Home Blog Page 4859

हैदराबाद: नाबालिग दलित से AIMIM कार्यकर्ता शकील खान ने किया रेप, धमकाया भी

हैदराबाद के चदरघाट (Chaderghat) पुलिस ने एआईएमआईएम ( AIMIM) कार्यकर्ता शकील खान (Shakeel Khan) को नाबालिग दलित लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड में भेज दिया गया है।

कमल नगर निवासी शकील खान (Shakeel Khan) ने उसी इलाके की एक 16 साल की नाबालिग लड़की को बहला-फुसला कर उसके साथ बलात्कार किया था। शकील खान ने बलात्कार तब किया जब लड़की अपने चाचा के घर पर थी।

शकील खान मलकपेट निर्वाचन क्षेत्र का सक्रिय एआईएमआईएम कार्यकर्ता है। वह मंडल स्तर पर पार्टी की गतिविधियों में भाग लेता रहा है। उसने नाबालिग दलित लड़की को लालच दिया था, जो उसी इलाके में रहती थी और उसका बलात्कार किया।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM कार्यकर्ता शकील खान ने पीड़ित लड़की से दुष्कर्म के बाद उसे फोन पर इस बारे में किसी को भी ना बताने की धमकी दी थी। लेकिन पीड़ित लड़की ने दुष्कर्म की जानकारी अपने परिवार को दी। इसके बाद पीड़ित लड़की के रिश्तेदारों की शिकायत पर पुलिस ने शकील के खिलाफ केस दर्ज किया।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर हैदराबाद पुलिस से खूब सवाल किए जा रहे हैं।

ट्विटर पर पुलिस ने शकील खान पर की जा रही कार्रवाई की सूचना दी है

चदरघाट पुलिस ने IPC की धारा 376 (बलात्कार), POCSO अधिनियम और SC /ST अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चदरघाट पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर पी सतेश ने बताया, “सूचना मिलने पर हमने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और कानून की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, उसे न्यायिक रिमांड में भेज दिया गया है।”

जिस रियाज नायकू के लिए पत्थरबाजी कर रहे थे लोग, उसे एक अन्य आतंकी गुट ने फँसा कर मरवाया!

पुलवामा के अवंतिपुरा के बेगपोरा गाँव में बुधवार (6 मई,2020) को सुरक्षाबलों ने कश्मीर के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी और हिज्बुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज नायकू को मार गिराया। नायकू के मारे जाने की खबर के बाद अवंतिपुरा में स्थानीय लोगों के द्वारा सुरक्षाबलों पर पत्थराबाजी की घटनाएँ भी सामने आई हैं। साथ ही इस आतंकी मुठभेड़ के दौरान घटनास्थल पर मौजूद एक आतंकी का फोन भी इंटरसेप्ट हुआ है। जिसमें हिज्बुल मुजाहिदीन और द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के बीच दरार की बात सामने आई है। बता दें कि द रेजिस्टेंस फ्रंट एक आतंकी संगठन है, जो लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़ा हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार रियाज नायकू का साथी आतंकी मुठभेड़ के वक्त किसी से बात कर रहा था और उसको वाहिद भाई नाम से संबोधित करते हुए कह रहा था, “हम लोग पुलवामा के बेघपोरा में घिर गए हैं। मैं घायल हो गया हूँ और रियाज भाई लड़ रहा है। यह अपने लोगों की करतूत की वजह से हुआ है। इसके लिए टीआरएफ जिम्मेदार है। इससे दूर रहिए, क्योंकि यह हमारे कश्मीर को बर्बाद कर डालेगा।” इस बातचीत में यह बात साफ़ हो जाती है कि टीआरएफ और हिजबुल मुजाहिदीन के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

सूत्रों का कहना है अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि जिस आतंकी को फ़ोन पर बातचीत करते हुए इंटरसेप्ट किया गया है, वो रियाज नायकू के साथ मारा गया गया आतंकी है या कोई दूसरा शख्स है। हालाँकि बातचीत से यह बात तो साफ़ है कि यह आतंकी मुठभेड़ के दौरान घटनास्थल पर मौजूद था और घायल भी हुआ था।

