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8 साल की बच्ची ने तोड़ा दम: रिश्तेदार समेत 16 लोगों ने 4 साल तक किया था रेप

तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में इंसानियत को शर्मसार और रिश्तों को तार-तार करने वाला एक मामला उजागर हुआ है। जानकारी के अनुसार, यहाँ पूरे चार साल तक एक 8 साल की बच्ची का उसके रिश्तेदारों समेत 16 दरिंदो ने रेप किया। हालत बिगड़ने पर उसे चेन्नई के अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ गुरुवार को उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं ताकि बच्ची की मौत के असल कारणों का पता चल सके। फिलहाल सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सभी आरोपितों की उम्र 23 से 55 के बीच की है। पता चला है कि आरोपितों में लड़की के अंकल के लड़के भी थे।

बताया जा रहा है बच्ची के साथ रेप की सनसनीखेज घटना 2019 में उजागर हुई थी। बच्ची की माँ ने पुलिस में अपने रिश्तेदारों के खिलाफ बयान दिया था और अपने ही कई रिश्तेदारों समेत 16 लोगों पर अपनी दो बच्चियों के साथ रेप करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उसके रिश्तेदार उनकी दोनों बेटियों से 2017 से ही रेप कर रहे थे।

उनके मुताबिक गुरुवार को उनकी छोटी बेटी पेट में दर्द के चलते काफी देर तक बाथरूम में रही। जब उन्होंने आवाज दी तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। तब उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा जहाँ बच्ची को जमीन पर बेहोश पाया। उसे अचेत अवस्था में देखकर उन्होंने उसे तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

यहाँ बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में लड़की की मौत के पीछे फ़ूड प्वॉइजनिंग को भी वजह बताया जा रहा है। लेकिन लड़की के साथ हुई हैवानियत को देखते हुए बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट कुछ नहीं कहा जा सकता।

खबर के अनुसार कुछ साल पहले बच्ची की माँ ने पति को छोड़कर अपने सहकर्मी से शादी कर ली थी। इसके बाद वो चेन्नई में रहने लगी और बच्ची अपनी नानी के घर। लेकिन, साल 2018 में बच्चियों की शिकायत सुनने के बाद वह दोनों बेटियों को अपने पास चेन्नई ले आई। मगर, यहाँ आकर बच्ची की माँ ने इस बारे में पुलिस में शिकायत नहीं की। आरोप है कि जब दोनों लड़कियों ने इस मामले पर बात शुरू की तो उन्हें उनकी माँ ने मारा।

एक खबर के मुताबिक, लड़की के साथ हैवानियत का खुलासा तब हुआ जब लड़की के जख्म स्कूल की टीचर ने देखे। टीचर ने ही बच्ची से उसके जख्मों के बारे में सवाल किया और सारी बात जानने के बाद चाइल्डलाइन को सूचित किया। इसके बाद ही पुलिस इस मामले पर अलर्ट हुई। बता दें, जिस समय लड़की की मौत हुई वो अपनी माँ और सौतेले पिता के साथ ही थी। मृतक बच्ची के सौतेले पिता का कहना है बच्ची बड़ी होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी।

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इस्लामी आतंकियों ने चर्च में अँधाधुँध बरसाई गोलियाँ: पादरी समेत 24 की मौत, कई अगवा

इस्लामिक आतंकवाद से पीड़ित अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में हमले में 24 लोगों की मौत हो गई। आतंकियों ने एक चर्च में अंधाधुंध गोलियॉं बरसा इस घटना को अंजाम दिया। मृतकों में पादरी भी है। हमले में 18 अन्य जख्मी हो गए। हमला बुर्किना फासो के उत्तरी इलाके के एक गाँव के प्रोटेस्टेंट चर्च पर किया गया। क्षेत्रीय गवर्नर ने मीडिया से बातचीत में सोमवार यह जानकारी दी। सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि हमला रविवार को एक साप्‍ताहिक सेवा समारोह के दौरान हुआ।

कर्नल सल्फो कबोरे के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि हमले में पादरी समेत 24 लोगों के मरने और 18 लोगों के घायल होने की खबर है। कर्नल ने बताया, “हथियारबंद आतंकी याघा प्रोविंस के पांसी नामक गाँव में घुसे और शांतपूर्ण लोगों पर हमला कर दिया।”

दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बुर्किना फासो जिहादी आतंक से बुरी तरह प्रभावित है। यहाँ 2015 से अब तक 750 लोग मारे जा चुके हैं। करीब 600,000 लोगों को मजबूरन घर छोड़ भाग जाना पड़ा। बुर्किना फासो के उत्तरी इलाके में लगातार ईसाई आबादी और चर्चों को जिहादी आतंकी निशाना बनाते रहते हैं। चर्चों और उनके घरों को आग के हवाले कर देते हैं। यूएन के अनुसार जिहादी आतंकी हमलों में पिछले वर्ष बुर्किना फासो और पड़ोस के नाइजर, माली में 4,000 लोगों की मौत हुई थी।

उत्तरी बुर्किना फासो के लाम्दामोल गाँव में 02 फरवरी को आतंकियों ने घंटों कहर बरपाया था। मोटरसाइकिलों पर आए सशस्त्र आतंकियों ने गाँव में घुसते ही लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाते हुए निकल गए। इस हमले में 20 लोगों की मौत हो गई थी। एक अधिकारी ने बताया था कि आतंकियों ने स्थानीय लोगों से कुछ दिन पहले इलाका खाली करने को कहा था। इसके बाद हमलावरों ने घटना को अंजाम दिया। उससे पहले सोम प्रांत में 25 जनवरी को हुए हमले में 39 लोग मारे गए थे।

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ट्रेन की एक सीट पर हिंदू देवी-देवता को जगह देना एहसान नहीं… यह होना चाहिए, यही वक्त की माँग है

काशी महाकाल एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई जाने के बाद कई तथाकथित सेकुलरों में कुलबुलाहट है। ओवैसी जैसे कट्टरपंथी नेता इस ट्रेन की एक सीट पर शिव भगवान का मंदिर स्थापित किए जाने को लेकर नाराज हैं। साथ ही संविधान की प्रस्तावना ट्वीट करके पीएम मोदी का ध्यान इस बात पर केंद्रित करवा रहे हैं कि जब संविधान में सभी धर्मों को बराबर रूप से समानता है तो फिर ट्रेन में भगवान के लिए अलग से जगह क्यों? हालाँकि IRCTC ने स्पष्ट कर दिया है कि भगवान शिव के लिए कोई भी सीट रिजर्व नहीं है। फिर भी अब ओवैसी की तरह सोशल मीडिया पर भी कई यूजर इस मामले पर सवाल उठा रहे हैं और इस फैसले को मोदी सरकार द्वारा भारत को हिंदू राष्ट्र में तब्दील करने की ओर एक कदम कह रहे हैं।

अब प्रश्न है कि क्या वाकई तीर्थ स्थानों को एक दूसरे से जोड़ने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में हिंदू देवी-देवताओं को एक सीट पर स्थान देने से किसी अन्य धर्म को ठेस पहुँच रही है या फिर क्या सच में इस एक कदम से किसी समुदाय को नीचा दर्शाने का प्रयास हो रहा है?

तो, जरा इन बिंदुओं पर गौर डालिए और समझिए कि ट्रेन में देवी-देवताओं के लिए मंदिर की स्थापना का ये पहला वाकया है। जिसको देखकर ये तथाकथित सेकुलर लोग आहत हो गए हैं। लेकिन यहाँ बता दें शिव भगवान की प्रतिमा की स्थापना एक ऐसे ट्रेन में की गई है, जो हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को एक साथ जोड़ रही है न कि किसी सामान्य ट्रेन में।

मगर, संविधान की उलाहना देने वालों के लिए इस बिंदु का कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे लोग तब कभी सवाल करते नहीं देखे जाते कि आखिर क्यों धार्मिक भावना को ठेस न पहुँचाए जाने के नाम पर पटरियों पर नमाज पढ़ने वालों को बर्दाशत किया जाता है। क्यों राज्य सरकारें एक धर्म विशेष को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखकर बढ़ावा देती है? क्यों कभी इनके ख़िलाफ़ एक्शन नहीं लिया जाता और लिया जाता भी है तो उसके राजनीतिक पहलूओं को ध्यान में रखा जाता है?

