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फिर सोने की चिड़िया बना सकता है सोनभद्र में मिला सोना, सरकार की तिजोरी में मौजूद सोने से 5 गुना ज्यादा

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन से तीन हजार टन से ज्यादा स्वर्ण भंडार मिलने की बात सामने आई है। इस सोने की मात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है क भारत इस भंडार के मिलने के बाद दुनिया के टॉप-3 देशों में शामिल हो सकता है। कुल 3,350 टन के इस स्वर्ण भंडार की कीमत तकरीबन 12 लाख करोड़ रूपए तक बताई जा रही है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत के पास लगभग 626 टन सोने का भंडार है, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोनभद्र जिले में मिला सोना इससे करीब 5 गुना ज्यादा है। राज्य के खानिज विभाग ने सोने की इस खान का पता लगाया है और जल्द ही इस सोने को निकालने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की टीम पिछले 15 साल से यहाँ काम कर रही थी, जिसने 2012 में ही यहाँ की जमीन के अंदर सोना होने की पुष्टि कर दी थी। अब प्रदेश सरकार ने इस पर तेजी दिखाते हुए सोने को बेचने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की टीम के अनुसार, सोनभद्र के हरदी क्षेत्र में 646.15 किलोग्राम सोने का भंडार मौजूद है वहीं सोन पहाड़ी में 2943.25 टन सोने के भंडार होने की पुष्टि की गई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ई-टेंडरिंग के माध्यम से ब्लॉकों के नीलामी के लिए सात सदस्यीय टीम भी गठित कर दी है। यह टीम पूरे क्षेत्र की जियो टैगिंग करेगी और फरवरी 22, 2020 तक अपनी रिपोर्ट भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ को सौंपेगी।

ध्यातव्य है कि वर्तमान में विश्व का सबसे ज्यादा सोने का भंडार अमेरिका के पास है, जो लगभग 8,133 टन है। तो वहीं दूसरे स्थान पर जर्मनी का नाम आता है। जर्मनी के पास कुल 3366.8 टन का स्वर्ण भंडार है। गोल्ड रिजर्व में तीसरे स्थान पर इटली है जिसके पास 2451.8 टन सोना है। यानी प्राचीन काल की सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत, अब सोनभद्र के इस विशाल स्वर्ण भंडार के बाद, इटली को पीछे कर तीसरे स्थान पर आ सकता है।

अपडेट नोट : जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) को सोनभद्र की खदान में 3000 टन नहीं, बल्कि सिर्फ 160 किलो सोना होने का दावा किया है। इस पर ताजा रिपोर्ट आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

तेजप्रताप यादव ने दिया भड़काऊ बयान- नीतीश कुमार हैं कंस, 2020 में होगा वध! Video वायरल

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजप्रताप यादव का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में तेजप्रताप एक बार फिर बांसुरी बजाते नजर आ रहे हैं। अपनी शिवभक्ति को लेकर अक्सर चर्चा बटोरने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र ने इस बार अपनी कला का प्रदर्शन बिहार के वैशाली में भी किया। मगर, इसी दौरान उन्होंने वहाँ मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए बिहार मुख्यमंत्री को लेकर विवादित बयान दे दिया। दरअसल, उन्होंने मंच से बिहार सीएम नीतीश कुमार की तुलना भगवान कृष्ण के मामा कंस से की और उनके वध के बारे में जनता से भी पूछा। जिसके बाद उनके इस बयान ने तूल पकड़ लिया।

उन्होंने कहा, “जिस तरह कंस का सफाया हुआ, वैसे ही 2020 के चुनाव में इनका भी सफाया होगा।” इसके बाद उन्होंने मंच से सवाल किया कि 2020 में किसका वध होगा? जिसके जवाब में वहाँ मौजूद लोगों ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार का नाम लिया और जनता से नीतीश कुमार का सुनते ही उन्होंने कहा कि हमें कहने की जरूरत नहीं है, यह आप भलीभाँति जानते हैं कि किस दौर से हमारा बिहार गुजर रहा है। 

