्ट ने पाया कि ताहिर हुसैन ने अपने ‘बाहुबल और राजनीतिक पहुँच’ का इस्तेमाल कर क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा फैलाई।

ताहिर हुसैन ने कोर्ट में अपने बचाव में तर्क पेश करते हुए कहा कि वो AAP से संबंध रखता है और परिस्थितियों में फँस कर आरोपित बन गया। उसने दावा किया कि वो एक राजनीतिक लड़ाई के बीच में फँस गया है। उसने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खुद की छवि धूमिल करने के लिए लगे गए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा करार दिया। उसने दावा किया कि इन मामलों में उसके खिलाफ कोई ठोस या कानूनी सबूत नहीं हैं।

ताहिर हुसैन ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि दंगों में शामिल होने या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामलों में उसके शामिल होने के कोई वीडियो सबूत उपलब्ध नहीं हैं। उसने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके पीछे उसकी पत्नी, 2 नाबालिग बच्चों और एक स्कूल जाने वाले बेटे की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। विरोधी पक्ष ने दलील दी कि एक खास समुदाय का एक समूह ये बात जानता था कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के कारण पुलिस उनकी सुरक्षा में व्यस्त होगी, इसलिए वह समय चुना गया।

कोर्ट ने माना कि दंगाई भीड़ खतरनाक हथियारों से लैस थी। अदालत ने कहा कि इस दंगाई भीड़ ने लूटपाट, सार्वजनिक व प्राइवेट संपत्तियों को ध्वस्त करना और आगजनी के अलावा एक समुदाय के जान-माल को क्षति पहुँचाने को अपना लक्ष्य बनाया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में ये कहना उचित नहीं होगा कि मुख्य आरोपित का लक्ष्य उस दंगाई भीड़ से अलग था। कोर्ट ने पुलिस से कहा कि गवाहों के बयान को दर्ज करने में देरी हो सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों में गवाहों को चिह्नित करना मुश्किल कार्य होता है।

कोर्ट ने कहा कि दंगाई उस स्थिति में थे कि वो एक खास समुदाय और कानूनी एजेंसियों के खिलाफ भीड़ जुटा सकें। उन्होंने अपने समुदाय की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए, आतंक और अफरातफरी का माहौल पैदा करने के लिए और कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए ये सब किया, ताकि केंद्र सरकार उनकी माँगों के सामने झुक जाए। कोर्ट ने कहा कि भारत के वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने के रास्ते में ये दंगा एक जख्म की तरह बन कर आया।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उसके द्वारा प्रत्यक्ष रूप से हिंसा नहीं भी की गई है तो भी वो अपने खिलाफ लगाई गई धाराओं से भाग नहीं सकता है। कोर्ट ने ये भी माना कि ताहिर हुसैन के ठिकाने ही दिल्ली कई इलाकों में सांप्रदायिक दंगों के फैलने का हब बने। कोर्ट ने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित था। एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया।

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास का Modi’in पर हमला, वेस्ट बैंक का ‘बदला’ लेने के लिए दागे रॉकेट

मध्य इजरायल पर शनिवार (15 मई) को हुए जोरदार रॉकेट हमले के दौरान एक रॉकेट वेस्ट बैंक स्थित एक फिलिस्तीनी कस्बे से टकराया। ये रॉकेट अज्जुन शहर के करीब गिरा, जिससे नुकसान तो हुआ, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास की सैन्य शाखा ने कहा कि रॉकेट का उद्देश्य इजरायली रक्षा बलों के साथ शुक्रवार को हुई झड़प में मारे गए नौ फिलिस्तीनियों की मौत का बदला लेने के लिए मध्य इजरायल के शहर Modi’in को निशाना बनाना था।

आतंकवादी समूह ने घोषणा की, “अल-कसम ब्रिगेड ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के शहीदों की आत्माओं के लिए और उनके खून का बदला लेने के लिए, रामल्लाह के पश्चिम में Modi’in पर बमबारी की।”

