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कोरोना के गणित में फेल, ट्वीट डिलीट कर भागी MP कॉन्ग्रेस, लोगों ने पूछ ही लिया – कौन चला रहा इसे?

मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार पर निशाना साधने के चक्कर में कॉन्ग्रेस का मजाक बन चुका है। अभी कल प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने इंदौर दौरे के दौरान मीडिया में बयान दिया कि उनके प्रदेश में कोरोना मरीजों का रिकवरी दर 64% है और मृत्यु दर केवल 4%।

ऐसे में मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने हड़बड़ी में अपने ट्विटर से बेतुका प्रश्न उठाया। जिसके कारण हर जगह उनकी गणित का मजाक उड़ाया गया और बाद में अपनी घटा-जोड़ के कारण हुई फजीहत से उन्हें अपना ट्वीट ही डिलीट करना पड़ा।

दरअसल, मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने कल शिवराज सिंह चौहान का बयान आने के बाद ट्विटर पर एक सवाल पूछा कि आखिर जब प्रदेश में 64% रिकवरी दर है, मृत्युदर 4% तो बाकी लोगों का क्या होगा? अपने इस सवाल के लिए उन्होंने दोनों आँकड़ों (64%+4%) को जोड़ा और बाद में 100 में से घटाकर शेष बचे 32% के लिए उन पर निशाना साध दिया।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस यह समझ ही नहीं पाई कि इस गणित में 32% कोरोना के एक्टिव केस हैं और संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का ही रिकवरी रेट 64% बताया जा रहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में प्रदेश मुख्यमंत्री से पूछ डाला कि आखिर 32% लोगों का क्या होगा?

अब इसी को देखकर लोगों ने उनका मजाक उड़ाना शुरू किया। एक यूजर ने पूछा कि क्या प्रदेश में 100 प्रतिशत लोग कोरोना पॉजिटिव थे? कुछ लोगों ने इस ट्वीट को देखकर यहाँ यथा राजा तथा प्रजा वाला तंज कसा। किसी ने कहा कि कॉन्ग्रेस में कॉमन सेंस की ही कमी है।

कहाँ हुई मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस से गड़बड़?

दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को दिए बयान में कोरोना संक्रमितों के हालात बताए थे। मसलन मध्य प्रदेश में कोरोना के कुल 9401 मामले आए हैं और इनमें से 6331 ठीक हो चुके हैं। तो उसके हिसाब से इस समय वहाँ का रिकवरी दर हुआ 64%।

ऐसे ही मृत्यु दर भी कुल मृतकों की संख्या और कुल संक्रमितों की संख्या को ध्यान में रखकर निकाला जाएगा। जैसे प्रदेश में अब तक मृतकों की संख्या 412 हो गई है। जबकि कुल संक्रमित मामले 9401 हो गए हैं। ऐसे में वहाँ का मृत्यु दर 4% है। इसका साफ मतलब है कि 3070 केस अभी वर्तमान में सक्रिय हैं। जिसका हिसाब एमपी कॉन्ग्रेस माँगना चाहती थी।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस को क्या समझना चाहिए?

इस गणित के अलावा एक बात और जो मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस को ऐसे अटपटे ट्वीट करने से पहले समझनी चाहिए। वो यह कि कभी भी रिकवरी रेट या फिर फैटेलिटी रेट, आपको शेष बचे केसों की क्या स्थिति है, इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं दे सकते। आम भाषा में समझें तो एक अस्पताल का उदाहरण लीजिए।

यदि कोई अस्पताल अपने यहाँ किसी निश्चित बीमारी के संबंध में रिकवरी दर की बात करेगा, तो वह उसी आँकड़े पर बात करेगा, जितने केस उस बीमारी के आए और जितने उसने पूर्ण रूप से ठीक करके भेजे।

या मृत्यु दर पर भी ऐसे ही आँकड़े निकालेगा कि आखिर कितने केस उससे संबंधित कुल आए थे और उनमें से कितनों की उस बीमारी के कारण मौत हुई। न कि वो इसके प्रति जवाबदेह होगा कि बाकी प्रतिशत का क्या स्टेटस है। जाहिर है जो लोग ठीक भी नहीं हुए या जिन्होंने बीमारी से जंग भी नहीं हारी, और तब भी अस्पताल में हैं, उनका इलाज जारी ही होगा।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस भविष्य में ऐसे सवाल उठाने से पहले यह जाने कि कुल मामलों में से रिकवरी रेट या मृत्यु दर निकलने के बाद शेष केसों की स्थिति इसलिए भी नहीं बता पाना मुश्किल होता है, क्यूँकि हालात हर बार अलग-अलग होते हैं।

कई बार मरीज एक अस्पताल में आता तो है, मगर असंतुष्ट होकर दूसरे अस्पताल चला जाता है या फिर कभी-कभी दूसरे राज्य। इसके अलावा हालात ऐसे भी होते हैं कि सुविधा न होने के कारण अस्पताल उस मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट कर देता है…

