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चीन नहीं भाजपा है देश का असली दुश्मन: 20 बलिदान के बाद भी पूर्व एमनेस्टी इंडिया चीफ आकार पटेल का बयान

आकार पटेल ने चीन के बजाए भाजपा को देश का दुश्मन बताते हुए कहा है कि उन्हें भारत माता की परवाह नहीं है। चीन की सेना के साथ लद्दाख सीमा क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद आकार पटेल की तरह ही कई भारतीय ‘बुद्धिजीवियों’ ने अब चीनी सेना द्वारा बरती जाने वाली बर्बरता पर आंखें मूँद लेने का फैसला ले लिया है। साथ ही, वह अब सत्तारूढ़ भाजपा को देश का सबसे बड़ा दुश्मन बताने में व्यस्त हैं।

भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बीच एमनेस्टी इंडिया के पूर्व प्रमुख आकार पटेल ने ट्विटर पर कहा कि देश का दुश्मन भाजपा है, ना कि चीन। आकार पटेल ने दावा किया है कि उन्हें जनसंघ या भाजपा के मूल दस्तावेज में चीन का कोई संदर्भ नहीं मिला। हालाँकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें भारत में रह रहे समुदाय विशेष के देश का दुश्मन होने के कई संदर्भ मिले हैं।

विवादास्पद एक्टिविस्ट ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ गंभीर दावे किए हैं और आरोप लगाया है कि भाजपा देश के समुदाय विशेष से घृणा करती है।

आकार पटेल ने ट्वीट में लिखा है – “भाजपा के लिए चीन कभी भी दुश्मन नहीं था, ना ही है। जब तक वो उन भारतीयों को ‘ठीक’ कर सकते हैं, जिनसे कि वो नफरत करते हैं, तब तक उन्हें इसकी परवाह नहीं कि भारत माता के साथ क्या हो रहा है।”

पटेल ने कहा कि चीन सिर्फ एक प्रतिद्वंद्वी है, जिसके रणनीतिक उद्देश्य हैं। आकर पटेल के अनुसार, चीन हमें आंतरिक रूप से नष्ट करने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन भाजपा कर रही है।

ऐसे समय में, जब पूरा देश चीन के खिलाफ एकजुट है, आकार पटेल जैसे व्यक्ति, जिन्होंने अक्सर भारत के हितों के खिलाफ काम किया है, अपने स्वयं के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में व्यस्त हैं।

विवादों को लेकर चर्चा में हैं आकार पटेल

हाल ही में आकार पटेल के खिलाफ में बेंगलुरु के जेसी नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर नागराजा डीआर द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें पटेल पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने पूरे भारत में अमेरिका की तरह के विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को भड़काने और उकसाने की कोशिश की।

दरअसल, 31 मई को आकार पटेल ने कोलोराडो टाइम्स रिकॉर्डर के एक ट्वीट के हवाले से एक ट्वीट किया था, जिसमें अमेरिका में विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों का एक वीडियो शेयर किया गया था। इस वीडियो के साथ ट्वीट में आकार पटेल ने लिखा था कि भारत के समुदाय विशेष, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और गरीबों को भी इनकी तरह विरोध-प्रदर्शन करने की आवश्यकता है। इसे दुनिया देखेगी। प्रदर्शन करना भी एक कला है।

नागराजा द्वारा पुलिस में की गई शिकायत में कहा गया कि पटेल ने अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं से आह्वान किया कि वे वीडियो में देखे गए लोगों की तरह विरोध-प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने पटेल के ट्वीट पर आपत्ति भी जताई थी।

गलवान घाटी में चीन के साथ खूनी हिंसक झड़प में 76 सैनिक भी हुए थे घायल, सभी की हालत में सुधार: रिपोर्ट

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा पर हुए खूनी हिंसक झड़प में भारत के करीब 76 सैनिकों के घायल होने की भी खबर आई हैं। सोमवार (15 जून, 2020) गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में डंडे और नुकीली चीजों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। अचानक हुए इस खूनी हमले से भारतीय सैनिक अनजान थे। जिसकी वजह से भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

