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किसी की माँ कोरोना संक्रमित होकर ठीक हो गईं… तो भी मोदी को नीचा दिखाने के लिए गिरोह बता रहा उसे फेक

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। इसी बीच कई पत्रकार सोशल मीडिया पर न केवल नफरत, बल्कि फेक न्यूज फैला रहे हैं। जब तक कोई व्यक्ति मोदी सरकार से घृणा नहीं करता, तब तक उन्हें खुशी नहीं मिलती है। हाल ही में इसी तरह की एक घटना सामने आई है। दरअसल, दूरदर्शन (डीडी) के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने ट्विटर पर कोविड-19 संकट के बारे में अपना एक वाकया साझा किया, जिसको लेकर नवभारत टाइम्स के पत्रकार अवनीश मिश्रा ने उन पर अभद्र टिप्पणी है।

दूरदर्शन के पत्रकार श्रीवास्तव ने शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को ट्विटर पर लिखा, “मेरी माँ को कोरोना था, ऑक्सीजन लेवल 40% तक चला गया था। हम हॉस्पिटल भागे, वहाँ हालात देखे तो लगा भर्ती कराया तो अनहोनी होनी तय है। हमने ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर घर पर मँगाया, हिम्मत से दिन-रात परिवार ने सेवा की। अब वो कोरोना नेगेटिव हैं। पहले यह सब बताकर किसी को परेशान नहीं करना चाहता था।”

इस पर नवभारत टाइम्स के पूर्व पत्रकार अवनीश मिश्रा ने अपनी निम्न मानसिकता का परिचय देते हुए अशोक श्रीवास्तव के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि वह झूठ बोल रहे हैं कि उनकी माँ कोरोना संक्रमित हैं। उन्होंने कहा कि श्रीवास्तव मोदी सरकार का बचाव करने के लिए अपनी माँ का इस्तेमाल कर रहे। अवनीश मिश्रा के अनुसार चूँकि श्रीवास्तव “मोदी भक्त” हैं, इसलिए वे देश में मौजूदा ऑक्सीजन संकट से मोदी को दूर करने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने ट्वीट किया, “मैं ये दावे के साथ कह रहा हूँ कि ये झूठ बोल रहे हैं। मोदी भक्ति में ये इतना डूब चुके हैं कि इन्हें परसेप्शन क्रिएट करने के लिए माँ का सहारा लेना पड़ रहा है।” अवनीश मिश्रा ने अपने विवादित ट्वीट में कहा कि अशोक श्रीवास्तव मोदी सरकार के बारे में ‘परसेप्शन’ बनाने के लिए अपनी ही माँ का इस्तेमाल कर रहे थे।

हालाँकि, श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में स्पष्ट रूप से बताया है कि वह वास्तव में अपनी माँ को अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन वहाँ कोरोना मरीजों की स्थिति देखने के बाद उन्होंने महसूस किया कि वह घर पर ही अपनी माँ की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को खुशी होगी कि अस्पताल में बिना भर्ती हुए उनकी माँ इस घातक संक्रमण से उबर गईं। मालूम हो कि कोरोना 45 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।

मिश्रा के अनुसार, श्रीवास्तव मोदी सरकार के लिए एक परसेप्शन बनाने के लिए अपनी खुद की माँ का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन यहाँ ध्यान देना होगा कि श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में देश की वर्तमान स्थिति पर कोई भी टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने यह भी नहीं कहा कि अस्पताल में बेड की कोई कमी नहीं है। उन्होंने तो केवल अपनी आप बीती ट्विटर पर साझा की है कि उनकी माँ कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं।