इस दौरान, खुद सोचिए अस्पताल उस मरीज को किसी भी श्रेणी में कैसे गिनेगा? या फिर कैसे बताएगा कि उसकी स्थिति क्या है? अस्पताल भी उन्हीं मामलों पर रिकवरी रेट या डेथ रेट बता पाएगा, जितना उसके पास डेटा मौजूद होगा। अन्यथा बाकी सबको वह संक्रमित या बीमार ही बताएगा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा समझौता: बेचैन चीन ने कहा- हमें अलग-अलग मोर्चों पर घेरने की तैयारी कर रहा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने गुरुवार (जून 4, 2020) को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सम्बन्ध को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी, इसीलिए इस डील को अहम माना जा रहा है। अब जब भारत-चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है और तनाव की स्थिति है, ऐसे में इस डील ने ऑस्ट्रेलिया को लेकर भी बीजिंग के कान खड़े कर दिए हैं।

चाइनीज मीडिया इसे चीन को घेरने की रणनीति के रूप में देख रही है। ट्विटर पर रोज अपनी सेना के शक्ति प्रदर्शन से डराने की कोशिश करने वाले ‘ग्लोबल टाइम्स’ को भी इससे गहरा सदमा लगा है और उसने इसे चीन को घेरने की रणनीति करार दिया। उसने लिखा कि बीजिंग को अलग-थलग करने के लिए अन्य देशों के साथ भारत समझौता कर रहा है। साथ ही उसने भारत पर आरोप लगाया कि भारत चीन को एक साथ कई फ्रंट्स पर घेरना चाहता है।

कुछ चाइनीज विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चीन का मुकाबला करने के लिए ही भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हाथ मिलाया है। ऑस्ट्रेलिया से भी हाल के दिनों में चीन के सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया अब तक रक्षा मामलों में अमेरिका पर और आर्थिक मामलों में चीन पर ही निर्भर रहा है। अब तक उसका रुझान यही रहा है कि दोनों देशों के बीच बैलेंस बना कर चला जाए। लेकिन, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है।

हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं और कई फैसलों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके विरोध में रहा है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पर भले ही ऑस्ट्रेलिया की निर्भरता हो लेकिन अब उसने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पहला इनफॉर्मल समिट 2018 में वुहान में हुआ था। उसके बाद भारत-चीन रिश्तों में प्रगति आई है और सीमा विवाद पर भी बात आगे बढ़ी।

‘असुरक्षित भावना’ से ग्रसित चाइनीज मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन दक्षिण एशिया और अफ्रीका में बड़ा रोल प्ले करना चाहता है, इसीलिए उसने कई छोटे देशों से साझेदारी बढ़ा दी है जबकि भारत के पास कोरोना वायरस संक्रमण के बीच दुनिया में अपनी साख बचाने की चुनौती है। भारत अब पश्चिमी जगत के ज्यादा क़रीब जा रहा है और हाल के फ़ैसले पिछले ढर्रे से एक शिफ्ट की तरफ इशारा कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब से इंडो-पैसिफिक रणनीति तैयार की है, तभी से वो भारत को इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 राष्ट्रों की बैठक के लिए आमंत्रित करना इसी कड़ी का एक हिस्सा हो सकता है। सीमा विवाद के बीच भारत भी चाहता है कि चीन पर पश्चिमी जगत से दबाव बने। इसी बहाने अमेरिका से रिश्ते तगड़े करने के प्रयास किए जाते हैं कि ये भारत की रणनीति में बदलाव की ओर एक इशारा होगा। हालाँकि, भारत अब तक चीन को घेरने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बनने से कतराता रहा है।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाडीलेटरल बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी थी। और अब ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के सबंधों में नजदीकियाँ भी बढ़ने लगी हैं। हिन्द महासागर में भारत और ऑस्ट्रेलिया वैसे भी प्रतिस्पर्द्धी रहे हैं। लोकेशन के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया इंडोनेशिया जैसे देशों का क़रीबी भी रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ पर विश्वास रहा है, ताकि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ सम्बन्ध प्रगाढ़ हो सकें।

दक्षिण-पूर्वी एशिया और हिन्द महासागर में भारत बड़ा किरदार अदा करने की रणनीति पर लगा हुआ है। भारत ने ख़ुद को ‘Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC)’ का भी सदस्य बना रखा है, जो सात देशों का समूह है। इसके सेक्रेटेरिएट के ख़र्च का लगभग एक तिहाई हिस्सा भारत ही वहन करता रहा है। भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य साझेदारी से कतराता रहा है।