गौरतलब है कि अपने अजीबो गरीब बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले तेजप्रताप यादव ने नीतीश कुमार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी बयान दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा लिट्टी चोखा खाए जाने को लेकर कहा था कि लिट्टी चोखा छोड़िए और बिहार आइए, हम आपको अपने हाथों से बनाया सत्तू खिलाएँगे। इसे हम और हमारे पिता लालू यादव काफी पसंद करते हैं।

तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप यादव से जुड़ा नया कारनामा आया सामने

बता दें कि बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने जा रहे है। चुनावी साल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। ऐसे में इस बीच तेज प्रताप मंच से शिवरात्रि के मौके पर बांसुरी बजाते भी दिखे और नीतीश कुमार पर तंज कसते भी। तो उम्मीद की जा सकती है कि धीरे-धीरे राज्य में सियासत का मामला कितना गरमा रहा है कि साधारण अवसरों पर भी नेता अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ़ बयानबाजी करने से नहीं चूक रहे। याद दिला दें, इससे पहले तेज प्रताप यादव सुशील कुमार के ख़िलाफ़ बोलते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे चुके हैं।

अयोध्या: नाबालिग के साथ फिरोज, आदिल, सैफुद्दीन और सुलेमान ने की अश्लील हरकतें, हुए गिरफ्तार

अयोध्या में गुरुवार (फरवरी 21, 2020) को एक किशोरी के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया। घटना का पता चलते ही इलाके में हल्ला मच गया। मामला दो समुदाय का होने के कारण तनाव बढ़ गया। पीड़ित के परिजनों की शिकायत पर आरोपितों को हिरासत में लिया गया। किशोरी के साथ छेड़खानी करने वाले युवकों की पहचान मो फिरोज, मो आदिल, मो सैफुद्दीन, मो सुलेमान के रूप में हुई। इनके ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित संबंधित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी घटना उस समय घटी, जब लड़की कोचिंग पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान चारों लड़कों ने उसे बहलाया और कचहरी के पीछे स्थित पार्क में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकत करने लगे। घर लौटने पर किशोरी ने सभी बातें परिवारवालों को बताईं।

सूचना मिलने पर आस-पड़ोस के लोग भी वहाँ जमा होने लगे। आरोपित पक्ष दूसरे समुदाय से होने के कारण लोगों में गुस्सा अधिक भड़क गया। लेकिन, पुलिस ने समय से पहुँचकर स्थिति को संभाला। लोगों ने पुलिस से आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

किशोरी के परिवार की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने खोजनपुर निवासी मो फिरोज, टकसाल निवासी मो आदिल, बजाजा निवासी मो. सैफुद्दीन और पुरानी सब्जी मंडी निवासी मो सुलेमान को हिरासत में लिया। कोतवाल ने बताया चारों लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले अयोध्या जिले में छेड़खानी का एक और मामला सामने आया था। जब राहुल नाम के आरोपित युवक ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ छेड़खानी की थी और फिर डरा धमकाकर उसे अपने साथ सुनसान जगह पर ले गया था, जहाँ आरोपित ने अपने अन्य दोस्तों के साथ किशोरी का बलात्कार किया और पूरी घटना का वीडियो वायरल कर दिया। बाद में किशोरी ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी थी।

चीनी राजदूत ने कहा- तुझे जड़ से मिटा दूँगा, जब नागरिक ने किया कोरोना पर सवाल

चीन और पाकिस्तान, दोनों ही देश अपने ‘नकारने’ की आदत को लेकर खूब जाने जाते हैं। एक ओर जहाँ पाकिस्तान अपने देश को आतंकवाद की फैक्ट्री नहीं मानता, उसी तरह दूसरी ओर चीन कोरोना वायरस जैसी भीषण त्रासदी के भी सामान्यीकरण में लगा हुआ है।

चीन में कोरोना वायरस के कहर के कारण वहाँ की अर्थव्यवस्था भी अच्छी स्थिति में नहीं है। मीडिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की जान लेने की किसी भी तरह की खबर को प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है।

