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स्पोर्ट्स फंड से कश्मीर में आतंकवाद का खेला, हुर्रियत को ₹5 करोड़-लश्कर आतंकी को ₹10 लाख: महबूबा के करीबी की करतूत

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दायर की गई चार्जशीट से जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों, आतंकियों और मुख्यधारा के नेताओं के बीच पर्दे के पीछे चल रहे गठबंधन का खुलासा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के करीबी और पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान पारा ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकी कमांडर अबू दुजाना को 10 लाख रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराई थी। उक्त आतंकी भारतीय सुरक्षा बलों के कई जवानों की हत्या में वांछित था।

पारा के बारे में पता चला है कि वह नियमित रूप से आतंकियों और अलगाववादियों कि फंडिंग कर रहा था, ताकि घाटी में स्थिति खराब बनी रहे। साथ ही चार्जशीट में PDP द्वारा आतंकियों और अलगगववादियों के तुष्टीकरण की नीति के बारे में भी खुलासा किया गया है। बताया गया है कि वहीद पारा ने 2016 में लश्कर के कश्मीर यूनिट के सरगना पाकिस्तानी मूल के अबू दुजाना को वित्तीय मदद मुहैया कराई थी।

साथ ही उसने पाकिस्तान के एक और खूँखार आतंकी नवीद जट को भी घाटी में आतंक फैलाने के लिए साधन और समर्थन मुहैया कराया था। ये वही आतंकी है, जो पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के मामले में प्रमुख संदिग्ध है। वहीं दुजाना के पर 15 लाख रुपए का इनाम था। उसने भारतीय सशस्त्र बलों के कई जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों की जान भी ली थी। अगस्त 11, 2017 को पुलवामा में हुए एक मुठभेड़ में दुजाना को मार गिराया गया था।

उसके मारे जाने के बाद नवीद जट ने ही लश्कर के कमांडर के रूप में कमान संभाली थी। वो भी पाकिस्तानी मूल का ही था। फरवरी 6, 2018 को SHMS अस्पताल में एक पुलिस एस्कॉर्ट पार्टी पर हमला हुआ था। इस हमले में नवीद जट भी भाग निकला था और उसकी निगरानी में तैनात दो सुरक्षा गार्ड्स की हत्या कर दी गई थी। वह अनंतनाग में एक मुठभेड़ में 6 जवानों की हत्या का भी आरोपित था।

नवंबर 29, 2018 को उसे सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मारा गिराया था। वहीद पारा को सतत स्पोर्ट्स काउंसिल का अध्यक्ष भी बनाया गया था। लेकिन, उसने खेल को बढ़ावा देने के लिए आई 5 करोड़ रुपए की फन्डिंग को अलगाववादियों के लिए इस्तेमाल किया। उसने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी गुट को घाटी में पत्थरबाजी के लिए 5 करोड़ रुपए दिए। इन रुपयों से युवाओं को बहक कर घाटी में अराजकता फैलाई गई।

ये रुपए गिलानी के दामाद को दिए गए थे। ये वो समय था, जब बुरहान वानी के मारे जाने के बाद प्रदेश में स्थिति अशांत थी। उस वक़्त घाटी में पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी हिंसा देखने को मिली थी और इस फन्डिंग ने आग में घी का काम किया। 200 से अधिक लोग मारे गए थे और 11,000 घायल हुए थे, जिनमें 3000 सुरक्षा बलों के जवान थे। 2016 की इस अराजकता में वहीद पारा का करीबी अल्ताफ अहमद शाह आतंकियों से लगातार संपर्क में था।

वह अपने रिश्तेदार यूसुफ लोन गडोरा के माध्यम से भी आतंकियों की लगातार मदद कर रहा था। कुछ दिनों बाद हुई एक मुठभेड़ में गडोरा को मार गिराया गया था। साथ ही पारा ने सरकारी मशीनरी और सरकार में अपने पद का दुरुपयोग आतंकियों के लिए करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने अपनी सरकारी गाड़ी से आतंकियों को एके-47 और अन्य खतरनाक हथियारों की खेप पहुँचाई। साउथ कश्मीर में घुसपैठ वाले इलाका कुपवाड़ा में उसने हथियारों की सप्लाई की।

चूँकि वो सरकार में शामिल था, इसीलिए उसकी गाड़ी कि चेकिंग नहीं की जाति थी और वो अपनी एस्कॉर्ट पार्टी के साथ अक्सर कुपवाड़ा जाता था और आतंकियों को हथियार देता था। गुपकर रोड स्थित अपने घर में उसने हिजबुल आतंकी इरफान शफ़ी मीर के साथ कई बार बैठक की थी। ये वो जगह है, जहाँ कश्मीर के सारे VIP रहते हैं। इन्हीं बैठकों के दौरान उसने नवीद बाबू नामक आतंकी को देने के लिए इरफान को 10 लाख रुपए दिए।

एक जाँच अधिकारी ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी आतंकियों की मदद ली गई थी। जनवरी 11, 2020 को इरफान शफ़ी मीर गिरफ्तार हुआ और उसे आतंकियों का समर्थन करने वाले एक अन्य व्यक्ति पूर्व DSP देविंदर सिंह के साथ जम्मू के हीरानगर जेल में रखा गया है। इन लोगों के दो आतंकी और एक वकील साथियों ने पाकिस्तान यात्रा की योजना भी बनाई थी। अब पता लगाया जा रहा है कि पारा ने अपनी पार्टी के फंड का आतंकियों के लिए इस्तेमाल किया, या ‘खेलों इंडिया’ कैम्पेन का।