क्या है इजरायल का Modi’in

Modi’in-Maccabim-Re’ut मध्य इजरायल स्थित एक शहर है। यह तेल अवीव से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और यरुशलम से 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, और उन दो शहरों से हाईवे 443 के माध्यम से जुड़ा हुआ है। 2019 में इस शहर की जनसंख्या 93,277 थी।

फिलिस्तीनी प्राधिकरण के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार को आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेज) के साथ हिंसक झड़पों के दौरान इजरायल की गोलाबारी में कम से कम नौ वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी मारे गए। आईडीएफ के अनुसार, दंगों में करीब 3,000 फिलिस्तीनियों ने भाग लिया था। आईडीएफ ने कहा कि “मुख्य दंगाइयों” को निशाना बनाने सहित कुछ साइटों पर लाइव फायर का इस्तेमाल किया गया था।

हमास के आतंकियों ने गाजा पट्टी से शनिवार दोपहर को मध्य इजरायल की ओर बड़े पैमाने पर रॉकेट दागे। इस हमले में रमत गान नामक 50 वर्ष के एक व्यक्ति के घर के पास रॉकेट गिरने से उसकी मौत हो गई। मध्य तटीय शहरों के साथ-साथ मेगाडलिम, एली, केफर तापुआच, रेचेलिम और अन्य वेस्ट बैंक बस्तियों में सायरन बजते हुए सुनाई दिए। रॉकेट हमले के दौरान कई रॉकेट रामल्लाह के उत्तर में फिलिस्तीनी शहरों के आसपास गिरे।

इसके अतिरिक्त, एक रॉकेट मध्य इजरायली शहर ताइबे में गिरा, जहाँ कुछ अरबी निवासियों को ऑनलाइन वायरल हुए फुटेज में इस स्ट्राइक पर जश्न मनाते देखा गया।

इजरायल के साथ लड़ाई में सैकड़ों फिलिस्तीनियों की मौत

इजरायल सुरक्षा बलों के अनुसार, गाजा में फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने सोमवार (10 मई) को लड़ाई शुरू होने के बाद से इजरायल की ओर 2,300 से अधिक रॉकेट दागे हैं।

हमास के इन रॉकेट हमलों में एक छोटे बच्चे सहित दस इजरायली मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। गाजा में, हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को लड़ाई से मरने वालों की संख्या बढ़कर 139 हो गई, जिसमें दर्जनों बच्चे शामिल थे, जिसमें 1,000 से अधिक घायल हुए थे।

हमास और इस्लामिक जिहाद आतंकवादी समूहों ने अपने पक्ष के 20 लोगों की मौत की पुष्टि की है, हालांकि इजरायल का कहना है कि मृतकों की संख्या बहुत अधिक है और मारे गए दर्जनों लोग आतंकवादी थे। इसके अलावा, आईडीएफ का यह भी कहना है कि इनमें से कुछ मौतें इजरायल पर दागे गए उन रॉकेटों के कारण हुईं, जो अपने लक्ष्य से पहले ही गाजा पट्टी में गिर गए।

आदि शंकराचार्य और ‘शंकर दिग्विजय यात्रा’: 4 दिशा-4 मठ, एक भारत-सशक्त भारत का संकल्प

भारत भूमि में सनातन धर्म क्षीण होता जा रहा था। हिन्दू धर्म से विखंडित हुए पंथ, सनातन धर्म को ही चुनौती देने लगे थे। ऐसे में सनातन धर्म को पुनर्स्थापित करने का बीड़ा उठाया आदि शंकराचार्य ने। उन्होंने भारत भूमि की यात्रा प्रारंभ की जिसे ‘शंकर दिग्विजय यात्रा’ कहा जाता है।