वहीं आतंकी रियाज नायकू की मौत के बाद अवंतीपुरा के स्थानीय लोग उसके समर्थन में उतर आए और जिस जगह नायकू को मारा गया, वहाँ भीड़ ने सुरक्षाबल की बख्तरबंद गाड़ी को घेरकर पत्थरबाजी की। लोग बख्तरबंद गाड़ी पर चढ़ कर नुकसान पहुँचाने लगे और लाठी डंडों से उस पर मारते रहे। नायकू के मारे जान के बाद सीआरपीएफ के बयान के बाद यह बात सामने आयी थी कि सुरक्षाबल के जवान जब पुलवामा जिले के अवंतीपुरा के बेघपुरा इलाके में मुठभेड़ स्थल से लौट रहे थे, तब स्थानीय लोगों ने उन पर पथराव किया। इसके बाद भीड़ द्वारा की जा रही पत्थरबाज़ी की वीडियो भी सामने आई।

आपको बता दें कि आतंकी नायकू के मारे जाने के बाद अवंतीपुरा सहित पूरे कश्मीर के हालात पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की कड़ी नजर है। गृह मंत्रालय कानून-व्यवस्था को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस के संपर्क में है। सुरक्षा के हिसाब से अभी जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और वॉयस कॉलिंग को बंद कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की अफवाह न फैल पाए। साथ ही पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बताया कि लोगों की आवाजाही पर भी सख्त पाबंदियाँ लगा दी गई हैं।

लाभ-हानि से परे भारत आज हर किसी की मदद कर रहा: बुद्ध पूर्णिमा पर PM मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक बार फिर देश को संबोधित किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध के आदर्शों की याद दिलाते हुए बताया कि भगवान बुद्ध कहते थे कि मानव को निरंतर ये प्रयास करना चाहिए ताकि वो कठिन स्थितियों पर विजय प्राप्त कर उनसे बाहर निकले। पीएम मोदी ने कहा कि बुद्ध के आदर्श यही कहते थे कि थक कर रुक जाना कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने दुनिया को सेवा करने का संदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि बुद्ध पूर्णिमा को तथागत गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में माना जाता है। उन्हें ‘बुद्धत्व’ की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को ही हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण इस बार परिस्थितियाँ अलग हैं, दुनिया मुश्किल वक्त से गुजर रही है। आपके बीच आना मेरे लिए सौभाग्य होता, लेकिन मौजूदा स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती है। भारत आज बुद्ध के कदमों पर चलकर हर किसी की मदद कर रहा है, फिर चाहे वो देश में हो या फिर विदेश में, इस दौरान लाभ-हानि को नहीं देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज हर कोई देश के अलग-अलग हिस्सों में, दुनिया में अपनी-अपनी तरह से लोगों की सेवा कर रहा है। फिर चाहे सड़क पर लोगों को कानून का शासन करवाना हो या बीमार का इलाज करना हो, हर कोई अपनी ओर से सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया में उथल-पुथल है, ऐसे वक्त में बुद्ध की सीख जरूरी है।

पीएम मोदी के सन्देश की प्रमुख बातें –

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा –
भगवान बुद्ध का वचन है-
“मनो पुब्बम् गम: थम्म:
मनो सेट्टा, मनो मया
यानी धम्म मन से ही होता है, मन ही प्रधान है। सारी प्रवृत्तियों का अगवा है।”

  • भारत विश्व हित में काम कर रहा है और करता रहेगा।
  • भारत बिना किसी स्वार्थ के एक साथ खड़ा है। हमें अपने, अपने परिवार की रक्षा करनी है।
  • हमें संकट के समय में लोगों की मदद करने की जरूरत है।
  • मानवता की सेवा करने वाले ही बुद्ध के सच्चे अनुयायी है।
  • लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर के अलावा श्रीलंका के श्री अनुराधापुर स्तूप और वास्कडुवा मंदिर में हो रहे समारोहों का इस तरह एकीकरण बहुत ही सुंदर है। हर जगह हो रहे पूजा कार्यक्रमों का ऑनलाइन प्रसारण होना अपने आप में अद्भुत अनुभव है।
  • बुद्ध किसी एक परिस्थिति तक सीमित नहीं हैं, किसी एक प्रसंग तक सीमित नहीं हैं। सिद्धार्थ के जन्म, सिद्धार्थ के गौतम होने से पहले और उसके बाद इतनी शताब्दियों में समय का चक्र अनेक स्थितियों परिस्थितियों को समेटते हुए निरंतर चल रहा है।
  • समय बदला, स्थिति बदली, समाज की व्यवस्थाएं बदलीं, लेकिन भगवान बुद्ध का संदेश हमारे जीवन में निरंतर प्रवाहमान रहा है। ये सिर्फ इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि, बुद्ध सिर्फ एक नाम नहीं हैं, बल्कि एक पवित्र विचार भी हैं।
  • भगवान बुद्ध कहते थे कि मानव को निरंतर ये प्रयास करना चाहिए कि वो कठिन स्थितियों पर विजय प्राप्त करे उनसे बाहर निकले। थक कर रुक जाना कोई विकल्प नहीं होता। आज हम सब भी एक कठिन परिस्थिति से निकलने के लिए, निरंतर जुटे हुए हैं, साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
  • ऐसे समय में जब दुनिया में उथल-पुथल है। कई बार दुःख-निराशा-हताशा का भाव बहुत ज्यादा दिखता है, तब भगवान बुद्ध की सीख और भी प्रासंगिक हो जाती है।