इसी बीच गुरुवार (मार्च 25, 2021) को PDP की मुखिया महबूब मुफ्ती भी ED के समक्ष पेश होंगी। उनसे एजेंसी के श्रीनगर के दफ्तर में पूछताछ होगी। उन्होंने निवेदन किया था कि उनसे दिल्ली में पूछताछ न की जाए। उससे पहले वो जाँच एजेंसी द्वारा मिले समन को रद्द कराने के लिए कोर्ट भी गई थीं, लेकिन वहाँ उनकी बात नहीं मानी गई। 22 मार्च को भी उन्हें पेश होना था, लेकिन उस दिन अन्य कार्यक्रमों का बहाना बना कर वो नहीं गई थीं।

बता दें कि ये पूरा मामला हिजबुल कमांडर नवीद बाबू के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह व अन्य की गिरफ्तारी से जुड़ा है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इसमें पीडीपी नेता वहीद उर रहमान को भी आरोपित बनाया है। रहमान ने हाल ही में डीडीसी चुनाव में पुलवामा से जीत हासिल की है, मगर इस केस के चलते अभी वह जेल में है। जाँच में ये भी पाया गया कि वह इरफान शफी मीर, दविंदर सिंह और सैयद नवीद मुश्ताक के साथ इस अपराधिक साजिश में शामिल था।

काशी में क्यों खेली जाती है चिता-भस्म की होली, भूतभावन महादेव अब भी आते हैं महाश्मशान मणिकर्णिका?

भूतभावन बाबा विश्वनाथ के बिना काशी अधूरी है। यही वजह है कि आदिकाल से ही महादेव की नगरी में होली सहित किसी उत्सव की शुरूआत भी ‘बाबा’ से ही होती है। रंगभरी एकादशी से ही बाबा के साथ अबीर-गुलाल खेलकर होली का आगाज हो जाता है। यहाँ यह बता देना जरूरी है कि ‘बाबा’ बनारस में भगवान भोलेनाथ, काशी विश्वनाथ को कहते हैं।

महाश्मशान की नगरी काशी में अन्नपूर्णा के रूप में निवास करने वाली देवी गौरी के पहली बार काशी आगमन के साथ ही बनारस में होली का आगाज़ हो जाता है। इसी दिन से बनारस में रंग खेलने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है जो लगातार छह दिनों तक चलता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी पधारे थे। इस खुशी में भगवान शिव के भक्त-गण रंग-गुलाल उड़ाते हुए और खुशियाँ मनाते हुए आए थे। यहाँ बता दें कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी बुधवार (मार्च 24, 2021) थी और महाश्मशान की होली गुरुवार (मार्च 25, 2021) को है।

मस्तानों की नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में होली खेली जाती है। यह दुनिया की सबसे अनूठी होली है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शिव रंगभरी एकादशी के दिन माता पार्वती और पुत्र गणेश के साथ गौना कराकर काशी लौटते हैं तो उनका स्वागत सभी लोकों के लोग करते हैं लेकिन उसमें शिव के भूत-पिशाच भक्त गण और दृश्य-अदृश्य आत्माएँ मौजूद नहीं होतीं। इसलिए रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में महादेव अपने भक्तों के साथ भस्म से होली खेलते हैं। यह भस्म कोई साधारण भस्म नहीं होती, बल्कि इंसान के शव जलने के बाद पैदा होने वाली राख होती है।

इस सनातनी धरा की उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए आज भी काशी में हर वर्ष रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। वे दूल्हे के रूप में सजाए जाते हैं। फिर विधिपूर्व​क हर्षोल्लास से बाबा विश्वनाथ के संग माता गौरा का गौना कराया जाता है। पूरी परंपरा का बनारस में विधिवत पालन होता है।

गौना के लिए जाते भक्त गण और बाबा काशी विश्वनाथ का भव्य शृंगार

काशीवासी आज भी बाराती, भक्त तो शिव के गण बनते हैं। महाशिवरात्रि पर जो गण बाराती बनकर शिवविवाह में शामिल हुए थे वही अब बाबा की पालकी लेकर गौना कराने निकलते हैं। माँ गौरी की विदाई कराकर शिव जब मंदिर की तरफ प्रस्थान करते हैं तो काशी में शिव के गण बने शिव-भक्त रंग-गुलाल उड़ाते हुए साथ चलते हैं।

बनारस में कहा जाता है कि महादेव कितनी भी मस्ती में क्यों न हों लेकिन अपने दृश्य-अदृश्य उन गणों को उत्सव में बिसरा दें यह हो नहीं सकता। वे गण जो थोड़े डरावने हैं। वही जो बिना बुलाए जब शिव बारात में सब चलें गए तो द्वारचार में माँ गौरा की माँ ऐसी बारात और बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं। इसलिए, कहा जाता है कि गौना में ऐसे भूत-पिचास, अदृश्य आत्माएँ थोड़ी दूरी बना लेती हैं ताकि सब सकुशल संपन्न हो जाए।

मसाने की होली

अब अपने उन्हीं गणों के लिए भूतभावन भगवान महादेव गौना के अगले दिन यानी रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद महाश्मशान मणिकर्णिका पर स्वयं अपने दृश्य-अदृश्य गणों के साथ उत्सव मनाने अर्थात होली खेलने आते हैं।