एक्सरसाइज मालाबार में भी भारत, अमेरिका और जापान की सेनाओं के बीच अभ्यास होता है लेकिन उसमें ऑस्ट्रेलिया शामिल नहीं है। अब भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य अभ्यास का मार्ग प्रशस्त करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिया है। मालाबार एक्सरसाइज में भी ऑस्ट्रेलिया को जोड़ा जा सकता है। चीन का कहना है कि भारत अमेरिका के हाथों का प्यादा न बन कर अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता को ज्यादा महत्ता दे रहा है। यही कारण है कि चीन को घेरने की रणनीति का हिस्सा नहीं बनना, एक निर्णय के तहत लिया गया था। उसकी ये बेचैनी जायज है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने रविवार (मई 31, 2020) को आम की चटनी के साथ समोसे का स्वाद लिया था। इस मौके पर भी उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद किय था। स्कॉट मॉरिसन ने समोसे के साथ तस्वीर पोस्ट की और कहा था कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसे साझा करना चाहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके जवाब में कहा था कि वह कोविड-19 को हराने के बाद उनके साथ समोसे का आनंद लेंगे।

2018 में गर्भवती का रेप, 2020 में BJP कार्यकर्ता का गर्भपात… और अब मार-पीट: TMC गुंडों की हरकत पर मीडिया चुप

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासनकाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा एक और क्रूरतापूर्ण हरकत करने का मामला सामने आया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट की, जिसके बाद महिला का गर्भपात हो गया। यह घटना नॉर्थ 24 परगना जिले के हसनाबाद में फरवरी 20, 2020 को हुई थी। मेनस्ट्रीम मीडिया में इस ख़बर को नज़रअंदाज़ किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसके बारे में फिर से चर्चा की है।

पीड़िता की पहचान सोनाली बीवी के रूप में हुई थी, जो भाजपा के नेता सद्दाम गाज़ी की पत्नी हैं। गाजी ने कुछ महीनों पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था। सोनाली 3 महीने की गर्भवती थीं। जब ये हमला हुआ, तब शाम का समय था और सद्दाम का परिवार टेंगरा गाँव में भाजपा की बूथ लेवल बैठक अटेंड कर के लौट रहा था। बदमाशों ने सद्दाम की माँ और बहन को भी नहीं छोड़ा। उन पर भी हमले किए गए।

भाजपा ने इस इस मामले में टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं और हसनाबाद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस ने इस मामले की जाँच व्यक्तिगत दुश्मनी या आपसी रंजिश वाले एंगल से शुरू की थी। सोनाली से पहले उनके पति पर हमला किया गया था। जब उन्होंने अपने पति को बचाना चाहा तो बदमाशों ने उनकी पेट पर पर जोर की लात मारी। इसके बाद उन्हें टाकी के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जब सोनाली की हालत और बिगड़ने लगी तो उन्हें बारिसात स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुँचाया गया। हालाँकि, बाद में उनकी हालत तो स्थित हो गई लेकिन उनका गर्भपात हो गया और बच्चे को नहीं बचाया जा सका। बाद में पुलिस ने इस मामले की राजनीतिक रंजिश के एंगल से जाँच की लेकिन उसके बाद की किसी भी ख़बर में हमें तृणमूल कॉन्ग्रेस के आरोपितों की गिरफ़्तारी की बात नहीं पता चली। बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा इस तरह के अपराध का इतिहास रहा है।

2018 में नदिया जिले में एक व्यक्ति ने भाजपा से पंचायत चुनाव लड़ा तो टीएमसी के गुंडों ने उसकी महिला रिश्तेदार के साथ बलात्कार किया। उस समय भी पीड़िता गर्भवती थी, लेकिन फिर भी उसका बलात्कार किया गया। पीड़िता की सास द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर धमकी देने का आरोप लगाया गया था। उनका कहना था कि वो चुनावी मैदान से पीछे हटने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।

हालाँकि, तृणमूल कॉन्ग्रेस इन आरोपों को नकारती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल के 80 ऐसे भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों को निमंत्रण दिया गया था, जिनकी जान राजनीतिक विरोध में ले ली गई। आरएसएस से जुड़े एक पति-पत्नी को भी मार डाला गया था। उस घटना में भी पीड़िता गर्भवती थीं। हाल ही में भाजपा नेता सब्यसाची दत्ता की पिटाई की गई। बंगाल में पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और अब लोकसभा चुनाव के बाद भी ऐसी हरकतें चालू हैं।

अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने फिर भेजा समन, पहले कोरोना संक्रमित अधिकारी से कराया था पूछताछ

पिछले महीने 12 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद मुंबई पुलिस ने एक बार फिर रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी को समन भेजा है। इस बार मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के साथ रिपब्लिक टीवी के मुख्य वित्तीय अधिकारी सुंदरम को भी पूछताछ के लिए 10 जून को पायधुनी पुलिस थाने बुलाया है।

अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के प्रमुख वित्तीय अधिकारी को भेजे गए इस पत्र में मुंबई पुलिस ने उन्हें जाँच अधिकारी सुरेश गायकवाड के सामने प्रस्तुत होने को बोला है। ये पूछताछ 2 मई 2020 को दर्ज हुए एक मामले से संबंधित है। जिसे आईपीसी की धारा 153, 153 ए, 295ए, 500, 505 (2), 501 (1) (B) (C), 511, 120 (B) के तहत दायर किया गया था।

