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2 जिले, 3000 गाँव, 41 लाख को स्वच्छ पानी: विंध्याचल की बदल जाएगी तस्वीर, PM मोदी ने दी बड़ी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में ‘हर घर नल योजना’ का शुभारंभ किया। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों को सम्बोधित भी किया। कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। सोमवार (नवंबर 22, 2020) को हुए इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर और सोनभद्र में ‘हर घर नल योजना’ का शुभारंभ किया। 5,555.38 करोड़ रुपए की इस योजना से इन दोनों जिलों के 41 लाख ग्रामीणों के घर स्वच्छ जल पहुँचेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान एक दिलचस्प आँकड़ा देते हुए बताया कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक 398 गाँव ही पाइप वॉटर की सप्लाई से जुड़े हुए थे, लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत 2995 गाँवों को ये सुविधा मिलने जा रही है। मिर्जापुर के 21,87,980 और सोनभद्र के 19,53,458 लोगों तक पीने का पानी पहुँचेगा। जल शक्ति मंत्रालय इस पूरे कार्य की निगरानी कर रहा है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर घर जल पहुँचाने के अभियान को अब डेढ़ साल हो रहे हैं। इस दौरान देश में 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा परिवारों को उनके घरों में नल से शुद्ध पीने का पानी पहुँचाने का इंतजाम किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें लाखों परिवार उत्तर प्रदेश के भी हैं। पीएम ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पाइप से पानी पहुँचने की वजह से हमारी माताओं-बहनों का जीवन आसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा लाभ गरीब परिवारों के स्वास्थ्य को भी हुआ है। इससे गंदे पानी से होने वाली हैज़ा, टायफायड, इंसेफलाइटिस जैसी अनेक बीमारियों में भी कमी आ रही है। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि जब विंध्यांचल के हजारों गाँवों में पाइप से पानी पहुँचेगा, तो इससे भी इस क्षेत्र के मासूम बच्चों का स्वास्थ्य सुधरेगा, उनका शारीरिक और मानसिक विकास और बेहतर होगा। उन्होंने इस योजना के बारे में लोगों को जानकारी दी।

जब अपने गाँव के विकास के लिए, खुद फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलती है, उन फैसलों पर काम होता है, तो उससे गाँव के हर व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गाँव, आत्मनिर्भर भारत के अभियान को बल मिलता है। सीएम योगी सोनभद्र के चतरा ब्लॉक के करमाँव ग्राम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वो मिर्जापुर के लिए निकल गए। अगले दो वर्ष में इस योजना का काम पूरा हो जाएगा।

इसी महीने दीपावली के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को कई बड़े विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी।  उन्होंने 614 करोड़ रुपए की लागत से 30 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया था। उस दिन करीब 220 करोड़ रुपए की 16 योजनाओं के लोकार्पण के साथ, करीब 400 करोड़ रुपए की 14 योजनाओं पर औपचारिक रूप से काम शुरू हुआ।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार जिला मुस्लिम बहुल सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। बीते दिनों बिहार में छठ महापर्व का समापन हुआ, लेकिन कटिहार के रतौरा में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा में घाट पर आकर विघ्न डालने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। वीडियो में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा न करने देने और व्यवस्था को तहस-नहस कर देने के आरोप लगते हुए स्थानीय लोगों ने उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से भी हस्तक्षेप की माँग की।

स्थानीय ग्रामीणों के वीडियो बनाने के बाद सामने आया सच

कटिहार जिला के कोढ़ा प्रखंड के रतौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियादियरा स्थित दिघरि पंचायत के चामापारा गाँव के लोगों को संध्या अर्घ्य के दौरान (नवम्बर 20, 2020) मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा तंग किया गया। उनके अनुसार छठ घाट पर उपद्रव कर घाट पर तोड़फोड़ किया गया, जिसके बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना था कि शाम को तो वो किसी तरह पूजा करने में कामयाब रहे, लेकिन सुबह उनके साथ जिस तरह से व्यवहार किया गया, उससे वो काफी डर गए हैं।

सबसे पहले जो वीडियो सोशल मीडिया पर आया, उसमें कई श्रद्धालु, महिलाएँ एवं पुरुष, खड़े दिख रहे हैं। एक महिला ने बताया कि वो प्रशासन के लिए यहाँ खड़ी हैं। महिलाओं ने बताया कि थोड़े से विवाद के बाद उनके बनाए घाट वगैरह को उजाड़ डाला गया। वहीं एक युवक ने दावा किया कि इलाके में 30 घर हिंदू हैं और 30,000 घर मुस्लिम हैं (हालाँकि, ये दावा अपुष्ट है)। उसने बताया कि यहाँ के कुछ लोग चाहते थे कि सुबह में छठ महापर्व हो ही नहीं।

उसने आगे उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, जो कटिहार के ही विधायक हैं, उनसे निवेदन करते हुए कहा कि वो थाना प्रभारी को निर्देश दें कि वो वहाँ पर आकर अपनी निगरानी में छठ पूजा संपन्न करवाएँ। उस वीडियो में सभी महिलाओं एवं पुरुषों ने उक्त युवक की बात से सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें वहाँ प्रशासन की जरूरत है। उसने हिन्दुओं से अपील की कि इस वीडियो को वो फैलाएँ, जिससे उन्हें न्याय मिले।

एक अन्य महिला ने बताया कि घाट पर जब श्रद्धालु वहाँ अर्घ्य देने गए तो पटाखा उड़ाने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से विवाद हुआ। महिला ने बताया कि वहाँ ‘काफी सारे मुस्लिम समाज के लोग’ थे और शाम को अर्घ्य देने के बाद वो लोग जैसे ही घर लौटे, तभी वहाँ पर केले के सारे थम उखाड़ डाले गए और मुस्लिम समाज के लोगों ने वहाँ मल-मूत्र त्याग कर दिया। साथ ही सजावट को तबाह कर देने और गुब्बारों को फोड़ देने के भी आरोप लगाए।

क्या कहते हैं पीड़ित हिन्दू?

