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जेल के अंदर मुख्तार अंसारी के 2 गुर्गों मेराज और मुकीम की हत्या, UP पुलिस ने एनकाउंटर में मारा गैंगस्टर अंशू को भी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला जेल में कैदियों बीच गैंगवार की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फायरिंग में जेल के अंदर दो बदमाशों की हत्या कर दी गई। मारा गया एक बदमाश, बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का करीबी था। हत्या करने वाले गैंगस्टर को भी पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया।

जानकारी के मुताबिक, हाल ही में सुल्तानपुर से चित्रकूट शिफ्ट किए गए पूर्वांचल के नामी गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने ही चित्रकूट जेल में फायरिंग कर बाहुबली मुख्तार अंसारी के दो गुर्गों मेराज और मुकीम काला की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं पुलिस ने जवाबी एनकाउंटर कर उसे भी ढेर कर दिया।

इस मामले में चित्रकूट प्रशासन का कहना है कि मुकीम काला और मेराज की हत्या करने के बाद आरोपित अंशु ने पाँच कैदियों को भी बंधक बना लिया था। इसके बाद पुलिस और अंशु के बीच हुई गोलाबारी में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मेराज औऱ मुन्ना बजरंगी दोनों ही मुख्तार गैंग का एक्टिव मेंबर है। शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण में फर्जीवाड़ा करने के मामले में 3 सितंबर 2020 में मेराज के खिला केस दर्ज किया गया। उसने वाराणसी में सरेंडर किया था।

वहीं मुकीम काला गैंग ने साल 2015 में सहारनपुर स्थित तनिष्क के ज्वेलरी शोरूम में डकैती की थी। इसके अलावा उसने दो सगे भाइयों की हत्या और सहारनपुर में एक सिपाही की हत्या की थी। 20 अक्टूबर 2015 को एसटीएफ ने मुकीम काला और उसके शूटर साबिर जंधेड़ी को गिरफ्तार किया था।

हत्या करने के लिए जेल में अंशु ने करवाया था ट्रांसफर

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अंशु ने काला को मारने की सुपारी ली थी। इसीलिए उसने सेटिंग से अपना ट्रांसफर करवाया था। चित्रकूट जेल में इस गैंगवार के बाद एहतियातन उसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जेल के अंदर इतनी बड़ी घटना के बावजूद प्रशासन इस मामले में कुछ कहने से बच रहा है।

‘क्या प्रजातंत्र में वोट की सजा मौत है’: असम में बंगाल के गवर्नर को देख फूट-फूट रोए पीड़ित, पाँव से लिपट महिलाओं ने सुनाई पीड़ा

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भड़की हिंसा के पीड़ितों का हाल जानने के लिए राज्यपाल जगदीप धनखड़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर हैं। उन्होंने गुरुवार को कूच बिहार के हिंसा प्रभावित इलाकों का जायजा लिया था। शुक्रवार को (मई 14, 2021) वे पड़ोसी राज्य असम पहुँचे। हिंसा के बाद घर छोड़ने को मजबूर बंगाल के सैकड़ों नागरिकों ने असम के राहत शिविरों में शरण ले रखी है।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रणपगली में बने कैंप में पीड़ितों से मुलाकात की। जहाँ कई लोगों ने उन्हें अपना दर्द बताया। इस दौरान कई महिलाएँ इतनी भावुक हो गईं कि वे राज्यपाल के पाँव से लिपट फूट-फूट कर रोने लगीं। एक बुजुर्ग उनसे लिपट कर रोने लगीं। इसके बाद राज्यपाल कोकराझार के श्रीरामपुर कैंप में गए। दोनों ही जगह बंगाल से सटी हुई हैं।

पीड़तों से हुई इस मुलाकात के बाद राज्यपाल ने अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, “लोगों के घर किस तरह से बर्बाद हुए, व्यापारी संस्थानों का क्या हाल किया गया है। ये सब एक ही कारण से किया गया कि दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र में आपने इतनी बड़ी हिमाकत क्यों कर ली कि अपनी मर्जी से वोट दे रहे हो। क्या प्रजातंत्र में वोट देने की सजा मौत है।”

बता दें कि गुरुवार को राज्यपाल ने बंगाल में मायाभांगा, सीतलकूची, सिताई और दीनहाट का दौरा किया था। इस दौरान वह पीड़ितों से उनके परिजनों से मिले। हालाँकि, बीच में कई जगह उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ा। जैसे-सीतलकूची में जब वह पहुँचे तो उन्हें वहाँ काले झंडे दिखाए। इसके अलावा कूचबिहार जिले के दीनहाटा में भी वापस जाने के लिए नारेबाजी हुई। यहाँ तो दर्जन भर लोगों ने पोस्टर लेकर नारा दिया, “भाजपा के राज्यपाल वापस जाओ।”

जगदीप धनखड़ ने सारा नजारा देखकर कहा, “मैं हैरान हूँ कि, विधि का शासन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि ऐसा कुछ हो सकता है।” इसके बाद पुलिस ने सभी लोगों को मौके से भगाया। बाद में राज्यपाल ने हिंसा प्रभावित लोगों से मुलाकात करने के बाद कहा, “मैंने लोगों की आँखों में डर देखा है और थाने जाकर शिकायत करने से भी डर रहे हैं।”

उन्होंने पीड़ितों का हाल देख कहा,  “घर लूट लिए गए हैं, बेटी के ब्याह के लिए रखे गए गहने, श्राद्ध के लिए रखे बर्तन और अन्य चीजें भी लूट ली गई हैं।” उन्होंने रास्ते में जगह-जगह हुए विरोध को देख कहा, “मैं किसी भी परिस्थिति में बिना किसी रुकावट और विचलित हुए बिना अपने संवैधानिक कर्तव्य का निर्वहन करूँगा।”

उल्लेखनीय है कि बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की मुखिया ममता बनर्जी ने राज्यपाल के दौरों को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने राज्यपाल पर राजनैतिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया था। गवर्नर के कूच बिहार दौरे को लेकर भी उन्होंने कहा था कि यह नियमों का उल्लंघन है। राज्यपाल अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