ANI के मुताबिक, “सभी घायल सैनिक खतरे से बाहर हैं, किसी की भी हालत गंभीर नहीं हैं। 18 सैनिक लेह के अस्पताल में एडमिट हैं। वे 15 दिन में ड्यूटी के बाद वापस लौटने की हालत में होंगे। वहीं, 58 सैनिक अन्य अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्हें हल्की चोट है और वे एक हफ्ते के अंदर ड्यूटी पर वापस लौटेंगे। खबरों के अनुसार 4 सैनिक गंभीर रूप से घायल थे। उनपर से भी खतरा टल चुका हैं। उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हैं।”

भारतीय सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि इस हिंसक झड़प के बाद कोई भी भारतीय जवान लापता नहीं है। जितने भी जवान गलवान घाटी के पास थे, सभी की जानकारी उनके पास है।

वहीं इस खूनी झड़प पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इसे स्थानीय स्तर पर अचानक पैदा हुई परिस्थिति नहीं मानता है, बल्कि इसके पीछे चीन की सोची-समझी साजिश साफ झलक रही है। इस घटना पर चीन को सुधारात्‍मक कदम उठाने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। PM मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लद्दाख में चल रहे विवाद पर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन करारा जवाब देने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने इस विषय पर आज शुक्रवार (19 जून, 2020) को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

उल्लेखनीय हैं कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बता दें चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

नोएडा में 20,000 MSME कम्पनियों का सामूहिक फैसला: नहीं करेंगे चीनी उत्पादों का इस्तेमाल, देश में विरोध तेज

नोएडा में करीब 20 हजार MSME क्षेत्र की कंपनियाँ मौजूद हैं, जिन्होंने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सामूहिक रूप से गौतम बुद्ध नगर में MSME क्षेत्र के संघ द्वारा लिया गया है। गौतम बौद्ध नगर में MSME एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सभी कारखानों को पत्र लिखकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अनुरोध किया है।

चीन के साथ हुई भारतीय सैनिकों की झड़प के बाद, नोएडा में MSME क्षेत्र द्वारा एक सूची तैयार की गई है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में अकेले MSME क्षेत्र ही नोएडा में विनिर्माण क्षेत्र (मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर) के लिए कुल मिलकर 500 से अधिक उत्पादों का उपभोग कर रहा है, जिसमें एलईडी लाइट्स, बोल्ट, पीपीई किट, मास्क और कई अन्य निर्माण सामग्री शामिल हैं।

गौतम बौद्ध नगर में एमएसएमई एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने सभी कारखानों को पत्र लिखकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अनुरोध किया है, साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक पत्र लिखकर चीनी उपकरणों के बहिष्कार के निर्णय के बारे में जानकारी दी है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के बीच सरकार द्वारा MSME क्षेत्र और निर्माण के लिए बहुत सी राहत और उपाय किए गए हैं, क्योंकि इस दौरान MSME सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ और आखिरकार अब यह सेक्टर सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

लेकिन इसके बावजूद भी यह सेक्टर देश के हित में खड़े रहकर कठोर फैसला लेते हुए सस्ते चीनी उपकरणों और विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का त्याग करने के लिए तैयार है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी बृहस्पतिवार (जून 18, 2020) को लोगों से चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की और अपने मंत्रालय के अधिकारियों को दिन के कार्यालय उपयोग के लिए किसी भी चीनी उत्पाद की खरीद नहीं करने का निर्देश दिया है।

वहीं, पूरे देशभर में देखे जा रहे चीनी सामान के विरोध के बीच व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक खुले पत्र में सिनेमा और खेल की बड़ी हस्तियों, विशेष रूप से आमिर खान, दीपिका पादुकोण, कैटरीना कैफ, विराट कोहली और अन्य लोगों से अपील की है कि वे चीनी उत्पादों के विज्ञापन को करना बंद करें।

ज्ञात हो कि इनमें से कई हास्तियाँ चाइनीज मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रोनिक उपकरणों के विज्ञापन करते आए हैं। कैट ने इन सभी से और अन्य सभी प्रसिद्द व्यक्ति, जो किसी भी प्रकार के चीनी उत्पाद का विज्ञापन कर रहे हैं, से अपील की है की उनके द्वारा चीनी ब्रांडों का विज्ञापन करना तुरंत बंद किया जाए।