गौरतलब है कि बांद्रा में 14 अप्रैल को प्रवासी मजदूरों की भीड़ को इकट्ठा देखकर रिपब्लिक टीवी ने इस विषय पर अपनी रिपोर्टिंग की थी। इसी के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने 2 मई को मीडिया संस्थान पर केस दर्ज किया था। ये FIR पायधुनी पुलिस थाने में दर्ज हुई थी। इस शिकायत को दर्ज करने वाले रजा अकादमी के इरफान अबुबकर शेख थे।

इस शिकायत में अर्नब गोस्वामी पर आरोप लगाया गया था कि वह बांद्रा प्रोटेस्ट को मस्जिद से जोड़कर मुस्लिम समुदाय को बदनाम करना चाहते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार पूरे मामले में मस्जिद का भीड़ इकट्ठी होने से कोई लेना-देना नहीं था।

शेख ने यह भी आरोप लगाया कि रिपब्लिक भारत के एंकर अर्नब गोस्वामी ने बांद्रा के रेलवे स्टेशन पर प्रवासियों के आंदोलन की फुटेज का इस्तेमाल अपने शो में किया। जबकि मस्जिद के पास खुली जगह में प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे। मस्जिद और प्रोटेस्ट का कोई आपसी लेना-देना नहीं है। लेकिन अर्नब ने जानबूझकर साम्प्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए मस्जिद को उजागर किया।

यहाँ बता दें कि पिछले माह 27 अप्रैल को भी अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे तक मुंबई पुलिस ने पूछताछ की थी। उस समय केस सोनिया गाँधी पर टिप्पणी को लेकर था। अर्नब पर अलग-अलग राज्यों में दर्ज की गई एफआईआर का एक जैसा स्वरूप देखते हुए कोर्ट ने इस मामले में सभी एफआईआर को एक में जोड़ दिया था और सबको मुंबई ट्रांसफर कर दिया था। मगर, एक हफ्ते बाद, बांंद्रा वाले पुराने मामले को लेकर रजा अकादमी ने यह एफआईआर की थी।

इस समय हालातों के मद्देनजर सबसे हैरानी की बात है कि जब महाराष्ट्र की स्थिति कोरोना के कारण काबू से बाहर हो रखी है और केवल मुंबई में 50 हजार कोरोना के केस आ चुके हैं, उस समय में भी मुंबई पुलिस अर्नब पर शिकंजा कसने से नहीं चूक रही।

याद दिला दें कि जब पिछली बार लंबी पूछताछ के लिए अर्नब को बुलाया गया था, तो उसके बाद मालूम चला था कि जिस अधिकारी ने उनसे पूछताछ की वो कोरोना पॉजिटिव था। इस बात की सूचना खुद अर्नब के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान दी थी। वहीं कोर्ट ने भी कहा था कि अब अर्नब के ख़िलाफ़ पालघर मामले में सोनिया गाँधी को लेकर जो टिप्पणी थी, उस पर कोई एफआईआर नहीं होगी।

₹14000 करोड़ का घोटाला: अहमद पटेल बोले- 65 का हूँ, कोरोना के कारण न करें पूछताछ; ED ने कहा- घर आकर पूछ लेंगे सवाल

कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक पत्र लिखा है। इसमें उम्र और कोरोना महामारी के कारण उपजे हालातों का हवाला देते हुए पूछताछ से छूट मॉंगी है। ईडी ने कॉन्ग्रेस नेता को 14 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के संदेसरा स्कैम में पूछताछ के लिए तलब किया था।

एजेंसी के सामने हाजिर होने से एक दिन पहले पटेल ने यह चिट्ठी लिखी। कॉन्ग्रेस नेता ने लिखा, “65 से ज्यादा की उम्र का हूॅं, कृप्य फिलहाल माफ करें।” उन्होंने कहा कि कोरोना से जुड़े गाइडलाइन के कारण उनके लिए घर में रहना ही ठीक होगा।

ईडी के प्रश्नों से बचने के लिए अहमद पटेल ने खुद को वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में रखते हुए कहा कि इस समय घर से बाहर निकलने में अधिक उम्र वालों को ज्यादा जोखिम है। इसलिए उन्होंने पत्र के जरिए ईडी से कल होने वाली पूछताछ के समन को फिलहाल टालने का आग्रह किया।

हालाँकि प्रवर्तन निदेशालय ने अपने जवाब में नई तारीखों का उल्लेख करते हुए अहमद पटेल से घर पर ही पूछताछ की बात कही है। एजेंसी ने पटेल से कहा है कि पूछताछ के लिए वह इस सप्ताह या फिर अगले सप्ताह उनके आवास पर ही आ जाएँगे।

इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को पुष्टि की कि अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी ने कबूल किया है कि वे स्टर्लिंग बायलॉज लिमिटेड के निदेशक नितिन संदेसरा के छोटे भाई चेतन संदेसरा को जानते थे।