उससे पहले 10 मई को धनखड़ ने कहा था कि राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हैं। राजनीतिक बदले की हिंसा, आगजनी, लूट की घटनाएँ डराने-धमकाने और जबरन वसूली तक पहुँच गई है। उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाने की जानकारी देते हुए कहा था कि इसमें राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही। उन्होंने कहा था, “अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत मैंने प्रभावित इलाकों का दौरा करने का फैसला किया है। इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक इंतजाम करने को कहे। लेकिन, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी।”

 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में दो मई को टीएमसी की जीत सुनिश्चित होते ही हिंसा भड़क उठी थी। विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया गया था। हिंसा का आरोप सत्ताधारी टीएमसी के गुंडों पर हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पिछले दिनों राजनीतिक हिंसा में अलग-अलग दलों के 16 लोगों की मौत की बात स्वीकार की थी।

गाजा पर गिराए 1000 बम, 160 विमानों ने 150 टारगेट पर दागे 450 मिसाइल: बोले नेतन्याहू- हमास को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

फलस्तीन के साथ चल रहे हवाई संघर्ष के बीच इजरायल अब जमीनी लड़ाई की भी तैयारी कर रहा है। सीमा पर हथियारबंद टुकड़ियों के साथ 9000 रिजर्व सैनिकों को तैनात किया गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हमास को इस बार बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास का युद्धविराम प्रस्ताव इजरायल पहले ही ठुकरा चुका है।

इससे पहले गुरुवार (14 मई 2021) की रात इजरायल ने रात भर गाजा पर हमले किए। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक रात भर में 1000 से ज्यादा बम गिराए गए। इजरायल के निशाने पर मुख्य रूप से हमास का टनल था। करीब 160 विमानों को इस ऑपरेशन में लगाया गया था। इजरायल डिफेंस फोर्स के हवाले से द टाइम्स ऑफ इजरायल ने बताया है कि 40 मिनट के इस हवाई ऑपरेशन के दौरान उत्तरी गाजा में करीब 150 टारगेट पर 450 मिसाइल गिराए गए। इस दौरान हमास के भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का अभी भी आकलन किया जा रहा है।

एक अनाम इजरायली सुरक्षा अधिकारी के हवाले से चैनल 12 ने कहा है कि इस दौरान हमास के सैकड़ों आतंकी मारे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि हमास की ओर से दागे गए ज्यादातर रॉकेट हमने हवा में ही नष्ट कर दिए हैं। उसके रणनैतिक केंद्र टनल को तबाह कर दिया। आईडीएफ ने ट्विटर पर हमास के कुछ आतंकियों की तस्वीरें भी जारी की है। इजरायल पर रॉकेट हमलों के लिए इन्हें जिम्मेदार बताते हुए उन्हें मार गिराने का दावा किया है। कहा है कि अब ये कभी भी आतंकी हमले की साजिश नहीं रच पाएँगे।

हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाजा में अब तक 119 मौत की पुष्टि की है। इनमें से 27 नाबालिग हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से गाजा में 600 लोगों के जख्मी होने की बात भी कही गई है। आईडीएफ के अनुसार सोमवार से अब तक गाजा से आतंकी 2000 से ज्यादा रॉकेट इजरायल पर दाग चुके हैं। अब तक 7 इजरायली नागरिकों की मौत की भी पुष्टि हो चुकी है।

इजरायल में भारत की सौम्या संतोष की भी मौत हो चुकी है। मूल रूप से केरल के इडुकी की रहने वाली 31 साल की सौम्या संतोष की मौत इजरायल के अश्कलोन शहर में हमास के रॉकेट हमले की चपेट में आने से हुई थी। जब हमला हुआ उस वक्त वह केरल में रह रहे अपने पति संतोष से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। इजरायल ने मुआवजा के साथ-साथ उसके परिवार की देखभाल करने की भी बात कही है।

किसान सम्मान निधि की 8वीं किस्त जारी: 9.5 करोड़ किसानों के अकाउंट में ₹20,000 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (मई 14, 2021) किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि देश के 9.5 करोड़ किसानों के खातों में ट्रांस्फर की। ये पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 8वीं किस्त है।

तस्वीर साभार: ANI

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि किसान सम्मान निधि से 11.80 करोड़ किसान जुड़े हैं। इससे पहले कृषि मंत्री ने अपने ट्विटर पर जानकारी दी थी कि 14 मई यानी आज पीएम किसान योजना के तहत देश के 9.5 करोड़ किसानों के खातों में 8वीं किस्त के तौर पर 19,000 करोड़ रुपए की राशि DBT के माध्यम से हस्तांतरित करेंगे।

पीएम ने 8वीं किस्त जारी करते हुए इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए योजना का लाभ पाने वाले लाभार्थियों से बात की। उन्होंने देश के किसानों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उन्नाव के अरविंद को नौजवान किसानों को ट्रेनिंग देने के लिए सराहा। साथ ही रवि को जिंजर पाउडर, हल्दी, दालचीनी जैसे मसालों के उत्पादन करने पर तारीफ की। आंध्र प्रदेश की एन वेणुरामा की भी 170 आदिवासियों को गाइड करने के लिए प्रशंसा की। इसके अलावा कई अन्य प्रदेशों के किसानों को भी पीएम ने तारीफ कर प्रोत्साहित किया।

पीएम ने बताया कि किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं। सरकार लगातार किसानों की परेशानी का समाधान करने में लगी है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भी किसान देश को अपनी सेवा देने में लगे हैं। उन्होंने कहा नई कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से किसानों ने नए आयाम छुए हैं।

बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सालाना किसानों को 6000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। इस योजना की शुरुआत पीएम ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से 24 फरवरी 2019 में की थी। सरकार का उद्देश्य आने वाले सालों में किसानों की आय दुगना करने का है। इससे पहले किसान सम्मान निधि योजना की 7वीं किस्त पिछले साल दिसंबर में जारी हुई थी। अब तक इस स्कीम के तहत 10.60 करोड़ किसानों को एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जारी की जा चुकी है।

