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बाप पर उतरे शिवसेना के संजय राउत, कंगना ने कहा- मेरा क्या उखाड़ोगे, इस्लाम डोमिनेट इंडस्ट्री में जान दॉंव पर लगाया

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जॉंच में मुंबई पुलिस के रवैए को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इस संबंध में कंगना रनौत भी लगातार मुखर रही हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा से इनकार करते हुए यहॉं तक कह दिया था कि आज माफिया से ज्यादा डर उन्हें मुंबई पुलिस से लगता है। इसके बाद से महाराष्ट्र का सत्ताधारी गठबंधन खासकर शिवसेना उन पर हमलावर है।

शिवसेना संसद संजय राउत ने ट्वीट कर मुंबई पर केवल मराठियों का अधिकार बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि शिवसेना महाराष्ट्र के ऐसे दुश्मनों को खत्म किए बिना नहीं रुकेगी। उन्होंने लिखा “मुंबई मराठी मानुष के बाप की ही है, जिन्हें यह मँजूर नहीं वह अपना बाप दिखाएँ। शिवसेना महाराष्ट्र के दुश्मनों का श्राद्ध किए बगैर नहीं रहेगी, प्रॉमिस जय हिंद जय महाराष्ट्र।”

इस ट्वीट के बाद कंगना रनौत की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने अपने हालिया ट्वीट में मराठी लिबास में तस्वीर साझा की और लिखा, “किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र उसी का है जिसने मराठी गौरव को प्रतिष्ठित किया है। मैं डंके की चोट पे कहती हूँ, हाँ मैं मराठा हूँ, उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे।”

एक ट्वीट में उन्होंने अपने काम का जिक्र करते हुए लिखा, “इनकी औक़ात नहीं है, इंडस्ट्री के सौ सालों में एक भी फ़िल्म मराठा प्राइड पर बनाई हो, मैंने इस्लाम डॉमिनेट इंडस्ट्री में अपनी जान और करियर को दॉंव पर लगाया। शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई पर फ़िल्म बनाई। आज महाराष्ट्र के इन ठेकेदारों से पूछो, क्या किया है महाराष्ट्र के लिए?”

उन्होंने उन सभी लोगों को चापलूस बताया जो महाराष्ट्र के लिए आज फर्जी प्यार दिखा रहे हैं। उन्होंने लिखा, “हर चापलूस जो महाराष्ट्र के लिए प्रेम दिखा रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि मैं हिंदी सिनेमा के इतिहास में पहली एक्टर व निर्देशक हूँ जो मराठा के गौरव शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई को बड़े पर्दे पर लाई। इसके लिए मुझे फिल्मों के रिलीज पर कई विरोध का सामना भी करना पड़ा।”

इससे पहले कंगना रनौत ने एक ट्वीट करते हुए चुनौती दी थी कि वह मुंबई आएँगी और टाइम भी पोस्ट करेंगी। उन्होंने लिखा था, “मैं देख रही हूँ कई लोग मुझे मुंबई वापस न आने की धमकी दे रहे हैं, इसलिए मैंने तय किया है कि 9 सितंबर को मुंबई आऊँगी। मैं मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँचकर टाइम पोस्ट करूँगी, किसी के बाप में हिम्मत है तो रोक ले।”

गौरतलब है कि संजय राउत से पहले शिवसेना के ही विधायक प्रताप सरनाईक ने कंगना को खुलेआम धमकी दी थी। प्रताप सरनाईक ने ट्विटर पर लिखा, “अगर वह यहाँ आती है, तो हमारे योद्धा उसका मुँह तोड़ देंगे। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वह कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) बताने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करे।”

वहीं, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी कंगना के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। उनके पीओके वाले बयान पर MNS ने कहा, “POK के साथ मुंबई की तुलना करने पर कंगना के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों के तहत केस दर्ज हो।”

इसी प्रकार महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी मुंबई के बारे में कंगना के बयान को गलत बताया। साथ ही कहा कि जिसकी मुंबई के बारे में ऐसी सोच है उसे मुंबई में रहने का अधिकार नहीं है। जिस पर कंगना ने अपने ट्विटर अकाउंट से उन्हें जवाब दिया। उन्होंने खबर शेयर करते हुए लिखा, “वह मेरे संवैधानिक अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रहे हैं, एक ही दिन में यह पीओके से तालिबान बन गया।”

बता दें, अनिल देशमुख ने एक ट्वीट में लिखा था, “मुंबई पुलिस की तुलना स्कॉटलैंड की पुलिस से होती है। कुछ लोग मुंबई पुलिस को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एक IPS अधिकारी इसके खिलाफ अदालत में गए हैं। उन्हें मुंबई या महाराष्ट्र में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”

‘चमा*#% कब तक बचेगी’: दलित नाबालिग से अलाउद्दीन ने की बदसलूकी, परिजनों पर कट्टरपंथी भीड़ ने बरसाए ईंट-पत्थर