संदेसरा मामले से अहमद पटेल का कथित संबंध

कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम संदेसरा मामले में पिछले साल सामने आया था। सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जाँच में गवाहों ने अहमद पटेल, उनके बेटे फैसल पटेल और उनके दामाद इरफान सिद्दीकी नाम लिया था। सूत्रों ने बताया कि गवाहों ने अहमद पटेल के घर को हेडक्वार्टर बताया था। सूत्रों ने यह भी बताया था कि फैसल पटेल और दामाद इरफान अहमद सिद्दीकी ने संदेसरा से पैसे लिए थे।

पिछले साल अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल को तलब किया था। ईडी द्वारा फैसल पटेल से दवा कंपनी के मालिक संदेसरा बंधुओं से संबंधों को लेकर पूछताछ की गई थी।

पूछताछ से बचने के लिए पहले भी स्वास्थ्य का बना चुके हैं बहाना

कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल का पूछताछ से बचने के लिए स्वास्थ्य का बहाना बनाना कोई नई बात नहीं है। पिछले साल भी जब पटेल को आयकर विभाग ने हवाला केस में पूछताछ के लिए बुलाया था तो उन्होंने स्वास्थ्य का हवाला दिया था। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यालय में हवाला द्वारा 400 करोड़ रुपये नकद पहुँचने का आरोप था, लेकिन उस वक्त भी कॉन्ग्रेस नेता अपनी खराब सेहत का बहाना बनाकर पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे।

तब उन्होंने साँस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी और खुद को फरीदाबाद, हरियाणा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती करवा लिया था। रिपोर्टों के अनुसार पटेल को अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

अहमद पटेल अन्य कई विवादों में भी शामिल रहे हैं

अहमद पटेल का विवादों से पुराना नाता रहा है और उनसे अन्य कई मामलों में भी पूछताछ की जा रही है। अप्रैल 2019 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी के यहाँ छापेमारी के बाद रिपोर्ट सामने आई थी कि दिल्ली के तुगलक रोड स्थित एक प्रमुख राजनीतिक दल के मुख्य कार्यालय में 20 करोड़ रुपए भेजे गए थे, जिसे पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के माध्यम से भेजा गया था।

हालाँकि विभाग ने राजनीतिक दल और पदाधिकारी का नाम नहीं बताया था, लेकिन यह बताया गया था कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी एसएम मोइन के निवास स्थान पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। दरअसल जब आयकर विभाग के अधिकारी मोइन के आवास पर छापेमारी कर रहे थे, उस समय भी अहमद पटेल दिल्ली में मोइन के आवास पर पहुँचे थे।

अहमद पटेल का नाम यूपीए कार्यकाल के दौरान अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जाँच के दौरान भी सामने आया था। इस दौरान बिचौलिया मिशेल से बरामद एक डायरी में कुछ रिश्वत प्राप्तकर्ताओं के नामों की तरफ इशारा किया गया था, जो कि सौदे को पूरा करने के लिए दी गई थी। डायरी में कुछ कोडवर्ड जैसे कि “एपी”, “एफएएम”, “पीओएल”, “बीयूआर”, “डीजी एसीक्यू”, “एएफ” लिखे हुए थे।

कथित तौर पर उन लोगों के नाम डायरी में लिखे हुए थे, जिनको रिश्वत दी गई थी। अगस्ता के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को भारत में प्रत्यर्पित किए जाने के बाद हिरासत के दौरान उसने ईडी को कथित तौर पर बताया था कि एपी का मतलब अहमद पटेल है।

एकता कपूर ने माँगी माफी, डिलीट किया सीन: वेब सीरिज XXX 2 में सेना और वर्दी का बनाया था मजाक

ALTBalaji की संस्थापक और प्रोड्यूसर एकता कपूर ने बताया कि वेबसीरीज ‘XXX: Uncensored 2’ से भारतीय सेना और वर्दी का अपमान करने वाला सीन डिलीट कर दिया है। हालाँकि उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए ट्रोल को बुरा अनुभव बताया।

बालाजी टेलीफिल्म्स ने कहा कि उनकी कंपनी भारतीय सेना का “काफी सम्मान” करती है। साथ ही उन्होंने अनजाने में उनकी भावना को आहत करने के लिए माफी भी माँगी।

एकता कपूर ने बयान में कहा, “व्यक्तिगत तौर से और एक संगठन के रूप में, हम भारतीय सेना के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं। हमारी भलाई और सुरक्षा में उनका योगदान बहुत बड़ा है। हमने उस दृश्य को पहले ही डिलीट कर दिया है जिसके बारे में बात की जा रही है। हमारी तरफ से एक्शन ले लिया गया है। हम अनजाने में किसी की भावना आहत करने के लिए माफी माँगते हैं। ट्रोल्स द्वारा बयानबाजी करने और रेप की धमकी देने की हम कतई सराहना नहीं करते हैं।”