शार्ली हेब्दो के कार्टून ने उड़ाया हिंदुओं का मजाक: लिबरल गैंग को मिला मौका, कल तक मुस्लिम तुष्टिकरण में थे खिलाफ

देश में कोविड-19 महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन संकट के लिए भारतीयों, विशेष रूप से हिंदुओं का मजाक उड़ाने वाला एक कार्टून गुरुवार (13 मई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। वामपंथी ट्रोल्स द्वारा ट्विटर पर खूब शेयर किए गए इस कार्टून में भारतीयों को जमीन पर लेटे, ऑक्सीजन के लिए हाँफते हुए दिखाया गया।

इस कार्टून को फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली हेब्दो द्वारा प्रकाशित किया गया था, जिसमें हिंदू देवताओं पर कटाक्ष करते हुए पूछा गया है वे कोविड की दूसरी लहर के दौरान अपने लोगों की मदद क्यों नहीं कर सके।

चार्ली हेब्दो कार्टून के साथ फ्रेंच में एक लाइन भी थी जिसमें लिखा था, ”भारत में 33 करोड़ देवता और एक भी ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम नहीं।”

“33 करोड़ देवताओं” का संदर्भ और कुछ नहीं बल्कि देश के स्वास्थ्य संकट का सांप्रदायिकरण करने और कई देवताओं की पूजा करने वाले हिंदुओं पर उंगली उठाने का प्रयास है।

हमेशा की तरह ही इस बार भी वामपंथी ‘बुद्धिजीवियों’ और कुछ हिंदूफोबिक सोशल मीडिया यूजर्स ने शार्ली हेब्दो कार्टून को ट्विटर पर जमकर शेयर किया और देश में चल रहे स्वास्थ्य संकट के बीच हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका का जय-जयकार किया।

कांग्रेस नेता बृजेश कलप्पा भी उन लोगों में से एक थे, जिन्होंने हिंदुओं का मजाक उड़ाने वाले शार्ली हेब्दो कार्टून को शेयर किया। बीजेपी पर हमला करते हुए, कलप्पा ने पूछा कि, ”भगवा पार्टी क्या करेगी, जो उनके अनुसार, शार्ली हेब्दो द्वारा इस्लाम को खराब ढंग से दिखाने को लेकर प्रकाशित कार्टूनों की श्रृंखला का जश्न मना रही थी।”

एक और वामपंथी ट्रोल सलिल त्रिपाठी, जोकि गलत जानकारियाँ फैलाने के लिए कुख्यात है, ने यह पूछने के लिए एक घृणास्पद ट्वीट किया कि क्या हिंदुत्व के फ्री स्पीच चैंपियन, जो अतीत में चार्ली हेब्दो के कार्टूनों पर खुश जताते थे, क्या अब स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा करेंगे।

कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ता सुमित कश्यप ने भी शार्ली एब्दो कार्टून का यह कहते हुए जश्न मनाया कि व्यंग्य पत्रिका इस तरह के कार्टून बनाकर मानवता की बड़ी सेवा कर रही है।

जब लेफ्ट-लिबरल्स और हिंदू विरोधी शार्ली हेब्दो के कार्टून की जय-जयकार कर रहे थे, तो कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इन ‘लेफ्ट-लिबरल्स’ के पाखंड की ओर इशारा किया कि यही लोग कुछ महीने पहले उसी फ्रांसीसी पत्रिका पर उस कार्टून को प्रकाशित करने के लिए हमला कर रहे थे, जो कथित तौर पर मुसलमानों के लिए नफरत से भरी थी।

चूँकि इस कार्टून में भारत सरकार, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ आलोचनात्मक रुख था, इसी बात से लेफ्ट लिबरल इसकी ओर आकर्षित हुए और फिर इसे सोशल मीडिया में शेयर करने लगे।

मजाक उड़ाने और ट्रोलिंग में, तथाकथित ‘वाम-उदारवादी’ एक खास बात भूल गए कि शार्ली हेब्दो आम तौर पर सभी धर्मों को लक्ष्य बनाकर धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं का मजाक उड़ाते हुए कार्टून प्रकाशित करता है। लेकिन जब उन्होंने इस्लामिक पैगंबर का मजाक उड़ाते हुए कार्टून प्रकाशित किए, तो उनके ऑफिस पर आतंकवादी हमला हुआ और उनके 17 कर्मचारियों की हत्या कर दी गई।

अब भी, कई इस्लामी राष्ट्र और धार्मिक समूह फ्रांस का बहिष्कार करने का अह्वान कर रहे हैं क्योंकि उनकी सरकार ने फ्री स्पीच का समर्थन करते हुए पत्रिका को दंडित नहीं किया था।

ईद की नमाज: अमृतसर की जामा मस्जिद, लुधियाना में सड़क पर… सैंकड़ों की भीड़, मास्क और कोविड प्रोटोकॉल सब गायब

भारत में कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप के कारण इस बार भी ईद को लेकर प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए। कई जगह इनका सख्ती से पालन हुआ तो कहीं पर सुरक्षाबलों को तैनात करके भीड़ को आने से रोका गया। इस दौरान पंजाब के अमृतसर से हैरान करने वाली तस्वीरें आईं। यहाँ भारी भीड़ में नमाजियों को एकत्रित हुए देखा जा सकता है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि भारी भीड़ में बिना किसी कोविड नियम का पालन किए नमाज पढ़ी जा रही है। ये तस्वीर अमृतसर के जामा मस्जिद खैरुद्दीन हॉल बाजार की है। यहाँ ईद-उल-फितर के अवसर पर ये लोग इकट्ठा हुए।

ऐसी ही एक तस्वीर लुधियाना के जामा मस्जिद के बाहर भी देखने को मिली। हालाँकि, इस जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उतनी तादाद में लोग इकट्ठा नहीं थे जितने अमृतसर में नजर आए। लेकिन वीडियो में देखें तो यहाँ भी कई नमाजियों के चेहरे से मास्क गायब है जबकि खुली सड़क पर वह अपनी नमाज पढ़ रहे हैं। वीडियो में दो छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं। इनके मुँह पर भी मास्क नहीं है। 