चीनी सामान के बहिष्कार का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष के बाद देश में चीनी उत्‍पादों के बहिष्‍कार की माँग जोर पकड़ती जा रही है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच लद्दाख क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों को जान गँवानी पड़ी है, जबकि चीन के भी करीब 43 सैनिकों की इस संघर्ष में मौत हुई है।

कल ही सरकार ने सरकारी टेलिकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के अलावा निजी कंपनियों को भी आदेश दिया है कि वे चीनी उपकरणों का इस्तेमाल करना बंद कर दें। सरकार ने सिक्योरिटी के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि 4G के अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

पता है तू किसका बिस्तर गर्म करती है… रं* सेक्स कर मजा ले: भीम आर्मी के रावण की गंदी जुबान

भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण के कुछ पुराने ट्वीट सामने आए हैं। इनमें से हरेक में एक बात कॉमन है। वह महिलाओं को भद्दी गालियॉं दे रहा है। रावण की गंदी जुबान की शिकार हुईं ये सभी महिलाएँ पत्रकार और वीडियो ब्लॉगर हैं।

खुद को दलितों का स्वयंभू मसीहा बताने वाला रावण केवल उन्हीं मामलों पर अपनी जुबान खोलता है जब आरोपित सर्वण होते हैं। जब दलितों की बस्ती पर हमला करने वाले समुदाय विशेष के होते हैं तो वह जय भीम-जय मीम की खोल में छिप जाता है।

ऐसे रावण की महिलाओं के प्रति भाषा को दर्शाते कुछ ट्वीट के स्क्रीनशॉट एक यूजर ने शेयर किए हैं और लिखा है, “भीम आर्मी प्रमुख और उनकी शुद्ध भाषा।”

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण द्वारा किए गए ये सभी ट्वीट वर्ष 2018 के हैं। वीडियो ब्लॉगर काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण ने बेहद ही आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा है – “तू सेक्स कर के मजा ले, चु*यापन मत कर रं*।”

काजल ने चंद्रशेखर के इन ट्वीट को आज शेयर करते हुए लिखा है, “तथाकथित दलित ठेकेदार भीम आर्मी चीफ की असलियत, खुद को महिलाओं का हितैषी बताने वाला ये दलितों का ठेकेदार बना फिर रहा है, आज इसके घटियापन का सबूत दे रही हूँ। अगर आपको अपनी बहन-बेटियों की इज़्ज़त की थोड़ी सी भी परवाह है तो इन ‘जय भीम जय मीम’ के दलालों को फ़ॉलो करना बंद कर दीजिए।”

काजल द्वारा भीम आर्मी प्रमुख के ट्वीट शेयर करने के बाद चंद्रशेखर ने अपने ये ट्वीट डिलीट तो कर दिए लेकिन उनके ये स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में खूब घूम रहे हैं। चन्द्रशेखर द्वारा इन ट्वीट में इस्तेमाल की गई भाषा बेहद असभ्य और निम्नस्तरीय हैं, जिन्हें कि आप इन स्क्रीनशॉट्स में देख सकते हैं –

संजीव नेवार ने भी काजल के ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा है, “यह भीम आर्मी चीफ की असलियत है। यदि यह दूर की महिलाओं के लिए उनकी मानसिकता हो, तो अपने आसपास के लोगों की स्थिति की कल्पना करें। यदि ऐसे लोग किसी समूह या व्यक्ति द्वारा समर्थित हैं, तो यह स्पष्ट है कि ये लोग कौन हैं।”

रावण की हरकत के बाद काजल सिंगला ने यूपी पुलिस और यूपी के पुलिस महानिदेशक ( DGP) को टैग करते हुए लिखा, “आप सभी से निवेदन है की ऐसे असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ अविलम्ब कारवाई करे।”

इन ट्वीट के चर्चा में आने के बाद फिलहाल सराहनपुर पुलिस ने साइबर सेल को चंद्रशेखर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दे दिए हैं।

अश्लील गाना बजाने से रोका तो दलित बस्ती पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से मुस्लिमों ने किया हमला

