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भारत में आएगी कोरोना की तीसरी लहर, वायरस के नए वैरिएंट्स पर पूरी तरह प्रभावी है वैक्सीन: मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार

देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच सरकार ने संक्रमण की तीसरी लहर पर चेतावनी जारी की है। केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर अवश्य आएगी लेकिन कब आएगी और कितनी खतरनाक होगी यह वर्तमान में निश्चित नहीं है।

देश में पिछले साल पहली लहर आई थी। साढ़े तीन महीने तक संक्रमण के मामलों के लगातार बढ़ते रहने के बाद 16 सितंबर को संक्रमण का पीक आया था। इस दिन पूरे देश भर से 97,860 नए संक्रमण के मामले सामने आए थे। इसके बाद नए मामलों में गिरावट आई और 19 नवंबर 2020 को मामले घटकर आधे रह गए।

करीब छह महीने तक संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव चलता रहा। 1 मार्च 2021 को कोरोना वायरस की दूसरी लहर की शुरुआत मानी जाती है जब संक्रमण के 12,270 नए मामले सामने आए। इसके बाद 1 अप्रैल 2021 को संक्रमण के 75,000 के लगभग नए मामले सामने आए। 30 अप्रैल को एक दिन में संक्रमण के 4.02 लाख नए मामले देखने को मिले। विशेषज्ञों के अनुसार मई के महीने में कोरोना वायरस संक्रमण कि दूसरी लहर का पीक देखा जा सकता है।

कोरोना वायरस की तीसरी लहर के अलावा प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैज्ञानिक सलाहकार राघवन ने कोरोना वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वायरस के जो भी नए वैरिएंट्स हैं वो मुख्य वायरस के समान ही प्रसारित होते हैं और उनमें किसी प्रकार के नए ट्रांसमिशन की कोई विशेषता नहीं होती है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार वास्तविक वायरस मानव शरीर में प्रवेश करके बढ़ता जाता है और मनुष्य को संक्रमित करता है उसी प्रकार वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स भी व्यवहार करते हैं।

नए वैरिएंट्स पर वैक्सीन के प्रभाव पर चर्चा करते हुए राघवन ने कहा कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स न केवल भारत अपितु पूरे विश्व भर में उत्पन्न होंगे। उन्होनें वैक्सीन के विषय में कहा कि वर्तमान में जो भी वैक्सीन उपलब्ध हैं सभी कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स पर प्रभावी हैं।

केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने यह भरोसा दिलाया कि भारत और दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के इन नए वैरिएंट्स को निष्प्रभावी करने और उनसे सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों की खोज में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक गहरे शोध का विषय है और भारत समेत विदेशों में भी इस पर शोध कार्यक्रम चल रहे हैं।

आपको बता दें कि कोई भी वायरस जो RNA अथवा DNA से मिलकर बना होता है वह अपनी संरचना में बदलाव करता ही है। एक बार जब वायरस मानव शरीर में प्रवेश करता है तो वह मानव कोशिकाओं के संपर्क में आता है और संख्या में कई गुना बढ़ जाता है। अब यदि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रही तो वह वायरस के संवर्धन से लड़ती है और उसे रोक देती है। वायरस के बदलाव की यह प्रक्रिया स्वाभाविक है और इसे ही म्यूटेशन कहा जाता है। म्यूटेशन के बाद किसी वायरस का जो नया रूप बनता है उसे ही वैरिएंट कहा जाता है। कोरोना वायरस भी इसी तरीके से नए वैरिएंट बनाता है।  

BBMP बेड घोटाले में कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार, प्रियंका और राहुल के पोस्टरों के साथ आई नजर: तेजस्वी ने किया था पर्दाफाश

बेंगलुरू दक्षिण के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरू में चल रहे ‘बेड घोटाले’ का पर्दाफाश करते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि बृहत बेंगलुरू महानगर पालिका (BBMP) के कुछ कर्मचारियों ने एजेंट्स के साथ मिलकर घोटाला कर रहे हैं। सूर्या ने आरोप लगाया कि इन कर्मचारियों ने होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित मरीजों के नाम पर अस्पतालों में बेड बुक किए और बाद में उन्हें जरूरतमंद मरीजों को ऊँचे दामों पर बेंचे।

इस मामले में मंगलवार (04 मई) को 40 वर्षीय महिला नेत्रवती और उसके 22 वर्षीय भतीजे रोहित कुमार को बेंगलुरू पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब खबर आ रही है कि आरोपित नेत्रवती के कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ संबंध रहे हैं और वह कॉन्ग्रेस की कई रैलियों और कार्यक्रमों में शामिल हुई है, उसे कॉन्ग्रेस नेता बताया जा रहा है। एशिया नेट न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार नेत्रवती के संबंध कॉन्ग्रेस के राज्य नेतृत्व से रहे हैं।

पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया। पुलिस की एक टीम ने Covid-19 संक्रमित मरीज का रिश्तेदार बनकर नेत्रवती और रोहित कुमार से बेड के लिए संपर्क किया।

बेंगलुरू दक्षिण के डीसीपी हरीश पांडे ने बताया कि आरोपित व्हाट्सऐप के माध्यम से Covid-19 से संक्रमित मरीजों को अस्पताल में बिस्तर मुहैया कराने के संदेश फॉरवर्ड करती थी। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपित नेत्रवती के संबंध BBMP के वॉर रूम से थे और वह निजी अस्पतालों के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी जहाँ 20,000 से 40,000 रुपए और कभी-कभी 50,000 रुपए से अधिक लेकर मरीजों को अस्पताल में बेड उपलब्ध कराया जाता था।