बिहार के बेगूसराय जिले के शाहपुर गाँव में दलित नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और उसके परिजनों पर ईंट-पत्थर से हमले का मामला सामने आया है। मामला दो समुदायों के बीच का है। घटना में लड़की के भाई और चाचा घायल हुए हैं। पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पीड़िता के घरवाले भी शामिल हैं। गिरफ्तारी मारपीट मामले में हुई है। छेड़खानी करने वाला संप्रदाय विशेष का युवक खबर लिखे जाने तक गिरफ्तार नहीं हुआ था।

पीड़िता का बयान

पीड़िता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए सारी घटना साझा की। नाबालिग ने बताया, “कल मैं सब्जी लेने रमजानपुर बाजार साइकिल से जा रही थी। तभी रास्ते में मो. अलाउद्दीन मेरे आगे अपनी साइकिल घुमाने लगा। इसके बाद उसने अपनी साइकिल, मेरी साइकिल में मारी। मैं गिर गई और वह मेरे शरीर पर इधर-उधर हाथ लगाने लगा। किसी तरह मैं उसकी पकड़ से छूटी और अपनी घर की तरफ भागी। मगर, वह पीछे से (जातिसूचक शब्द-चम#@* का इस्लेताम करते हुए) बोला-देखते हैं कब तक बचेगी हम से।” 

लड़की के अनुसार, मो. अलाउद्दीन ने इससे पहले भी कई लड़कियों को छेड़ चुका है। मगर उसके साथ ऐसा पहली बार किया था। वह बताती है, “घर पहुँचकर मैंने अपने मम्मी-भाई को सब कुछ बताया। वह लोग अलाउद्दीन के घर उसे समझाने गए। लेकिन वहाँ उन्होंने भाइयों पर ही हमला बोल दिया। उन्हें ईंट-पत्थर से मारा” पीड़िता के पिता काम के सिलसिले में बिहार से बाहर रहते हैं।

दर्ज हुई शिकायत

इस संबंध में लड़की की माँ ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि जब वे लोग आरोपित के घर पहुँचे तो उनके साथ गाली-गलौच किया गया। उन्हें ईंट-पत्थर मारे गए। इस घटना में संतोष दास का सिर फूट गया। उनके अलावा भी कई लोगों को इस हमले में चोट आई है।

शिकायत के अनुसार, गाँव में पहले भी कई लड़कियों के साथ छेड़खानी और मारपीट के ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। जिन पर शिकायत भी दर्ज हुई मगर कार्रवाई कोई नहीं हुई। शिकायत में मो. अलाउद्दीन, मो. शाहिद, मो. इकबाल, मो. इस्माइल, मो. नूर आलम आदि पर छेड़खानी और मारपीट का आरोप लगाया गया है। पीड़िता की माँ ने शिकायत में पुलिस से निवेदन किया है कि उन लोगों को बचाया जाए, नहीं तो वे गाँव छोड़ने को मजबूर होंगे।

पीड़िता की मॉं की ओर से दी गई शिकायत

लड़की के चाचा व घटना में बुरी तरह घायल संतोष दास ने बताया, “हम दो-चार लोग मिल कर लड़के के घरवालों से बोलने गए थे। पर, वहाँ 10-12 लोग इकट्ठा होकर हम लोगों पर ईंट-पत्थर बरसा दिया। हम भाग नहीं पाए तो सिर में बुरी तरह लग गया। हमारे साथ लड़की के भाई राजू, गौतम को भी चोट आई। राजू को हाथ में चोट लगी, गौतम को सीने में और हमारे सिर में चोट आई।”

बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज से ऑपइंडिया की बातचीत

घटना के संबंध में ऑपइंडिया की बात बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ता पंकज से भी हुई। वह इस मामले के सामने आने के बाद से पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने में लगे हैं। आज उन्हें लेकर वह थाने भी गए थे। पंकज ने ऑपइंडिया को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित पक्ष सबसे पहले कल रात 9 बजे थाने गया था। इसके बाद इन लोगों को सदर अस्पताल भेजा गया मेडिकल बनवाने के लिए। करीब 11 बजे यह लोग सब कागज बनवाकर दोबारा थाना गए, जहाँ इनसे छेड़खानी और मारपीट का आवेदन लिखवाया गया। इसके बाद बाकी सबको वापस भेज दिया गया और तीन की गिरफ्तारी कर ली। इनके नाम- अमित दास, राजू दास और गौतम दास हैं। वहीं, दूसरे पक्ष से बस दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम शाहिद और इकबाल हैं।

पंकज बताते हैं कि उन्होंने पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी के मद्देनजर पुलिस थाने में जाकर पूछताछ की। इस पर पुलिस ने कहा कि यदि पीड़ित पक्ष छेड़खानी के बाद सीधे थाने आता तो पुलिस कार्रवाई करती। फिर, ये लोग उनके घर क्यों गए। इन्होंने भी कानून को हाथ में लिया है।