इसी बीच चीन के कोलकाता में महावाणिज्य दूत झा लियू मंगलवार (फरवरी 16, 2020) को ट्विटर पर साफ़ धमकी देते हुए भी देखे गए। झा लियू ने चीनी सरकार के ही मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ की लिंक शेयर करते हुए लिखा कि कोरोना वायरस सिर्फ एक गंभीर सर्दी-जुकाम है। उन्होंने लिखा कि वो इस वायरस से डरने वाले नहीं हैं और वो इस बिमारी से आखिरी जंग के लिए तैयार हैं।

झा लियू के इस ट्वीट पर चीन से ही जुड़े एक ट्विटर यूज़र ने चीन की सरकार पर कटाक्ष करते हुए लिखा- “हाँ हम जानते हैं कि यह बस एक गंभीर सर्दी-जुकाम मात्र है और हम इससे डरे हुए नहीं हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि फिर भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने लगभग हर इंसान को घर में कैद कर रखा है और इससे भी वाहियात बात यह है कि इस ‘बुरे जुकाम’ ने 1666 लोगों की जान ले ली है और इनमें से 98.5% लोगों की जाने सिर्फ हुबई में गई हैं।”

चीनी युवक के इस जवाब से झा लियू बौखला गए और उन्होंने जवाब में लिखा- “तुम इस तरह से बात कर रहे हो जैसे कि तुम खुद उस वायरस का हिस्सा हो। तुम्हें भी वायरस की ही तरह मिटा दिया जाएगा।”

गौरतलब है कि चीन को कोरोना वायरस से होने वाली मौतों पर लगातार गुमराह करते हुए देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि चीन के सरकारी आँकड़ों के अनुसार इसके संक्रमण से अकेले चीन में अब तक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि इसके संक्रमण के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 74,576 हो गई है। लेकिन चीन की से ही एक कम्पनी से लीक हुए आँकड़ों से खुलासा हुआ है कि इस वायरस से अब तक 24,000 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस का चीन के स्वास्थ्य कर्मियों पर भी काफी गंभीर असर पड़ रहा है। अभी तक 1,700 से अधिक चीनी स्वास्थ्य अधिकारी इसकी चपेट में आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों के रविवार को बीजिंग पहुँच कर वायरस से निपटने में चीनी अधिकारियों की मदद करने की संभावना है।

देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री..पूर्वजों से हुई भूल का खमियाजा हम आज भुगत रहे : गिरिराज सिंह

अपने विवादित बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले बीजेपी मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर दूसरे समुदाय को लेकर विवादित बयान दिया है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि हमारे पूर्वजों से भूल हुई है, 1947 में ही देश के सभी मुस्लिमों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए था।

केन्द्रीय पशुधन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “राष्ट्र के प्रति समर्पित होने का समय अब आ गया है। 1947 से पहले हमारे पूर्वज देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे और मोहम्मद अली जिन्ना भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की योजना बना रहा था। ये बहुत बड़ी हमारे पूर्वजों से भूल हुई, जिसका खामियाजा आज हम यहाँ भुगत रहे हैं। अग़र उस समय मुस्लिम भाईयों को वहाँ (पाकिस्तान) भेज दिया गया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती।”

उन्होंने आगे चिंता जाहिर करते हुए यह भी कहा कि अग़र भारतवासियों को अपने ही देश में रहने को जगह नहीं मिली तो विश्व का ऐसा कोई देश नहीं जहाँ हिंदू जाकर शरण ले सके। इसलिए हमें इस पर विचार करना होगा।

इससे पहले पिछले दिनों सहारनपुर में सीएए पर आयोजित एक गोष्ठी में बोलने के बाद मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था, “मैंने एक बार कहा था कि ये देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है, सारे बड़े-बड़े दुनियाँ में जो भी पैदा हुए आतंकवादी, चाहे हाफ़िज सईद मामला हो, ये सारे के सारे लोग यहीं से निकलते हैं। दुनिया में आतंकवाद की घटनाओं का जुड़ाव देवबंद से ही रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में शाहीन बाग पर निशाना साधते हुए कहा था, “वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि वह गजवा-ए-हिंद के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। गजवा-ए-हिंद को भारत में लाकर मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते हैं। हम उनको इस मकसद में कामयाब नहीं होने देंगे।”

6 फरवरी को गिरिराज सिंह ने कहा था, “शाहीन बाग सुसाइड बॉम्बर (आत्मघाती हमलावर) का जत्था बनता जा रहा है। देश की राजधानी में देश के खिलाफ ही बड़ी साजिश चल रही है। शाहीन बाग में एक महिला का बच्चा ठंड में मर जाता है और वो महिला कहती है कि मेरा बच्चा शहीद हुआ है। ये सुसाइड बॉम्बर नहीं है तो और क्या है?”