पीएम मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध के बताए चार सत्य निरंतर भारत भूमि की प्रेरणा बने हुए हैं –

  1. दया
  2. करुणा
  3. सुख-दुख के प्रति समभाव
  4. जो जैसा है उसको उसी रूप में स्वीकारना

बुद्ध भारत के बोध और भारत के आत्मबोध, दोनों का प्रतीक हैं। इसी आत्मबोध के साथ, भारत निरंतर पूरी मानवता के लिए, पूरे विश्व के हित में काम कर रहा है और करता रहेगा। भारत की प्रगति, हमेशा, विश्व की प्रगति में सहायक होगी।

केमिकल प्लांट में गैस रिसाव: अब तक कुल 8 की मौत, विशाखापट्टनम में लगभग 5000 से ज्यादा लोग बीमार

आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के वेंकटपुरम गाँव में बृहस्पतिवार (मई 07, 2020) सुबह कैमिकल गैस लीक होने से 8 लोगों की मौत हो गई, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। यह हादसा आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक फार्मा कंपनी में हुआ है।

ANI के अनुसार, आरआर वेंकटपुरम स्थित विशाखा एलजी पॉलिमर कंपनी से खतरनाक जहरीली गैस का रिसाव हुआ है। इसमें एक बच्चे सहित तीन की मौत हो चुकी है। आंखों में जलन और साँस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद लोगों को अस्पताल ले जाया जा रहा है। पुलिस, फायर टेंडर, एंबुलेंस मौके पर उपस्थित है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गैस रिसाव से करीब एक हजार से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं। यह गैस रात 3 बजे लीक हुई।

दैनिक भास्कर के अनुसार जिला चिकित्सा और स्वास्थ्य अफसर ने तीन मौतों की पुष्टि की है। इस घटना के बाद से प्लांट के आसपास के 3 किमी इलाके में तनाव फैल गया है। वेंकटपुरम गाँव के आसपास लोगों ने साँस लेने में दिक्कत की शिकायत की है और कई लोगों को चक्कर भी आए। जबकि, कुछ लोगों के शरीर में लाल चकते भी पड़ गए।

इस मामले पर अन्य जानकारी आनी अभी बाकी है।

गाजियाबाद में 5 जमाती गिरफ्तार: नर्सों के सामने हो गए थे नंगे, अस्पताल में माँग रहे थे बीड़ी-सिगरेट

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में नर्स से छेड़छाड़ के मामले में तबलीगी जमात से जुड़े 5 लोगों को पुलिस ने बुधवार (मई 6, 2020) को गिरफ्तार कर लिया। क्वारंटाइन पीरियड खत्म होते ही पुलिस ने इन जमातियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपितों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

एसएचओ विष्णु कौशिक ने बताया कि 2 मार्च को एमएमजी अस्पताल में 10 जमातियों को रखा गया था। अस्पताल की नर्सों ने पाँच जमातियों पर आरोप लगाया था कि वह पायजामा उतारकर वार्ड में घूम रहे थे। बार-बार सिगरेट माँग रहे थे। मना करने पर बदसलूकी कर रहे थे। इसके बाद सीएमएस की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया था।

मुकदमा दर्ज होने के बाद सभी जमातियों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया था। सभी जमातियों का क्वारंटाइन का समय बुधवार को पूरा हुआ। इसके बाद उन पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों को जेल में अन्य कैदियों के साथ नहीं रखा जाएगा। अभी आरोपितों को अलग-थलग रखा जाएगा। हालाँकि अभी आरोपितों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। वह बिल्कुल स्वस्थ्य हैं।

दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने क्वारंटाइन पूरा करने वाले तबलीगी जमात के करीब चार हजार सदस्यों को छोड़ने का आदेश दिया है। दिल्ली सरकार ने कहा है कि निजामुद्दीन मरकज/तबलीगी जमात के ठीक हुए सभी लोगों को घर जाने दिया जाए। दिल्ली के स्वास्थ्य और गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि जिन पर केस दर्ज हैं, उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा जाए और बाकियों को अपने-अपने घर जाने दिया जाए।

गौरतलब है कि जमातियों की बदतमीजियों और बदसलूकी की घटनाएँ सामने आने के बाद  इस्लामी कट्टरपंथियों की वकालत करने वाला समूह सक्रिय हो गया था। इनको हमेशा माफ कर देने वाले समूह ने इनके समर्थन में उतरकर उनके बचाव की भरपूर कोशिश की। इन्हीं में से एक थे- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के स्तंभकार सदानंद धुमे। उन्होंने ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि देश को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के सदस्य निर्दोष हैं।

सदानंद धुमे ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, जिन्होंने भी तबलीगी जमात के सदस्यों का बचाव किया और नर्सों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो तबलीगी जमात के विचारों के प्रशंसक नहीं है, लेकिन जिस किसी ने भी उनके साथ समय बिताया है, उनको पता है कि उनका रुढ़िवाद महिलाओं के लिए कितना उपयुक्त और पवित्र है।

दरअसल, धुमे अपने ट्वीट के माध्यम से यह कहना चाह रहे थे कि सबसे पहली बात तो ये कि मजहबी मर्द न तो छेड़छाड़ कर सकते हैं और न ही बलात्कारी हो सकते हैं और दूसरी बात उन्होंने कही कि जिन नर्सों ने तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी, वे झूठ बोल रही थीं क्योंकि वो समुदाय की छवि को धूमिल करना चाहती थीं। धुमे ने मजहब के लोगों को धार्मिक पुरुष साबित करने की कोशिश और उनके बचाव में नर्सों द्वारा लिखित शिकायत को नकार दिया।

जामिया के कश्मीरी छात्र शादाब नजर ने फिर दिखाया जहर, मार गिराए गए आतंकी रियाज नाइकू का किया महिमामंडन

घाटी में हिजबुल के मुखिया रियाज नायकू की मौत के बाद मीडिया से लेकर तमाम आतंकवादी मानसिकता के समर्थक एक-एक कर बिल से बाहर आ रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम है जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र शादाब नजर (Shadab Najar) का। वह सीएए विरोधी पद्रर्शन के दौरान जनवरी में जामिया के पास एक नाबालिग की गोली लगने के बाद चर्चा में आया था।

शादाब गोली लगने से घायल हो गया था। इसके बाद उसके फेसबुक प्रोफाइल से हिन्दुओं के खिलाफ घृणा और आतंकवादियों के समर्थन में लिखे हुए पोस्ट खूब वायरल हुए थे। इस बार यही शादाब फिर से आतंकवादियों के समर्थन में चर्चा में आया है, जिस कारण उसे सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ भी मिल रही हैं।

शादाब नजर ने अलज़जीरा की एक रिपोर्ट शेयर की है जिसमें आज ही भारतीय सेना और सुरक्षाबलों द्वारा घाटी में मारे गए आतंकवादी रियाज़ नायकू की मौत की खबर शेयर की गई है। शादाब ने इस रिपोर्ट के साथ ही नायकू के जहरीले विचार शेयर किया है, जिसमें उसने कहा था;

“कश्मीर में भारतीय शासन के खिलाफ अपनी बंदूकें उठाकर, हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि हम किसी भी परिस्थिति में अपनी जमीन पर उनके कब्जे को स्वीकार नहीं करेंगे। हम उनको ताकत से जवाब देंगे, क्योंकि एकमात्र यही जुबान उन्हें समझ में आती है।”

शादाब की इस पोस्ट पर कुछ लोगों ने कमेंट करते हुए लिखा है कि कश्मीर की धरती को शान्ति में ही रहने दो और इसे सांप्रदायिक बनाने की कोशिश यहाँ ना करे। कुछ कॉमेंट्स में लोगों ने शादाब नजर के लिए अश्लील शब्दों का भी प्रयोग किया है, जिनका उल्लेख किया नहीं जा सकता है। हालाँकि कुछ लोगों ने दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को भी मेंशन किया है –