आरोपित नेत्रवती को कई बार कॉन्ग्रेस की सभाओं में कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ प्रियंका गाँधी वाड्रा और राहुल गाँधी के पोस्टर और कॉन्ग्रेस का झंडा लिए देखा गया।

कॉन्ग्रेस की रैलियों और कार्यक्रमों में नेत्रवती (फोटो : एशिया नेट)

एक अन्य तस्वीर में नेत्रवती को KPCC के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खांडरे के साथ देखा गया।

कॉन्ग्रेस नेता और KPCC के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खांडरे के साथ नेत्रवती (फोटो : एशिया नेट)

आरोपित के संबंध कॉन्ग्रेस नेता और चामराजपेट के विधायक जमीर अहमद खान के साथ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता और चामराजपेट के विधायक जमीर अहमद के साथ नेत्रवती (फोटो : एशिया नेट)

नेत्रवती ने जयनगर की विधायक सौम्या रेड्डी को भी जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थी। जयनगर विधानसभा दक्षिण बेंगलुरू लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत ही आती है।

आरोपित नेत्रवती कॉन्ग्रेस विधायक सौम्या रेड्डी के साथ (फोटो : एशिया नेट)

हालाँकि नेत्रवती की गिरफ्तारी को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व के द्वारा कोइ भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।   

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने वॉर-रूम के कर्मियों की नियुक्त पर भी सवाल उठाया और जिस एजेंसी से ये संबंधित हैं उसके बारे में भी पूछा। BBMP के अधिकारियों का विरोध करते हुए उन्होंने जिन 17 नामों के बारे में पूछताछ की वे हैं मंसूर अली, ताहिर अली खान, सादिक पाशा, एमडी जायद, अलसाई साहेर, उमर खान, सलमान उरीफ, जमील पाशा, जबीउल्ला खान, सईद हसनैन, सईद शाहिद, सईद शहबाज, यूनुस, सैयद मोहिन और सैयद मुकेश।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि इस बेड घोटाले में BBMP के अधिकारी, आरोग्य मित्र, अस्पताल और निजी एजेंट शामिल थे।

शोभा मंडल के परिजनों से मिले नड्डा, कहा- ‘ममता को नहीं करने देंगे बंगाल को रक्तरंजित, गुंडागर्दी को करेंगे खत्म’

बंगाल में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई भीषण राजनीतिक हिंसा पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि बीजेपी और उसके करोड़ों कार्यकर्ता बंगाल के अपने साथियों के इस मुश्किल वक्त में साथ हैं। नड्डा ने कहा कि ममता और तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडागर्दी को बीजेपी प्रजातांत्रिक तरीके से खत्म करके रहेगी।

नड्डा बुधवार को जगतदल की मृतक बीजेपी कार्यकर्ता शोभा रानी मंडल के परिवार से मिलने पहुँचे, जिनकी चुनाव नतीजे आने के बाद टीएमसी के गुंडों ने हत्या कर दी थी। शोभा रानी मंडल अपने बेटे को तृणमूल कार्यकर्ताओं से बचाने की कोशिश कर रही थीं इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।

ममता की बंगाल को रक्तरंजित करने की कोशिश का करेंगे विरोध: जेपी नड्डा

शोभा मंडल के परिजनों ने नड्डा से कहा कि उन्हें अब भी टीएमसी से जान का खतरा है। शोभा के बेटे ने नड्डा से कहा, ”आपके जाने के बाद पता नहीं क्या होगा?” इस पर जेपी नड्डा ने पार्टी की ओर से उन्हें सुरक्षा दिलाए जाने का भरोसा दिलाते हुए कहा, ”चिंता मत करिए, मेरा फोन नंबर हमेशा अपने पास रखिए। हम आपके साथ पूरी लड़ाई लड़ेंगे, आखिरी मोड़ तक लड़ेंगे। आखिरी साँस तक लड़ेंगे, ममता जी की जो गुंडागर्दी है उसे प्रजातांत्रिक तरीके से हटाकर रहेंगे।

नड्डा ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले को लेकर ममता बनर्जी से सवाल पूछा और कहा, ”वह खुद को बंगाल की बेटी कहती हैं, क्या उन्होंने बंगाली मानुष का ख्याल रखा है? ममता जी की गुंडागर्दी देखिए, उनकी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने जो शोभा जी के साथ किया है, वह बताता है कि आम आदमी की चीख-पुकार की कोई सुनवाई नहीं है। ममता की बंगाल के लोगों को रक्तरंजित करके सत्ता में बैठने और सत्ता में आकर बंगाल को रक्तरंजित करने की कोशिश की भारतीय जनता पार्टी आलोचना और भर्त्सना करती है।”

नड्डा ने कहा, ”शोभा मंडल के बेटों, बहू, बेटी और बच्चों को (टीएमसी के गुंडों ने) मारा और इस तरह की घटनाएँ निंदनीय है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और उसके करोड़ों कार्यकर्ता शोभा जी के परिवार के साथ खड़े हैं। सुरक्षा और सबको सम्मान के साथ जीने का सबको अधिकार है और हम ये अधिकार आपको दिलाकर रहेंगे।”

बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा के बाद एक एनजीओ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बंगाल में संवैधानिक ढांचे के खत्म होने का हवाला देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग वाली याचिका दाखिल की गई है। बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ के जारी हिंसा के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार (5 मई) को लगातार तीसरी बार बंगाल के सीएम पद की शपथ ली।