यह कोई युद्ध यात्रा नहीं थी। अपितु इसे ज्ञान यात्रा कहना उचित होगा, क्योंकि आदि शंकराचार्य ने एक रणनीति बनाई थी जिसके तहत वह भारत के विभिन्न धर्म केंद्रों की यात्रा करते और वहाँ उपस्थित धर्म गुरुओं को तर्क और शास्त्रार्थ की चुनौती देते। हारने वाला व्यक्ति जीतने वाले का शिष्यत्व स्वीकार करता। यह आदि शंकराचार्य का चमत्कार ही था कि पूरे भारतवर्ष में उन्हें कोई भी नहीं हरा पाया।

आदि शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा (फोटो साभार : कामकोटि)

तत्कालीन बौद्ध और जैन पंथ के कई विद्वान जो हिन्दू धर्म छोड़कर गए थे, आदि शंकराचार्य से प्रभावित होकर उनके ज्ञान चक्षु खुल गए। ये सभी अपने धर्म की ओर वापस आने लगे। कितने ही धनाढ्य, व्यापारी, सैनिक, छात्र, धर्मगुरु, प्रतिनिधि और यहाँ तक कि अपराधियों ने भी आदि शंकराचार्य से प्रभावित होकर विशुद्ध सनातन धर्म का पालन करना सहर्ष स्वीकार किया। इसी क्रम में आदि शंकराचार्य पहुँचे कश्मीर, जहाँ था हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थ, शारदा पीठ, जो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में है।   

अखंड भारतवर्ष के महा शक्ति पीठों में से एक है, शारदा पीठ। वर्तमान में माँ शारदा का यह पवित्रतम स्थान पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से अधिकार किए गए कश्मीर के भूभाग में स्थित है। कश्मीरी हिन्दुओं, विशेषकर कश्मीरी पंडितों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीन मंदिरों में से एक है शारदा पीठ, जहाँ माता सरस्वती की पूजा होती है। दो अन्य तीर्थ स्थल हैं, अनंतनाग में स्थित मार्तण्ड सूर्य मंदिर एवं अमरनाथ बाबा।

POK में स्थित हिंदुओं का पवित्र तीर्थ शारदा पीठ (फोटो : Dailyo.in)

जब भगवान शंकर कुपित होकर माता सती की मृत देह को लेकर भयानक तांडव करने लगे तब श्री विष्णु ने उन्हें शांत करने के लिए सुदर्शन चक्र का उपयोग करके माता सती की मृत देह के कई भाग कर दिए। ये भाग पृथ्वी पर जहाँ भी गिरे वहाँ शक्ति पीठों की स्थापना हुई। उनमें से भी कुछ स्थान अत्यधिक महत्त्व के हैं जिन्हे महा शक्ति पीठ कहा जाता है। शारदा पीठ उनमें से एक है। यहाँ माता सती का दाहिना हाथ गिरा था। इतिहासकारों के अनुसार वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना 5000 वर्षों पहले हुई है। शारदा पीठ विश्व का सबसे पुराना और महान मंदिर विश्वविद्यालय था। ज्ञान का यह केंद्र विश्व भर में अनूठा था और महान ऋषि-मनीषी भी अपने ज्ञान को सम्पूर्ण बनाने के लिए यहाँ आते थे।

आदि शंकराचार्य के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘शंकर दिग्विजय’ में उनके कश्मीर प्रवास और शारदा पीठ की उनकी यात्रा का वर्णन है। कहा जाता है कि शारदा पीठ के चार द्वारों में से तीन द्वार तभी खुले थे, जब तीन दिशाओं के सर्वज्ञानी शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त कर उन द्वारों तक पहुँचे। दक्षिण द्वार अभी भी बंद था क्योंकि कश्मीर के दक्षिण से आने वाला कोई भी शास्त्रार्थ में इतना पारंगत नहीं था। किन्तु तत्कालीन भारतवर्ष ने एक ऐसा संन्यासी देखा था, जिसने मात्र 8 वर्षों की उम्र में ही सनातन धर्म के सभी ज्ञात शास्त्रों को पढ़कर उन्हें समझ लिया था।