पंकज के मुताबिक, आज पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले में नया आवेदन दिया गया है। मगर, पुलिस का कहना है कि कल का आवेदन और आज का आवेदन एक ही जैसा है। पंकज ने पुलिस से कल दर्ज आवेदन की माँग की थी, किंतु थाना प्रभारी ने उसे दिखाने से मना कर दिया। अब उन्हें संदेह है कि पुलिस पहले वाले आवेदन पर ही न कार्रवाई करे। वहीं पीड़ित पक्ष को भी लग रहा है कि कल की शिकायत में पता नहीं क्या लिखा गया होगा।

पुलिस की कार्रवाई

ऑपइंडिया ने इस मामले में लाखो थाना प्रभारी संतोष शर्मा से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में आज सुबह केस दर्ज हो गया है और उन्होंने उसे मुफस्सिल थाने में भेज भी दिया है। हालाँकि, जब हमने जब पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि मारपीट दोनों पक्षों में हुई थी, इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों को मिलाकर 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। 

बजरंग दल ने जताई नाराजगी

इस मामले के संबंध में बेगूसराय में बजरंग दल के राज्य सह संयोजक शुभम भारद्वाज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मामले में कार्रवाई पर पुलिस से नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे पहले भी एक परिवार की लड़की को इसी संप्रदाय विशेष परिवार के लड़के ने छेड़ा था, उससे मारपीट की थी। पिछले साल भी प्राथमिकी दर्ज हुई थ। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कल भी वैसा ही मामला हुआ। लड़की से छेड़छाड़ हुई और जब लड़की के घरवालों ने शिकायत की, तो उन पर हमला हुआ।

शुभम का कहना है कि जब उनके कार्यकर्ता लड़की के परिजनों को थाने लेकर गए, तो उन्हें अस्पताल भेज दिया गया। जब वह सदर अस्पताल से लौटे तो थानेदार ने उलटे पीड़िता के परिजनों पर जेल में डाल दिया। जब सुबह उनके कार्यकर्ता थाने में पहुँचे, तो उन्होंने उनके कार्यकर्ता को भी डाँटा और कहा, “तुम्हें मामले को शांत कराना चाहिए।” इसके बाद शुभम का आरोप है कि उन्होंने राजा नाम के किसी शख्स को पैसा देकर मामला शांत कराने की बात भी कही।

यहाँ बता दें, पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के मद्देनजर हमने बेगूसराय एसपी को संपर्क करने का प्रयास किया। मगर, उनसे हमारी बात नहीं हो पाई। वहीं थाना प्रभारी ने बस हमें मामला दर्ज और गिरफ्तारी की सूचना दी। शुभम बिहार प्रशासन से पूछते हैं कि आखिर बेगूसराय का हिंदू क्यों सुरक्षित नहीं है? क्यों थाना प्रभारी मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे है? दलितों पर जो उत्पीड़न हो रहा है उस पर क्यों कदम नहीं उठाया जा रहा है? इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वह कहते हैं कि विश्व हिंदू परिषद शांत नहीं रहेगा। कानून का सम्मान करेंगे। लेकिन ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। अगर विहिप लॉकडाउन का सम्मान कर रहा है इसका मतलब यह नहीं है कि कोई विधर्मी ऐसा काम करे।

अक्षय कुमार लेकर आए FAU-G: मनोरंजन के साथ बलिदानी सैनिकों के बारे में भी बताएगा ये गेम

हाल ही में भारत सरकार ने PUBG समेत 118 और चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन किया है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान से प्रेरित हो बॉलीवुड ऐक्‍टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने FAU-G नाम से एक एक्शन गेम लॉन्च की है।

बॉलीवुड सुपरस्टार ने कहा Fearless And United-Guards FAU-G गेम के जरिए खिलाड़ी मनोरंजन के अलावा हमारे सैनिकों के बलिदानों के बारे में भी जानेंगे। इस गेम से होने वाली कमाई का 20 फीसदी भारत के वीर ट्रस्ट को डोनेट किया जाएगा।

गौरतलब है हालिया भारत सरकार ने देश की संप्रभुता और अखंडता को मद्देनजर रखते हुए लोकप्रिय ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम PUBG को बैन कर दिया था। सरकार ने दावा किया कि यह भारत की रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा था। सिर्फ PUBG ही नहीं उसके साथ 117 अन्य चीनी ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

Linked in पर मौजूद प्रोफाइल के अनुसार FAU-G को मोबाइल गेम्स और इंटरैक्टिव एंटरटेनमेंट कंपनी nCore गेम्स द्वारा बनाया गया है। यह कंपनी बेंगलुरु से बाहर स्थित है। इसमें आगे कहा गया है, ”हम मुख्य रूप से इमर्सिव स्टोरीलाइन के साथ मल्टी-प्लेयर गेम्स बनाते करते हैं। जिनका भारतीयों के साथ मजबूत जुड़ाव होता है। हम भारत में भी भारतीय बाजार के लिए टॉप ग्लोबल स्टूडियो से गेम जारी करते हैं।”