भारतीय सनातन संस्कृति की इसी परंपरा पर बात करते हुए पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र बताते हैं कि बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली होती है। घाट से लेकर गलियों तक होली के हुड़दंग का हर रंग अद्भुत होता है। महादेव की नगरी काशी की होली भी अड़भंगी शिव की तरह ही निराली है।

डमरू की नाद पर उत्सव का आगाज

वह कुछ याद करते हुए गुनगुनाने लगते हैं कि खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। वह कहते हैं कि लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता भस्म भर झोरी… दिगंबर खेले मसाने में होरी….। आखिर ऐसा दृश्य कहाँ देखने को मिलेगा कि भगवान शिव के गण अपने झोली में चिता भस्म की राख भरकर मन भर होली खेलकर तृप्त हो जाते हैं। उनका कहना है कि काशी की होली में राग और विराग दोनों नजर आते हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र ठहरकर कुछ समझाते हुए आगे गुनगुनाते लगते हैं कि गोप न गोपी श्याम न राधा, ना कोई रोक ना कवनो बाधा, ना साजन ना गोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। भावविभोर हो वह कह उठते हैं कि शिव की नगरी काशी की होली की बात ही निराली है। जब महादेव महाश्मशान में उतरते हैं तो भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज के गोरी, धन-धन नाथ अघोरी… दिगंबर खेलैं मसाने में होरी।

हरिश्चंद्र घाट के श्मशान में भस्म होली खेलते भक्त गण

परंपराओं के अनुसार, आज भी महाश्मशान मणिकर्णिका पर, भगवान शिव के स्‍वरुप बाबा मशाननाथ की पूजा कर श्‍मशान घाट पर चिता भस्‍म से उनके गण होली खेलते हैं। शैव-शाक्त, अवघड़ से लेकर तमाम महादेव के भक्त-गण इस अवसर का साक्षी होने के लिए कई जन्मों तक प्रतीक्षा करते हैं। कहा तो यह भी जाता है जब तक महादेव न बुलाएँ तब तक किसी को ऐसा सौभाग्य नहीं मिलता कि वह स्वयं काशी में महादेव संग होली खेलने का पुण्य अवसर प्राप्त करे।

काशी मोक्ष की नगरी है और दूसरी मान्‍यता यह भी है कि यहाँ भगवान शिव स्‍वयं तारक मंत्र देते हैं। लिहाजा यहाँ पर मृत्‍यु भी उत्‍सव है और होली पर चिता की भस्‍म को उनके गण अबीर और गुलाल की भाँति एक दूसरे पर फेंककर सुख-समृद्धि-वैभव संग शिव की कृपा पाने का उपक्रम भी करते हैं।  

खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी
भूत पिसाच बटोरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी
लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता-भस्‍म भर झोरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी
गोपन-गोपी श्‍याम न राधा, ना कोई रोक ना कौनऊ बाधा ना साजन ना गोरी
दिगंबर खेले मसाने में होरी
नाचत गावत डमरूधारी, छोड़ै सर्प-गरल पिचकारी पीतैं प्रेत-धकोरी
दिगंबर खेले मसाने में होरी
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज कै गोरी धन-धन नाथ अघोरी
दिगंबर खेलैं मसाने में होरी

खैर, चलते-चलते आपको यह भी बता दूँ कि होली बनारस और बिहार के गया में बुढ़वा मंगल तक चलता है। होली के बाद आने वाले मंगलवार को काशीवासी बुढ़वा मंगल या वृद्ध अंगारक पर्व भी कहते हैं। होली युवाओं के जोश का त्यौहार है, लेकिन बुढ़वा मंगल में बुजुर्ग लोगों का उत्साह भी दिखाई पड़ता है।

बुढ़वा मंगल पर सुर लहरियों से सराबोर करते काशी के धरोहर डॉ. राजेश्वर आचार्य

बनारस में बुढ़वा मंगल के अवसर पर गीत-संगीत की महफ़िलों के साथ मेला भी लगता है। बनारस के इस पारम्परिक मेले से प्रमुख साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र भी सम्बद्ध रहे हैं और आज भी बनारस के संगीत घराने के अलावा तमाम सम्बुद्ध काशीवाशी इस आयोजन का हिस्सा होते हैं।

CM योगी के ‘रिपोर्ट कार्ड’ को झुठलाने के लिए BBC ने बलवे की संख्या को बताया दंगा: UP पुलिस ने फैक्ट देकर किया ‘नंगा’

19 मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को चार साल पूरे हुए। इस मौके पर यूपी सरकार ने अपनी उपलब्धियों को गिनाया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यूपी सीएम ने कहा कि प्रदेश में अब कोई दंगा नहीं होता है, जो सरकार की उपलब्धि है।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य की श्रेणी से हटकर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभर रही है। यूपी सीएम ने कहा कि आज ईज़ ऑफ डूइंग की लिस्ट में भी यूपी नंबर दो पर है, हमने काफी लंबी छलाँग लगाई है। इस दौरान यूपी सरकार ने रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया।

बीबीसी ने यूपी सरकार के दावों को गलत साबित करने के लिए एक रिपोर्ट पब्लिश किया, हालाँकि, यूपी पुलिस ने उन्हें आईना दिखा दिया। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट का हेडलाइन दिया, “योगी आदित्यनाथ के यूपी में चार साल के रिपोर्ट कार्ड के दावों की हक़ीक़त।”