इन सब के बाद अशोक श्रीवास्तव भी नहीं रुके, उन्होंने भी मिश्रा को ट्वीट कर करार जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “ये पत्रकार है? ऐसे समय में भी नफरत फैला रहा है, ट्रोल कर रहा है। इसे ब्लॉक करना चाहता था, पर पहले इसे सबके सामने नंगा करना जरूरी है। तेरे इनबॉक्स में नंबर भेज रहा हूँ अपना। मेरे घर किसी डॉ. को लेकर आजा, सारी रिपोर्ट दिखाऊँगा और जाँच हो जाएगी। एक बाप की औलाद है तो भागना नहीं।”

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया, “सुन बे चमन… मिश्रा तेरा इनबॉक्स बन्द है। मैं अपना ईमेल id भेज रहा हूँ, उस पर अपना नम्बर भेज तुझे सबूत भेजता हूँ, दुनिया के सामने नंगा करना जरूरी है और चाहे तो किसी डॉ. का नंबर भेज अपना जज बनाकर, वो फैसला कर देगा कौन झूठ बोल रहा है।”

बता दें कि देश को कोरोना वायरस और ऑक्सीजन संकट से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने कमर कस ली है। गुरुवार (22 अप्रैल, 2021) को वायुसेना ने तीन खाली ऑक्सीजन कंटेनर को एयरलिफ्ट कर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ पहुँचाया था। यहाँ से इन्हें भरने के बाद ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा। इस बात की जानकारी भारतीय वायुसेना के अधिकारी ने दी है। अधिकारी ने बताया कि वायुसेना ने इस काम में C-17 IL-76 हैवी लिफ्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया है। 

‘ईसाई बन जाओ…’ – कोई पादरी नहीं, बीवी ही कर रही पति को प्रताड़ित, मना करने पर फाड़ डाले हिंदू धर्म की पुस्तकें

मध्य प्रदेश के इंदौर में बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को पति को कथित रूप से पीटने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में महिला और उसके परिवार के 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रकाश नागले (36 वर्षीय) ने आरोप लगाया है कि उसे ईसाई धर्म में परिवर्तन करने के लिए 50,000 रुपए का लालच दिया गया था। जब उसने धर्मांतरण करने से मना कर दिया तो उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की। उन्होंने सभी धार्मिक पुस्तकों को भी फाड़ दिया। नागले ने बताया कि अनुपम ब्रदर नाम का एक शख्स 25 फरवरी 2021 से ही उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है।

मामला प्रकाश में आने के बाद द्वारकापुरी थाना प्रभारी सतीश द्विवेदी ने कहा, “हमने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 और 5 के तहत 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उन सभी पर दंगा करने, बलपूर्वक धर्मांतरण कराने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।”

पति-पत्नी के बीच आए दिन होता था विवाद

थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। इससे पहले पत्नी दो से तीन बार पति के खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज करवा चुकी है। पत्नी का कहना है कि नागले उसे और उसके बच्चे के साथ मारपीट करता है। हालाँकि, हमने ताजा मामला प्रकाश में आने के बाद शुक्रवार को नागले की पत्नी, 4 साले, साली उसके बेटों और सास-सुसर के खिलाफ मामला दर्ज कर किया है। इसकी जाँच जारी है।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी दूसरे व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी, विवाह या किसी अन्य जरिए से धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है। यह दंडनीय अपराध है।

इसके लिए कम से कम एक वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के धर्म परिवर्तन किए जाने पर कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा है। सामूहिक धर्म परिवर्तन करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा। पैतृक धर्म में वापसी को इस अधिनियम में धर्म संपरिवर्तन नहीं माना गया है। पैतृक धर्म वह माना गया है, जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म था।

इसके अलावा, अधिनियम की धारा 5 में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति धारा 3 के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी लेकिन जो पांच साल तक बढ़ सकती है।

15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने किया धर्म परिवर्तन

दरअसल, यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशों में जुटे कई ईसाई धर्म प्रचारकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। धर्मांतरण के लिए विदेशी धन का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौतियों को जन्म दे रहा है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने अगस्त 23, 2020 को एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रहता था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि मनदीप कुमार ने अगस्त 22, 2020 को शिवसिंहपुर गाँव में हिंदू दंपती के घर पर उन्हें जबरन बाइबिल पढ़ाने की कोशिश की थी।