एक वीडियो में एकता कपूर ने खुलासा किया है कि वेब सीरीज से विवादास्पद सामग्री को हटा दिया गया है और सेना के अधिकारियों की पत्नियों से माफी भी माँग ली गई है।

गौरतलब है कि भारतीय सेना को अपमानित करने के आरोप में बिग बॉस-13 के प्रतिभागी रहे विकास पाठक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ ने प्रोड्यूसर एकता कपूर और उनकी माँ शोभा कपूर के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई थी। भाऊ ने आरोप लगाया कि एकता कपूर ने अपनी वेब सीरीज में देश के जवान और उसकी वर्दी का मजाक बनाया है। बता दें कि शिकायत दर्ज कराने के बाद हिन्दुस्तानी भाऊ के पास बड़े-बड़े लोगों के फोन आने लगे थे।

इसके बाद हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी एकता कपूर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत शहीद कल्याण फाउंडेशन के अध्यक्ष मेजर टीसी राव ने पालम विहार थाने में करवाई थी। उन्होंने कहा था, “यह बेहद आपत्तिजनक है और यह हमारे सशस्त्र बलों का मनोबल गिरा सकती है। ‘ट्रिपल एक्स-2’ में ऐसे दृश्य भी हैं, जिनमें सैन्य पुरुषों की वर्दी में अशोक की प्रतिमा और ताज के प्रतीक फटे हुए हैं। यह हमारे सशस्त्र बलों और सैन्य कर्मियों का अपमान है।”

वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में एकता कपूर के खिलाफ एक और शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें कहा गया था कि उनकी नई वेब सीरीज में हिंदू देवताओं के साथ ही सेना का अपमान किया गया है।

छत्तीसगढ़: अधिकारियों की हाँ-ना में उलझा बंगलुरु से घर लौटा प्रवासी, होम क्वारंटाइन के लिए लगा रहा चक्कर

कोरोना संकट के इस दौर में कृष्ण कुमार राठौड़ राहत की उम्मीद में बंगलुरु से अपने गृह प्रदेश छत्तीसगढ़ लौटे। लेकिन यहॉं पहुॅंचते ही उन्हें प्रदेश सरकार की मशीनरी ने ऐसे उलझाया कि अब होम क्वारंटाइन होने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

राठौड़ छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के रहने वाले हैं। वे सोमवार (जून 8, 2020) को बंगलुरु से रायपुर पहुँचे। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि बंगलुरु से रवाना होने से पहले ही छत्तीसगढ़ का ई-पास बनवा लिया था। साथ ही राज्य के हेल्पलाइन नंबर 104 पर भी बात की थी। 

इस दौरान जब उन्होंने क्वारंटाइन के बारे में पूछा तो उनसे कहा गया कि रायपुर एयरपोर्ट पर जॉंच के बाद उन्हें एहतियातन होम क्वारंटाइन में रहना होगा। उनके घर के बाहर एक पोस्टर चिपका दिया जाएगा। इस पर उनके उनके बाहर से आने की बात और 14 दिन तक होम क्वारंटाइन में रहने की बात लिखी होगी। ताकि आस-पड़ोस या फिर कोई भी बाहरी उनके संपर्क में न जाए।

कृष्ण कुमार राठौड़ का कहना है कि इस भरोसे के बाद वे छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुए। रायपुर एयरपोर्ट पर उनका मेडिकल चेकअप वगैरह किया गया। उन्होंने दावा किया, “मैंने एयरपोर्ट पर पदाधिकारियों से फिर से इस बात की। उनसे कहा कि मुझे कोरबा जाना है। वहाँ मुझे होम क्वारंटाइन दिया जाएगा या नहीं? अगर नहीं तो मैं अभी यहॉं से लौटकर बंगलुरु चला जाऊँगा। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें होम डिस्ट्रिक्ट में होम क्वारंटाइन दिया जाएगा।”

राठौड़ का दावा है कि यहाँ पहुँचने के बाद उन्हें सरकार द्वारा बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर अथवा पेड क्वारंटाइन सेंटर में रहने को कहा गया। इसके बाद उन्होंने हेल्थ डिपार्टमेंट के हेड, क्वारंटाइन हेड सबसे बात की। किसी के पास होम क्वारंटाइन की जानकारी नहीं थी। उन्हें कोरबा के कलेक्टर से बात करने को कहा गया। वे कलेक्टर ऑफिस भी गए।

राठौड़ के अनुसार यहॉं भी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। सरकारी क्वारंटाइन या पेड क्वारंटाइन में रहना जरूरी बताया गया। उन्होंने बताया कि दो तीन हफ्ते पहले उनके पास जो मैसेज आया था, उसमें पेड क्वारंटाइन का 700 रुपया बताया गया था। लेकिन, अब एक दिन का 1300-1400 भुगतान करना पड़ रहा। साथ ही उनका आरोप है कि यहाँ 14 दिन तक रहने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको जाने दिया जाएगा। ये स्पष्ट नहीं है कि टेस्ट कब होगा। अगर 14 दिन तक आपका टेस्ट नहीं होगा तो फिर आपको आगे भी रुकना पड़ेगा।