बीबीसी ने दावा किया कि साल 2012 और 2015 में अपराध के बढ़ने की दर साल 2019 के मुकबाले कम थी। तब अपराध 1.5 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की दर से बढ़े थे। योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में यूपी की सत्ता सँभाली थी। इस साल अपराधों में 10 फ़ीसदी की बढ़त हुई, अगले साल भी अपराध बढ़ने की दर 10 फ़ीसदी ही रही जबकि साल 2019 में ये 3 प्रतिशत थी।

बीबीसी रिपोर्ट का हिस्सा

इसके अलावा उन्होंने बीते चार सालों में प्रदेश में दंगा न होने की उत्तर प्रदेश सरकार के दावे को गलत बताया। इसके लिए उन्होंने एनसीआरबी के डाटा का हवाला दिया। उनका कहना है, “उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों की वारदातें 2018 के बाद से कम तो हुई हैं लेकिन अभी भी यूपी में दंगों से जुड़े मामले महाराष्ट्र और बिहार के बाद सबसे ज़्यादा दर्ज किए जाते हैं। एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक यूपी में साल 2016 में 8016 दंगों से जुड़े मामले दर्ज हुए। साल 2017 में ये संख्या 8990 रही, जबकि साल 2018 में 8909 और 2019 में 5714 मामले दर्ज किए गए। योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में सत्ता सँभालने के बाद भी ये दावा किया था कि यूपी में दंगे बंद हो गए हैं, लेकिन आधिकारिक डाटा उनके दावों से ठीक उलट है।”

यूपी पुलिस ने उनके दावे का खंडन करते हुए सच्चाई बताई। यूपी पुलिस ने ट्वीट करते हुए लिखा, “आपके द्वारा NCRB रिपोर्ट के आधार पर 2016 से 2019 तक 8016, 8990, 8909, 5714 दंगो का उल्लेख किया गया है। सच्चाई यह है कि प्रदेश में विगत 04 वर्षों में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ है। जिस आँकड़े का उल्लेख आपके द्वारा किया गया है वह वस्तुतः बलवे की संख्या है जिसमें भी कमी आई है।” इस ट्वीट में उन्होंने साल 2016 से 2019 तक के क्राइम रेट का आँकड़ा भी शेयर किया है। जिसमें बताया गया है कि साल 2016 में 3.7, 2017 में 4.0, साल 2018 में 4.0 और साल 2019 में 2.5 है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ की सरकार अक्सर जीरो टॉलेरेंस की बातें करती हैं। ऐसे में भाजपा की सरकार आने के बाद से पुलिस और अपराधियों के बीच कई मुठभेड़ हुए हैं, जिनमें आत्मरक्षा में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और कई अपराधी मारे गए।

विपक्ष उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की संख्या को लेकर अक्सर सरकार को घेरता है और तमाम तथ्यों के सामने आने के बावजूद उन्हें फर्जी बताता है। ‘दैनिक जागरण’ के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 4 वर्ष में उत्तर प्रदेश में अब तक 135 अपराधी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

इस वर्ष पिछले ढाई महीने में हुई ऐसी कई मुठभेड़ों में 6 अपराधी ढेर हो गए। वार्षिक आँकड़ों की बात करें तो 2017 में पुलिस और अपराधियों की मुठभेड़ में 28, वर्ष 2018 में 41, वर्ष 2019 में 34 जबकि वर्ष 2020 में 26 अपराधी मारे गए हैं। इनमें 111 ऐसे थे, जो इनामी बदमाश थे।

विभाजन के बाद पाकिस्तान में सीता रोड का नाम बदलकर हुआ था रहमानी नगर: तेज आँधी ने दिखाई पुरानी विरासत

पाकिस्तान में देवी सीता के नाम पर रखे गए रोड का नाम विभाजन के बाद बदल कर रहमानी नगर कर दिया गया। एक सोशल मीडिया यूजर ने इसकी जानकारी दी। दरअसल, हाल ही में आए तूफान ने बोर्ड के ऊपर लगे लोहे की शीट को उड़ा दिया, जिसके बाद रोड का असली नाम सामने आ गया, जो कि विभाजन से पहले देवी सीता के नाम पर रखा गया था।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में क्षेत्र के नाम को प्रदर्शित करते हुए एक पत्थर की संरचना के ऊपर रखी लोहे की टूटी हुई शीट की तस्वीर शेयर करते हुए, सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “दादू जिले में ‘सीता रोड’ के रूप में छोटा स्टेशन स्थापित किया गया था, लेकिन कुछ मजहबी तत्वों द्वारा विभाजन के बाद इसका नाम रहमानी नगर के रूप में बदल दिया गया। हालाँकि, कल आए तेज तूफान ने रहमानी नगर के साथ लगी लोहे की शीट को हटा दिया और मूल नाम उजागर कर दिया।”

चित्र को करीब से देखने से यह स्पष्ट होता है कि शुरू में ’सीता रोड’ को पत्थर की संरचना पर उकेरा गया था, जिसे बाद में एक धातु की शीट से ढँका गया था जिस पर उर्दू में ‘रहमानी नगर’ अंकित किया गया था। कल, कथित तौर पर क्षेत्र में चल रही तेज हवाओं ने पत्थर की संरचना के ऊपर लगी लोहे की शीट के एक हिस्से को हटा दिया, जिसके बाद जगह का मूल नाम उभर कर सामने आ गया।