एक तस्वीर AIMIM नेता सैयद सोहेल कादरी की भी सामने आई है। सैयद ने अपने ट्वीट में लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी साहब के नेतृत्व में पनजेशा के इरानीगल्ली मस्जिद-ए-सरदार यार जंग पर ईद उल फितर की नमाज अदा करने के लिए सहयोग की बात करते हुए।” तस्वीरों में सैयद पुलिस से बात करते दिख रहे हैं। कुछ अन्य लोग भी उनके आसपास सफेद कुर्ते टोपी में दिख रहे हैं।

ईद से पहले भी उड़ी कोविड नियमों की धज्जियाँ

गौरतलब है कि कोविड महामारी के कारण भीड़ को रोकने के लिए जारी की गई गाइडलाइन्स का उल्लंघन पिछले कई दिनों से होता रहा है। अभी कल ईद की खरीददारी पर निकले लोगों ने बाजार पहुँचकर खूब नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। न सोशल डिस्टेंशिंग का पालन हुआ, न लोगों के चेहरे पर मास्क लगे दिखे।

हैदराबाद के चारमीनार इलाके में लॉकडाउन से पहले ईद की खरीदारी करने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ गई। दो गज की दूरी तो छोड़िए, दो कदम की दूरी भी बमुश्किल दिखी।

इसी तरह मुंबई के भिंडी बाजार में ईद की शॉपिंग करने हजारों लोग पहुँचे। यूपी के फिरोजाबाद में भी लोग घरों से निकल कर खरीदारी करने बाजारों में गए। दिल्ली के सीलमपुर में भी लोगों की भीड़ उमड़ी दिखी।

Cyclone Tauktae: चक्रवाती तूफान को लेकर केरल, लक्षद्वीप में रेड अलर्ट, जानिए इस तूफान के बारे में सब कुछ

कोरोना की मार झेल रहे देश के लिए एक और परेशान करने वाली खबर चक्रवाती तूफान आने की संभावना की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चक्रवर्ती तूफान Tauktae को देखते हुए केरल के तीन जिलों- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और पथनामथिट्टा के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 36 घंटों में लक्षद्वीप और अरब सागर के ऊपर बने चक्रवाती विक्षोभ के तीव्र होकर 18 मई तक एक ‘उच्च तीव्रता’ वाले चक्रवात के रूप गुजरात तट पर पहुंचने की संभावना है।

Cyclone Tauktae के लिए केरल, लक्षद्वीप में जारी हुआ अलर्ट

वहीं मौसम विभाग ने चक्रवर्ती तूफान Tauktae को देखते हुए केरल के तीन जिलों- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और पथनामथिट्टा के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में शुक्रवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और पथनामथिट्टा जिलों में 20 सेमी तक की भारी वर्षा का रेड अलट जारी किया है। लक्षद्वीप में भी गुरुवार और शुक्रवार को भारी बारिश के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

आईएमडी ने शनिवार के लिए केरल के पांच अन्य जिलों के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है, जिनमें मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड, शामिल हैं। क्षेत्रीय मौसम विभाग अधिकारी ने कहा कि लक्षद्वीप के पास स्थित निम्न दबाव उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और रविवार तक पर्याप्त गति प्राप्त कर लेगा।

इस चेतावनी में अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की के लिए 11-20 सेमी की बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट भी शामिल है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनामथिट्टा, अलाप्पुझा और एर्नाकुलम गुरुवार को 11-20 सेंटीमीटर के ऑरेंज अलर्ट पर थे। केरल में पोझियूर से कासरगोड के तट के साथ 14 मई को शाम 5.30 बजे से 16 मई शाम 17:30 बजे तक 3.0-3.8 मीटर ऊँची लहरें उठने का पूर्वानुमान है।

दक्षिण केरल के कई इलाकों में गुरुवार सुबह से ही भारी बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं और कई तटीय इलाकों में उच्च ज्वार की सूचना है।

Cyclone Tauktae से बचाव के लिए क्या हैं तैयारियाँ

आईएमडी की घोषणा के बाद केरल ने कंट्रोल रूम खोले दिए हैं और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा है। रेड अलर्ट का मतलब है 24 घंटे में 24 मिमी से अधिक बारिश के साथ भारी वर्षा।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक ट्वीट में अधिकारियों और लोगों को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा।

तटीय क्षेत्रों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समुद्र के स्तर में वृद्धि और घरों और खेतों में पानी भरने की चेतावनी दी गई है। केरल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी लोगों को घर के अंदर रहने और बिजली, गरज, तेज हवाओं और भारी तबाही से बचाने की सलाह दी है। राजस्व अधिकारियों ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में कई निचले इलाके लगातार बारिश के कारण डूब गए हैं।

मछुआरों को समुद्र के पानी से दूर रहने की चेतावनी दी गई है और गहरे समुद्र में रहने वालों को तट पर लौटने के लिए संदेश भेजे गए हैं।

कब आएगा Cyclone Tauktae

इसके 14 मई की सुबह तक लक्षद्वीप क्षेत्र में पहुँचने और 15 मई की सुबह तक उसी क्षेत्र में एक दबाव में केंद्रित होने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि यह अगले 24 घंटों के दौरान एक चक्रवाती तूफान में परिवर्तित हो सकता है। इसके आगे और तीव्र होने और उत्तर-पश्चिमोत्तर गुजरात और पाकिस्तान के तटों के आसपास की ओर बढ़ने की संभावना है। 18 मई की शाम के आसपास इसके गुजरात तट के करीब पहुंचने की संभावना है। इससे दक्षिण पूर्व अरब सागर और इससे सटे लक्षद्वीप, मालदीव के क्षेत्र और भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में समुद्र की स्थिति बहुत खराब होगी।