जब हमने स्थानीय लोगों से बात की तो कई चौंकाने वाले विवरण सामने आए। कटिहार के ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में गाँव के स्थानीय मौलाना के दामाद की सहभागिता थी, इसी कारण प्रशासन ने भी उन पर थाने के बाहर ही सुलह कर के मामले निपटाने के लिए कहा। उक्त व्यक्ति ने हमें बताया कि उस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के दबंगों द्वारा हिन्दुओं के खेतों की फसलें काट लेना आम बात है और ये इस तरह की पहली घटना नहीं है।

हमारी बात देवनारायण उराँव से हुई, जो इस घटना के पीड़ित हैं और उनके सामने ही ये सब कुछ हुआ। उन्होंने हमें पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से समझाते हुए बताया कि वो अन्य श्रद्धालुओं के साथ सांध्य अर्घ्य के दिन दोपहर 1 बजे घाट पर गए और पूरे मन से वहाँ पर सजावट की। उन्होंने बताया कि पूरी साफ़-सफाई करने के बाद घाट को चमकाया गया। इसके बाद सारे ग्रामीण लौट आए और स्नान-ध्यान कर के पूजा की तैयारी के साथ वापस घाट के लिए शाम 4 बजे निकले। उन्होंने बताया:

“हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, मुस्लिम समाज के लोग हमें परेशान करने लगे। वो लोग कह रहे थे कि अगर तुम छठ करने गए तो तुम्हें घाट पर से फेंक दूँगा। इसके बाद हम लोग किसी तरह पूजा-पाठ निपटाने के बाद वापस घर आ गए। अभी हमें घर पहुँचे आधे घंटे भी नहीं हुए थे कि सारी सजावट नोच डाली गई थी। धमकियों के बाद हमारे बच्चे घाट देखने गए थे कि सब सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने देखा कि हमारे लगाए हजार गुब्बारों में से एक भी नहीं बचा है। मुझे जैसे ही इसकी सूचना बच्चों ने दी, मैंने अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद मैं सारे ग्रामीणों के साथ थाना गया। वहाँ हमें ही शांतिपूर्वक बैठने को कहा जाने लगा। हमने पूछा कि क्या हम थाना प्रभारी से बात करने में सक्षम नहीं? तत्पश्चात रतौरा थानाध्यक्ष को हमने सारी बात बताई।”

बकौल देवनारायण उराँव, आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने में पूछा कि यहाँ एक मंदिर टूट जाता है, फिर भी आप लोग कुछ क्यों नहीं करते? हमारे आक्रोश के बाद पुलिस हमें लेकर रात के 10 बजे घाट पर गई। वहाँ जाकर पुलिस ने वीडियो बनाया और हमारे दावे सही पाए। उन्होंने ये भी बताया कि पुलिस ने पुनः सजावट के लिए 500 रुपए की मदद की। उन्होंने बताया कि फिर से बाँस वगैरह काटने पड़े और पूरी सजावट भी करनी पड़ी।

क्या वहाँ पहले से भी हिन्दुओं को परेशानी थी? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि स्थानीय हिन्दू ठीक से शादी-विवाह तक नहीं कर पाते हैं और पूजा-पाठ के दौरान भी तनाव का माहौल पैदा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह के अर्घ्य के समय प्रशासन वहाँ मौजूद था, वरना हम छठ ठीक से नहीं कर पाते। उनका कहना है कि स्थानीय हिन्दू अपने धर्म के नियम-कायदे निभाने को भी तरस जाते हैं। साथ ही जानकारी दी कि इन चीजों के सम्बन्ध में पहले भी थाने में आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस अब बड़ी घटना होने के बाद हरकत में आई है।

कई वीडियो में हिन्दू कार्यकर्ता न्याय के लिए नारेबाजी करते हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही पुलिस की गाड़ी के पास जनता मौजूद दिख रही है। घाट पर तहस-नहस स्थिति में चीजें भी दिख रही हैं, जिनसे महिलाएँ खासी आक्रोशित हैं। एक महिला ने बताया कि वहाँ मुस्लिम समाज के लोग इतनी संख्या में जमा हो गए थे, जितने पर्व मनाने के लिए हिन्दू भी नहीं जाते हैं। महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ जबरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है।

महिला ने बताया कि जब तक ग्रामीणों ने थाने पहुँच कर हंगामा नहीं किया, तब तक पुलिसकर्मी नींद से नहीं जागे। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग सोचते हैं कि हिन्दू संख्या में कम हैं, इसीलिए मारपीट कर भगा देंगे। साथ ही ये भी कहा कि जमीन-जायदाद के झगड़े भी वो हिन्दू समाज के लोगों के साथ करते रहते हैं। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग बोलते हैं कि ‘मुस्लिम इलाका बनाएँगे, हिन्दुओं को यहाँ रहने नहीं देंगे और उनकी जमीनें हड़प के उन्हें भगा देंगे’।

उजाड़े जाने के बाद छठ घाट का नजारा

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी हमें ग्रामीण विकास उराँव ने दी, जिन्होंने रुआँसे स्वर में कहा कि गाँव के लोग मीडिया में अपनी बात रखने के लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन एक भी मीडियाकर्मी वहाँ नहीं पहुँचा है। उन्होंने बताया कि वो भी छठ घाट पर हुई इस हरकत के गवाह हैं। साथ ही दावा किया कि मुस्लिम समाज के कुछ असामाजिक तत्व छठ पर्व कर रही महिलाओं का कपड़े बदलते हुए वीडियो बना रहे थे, जिसके लिए मना करने पर हंगामा शुरू हुआ।

विकास उराँव ने बताया, “हम क्या करें? हम शादी-विवाह तक ठीक से नहीं कर पाते। मुस्लिम समाज के युवक जबरदस्ती हमारे शादी समारोह में घुस जाते हैं और नाचने लगते हैं। हमारे घर की लड़कियों का दुपट्टा खींचा जाता है। महिलाओं के साथ छेड़खानी होती है। हम किसी से कुछ कह नहीं सकते।” विकास बार-बार कह रहे थे कि मीडिया उनके गाँव में आए तो हर ग्रामीण अपनी बात रखने के लिए बेचैन है, लेकिन साथ ही सब डरे हुए भी हैं।

क्या है पुलिस का कहना?