आज तक देश के तथाकथित सेकुलरिज्म को संरक्षित करने के लिए कई राज्यों में ईसाई धर्म और इस्लाम मजहब को बढ़ावा दिया जाता रहा है। लेकिन कभी किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाए। मगर एक हिंदू देवता को ट्रेन की एक सीट पर जगह क्या दी गई, सबने संविधान की तस्वीरें अपलोड करनी शुरू कर दीं। मेरे विचार से तीर्थ संबंधी इस ट्रेन के लिए IRCTC को निश्चित तौर पर एक सीट भगवान शिव के लिए रिजर्व रखनी चाहिए। और क्यों नहीं? क्योंकि इसी देश की पिछले साल की कुछ खबरों पर नजर डालिए और अनुमान लगाइए क्या इन सबके बीच कभी हिंदुओं के लिए कुछ हुआ?

  • तेलंगाना सरकार ने पिछले साल केवल क्रिसमस मनाने के लिए 200 चर्चों को एक-एक लाख रुपए दिए। वहीं कर्नाटक सरकार भी समय समय पर चर्च पर करोड़ों खर्च करती रही।
  • जगन मोहन रेड्डी ने पिछले साल ही अपने राज्य में पादरियों को हर महीने 5000 रुपए देने की घोषणा की। हालाँकि भाजपा ने इसे हिंदुओं के ख़िलाफ भी बताया। लेकिन जगन मोहन रेड्डी इस पर कायम रहे।
  • इसके अलावा देश की राजधानी में खुलेआम एक विशेष मजहब को ध्यान में रखते हुए मौलवियों की पगार निर्धारित हुई। लेकिन हिंदू मंदिर के पंडितों पर हमेशा निशाना साधा जाता रहा।

इसके अलावा कई ऐसी खबरें आई। लेकिन कभी इन पर किसी ने प्रश्नचिह्न नहीं लगाया। बहुसंख्यक कह-कहकर हिंदुओं को, उनकी प्रथाओं को, उनसे जुड़ी सभ्यताओं को दबा डालने का जैसे एक दौर चल पड़ा है। जिसमें उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष होने का सीधा पर्याय केवल हिंदू विरोधी होना परिभाषित कर दिया गया है।

विचार करिए, आज देशभर के बड़े हिंदू मंदिरों में चढ़ावे का करोड़ों रुपया रोज़ सरकारी ख़ज़ाने में जाता है। इसका बड़ा हिस्सा मस्जिदों और चर्च को दिया जाता है। राज्यों के धर्मार्थ विभाग कमाते तो मंदिरों से हैं, लेकिन उससे हज हाउस बनवाते हैं। ये वही पैसा है, जिससे मस्जिदों के इमामों को सैलरी दी जाती है। अगर उस करोड़ों की कमाई के बदले में सरकार किसी हिंदू देवी-देवता को ट्रेन में एक सीट दे रही है तो एहसान नहीं कर रही।

IRCTC ने कहा- महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए सीट रिजर्व नहीं: ओवैसी ने उठाए थे सवाल

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घुसपैठियों के समर्थन में आए ‘विभिन्न पदार्थों का सेवन करने वाले’ नसीर, शिक्षा बजट पर बोला झूठ

फ़िल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह चर्चा में बने रहे के लिए अक्सर उलूलजुलूल बातें करते रहते हैं। जब सीएए और एनआरसी के विरोध की हवा में दीया मिर्ज़ा और सुशांत सिंह सरीखे बेरोजगार अभिनेता-अभिनेत्रियों को भी मीडिया से कवरेज मिलने लगी, तब बेचैन नसीरुद्दीन शाह ने अपनी ही इंडस्ट्री के साथी अनुपम खेर को जोकर बता दिया। वजह, खेर ने सीएए का समर्थन किया था। हालाँकि, अनुपम खेर ने नसीरुद्दीन के बारे में बड़ा खुलासा कर दिया कि वो वर्षों से ‘विभिन्न पदार्थों का सेवन’ करते रहे हैं

ऐसे ही नसीरुद्दीन शाह ने प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने शिक्षा बजट में 30,000 करोड़ रुपए की कटौती की है। हालाँकि, ये झूठ है क्योंकि 2018-19 में शिक्षा बजट के हिस्से 85,010 करोड़ रुपए आए थे, जो अगले वर्ष बढ़ कर 94,000 करोड़ रुपए हो गया। अबकी 2020-21 वार्षिक बजट में ये आँकड़ा बढ़ कर 99,300 करोड़ रुपए हो गया है। फिर मोदी सरकार ने शिक्षा बजट में कब कटौती की, ये नसीरुद्दीन शाह ही बता सकते हैं।