मौसम विभाग ने शुक्रवार को कहा कि अगले 36 घंटों में लक्षद्वीप और अरब सागर के ऊपर एक चक्रवाती विक्षोभ बनेगा, जिससे देश के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश होगी। इससे 18 मई तक एक ‘उच्च तीव्रता’ वाले चक्रवात के गुजरात तट पर पहुंचने की संभावना है।

आईएमडी ने एक चेतावनी में, गुजरात में 17 मई से तेज बारिश की भविष्यवाणी की है, जिसकी तीव्रता बाद के दिनों में बढ़ने की संभावना है। राज्य में 18 और 19 मई को सौराष्ट्र और कच्छ जैसे कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होगी।

चक्रवात की उपस्थिति के कारण, गुजरात में अगले 5-6 दिनों में तेज बारिश होने और 50 किमी प्रति घंटे से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएँ चलने की संभावना है।

गाजा सीमा पर अब इजरायली टैंक, हथियारबंद टुकड़ी, 7000 रिजर्व सैनिक: एयर स्ट्राइक के बाद ग्राउंड पर एक्शन

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के युद्ध विराम की माँग को ठुकराने के बाद इजरायल अब ग्राउंड लेवल पर भी एक्शन में आ रहा है। खबर है कि इजरायल की ओर से जहाँ अब तक केवल एयर स्ट्राइक करके गाजा को जवाब दिया जा रहा था, वहीं अब जमीनी कार्रवाई के लिए सेना ने मोर्चा संभाला है। 

कथित तौर पर गाजा की सीमा के पास सेना की 2 टुकड़ियों के साथ एक हथियारबंद टुकड़ी को तैनात किया गया है। इसके अलावा कम से कम 7000 रिजर्व सैनिकों को भी बुलाया गया है। सीमा के आस-पास रहने वाले लोगों को बंकर में जाने के निर्देश दे दिए गए हैं, क्योंकि हो सकता है कि हमास की ओर से भी जवाबी कार्रवाई हो।

IDF की कार्रवाई

IDF ने अपने ट्वीट में गाजा पर की गई अब तक की कार्रवाई को साझा किया है। साथ ही ये भी बताया है कि अगर इजरायल में मरने वालों की संख्या कम है तो इसका मतलब ये नहीं है कि गाजा से हमले नहीं हो रहे। बल्कि इसका ये अर्थ है कि IDF अपने लोगों को प्रोटेक्ट कर रहा है।

IDF के मुताबिक, गाजा से इजरायल की तरफ अब तक 1750 रॉकेट छोड़े गए। जिनसे 7 इजरायली नागरिकों की मौत हुई है और 523 घायल हुए हैं। हमास और इस्लामी जिहादियों ने स्कूल, अस्पातल, बस और तमाम घरों को निशाना बनाया। इसके बदले IDF ने उनकी उस बिल्डिंग को तबाह किया, जहाँ से वह आतंकी दफ्तर चलाते थे।

सीमा में अभी नहीं घुसी इजरायली सेना

इससे पहले ग्राउंड पर सेना भेजने को लेकर खबर आई थी कि इजरायल डिफेंस फोर्स चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अवीव कोहावी के पास ग्राउंड अटैक के लिए ड्राफ्ट तैयार कर भेजा गया है। जनरल से मँजूरी मिलने पर इसे नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और उसके बाद एक्शन होगा।

इसके बाद ग्राउंड लेवल पर इजरायली सेना के एक्शन पर आधिकारिक तौर पर अभी अधिक जानकारी नहीं आई। लेकिन सैन्य मामलों के संवाददाताओं जिन्हें सशस्त्र बलों द्वारा ब्रीफ किया गया, उन्होंने साफ किया कि अभी गाजा में जमीन पर आक्रमण नहीं हुआ। इजरायली सेना अपनी ही सीमा में रहकर तोपों से फायरिंग कर रही है।

वहीं गाजा सीमा के पास रहने वालों ने भी इस बात को नकारा कि इजरायली सेना के ग्राउंड हमले को लेकर उन्हें कोई साइन दिखा। लेकिन तोप से अटैक और एयर स्ट्राइक जरूर की गई।

भारी कीमत वसूलेंगे गाजा से: इजरायली PM

गुरुवार को IDF के ट्वीट के बाद ये अटकलें लगनी शुरू हुई थी कि IDF हवाई और जमीन से इस समय गाजा पट्टी पर हमला बोल रही है।  हालाँकि बाद में IDF ने इस बात का स्पष्टीकरण दिया कि अभी वह गाजा पट्टी में नहीं घुसे हैं जैसा कि पहले बयान से लग रहा था।

इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने बयान में कहा, “मैंने कहा था कि हम हमास से बहुत भारी कीमत वसूलेंगे। हम कर रहे हैं और भारी मात्रा में करते रहेंगे। अंतिम शब्द नहीं कहा गया है। जब तक जरूरी होगा, हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा।”

इधर, हमास इस्लामी गुट के प्रवक्ता अबू उमेदा ने साफ किया है कि उनका समूह जमीन पर आक्रमण से नहीं डरता। उनके लिए यह मौका उन्हें पकड़ने का होगा, जिन्होंने उनके सिपाहियों को मारा।

बता दें कि संघर्ष शुरू ​होने के बाद से इजरायल पर 1700 से ज्यादा रॉकेट दागे गए हैं। जवाब में गाजा में करीब 700 से ज्यादा ठिकानों को इजरायली सेना अब तक निशाना बना चुकी है। गाज़ा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, चार दिन की लड़ाई में अब तक कम-से-कम 103 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 27 बच्चे भी शामिल हैं।

दूसरी ओर अरब उपद्रवियों ने भी इजरायल के भीतर माहौल बिगाड़ना शुरू कर दिया है। हालातों के मद्देनजर इजरायल पुलिस ने कम से कम 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। गाजा पर सख्त रुख अपनाने का आह्वान कर चुके रक्षा मंत्री ने देश में हो रही झड़पों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने फलीस्तीनियों के लिए मई 12, 202 शाम को बयान जारी करके बताया कि वे ऐसे हमले तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक दुश्मन पूरी तरह शांत नहीं होते।