वहीं कटिहार के SDPO अमरकांत झा का भी इस मामले को लेकर बयान आया है। उन्होंने बताया कि रौतारा में छठ पूजा में कुछ असामाजिक तत्वों ने हल्का सा विध्वंस किया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई, वो हरकत में आई और दोनों समय की छठ पूजा संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि अब वहाँ शांति है। उनका कहना है कि ये कोई उस तरह की बड़ी घटना नहीं थी, इसीलिए अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

इस मामले में अब तक कोई गिरफ़्तारी भी नहीं हुई है। SDPO शर्मा ने जानकारी दी कि चीजें सुलझा ली गई हैं, क्योंकि थानाध्यक्ष ने त्वरित पहल की, वो खुद भी घटना की निगरानी कर रहे थे और एसपी ने भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे। देर रात की सामने आई कई वीडियो में पीड़ित हिन्दू और पुलिस की गाड़ियाँ घटनास्थल पर जाती हुई दिख रही हैं। साथ ही इसकी सूचना मिलते ही बजरंग दल और विहिप के पदाधिकारी भी वहाँ पहुँचे।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से कहा कि बिहार सरकार को संवेदनशील सीमांचल के इलाके में हिन्दू धर्म स्थलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहाँ हिन्दू डर कर रह रहे हैं। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को वहाँ जाकर लोगों की बातें सुननी चाहिए। बंसल ने कहा कि ये बहुत ही बड़ी घटना है और सीमांचल में बढ़ती इस्लामी कट्टरता खतरनाक है।

बिहार में चुनाव के दौरान दुर्गा पूजा विसर्जन में मुंगेर में हुई घटना को लेकर हिन्दू पहले से ही आक्रोशित हैं। उस घटना में दो युवकों की मौत की बात सामने आई थी। ‘मुंगेर बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ ने ऑपइंडिया को बताया था की उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ कि पूरा मुंगेर देख कर रो पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि फायरिंग प्रशासन ने ही की है और पुलिसकर्मी इंसास राइफल और पिस्टल लहराते नज़र आ रहे थे।

मुंबई से लापता 23 साल की ‘जूही’ लोकल ‘गुंडे’ रहीम शेख के साथ भागी थी, UP में पुलिस ने किया ट्रेस

नोट: स्टोरी नीचे अपडेट की गई है

मुंबई की 23 साल की एक लड़की लापता है। नाम है जूही (बदला हुआ नाम) और 18 नवंबर 2020 से उनके घर वालों का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार का आरोप है कि उनका अपहरण एक लोकल गुंडे रहीम शेख ने किया है।

चेतन शेट्टी लापता लड़की जूही के एक रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस दावा कर रही है कि लड़की सही सलामत है। लेकिन उन्होंने सवाल पूछने के अंदाज में कहा कि अगर जूही ठीक-ठाक हैं तो वे उनसे बात क्यों नहीं कर पा रहे। उनके अनुसार पुलिस ने अभी तक रहीम शेख का भी पता नहीं लगाया है।

लापता लड़की के रिश्तेदारों के अनुसार, 18 नवंबर 2020 को वह अपना लैपटॉप बैग और अन्य चीजें लेकर ऑफिस के लिए निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटीं। वे 18 तारीख को ही पुलिस में शिकायत दर्ज करने गए लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया।

19 तारीख को वे फिर से पुलिस स्टेशन गए, तब जाकर पुलिसवालों ने कथित तौर पर शिकायत दर्ज की। चेतन शेट्टी की मानें तो FIR अभी तक दर्ज नहीं की गई है। उनका कहना है कि पुलिस ने आरोपित लड़के के परिवार से बात भी की है लेकिन लापता जूही से अभी तक उन लोगों को बात नहीं करवाई गई है।

चेतन शेट्टी ने बताया, “लड़का (रहीम शेख) आपराधिक पृष्ठभूमि का है। पुलिस को इसकी जानकारी है। हमेशा उसके खिलाफ कोई ना कोई आपराधिक मामला चलता ही रहता है।”

लापता लड़की के परिवार का कहना है कि जूही और रहीम एक-दूसरे को जानते थे क्योंकि वे एक ही चॉल में पास में रहते थे और आपस में बातचीत करते थे। हालाँकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वह हमेशा ही परिवार के सदस्यों को धमकी और उनसे साथ दुर्व्यवहार करता था।

लापता जूही के परिवार का कहना है:

“हम अब चिंतित हैं क्योंकि पुलिस 5 दिनों से उसका पता लगाने में सक्षम नहीं है। हम नहीं जानते कि हमारी लड़की सुरक्षित है या नहीं।”

परिवार का आरोप है कि पुलिस विक्रोली में कहीं न कहीं रहीम का पता लगाने में सफल रही है, लेकिन उसका पता लगाने और उसे वापस लाने का प्रयास नहीं किया जा रहा। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया, “हमने उन्हें जूही के फोन का IMEI नंबर भी दिया है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया है।”

अपडेट: रिपोर्ट के पब्लिश किए जाने के बाद लापता लड़की को उत्तर प्रदेश में खोज निकाला गया है। लड़की के परिवार वालों का कहना है कि अगर वो स्वेच्छा से घर वापस आती है तो उसका स्वागत है वरना सारे रिश्ते तोड़ लिए जाएँगे।

केरल: ‘लाल किले’ को असम की बेटी मुन्मी की चुनौती, कहा- गाँव-गरीब तक मोदी की योजनाएँ ले जाने के लिए लड़ रही हूँ

वामपंथियों के गढ़ केरल में अगले महीने स्थानीय निकाय के चुनाव होने वाले हैं। स्थानीय निकाय चुनाव 8, 10 और 14 दिसंबर को तीन चरणों में कराए जाएँगे। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये घोषणा की। बताया जा रहा है कि अगर कोविड महामारी नहीं आती, तो 11 नवंबर तक चुनाव संपन्न हो जाना था।