उन्होंने विलासपुर के आईजी दिपांशु काबड़ा के ट्वीट का भी हवाला दिया। कथित तौर पर आईजी ने उनके (कृष्ण कुमार राठौड़) एक दोस्त जो कोलकाता से आ रहे थे को इस संबंध में बताया था कि रायपुर के डॉक्टर जो राय देंगे उस अनुसार चीजें होंगी। राठौड़ कहते हैं कि ऐसा लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में गाइडलाइन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हर जगह के पदाधिकारी अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं।

राठौड़ के दावों को लेकर हमने कोरबा के कलेक्टर से बात की। उन्होंने बताया, “कोरबा में होम क्वारंटाइन की सुविधा नहीं है। या तो उन्हें सरकारी क्वारंटाइन सेंटर में रहना होगा या फिर अगर सक्षम हैं तो पेड क्वारंटाइन में रह सकते हैं।”

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि चीजें कोरबा के कलेक्टर के दिए बयान की तरह ही सुलझी हुई हैं तो फिर राठौड़ को जो जानकारियॉं कथित तौर पर दी गईं वह इतनी उलझी हुई क्यों हैं?

J&K: अनंतनाग में हिंदू सरपंच अजय पंडिता की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या की

घाटी में सुरक्षाबलों का आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है। इसी बीच आतंकवादियों ने कश्मीर के एक हिंदू सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकियों ने घटना को उस समय अंजाम दिया कि जब सरपंच अपने बागान में गए हुए थे। मृतक सरपंच की पहचान अजय पंडिता के रूप में हुई है।

जानकारी के मुताबिक घटना जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के लोकभवन लरकीपोरा की है। पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार (08 जून, 2020) की शाम करीब 6 बजे कुछ आतंकवादियों ने 40 वर्षीय सरपंच अजय पंडिता उर्फ भारती को गोली मार दी। घटना को अंजाम देकर आतंकवादी मौके से फरार हो गए।

आस-पास के लोगों ने पंडिता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक अजय पंडिता कॉन्ग्रेस से जुड़े हुये थे और लुकबावन इलाके के सरपंच थे। सरपंच की हत्या की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

जम्मू-कश्मीर कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष जीए मीर ने बताया कि सरपंच पिछले 2 महीनों से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने इस बारे में अधिकारियों को भी सूचित किया था। मीर ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय लोगों ने उन्हें सर्वसम्मति से सरपंच चुना था।

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में सिर्फ 24 घंटे के भीतर भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ ताबड़तोड़ ऐक्शन लेते हुए 9 आतंकियों को मार गिराया है। इससे पहले रविवार (07 जून, 2020) को शोपियाँ के ही रेबन गाँव में 5 आतंकवादियों को ढेर किया गया था और आज 4 आतंकियों को पिंजूरा में मारा गया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, पुलिस को कुछ वक्त पहले पिंजूरा में आतंकियों की मूवमेंट की खबर मिली थी। इस सूचना पर शनिवार (06 जून, 2020) शाम से ही यहाँ बड़े पैमाने पर सेना के जवान, CRPF और SOG तलाशी अभियान चला रहे थे।

ऐसे में सोमवार (जून 8, 2020) को आतंकियों ने घेराबंदी के बीच जंगली इलाके में भागने का प्रयास किया। लेकिन जवानों ने उन्हें ललकारा और आतंकियों ने सुरक्षाबल पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने भी फायरिंग की। करीब 3 घंटे के ऑपरेशन के बाद 4 आतंकी मौके पर मार गिराए गए।

LNJP के डॉक्टर ने बताया- वार्ड 31 में है मरीज, 5 दिन तक संक्रमित पिता को खोजा; वार्ड की जगह ICU में मिले: बेटे का दावा

कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही दिल्ली के अस्पतालों की पोल भी खुलती जा रही है। पीड़ितों की आपबीती केजरीवाल सरकार के दावों के एकदम उलट हैं।

एक टीवी चैनल से बातचीत में मरीजों के परिजनों ने लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल (LNJP) में बदइंतजामी की कलई खोल दी है। यह अस्पताल दिल्ली सरकार के अधीन आता है।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए एक मरीज की बहन ने बताया, “मेरे भाई को अस्पताल में भर्ती हुए 10 दिन हो गए हैं, लेकिन जब से वह भर्ती हुए हैं तब से उनको दूध के अलावा कुछ नहीं दिया जा रहा है। अगर हम लोग उनके लिए घर से खाना लाते हैं, तो उसके लिए अस्पताल प्रशासन के लोग आनाकानी करते हैं।” बहन के मुताबिक दूसरी बार सैंपल लिए हुए चार दिन हो गए हैं, लेकिए उनकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है।