हमास की युद्ध विराम की अपील को इजरायल ने ठुकराया

उल्लेखनीय है कि हमास के वरिष्ठ नेता मौसा अबू मरजूक ने गुट के 9 कमांडरों के मरने के बाद रूसी विदेश मंत्री (मध्य पूर्व के मुद्दों को देखने वाले) मिखाइल बोगदानोव से फोन पर युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था। लेकिन युद्ध विराम की अपील को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ठुकरा दिया है। इजरायल की सरकार ने कहा है कि आने वाले 6 महीने या साल भर में वे कुछ ऐसा करेंगे जो उन्होंने अब तक नहीं किया। 

हमास पर किसी तरह की दया दिखाने की बात नामंजूर करने वाले इजरायल ने बुधवार को बमबारी में गाजा की कई जगहों को निशाना बनाया था। इस क्रम में कई बिल्डिंग तबाह हुई थीं और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को भी धमाके में उड़ा दिया गया था।  इसमें से एक 14 मंजिला इमारत थी जिसमें IDF के अनुसार हमास का मिलिट्रि इंटेलिजेंस का दफ्तर था।

बंगाल: ‘TMC गुंडों’ की पिटाई से BJP समर्थक देबव्रत मैती की मौत, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘इस मूर्खतापूर्ण हिंसा से सन्न हूँ’

बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ताधारी टीएमसी द्वारा जारी राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। 3 मई को टीएमसी के गुंडों की पिटाई में घायल गुए नंदीग्राम के बीजेपी समर्थक देबव्रत मैती की गुरुवार (13 मई) को मौत हो गई। वह टीएमसी के ‘गुंडों’ की पिटाई की वजह से गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती थे। ये जानकारी नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने वाले बीजेपी के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने दी।

शुभेंदु ने ट्वीट किया, ”मेरे निर्वाचन क्षेत्र #नंदीग्राम विधानसभा से आज सदमा पहुँचाने वाला समाचार। #छिलाग्राम गाँव के श्री देबव्रत मैती ने आज दम तोड़ दिया। परिणाम आने के ठीक 1 दिन बाद 3 मई को तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। पश्चिम बंगाल असली परिवर्तन चाहता था, यह नहीं।”

शुभेंदु ने कहा, मूर्खतापूर्ण हिंसा से सन्न हूँ

देबव्रत मैती की मौत के बाद शुभेंदु ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि मैं दुख की इस घड़ी में मैती के परिवार वालों के साथ खड़ा हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि पश्चिम बंगाल के महान लोग भी उनके साथ खड़े हैं।

उन्होंने पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के बाद ट्वीट किया, ”आज रात को मैंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दिवंगत आत्मा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। आत्मा को शाश्वत शांति मिले। मैं दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा हूँ, न केवल उनके विधायक बल्कि इस पवित्र धरती के बेटे के रूप में भी। मुझे पूरा भरोसा है कि पश्चिम बंगाल के महान लोग भी उनके साथ खड़े होंगे।”

शुभेंदु ने लिखा, ”श्री देवव्रत मैती मेरे निर्वाचन क्षेत्र #नंदीग्राम में मतदाता थे। थे। यकीन नहीं हो रहा है कि इस शब्द का उपयोग कर रहा हूँ। क्या यह मताधिकार का प्रयोग करने का परिणाम है? वोट देने के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने के अपराध के लिए उनकी हत्या कर दी गई। इस मूर्खतापूर्ण हिंसा से सन्न हूँ।”

बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का दौर जारी

बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा में तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा बीजेपी के कई कार्यकर्ता की हत्या की जा चुकी है। नतीजे आने के कुछ ही घंटों बाद टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की बेरहमी से हत्या कर दी थी।

इसके बाद जगतदल में बीजेपी कार्यकर्ता शोभा रानी मंडल की हत्या कर दी गई थी। शोभा रानी अपने बेटे को तृणमूल कार्यकर्ताओं से बचाने की कोशिश कर रही थीं इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।

टीएमसी की राजनीतिक हिंसा का आलम ये है कि हजारों हिंदू अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं, जबकि सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ताओं को असम में शरण लेनी पड़ी।

कोरोना, पर्यावरण और प्रदूषण: सरकार के भरोसे नहीं… हमने जो बोया है, उसका समाधान हमें ही है खोजना

भारत में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। देश की स्वास्थ्य सेवाएँ कम संसाधनों में भी इस महामारी से लड़ रही हैं। इसी बीच तीसरी लहर का अनुमान भी लगाया जा रहा है। तड़पते कोरोना मरीज़ों के लिए अस्पतालों में बेडों पर जगह पाने के लिए हाथ जोड़ते नागरिकों की फ़ोटो और वीडियो से सोशल मीडिया भरा पड़ा है।

सोशल मीडिया मंचों पर अपने प्रियजनों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, प्लाज़्मा दान की गुहार लगाते रिश्तेदारों को देख दिल पसीज़ उठता है। श्मशानों में अपने प्रियजनों के चेहरे आखिरी बार देखना भी नसीब नहीं हो रहा है।

कोरोना वायरस के इंसानों में प्रवेश करने का मुख्य कारण किसी जीव से इंसान का सीधा संपर्क बताया जा रहा है। मनुष्य ने पर्यावरण से बहुत छेड़छाड़ की है और पर्यावरण प्रदूषण अब भी पुरानी स्थिति में है।

हमें कोरोना से जंग में हारने का सिक्के का एक पहलू तो हर जगह बताया जा रहा है, सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में नाकामी को दिखाया जा रहा है पर सिक्के का दूसरा पहलू जिसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं, वह कहीं नहीं बताया जा रहा है।

प्रकृति से छेड़छाड़ कर उपजी हर बीमारी का समाधान हमें प्रकृति से ही मिल जाता था। अर्जुन, हरसिंगार, हल्दी, तुलसी जैसी वनस्पतियों में औषधीय गुण होते हैं पर हमने विकास की इस अंधी दौड़ में न सिर्फ इन वनस्पतियों को प्रदूषित किया बल्कि इनके अधिक उत्पादन में भी कोई कार्य नहीं किया।