वहीं, बिहार के नवादा जिले में 8 फरवरी, 2020 को 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था। ईसाई मिशनरी अब नेपाल के कई ठिकानों से भारतीय सीमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में मजबूती से दस्तक दे रहे हैं। इनका एकमात्र मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा ईसाई धर्म को मानने वाले लोग बनें।

इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर में केरल सरकार ने ‘सेक्युलर’ फरमान जारी किया था, “हिन्दू छोड़ ईसाई बन जाओ, नौकरियों का विशेष स्कोप है यानी हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बनने वालों के लिए विशेष तौर पर सुरक्षित किए गए इन पदों का वेतन ₹45,800 से ₹89000 रखा गया था।

12 साल की लड़की को मालिक ने जला डाला… क्योंकि जल्दी घर जाने की माँग रही थी इजाजत, 2 गिरफ्तार

असम में नागाँव जिले के राहा शहर में दिल दहला देने वाली वारदात हुई। वहाँ गुरुवार (22 अप्रैल 2021) को कथित तौर पर 12 साल की कार्बी लड़की को जला दिया गया।

टाइम 8 की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची एक घर में काम करती थी और घर के मालिक से जल्दी घर जाने की इजाजत माँग रही थी। लेकिन, घर के मालिक ने इससे इनकार कर दिया और इसके बाद आरोपित ने नाबालिग पर मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि यह घटना गुरुवार दोपहर 2 बजे की है।

बताया जा रहा है कि मृतक बच्ची सुमिला रॉन्गंगपी बीते 5 साल से आरोपित मालिक के घर पर काम कर रही थी।

इस संबंध में नागाँव पुलिस ने दो संदिग्धों प्रकाश बोर्थाकुर और उसके बेटे नयनमोनी बोर्थाकुर को गिरफ्तार किया है। यह भी बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में फास्ट ट्रैक जाँच की जा रही है।

वहीं इस घटना पर रोष व्यक्त करते हुए कार्बी स्टूडेंट्स यूनियन ने कहा, “हम कार्बी लड़की की निर्दयतापूर्वक हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। वह असम के मोरीगाँव के रोहा में अपने एम्प्लॉयर के यहाँ बीते 5 साल से काम कर रही थी। हम आरोपित को मौत की सजा और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की माँग करते हैं। अगर असम सरकार दोषियों को सजा नहीं दिला पाती है तो हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”

साभार: टाइम8

इस मामले में असम के पुलिस महानिदेशक ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि लड़की जिसके यहाँ काम करती थी, उसने इसे आत्महत्या बताया है। फिलहाल यह संदिग्ध है कि लड़की की हत्या कर उसे जलाया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में पुलिस अधीक्षक गौरव अभिजीत दिलीप ने जानकारी दी, “हमें एम्प्लॉयर से शुरुआती जानकारी मिली है कि मृतक लड़की ने आत्महत्या की है। प्रारंभिक जाँच के बाद हमारी टीम ने उसके दावे को संदिग्ध पाया है। “

पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि लड़की के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर मृतक लड़की की कथित तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वह घुटने के बल सिर को जमीन पर टेके हुए है। इसके अलावा तस्वीरों में एक प्लास्टिक जार और माचिस भी देखी जा सकती है।

100 करोड़ वसूली मामले में अनिल देशमुख के खिलाफ CBI की FIR: 10+ जगहों पर हो रही छापेमारी

CBI ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों से जुड़ा हुआ है। इसी संबंध में CBI कई जगह छापेमारी भी कर रही है।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने राज्य के गृह मंत्री (तब तक वो मंत्री पद पर थे) अनिल देशमुख के खिलाफ वसूली के आरोप लगाए थे। उन्होंने इसे लेकर हाई कोर्ट से CBI जाँच की माँग भी की थी। 5 अप्रैल को हाई कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे।