एक अन्य युवक ने लिखा है कि अब कुछ देर में शादाब नजर कहेगा कि उसका अकाउंट हैक हो गया था –

उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना ने आज हिजबुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया है। वो हिजबुल का मुखिया था और सारी आतंकी गतिविधयों को संचालित करता आ रहा था।

इससे पहले जम्मू कश्मीर के बेगपोरा से भारी गोलीबार की ख़बर आई थी और कहा गया था कि नायकू अपने घर के आसपास ही सेना के शिकंजे में आ गया है। कश्मीर घाटी में आतंक-निरोधी अभियान की ये सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है। इस कार्रवाई को सेना, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय राइफल्स ने मिल कर अंजाम दिया।

कलम के आतंकी बम-बन्दूक वालों को आतंकवादी क्यों नहीं लिखते?

सेना ने कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े आतंकी रियाज नायकू (Riyaz Naikoo) को मार गिराया। यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि भारत में मौजूद वामपंथी वर्ग के हृदय में हमेशा ही इन इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकवादियों के प्रति स्नेह और ममता का भाव पलता रहा है। इसका प्रदर्शन वामपंथी मीडिया गिरोह हर आतंकवादी के मार गिराए जाने के बाद करता भी रहा है।

आतंकवादी नहीं ‘ओपरेशन चीफ़’ रियाज नाइकू

The Wire (द वायर) से लेकर बीबीसी, NDTV आदि मीडिया गिरोह अक्सर आतंकवादियों के मानवीय पक्ष (यदि यह होता भी है) को जबरन साबित करने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन रियाज नायकू (Riyaz Naikoo) की मौत के बाद बेहद मामूली परिवर्तन मीडिया गिरोहों के स्वरों में देखने को मिला है।

यह बदलाव बस आतंकवादियों को ‘शहीद’ होने की जगह ‘मारने’ जैसे शब्दों को इस्तेमाल करने को लेकर है। लेकिन द वायर जैसे मीडिया गिरोहों की कलम आज भी हिजबुल कमांडर रियाज नायकू को ‘आतंकवादी’ कहने से कतराती है। आतंकवादी के स्थान पर द वायर ने रियाज़ नायकू के लिए रिपोर्ट के भीतर ‘ऑपरेशनल चीफ़‘ शब्द का प्रयोग किया है।

इस बार इन्डियन एक्सप्रेस ने भी आतंकवादियों की शिक्षा, पेंशन, दिनचर्या पर गद्य लिखकर सस्ती लोकप्रियता बटोरने में पहल की है।

‘द वायर’ ने रियाज नायकू की मौत की खबर तो प्रकाशित की, लेकिन कहीं भी यह जिक्र नहीं किया है कि वह एक आतंकवादी था, जिसका पहला लक्ष्य भी हर दूसरे आतंकी की तरह ही जिहाद था।

आतंकवादियों में चाहे घाटी में जिहाद की चाह रखने वाले और अपनी गर्लफ्रेंड में से ही एक की बेवफाई से मारा गया बुरहान वानी हो, जाकिर मूसा हो, लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी अबू दुजाना हो या चाहे अन्य कोई जन्नत उल फिरदौस में आराम फरमा रहा जिहादी हो, ‘द वायर’, NDTV आदि ने हमेशा ही इन्हें आतंकवादी कहने से परहेज किया है।

आश्चर्यजनक रूप से आज NDTV ने रियाज नाइकू के लिए आतंकवादी शब्द का प्रयोग किया है। वास्तव में देखा जाए तो जब NDTV किसी आतंकी को आतंकी कहता है, तो बड़ी खबर उस आतंकवादी की मौत नहीं बल्कि NDTV जैसों की बहादुरी बन जाती है।

घाटी में मौजूद आतंकवादियों का महिमामंडन और उन्हें पीड़ित, बेचारा, आदि-आदि साबित करने का यह अभियान बरखा दत्त जैसे कथित पत्रकारों से शुरू हुआ था। इस कतार में फिर ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों को एक ‘आदर्श पिता’ की तरह पेश करने वाले ‘द क्विंट’ आदि भी शामिल होते रहे।