सभी पार्टियाँ चुनाव प्रचार की तैयारियों में व्यस्त है। इस चुनाव में बीजेपी ने मुन्मी शाजी (मुन्मी गोगोई) को भी उतारा है। मुन्मी असम के लखीमपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने केरल के कन्नूर की इरिट्टी पंचायत के एक युवक से शादी की है। अब वह बीजेपी के टिकट पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ रही हैं। 

मुन्मी का कहना है कि वे पीएम मोदी की योजनाओं को गाँव और गरीबों तक पहुँचाने के लिए चुनाव लड़ रहीं हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “पंचायत के लोगों ने मुझे अपने परिवार के रूप में स्वीकार किया है, स्थानीय लोगों ने भी मुझे स्वीकारा है।”

वो आगे कहती हैं, “पीएम मोदी ने हमारे लिए कई योजनाएँ बनाई हैं। इनमें से कुछ योजनाएँ गरीब परिवारों तक नहीं पहुँच रही हैं। मैं भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हूँ और इन योजनाओं को अपने गाँव में लाने के लिए कोशिश कर रही हूँ।”

मुन्मी ने न्यूज 18 से बात करते हुए बताया था, “असम के लखीमपुर में मेरा परिवार कॉन्ग्रेस का समर्थन करता है, लेकिन मैं भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हूँ। मेरे पति कन्नूर में भाजपा कार्यकर्ता हैं और मैं स्थानीय आरएसएस निकाय में शामिल हूँ। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और केरल में गरीबों के लिए भाजपा की योजनाओं और नीतियों से प्रेरित हूँ। मेरे डोर-टू-डोर अभियान के दौरान, मैंने देखा है कि लोगों ने मुझे अपनी बहू के रूप में स्वीकार किया है। मैंने इन सात वर्षों के दौरान मलयालम पर अच्छी पकड़ बना ली है और इससे मुझे अपने मतदाताओं से जुड़ने में मदद मिल रही है।”

मुन्मी गोगोई के भाई गौरव गोगोई को अपनी बहन पर काफी गर्व है। वो कहते हैं, “मुझे अपनी बहन पर गर्व है, जो असम की लड़की होने के नाते, केरल में चुनाव लड़ रही है। बचपन से ही उनमें नेतृत्व के गुण थे जो उनकी खेल गतिविधियों में परिलक्षित होते थे। मैं उसकी शादी के बाद से उसके यहाँ नहीं गया, लेकिन जल्द ही जाने की योजना बना रहा हूँ।”

इसके अलावा राज्य में अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार ‘कोरोना थॉमस’ इन दिनों अपने नाम को लेकर चर्चा में हैं। मैथीलिल वार्ड से भाजपा की उम्मीदवार का नाम ‘कोरोना’ मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय उनके नाम के कारण उन्हें काफी शर्मिंदगी हुई थी, लेकिन चुनाव अभियान में अब वह उनके लिए वरदान साबित हो रहा है।

कोरोना ने कहा, “मेरे नाम की वजह से लोग प्रचार अभियान के दौरान मुझे पहचान रहे हैं। मैं जहाँ भी जाती हूँ लोग हैरानी के साथ मेरा नाम लेते हैं। मैं उम्मीद करती हूँ कि मेरा नाम चुनाव के दिन मतदाताओं को मुझे याद रखने और मेरे पक्ष में वोट डालने में मदद करेगा।”

गौरतलब है कि राज्य में 1,199 स्थानीय निकायों के चुनाव होंगे, जिनमें 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 86 नगर पालिका और छह निगम शामिल हैं। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। पाँच जिले– तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा और इडुक्की में 8 दिसंबर को चुनाव होंगे। 10 दिसंबर को कोट्टायम, एनार्कुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और वायनाड में चुनाव होंगे, वहीं कोझीकोड, मलप्पुरम, कन्नूर और कासरगोड में 14 दिसंबर को मतदान होगा।

राजस्थान के एक ही गोशाला में 94 गायों की मौत, कई की हालत गंभीर: चारे के नमूनों की हो रही जाँच

राजस्थान में चूरू जिले के सरदारशहर में शनिवार (नवंबर 21, 2020) को एक गोशाला में 94 गायों की मौत हो गई। इसके साथ ही कई गायों की हालत गंभीर है, जिनका उपचार किया जा रहा है। गायों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल शुरुआती जाँच में विषाक्त भोजन मौत का कारण माना जा रहा है।

 

यह घटना सरदारशहर में बिल्युबास रामपुरा की श्रीराम गोशाला की बताई जा रही है। गोशाला में गायों की मौत से हड़कंप मच गया है। बताया जाता है कि गोशाला की 100 से भी अधिक गायें बीमार थीं। इधर, गायों की मौत का पता चलते ही गोशाला में काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए।

सूचना मिलने पर पशुपालन विभाग की टीम भी मौके पर पहुँच गई। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि गायों को शुक्रवार शाम बाजरे का चारा खिलाया गया था। इसके बाद ही गायें बीमार पड़ीं और उनकी मौत हो गई है।

विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जगदीश बरबड़ ने बताया कि कुछ और गायें भी बीमार हैं। हालाँकि उनमें से ज्यादातर की हालत ठीक है। उन्होंने बताया कि संभवत: कुछ विषाक्त चीज खाने के कारण ऐसा हुआ। चारे के नमूने लेकर उसे जाँच के लिए भेजा गया है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन उपखंड में किसी असामाजिक तत्व ने गाय को विस्फोटक पदार्थ खिला दिया था, जो कि उसके मुँह में ही फट गया। विस्फोटक पदार्थ के फटने से गाय गंभीर रूप घायल हो गई। विस्फोटक के फटने से गाय के मुँह से खून ही खून बह रहा था।

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले के बरबसपुर गाँव में काँजी हाउस में 10 गायें मृत अवस्था में पाई गई। इन गायों को कमरे के अंदर बंद कर दिया गया था। तब एक अधिकारी ने बताया था कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि गायों की मौत दम घुटने की वजह से हुई।