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

पश्चिम बंगाल में रविवार (मई 2, 2021) को मतगणना के बाद चुनाव परिणामों में TMC की जीत क्या हुई, उसके गुंडों ने राज्य भर के कई इलाकों में भाजपा के दफ्तरों को जलाने से लेकर कार्यकर्ताओं की हत्या और उनके घरों को तहस-नहस करना शुरू कर दिया। इस बीच लिबरल मीडिया क्या कर रहा है? उसका पूरा जोर इन घटनाओं को छिपाने, इन्हें सही ठहराने या फिर इनके महिमामंडन पर ही है।

आइए, देखते हैं कि लिबरल गिरोह के कुख्यात मीडिया संस्थान ‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ ने बंगाल हिंसा पर क्या लिखा। दोनों ने जो लेख लिखे, वो एक तरह से एक ही लाइन पर थे और उनका उद्देश्य था कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल के गुंडों द्वारा की जा रही हिंसा को ‘महज पार्टी पॉलिटिक्स’ बता कर ख़ारिज करना। ऐसा दिखाना जैसे ये सामान्य घटनाक्रम हो। ‘स्क्रॉल’ ने लिखा, “क्यों बंगाल में नतीजों के बाद हो रही हिंसा को भाजपा द्वारा सांप्रदायिक बताना गलत है।”

‘द वायर’ ने अनुमान लगा लिया कि ये एकतरफा नहीं है

ये हेडलाइन ही ‘द वायर’ के नैरेटिव की पोल खोल देता है। ये दिखाना चाह रहा है कि हिंसा अगर सांप्रदायिक है तो वो बहुत बुरी है और बाकी तो जैसे ठीक है। ये नैरेटिव न सिर्फ दोहरी रणनीति से भरा है, बल्कि देश के तथाकथित अभिजात्य वर्ग की मानसिकता को दिखाता है। इसने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

इस लेख में लिखा है, “फलाँ-फलाँ कारण हैं जो बताता है कि भाजपा का इन दंगों को सांप्रदायिक बताना गलत है। सभी समुदायों के लोगों पर हमले हुए हैं – हिन्दू या मुस्लिम। ये भाजपा के दावों के विपरीत है। एक ही पैटर्न है इस हिंसा का और वो है राजनीतिक।” इस लेख में इसने ये तक माना है कि हिंसा के पीछे तृणमूल कॉन्ग्रेस ही है। लेकिन, इसका जोर इस पर न होकर इस हिंसा के ‘सांप्रदायिक न होने’ के दावे को साबित करने पर है।

‘द वायर’ आखिर क्या सन्देश देना चाहता है? यही कि हमें बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए और न ही इसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि ये सांप्रदायिक नहीं है इनके हिसाब से? क्या जिन भाजपा, कॉन्ग्रेस और CPI(M) कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, उनके परिजनों को ये सोच कर अच्छा महसूस करना चाहिए कि ये हिंसा ‘सांप्रदायिक’ नहीं थी। इसका नैतिकता से कोई लेना-देना नहीं है।

न सिर्फ नैतिक रूप से, बल्कि कानूनन भी ये गलत है। ये मुख्यधारा की मीडिया के जरिए एक ऐसी दुनिया और एक ऐसा माहौल बनाने पर उतारू हैं, जहाँ ये तय करेंगे कि कौन सी हिंसा जायज है और कौन सी बुरी। अमेरिका में एंटीफा भी इसी तरह काम करता है, जो हिंसा के सहारे ‘बदला’ लेता है और अपने खूनी लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश करता है। कुछ ही महीनों पहले एक एंटीफा के आरोपित को यूएस के पुलिस स्टेशन को जलाने के आरोप में 4 साल की जेल हुई

एंटीफा भी एक कट्टर वामपंथी संगठन ही तो है। उन्हें लगता है कि हिंसा और तबाही से ही लक्ष्य मिलेगा। इसी तरह ‘स्क्रॉल’ का लेख भी हास्यास्पद तरीके से बंगालियों का उनकी पसंदीदा पार्टियों के प्रति प्रतिबद्धता होती है लेकिन जाति या धर्म को लेकर नहीं। किसी प्राकृतिक कानून, धार्मिक सिद्धांत या नैतिकता के हवाले से ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उस हिंसा में मरने वालों को न्याय नहीं मिलना चाहिए, जो ‘सांप्रदायिक’ न हो।

इस लेख में कहा गया है कि बंगाल में 1977 के आसपास इस तरह की पार्टी पॉलिटिक्स और राजनीतिक पहचान का खेल शुरू हुआ और उनके जीवन में धर्म और जाति के नाम पर पहचान का मुद्दा पीछे हट गया। ‘द वायर’ के लेख में ममता बनर्जी की इस हिंसा के लिए ज़रूर नाममात्र की आलोचना की गई है लेकिन साथ सी उन्हें न सिर्फ ‘मजबूत फाइटर’, बल्कि ‘घृणा को हराने वाली’ भी बताया गया है।

ये सब तब किया जा रहा है, जब TMC के गुंडे न सिर्फ भाजपा और कॉन्ग्रेस, बल्कि CPI(M) के कार्यकर्ताओं को भी निशाना बना रहे हैं। इस हिंसा को जायज ठहराने की लिबरल मीडिया के प्रयासों का यहीं अंत नहीं होता है, बल्कि NDTV पर ‘राजनीतिक विश्लेषक’ के रूप में प्रोफेसर अनन्या चक्रवर्ती ने यहाँ तक दावा कर डाला कि बंगाल में इससे पहले राजनीतिक हिंसा हुई ही नहीं है। इस बात को TMC ही नकार देगी, जो खुद कभी लेफ्ट की हिंसा की शिकार रही है।