हाल ही में उत्तर प्रदेश के जौनपुर और आजमगढ़ में दलितों को मुस्लिमों ने निशाना बनाया था। अब ऐसी ही घटना प्रदेश के गाजीपुर और सीतापुर जिले से सामने आई है।

गाजीपुर के गहमर थाना क्षेत्र के गोड़सरा गॉंव में बुधवार को दलितों की बस्ती पर हमला किया गया। हमला अश्लील गाना बजाने से मना किए जाने पर किया गया।

हमले में 18 लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है। तनाव को देखते हुए गाँव में पीएसी तैनात कर दी गई है। वहीं मामले का संज्ञान लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक गोड़सरा में बुधवार (17 जून, 2020) को एक ट्रैक्टर चालक तेज आवाज में दलित बस्ती से गुजरते समय अश्लील गाना बजा रहा था। इसका जब वहाँ से गुजरे रहे मनरेगा के मजदूरों ने विरोध किया तो यह बात ट्रैक्टर चालक को नागवार गुजरी।

इसके कुछ देर बाद ही ट्रैक्टर मालिक के बेटे हैदर ने अपने साथी तनवीर, मुहम्मद अली सहित करीब 50 लोगों के साथ दलित बस्ती पर हमला बोल दिया। हमलावर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से लैस थे।

घंटों तक हमलावरों ने बस्ती में ईंट-पत्थर बरसाए और बुजर्ग, बच्चे व महिलाओं के साथ भी मारपीट की। दो समुदायों के बीच झगड़े की सूचना मिलते ही तत्काल जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह आदि अधिकारी व भारी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए, लेकिन इससे पहले ही सभी आरोपित मौके से फरार हो गए।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक घटना में 18 और दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक घटना में 13 लोगों के घाटल होने के खबर है। वहीं तीन भाइयों जालिम राम (45), बलिस्टर (35) और सुग्रीव (40) के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। सभी घायलों के पुलिस ने जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया है।

वहीं थानाध्यक्ष विमल कुमार मिश्र के मुताबिक पीडि़त पक्ष की ओर से दी गई तहरीर पर मुख्य आरोपित हैदर, तनवीर, मुहम्मद अली सहित 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

पाँच लोगों को हिरासत में लेकर जा पूछताछ की जा रही है। एसपी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि जल्द ही सभी आरोपित पुलिस की गिरफ्त में होंगे। वहीं सीतापुर में समुदाय विशेष के दबंगों ने दलित का सिर मूँडवा दिया। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी जौनपुर सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को बच्चों के विवाद में मुस्लिमों ने दलित बस्ती पर हमला बोल दिया था। इस मामले में पुलिस ने 57 लोगों को नामजद और 100 लोगों को अज्ञात करते हुए विभिन्न धाराओ में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

राहुल गाँधी रोस्ट: कौन जिम्मेदार है | Rahul Gandhi roast as he questions Indian Army

कल राहुल गाँधी 50 साल के हो जाएँगे। आज उन्होंने 20 सेकंड का वीडियो बनाया, हम 8 मिनट तक लेंगे, क्लास।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

चुनाव जीतने के लिए पुलवामा, बिहार चुनाव के लिए गलवान: डीयू के प्रोफेसर देव कुमार ने बलिदानी सैनिकों का उड़ाया मजाक

हमारे देश में एक पूरी जमात है जो सरकार के विरोध के नाम पर राष्ट्र के खिलाफ खड़ी हो जाती है। आम जनता की भावनाओं को कुचल कर अभिव्यक्ति की आजादी का हुंकार भरती है। अपने प्रोपेगेंडा में सैनिकों के बलिदान को घसीटकर उसका अपमान करती है।

ऐसे ही एक शख्स देव कुमार (Deo Kumar)। फेसबुक प्रोफाइल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार देव कुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के राजधानी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने दावा किया है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर में हुई है। बीते साल पुलवामा में हुए आतंकी हमलों को उन्होंने 2019 के आम चुनाव से जोड़ा है।

देव कुमार ने लिखा है, “केंद्रीय चुनाव जीतने के लिए पुलवामा किया गया। गलवान बिहार का चुनाव है। बिहार बटालियन को उभारा गया। झूलने वाले दोस्तों ने यह रचा। देश का भूभाग कब्जा करवाया। बिहार जीतना है। दोहन किया जाएगा। देखना है बिहारी जनता कैसे रिस्पॉन्स करती है?”