163 साल पुराने इलाहाबाद जंक्शन का नाम अब प्रयागराज, योगी सरकार ने बदले 4 रेलवे स्टेशनों के नाम

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने से पहले ही ये कयास लगते रहे कि प्रदेश में योगी सरकार आई तो नामों में परिवर्तन किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ यूपी में योगी सरकार के आने के बाद। इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद यूपी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्रयागराज के चार रेलवे स्टेशनों का नाम बदलने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद इलाहाबाद जंक्शन का नाम अब प्रयागराज जंक्शन होगा।

इलाहाबाद जिले का नाम बदलने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही अब जिले के रेलवे स्टेशनों के नाम में भी यूपी सरकार बदलाव कर सकती है। केंद्र सरकार से एनओसी मिलने के बाद इस संबंध में लोक निर्माण विभाग ने बीते दिन अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के तहत प्रयागराज जिले के अतर्गत आने वाले चार रेलवे स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। इस बदलाव के बाद अब इलाहाबाद जंक्शन का नाम प्रयागराज जंक्शन, इलाहाबाद सिटी का नाम प्रयागराज रामबाग, इलाहाबाद छिवकी का नाम प्रयागराज छिवकी और प्रयागघाट का नाम बदलकर अब प्रयागराज संगम होगा।

दरअसल पिछले वर्ष प्रयागराज में लगे कुंभ मेले से पहले ही योगी सरकार ने इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज कर दिया था। इसके साथ ही नगर निगम, विकास प्राधिकरण समेत अन्य विभागों में भी नामों को बदला गया था, लेकिन शहर के स्टेशनों का नाम उस समय नहीं बदला जा सका था। इसके लिए जिला प्रशासन ने शासन और रेल मंत्रालय को चिट्ठी भेजी थी। साथ ही एक पत्र गृह मंत्रालय को भी भेजा गया था। वहीं गृह मंत्रालय से स्टेशनों के नाम बदलने की स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग ने अपनी अधिसूचना जारी कर दी।

बता दें कि जिस इलाहाबाद जंक्शन का नाम बदलकर प्रयागराज जंक्शन किया गया है वह 163 साल पुराना है। इलाहाबाद जंक्शन से ब्रिटिशकाल में 1857 में फरवरी माह में कानपुर की ओर 41.8 किमी ट्रेन ट्रायल के तौर पर चलाई गई थी। इसके बाद 1859 में इलाहाबाद से कानपुर के बीच ट्रेन संचालन शुरू हुआ था।

आपको बता दें कि 2017 में यूपी की सत्ता में आते ही योगी सरकार ने स्थानों के नाम बदलना शुरू कर दिया था, जिसके तहत सबसे पहले मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया था। इसके बाद इलाहाबाद का नाम बदल प्रयागराज और फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या रखा गया था।

शाहीन बाग की ‘शेरनी’ योगी प्रशासन का डंडा पड़ते ही बनी ‘बिल्ली’: गिड़गिड़ाकर माँगी माफी, Video वायरल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शाहीन बाग जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाली महिला टीचर नाहिदा जैदी की दो विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एक विडियो उस समय की है, जब शाहीन बाग प्रोटेस्ट में शामिल होकर उन्होंने मोदी-शाह समेत अपने हिंदू सहकर्मियों के लिए कुँठा निकाली थी और दूसरी तब की है जब प्रशासन ने उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए सस्पेंड किया। सस्पेंशन के बाद वाले विडियो में तो उन्होंने माफी माँगते हुए अपनी बातें और अपने सारे सुर बदल लिए।