वैसे उम्मीद की जाती है कि एक ‘विश्लेषक’ निष्पक्ष होगा लेकिन NDTV पर ऐसा नहीं होता। असली बात तो ये है कि न मुख्यधारा की मीडिया और न ही इन बुद्धिजीवियों को पश्चिम बंगाल की कोई चिंता है। ये बुद्धिजीवी और मुख्यधारा के मीडिया संस्थान इस मामले में मिलजुल कर तय करते हैं कि कौन सी हिंसा ‘सही’ है और कौन गलत। इनके लिए एक दलित व्यक्ति पर मुस्लिम भीड़ के हमले की कोई कीमत नहीं लेकिन कोई सवर्ण किसी दलित पर हमला करे तो ये बड़ा मुद्दा है।

ये सब उस मीडिया में हो रहा है, जहाँ पश्चिम बंगाल से हमेशा से अच्छा प्रतिनिधित्व रहा है। ज्योति बासु की कम्युनिस्ट सरकार ने किस तरह से दलितों का नरसंहार करवाया था, उसे भुला दिया गया है। ये लोग मरीचझांपी नरसंहार को याद नहीं करते, क्योंकि ये ‘सेक्युलर वामपंथी’ सरकार ने करवाया था, ‘हिंदुत्व की ताकतों’ ने नहीं। लेकिन नहीं, ये ‘जायज’ है क्योंकि ये कम्युनल थोड़े था, कम्युनिस्ट था न। ‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ को नए लेख लिख कर इसे स्पष्ट करना चाहिए।

महाराष्ट्र के दूसरे जिलों में वैक्सीन की कमी का रोना जबकि स्वास्थ्य मंत्री के जिले में तय सीमा से 60,000 अधिक की खुराक

जहाँ एक ओर महाराष्ट्र में राज्य सरकार वैक्सीन की कमी का रोना रो रही थी और 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक कई टीकाकरण केंद्रों को वैक्सीन की कमी के चलते बंद किया गया वहीं दूसरी ओर यह खबर आ रही है कि जालना में तय सीमा से अधिक मात्रा में टीके के खुराक दिए गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने गृहनगर जालना को 77,000 टीके उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आदेशित किया था जो कि जालना के 17,000 वैक्सीन के तय कोटे से कहीं ज्यादा है।

हालाँकि, टोपे ने किसी भी जिले को प्राथमिकता देने से इनकार किया है और कहा है कि यदि ऐसा हुआ है तो सिर्फ टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए। 31 मार्च को महाराष्ट्र को केंद्र से 26.77 लाख टीके की खुराक उपलब्ध कराई गई थी उसी में से जालना के लिए अतिरिक्त टीके उपलब्ध कराए गए।

जालना को वैक्सीन आपूर्ति में अनियमितता :

31 मार्च तक के आँकड़ों की बात करें तो जालना सक्रिय मरीजों के मामले में 30 जिलों से नीचे था। ऐसे में जहाँ अधिक संक्रमित मरीज मिल रहे थे और टीकाकरण भी तेज था, उन पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के जिले को अधिक प्राथमिकता दी गई।

रोजाना 600-1000 टीके लगाने वाले जालना जिले में 15-18 दिनों के लिए टीके की खुराक उपलब्ध थी फिर भी राज्य के टीकाकरण अधिकारी डॉ. डीएन पाटिल के आदेश पर औरंगाबाद से 60,000 टीके की खुराक जालना भेज दी गई।

अधिक संक्रमण वाले बीड जिले को भी जालना से कम वैक्सीन की खुराक प्राप्त हुईं जबकि बीड टीकाकरण में जालना से बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। टीकाकरण में जालना से बेहतर प्रदर्शन करने वाले मात्र 9 जिलों को ही जालना से अधिक खुराक प्राप्त हुईं।

रिपोर्ट्स के अनुसार जब 07 अप्रैल को मुंबई में टीकों की कमी के कारण 25 टीकाकरण केंद्र बंद थे तब जालना में 50,000 खुराक उपलब्ध थीं। हालाँकि जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुरोध के बाद जालना से टीके की खुराक दूसरे जिलों को भेजी गईं जिनमें वाशिम, यवतमाल और परभनी शामिल हैं जहाँ जालना से 15,000 टीकों की खुराक स्थानांतरित की गई।

देवेन्द्र फड़नवीस का महाराष्ट्र सरकार से प्रश्न :  

महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता देवेन्द्र फड़नवीस ने 08 अप्रैल को राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार के द्वारा टीकों की कमी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया। महाराष्ट्र के DGIPR के ट्वीट के स्क्रीनशॉट दिखाते हुए फड़नवीस ने कहा कि 06 अप्रैल को DGIPR ने बताया था कि 1.06 करोड़ टीके महाराष्ट्र को प्राप्त हुए। 91 लाख टीके लगाए गए मतलब 15 लाख टीके अभी भी उपलब्ध थे लेकिन फिर भी सरकार ने टीकाकरण केंद्रों को बंद किया और वैक्सीन की कमी की गलत खबर दी।

पीआईबी के द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में राज्य में 65,934 मरीज स्वस्थ हुए हैं जबकि 51,880 नए संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके अलावा राज्य में 891 मौतें दर्ज की गईं हैं।

TMC के हिंसा से पीड़ित असम पहुँचे सैकड़ों BJP कार्यकर्ताओं को हेमंत बिस्वा सरमा ने दो शिविरों में रखा, दी सभी आवश्यक सुविधाएँ

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुई TMC के गुंडों की हिंसा के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं का बंगाल से पलायन जारी है। असम के मंत्री और भाजपा नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट करके जानकारी दी कि बंगाल छोड़कर असम आने वाले कई लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है और उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट करके जानकारी दी कि बंगाल में भय के वातावरण के कारण जारी पलायन के बीच असम पहुँचे 450 से अधिक लोगों को धुबरी में दो राहत शिविरों में रखा गया है और उन्हें आवश्यक सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही हैं। इसके अलावा सरमा ने बताया कि सभी लोगों का कोविड टेस्ट भी कराया जा रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए सरमा ने कहा कि ममता सिर्फ लोगों के दुःख को बढ़ा रही हैं जो कि शर्मनाक है।