देव कुमार ने यह कॉमेंट ऐसे समय में किया है जब चीनी सै​निकों के धोखे से किए वार में भारत के 20 जवान बलिदान हुए हैं। 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है।

पुलवामा में हुई आतंकी घटना के साथ ही देव कुमार ने चीन के साथ हुई झड़प को जोड़ते हुए कहा है कि ये दोनों घटनाएँ केंद्र सरकार द्वारा चुनाव जीतने के लिए करवाई गईं और अब बिहार में आने वाले चुनाव के लिए यह करवाया गया है।

देव कुमार की फेसबुक टाइमलाइन तमाम ऐसे पोस्ट से भरी हुई है, जिनमें सत्ता ही नहीं बल्कि बहुसंख्यकों पर भी कटाक्ष किए गए हैं।

देव कुमार आजकल कोरोना संकट, जाति और पूँजी पर ‘ऑनलाइन ज्ञान’ भी दे रहे हैं –

वहीं एक पोस्ट में देव कुमार ने लिखा है – “फ़ासीवाद का उग्र रूप। अब भी किसी को डाउट है तो फिर उसकी समझ में कुछ गड़बड़ी है। #सॉलिसिटर जेनरल, सुप्रीम कोर्ट, लेफ्ट-लिबरल ,डेमोक्रेट्स और बहुजन तबके का दमन/जेल।”

अमेरिका ने चीन की बढ़ाई टेंशन, उइगर मुस्लिमों की प्रताड़ना के खिलाफ बिल पर ट्रंप ने लगाई मुहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मँजूरी दे दी है जिससे चीन की की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चीन के द्वारा उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों पर बरपाए जा रहे कहर के खिलाफ अमेरिका में लाए गए एक विधेयक पर राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस के विधेयक पारित करने के बाद बुधवार (17 जून, 2020) को ट्रंप ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए। मामले में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना एक बयान जारी करते हुए कहा कि 2020 उइगर मानवाधिकार नीति अधिनियम ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन के अपराधियों’ को जवाबदेह ठहराएगा। वहीं इस बिल में पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य जातीय समूहों की व्यापक निगरानी और हिरासत में लेने वाले चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध भी शामिल है।

इसके बाद उइगरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे वकील नुरी टर्केल ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा,”यह अमेरिका और उइगर लोगों के लिए एक महान दिन है।” चीन उइगर मुस्लिम को अपने लिए खतरा मानता है। चीन ने इन पर दाढ़ी बढ़ाने और नकाब पहनने के कारण भी ऐक्शन लिया है और उन्हें अज्ञात जगह पर हिरासत में भेज दिया गया है।

दरअसल चीन में एक लाख से अधिक लोगों को बदतर हालात में शिविरों में हिरासत में रखने के खिलाफ और उसे दंडित करने के लिए किसी भी देश द्वारा उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि शिविरों में दस लाख से अधिक उइगर मुस्लिमों को हिरासत में लिया गया है।

दरअसल कोरोना वायरस के चलते चीन और अमेरिका पहले से ही आमने-सामने हैं। इसी बीच अमेरिका के इस कदम से चीन और भी भड़क सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 27 मई को उइगर मुस्लिमों का उत्पीड़न करने के जिम्मेदार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को भारी बहुमत से मँजूरी दी थी।

जानकारी के मुताबिक इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं। इस प्रांत की सीमा मंगोलिया और रूस सहित आठ देशों के साथ मिलती है। इनकी आबादी की बात की जाए तो तुर्क मूल के उइगर मुस्लिमों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से अधिक है।

वहीं इस क्षेत्र में रहने वाले उइगर मुस्लिमों की धार्मिक स्वतंत्रता पर भी चीन सरकार ने अंकुश लगा रखा है। 2014 में शिनजियांग की सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर पाबंदी लगा दी थी। 2014 में ही राष्ट्रपति जिनपिंग के सख्त आदेशों के बाद यहाँ की कई मस्जिदें और मदरसे ढहा दिए गए थे।

भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी से छीना ₹471 करोड़ का ठेका, ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम लगाने का दिया था काम

भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी से 471 करोड़ रुपए के ठेके वापस ले लिए हैं। रेलवे के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के 4 साल बीत जाने पर भी अभी तक सिर्फ 20% काम ही चीनी कंपनी कर पाई थी। इसके अलावा चीनी कंपनी टेक्निकल दस्तावेजों को साझा करने से बच रही थी, जबकि यह बात करार का हिस्सा थी।

वर्ष 2016 में चीनी कंपनी से 471 करोड़ रुपए का करार हुआ था, जिसमें उसे 417 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम लगाना था। यह काम बेहद धीमी गति से किया जा रहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रेलवे द्वारा संचालित एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन लिमिटेड’ (DFCCIL) ने चायनीज फर्म ‘बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल एंड कम्युनिकेशन कंपनी लिमिटेड’ के साथ चल रहे 471 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया है।

कॉन्ट्रैक्ट पत्र

इस चीनी कंपनी को कानपुर से दीन दयाल उपाध्याय रेलवे सेक्शन के बीच 417 किमी के सेक्शन में सिग्नलिंग और टेलीकॉम का काम दिया गया था। ये काम 471 करोड़ रुपए का था। हालाँकि, रेलवे ने अपने इस फैसले को लेकर कहा गया है कि चीन के साथ एलएसी पर जारी तनाव के चलते यह फैसला नहीं लिया गया है।

चीनी कम्पनी के साथ यह करार रद्द करने का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष के बाद देश में चीनी उत्‍पादों के बहिष्‍कार की माँग जोर पकड़ती जा रही है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच लद्दाख क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों को जान गंवानी पड़ी है, जबकि चीन के भी करीब 43 सैनिकों की इस संघर्ष में मौत हुई है।

कल ही सरकार ने सरकारी टेलिकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के अलावा निजी कंपनियों को भी आदेश दिया है कि वे चीनी उपकरणों का इस्तेमाल करना बंद कर दें। सरकार ने सिक्योरिटी के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि 4G के अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

चीनी माल के बहिष्कार की तेजी होती माँग के बीच ओप्पो का लाइव लॉन्च इवेंट कैंसल

चीन की हरकतों को मद्देनजर उसके उत्पादों के बहिष्कार की माँग तेज़ होती जा रही है। चाइनीज स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो को अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन की भारत में होने वाली लाइव लॉन्चिंग कैंसल करनी पड़ी।

बता दें ओप्पो कंपनी द्वारा यूट्यूब पर अपने X2 स्मार्टफ़ोन को बुधवार एक लाइव इवेंट में लॉन्च किया जाना था।
हालाँकि, लॉन्च की लाइवस्ट्रीमिंग को रद्द कर उसकी जगह प्री-रिकॉर्डेड वीडियो अपलोड किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ओप्पो कंपनी की तरफ से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। लेकिन, कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि सोशल मीडिया पर हंगामे से बचने के लिए शायद कंपनी ने ऐसा किया। सोशल मीडिया यूज़र्स ने ऑनलाइन प्रदर्शन के माध्यम से चीन के सारे उत्पादों खासकर मोबाइल फ़ोन का पूर्ण बहिष्कार करने के लिए लोगों से आह्वान किया था।

बुधवार को नेटीज़न्स ने ट्विटर के जरिए भारतीय नागरिकों से चाइनीज प्रोडक्ट, मुख्य रूप से मोबाइल फ़ोन को बहिष्कार करने की माँग की थी।

लद्दाख में तनावपूर्ण माहौल

गौरतलब हैं कि गुरुवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार गलवान घाटी पर चीन की सेना ने कँटीले तारों से लिपटे डंडे से भारतीय सेना पर धोखे से प्रहार किया था। जिसमें भारत ने अपने कम से कम 20 जवान खोए। जब तक भारतीय खेमे तक बात पहुँचती, भारतीय सैनिकों को चीनी सेना के दूसरे कैंप से आए सैनिकों ने घेर लिया था।

चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाइप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। इनका इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फ़ेंक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डटकर मुकाबला किया।