आदेश देते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह बेहद गंभीर हैं। इसी वजह से मामले की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए, जिसके लिए CBI जाँच की माँग मंजूर की जाती है।

परमबीर सिंह को भी फटकार

मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट देने का आरोप लगाया था।

इस पर बॉम्बे HC ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा है कि अगर पुलिस ऑफिसर होने के बावजूद किसी अपराध को लेकर FIR दर्ज नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वो अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं।

26 कब्रों के ऊपर रेस्टोरेंट, मालिक हैं कृष्णन कुट्टी… ताजे फूल चढ़े कब्रों के बीच बैठ लोग खाते-पीते हैं

लोग कब्रिस्तान में लाशों को दफनाने या अपने करीबियों को श्रृद्धांजलि देने जाते हैं लेकिन अगर आप अहमदाबाद में हैं तो आप कब्रिस्तान में बने रेस्टोरेंट में लंच या डिनर करने भी जा सकते हैं।

पुराने अहमदाबाद के खमाशा इलाके में एक रेस्टोरेंट है जो कब्रिस्तान पर बना हुआ है, नाम है ‘द न्यू लकी रेस्टोरेंट’। यह अपनी तरह की एक अनूठी जगह है जहाँ कब्रों के बीच बैठकर लंच या डिनर किया जाता है। यह रेस्टोरेंट उस स्थान पर बना, जहाँ कभी कब्रिस्तान हुआ करता था। रेस्टोरेंट के मालिक कृष्णन कुट्टी ने रेस्टोरेंट के निर्माण के समय कब्रिस्तान को यथावत बने रहने देने का निर्णय किया। इसके लिए उन्होंने कब्रों के बीच बचे स्थान में ही बैठने का बंदोबस्त कर दिया।

रेस्टोरेंट में हैं 26 कब्र, कुछ सैकड़ों साल पुरानी :

वैसे तो कब्रिस्तान के पास से गुजरने में भी हालत खराब हो जाए लेकिन द न्यू लकी रेस्टोरेंट में लोग मजे से बैठकर खाना कहते हैं और चाय पर चर्चा करते हैं। इस जगह पर कुल 26 कब्र हैं। यहाँ आने वाले ग्राहक भी इन कब्रों के बीच बैठकर नाश्ता करने या खाना खाने में किसी प्रकार का कोई संकोच नहीं करते हैं। 

द न्यू लकी रेस्टोरेंट में कब्रों के बीच बैठे ग्राहक (फोटो : पत्रिका)

भारत की स्वतंत्रता के बाद इस प्राचीन कब्रिस्तान को केएच मोहम्मद और कृष्णन कुट्टी नायर ने खरीदा। उन्होंने यहाँ एक नीम के पेड़ के नीचे एक चाय का स्टॉल शुरू किया। चाय के अलावा वो एक क्रीम बन भी बेचा करते थे, जिसे ‘मस्का बन’ के नाम से जाना जाता था।

जल्दी ही उनकी मसाला चाय पूरे इलाके में चर्चित हो गई। बढ़ते ग्राहकों की सुविधा के अनुसार उन्होंने पेड़ के चारों ओर एक निर्माण कराया और रेस्टोरेंट शुरू किया। कृष्णन कुट्टी की मसाला चाय और मस्का बन की जोड़ी दूर-दूर से ग्राहकों को खींच कर लाने लगी। तब उन्होंने इसके अलावा और भी स्वादिष्ट व्यंजनों को अपने मेनू में जोड़ लिया।

पहले तो अहमदाबाद के लोग कब्रिस्तान में खाना खाने या चाय पीने से डरते थे लेकिन जब उन्हें यह पता चल कि यहाँ स्थित कब्रें 19 वीं सदी के लोगों की हैं, तब उनके मन से डर निकलता गया। आज भी प्रत्येक सुबह कब्रों को साफ किया जाता है और उन पर ताजे फूल चढ़ाए जाते हैं।