असम में भाजपा सांसद राजदीप रॉय ने धुबरी जिले के आगमनी में स्थापित राहत शिविरों का दौरा किया। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से सूचना दी कि राहत शिविर में लगभग 600 लोगों को आश्रय दिया गया है जिनमें महिलाएँ और बच्चे प्रमुख रूप से शामिल हैं। रॉय ने बताया कि असम भाजपा इन राहत शिविरों में भोजन और आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था कर रही है।

असम भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने भी बंगाल से पलायन करके असम आए लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बंगाल में अपनी जान के खतरे को देखते हुए सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता असम पहुँच गए हैं। उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने की माँग की और कहा कि भाजपा कार्यकर्ता तब तक असम में रह सकते हैं जब तक कि वो बंगाल में सुरक्षित न महसूस करें।

मालूम हो कि 2 मई 2021 को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पश्चिम बंगाल में बहुमत लेकर दोबारा सत्ता वापसी की, वहीं भाजपा ने 77 सीटें जीतीं। इस दौरान ममता बनर्जी सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। इसी के बाद से वहाँ लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होने लगे। किसी को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया तो किसी की हत्या कर दी गई। इसके बाद से भाजपा कार्यकर्ता बंगाल छोड़कर असम की ओर पलायन कर रहे हैं।

हत्या, हिंसा, आगजनी का आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगा है। रविवार (मई 2, 2021) को अभिजीत सरकार नामक एक भाजपा कार्यकर्ता ने TMC के गुंडों की हरकतों के बारे में बताया। उसके कुछ ही देर बाद उनकी हत्या कर दी गई।

इसी के बाद से पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों से लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हिंसा की खबरें आ रही हैं। इसके अलावा हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी हिंसा में निशाना बनाया जा रहा है। नेटवर्क 18 के पत्रकार ने दावा किया था कि बंगाल में बीएसएफ जवानों के घर पर भी हमले किए गए हैं और टीएमसी के गुंडों ने तोड़फोड़, आगजनी और मारपीट की।

कर्नाटक में ‘बेड के लिए रिश्वत’ घोटाले का तेजस्वी सूर्या ने किया खुलासा, कहा- BBMP अधिकारी भी पैसे लेकर बेड बेचने में शामिल

बेंगलुरु शहरी और ग्रामीण इलाके में 4 मई को 21,866 मामले दर्ज किए गए। कोविड मामलों में बढ़ोतरी की वजह से शहर भर में अस्पतालों में बेड की माँग में लगातार वृद्धि हुई है। बेंगलुरु के स्वास्थ्य संकट के बीच, बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया है कि बीबीएमपी (बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका) में ‘बेड के लिए रिश्वत’ का खेल चल रहा है। सूर्या ने आरोप लगाया कि बीबीएमपी के वॉर रूम के अधिकारी कोविड-19 पॉजिटिव के बेडों को पैसों के लिए गलत तरीके से बुक कर रहे थे।

बीजेपी सांसद के मुताबिक, बेंगलुरु में 4065 बेड अवैध पाए गए। उन्होंने कहा कि बीबीएमपी के अधिकारी कथित रूप से पैसे के बदले में बेड बेचने का प्रयास कर रहे थे। सूर्या, विधायकों उदय गरुडाचार और सतीश रेड्डी के साथ, बीबीएमपी वॉर रूम में गए और अधिकारियों से कथित बिस्तर आवंटन घोटाले को लेकर विरोध व्यक्त किया। आगे की जाँच के लिए मामला केंद्रीय अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बीबीएमपी अधिकारी कोविड-19 रोगियों के लिए आवंटित बेडों को (अलक्षणी) रोगियों के लिए आवंटित कर रहे थे। उस समय वे एक बिस्तर को रोकने के लिए 50,000 रुपए से अधिक वसूल रहे थे। विरोध के दौरान, सूर्या ने नगर निकाय के अधिकारियों से सवाल किया कि उन्होंने कैसे पिछले मरीज के डिस्चार्ज होने के तीस सेकंड के भीतर एक नए रोगी को एडमिट करने की अनुमति दी।

इसके अलावा, सूर्या ने सवाल किया कि एक दूसरे से संबंधित वॉर-रूम के कर्मियों को कैसे नियुक्त किया गया। उन्होंने 17 व्यक्तियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया और जिस एजेंसी से संबंधित है उसके बारे में भी पूछा।

बीबीएमपी के अधिकारियों का विरोध करते हुए उन्होंने जिन नामों के बारे में पूछताछ की वे हैं मंसूर अली, ताहिर अली खान, सादिक पाशा, एमडी जायद, अलसाई साहेर, उमर खान, सलमान उरीफ, जमील पाशा, जबीउल्ला खान, सईद हसनैन, सईद शाहिद, सईद शहबाज, यूनुस, सैयद मोहिन और सैयद मुकेश।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में बीबीएमपी के अधिकारी, आरोग्य मित्र अस्पताल और निजी एजेंट शामिल थे।

बीबीएमपी अधिकारी, अरोग्य मित्र अस्पताल और प्राइवेट एजेंट थे शामिल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सूर्या ने कहा कि बेंगलुरु शहर में पर्याप्त बेड हैं। हालाँकि, वॉर रूम के कर्मी बेडों को झूठे तौर पर ब्लॉक करने के रैकेट चला रहे थे। वे पैसे के बदले में उन लोगों को बिस्तर आवंटित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीबीएमपी अधिकारियों, आरोग्य मित्र अस्पतालों और निजी एजेंटों के बीच साँठगाँठ थी, जो उक्त अपराध में लिप्त थे।