हालाँकि, पाकिस्तान में ‘सीता रोड’ एकमात्र सड़क नहीं है जिसका नाम पाकिस्तान की पहचान को वापस लाने के लिए देश के विभाजन के बाद बदला गया था। इतने वर्षों में पाकिस्तान ने कई ऐसी सड़कों, पारंपरिक स्थानों का नाम बदल दिया है जो कभी हिंदुओं और सिखों के नाम पर थे। उदाहरण के लिए, कराची में राम बाग, आराम बाग बन गया, लाहौर में कृष्ण नगर का नाम बदलकर इस्लामपुर रखा गया, कसूर के वान राधा राम का नाम बदलकर हबीबाबाद कर दिया गया, जबकि भाई फेरू का नाम बदलकर फूल नगर कर दिया गया।

इसके अलावा, मध्य लाहौर में, जैन मंदिर चौक का नाम एक हिंदू मंदिर के नाम पर रखा गया था। मंदिर को 1992 में अयोध्या, भारत में बाबरी मस्जिद के विनाश का ‘बदला’ लेने के लिए ध्वस्त कर दिया गया था और इस स्थान का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक रख दिया गया था।

ऐसे कई और उदाहरण हैं। विभाजन के पूर्व लाहौर में, लक्ष्मी चौक शहर के सबसे बड़े दिवाली समारोहों में से एक की मेजबानी करता था। यह भी एक उर्दू पत्रकार के नाम पर मौलाना जफर अली खान चौक के नाम में बदल दिया गया, जिन्होंने अपने अखबार के माध्यम से अहमदिया समुदाय के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी।

मूल रूप से, इस्लामी चरमपंथ के कारण पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक हिंदुओं की दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है। वर्षों से, हिंदू लड़कियों के अपहरण और इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर होने की कई रिपोर्टें हैं। इसके अलावा, हिंदू मंदिरों पर हमले किए जाने के कई उदाहरण हैं और हिंदू घरों को सरकार के मौन समर्थन के साथ जमीन पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है।

‘अजान’ के शोर पर आपत्ति के बाद बोले योगी के मंत्री- अब बुर्के से मुस्लिम महिलाओं को दिलाएँगे मुक्ति

मस्जिदों पर होने वाली अजान को लेकर आपत्ति जताने वाले योगी सरकार के राज्य मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल ने अब बुर्के को लेकर सवाल खड़े किए हैं। राज्य मंत्री ने ‘बुर्के को अमानवीय व्यवहार व कुप्रथा’ करार देते हुए कहा कि देश में तीन तलाक की तर्ज पर ‘मुस्लिम महिलाओं को बुर्के से भी मुक्ति दिलाई जाएगी।’ इस दौरान उन्होंने दावा किया कि अनेक मुस्लिम देशों में बुर्के पर पाबंदी है और यह अमानवीय व्यवहार व कुप्रथा है।

खबरों के मुताबिक, राज्य मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ला ने कहा कि विकसित सोच वाले लोग न तो बुर्का पहन रहे हैं और न ही इसे बढ़ावा दे रहे हैं। तो वहीं, अब इस कुप्रथा से भी देश की मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाई जाएगी। कहा कि जैसे तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाई गई, वैसे ही इससे भी मुक्ति दिलाई जाएगी। इससे पहले योगी सरकार के मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल ने भी लाउडस्पीकर की आवाज पर आपत्ति जताते हुए बलिया जिले के जिलाधिकारी को दो पन्नों की एक चिट्ठी भेजी थी।

चिट्ठी में कहा गया था कि मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर से की जाने वाली तकरीरों से उन्हें योग, पूजा आदि करने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकरों की ध्वनि की मात्रा अदालत के आदेशों के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा कि विद्यालय के प्रबंधक, छात्र-छात्राओं की तरफ से यह शिकायत की जा रही थी कि उनके गाँव मोहल्लों के बाहर मस्जिदों से दिन भर विभिन्न प्रकार के अनाउंसमेंट किए जाते हैं। इससे अनेक तरह की परेशानियाँ लोगों को हो रही हैं।

मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल बताया कि उनके घर के पास ही एक मस्जिद है। यहाँ से दिन भर चंदा देने का संदेश प्रसारित किया जाता है। कहा कि लाउडस्पीकरों की आवाज से छात्रों, बुजुर्ग नागरिकों और रोगियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आम जनता को काफी ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने लाउडस्पीकर को लेकर कोर्ट के आदेश के अनुपालन की बात कही है। कहा कि बलिया की मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के ध्वनि की मात्रा इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार तय की जानी चाहिए, जबकि अनावश्यक लाउडस्पीकर को हटा दिया जाना चाहिए।

इससे पहले मस्जिद से आने वाली अवाज को लेकर हाल ही में यूपी के इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर संगीता श्रीवास्तव ने शिकायत की थी कि उनके आवास के समीप स्थित मस्जिद से सुबह के वक्त लाउडस्पीकर पर आने वाली अजान से उनकी नींद खराब होती है। उन्होंने इस पर रोक लगाने की माँग की थी।