LAC पर तैनाती के लिए जा रहे भारतीय सैनिकों को देख शिमला में झूमे तिब्बती, देखें Video

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों द्वारा भारतीय सेना का हौसलाअफ़जाई करते हुए एक वीडियो साझा किया है। LAC पर भारतीय सैनिकों द्वारा सुरक्षा करने के लिए तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने उनका भारतीय झंडे, तिब्बती झंडे और सफेद स्कार्फ दिखाकर दिल खोलकर स्वागत किया।

इससे पहले भी इसी तरह का एक दृश्य जून के मध्य में भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के बाद मनाली में देखने को मिला था।

बता दें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तिब्बती समुदाय के लोग भारत के सैनिकों और क्षेत्र में चीन की गुस्ताखी और विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ डट कर खड़े होने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते रहे हैं। इससे पहले निर्वासित तिब्बती सरकार (जिसका मुख्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है) ने भारत सरकार से अपने मातृभूमि तिब्बत पर चीन अधिपत्य को लेकर आवाज उठाने का आग्रह भी किया था।

लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट पर आक्रामकता दिखा रहे चीन को सबक सिखाने के लिए भारतीय जांबाज मुस्तैद हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सशस्त्र बलों ने पूर्वी लद्दाख में चुशुल सेक्टर के आसपास उत्तरी तट और पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट पर वास्तविक सामरिक नियंत्रण रेखा (LAC) और आसपास इलाकों पर सफलतापूर्वक नियंत्रण कर लिया है।

भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि भारत सीमा के तहत चीन द्वारा की जा रही गुस्ताखी और चालबाजी को विफल करने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता थी। साथ ही भारतीय सेना ने 30 अगस्त को विशेष फ्रंटियर फोर्स यूनिट की सहायता से दक्षिणी तट पैंगोंग त्सो और छोटी स्पैंग्गुर झील के बीच दक्षिण में स्थित ऊँचाइयों पर कब्जा कर लिया था।

यह भी बताया गया था कि 2 सितंबर को भारतीय सशस्त्र बलों ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर महत्वपूर्ण सामरिक ऊँचाइयों को भी अपने नियंत्रण में कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को पाकिस्तान के मंसूबों को लेकर भी आगाह किया था। उन्होंने कहा कि हम सीमा पर शांति चाहते हैं। पर चीन की उकसावे वाली कार्रवाईयों से निपटने में सक्षम हैं। हमारे तीनों अंग (थल सेना, वायु सेना और जल सेना) खतरों से निपटने में समर्थ हैं।

भारत-अमेरिका रणनीति साझेदारी मंच से जनरल रावत ने पाकिस्तान की तरफ से की जा रही नापाक कोशिशों के बारे में बताते हुए कहा था, “पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) छेड़ा हुआ है। वह जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ के अलावा भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद फैलाने की कोशिश कर रहा है। वह उत्तरी सीमा पर हमारे लिए कुछ मुश्किल खड़ा करना चाहता है, लेकिन वह इसमें नाकाम होगा और उसे भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”

SC ने गैर-भाजपा शासित 6 राज्यों की समीक्षा याचिका खारिज की, NEET-JEE परीक्षा स्थगित करने की माँग की थी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (सितम्बर 04, 2020) को 6 गैर-भाजपा शासित राज्यों की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। इसमें जेईई मेन 2020 और NEET 2020 परीक्षाओं को स्थगित करने की माँग की गई थी। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हाल ही में एक वर्चुअल बैठक के बाद शीर्ष अदालत के 17 अगस्त के आदेश की समीक्षा के लिए याचिका दायर की थी।

शीर्ष अदालत ने पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जिंदगी चलती रहनी चाहिए (Life must go on) और महामारी के कारण छात्र एक कीमती वर्ष नहीं खो सकते हैं।

समीक्षा याचिका में दलील दी गई थी कि अदालत द्वारा दिए गए केवल दो कारणों- जिंदगी चलती रहनी चाहिए और छात्रों को एक शैक्षणिक वर्ष नहीं खोना चाहिए, इस मुद्दे की एक आधिकारिक और व्यापक न्यायिक जाँच के लिए काफी नहीं हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह याचिका खारिज किए जाने से साफ हो गया है कि अब JEE और NEET परीक्षा नहीं टाली जाएगी।

जस्टिस अशोक भूषण, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने समीक्षा याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, “हमारे पहले के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कोई मामला नहीं बनता है।”

गौरतलब है कि 6 गैर-भाजपा शासित राज्यों- पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान ने शीर्ष अदालत से गत 28 अगस्त को कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर परीक्षाओं को स्थगित करने की माँग की थी।