लेकिन अब बरखा एंड कम्पनी को प्रतिस्पर्धा अपने ही खेमे से मिलती नजर आने लगी है। यह इस कारण कि उनकी लीग में अब Huffpost आदि गिरोह भी अपनी आहुति देने लगे हैं। हफ़पोस्ट के लेखक अज़ान जावेद ने तो साल 2018 में ही रियाज नाइकू के एक गणित का टीचर होने से हिजबुल मुखिया बनने तक के इस मार्मिक घटना पर साहित्य लिख डाला था।

वास्तविक दुर्भाग्य यह है कि शायद ‘जमात-ए-प्रोपेगेंडा’ यानी, द वायर, क्विंट, NDTV, बीबीसी आदि आतंकवादियों के नाम के आगे इस कारण भी ‘आतंकी’ जैसी उपमा नहीं लगाते हैं, क्योंकि ये जानते हैं कि वास्तविक आतंकी बन्दूक वाले नहीं बल्कि कलम वाले वामपंथी प्रोपेगेंडा गिरोह हैं।

बंगाल: ममता सरकार की खामियाँ उजागर करने पर पत्रकार शफीकुल इस्लाम को धमकी, चैनल बंद करने का फैसला

पश्चिम बंगाल के पत्रकार शेख शफीकुल इस्लाम को प्रशासन की तरफ से धमकी दी गई है। बता दें कि शफीकुल इस्लाम को इसलिए धमकी दी गई है, क्योंकि वे अपने वेब न्यूज चैनल आरामबाग टीवी से लगातार प्रशासन की कमियों को उजागर कर रहे थे। उनकी पत्रकार की पत्नी ने दावा किया है कि 5-6 मई कर दरम्यानी रात लगभग 30 से 40 लोग उनके घर के पास जमा हो गए और उनके परिवार को धमकी दी गई।

पत्रकार की पत्नी का कहना है कि वो इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं, कि जो लोग आए थे, वो पुलिस के थे या नहीं। वो आगे कहती हैं कि उनके परिवार को उनके पति की रिपोर्टिंग की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। वो कहती हैं कि इस तरह से जान के खतरे को देखते हुए वो न्यूज रिपोर्टिंग को छोड़ देंगे। पिछले सप्ताह ही उनके न्यूज चैनल पर कई FIR दर्ज होने की वजह से वह पहले से ही पुलिस कार्रवाई का सामना कर रही हैं।

शफीकुल इस्लाम की पत्नी ने कहा कि उन्हें अपने पति के जीवन का डर नहीं है, बल्कि वो अपने बच्चों को लेकर डरती हैं, इसलिए उन्होंने न्यूज चैनल बंद करने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि गुंडों ने उसके दरवाजे पर धमाका किया और उनके परिवार को डराया-धमकाया, जिसकी वजह से वो पूरी रात सो नहीं सके। वह कहती हैं कि शफीकुल इस्लाम ने हमेशा सच्चाई के लिए बात की है और कभी झूठी खबर नहीं फैलाई है। उन्होंने राजनीति की निंदा करते हुए कहा कि ये सब सिर्फ यहीं पर होता है।

शफीकुल इस्लाम ने भी देर रात एक यूट्यूब अपलोड करते हुए इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि हो सकता है कि कल को उनकी जबरन गिरफ्तारी हो जाए, उनकी बेरहमी से पिटाई की जाए। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनके दर्शक उनका समर्थन करेंगे।

आरामबाग टीवी ने कोरोनावायरस महामारी के दौरान राज्य में विभिन्न क्लबों को दान देने पर ममता बनर्जी सरकार से सवाल किया था। शफीकुल इस्लाम और उनके चैनल के एक रिपोर्टर सूरज अली के खिलाफ यह कहते हुए नोटिस भेजे गए कि उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468, 469, 471, 500, 505, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है, लेकिन नोटिस में FIR के सही कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। शफीकुल ने कहा कि ये उनके वेब चैनल को बंद कराने की साजिश है, लेकिन वो इसके आगे नहीं झुकेंगे। वो अदालत में इसका डटकर मुकाबला करेंगे।

क्वारंटाइन पूरा कर चुके तबलीगी जमात के 4000 सदस्यों को दिल्ली सरकार ने दिया छोड़ने का आदेश

दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि निजामुद्दीन मरकज/ तबलीगी जमात के ठीक हुए सभी लोगों को घर जाने दिया जाए। साथ ही जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज है, उन पर पुलिस कार्रवाई की बात कही गई है। दिल्ली के स्वास्थ्य और गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि जिन पर केस दर्ज हैं, उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा जाए और बाकियों को अपने-अपने घर जाने दिया जाए।