जिसके बाद जिले के आईजी ने सख्त एक्शन लिया। उन्होंने रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाए जाने के आदेश दिए। आईजी का कहना था कि पॉल्युशन एक्ट के तहत रात 10 बजे से सुबह के 6 बजे कर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से बैन है।  

हिन्दू मंदिरों के सरकारी नियंत्रण से मुक्ति की मुहिम में सद्गुरु के साथ आए सहवाग, देश भर में अभियान चलाने की जरुरत

आज प्रत्येक व्यक्ति सद्गुरु से परिचित है। सद्गुरु एक संत, वक्ता, समाजसेवी एवं योग तथा धर्म प्रचारक के रूप में जाने जाते हैं। वे कोयंबटूर में आदियोगी भगवान शिव की विशालकाय प्रतिमा की स्थापना एवं कावेरी को पुनर्जीवित करने की अपनी पहल ‘कावेरी कॉलिंग’ के बाद लगातार जनहित और हिन्दू धर्म और मानवता को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

समय-समय पर समाज एवं हिंदुओं के लिए तत्परता से कार्य करने वाले सद्गुरु वर्तमान में तमिलनाडु में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मुहिम चला रहे हैं। उनकी इस मुहिम को कई प्रबुद्धजनों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इसी कड़ी में क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का नाम भी जुड़ गया है।  

हुआ असल मे ऐसा कि ट्विटर पर ऋषि कुमार (@K_Rishikumar) नाम के एक व्यक्ति ने चेन्नई के निकट स्थित पेरुमल मंदिर का एक वीडियो अपनी प्रोफाइल पर शेयर किया और उसके साथ लिखा, “हम नहीं जानते कि इस मंदिर के निर्माण के लिए कितने प्रयास हुए होंगे किन्तु आज इसे इस हालत में देखकर बहुत बुरा लग रहा है।” वीडियो में उस प्राचीन मंदिर की जर्जर हालत स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है।

अपने कैप्शन के साथ उसने #FreeTNTemples का उपयोग किया जो सद्गुरु की मुहिम का एक हिस्सा है।

सद्गुरु ने इस वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कभी ये मंदिर था, भक्ति का, समर्पण का! अब ऐसा खंडहर है कि शराबियों और गंदगी फैलाने वालों के लिए भी सुरक्षित नहीं है। समय आ गया है कि तमिलनाडु के मंदिर मुक्त हों- #FreeTNTemples “

इसके साथ उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री कार्यालय, एम.के. स्टालिन और वीरेंद्र सहवाग को टैग किया।

सद्गुरु के टैग करने के पश्चात वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट करके सद्गुरु का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “हजारों वर्षों के इतिहास और महान पहचान वाले मंदिरों को ऐसी स्थिति में देखना दुःखद है। एक उचित प्रक्रिया के माध्यम से मंदिरों के प्रबंधन को भक्तों को सौंप देना चाहिए। इस ‘महत्वपूर्ण मुहिम’ में मैं सद्गुरु के साथ हूँ।”

सहवाग ने तो अपना समर्थन दे दिया है किन्तु अब आवश्यकता है कि सभी प्रबुद्ध एवं आमजन, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अपना समर्थन दें। तमिलनाडु समेत पूरे भारत भर में कई ऐसे छोटे-बड़े मंदिर हैं जो सरकारी नियंत्रण में हैं। नियंत्रण में रहने के कारण इनकी दुर्दशा हम सब ने किसी न किसी रूप में देखी है। ऐसे मंदिरों की संख्या लगभग 4 लाख है, जिनमें तिरुपति बालाजी, श्रीपद्मनाभस्वामी, गुरुवयूर, जगन्नाथ पुरी और वैष्णो देवी जैसे अति प्राचीन और महत्वपूर्ण मंदिर भी सम्मिलित हैं।

आंध्रप्रदेश में वायएस जगन रेड्डी की सरकार द्वारा तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर की संपत्ति को बेचने का निर्णय सुर्खियों में आया था जब हिंदुओं के विरोध के कारण यह निर्णय रद्द कर दिया गया था। मंदिरों की इस दुर्दशा के पीछे “हिन्दू धार्मिक एवं धर्मार्थ निधि अधिनियम (HRCE Act) 1951” है जिसका उद्देश्य ही था हिन्दू मंदिरों एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन एवं प्रबंधन को सरकारों की दया में छोड़ देना।

संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जो सभी धर्मों के प्रति निष्पक्ष भाव रखता है। धर्मनिरपेक्षता का आधार है कि राज्य व्यक्ति और ईश्वर के बीच के संबंधों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा क्योंकि यह संबंध व्यक्ति के अंतःकरण का विषय है। किन्तु क्या ऐसा है?