याचिकाकर्ताओं में पहले स्थान पर पश्चिम बंगाल के श्रम और कानून मंत्री मोलोय घटक थे। दूसरे नंबर पर झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, तीसरे नंबर पर राजस्थान के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री रघु शर्मा थे। चौथे याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ के खाद्य और नागरिक मंत्री अमरजीत भगत थे। पाँचवें नंबर पर पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और छठे महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय रवींद्र सामंत थे।

ज्ञात हो कि JEE, जो कि 1 से 6 सितंबर तक आयोजित होनी है, अभी जारी है, जबकि NEET परीक्षा 13 सितंबर को आयोजित की जाएगी।

रिपोर्टिंग के दौरान टीवी पर रिपोर्टर ने कहे ‘F**king M***rch*’: वीडियो वायरल होने पर Republic TV ने बताई पूरी बात

सोशल मीडिया पर आज (4 सितंबर 2020) एक क्लिप वायरल हुई। क्लिप में एक रिपोर्टर रिपोर्टिंग के दौरान कई अपशब्द कहता है। इस क्लिप का प्रसारण रिपब्लिक टीवी पर होता है। जिसके बाद तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स और नेटीजन्स ने यह वीडियो इंटरनेट पर साझा किया। साथ ही टेलीविज़न पर सीधी प्रसारण के दौरान ऐसी भाषा का उपयोग करने पर आलोचना भी की। 

फ़िलहाल, यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। कथित तौर पर ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि रिपब्लिक टीवी में काम करने वाले एक रिपोर्टर ने नार्कोटिक्स ब्यूरो की कार का पीछा करते हुए अपशब्द ‘F**king M***rch*’ कहे। इस गाड़ी में नार्कोटिक्स ब्यूरो के अधिकारी मौजूद थे जिन्होंने रिया चक्रवर्ती और सैमुएल मिरांडा के घर में छापेमारी की थी। 

इसके बाद सोशल मीडिया यूज़र्स ने रिपब्लिक टीवी वीडियो का लाइव फीड पोस्ट किया। फिर उन्होंने आरोप लगाया कि अपशब्द कहने वाला रिपोर्टर रिपब्लिक टीवी का कर्मचारी था।  

सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ने के बाद रिपब्लिक टीवी ने अपने तरफ से बयान जारी किया। अपने आधिकारिक बयान में रिपब्लिक टीवी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जो रिपोर्टर वीडियो में अमर्यादित और अनैतिक शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है वह हमारे संस्थान का हिस्सा नहीं है। अपशब्द कहने वाला रिपोर्टर दूसरे संस्थान का कर्मचारी था और उसने रिपब्लिक टीवी की गाड़ी में लिफ्ट ली थी। 

असल में जिस रिपोर्टर ने ऐसा किया उससे यह सारे के सारे सवाल पूछे जा सकते हैं। रिपब्लिक टीवी ने ट्वीट करते हुए यह भी लिखा कि उनका सोशल मीडिया यूज़र्स से अनुरोध है कि वह घटना की गलत व्याख्या न करें। अगर कोई सोशल मीडिया यूज़र इस तरह का दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है तो रिपब्लिक टीवी उस पर क़ानूनी कार्रवाई करेगा। पूरी जानकारी के बिना इस मुद्दे पर ऐसी कोई टिप्पणी न करें। 

महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने कहा- कंगना को मुंबई में रहने का अधिकार नहीं, शिवसेना MLA ने मुँह तोड़ने की धमकी दी

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शुक्रवार (सितम्बर 04, 2020) को कहा कि कंगना रनौत को मुंबई और महाराष्ट्र में रहने का कोई अधिकार नहीं है। बॉलीवुड अभिनेत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

इस पर कंगना ने एक ट्वीट के माध्यम से जवाब दिया है कि मुंबई एक ही दिन में PoK से तालिबान में तब्दील हो गया। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने कुछ दिन पहले ही ट्वीट किया था कि वह माफिया गुंडों से ज्यादा मुंबई पुलिस से भयभीत हैं।

अनिल देशमुख ने बयान दिया, “मुंबई पुलिस की तुलना स्कॉटलैंड यार्ड से की जाती है। कुछ लोग मुंबई पुलिस को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एक आईपीएस अधिकारी इसके खिलाफ अदालत में गया है … मुंबई पुलिस से तुलना करने के बाद उसे महाराष्ट्र या मुंबई में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने कहा है कि उन्होंने (अनिल देशमुख) ने उनके लोकतान्त्रिक अधिकारों पर खुद ही एक ही दिन में इसे PoK से तालिबान में तब्दील कर दिया है।

हम कंगना का मुँह तोड़ देंगे- शिवसेना विधायक

वहीं, शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाईक ने भी शुक्रवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख से अपने एक ट्वीट में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की अपील की है। इसके साथ ही शिवसेना विधायक ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से करने पर कंगना रनौत का मुँह तोड़ने की भी धमकी दी है।