इससे पहले छत्तीसगढ़ के ही बिलासपुर जिले के एक गाँव में 50 से अधिक गायों को पंचायत भवन में बंद कर रखा गया था। इनमें से 40 की दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। बिलासपुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. शरण मित्तर ने गाँव के सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी थी।

कमांडो ट्रेनिंग लेकर रात के अँधेरे में 30 किमी पैदल चले थे 4 आतंकी… 200 अभी भी LOC पर घुसपैठ की फिराक में

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में 19 नवंबर को हुए एनकाउंटर की जाँच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल कमांडर और 2016 पठानकोट हवाई बेस पर हुए आतंकवादी हमलों के आरोपित कासिम जन के शामिल होने की बात सामने आ रही है। कासिम उन आतंकी कमांडर में से एक है जो जैश के आतंकियों को भारत भेजता है और पूरे दक्षिणी कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों के बीच उसकी पकड़ काफी मज़बूत है। वह सीधे जैश चीफ मुफ्ती रऊफ असगर को रिपोर्ट करता है। 

भारत के आतंकवादी विरोधी अधिकारियों के मुताबिक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटाए जाने के बाद और तालिबान के पुनरुत्थान के साथ जैश जम्मू-कश्मीर की सीमा पर काफी सक्रिय हो चुका है। इसके अलावा कम से कम 14 प्रशिक्षित आतंकवादी गुजरांवाला के ज़रिए भारत में घुसपैठ करने का इंतज़ार कर रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने बताया, “अलग-अलग तंज़ीम (समूह) के लगभग 200 आतंकवादी नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ़ कंट्रोल) के इर्द-गिर्द स्थित लॉन्च पैड पर मौजूद रहकर भारत में घुसपैठ करने का इंतज़ार कर रहे हैं। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है अल-बदर का दोबारा अस्तित्व में आना और लश्कर-ए-मुस्तफ़ा जैसे नए आतंकवादी संगठनों का पैदा होना है, जिसकी अगुवाई हिदायतुल्लाह मलिक कर रहा है। इसके अलावा अन्य आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैय्यबा जो 23 अलग आतंकवादियों को खैबर पख्तूनखवा के जंगल मंगल कैम्प में प्रशिक्षण दे रहा है।”    

ग्लोबल पोजिशनिंग सेट, वायरलेस और रिसीवर्स द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक़ नगरोटा में मारे गए 4 जैश आतंकियों को कमांडो ट्रेनिंग दी गई थी। इन आतंकवादियों ने शकरगाह स्थित जैश कैम्प से संबा बॉर्डर के बीच 30 किलोमीटर की दूरी पैदल पूरी की और अंत में जटवाल स्थित पिकअप प्वाइंट पर गए जो कठुआ से संबा तक 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका मतलब यह है कि सभी आतंकवादियों ने पिक अप प्वाइंट पर पहुँचने के लिए देर रात यात्रा की और इसके बाद वह जम्मू-कश्मीर की तरफ आगे बढ़े।  

एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़, “अंतर्राष्ट्रीय सीमा की पिकअप प्वाइंट से दूरी (एरियल डिस्टेंस) लगभग 8.7 किलोमीटर है और शकरगाह स्थित जैश-ए-मोहम्मद का कैम्प जटवाल से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। संभावित घुसपैठ सांबा सेक्टर में मौजूद मावा गाँव के रास्ते से हुई जो रामगढ़ और हीरानगर सेक्टर के बीच स्थित है। नोनाथ नला के पास कई कच्चे रास्ते हैं जो पिकअप प्वाइंट से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पहुँचते हैं। नला, पाकिस्तानी गाँव चक जमाल के पास बेन नला से मिलता है। माना जा रहा है कि आतंकवादियों ने इन तमाम रास्तों की मदद से यह दूरी 2.5 से 3 घंटे के बीच पूरी की।”

इस बात के सबूत मौजूद हैं कि ट्रक (जेके 01 ए एल 1055) को सुबह के 3.44 पर सरोरे टोल प्लाज़ा पार कर जम्मू की तरफ बढ़ते देखा गया था। इसके बाद नरवल बायपास का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर की तरफ बढ़ते हुए देखा गया, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने 4.45 पर कार्रवाई करते हुए टोल प्लाज़ा बंद कर दिया था। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक़ सारे आतंकवादी आत्मघाती हमलावर थे क्योंकि इनके पेट और जाँघ के बीच का हिस्सा शेव किया गया था, जैसा कि जिहादियों के मामले में पहले भी देखा गया है। असाल्ट राइफल, अंडर बैरल राकेट लांचर और बंदूकों के अतिरिक्त इन चार आतंकवादियों के पास ईंधन के साथ मिला हुआ 6.5 किलो नाइट्रो सेल्यूलोस भी बरामद किया गया था।  

देवबंद में ‘छोटी ट्रेनिंग’, फिर Pak में ‘बड़ी’: दिल्ली से गिरफ्तार आतंकियों का खुलासा – दुनिया भर में फैलाना चाहते थे इस्लाम

दिल्ली से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों का देवबंद कनेक्शन सामने आया है। दोनों आतंकियों से पूछताछ के दौरान कई राज खुले। अब उन दोनों आतंकियों को लेकर दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश के देवबंद रवाना हो गई है, जहाँ उनसे फिर पूछताछ होगी। सोमवार (नवंबर 16, 2020) को बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए दिल्ली पुलिस ने JeM के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उनके मोबाइल फोन्स से कई सबूत भी मिले हैं।

इन आतंकियों ने एक व्हाट्सप्प ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप का नाम ‘जिहाद’ था, जिसमें एक पाकिस्तानी सरगना भी जुड़ा हुआ था। उसके ही निर्देश पर ये यहाँ आतंकी कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे थे। देवबंद, दिल्ली और तेलंगाना के कई लोग इस ग्रुप में जुड़े थे। चूँकि ये आतंकी कई दिनों तक देवबंद में रुके हुए थे, इसीलिए उन्हें वहाँ ले जाया गया है। आतंकी आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मोहम्मद अशरफ खटाना दिल्ली होकर देवबंद जा रहे थे।