व्यवहारिक तौर पर तो नहीं, क्योंकि धर्मनिरपेक्षता, हिंदुओं के केस में दम तोड़ देती है। हिन्दू धर्म को ही इस संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता का सर्वाधिक नुकसान झेलना पड़ा। इस तुष्टीकरण के सबसे बड़े शिकार हुए हिन्दू मंदिर और हिन्दू धार्मिक संस्थाएं।

आज सद्गुरु हिन्दू मंदिरों की इसी दुर्दशा के विरोध में #FreeTNTemples अभियान चला रहे हैं। भारत भर से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। यह अभियान न केवल तमिलनाडु अपितु पूरे भारतवर्ष में चलाया जाना चाहिए क्योंकि मंदिरों की संपत्ति पर सरकार नहीं अपितु मंदिर में विराजमान इष्टदेव का अधिकार होता है। सरकारों को मंदिरों की संपत्ति का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है।  

पश्चिम बंगाल: मंच पर पीएम के पैर छूने बढ़ा बीजेपी कार्यकर्ता, मोदी ने पलटकर छू लिए उन्‍हीं के पाँव, वीडियो वायरल

पश्चिम बंगाल में बुधवार को चुनावी रैली के दौरान बेहद अद्भुत नजारा देखने को मिला। दरअसल, पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी में मंच पर मौजूद जब एक भाजपा कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँव छूने के लिए आगे बढ़ा तभी पीएम पलटकर उनकी तरफ बढ़े और उन्हें झुककर प्रणाम किया साथ ही उनके पैर भी छूए।

भाजपा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस वीडियो को साझा किया है और इसे संस्कार का भाव बताया है। पार्टी ने लिखा कि भाजपा एक ऐसा सुसंस्कृत संगठन है, जहाँ कार्यकर्ताओं में एक-दूसरे के प्रति समान संस्कार का भाव रहता है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली के दौरान मंच पर जब एक भाजपा कार्यकर्ता पैर छूने आया, तो पीएम नरेंद्र मोदी ने भी पैर छूकर कार्यकर्ता का अभिवादन किया।

रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने झूठे आरोप लगाकर नंदीग्राम के लोगों का अपमान किया लोग उन्हें करारा जवाब देंगे। उन्होंने 10 मार्च की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आप पूरे देश के सामने नंदीग्राम और उसके लोगों को बदनाम कर रहे हैं। यह वही नंदीग्राम है जिसने आपको इतना कुछ दिया। नंदीग्राम के लोग आपको माफ नहीं करेंगे और आपको करारा जवाब देंगे। गौरतलब है कि 10 मार्च की घटना में ममता बनर्जी घायल हो गई थीं।

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। पश्चिम बंगाल में मतदान 27 मार्च, एक अप्रैल, छह अप्रैल, दस अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि दो मई को मतगणना होगी।

दिल्ली में यूपी की जमीन पर अमानतुल्ला खान ने बसाया था रोहिंग्याओं को, CM योगी ने बुलडोजर से कराया समतल

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब से प्रदेश में अवैध कब्जे पर लगातार कार्रवाई हो रही है, सीएम योगी का ‘ऑपरेशन नेस्तनाबूत’ अब यूपी के बाद देश की राजधानी दिल्ली पहुँच चुका है। सीएम योगी के निर्देश पर मदनपुर खादर में सिंचाई विभाग को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।

बुधवार (मार्च 24, 2021) सुबह, मदनपुर खादर क्षेत्र में खसरा नंबर 612 की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए गए ढाँचों को ध्वस्त करने के लिए जेसीबी को भेजा गया। कई करोड़ रुपए की भूमि उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है, जिस पर अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों द्वारा अतिक्रमण किया गया था।

अमानतुल्ला खान ने दिल्ली के मदनपुर खादर में बसने के लिए 300 से अधिक रोहिंग्याओं की मदद की थी। आज अवैध रूप से कब्जा किए गए ढाँचों को ध्वस्त करने के लिए योगी सरकार के आदेश पर जेसीबी भेजा गया। फ़िलहाल, कई करोड़ रुपए की भूमि से अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों द्वारा किए गए अतिक्रमण को बुल्डोजर से ढहाकर समतल कर दिया गया है।

यूपी के जल विभाग के मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने विध्वंस अभियान का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली मदनपुर में 6 एकड़ जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जे थे। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने अवैध ढाँचों को ध्वस्त कर दिया है और अब जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन पर जलशक्ति-सिंचाई विभाग की भू माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई। दिल्ली के मदनपुर में सिंचाई विभाग की वर्षों से अतिक्रमित 6 एकड़ भूमि को अभियान चला कर कराया गया अतिक्रमण मुक्त।”

अमानतुल्ला खान ने मदनपुर खादर में बसने के लिए 300 से अधिक रोहिंग्याओं की मदद की थी

अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि पर 300 से अधिक रोहिंग्याओं द्वारा अतिक्रमण किया गया था, जिन्होंने इस पर अवैध निर्माण किया था। दैनिक भास्कर द्वारा पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी के मदनपुर खादर क्षेत्र में श्मशान घाट पर रोहिंग्या लोग अवैध रूप से रह रहे थे। इसके अलावा, वे यूपी सरकार के सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली भूमि पर बसे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को सभी सरकारी लाभ भी मिल रहे थे। लॉकडाउन के बीच, दिल्ली सरकार और ओखला विधायक अमानतुल्ला खान पर आरोप लगाया गया था कि उन्हें भारी मात्रा में राशन मुहैया कराया जाता है। मदनपुर खादर नई दिल्ली में ओखला निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रिपोर्ट के अनुसार, बिजली, पानी का कनेक्शन भी इन्होंने चोरी छिपे करवा लिया था, जिसका भुगतान भी ये लोग नहीं कर रहे थे।