प्रताप सरनाईक ने ट्विटर पर लिखा, “अगर वह यहाँ आती है, तो हमारे योद्धा उसका मुँह तोड़ देंगे। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वह कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) बताने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करे।”

गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत भी कंगना रनौत को मुंबई न लौटने की धमकी दे चुके हैं। दरअसल, कंगना रनौत ने हाल ही में कहा था कि उन्हें दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच के मामले में मुंबई पुलिस की सुरक्षा नहीं चाहिए। इसके अलावा कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से की थी। इस पर शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें धमकी दी थी कि कंगना रनौत को मुंबई वापस नहीं आना चाहिए।

‘9 तारीख को आ रही हूँ मुंबई, किसी के बाप में हिम्मत है तो रोक ले’

इस तमाम विवाद के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक ट्वीट किया है। इसमें कंगना ने लिखा है, “मैं देख रही हूँ कि बहुत से लोग मुझे धमकी दे रहे हैं कि मैं मुंबई वापस नहीं आऊँ। इसलिए मैंने ये फैसला किया है मैं अब 9 सितंबर मुंबई वापस जाऊँगी। मैं वो समय भी शेयर करुँगी, जब मैं मुंबई हवाई अड्डे पर उतरूँगी। किसी के बाप में हिम्मत है तो रोक ले।” इस ट्वीट के साथ ही कंगना ने एक स्माइली भी शेयर की है।

‘इस बार जेल में बिताया पल डरावना था’: राजदीप सरदेसाई ने शुरू की आरोपित डॉ कफील को ‘निर्दोष’ साबित करने की कवायद

गोरखपुर में बच्चों की मौत के मामले में आरोपित डॉ. कफील खान इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत के बाद मथुरा जेल से बाहर आ गए। वहीं अब उनके बाहर आते ही तथाकथित लिबरल वामपंथी मीडिया ने उनके आरोपों पर लीपापोती करने और उनके महिमामंडन की कवायद शुरू कर दी है।

हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई अलग-अलग मामलों में आरोपित बनाए गए व्यक्तियों के साक्षात्कार के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के मृत्यु मामलों में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती का एक इमेज बिल्डिंग इंटरव्यू करने के बाद, सरदेसाई ने अब डॉ. कफील का इंटरव्यू लेकर उन्हें ‘निर्दोष’ साबित करने की कोशिश की है। जिन्हें एएमयू में सीएए के विरोध प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार किया गया था।

इंटरव्यू के दौरान ने डॉ. कफील से सरदेसाई ने जोर देकर पूछा कि जेल से बाहर आने के बाद उन्हें कैसा लगा। वहीं सरदेसाई को इंटरव्यू देते हुए कफील ने मुस्कुराते हुए बताया कि जेल में उन्होंने बेहद भयानक पलों का अनुभव किया।

उन्होंने दावा किया कि जेल में उन्हें कई दिनों तक भोजन से वंचित रखा गया और उन्हें उस दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर किया गया। डॉ.कफील ने दावा करते हुए कहा, “राजदीप सर, इस बार जेल में उन्होंने मुझे हर तरह से परेशान किया।” उन्होंने आगे कहा, “एसटीएफ ने मुझसे तीन दिनों तक पूछताछ की और मुझसे अजीबोगरीब सवाल पूछे।”

खान ने सीएए पर अपने रुख को बनाए रखते हुए कहा कि उन्होंने सीएए को लेकर विरोध नहीं किया लेकिन उन्हें एनआरपी और एनआरसी के साथ उसे जोड़े जाने पर समस्या हुई। वहीं अपने कानूनी ज्ञान प्रदर्शन करते हुए, खान ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 ने उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे मान्यता दी गई थी।

गौरतलब है कि कफील खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एन्टी- सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए अपने भाषण में कुछ भड़काऊ टिप्पणियाँ की थी। उन्होंने कथिततौर पर गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी की थी कि वह एक कातिल है, जिसके कपड़े खून से सने हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि सीएए ने संप्रदाय विशेष के लोगों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस संचालित स्कूलों में छात्रों को सिखाया जाता है कि दाढ़ी वाले लोग आतंकवादी हैं। वहीं खान ने यह भी कहा था कि सीएए लागू कर सरकार ने हमें बताया है कि भारत हमारा देश नहीं था। खान ने लोगों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने का आग्रह किया था।

‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के साथ नवीन के घर पर पेट्रोल बम से किया हमला: बेंगलुरु दंगों पर फैक्ट फाइंडिग रिपोर्ट