पेंटर एमएफ हुसैन थे रेगुलर कस्टमर

द न्यू लकी रेस्टोरेंट प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों में बराबर प्रसिद्ध है। दूर-दूर से अहमदाबाद आने वाले लोग भी इस रेस्टोरेंट में आते हैं और कब्रों के बीच बैठकर खाना खाने का अनुभव लेते हैं। यह जगह चित्रकार एमएफ हुसैन की कुछ पसंदीदा जगहों में से थी। हुसैन जब भी अहमदाबाद रुकते, इस रेस्टोरेंट में जरूर आते थे।

अहमदाबाद के द न्यू लकी रेस्टोरेंट की दीवार पर टँगी एमएफ हुसैन की पेंटिंग

एमएफ हुसैन रेस्टोरेंट के एक अन्य मालिक केएच मोहम्मद के दोस्त थे। नब्बे के दशक में उन्होंने लगातार इस रेस्टोरेंट में आना शुरू कर दिया था। 1994 में मसाला चाय और मस्का बन का स्वाद लेते हुए उन्होंने एक पेंटिंग बनाई थी, जो आज भी रेस्टोरेंट की दीवार पर टँगी हुई है। पेंटिंग में दो ऊँट, एक दुर्ग अथवा किले के जैसा कोई निर्माण और रेगिस्तान दिखाई देता है। पेंटिंग में लिखा हुआ है, “सिर्फ एक ही खुदा है, और वह है अल्लाह और मोहम्मद उनके पैगंबर हैं।“

महिला पुलिस अफसर का गला रेता, ‘अल्लाहु अकबर’ के लगाए नारे: फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया- इस्लामी आतंकवाद

फ्रांस में एक महिला पुलिस अफसर की गला रेतकर हत्या कर दी गई। घटना राजधानी पेरिस से 56 किलोमीटर दूर Rambouillet की है। 49 साल की महिला अफसर के गले पर दो वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मृतक अफसर की पहचान स्टेफनी के तौर पर बताई है। वह 13 और 18 साल की दो बेटियों की माँ थी। 36 वर्षीय हमलावर ट्यूनीशियाई मूल का था। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह 2009 में गैरकानूनी तरीके से फ्रांस में दाखिल हुआ था। हालाँकि उसका कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं था। हमले के बाद पुलिस फायरिंग में वह जख्मी हो गया और बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। बीबीसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि वह ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रहा था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस इस्लामी आतंकवाद के आगे घुटने नहीं टेकेगा। इससे अब और सख्ती से निपटा जाएगा। प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से हम हार नहीं मानेंगे। हम बेहद सख्ती से इन लोगों से निपटने को तैयार हैं। एंटी टेरर प्रॉसीक्यूटर जीन फ्रेंकोइस ने कहा कि यह बहुत घृणित घटना है। हम उन लोगों के सबक सिखाएँगे जो इसमें शामिल हैं। धुर दक्षिणपंथी नेता और चुनावों में मैक्रों की मजबूत प्रतिद्वंद्वी मैरीन ली पेन ने हमले के बाद कहा कि पुलिस को और अधिक सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पुलिस का समर्थन करें, अवैध प्रवासियों को बाहर निकाले, इस्लामी कट्टरपंथ का खात्मा करें।” हमले के बाद आतंकरोधी जाँच शुरू कर दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार मृतक महिला एडमिनिस्ट्रिटिव अफसर थीं। हमले के वक्त वह लंच ब्रेक से वापस लौट रही थीं। चश्मदीदों के अनुसार हमलावर पुलिस स्टेशन के बाहर मोबाइल पर बात कर रहा था और उसने अफसर के सुरक्षा द्वार से बाहर आने का इंतजार किया।