कोरोना काल में आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने रोहिंग्याओं को राशन-पानी से लेकर जरुरत की चीजें मुहैया कराने में एड़ी-चोटी एक कर दिया था आसपास में ही रह रहे स्लम बस्तियों के लोग दाने-दाने को मोहताज थे, लेकिन इन रोहिंग्याओं को दिल्ली सरकार का विधायक आलीशान जिंदगी जीने के लिए मदद कर रहा था। ऑपइंडिया ने तब रिपोर्ट की थी कि कैसे ओखला में गरीबों ने अमानतुल्ला खान के निर्वाचन क्षेत्र में राशन वितरण में धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें राशन इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वे हिंदू थे और ‘आप’ को वोट नहीं दिया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी अवैध रोहिंग्याओं को मारिजुआना, स्मैक और अन्य अवैध पदार्थ बेचने के बारे में जानते थे लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचते थे। कई आरडब्ल्यूए ने दिल्ली पुलिस से अवैध निपटान को हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।

80 साल की बीमार माँ को TMC के गुंडों ने मारा… क्योंकि उनका बेटा BJP के वॉल पेंटिंग अभियान को बढ़ा रहा था

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राज्य में राजनीतिक हिंसा बढ़ती जा रही है। मतदान से पहले टीएमसी के गुंडों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है।

आसनसोल के चेलिडंगा इलाके में सोमवार को वॉल पेंटिंग कैंपेन को लेकर बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच हाथापाई की घटना हुई। इस के बाद अब बीजेपी कार्यकर्ता के घर पर हमला करने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि टीएमसी समर्थकों ने घर में तोड़फोड़ की। एक मोटरसाइकिल को भी तोड़ा और बीजेपी कार्यकर्ता की 80 साल की बीमार माँ की पिटाई भी की है।

बीजेपी बंगाल ने अपने ट्वीटर हैंडल पर एक वीडियो साझा की है। इसमें बीजेपी कार्यकर्ता की 80 वर्षीय माँ कह रही हैं कि जब वह घर में अकेली थीं, तब टीएमसी के गुंडों द्वारा मोलॉय घटक के भाई की अगुवाई में हमला किया गया था।

बुजुर्ग महिला ने कहा कि उसकी किडनी खराब हो जाने के बावजूद टीएमसी के लोगों ने उसके साथ मारपीट की, उसके घर में तोड़फोड़ की और उसके बेटे की मोटरसाइकिल को तोड़ दिया। बीमार महिला ने कहा कि गुंडों ने उन्हें धमकी दी है कि वो यहाँ नहीं रहने देंगे।

इस हमले को लेकर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी टीएमसी पर आरोप लगाए हैं। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा, “आसनसोल में बीजेपी कार्यकर्ता की 80 साल की बुजुर्ग माँ पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया है, क्‍योंकि वह इलाके में बीजेपी के वॉल पेंटिंग अभियान को बढ़ा रहे थे।”

बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदले की दुर्भावना से प्रेरित होकर हिंसा की एक और घटना फरवरी 26, 2021 की रात को सामने आई थी। भाजपा की मंडल कमिटी के सदस्य गोपाल और उनकी माँ पर बंदूक के पिछले भाग का इस्तेमाल करते हुए हमला किया गया था। उन्हें इतना पीटा गया था कि दोनों के चेहरे सहित शरीर के कई अंगों पर गहरी चोट आई थीं।

महाराष्ट्र में जारी सियासी उठा-पटक के बीच संजय राउत करेंगे पार्टी, गेस्ट लिस्ट में BJP सांसद भी शामिल

एक तरफ जहाँ महाराष्ट्र कोविड-19 की दूसरी लहर, जबरन घोटाला और ट्रांसफर रैकेट से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत आज (मार्च 24, 2021) रात अपने दिल्ली आवास पर डिनर पार्टी की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं। लोकमत की एक रिपोर्ट के अनुसार, गेस्ट लिस्ट में महाराष्ट्र के कई भाजपा सांसद हैं।

बताया जा रहा है कि ‘वसूली’ की खबर सामने आने से पहले ही शिवसेना के सांसद संजय राउत ने इस पार्टी की योजना बनाई थी। यह निमंत्रण महाराष्ट्र के सभी सांसदों को दिया गया था, जिसमें भाजपा भी शामिल थी। भाजपा के आमंत्रित सांसद रात्रिभोज में हिस्सा लेंगे या नहीं यह देखना होगा।

मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह द्वारा लिखे गए पत्र में अनिल देशमुख का नाम लेने के बाद भाजपा नेता भ्रष्टाचार में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। महाराष्ट्र के विपक्षी नेता, देवेंद्र फडणवीस, अनिल देशमुख को महाराष्ट्र के गृह मंत्री के रूप में निलंबित करने और जबरन वसूली में उनकी कथित संलिप्तता पर उनके खिलाफ जाँच शुरू करने के लिए महा विकास अघाड़ी सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

इस बीच, संजय राउत ने सभी दावों को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि ट्रांसफर रैकेट मामले के बारे में कुछ भी गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की मजबूत महागठबंधन सरकार को अलग करने का प्रयास है। संजय राउत ने एक प्रेस बातचीत में दावा किया, “सरकार इससे खतरे में नहीं आएगी।”

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पत्र के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने चेताया था।

संजय राउत ने कहा था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश की जा रही है। जो लोग ऐसा काम कर रहे हैं, उनके लिए ये ठीक नहीं होगा। संजय राउत ने आगे कहा कि अगर ऐसा सोचा तो मैं उन्हें चेतावनी देता हूँ कि ये आग उन्हें भी जला देगी।