उन्होंने कहा, “बेंगलुरु के लोग अपने निकट और प्रियजनों को बचाने के लिए एक अदद बेड पाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि, हर दिन बीबीएमपी बिस्तर बुकिंग प्रणाली ने दिखाया कि शहर में सभी बेड ब्लॉक हैं। हर दिन कई मरीज डिस्चार्ज हो रहे थे। कइयों की दुर्भाग्य से मौत हो गई। इसलिए वहाँ बेड उपलब्ध होने चाहिए थे, लेकिन सिस्टम ने दिखाया कि वहाँ कोई बेड उपलब्ध नहीं थे।”

उन्होंने कहा कि बीबीएमपी के कुछ अधिकारी, कुछ आरोग्य मित्र अस्पताल और अस्पतालों के बाहर कुछ निजी एजेंट थे जिन्होंने ‘बेड के लिए रिश्वत’ की योजना बनाई थी। ”लोग घर पर आइसोलेशन में थे और उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर बिस्तर बुक किए जा रहे थे। इसके बाद, बाहर के एजेंट अस्पताल के अंदर प्रभारी से बात करते थे और कुछ भुगतान करने के बाद मरीजों को बिस्तर आवंटित करते थे।”

इस घोटाले के बारे में बताते हुए, सूर्या ने कहा, “एक मरीज के लिए बिस्तर बुक करने के बाद और उसे भर्ती नहीं किया जाता है, 12 घंटे के बाद बिस्तर खाली हो जाता। उस 12 घंटे की विंडो में, एजेंट भर्ती होने की उम्मीद कर रहे रोगियों से संपर्क करते हैं और बेड उन्हें दे देते हैं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने कई लोगों से संपर्क किया जिनके नाम पर बेड बुक किए गए थे, लेकिन पाया कि वे काफी पहले ठीक हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि आईसीयू और वेंटिलेटर भी उन लोगों को दिए गए थे जो रिश्वत दे सकते थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग मंत्रियों, विधायकों और सांसदों जैसे प्रभावशाली लोगों के लिए बेड आरक्षित कर रहे थे।

CM येदियुरप्पा ने किया ‘सख्त कार्रवाई’ का वादा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का वादा किया। बाद में शाम को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने कहा कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से दो को आगे की जाँच के लिए सीसीबी को सौंप दिया गया। रोहित और नेत्रा के रूप में पहचाने गए दो एजेंटों पर आईपीसी की धारा 420 और 384 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि वे प्रति बेड 50,000 रुपए के बदले मरीजों को आईसीयू बेड बेच रहे थे। पुलिस ने उनके बैंक खातों से 1,05,000 रुपए बरामद किए।

देश में कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी ऑक्सीजन की किल्लत: INOX Air के निदेशक ने दिलाया भरोसा

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की माँग 7 गुना बढ़कर 700 टन प्रतिदिन से 5000 टन प्रतिदिन हो गई है। केंद्र ने जरूरत के मद्देनजर कई राज्य में प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन (PSA) मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति दी है। साथ ही संबंधित उद्योगों को ऑक्सीजन प्रोड्यूस करने का काम शुरू करने को कहा गया है।

बिजनेस टुडे के अनुसार, सरकार के इस फैसले एक माह के भीतर ही देश में कुल उपलब्ध ऑक्सीजन क्षमता 9200 टन प्रतिदिन हो गई है। क्षमता में करीब 300% इजाफा हुआ है। भारत में औद्योगिक और मेडिकल गैसों के सबसे बड़े निर्माता, आईनॉक्स एयर (INOX Air) प्रोडक्ट्स के निदेशक सिद्धार्थ जैन ने कहा कि कुछ दिन में ऑक्सीजन की किल्लत दूर हो जाएगी।

कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान इतने बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन की जरूरत का अंदाजा नहीं लगाया गया था। अधिक से अधिक 3000 टन प्रतिदिन माँग थी।

ऑक्सीजन सप्लाई में INOX की भूमिका

बता दें कि INOX 75% मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है। इस समय आ रही परेशानियों पर बात करते हुए INOX के निदेशक सिद्धार्थ जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मुख्य समस्या सप्लाई करने की है, क्योंकि लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को क्रायोजेनिक टैंकर में ले जाना पड़ता है जिसका रेडियस मुश्किल से 200 किलोमीटर होता है। सुदूर इलाकों में ऑक्सीजन की बढती माँग के कारण अब ये रेडियस 1000 किलोमीटर का होना है। भारत में वर्तमान आपदा से पहले ऐसे सिर्फ 12000 टैंकर थे। मगर हाल में 1200 अन्य नाइट्रोजन और आर्गन टैंकर को भी ऑक्सीजन टैंकर में बदलने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा 40 टैंकर बाहर से लाए गए हैं।”

उन्होंने कहा, “प्वाइंट टू प्वाइंट ग्रीन कॉरिडोर में ऑक्सीजन एक्सप्रेस प्रभावित इलाकों तक जा रही है और एयरफोर्स, नेवी ने मदद कर लॉजिस्टिक समस्याओं का निदान कर दिया है। यदि गैर प्रभावित राज्यों में ये लहर फैलती है तो अब हम सबसे दूर इलाकों में भी जरूरत पूरा कर सकते हैं।” 