गौरतलब है कि हाल के समय में फ्रांस में इस्लामिक आतंकवाद की कई घटनाएँ सामने आई हैं। शिक्षक सैमुअल पैटी को इस्लामी कट्टरपंथी अब्दुल्लाख ने सिर्फ इसीलिए मार डाला था, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर अपनी कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स दिखाए थे।

रेमडेसिविर की जगह कोरोना मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी नर्स, असली वाला कालाबाजारी के लिए प्रेमी को दे देती

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मारामारी मची हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ तत्व कालाबाजारी में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश से इस इंजेक्शन के गोरखधंधे का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। भोपाल के एक अस्पताल की नर्स मरीजों की रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराकर उसे अपने प्रेमी को ब्लैक मार्केट में बेचने के लिए दे देती थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के जेके अस्पताल की एक नर्स मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर, असली रेमडेसिविर बेचने के लिए अपने प्रेमी को दे देती थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब राजधानी की कोलार पुलिस ने इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान गिरधर कॉम्प्लेक्स, दानिशकुंज निवासी झलकन सिंह के तौर पर हुई। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका शालिनी जेके अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ है। वह मरीज को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर असली उसे दे देती थी। मामले का खुलासा होने के बाद से आरोपित नर्स फरार है।

20-30 हजार रुपए में बिकता था एक इंजेक्शन

पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने कबूल किया है कि उसकी प्रेमिका अस्पताल में मरीजों को लगाने के लिए मिलने वाले इंजेक्शन चोरी कर उसे दे देती थी। कोरोना संक्रमितों को वह नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी। एक इंजेक्शन को वह 20-30 हजार रुपए में बेचता था। यहीं नहीं आरोपित ने जेके अस्पताल के ही डॉक्टर शुभम पटेरिया को भी 13 हजार रुपए में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचा था, जिसका उसे वर्चुअल पेमेंट भी किया गया था।

दोनों पर रासुका के तहत होगी कार्रवाई

भोपाल पुलिस के डीआईजी इरशाद वली ने कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए धरपकड़ की जा रही है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 389, 269, 270 समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। डीआईजी ने ऐसे सभी आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।

मरीज के परिजनों की वजह से हुआ गोरखधंधे का खुलासा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित झलकन ने जेके अस्पताल में ही भर्ती एक मरीज के परिजनों के साथ रेमडेसिविर को लेकर सौदा हुआ था। लेकिन इसके रेट पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही थी। इसी बीच कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। पुलिस ने इसके बाद घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

इससे पहले राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर और एक एमबीबीएस छात्र को रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा था। कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के परिजन की शिकायत पर पुलिस ने डॉक्टर मोहम्मद अबीर और और उसके साथी को गिरफ्तार किया था।

2020 में अस्पताल के हर बेड पर ऑक्सीजन, होम डिलिवरी भी… 2021 में दिल्ली में प्लांट नहीं होने का रोना रो रहे केजरीवाल

“दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। अगर यहाँ ऑक्सीजन का प्लांट नहीं है तो क्या दिल्ली के लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी? कृपया सुझाव दें कि जब दिल्ली के लिए एक ऑक्सीजन टैंकर को दूसरे राज्य में रोका जाता है तब केंद्र सरकार में मुझे किससे बात करनी चाहिए?”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुई उस बैठक में कही, जिसका वह गुपचुप लाइव कर रहे थे।

दिलचस्प बात ये है कि केजरीवाल उसी आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के मुखिया हैं जिसने बीते साल ये ऐलान किया था कि जिन-जिन अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज हो रहा है उसके हर बेड पर ऑक्सीजन का प्रबंध दिल्ली सरकार करेगी। दिल्ली सरकार का यह ऐलान उस वक्त अखबारों में विस्तार से छपा भी था और 12 जून 2020 को AAP के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसे शेयर भी किया गया था।