उन्हें वहीं पर खतरनाक हथियार चलाने और बम विस्फोट का प्रशिक्षण दिया जाना था। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, आतंकियों को देवबंद में तो ट्रेनिंग दी ही जाती थी, साथ ही इसके बाद उन्हें ‘बड़ी ट्रेनिंग’ के लिए पाकिस्तान भेजा जाता था। उत्तर प्रदेश से लगती नेपाल सीमा का इस्तेमाल कर ये लोग वहीं से पाकिस्तान के लिए रवाना होते थे। स्पेशल सेल को कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे इनके आतंकी होने का पता चलता है।

पाकिस्तान में बैठे बड़े हैंडलर ने ही इन आतकियों को यूपी जाने को कहा था। उसने बताया था कि देवबंद में उसका अपना आदमी है, जो इन आतंकियों को छोटी ट्रेनिंग देगा। यूपी में आतंकी ट्रेनिंग की बात से खलबली मच गई है और प्रशासन एक्टिव हो गया है। पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने हथियार भी यूपी से ही लिए थे। दिल्ली में भी पाकिस्तानी हैंडलर का आदमी होता था, जो इन्हें देवबंद लेकर जाता था।

ये दोनों पिछले 6-8 महीनों से जिहादी बने थे और आतंकी प्रशिक्षण के लिए बेचैन थे। ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से नाराज़ थे और ‘आज़ादी’ के लिए लड़ना चाहते थे। सितम्बर-अक्टूबर में सीमा पर सख्ती होने के कारण ये पाकिस्तान नहीं जा पाए थे। अब पुलिस इनके व इनके साथियों से जुड़े सारे ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है।

आतंकियों ने बताया कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से मौलाना मसूद अजहर को सुनते थे और पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाना चाहते थे। इसके लिए वो मसूद से जुड़ने की फ़िराक में थे। खबर में ये भी बताया गया है कि ये आतंकी देवबंद के अरशद मदनी व मौलाना मुफ्ती फैजुल वाहिद द्वारा दिए गए व्याख्यान और मुफ्ती मुजफ्फर हुसैन व नजीर अहमद साहा काशी को जम्मू कश्मीर में पढ़ते थे। फेसबुक मैसेंजर के जरिए लाहौर का आफताब मलिक इनसे संपर्क में आया।

उसने इन्हें फेसबुक पर मसूद अजहर की तस्वीर प्रोफाइल पिक लगाने को कहा। इसके बाद वो जैश के एक गुर्गे के सम्पर्क में आए और कुपवाड़ा में एक आतंकी के जरिए इनके पास हथियार पहुँचाए गए। उनके पास से ‘जम्मू एंड कश्मीर बैंक’ के कार्ड्स और मदरसा का पहचान-पत्र मिला है। अब्दुल लतीफ़ के अब्बू कोर्ट में मुंशी हैं। जम्मू कश्मीर में दोनों ने कई स्थानीय कट्टरपंथियों की मदद से जिहाद का पाठ पढ़ा।

केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा था कि देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है, सारे बड़े-बड़े दुनियाँ में जो भी पैदा हुए आतंकवादी, चाहे हाफ़िज सईद हो, बगदादी हो, ये सारे के सारे लोग यहीं से शिक्षा लेते हैं। उन्होंने दावा किया था कि दुनिया में आतंकवाद की घटनाओं का जुड़ाव देवबंद से ही रहा है। साथ ही उदाहरण दिया था कि गुरुकुल से आजतक कोई बच्चा आतंकी नहीं निकला, लेकिन देवबंद से निकले हुए लोग देशभक्त का तो पता नहीं, लेकिन आतंकी जरूर बनते हैं।

बलिया में कब्रिस्तान की जमीन बता छठ पूजा का विरोध, तनाव के बीच अर्घ्य: UP पुलिस ने कहा – ‘सब कंट्रोल में है’

उत्तर प्रदेश के बलिया में बिल्थरारोड बिठुआ स्थित पोखरा गाँव में छठ पूजा के दौरान सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने छठ पूजा रोकते हुए कहा कि जिस स्थान पर पूजा हो रही है वह कब्रिस्तान की ज़मीन है। इसको लेकर विवाद बढ़ने पर दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गाँव के ही निवासी तौसीफ़ नाम के युवक ने छठ पूजा पर पाबंदी लगाने का आह्वान किया था। उसने दावा किया कि जिस जगह पर पूजा हो रही है वह कब्रिस्तान की ज़मीन है और इस पर हिन्दू समाज के धार्मिक क्रियाकलाप रोक लगाई जानी चाहिए। विवाद की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने मामले में दखल देते हुए हिंदुओं द्वारा छठ पूजा के लिए लगाए गए टेंट हटा दिए। तनाव के बीच ही व्रतियों ने अर्घ्य दिए। 

इसके बाद ग्राम प्रधान कौशल्या देवी की अगुवाई में ग्रामीणों ने भारी संख्या में इकट्ठा होकर इस मुद्दे को लेकर तहसीलदार जितेन्द्र सिंह से बात की। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि बिठुआ पोखरे के उत्तरी छोर पर बह और भीटा की ज़मीन पर अवैध तरीके से कब्ज़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। 

इसके अलावा ग्रामीणों ने इस मामले की जाँच करने का भी निवेदन किया। जिस पर तहसीलदार जितेन्द्र सिंह ने मामले की जाँच और भू-अभिलेखों के सत्यापन के लिए चार लेखपाल और एक कानूनगो की टीम का गठन कर दिया है। तहसीलदार जितेन्द्र सिंह के मुताबिक़ जाँच टीम दावों की पुष्टि के लिए मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी।   

‘दाऊद के कितने गुर्गे आज सांसद, विधायक, मंत्री बने हुए हैं?’: वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर एक्शन के लिए SC में याचिका

अपराध और राजनीति की मिलीभगत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को लेकर चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया है। शुक्रवार (नवंबर 20, 2020) को अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 1993 की वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर एक्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव एनएन वोहरा की नेतृत्व वाली कमिटी ने आपराधिक नेटवर्कों, सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बीच के नेक्सस की जाँच की थी।