INOX 2600 टन ऑक्सीजन प्रोड्यूस करके 26 राज्यों की जरूरत पूरी करता है। जैन के अनुसार, ये क्षमता पिछले तीन सालों में 40 प्रतिशत बढ़ी है और इसे बढ़ाने के लिए कुछ सालों में 2000 करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट का भी ऐलान किया गया है। सिद्धार्थ ने जानकारी दी है कि नया ऑक्सीजन प्लांट दो साल में लग जाएगा।

देश में ऑक्सीजन उत्पादन

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में INOX के अनुसार ऑक्सीजन निर्माण की अधिकतर ईकाइयाँ देश के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में, स्टील प्लांट्स के पास हैं जो ऑक्सीदन के प्रमुख उपभोक्ता हैं। महाराष्ट्र, जहाँ इस समय ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा माँग हैं, वहाँ 1500 टन ऑक्सीजन उत्पन्न होती है। गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी ऐसा हाल है। कुल उत्पादन का 25% ऑक्सीजन केवल महाराष्ट्र और गुजरात में इस्तेमाल होता है।

राजधानी में ऑक्सीजन माँग की पूर्ति पर जवाब देते हुए जैन ने कहा, “दिल्ली में विनिर्माण इकाई नहीं है। वर्तमान में वहाँ सप्लाई 140 टन प्रतिदिन है। पिछले तीन दिनों में 450 टन की आपूर्ति हुई है। पहले कंपनियाँ अस्पतालों में सीधे मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही थी। अब, केंद्र उत्पादन की निगरानी करता है और मामलों और स्थिति की संख्या के आधार पर राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित करता है।” 

पंजाब में कोरोना से मृत्यु दर ज्यादा, गाँवों में अधिक मौतें: किसान आंदोलन और UK स्ट्रेन अमरिंदर सरकार के लिए बनी समस्या

भारत कोरोना वायरस संक्रमण के अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार मंगलवार (04, मई) को देश में 3,82,847 नए संक्रमित मरीज मिले। इसके अलावा 3786 मरीजों की मृत्यु हुई। हालाँकि भारत की मृत्यु दर (CFR) 1.1% है जो कई संक्रमित देशों से बहुत कम है। लेकिन देश में ही कई राज्यों में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पंजाब उनमें से एक है जहाँ 4 मई को 7,514 ने संक्रमित मरीज मिले और 173 संक्रमितों की मौत हुई।

चिंताजनक स्थिति यह है कि जहाँ महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में क्रमशः 1.7%, 1.3% और 0.6% है वहीं पंजाब में यह 2.3% है और अब पंजाब में संक्रमण की यह दर गाँवों तक पहुँच रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर नगरीय इलाकों के मुकाबले ज्यादा है। पंजाब में हुई मौतों में 58% मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं। पंजाब के अतिरिक्त झारखंड में मृत्यु दर 2% से अधिक है।

पंजाब में संक्रमण की मृत्यु दर (सोर्स : Covid19india.org)

खतरनाक दूसरी लहर और टेस्टिंग और इलाज से परहेज मुख्य वजह :

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर 2.8% है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.7% है। इसके अलावा राज्य के लोगों का उपचार से परहेज करना बढ़ते संक्रमण के पीछे मुख्य कारण है। स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार 83.92% मरीज हालत खराब होने पर अस्पताल जा रहे हैं।

पंजाब में ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली अधिक मौतों के पीछे कारण है कि मरीज अस्पताल जाने की जगह घर पर ही अपना इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों को भेजे गए अपने आदेश में पंजाब सरकार ने यह आदेशित किया था कि अधिकारी अपने क्षेत्र के वृद्ध और गंभीर मरीजों की सूची बनाएँ और उनकी स्थिति पर आवश्यक निर्णय लें जिससे उन मरीजों को संस्थागत इलाज प्राप्त हो सके।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व डायरेक्टर और पंजाब सरकार के कोविड प्रबंधन समूह के अध्यक्ष डॉ. केके तलवार ने बताया कि उपचार में लापरवाही ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते संक्रमण का प्रमुख कारण है और बेहतर ट्रेसिंग के लिए होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए निगरानी की नई रणनीति बनाई जा रही है।

कोरोना वायरस का यूके वैरिएंट, पटियाला और संगरूर जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति :

अप्रैल में यह बताया गया कि कॉन्ग्रेस शासित पंजाब के संक्रमण मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग करने पर यह ज्ञात हुए कि 80% मामलों में यूके स्ट्रेन प्राप्त हुआ जो 70% अधिक तेजी से फैलता है। एनआरआई बेल्ट कहे जाने वाले दोआब क्षेत्र में फरवरी से हुई कुल मौतों में से 60% मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं। नूरमहल और फिल्लौर क्षेत्र में संक्रमण का महत्वपूर्ण कारण कोरोना वायरस का UK स्ट्रेन ही था।

सिविल सर्जन सतिंदर सिंह ने बताया कि पटियाला में कोरोना वायरस की पहली लहर के दौरान गाँवों में मृत्यु दर लगभग न के बराबर थी। मार्च से 03 मई तक जिले में कुल 268 मौतें हुईं जिनमें से 94 मौतें सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं। पटियाला में ग्रामीण क्षेत्रों की संक्रमण दर भी लगभग 21% और कुल संक्रमितों की संख्या 3453 है।  

पटियाला जिले में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले (सोर्स : Covid19india.org)

पंजाब के ही संगरूर जिले में 372 मौतें हुईं जिनमें से 152 मौतें गाँवों में हुईं। इनमें से 97 संक्रमितों की मौत इसी साल हुई है।

पंजाब के संगरूर जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का ग्राफ (सोर्स : Covid19india.org)