पहली विडियो में सुना जा सकता है कि कैसे महिला टीचर शाहीन बाग से हुंकार भरती हैं। वो विडियो में सवाल करती हैं कि जब यहाँ की जमीन उनकी है, हवा उनकी है, पानी उनका है, तो आखिर कैसे उन्हें यहाँ से हटाने की बात की जा सकती है। कैसे कहा जा सकता है कि मु###न यहाँ का नहीं है और कैसे एनआरसी लगाई जा सकती है। वे कहती हैं कि वे पढ़ी-लिखी हैं और सालों से बच्चों को राजनीतिक शास्त्र पढ़ा भी रही हैं। वो अच्छे से जानती हैं कि भारत को आजादी कैसे मिली? उनके अनुसार आरएसएस तो बिका हुआ था। आखिर आरएसएस ने किया ही क्या? आजादी के लिए तो उन्होंने पैसे दिए, जानें दीं, खून बहाया। लेकिन आज आजादी का फायदा मोदी-शाह उठा रहे हैं।

वे शाहीन बाग से कहती हैं कि अमित शाह अपनी बड़ी-बड़ी आँखे दिखाकर उन्हें डराना चाहते हैं और साथ ही हिंदू लोग भी उनके ख़िलाफ़ हो गए हैं। वीडियो में उन्हें स्पष्ट कहते सुना जा सकता है कि जहाँ वो पढ़ाती हैं, वहाँ वो अकेली मु###न हैं। लेकिन वहाँ पर हिंदू टीचर मुस्लिमों के बारे में बहुत गंदी बातें बोलते हैं, उन्हें आतंकी कहते हैं। इस पर उनका रोज झगड़ा होता है और जो वो शाहीन बाग पहुँची हैं, वो सिर्फ़ अपनी एकजुटता दिखाने आई हैं कि वो लोग हिंदू के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि हिंदुत्व के ख़िलाफ़ हैं। बता दें कि अपनी इस बातचीत में नाहिदा जैदी ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नाजायज बताया। साथ ही कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए कहती हैं कि उन लोगों ने बहुत जुल्म सह लिया। मगर अब नहीं। वहीं उनकी साथी ने कहा था वे लोग भिखारी नहीं हैं, जो पैसे लेकर यहाँ आएँगे।

हालाँकि, वीडियो में महिला टीचर के शब्दों में, हाव-भाव में सरकार और हिंदू धर्म के लिए उनकी घृणा साफ झलक रही है। मगर, मामला गर्माने के बाद, वीडियो वायरल होने के बाद, प्रशासन द्वारा सवाल-जवाब पूछे जाने के बाद नाहिदा ने फौरन इस मामले पर बीते दिनों माफी माँग लीं। और स्वीकारती हैं कि उनके मुँह से कुछ गलत अल्फाज निकल गए थे। उनके अनुसार, कुछ लोग उनके यहाँ से शाहीन बाग जा रहे थे। तो वो भी वहाँ चली गईं। वहाँ जब लोगों ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिए। लेकिन लोगों ने अच्छी बातों को काट दिया और गलत बातों को वायरल कर दिया गया। उनका कहना है कि ये सब उनके ख़िलाफ़ साजिश है और वो अच्छे से जानती हैं कि ऐसा कौन कर रहा है। इसके बाद वो वीडियो में अपने कहे शब्दों के लिए माफी माँगती हैं और कहती हैं कि वो इस दुनिया में अकेली हैं, उनके माता-पिता कोई नहीं है। मगर फिर भी उन पर जुल्म ढहाया जा रहा है।

दो अलग-अलग जगहों और स्थितियों में इस तरह बयान बदलने को लेकर ही उनकी दोनों वीडियो को वायरल किया जा रहा है और पूछा जा रहा है कि 25 साल तक इन्होंने अपने छात्रों को कैसी शिक्षा दी होगी?