बता दें कि तबलीगी जमात से जुड़े 4,000 से ज्यादा लोगों को मार्च के आखिरी में निजामुद्दीन मरकज से या अन्य जगहों से पकड़ा गया था। इनमें से एक हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित पाए गए थे। बाकी लोगों को अलग-अलग क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। अब संक्रमित लोग ठीक हो चुके हैं और सभी का क्वारन्टाइन पीरियड भी समाप्त हो चुका है। ऐसे में दिल्ली के स्वास्थ्य और गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने यह आदेश दिया है।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहॉं हुए कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के जमाती शामिल हुए थे। मार्च में कई देशों के हजारों तबलीगी जमात के सदस्यों ने यहाँ आयोजित मजहबी कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसमें कोरोना वायरस से जुड़े चेतावनियों और सावधानियों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जमाती अपने-अपने प्रदेश लौटे और इस कारण वहाँ भी को़रोना के केसों की संख्‍या तेजी से बढ़ी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मरकज के प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य को आरोपित बना कर केस दर्ज किया है।

बता दें कि जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।  

क्राइम ब्रांच को अब तक की पड़ताल में पता चला है कि मरकज के 20 ऐसे कर्मचारी हैं जो यहाँ आने-जाने वाले जमातियों की व्यवस्था से जुड़े थे वे केस दर्ज होने के बाद से गायब हैं। अब चूँकि साद का बीच वाला बेटा मुख्यालय की गतिविधियों में अधिक सक्रिय है और वही प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ ज्यादा बैठक भी करता था।

शादी का झाँसा दे दलित नाबालिग को बंगाल से दिल्ली लेकर आया सलाउद्दीन, राजस्थान में बेचने से पहले धरा गया

एक नाबालिग दलित लड़की को शादी के बहाने पश्चिम बंगाल से अगवा कर मार्च में नई दिल्ली ले जाने और फिर राजस्थान में बेचने की फ़िराक में लगे मोहम्मद सलाउद्दीन को देशव्यापी लॉकडाउन के बीच बेहद नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर बालिका को बचा लिया गया है।

राष्ट्रीय बाल आयोग, दिल्ली पुलिस और दिल्ली स्थित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा अप्रैल में एक संयुक्त अभियान के जरिए लड़की को मोहम्मद सलाउद्दीन के चंगुल से सुरक्षित बचाया गया। इसके लिए NGO की टीम के स्वयंसेवकों ने मुफ्त राशन वितरित करने के नाम पर अपहरणकर्ता के लिए जाल बिछाया।

स्वराज्य की एक रिपोर्ट में इस घटना का खुलासा किया गया है। बालिका फिलहाल महिला शरणार्थी गृह में रह रही है और लॉकडाउन समाप्त होने के बाद उसे उसके माता-पिता के पास ले जाया जाएगा। आरोपित मोहम्मद सलाउद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन उसे जमानत दे दी गई।

घर से गायब हो गई थी पीड़ित युवती

लड़की के पिता कमल मंडल (बदला हुआ नाम) पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के एक गाँव में रहते हैं। उन्होंने बताया कि 29 फरवरी की सुबह, उनकी लड़की अपने बिस्तर में नहीं थी। उन्होंने चारों ओर तलाश किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। इसके बाद परिवार के लोग उसके दोस्तों और सहपाठियों के पास पहुँचे। बातचीत में मोहम्मद सलाउद्दीन का सामने आया।

लड़की के पिता ने कहा, नाम “मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी लड़की किसी से मिल रही थी। वह अपनी कक्षा 10 की परीक्षा में भी शामिल हुई थी। मैं हर दिन उसे स्कूल से लेने जाता था। यहाँ तक ​​कि उसकी ट्यूशन कक्षाओं के लिए मैं ही उसे छोड़ता और घर वापस ले आता था। मैं यह समझ नहीं पाया कि वह उससे कहाँ मिली थी?”