दूसरे मरीज के बेटे ने बताया कि उसकी माँ को खाना-पीना ढंग से नहीं दिया जाता। अस्पताल के अंदर गंदगी बहुत ज्यादा है। वह बेड से उठ भी नहीं सकती खाना ले जाना तो दूर की बात है, जिसके कारण उनका खाना उन तक पहुँचता भी नहीं है। वो बेड पर पड़ी हुई हैं, लेकिन उनकी न कोई सुनने वाला है और न ही कोई उन्हें वहाँ पूछने वाला है।

तीसरे मरीज के परिजन के बेटे ने बताया कि मैंने अपने फादर को 30 मई में माताचरण अस्पताल में भर्ती कराया था, जहाँ पर उनकी रिपोट पॉजिटिव आई। लेकिन उस अस्पताल में उन्हें कोई इलाज नहीं मिला। वहाँ से मेरे फादर को LNJP में रेफर कर दिया गया।

उसने आगे बताया कि मैं अपने फादर को LNJP में 1 जून को लेकर आया। इसके बाद उसी शाम में मैंने डॉक्टर से पूछा कि मेरे फादर को किस वार्ड में एडमिट किया गया है तो उन्होंने बताया कि उन्हें वार्ड नंबर 31 में शिफ्ट किया गया है। वार्ड 31 में जाकर देखा तो वहाँ वे नहीं मिले। पूछताछ में पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं उस वार्ड में। मरीज के बेटे ने बताया कि वह 2 से लेकर 6 जून तक अपने फादर को अस्पताल के अलग-अलग वार्ड में जाकर खोजता रहा, लेकिन वह कहीं नहीं मिले।

इसके बाद बताया कि वे सर्जिकल वार्ड में हैं फिर बताया कि वे ऑर्थो वार्ड में हैं, लेकिन आखिर में वह आईसीयू में बैठे हुए मिले। अगर उस समय मेरे साथ मीडिया नहीं होती तो शायद मैं अपने फादर को नहीं खोज पाता।

आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं कि जब दिल्ली के अस्पतालों की बदहाल स्थित को मरीजों ने या फिर उनके परिजन सामने लेकर आए हैं। इससे पहले भी दिल्ली के एक अस्पताल से लापरवाही का एक वीडियो सामने आया था, जहाँ शवों के पास ही कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा था और कई मरीजों को कोरोना का इलाज भी नहीं मिल रहा था।

वीडियो को भाजपा नेता नंदिनी शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। वीडियो में एक शख्स जानकारी दे रहा था कि अस्पताल में शवों को घंटों तक ऐसे ही पड़े हुए छोड़ दिया जा रहा है।

वडोदरा: आधी रात तस्करों ने गाय चुराई, कार में ठूँस कर ले गए; देखें Video

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो गुजरात के वडोदरा का बताया जा रहा है। इस वीडियो में वडोदरा के सलातवाड़ा इलाके में गौ तस्करों को आधी रात में गाय चुराते और उसे कार में लाद कर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

तेजस गिरी आर गोस्वामी नाम के एक यूजर ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर वीडियो शेयर किया है। इसमें देखा जा सकता है कि गौ तस्कर गाय को बेरहमी से, जबरन धक्का देकर हरे रंग की स्कॉर्पियो कार के अंदर ठूँस रहे हैं।

चूँकि वीडियो रात में शूट किया गया है, इसलिए तस्वीरें स्पष्ट नहीं है, मगर इसमें वडोदरा में दो लेन के चौराहे पर खड़ी एक हरे रंग की स्कॉर्पियो कार से कुछ लोगों को निकलते देखा जा सकता है। इनलोगों को गौ तस्कर बताया जा रहा है।

कार से निकलने के बाद ये लोग फुटपाथ पर बैठे गोवंशों के पास जाते हैं और एक गाय को जबरदस्ती खींचकर गाड़ी की तरफ ले जाते हैं और गाड़ी में उसे लाद लेते हैं।

7 जून, 2020 को करेलीबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में कहा गया है कि इस घटना को गोवंश के मालिक के एक दोस्त ने रिकॉर्ड किया था। जानकारी के मुताबिक यह शिकायत सिद्धार्थ रबड़ी ने करवाई है, जो कि इन गोवंशों के मालिक हैं।

शिकायत के अनुसार, पशुपालन ही रबड़ी की आजीविका है। उनके घर में लगभग 15-20 गायें हैं। रबड़ी ने अपनी शिकायत में कहा कि हाल ही में कुछ चोर उनकी गायों को चुरा रहे हैं।

FIR में लिखा है कि 7 जून 2020 की सुबह लगभग 3 बजे, 3-4 लोग स्कॉर्पियो कार में आए और 60,000 रुपए की कीमत की एक गाय चुरा कर ले गए। सिद्धार्थ ने अपनी प्राथमिकी में आगे कहा कि उनके दोस्त ने गाय चुराने वाले अपराधियों का वीडियो बना लिया था। गाय के मालिक ने आरोप लगाया कि ये तस्कर संभवत: इन गोवंशों को बूचड़खानों को बेचते होंगे।