बता दें कि सहारनपुर में आशा मार्डन स्कूल की प्रिंसिपल ने भी इस मामले के संज्ञान में आने के बाद अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो वायरल के बारे में तो नहीं मालूम लेकिन टीचर ने जो कमेंट किए हैं, वो सरासर गलत हैं। प्रिंसिपल के अनुसार उनके स्कूल में नाहिदा अकेली मुस्लिम टीचर नहीं हैं। उनके अलावा और भी शिक्षक हैं, लेकिन उनकी ओर से शिकायतें नहीं आईं हैं।

वहीं, एसपी सिटी विनीत भटनागर ने भी आश्वासन दिया कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन के लोग जबरदस्ती किसी स्कूल में जाकर दबाव बनाने का काम करते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।

‘राम मंदिर निर्माण के लिए ले सकते हैं और भी जमीन, शरद पवार मस्जिद बनाने में करें मदद’

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गुरुवार (20 फरवरी, 2020) को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मुलाक़ात के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि अग़र मंदिर निर्माण के लिए और जमीन की आवश्यकता हुई तो और जमीन ली जा सकती है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जब देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर निर्माण में साथ हैं तो जरूर अयोध्या में जल्द लोगों के सामने एक भव्य श्रीराम मंदिर होगा।

गुरुवार शाम को राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, महामंत्री चंपत राय और ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुलाकात कर मंदिर निर्माण में अहम भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया, जिस पर पीएम मोदी मे उन्हें अयोध्या आने का आश्वासन भी दिया। इस दौरान विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए महंत नृत्य गोपालदास ने कहा की राम मंदिर निर्माण में अगर और भी जमीन की जरूरत होगी तो जमीन ली जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा जाएगा।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं गुरुवार को महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि 3-4 मार्च को होने वाली ट्रस्ट की पहली बैठक में राम मंदिर के मॉडल पर बात होगी। उसके बाद अन्य कामों को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने साफ-साफ कहा कि जो पत्थर राम मंदिर के लिए रखे गए हैं, उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल मंदिर निर्माण के लिए किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो और भी पत्थर मँगाए जा सकते हैं।

गोपालदास ने आगे कहा कि मंदिर का निर्माण सरकारी सहायता से नहीं बल्कि भक्तों द्वारा दिए गए चंदे के पैसों से ही होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि 6 महीने में राम मंदिर का निर्माण काम शुरू हो जाएगा, जिसे पूरा होने में 2 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। लेकिन मंदिर का निर्माण भव्य ही होगा, जोकि हर हिंदू को गर्व का अनुभव कराएगा।

मंदिर निर्माण ट्रस्ट समिति पर आपत्ति जताने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार पर टिप्पणी करते हुए गोपालदास ने कहा “शरद पवार चाहें तो मुस्लिमों को मस्जिद बनाने में मदद कर सकते हैं। यहाँ हम केवल राम मंदिर के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट में महंत नृत्य गोपालदास को ट्रस्ट का अध्यक्ष, विहिप के उपाध्यक्ष चंपतराय को महामंत्री और गोविंद देव गिरि महाराज को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही पूर्व आईएएस अफसर नृपेंद्र मिश्रा को राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

जिन्होंने राम मंदिर के लिए बहाया अपना खून, उनके लिए बनना चाहिए स्मारक: शिवसेना

जहाँ बनने जा रही है हनुमान जी की सबसे ऊँची प्रतिमा, वहाँ की Exclusive ग्राउंड रिपोर्ट

‘हिंदुओं को हिलाना है, मोदी-शाह को गिराना है’ – जिस MLA ने नहीं कही भारत माता की जय, अब दे रहा धमकी

जिन्होंने राम मंदिर के लिए बहाया अपना खून, उनके लिए बनना चाहिए स्मारक: शिवसेना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने से ठीक पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए राममंदिर बनवाने हेतु ‘शहीद’ हुए लोगों के लिए स्मारक बनवाने की अपील की। सामना में लिखा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में राम मंदिर के कार्य को गाति मिली है। अब 2024 तक इसका काम पूरा हो जाएगा तो इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। उनके मुताबिक राममंदिर के लिए शिवसैनिकों ने भी बलिदान दिया था लेकिन शिवसेना ने इसका कभी फायदा उठाने की कोशिश नहीं की।