फसल की कटाई और पंजाब में बढ़ते संक्रमण का पैटर्न :

पिछले 90 दिनों के दौरान पंजाब में संक्रमण का पैटर्न देखने पर पता चला कि मार्च के दौरान राज्य में संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ। हालाँकि, नवंबर 2020 से ही पंजाब के किसान दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे थे और गाँव के लोग फसलों की देखभाल कर रहे थे लेकिन इस दौरान कई किसान फसल की कटाई के लिए पंजाब लौटे।

बैसाखी त्योहार (13 अप्रैल 2021) के बाद से पंजाब में फसल की कटाई का समय प्रारंभ हो जाता है। डाटा के अनुसार बैसाखी के पहले राज्य में 13 मार्च को 1510 नए संक्रमित मरीज मिले और बैसाखी के मात्र 13 दिन पहले राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के 3161 मरीज मिले।  

अगले कुछ दिनों में जब कथित तौर पर किसान प्रदर्शन से अपने गाँव लौटे और फसल की कटाई के बाद पुनः प्रदर्शन में शामिल हुए तब संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। 23 अप्रैल को पहली बार राज्य में 6000 नए संक्रमित मरीज मिले। मई के पहले चार दिनों में राज्य में लगातार रोजाना 7000 से अधिक संक्रमण के मामले मिल रहे हैं।  

देश में बढ़ता संक्रमण और किसानों का दिल्ली बॉर्डर के लिए कूच :

14 अप्रैल को किसान संघ के नेताओं ने घोषणा की थी कि किसान 21 अप्रैल को दिल्ली के लिए कूच करेंगे। इसी दौरान दिल्ली में भी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने शुरू हो चुके थे। BKU(U) के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा 21 अप्रैल को कहा था कि 18,000 किसानों का एक मोर्चा दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है।   

पिछले 24 घंटों में अमृतसर में जहाँ 600 मामले आए वहाँ से 5 मई से 15,000 से अधिक किसान दिल्ली बॉर्डर के लिए रवाना हुए हैं। BKU(U), 10 मई के बाद से और अधिक किसानों को दिल्ली बॉर्डर भेजने की योजना बना रहा है।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने द हिन्दू से चर्चा करते हुए यह दावा किया कि अकेले अमृतसर से ही 1 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली और लगभग 10,000-15,000 किसान सिंघू-कुंडली बॉर्डर के लिए मार्च करेंगे। जबसे किसान आंदोलन शुरू हुआ है तब से यह किसानों का बारहवाँ बड़ा मोर्चा है जो दिल्ली के लिए कूच करेगा।

महाराष्ट्र: सुनैना होले पर FIR बॉम्बे HC ने की रद्द, कहा- उनके ट्वीट से समुदायों में नहीं फैलती नफरत

महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर पिछले साल मुंबई में सुनैना होले नाम की ट्विटर यूजर पर FIR दर्ज हुई थी। इसे रद्द कराने के लिए उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद होले के विरुद्ध दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उनके ट्वीट में कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे समुदायों में नफरत फैले।

कोर्ट ने कहा, “हम पुलिस की मेहनत को सराहते हैं कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे हालात में नजर बनाए हुए है। हालाँकि, दर्ज की गई एफआईआर किसी प्रकार के अपराध को सिद्ध नहीं करती। लिहाजा यह एफआईआर रद्द करने का सटीक मामला है।”

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान 14 अप्रैल 2020 को मुंबई के बांद्रा स्टेशन के बाहर प्रवासी मजदूर की भीड़ लग गई थी। इसी के बाद होले का महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने वाला ट्वीट आया था। आजाद मैदान पुलिस ने उनके विरुद्ध 15 अप्रैल 2020 को धारा 153ए के तहत मुकदमा दर्ज किया। बाद में होले ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका डाली।

इस याचिका में उन्होंने बताया कि वीडियो के साथ उन्होंने मुश्किल से एक लाइन लिखी थी। होले ने यह आरोप भी लगाया कि उनके विरुद्ध हुई एफआईआर राजनीति से प्रेरित है, क्योंकि उनके ट्वीट महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते थे। होले का पक्ष वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने रखा। उन्होंने सही आलोचना का हवाला देकर कहा कि होले ने लोगों को उकसाने की मंशा से कुछ पोस्ट नहीं किया था, जिसके कारण उन पर आईपीसी की धारा 153ए नहीं लगनी चाहिए। चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता के ट्वीट और शिवसेना मुखपत्र सामना में लिखी गई बातों की भी तुलना करने को कहा। उन्होंने कहा कि सुनैना का ट्वीट नुकसान पहुँचाने वाला नहीं था।

मालूम हो कि महाराष्ट्र सरकार ने होले पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर होने का इल्जाम लगाते हुए कहा था कि वह स्थिति को भड़काने के लिए झूठी खबरें फैलाती हैं। राज्य की ओर से पेश वकील मोहित ने भी कहा कि पिछले अप्रैल में बांद्रा पर मजदूर होले के ट्वीट के कारण इकट्ठा नहीं हुए, लेकिन उनके ट्वीट को उनके कई फॉलोवर्स ने शेयर किया।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर उपजे विवाद में पिछले साल सुनैना के तीन ट्वीट पर उनके विरुद्ध धारा 153ए, 505(2) और 500 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स साइबर क्राइम डिपार्टमेंट द्वारा रजिस्टर किए गए एक केस के मामले में उन्हें अगस्त 2020 में गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिली। उनके वकील ने कोर्ट में अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दिया था। इस केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर टिप्पणी करते हुए ये भी कहा था कि युवा वर्ग को अपने विचारों को प्रकट करने के लिए जगह देनी ही पड़ेगी।