आदि शंकराचार्य जब शारदा पीठ पहुँचे तब उनके साथ शास्त्रार्थ करने के लिए विभिन्न दर्शनों में पारंगत विद्वान उपस्थित हुए। अलग-अलग पंथ के कई गुरु, शोधकर्ता, शिक्षक और लेखक पहुँचे लेकिन आदि शंकराचार्य ने सभी को जीत लिया। अंत में जब आदि शंकराचार्य दक्षिण द्वार खोलने गए तब एक मधुर आवाज ने उनसे रुकने को कहा। माता शारदा ने स्वयं आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ की इच्छा जताई। शास्त्रार्थ प्रारंभ हुआ और बहुत समय तक चला। अंत में माता शारदा, आदि शंकराचार्य के तर्कों से सहमत हुईं और शारदा पीठ का दक्षिण द्वार खुल गया। उनकी विद्वता को देखते हुए ही उन्हें सर्वज्ञपीठम की उपाधि मिली थी। 

आदि शंकराचार्य को कश्मीर में ही शिव के साथ माता शक्ति के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ और शक्ति के अस्तित्व का अद्भुत ज्ञान हुआ। आदि शंकर ने जहाँ माता शक्ति के वर्णन में महान ग्रन्थ ‘सौंदर्य लहरी’ की रचना की वह स्थान शंकराचार्य मंदिर और जिस पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है उसे शंकराचार्य पर्वत कहा गया। हालाँकि पहले यह मंदिर गोपाद्रि मंदिर कहा जाता था जहाँ एक शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर को भी कुतबुद्दीन के बेटे सिकंदर ने नष्ट कर दिया था। बाद में स्वतंत्रता के पश्चात मंदिर में शिवलिंग के पीछे आदि शंकराचार्य की एक प्रतिमा स्थापित की गई।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर (फोटो : जागरण)

कश्मीर के अन्य मंदिरों की तरह शारदा पीठ भी तोड़ दिया गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों के लिए कुछ भी महान नहीं था। उनके लिए मंदिर की प्राचीनता और महानता मायने नहीं रखती थी। उनके लिए इतना ही पर्याप्त था कि मंदिर हिन्दुओं के हैं। आज भी शारदा पीठ अपनी प्राचीनतम पहचान पुनः प्राप्त करने की प्रतीक्षा में है।

भारत राष्ट्र के एकीकरण का जो कार्य आदि शंकराचार्य ने किया था वह साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है। केरल के कलाड़ी में नंबूदरी ब्राह्मण शिवगुरु और आर्यम्बा के घर पैदा हुए आदि शंकराचार्य अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। संतानहीन रहने के कारण शिवगुरु और आर्यम्बा ने तमाम अनुष्ठान किए, तब उन्हें स्वप्न में एक दैवीय ब्राह्मण ने दो विकल्प दिए। पहला विकल्प था दीर्घायु लेकिन मूर्ख पुत्र और दूसरा विकल्प था अल्पायु किन्तु अत्यंत बुद्धिमान संतान। सनातन धर्म में गहरी आस्था रखने वाले माता-पिता समझ गए कि उनकी संतान उनकी नहीं अपितु धर्म और समाज की सेवा के लिए जन्म लेने वाला है, तो उन्होंने अल्पायु पुत्र ही चुना। 32 वर्ष की आयु में आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के उत्थान के लिए जो कार्य किया वह यही सिद्ध करता है कि उनका जन्म दैवीय संयोग से ही हुआ था।

आदि शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा का उद्देश्य ही था, सनातन धर्म की स्थापना करना। उन्होंने न केवल दूसरे पंथों के विद्वानों को अपना शिष्य बनाया अपितु सनातन धर्म में ही जो विभिन्न परंपराओं के नाम पर बँटे हुए थे उन्हें भी संगठित किया। भारत की चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना का उनका उद्देश्य ही था भारतवर्ष का एकीकरण।