मुखपत्र में प्रकाशित संपादकीय के जरिए शिवसेना ने शुक्रवार को उन सभी लोगों के लिए शहीद स्मारक बनवाने के लिए आवाज़ उठाई, जिन्होंने राम मंदिर बनवाने के लिए अपनी जाने गवाईं। उनके अनुसार उन ‘शहीदों’ के लिए श्रद्धांजलि के रूप में सरयू तट पर एक स्मारक बनवाया जाना चाहिए। और अमर जवान की तरह
इन शहीदों के नाम भी अमर जवान ज्योति के समान लिखा जाना चाहिए।

‘सामना’ में आगे कहा गया है कि यह सच है कि शिवसेना, बजरंग दल के अलावे अन्य कुछ हिंदूवादी संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे। ऐसे में इसे कैसे भूला जा सकता है कि कारसेवकों की शहादत से सरयू लाल हो गई थी। उस समय देश भर के शिव सैनिकों का रक्त खौलता दिख रहा था। बीबीसी के मार्क टली ने अयोध्या आंदोलन का जो वीडियो बनाया था, उसमें बाबरी ढाँचा के आस-पास शिवसेना के कई परिचित चेहरे दिखते हैं। लेकिन, शिवसेना ने इसका राजनीतिक लाभ कभी नहीं उठाया।

शिवसेना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को गति मिली है। एक विश्वास बनाया गया है और 2024 तक मंदिर बनाया जाएगा। इससे भाजपा को निश्चित रूप से फायदा होगा। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए सामना में लिखा कि पाकिस्तान और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे 2024 के आम चुनावों के लिए काम नहीं करेंगे, इसलिए, राम मंदिर उस समय एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा।

‘सामना’ में शिव सेना की ओर से लिखा गया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों पर नजर डाली जाए तो क्या दिखाई देता है? महंत नृत्य गोपालदास ट्रस्ट के अध्यक्ष चुने गए हैं। चंपत राय महासचिव और गोविंद देव गिरि को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि ‘निर्माण’ अर्थात मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट सचिव नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गया है। मिश्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र हैं। राम मंदिर कार्य पर मोदी ने नजर रखी हुई है और इसके लिए कालावधि निश्चित कर ली गई है।

शिवसेना के अनुसार, पीएम मोदी के हाथ से राम मंदिर की भूमि पूजन होगा। ये तो ठीक है लेकिन सोनिया गाँधी, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार और शरद पवार जैसे देश के बड़े नेताओं को भूमि पूजन के कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाना गलत है। अगर ऐसा हुआ तो ये एक पार्टा का ही कार्यक्रम होकर रह जाएगा।

बता दें कि शिवसेना प्रमुख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसकी जानकारी खुद शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट के जरिए दी है। शिवसेना ने इस मुलाकात को शिष्टाचार की भेंट करार दिया है।

नसबंदी के लिए 44 साल पहले पहुँच गए कमलनाथ: नौकरी जाने की धमकी का सुनाया फरमान

परिवार नियोजन अभियान में पुरुषों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कॉन्ग्रेस शासित राज्य मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए अजीब फरमान जारी हुआ है। इस फरमान के अनुसार हर स्वास्थ्य कर्मचारी को प्रति महीना 5 से 10 नसबंदी करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसे पूरा न करने पर सरकार ने उन्हें नो-वर्क, नो-पे के आधार पर वेतन न देने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि जो भी हेल्थ वर्कर 2019-20 में नसबंदी के लिए एक भी आदमी को जुटाने में असफल पाया जाए, उससे उसका वेतन वापस ले लिया जाए, और उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी जाए।

सरकार द्वारा आए इस फरमान को सुनने के बाद कर्मचारियों में रोष में है। उनका मत है कि वो जिले के हर घर-घर में जाकर जागरूकता अभियान चला सकते हैं, लेकिन किसी की जबरन नसबंदी नहीं कर सकते। जबकि एनएचएम की उप निदेशक डॉ प्रज्ञा तिवारी का कहना है कि परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरूषों की कोई भागीदारी नहीं है। उनके अनुसार, “हम यह नहीं कह रहे कि आप पुरूषों की नसबंदी के लिए जबरदस्ती करें। हम चाहते हैं कि वे लोगों को प्रेरित करें। ऐसे कई लोग हैं, जो अपने परिवार को सीमित करना चाहते हैं। लेकिन उनमें जागरूकता की कमी है। यदि आप पूरे एक वर्ष में एक व्यक्ति को प्रेरित नहीं कर सकते तो यह आपकी कार्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे में करदाताओं के पैसे को वेतन पर खर्च करने का क्या फायदा?”

बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश की आबादी 7 करोड़ से अधिक है। प्रदेश में 25 जिले ऐसे हैं, जहाँ टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) 3 से अधिक है, जबकि मप्र में 2.1 टीएफआर का लक्ष्य है। ऐसे में हर साल 6 से 7 लाख नसबंदी ऑपरेशन के टारेगट होते हैं, लेकिन पिछले साल ये संख्या सिर्फ 2514 रही। कोई भी जिला अपना टारगेट पूरा नही कर पाया। इसी आँकड़े के चलते राज्य सरकार ने कर्मचारियों को परिवार नियोजन के अभियान के तहत टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए और इसे न पूरा किए जाने पर सेवानिवृत्त देने की चेतावनी दी।।

मध्य प्रदेश में इन आँकड़ों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक छवि भारद्धाज ने भी नाराजगी जताई है। भारद्वाज ने सभी कलेक्टर और सीएमएचओ को पत्र लिखकर कहा है कि प्रदेश में मात्र 0.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अब ‌विभाग के पुरुषकर्मियों को जागरूकता अभियान के तहत परिवार नियोजन का टारगेट दिया जाए।

उनके इसी पत्र के बाद सीएमएचओ ने पत्र जारी कर कहा है कि यदि टारगेट के तहत काम नहीं किया तो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव भेजेंगे। जिसे सुनकर कर्मचारियों में आक्रोश है और वो इसका विरोध कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, प्रदेश में पिछले 5 वर्षों से नसबंदी के लिए पुरुषों की संख्या घट रही है। 2019-20 के लिए, संख्या 3.39 लाख महिलाओं की तुलना में 20 फरवरी, 2020 तक 3,397 थी। जबकि 2015-16 में, राज्य में 9,957 पुरुष नसबंदी की गई। बाद के तीन वर्षों में, संख्या क्रमशः 7270, 3719 और 2925 थी।

इंदौर की सीएम डॉ प्रवीण जदिया का कहना है कि यह पहली बार है कि सरकार द्वारा ऐसा कोई परिपत्र जारी किया गया है। इंदौर का कुल लक्ष्य 22,500 था और लगभग 19,500 नसबंदी की गई हैं, लेकिन जिले में 2,250 पुरुषों की नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने की संभावना नहीं है।

गौरतलब है कि आज कॉन्गेस के शासनकाल और कमलनाथ के मुख्यमंत्री होते हुए मध्यप्रदेश में नसबंदी को लेकर लिया गया ये फैसला आपातकाल के उस काले दौर की यादें ताजा करता है, जब इसी पार्टी के नेता, गाँधी परिवार के बेटे और कमलनाथ के स्कूली दोस्त संजय गाधी ने जनसंख्या रोकने के नाम पर पूरे देश में हाहाकार मचवा दिया था।

संजय गाँधी द्वारा इसका जिम्मा संभाले जाने के बाद घरों में घुसकर, बसों से उतारकर और लोभ-लालच देकर करीब 60 लाख लोगों की नसबंदी की गई थी। इसमें 16 साल के किशोर से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक शामिल थे। कई कुँवारे लड़कों की भी इस दौरान नसबंदी कर दी गई थी। इस दौरान गलत ऑपरेशन और इलाज में लापरवाही की वजह से करीब दो हजार लोगों को अपनी जान तक गँवानी पड़ी थी। कहा जाता है संजय गाँधी का ये मिशन जर्मनी में हिटलर के नसंबदी अभियान से भी ज्यादा कड़ा था, जिसमें करीब 4 लाख लोगों की नसबंदी ही की गई थी।