पीड़ित लड़की के पिता कमल मंडल पौंड्रा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, यह एक अनुसूचित जाति है। उन्होंने कहा कि गाँव में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और हिंदू परिवार अपने साथ ही अपनी लड़कियों को घरों से बाहर लेकर जाते हैं।

कमल की दो बेटियाँ हैं। जिसे मोहम्मद सलाउद्दीन ने अगवा किया, वह 16 साल की नाबालिग है, जबकि दूसरी की उम्र 11 साल है। कमल की शिकायत पर, 2 मार्च को बरुईपुर पुलिस स्टेशन, पश्चिम बंगाल में रिपोर्ट (संख्या 592/2020) दर्ज की गई थी।

पुलिस की भूमिका

जब कमल ने आयु प्रमाण के लिए जब बेटी के दस्तावेजों की खोज की, तो उसने पाया कि उसके कक्षा 10 के एडमिट कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र और उसकी बैंक पासबुक भी गायब थीं। कमल का कहना है कि उसने पुलिस के पास मोहम्मद सलाउद्दीन के नाम का जिक्र किया था, लेकिन FIR के बयान में उसके नाम का उल्लेख नहीं है। यही नहीं, पुलिस ने केवल IPC की धारा 363 (अपहरण) का ही केस दर्ज किया।

इसके बाद पाश्चिम बंगाल पुलिस ने पीड़ित युवती के पिता कमल को बताया कि आरोपित मोहम्मद सलाउद्दीन ने उन्हें फोन कर कहा है कि लड़की उनके साथ सुरक्षित है और वह उसके साथ ही रहने की बात स्वीकार कर रही है।

हालाँकि लड़की के पिता ने स्पष्ट रूप से इस मोहम्मद सलाउद्दीन और पुलिस की बात को अस्वीकार कर कहा कि वह आदमी मुस्लिम होने के साथ ही गांजा आदि नशे करता है और न ही वह कुछ काम करता है। कमल ने कहा कि वह अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकता।

इसके बाद अप्रैल में एक दिन कमल से उसकी बेटी ने एक अनजान नम्बर से कॉल कर कहा कि वह फँस गई है और घर लौटना चाहती है। उसने कहा कि वह दिल्ली में थी, लेकिन उसकी लोकेशन नहीं जानती थी। इसके बाद कमल ने स्थानीय पुलिस को यह फोन नंबर दिया, लेकिन तब तक देशभर में कोरोना वायरस के कारण बंद की घोषणा कर दी जा चुकी थी और अन्य किस राज्य में यात्रा नहीं की जा सकती थी।

मिशन मुक्ति फाउंडेशन की मदद से चलाया गया रेस्क्यू अभियान

ऐसे में दिल्ली के एनजीओ, मिशन मुक्ति फाउंडेशन यह मामला लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास गया। यहाँ से बालिका को सुरक्षित लाने के लिए योजना बनाई गई। आयोग ने दिल्ली पुलिस को जाँच का निर्देश दिया। फोन नम्बर से लोकेशन का पता लगाने पर लड़की को आखिरकार दिल्ली के खजूरी खास में खोज लिया गया। खजूरी खास, 23 से 25 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में दिल्ली के हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में आने वाले क्षेत्रों में से एक है, जहाँ आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की भी हत्या की गई थी।

मिशन मुक्ति फाउंडेशन के डायरेक्टर वीरेन्द्र कुमार सिंह को पुलिस ने बताया कि लड़की को 21 मार्च को, जनता कर्फ्यू के एक दिन पहले दिल्ली लाया गया था। इसके बाद इलाके में एनजीओ की सहायता से राशन बाँटने का जाल बिछाकर मोहम्मद सलाउद्दीन तक पहुँचकर टीम ने छापा मारा और लड़की और सलाउद्दीन दोनों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस स्टेशन में पुलिस और एनसीपीसीआर के अधिकारियों की मौजूदगी में पीड़ित लड़की ने कहा कि मोहम्मद सलाउद्दीन उसे राजस्थान में किसी को बेचने की योजना बना रहा था। उसने सभी अधिकारियों के सामने यह बात बताई कि यदि यह लॉकडाउन के लिए नहीं होता, तो वह मार्च अंत तक राजस्थान में उसकी तस्करी कर देता।

NGO करेगा काउंसिलिंग

हालाँकि इस घटना के बाद पीड़िता के पिता का कहना है कि उसकी बेटी के साथ जो हुआ है उसके बाद उसे अपने इलाके में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाएगा और हर कोई उनका तिरस्कार करेगा। कमल का कहना था कि अब हम अपने सिर को ऊँचा करके बाहर नहीं जा सकते। इस पर NGO के डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनका संगठन ही लड़की और उसके परिवार की काउंसलिंग करेगा।