पार्टी ने तब ये भी कहा था कि जहाँ पाइप की सुविधा नहीं होगी, वहाँ सिलिंडर की व्यवस्था होगी और इसके लिए दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन कोविड फंड के जरिए सभी चिकित्सा उपकरण खरीदने का इंतजाम उन पर है।

इसके बाद 5 जनवरी 2021 को स्थिति के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से देश के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 201.58 करोड़ रुपए आवंटित किए। इस रकम से देश भर में 162 पीएसए मेडिकल ऑक्सीजन जेनेरेशन प्लांट्स लगाने का ऐलान हुआ। 

सरकार ने बताया कि इन 162 प्लांट्स की क्षमता 154.19 मिट्रिक टन होगी। इन ऑक्सीजन प्लांट को 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लगाया जाएगा। 201 करोड़ रुपए में 137.33  करोड़ रुपए मशीनों की आपूर्ति, कमीशनिंग और सेंट्रल मेडिकल सप्लाई स्टोर का मैनेजमेंट शुल्क है। 64.25 करोड़ रुपए वार्षिक रख-रखाव के लिए खर्च किया जाएगा।

केंद्र सरकार के इस 5 जनवरी के आदेश में महाराष्ट्र में 10 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने की अनुमति दी गई और दिल्ली में 8 ऑक्सीजन प्लांट। आज दिल्ली की स्थिति जब महामारी के कारण बदतर हो गई है। 24 घंटों में 24 हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं। अस्पताल के बाहर मरीज ऑक्सीजन के अभाव तड़प रहे हैं तब सोशल मीडिया पर सवाल हो रहा है कि जब 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति मिली तो आखिर उन पर काम क्यों नहीं हुआ। 

केजरीवाल सरकार ने 2020 में कोविड मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन पहुँचाने का ऐलान जरूर किया, लेकिन उस दिशा में काम करने की जगह उत्तर प्रदेश में ‘जन-जन ऑक्सीजन’ अभियान चलाने की घोषणा कर दी। साथ ही AAP नेता दिलीप पांडे को इसका जिम्मा सौंपते हुए कहा गया कि यूपी सरकार से उम्मीद नहीं है। इसलिए दिल्ली का मॉडल यूपी के लोग अपने हाथ में लेंगे और इसके लिए दिलीप पांडे यूपी के गाँव-गाँव जाएँगे।

सोशल मीडिया यूजर्स ने उतार रहे केजरीवाल पर गुस्सा

बता दें कि दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर मचे हाहाकार के बीच सोशल मीडिया में केजरीवाल सरकार को पुराने वादों की याद दिलाते हुए स्क्रीनशॉट खूब वायरल हो रहे हैं। अगस्त 2020 में आम आदमी पार्टी ने घर-घर ऑक्सीजन भेजकर जान बचाने का भरोसा दिया था।

अब इसी को शेयर करके यूजर्स AAP सरकार से सवाल कर रहे हैं। एक यूजर का पूछना है कि दिल्ली ने विज्ञापन वाली सरकार के लिए वोट नहीं दिया। अब नए अस्पताल कहाँ है? पार्टी को नए मोहल्ला क्लीनिक खोलने की बजाय, फंड का इस्तेमाल बने बनाए स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने में करना चाहिए और दवाई उपलब्ध करवानी चाहिए। इसी प्रकार दूसरे यूजर ने केजरीवाल सरकारों को वादे पूरे करने में फेल बताया और कहा कि अरविंद केजरीवाल सिर्फ टीवी पर छाए रहना चाहते हैं। एक ने तो ये भी कहा कि 6 माह बीत गए पर ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं हुआ। पता नहीं कैसे दिल्ली वाले इस गिद्ध को झेल रहे हैं।

PTI का दावा निकला झूठा, गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई 25 मौतें

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने शुक्रवार (23 अप्रैल) को एक रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन के कम दवाब के चलते 25 लोगों की मौत हो गई। पीटीआई ने ट्वीट कर कहा सूत्रों ने उसे बताया है कि निम्न ऑक्सीजन प्रेशर के कारण 25 गंभीर रूप से बीमार मरीजों की मौत हुई है। बाद में यह दावा झूठा निकला।