बेंगलुरु दंगों की सच्चाई उजागर करने के लिए सिटिजन फॉर डेमोक्रेसी ने सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश श्रीकांत बबलादी की अध्यक्षता में पूर्व न्यायधीशों, पत्रकारों, और ब्यूरोक्रेट्स की एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगे पूर्व नियोजित और संगठित थे। इन्हें विशेष रूप से कुछ खास हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए अंजाम दिया गया। इस साल की शुरुआत में हुए दिल्ली दंगों और हालिया स्वीडन दंगों जैसी समानता भी मिली है। कमेटी ने जाँच में पाया कि कई स्थानीयों का भी इन दंगों को करवाने में हाथ था और उन्हें इसके बारे में पहले से पता था।

रिपोर्ट में लिखा है, “इस योजना को राजनैतिक द्वंद की तरह पेश करने का प्रयास जरूर किया गया, बावजूद इसके, यह निस्संदेह साम्प्रदायिक रूप से प्रेरित था। जिस तरह से घरों पर हमला किया गया और जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उसका मकसद डर फैलाना भी हो सकता है ताकि इलाके की जनसांख्यिकी प्रभावित हो और उसे बदल कर मुस्लिम बहुल किया जा सके। ”

कमेटी का कहना है कि इन दंगों में SDPI और PFI भी शामिल थे। रिपोर्ट में लिखा है, “दंगाइयों के अन्य समूह ने नवीन के घर पर इस तरह हमला बोला, जैसे उन्होंने श्रीनिवासन मूर्ति के घर पर बोला था। पर, चूँकि वहाँ कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था, इसलिए दंगाई उसके घर में घुस पाए और तोड़फोड़ की। नवीन के घरवालों ने फौरन पड़ोसियों के घर जाकर अपनी जान बचाई। इस बीच दंगाइयों ने पेट्रोल बम, पत्थर, लोहे की रॉड से घर में तबाही मचा दी। दंगाइयों ने केरोसिन, पेट्रोल और ज्वलनशील पदार्थों को फेंक कर घर में आग लगाई।”

नवीन कुमार के पिता पवन कुमार ने कमेटी को बताया, “व्यक्तिगत रूप से घर पर हुए हमले का साक्षी होते हुए मैं, मेरी पत्नी, हमारी बेटी और उसके बच्चे सब मौत से डर गए थे। इसलिए हम पहले फ्लोर पर गए और वहाँ के पीछे वाले दरवाजे से हमने पड़ोसियों के घर में छलांग लगाई और जान बचाने के लिए शरण ली।”

उन्होंने बताया, “अनियंत्रित भीड़ ने हमारे घर के सामने इकट्ठा होकर पेट्रोल बम फेंके और केरोसीन को घर में, सोफे पर, फर्नीचर पर डाल कर आग लगाई। हमले के समय उन्होंने फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और जरूरी कागजातों को जला डाला। उन्होंने 5 लाख के करीब में कैश लूटा और पत्नी के गहने भी ले गए। हमारे पड़ोस की एक संप्रदाय विशेष की महिला ने घर में जाकर मेरे पत्नी को बचाया और उसे भागने में मदद की।”

कर्नाटक रक्षा वेदिके के एक सक्रिय सदस्य अरुण गौड़ा, जो उस दिन अपनी 8 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ मौजूद थे, उन्होंने बताया कि उनके घर पर उसी इलाके के संप्रदाय विशेष के युवकों ने हमला किया था।

हिंदुओं के घर के अलावा दो थानों पर भी हमला बोला गया था। केजी हल्ली थाने थोड़ा नुकसान पहुँचा था, वहीं डीजे हल्ली थाने को बहुत नुकसान हुआ था। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि भीड़ ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगा रही थी।

रिपोर्ट में कहा गया, “दंगों का पैटर्न दिल्ली और स्वीडन की तरह है। इसलिए, राज्य के लिए यह आवश्यक है कि वह घटना की समग्र रूप से जाँच करे और उन्हें (दंगाइयों को) अलग-थलग और स्थानीय न समझे।” इसमें कमेटी द्वारा यह भी सलाह दी गई कि ऐसे साम्प्रदायिक तनावों का सामना करने वाले संभावित क्षेत्रों को पुलिस चिह्नित कर लिया जाना चाहिए। साथ ही इस तरह के तनावों पर रोक लगाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया, “सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66ए के उन्मूलन के साथ, किसी भी धर्म, जाति, वर्ग, संगठन या संप्रदाय के लोगों को निशाना बनाने वाली अपमानजनक, और घृणास्पद सामग्री को रोकने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना है।” इसमें आगे कहा गया कि इस मामले में जाँच इसलिए भी की जानी चाहिए कि आखिर भीड़ के पास इतने हथियार, पेट्रोल बम इतने कम समय में कैसे आए।

PFI और SDPI की गतिविधियों की निगरानी के अलावा, समिति ने यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार को राज्य में धार्मिक अतिवाद के स्रोत का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए।  यह भी राय दी कि राज्य के प्रमुख शहरों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का अध्ययन किया जाना चाहिए और दंगों में अवैध प्रवासियों की भूमिका की जाँच की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि 11 अगस्त को बेंगलुरु में हुए दंगों में 3 लोगों की मौत हुई थी और कई जख्मी हो गए थे। दंगाइयों ने दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दी थी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर और थाने में तोड़फोड़ भी की गई थी।