बीबीसी में कई वर्षों तक कार्य कर चुके और पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित देश के वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने प्रदूषण से पर्यावरण पर हो रहे नुकसान और औषधीय वनस्पतियों की उपयोगिता पर बात की प्रो. एसके बारिक से, जो सीएसआईआर-एनबीआरआई (राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान), लखनऊ के निदेशक हैं। इससे पहले प्रो. एसके बारिक नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलॉन्ग में पढ़ाते थे।

पर्यावरण में औषधीय वनस्पतियों की उपयोगिता

रामदत्त त्रिपाठी ने प्रो. बारिक से पहला प्रश्न यह किया कि हमें प्रकृति में हो रहे प्रदूषण की भयावहता पर कितनी चिंता करनी चाहिए।

प्रो. बारिक कहते हैं कि प्रकृति में हो रहे प्रदूषण की भयावहता का एक प्रमाण कोरोना भी है। वनस्पति कोरोना को हराने में हमारी बहुत मदद कर सकती हैं क्योंकि वनस्पतियों में बहुत से औषधीय गुण होते हैं। भारत में लगभग 6500 ऐसे पौधे हैं, जिनमें औषधीय गुण मौजूद है। एक परीक्षण में पता चला है कि कालमेघ पौधे में ऐसे औषधीय गुण होते हैं, जो कोरोना से लड़ने में सक्षम हैं। ऐसे बहुत से पौधे होते हैं जो अलग-अलग बीमारियों से लड़ने में सक्षम हैं पर किसी भी वनस्पति से दवाई बनने में कुछ समय लगता है।

रामदत्त त्रिपाठी का दूसरा प्रश्न यह था कि कोरोना में हमें प्रदूषण से कितना नुकसान हुआ है?

इसके जवाब में प्रो. बारिक कहते हैं कि हम सीधे तौर पर यह नहीं कह सकते कि कोरोना प्रदूषण की वज़ह से ज्यादा फैला है पर प्रदूषण की वज़ह से कोरोना मरीज़ अधिक प्रभावित जरूर हुए हैं। कुछ प्रदूषक जैसे कार्बन डाइ ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड, सस्पेण्डेड पार्टिकुलेट मैटर आदि हमारे श्वसन तंत्र को कमज़ोर कर देते हैं तो वहीं लेड और फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषक हमारे फेफड़ों को कमज़ोर बना देते हैं। इस वज़ह से कोरोना को मरीज़ के शरीर पर अधिक प्रभाव छोड़ने का मौका मिल जाता है।

हमें इन प्रदूषकों को कम करने के प्रयास करते रहने होंगे, जिसमें फैक्ट्रियों, खेतों को जलाने और कोयले से बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्रों से होने वाला प्रदूषण शामिल है। इसके निदान के रूप में हमें ऐसे पौधों को उगाना चाहिए, जो इन प्रदूषकों को एक बैरियर के रूप में रोकने में सहायता करते हैं। यह दो प्रकार के पौधे हो सकते हैं – पहले पानी और मिट्टी प्रदूषक अवशोषित पौधे और दूसरे वायु प्रदूषक सहिष्णु पौधे।

चरक संहिता अध्ययन करने के बाद रामदत्त त्रिपाठी ने यह जाना कि भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों की वज़ह से औषधीय पौधों की औषधीय क्षमता घट-बढ़ जाती है, जैसे तुलसी की औषधीय क्षमता जगह-जगह घटते-बढ़ते रहती है। इसी पर वह प्रो. बारिक की राय भी लेते हैं।

प्रो. बारीक कहते हैं कि भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार औषधीय पौधों की क्षमता भी बदलती रहती है। लकडोंग (मेघालय) और उसके चारों ओर बीस वर्ग किमी क्षेत्र के अंदर होने वाली हल्दी में पाए जाने वाली महत्वपूर्ण सामग्री कुर्कुमिन का प्रतिशत उस क्षेत्र की भूमि की वजह से 10-13 प्रतिशत रहता है। जबकि लकडोंग से 60 किलोमीटर नीचे आने पर इसकी क्षमता घट कर 6-10 प्रतिशत हो जाती है और उससे कई किलोमीटर दूर स्थित लखनऊ में हल्दी के अंदर कुर्कुमिन का प्रतिशत मात्र 4 प्रतिशत के आसपास रह जाता है।

पौधों में यह प्रदुषण दो प्रकार के प्रदूषकों से होता है। पहले प्रदूषक वह होते हैं, जो पत्तों के ऊपर गिरते हैं दूसरे वह होते हैं जो प्रदूषित मिट्टी के माध्यम से पौधों में प्रवेश कर जाते हैं।

चौथे प्रश्न में रामदत्त त्रिपाठी पूछते हैं – कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र में चमड़े के बहुत से कारखाने हैं और इस वजह से उस क्षेत्र के नाले प्रदूषित हो रहे हैं। वहाँ की सब्जियाँ और फल खा लोगों को गम्भीर बीमारियाँ हो रही हैं, इस समस्या पर एनबीआरआई के वैज्ञानिक कानपुर गए तो उन्हें क्या निष्कर्ष मिला?