उपाध्याय ने ध्यान दिलाया कि इस रिपोर्ट का 100 पन्नों का एक अपूर्ण वर्जन 1995 में संसद में रखा गया था, जिससे उसकी वैधता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ये जानने का अधिकार है कि किन अपराधियों-अधिकारियों-नेताओं के नेक्सस का पता चला था, ताकि पारदर्शिता बनाई रखी जा सके। उन्होंने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रायल कोर्ट्स के गठन का भी आदेश दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निम्नलिखित निवेदन किए:

  • वोहरा कमिटी की पूर्ण रिपोर्ट सभी जाँच एजेंसियों के निदेशकों को भेजी जाए।
  • एनआईए, सीबीआई, आईबी, ईडी सहित अन्य एजेंसियों को वोहरा कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए कहा जाए, ताकि अपराधी-नेता नेक्सस की पोल खुले।
  • लोकपाल को भी इस रिपोर्ट के आधार पर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जाए।
  • इन जाँच एजेंसियों की जाँच की निगरानी के लिए एक न्यायिक कमिटी का गठन किया जाए।
  • वोहरा कमिटी की रिपोर्ट में जिन नेताओं और सरकारी अधिकारियों के नाम हैं, उन्हें पद्मश्री सहित मिले अन्य सरकारी अवॉर्ड्स को वापस छीन लिया जाए।

‘संडे गार्डियन लाइव’ के एक लेख के अनुसार, वोहरा कमिटी की रिपोर्ट के सामने आने से कई नेताओं-अधिकारियों की पोल खुल सकती है। महाराष्ट्र और गुजरात के तब के कई नेताओं ने अंडरवर्ल्ड, खासकर दाऊद इब्राहिम और इक़बाल मिर्ची के साथ अपने सम्बन्ध बना लिए थे। मार्च 1993 में बॉम्बे बम ब्लास्ट के बाद बनी इस कमिटी ने 3 महीने की जाँच के बाद रिपोर्ट दिए थे। अमित शाह ने भी आरोप लगाया था कि एनसीपी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेमन के साथ वित्तीय लेनदेन किया था।

अमित शाह ने इसे देशद्रोह करार देते हुए कहा था कि इसके दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसे पटेल ने नकार दिया था। 70 के दशक से लेकर 90 के दशक तक दाऊद और इक़बाल की कई नेताओं ने मदद की थी। 1995 में रिपोर्ट के 11 पन्ने सार्वजनिक जरूर किए गए थे, लेकिन इसमें सिर्फ एक ही नाम था और वो भी इक़बाल मिर्ची का। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे 80 के दशक में दारू-सिगरेट की तस्करी करने वाला मिर्ची रियल एस्टेट का बड़ा कारोबारी बन गया।

मिर्ची के न सिर्फ कई बैंक एकाउंट्स थे, बल्कि वो अपने आदमियों को ही लाखों रुपए देता था और उसकी संपत्ति करोड़ों की हो गई थी। साथ ही लिखा था कि कुछ नेताओं के संरक्षण के कारण उसके खिलाफ सरकारी एजेंसियाँ भी कुछ नहीं कर पाती थीं। राज्यसभा सांसद दिनेश त्रिवेदी ने संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग की, लेकिन वो सफल नहीं हुए। कहा जाता है कि उस समय कई नेता दाऊद की मेहरबानी पर थे और उसकी मदद करते थे। अश्विनी उपाध्याय ने कहा:

“दाऊद के गुर्गे सांसद, विधायक और मंत्री हैं। दाऊद के गुर्गों को पद्म अवार्ड मिला है। विश्वास नहीं है तो वोहरा जी बात करिए। वोहरा रिपोर्ट की एक कॉपी उनके पास है। संसद के पटल पर मात्र 11 पेज रखा गया, जबकि वोहरा कमेटी रिपोर्ट 110 पेज की है। वोहरा रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। देश जानना चाहता है कि दाऊद के कितने गुर्गे आज भी सांसद, विधायक और मंत्री बने हुए हैं तथा कितने गुर्गों को अब तक पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण मिल चुका है?”

महाराष्ट्र के एक बहुत बड़े नेता की दाऊद इब्राहिम के साथ नजदीकियों की बात सामने आई थी। उस नेता को 1993 बम ब्लास्ट तक दाऊद इब्राहिम से 70 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। साथ ही एक नेता को 1990 का चुनाव लड़ने के लिए 5 करोड़ रुपए हवाला लेनदेन की मदद से पहुँचाए गए थे। साथ ही एक मुख्यमंत्री के रिश्तेदार को दाऊद द्वारा 10 करोड़ रुपए देने की बात सामने आई थी, जो बाद में खुद भी नेता बन गया।

आईबी के एक सूत्र का कहना था कि इस रिपोर्ट में गुजरात के कई नेताओं के भी नाम थे। एक वरिष्ठ आईबी अधिकारी ने बताया कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री उस रिपोर्ट को देखते हैं तो वो पाएँगे कि इसमें कई परिचित नाम हैं। अब चर्चा हो रही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने या फिर उसके आधार पर कार्रवाई करने की अनुमति देगा, जिससे उन नेताओं की जनता के सामने पोल खुले और उन्हें सज़ा मिले।

जहाँ तक दाऊद इब्राहिम की बात है, फ़िलहाल उसके पाकिस्तान स्थित कराची में रहने की बात सामने आई है। स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट (SAFEMA) के तहत मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम की महाराष्ट्र की 6 प्रॉपर्टी को इसी महीने नीलाम किया गया है। इसमें दाऊद के पैतृक गाँव रत्नागिरी में उसकी सम्पत्ति भी शामिल थी। यह संपत्ति उसकी माँ अमीना बी और बहन हसीना पार्कर के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

डॉक्टर बनने के लिए बाल विवाह से लड़ने वाली ‘द हिन्दू लेडी’, जिनकी वजह से आया ‘सहमति की उम्र का क़ानून’