मूर्ति के भतीजे नवीन पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए हिंसा को अंजाम दिया गया था। हिंसा के सिलसिले में अब तक करीब 150 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने कहा था कि हिंसा के दौरान हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से ही की जाएगी।

उमर खालिद से दिल्ली पुलिस ने की 4 घंटे पूछताछ, हिंदू विरोधी दंगों की साजिश में शामिल होने का है आरोप

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से बुधवार (2 सितंबर, 2020) को दंगों के सिलसिले में करीब 4 घंटे पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, उन्होंने “कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को सत्यापित करने” के लिए खालिद को तलब किया था।

उमर के साथ-साथ जामिया मीडिया कोऑर्डिनेटर सफूरा जरगर, राजद के युवा विंग के अध्यक्ष मीरान हैदर, पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और कई अन्य लोगों को कथित तौर पर दंगों को उकसाने के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बता दें इस साल फरवरी की शुरुआत में पूर्वोत्तर दिल्ली के इलाकों में हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था।

खालिद से बुधवार सुबह सनलाइट कॉलोनी स्थित कार्यालय में पूछताछ की गई। पिछले महीने भी उससे दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा पूछताछ की गई थी।

इससे पहले खालिद ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस के आयुक्त एस एन श्रीवास्तव को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उसने स्पेशल सेल के अधिकारियों पर मनगढंत आरोपों में फँसाने का आरोप लगाया। खालिद ने अपने पत्र में दावा किया कि उसके किसी परिचित ने यह खुलासा किया है कि स्पेशल सेल द्वारा उनपर दबाव बनाया जा रहा और उसके (खालिद) खिलाफ फर्जी बयान (प्री ड्राफ्टेड) दर्ज किया जा रहा है।

प्री ड्राफ्टेड बयान के अनुसार उमर खालिद को सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बहाने पूर्वोत्तर दिल्ली में भड़के दंगों के सह-साजिशकर्ताओं में से एक के रूप में चित्रित किया गया था।

उमर खालिद के अनुसार, उसके परिचित ने प्री ड्राफ्टेड पत्र पर हस्ताक्षर करने का विरोध किया। लेकिन अधिकारियों ने उन्हें अपना बयान बदलने के लिए धमकाया। बाद में सवाल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि यह उसका बयान नहीं था।

खालिद का दावा है कि अधिकारियों ने उस व्यक्ति को एक अरेस्ट मेमो दिखाकर धमकाया जिस पर यूएपीए लिखा था। पुलिस ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि या तो वे इसे कबूल करें या या फिर वह दूसरे फॉर्म पर हस्ताक्षर करें। मजूबर होकर उन्हें पुलिस के बने-बनाए बयान को स्वीकार करना पड़ा।

वहीं उमर खालिद ने दिल्ली दंगों में शामिल ताहिर हुसैन के कबूलनामे को भी नकार दिया है। ताहिर ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि खालिद सैफी और उमर खालिद से वह 8 जनवरी 2020 को शाहीन बाग में पीएफआई कार्यालय में मिला था। खालिद का दावा है कि वह न तो कभी ताहिर से मिला है और न ही कभी पीएफआई कार्यालय में गया है।

जहाँ एक तरफ खालिद खुद को निर्दोष बता रहा है, वहीं दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने 6 मार्च 2020 को अपने एफआईआर में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान 24-26 फरवरी के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू-विरोधी दंगों की साजिश पहले से ही रची गई थी। एफआईआर कॉपी में कहा गया है कि हिंदू विरोधी दंगों की साजिश पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और उसके साथियों द्वारा रची गई थी, जो दो संगठनों से जुड़े हैं।

उमर खालिद ने साजिश के तहत दो अलग-अलग स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिए और लोगों से अपील की थी कि वे ट्रम्प की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरें ताकि प्रोपेगेंडा के तहत भारत में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले कथित अत्याचारों का अंतर्राष्ट्रीयकरण किया जा सके।

आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में दायर आरोप-पत्र के अनुसार, दिल्ली के दंगों का आरोपित ताहिर हुसैन, उमर खालिद और उसके करीबी खालिद सैफी के संपर्क में था। चार्जशीट में इस बात का उल्लेख है कि शाहीनबाग में जेएनयू स्कॉलर उमर और खालिद सैफी से मिलने के बाद ताहिर ने जनवरी में दंगों की योजना तैयार की थी। वहीं पुलिस द्वारा जुलाई में दर्ज एक रिपोर्ट के अनुसार खालिद सैफी ने दंगों के लिए धन जुटाने के लिए जाकिर नाइक से मुलाकात की थी।