प्रो. बारिक कहते हैं कि पौधे अपनी पत्तियों और जड़ों से जो प्रदूषक ले रहे हैं, उससे नुकसान होता है। यह प्रदुषक पौधों के विभिन्न हिस्सों में पहुँच जाते हैं और जब यह औषधीय पौधे औषधि के तौर पर लिए जाते हैं तो औषधीय गुणों के साथ यह प्रदूषक भी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर भविष्य में मानव शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं।

मांसाहार भोजन, शाकाहार से ज्यादा जहरीला बन जाता है। बकरी जो घास खाती है उससे यह प्रदूषक उसके अंदर चले जाते हैं और जैविक आवर्धन की वजह से उसे खाने पर हमारा दस गुना अधिक नुक़सान होता है।

पार्टिकुलेट मैटर जो कि वायु में मौजूद छोटे कण होते हैं, यह विभिन्न आकारों के होते हैं और यह मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकते हैं। ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल, खाना पकाने का धुआँ, सल्फर डाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया इसके स्त्रोत हैं। ये कण हवा में मिश्रित हो जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं।

जब हम साँस लेते हैं तो ये कण हमारे फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे खाँसी और अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं। साथ ही उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है। वायु प्रदूषण की वजह से हमारे शरीर में कोरोना के लिए रास्ते खुल रहे हैं।

बहुत से पौधे इन प्रदूषकों को कम करने में सहायता करते हैं। इसलिए हमारे पूर्वजों ने घर के पास बेल, नीम और पीपल के पेड़ लगाने के नियम बनाए थे। एक पेड़ हर प्रकार के प्रदूषकों को अवशोषित नहीं कर सकता। इसके लिए हर प्रदूषक के लिए अलग पेड़ लगाने की बात कही गई है।

किस प्रदूषक के लिए किस जगह कौन सा पेड़ लगाया जाए, इसका समाधान करने के लिए एनबीआरआई ने ‘ग्रीन प्लानर एप’ बनाया है। जैसे वाहनों से निकलने वाली गैसों की वजह से लोगों को साँस की गम्भीर बीमारियाँ हो रही हैं, पेड़-पौधे इन गैसों को अवशोषित कर ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है, सड़क किनारे या डिवाइडर पर सही प्रजाति के पौधे लगाए जाएँ तो प्रदूषण कम किया जा सकता है। नीम, साल, बरगद सड़क किनारे लगाए जा सकते हैं तो गुड़हल, हरसिंगार को डिवाइडर पर लगाया जा सकता है।

मनी प्लांट घर के अंदर मौजूद प्रदूषकों से हमें बचाता है। यह फॉर्मलडिहाइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे एयरबॉर्न टॉक्सिन को दूर रखता है।

अंतरराष्ट्रीय जीव विज्ञान संघ (IUBS) जो विश्व भर में जैव विज्ञान के अध्ययन को बढ़ावा देता है, के द्वारा एनबीआरआई को अमेरिका, मैक्सिको, नेपाल, बांग्लादेश, इक्वाडोर सहित दस देशों में विभिन्न प्रकार के प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए पौधों की विभिन्न प्रजातियों को पहचानने का कार्य दिया गया है। इसके साथ ही एनबीआरआई पर ही यह छोड़ा गया है कि वह किस वैज्ञानिक विधि द्वारा यह कार्य करते हैं।

पाँचवे प्रश्न के रूप में रामदत्त त्रिपाठी प्रो. बारिक से गोरखपुर के आस-पास जंगलों के कटान की वज़ह से लोगों के बीच सालों से फैले एक वायरस और पन्ना में हीरों की खदानों में काम कर रहे मज़दूरों की बीमारियों का उदाहरण दे पर्यावरण से छेड़छाड़ के परिणामों पर चर्चा करते हैं।

प्रो. बारिक कहते हैं कि हम इन सब पर शोध करते रहते हैं, पर इससे कुछ नहीं होता है। उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण मुख्य समस्या है। अलग-अलग उद्योगों से अलग-अलग प्रकार के प्रदूषक निकलते हैं। उनके आस-पास ग्रीन बेल्ट क्षेत्र बना पौधों का विकास करने की आवश्यकता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कागज़, शराब और चीनी के कारखानों की वज़ह से रामगंगा और काली नदी प्रदूषित हो रही है। वनों का कटान भी एक मुख्य समस्या बनी हुई है। जंगल कटने की वज़ह से वहाँ जानवरों के लिए जगह नहीं बचती और वह मनुष्यों के बीच आने लगते हैं। जंगल कटने की वज़ह से पारिस्थतिकी तंत्र पर भी गलत असर पड़ता है और उससे होने वाले जलवायु परिवर्तन की वज़ह से रोगाणु ऐसे क्षेत्रों में भी पनपने लगते हैं, जहाँ वह पहले नहीं आ सकते थे।

जंगल कार्बन डाइ ऑक्साइड अवशोषित कर हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। आज हम ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए घण्टों लाइन लगा रहे हैं। हमें ऑक्सीजन ठीक वैसे ही खरीदनी पड़ रही है, जैसे हमने वर्षों पहले पानी खरीदना शुरू कर दिया था।

प्रो. बारिक से रामदत्त त्रिपाठी का अंतिम प्रश्न यह है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाएँ वैसे ही ध्वस्त हो चुकी हैं और हमारे पास इसको लेकर ज्यादा बज़ट भी नहीं है, अब इस बीमारी से हम कैसे लड़ें?

प्रो. बारिक कहते हैं कि आपातकाल में तो हमें मरीज़ को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा कर ही ठीक करना होगा पर यदि हमें इसका स्थाई समाधान चाहिए तो हमें भविष्य में प्रदूषकों को रोकने के लिए पौधे लगाने ही होंगे। हम 70 से 700 ऐसे पेड़ों की लिस्ट बना रहे हैं, जिनमें औषधीय गुण होने के साथ प्रदूषकों को रोकने की क्षमता भी हो।

हमें अपने घर के चारों ओर बरगद, पीपल, अशोक जैसे पेड़ लगाने चाहिए, जिनमें औषधीय गुण तो हों ही साथ ही वह हवादार भी हों। यह पेड़ हमारे लिए प्रदूषण को तो रोकेंगे ही, साथ में छाया देकर हमारे घर में चलने वाले एसी, पंखों की जरूरत को भी खत्म कर हमारा बिजली का बिल कम करेंगे।

हम जितना ज्यादा पेड़ लगाएँगे, हमारा उतना ही अधिक कल्याण होगा।

पूरे इंटरव्यू को आप ऊपर सुन सकते हैं। इस बातचीत को हिमांशु जोशी ने ट्रांस्क्राइब किया है।