सभी जानते हैं कि आज से 100 या 120 साल पहले का समाज कैसा था या यूँ कहे उस दौर में समाज के सामने कुरीतियों की सूरत में क्या चुनौतियाँ मौजूद थीं। फिर भी भारतीय समाज का सबसे शाश्वत पहलू यही है कि धारा के विपरीत चलने वाले लोग हमेशा मौजूद रहते हैं, जो आम जनमानस को रास्ते दिखाने वाली सबसे गाढ़ी लकीर खींचते हैं। ऐसा ही एक नाम है रुक्माबाई राउत का, जो भारत की पहली प्रैक्टिसिंग महिला चिकित्सक थीं। उनका विवाह महज़ 11 साल की उम्र में कर दिया गया था, फिर भी उन्होंने वैवाहिक जीवन त्यागते हुए पढ़ाई का रास्ता चुना। 

22 नवंबर 1864 को मुंबई के एक बढ़ई परिवार में जन्मी रुक्माबाई की माँ जयंती बाई थीं और पिता जनार्दन पांडुरंग। उस दौर में बाल विवाह आम बात थी, इसलिए जयंती बाई का विवाह भी 14 वर्ष की उम्र में कर दिया गया। वह सिर्फ 15 साल की थीं जब रुक्माबाई का जन्म हुआ था, इसके दो साल बाद वह विधवा हो गई और फिर उन्होंने सखाराम अर्जुन से दूसरा विवाह किया। इस विवाह को लेकर समाज में काफी बहस भी हुई, लेकिन जयंती बाई ने निर्णय पूरी दृढ़ता के साथ लिया था। सखाराम अर्जुन मुंबई स्थित ग्रांट मेडिकल कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने रुक्माबाई की पढ़ाई जारी रखने में अहम भूमिका निभाई।     

रुक्माबाई की आयु 8 वर्ष थी जब उनकी माँ जयंती बाई ने पूरी संपत्ति उनके नाम कर दी थी। इसके बाद 11 वर्ष की आयु में रुक्माबाई के जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन हुआ और वह था 19 वर्ष के दादाजी भीकाजी से विवाह। रुक्माबाई विवाह के बाद अपने पति के घर नहीं गईं। वह पढ़ने के लिए विद्यालय जाती थीं। एक दिन पति ने घर चलने के लिए कहा और 11 वर्ष की रुक्माबाई ने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया और यहीं से एक और विवाद शुरू हुआ। 

उनके पति भीकाजी ने अपने वैवाहिक अधिकारों का हवाला देते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय में रुक्माबाई के विरुद्ध याचिका दायर की। यह मामला भी ऐतिहासिक था, ‘दादाजी भीकाजी बनाम रुक्माबाई’ और इससे ही निकल कर आया ‘सहमति की उम्र का क़ानून’ 1891 (Age of consent act)। न्यायालय ने रुक्माबाई के समक्ष दो विकल्प रखे, पहला वह अपने पति के साथ रहें या दूसरा वह जेल चली जाएँ। 

इसके बावजूद मामले की सुनवाई के दौरान रुक्माबाई ने इतनी कम उम्र में जो दलीलें पेश की वह खुद में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का ऐतिहासिक दस्तावेज़ बनी। उन्होंने अपनी शिक्षा का हवाला देते हुए न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपने पति के पास नहीं जाएँगी। उनका यह भी कहना था कि उन्हें वैवाहिक जीवन में बँधकर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।             

अंततः न्यायाधीश रोबर्ट हिल पनहे ने इस मामले पर आदेश सुनाया जिसके तहत रुक्माबाई को आर्थिक जुर्माना देना पड़ा और दोनों पक्षों में सहमति बनी। मामला इतना चर्चित हुआ था कि ब्रिटिश प्रेस का ध्यान भी आकर्षित हुआ और 19वीं शताब्दी की शुरुआत होते-होते बाल विवाह और स्त्री अधिकारों पर व्यापक विमर्श की नींव पड़ी। ’रुक्माबाई रक्षा समिति’ का गठन भी हुआ था। इस मुद्दे पर तत्कालीन समाज सुधारक और शिक्षा संबंधी मुद्दों की कार्यकर्ता पंडिता रमाबाई ने एक लेख लिखा था जिसका एक अंश काफी चर्चित हुआ था। 

जिसमें उन्होंने लिखा था, “यह सरकार महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों की वकालत तो करती है, लेकिन जब एक महिला किसी पुरुष की दासी बनने से असहमत होती है तब वही सरकार क़ानून का हवाला देकर महिला को क़ानून की बेड़ियाँ पहना कर लाचार बना देती है।” इसके अलावा खुद रुक्माबाई ने भी ‘द हिन्दू लेडी’ के उपनाम से टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए स्त्री विमर्श पर कई लेख लिखे जिन पर काफी चर्चा हुई थी। 16 जून 1885 को लिखे गए रुक्माबाई के एक लेख का अंश कुछ इस प्रकार है, 

“बाल विवाह की इस कुरीति ने मेरे जीवन की खुशियों को बर्बाद कर दिया है। यह कुप्रथा हमेशा मेरे और उन चीज़ों के बीच में आई जिन्हें मैंने सबसे ऊपर रखा (शिक्षा और मानसिक चिंतन)। मेरी कोई गलती नहीं होने के बावजूद मुझे सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। मेरी बहनें जो हमेशा अपने अधिकारों से वंचित रही हैं, जो जागरूक नहीं हैं उनसे ऊपर उठने की भावना पर संदेह करते हुए मुझ पर तमाम तरह के आरोप लगाए गए।”        

आखिरकार रुक्माबाई साल 1889 में अपनी पढ़ाई के लिए लंदन स्कूल मेडिसिन, इंग्लैंड गई और 1894 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करके वापस लौटीं। इसके बाद वह सूरत में चीफ़ मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुईं और लगभग 35 वर्षों तक इस पेशे से जुड़ी रहीं। इस बीच उन्होंने सामजिक सुधार संबंधी तमाम मुद्दों पर काम किया और 25 सितंबर 1955 को 91 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। निर्देशक अनंत महादेवन ने उनके जीवन से प्रभावित होकर एक फिल्म भी बनाई थी जिसका नाम था, ‘रुक्माबाई भीमराव राउत”।