प्रसार भारती ने पीटीआई की खबर को बताया फेक

प्रसार भारती ने बताया है कि अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मोहसिन वाली ने यह स्पष्ट किया है कि ये मौतें निम्न ऑक्सीजन प्रेशर के कारण नहीं हुई हैं। सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन ने भी यह पुष्टि की है कि मौतों के पीछे ऑक्सीजन की कमी को कारण बताने वाली रिपोर्ट्स गलत हैं।

इसी बीच महामारी से निपटने के लिए भारतीय वायु सेना भी सक्रिय हो गई है। वायु सेना ऑक्सीजन कंटेनर, अत्यावश्यक औषधियों, स्वास्थ्य उपकरणों और स्वास्थ्य कर्मियों को एयरलिफ्ट करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचा रही है। हालाँकि Covid-19 के तेजी से बढ़ते संक्रमण के कारण कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की समस्या उत्पन्न हो रही है।

देश में बढ़ते संक्रमण के बीच ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। हाल ही में भारतीय बहुराष्ट्रीय फार्मा कंपनी जायडस कैडिला की ‘विराफिन’ नामक दवा के उपयोग को डीजीसीआई ने आपातकालीन मँजूरी दी है। जायडस की यह दवा वयस्कों में Covid-19 के संक्रमण के इलाज के लिए उपयोगी है। जायडस ने इस दवा के माध्यम से अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता को कम करने का दावा किया है।

मुकेश अंबानी ने ₹592 करोड़ में खरीदा ब्रिटेन का 900 साल पुराना स्टोक पार्क: 300 एकड़ में है फैला, जेम्स बांड की हो चुकी है शूटिंग

ब्रिटेन के मशहूर कंट्री क्लब और लग्‍जरी गोल्फ रिसॉर्ट स्टोक पार्क को मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने खरीद लिया है। 300 एकड़ में फैला स्टोक पार्क करीब 900 साल पुराना है। जेम्स बांड फिल्म की शूटिंग यहाँ हो चुकी है। यह पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। रिलायंस ने यह सौदा 57 मिलियन पाउंड (लगभग 592 करोड़ रुपए) में किया है।

यह सौदा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रियल इंवेस्टमेंट्स एंड होल्डिंग्स लिमिटेड ने 22 अप्रैल 2021 को की। बीते चार साल में रिलायंस ने कुल 3.3 बिलियन डॉलर की कंपनियों के अधिग्रहण का ऐलान किया है। इसमें रिटेल सेक्टर की 14 फीसद, टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकॉम सेक्टर की 80 प्रतिशत कंपनियाँ शामिल हैं। इसके अलावा ऊर्जा की 6 प्रतिशत कंपनियाँ शामिल हैं।

स्टोक पार्क की वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक इसका इतिहास 900 वर्षों से भी पुराना है। 1908 तक इसका उपयोग निजी आवास के तौर पर किया जाता था। जेम्स बॉन्ड की दो फिल्में गोल्डफिंगर (1964) और टुमारो नेवर डाइज (1997) को यहीं फिल्माया गया था। जार्जियाई युग की इस हवेली के 49 लक्जरी बेडरूम और सुइट्स, 27-होल चैंपियनशिप गोल्फ कोर्स, 13 टेनिस कोर्ट और 14 एकड़ के प्राइवेट गार्डन दुनिया भर के अमीर पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

इससे पहले 2019 में रिलायंस ने ब्रिटिश टॉय स्टोर चेन हैमिलिस को खरीदा था। गौरतलब है कि ब्रिटेन अमीर भारतीयों के लिए रियल एस्टेट हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है। वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीईओ अदार पूनावाला ने भी मेफेयर में एक संपत्ति किराए पर ली है।