साथ ही नसीरुद्दीन शाह ने ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों पर अत्याचार सिर्फ़ इस्लामिक मुल्कों में ही नहीं होता, बल्कि श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में भी होता है। इस सम्बन्ध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही बता चुके हैं कि भारत में रह रहे तमिल शरणार्थियों की रक्षा के लिए पूरी व्यवस्था की जा रही है और किसी को भी बाहर नहीं निकाला गया है। विभिन्न कैम्पों में रह रहे 65,000 तमिल शरणार्थियों के लिए सरकार सही समय पर घोषणा करेगी, इसका आश्वासन भी दिया जा चुका है। फिर नसीरुद्दीन शाह किसके लिए चिंतित हैं?

साथ ही नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उनके पास पासपोर्ट, वोटर आईडी और आधार कार्ड जैसे जो कागज़ात हैं, वो उनकी नागरिकता साबित करने के लिए काफ़ी नहीं होंगे। यहाँ सवाल ये उठता है कि नसीरुद्दीन से नागरिकता साबित करने को कहा किसने है? न तो वो असम के हैं और न ही पूरे देश में एनआरसी आई है। असम में भी 14 डॉक्यूमेंट्स की सूची में से कोई एक डॉक्यूमेंट और फिर दूसरी सूची के अन्य डॉक्यूमेंट्स की सूची में से कोई एक, यानि सिर्फ़ 2 कागज़ ही दिखाने हैं। लेकिन, नसीर तो असम के हैं ही नहीं। फिर वो यहाँ 70 साल गुजारने और पर्यावरण व समाज की सेवा करने की बातें कर के क्या जताना चाहते हैं?

नसीरुद्दीन ने आरोप लगाया कि अमित शाह कीड़े और दीमकों को एक-एक कर देश से बाहर निकालने की बातें करते हैं। गृहमंत्री घुसपैठियों को निकाल बाहर करने की बात करते हैं, तो इससे नसीरुद्दीन को क्या दिक्कत है? वो तो घुसपैठिए नहीं हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी कभी विद्यार्थी नहीं रहे हैं, इसीलिए उन्हें छात्रों की संवेदना का पता नहीं। पहली बात, पीएम ने ऐसा कभी नहीं कहा है कि वो विद्यार्थी नहीं रहे हैं, इसलिए ये बात ही झूठ है। दूसरी बात, अगर इसी लॉजिक के हिसाब से देखें तो नसीरुद्दीन शाह तो कभी कोई वकील, जज या क़ानूनविद रहे ही नहीं हैं, फिर उन्हें कैसे पता कि सीएए ग़लत है?

‘द वायर’ में नसीरुद्दीन शाह का इंटरव्यू: झूठ और प्रपंच का पुलिंदा

उन्होंने दावा किया कि सीएए विरोधी आंदोलन का कोई नेता नहीं है। अगर ऐसा है तो फिर देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने के लिए समुदाय विशेष को भड़काने वाला शरजील इमाम कौन था, जिसके गिरफ़्तार होते ही शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का जोश जाता रहा? नसीरुद्दीन ने फ़िल्म इंडस्ट्री पर सत्ताधारी दलों का साथ देने का आरोप लगाया। लेकिन, महाराष्ट्र में तो शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की सरकार है और ये तीनों दल भाजपा के विरोधी हैं। तो क्या मुंबइया फिल्म इंडस्ट्री को कॉन्ग्रेस का गुलाम माना जाए?

नसीरुद्दीन ने इस इंटरव्यू और और भी कई फालतू बातें की। मसलन उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को विरोध करने की सज़ा गोली मार कर दी जाती है। जबकि सच्चाई ये है कि 55 पुलिसकर्मी पूरे यूपी में सिर्फ़ सीएए विरोधियों की हिंसा के कारण घायल हुए। वो गोलियाँ किन लोगों ने चलाई थी?

‘आओ मिलकर हम बढ़ें, अधिकार अपने छीन लें’ – नसीरुद्दीन शाह ने CAA विरोधी प्रदर्शन की आग को दी हवा

नसीरुद्दीन शाह की बेटी बिल्लियों की नसबंदी कराने गईं, लेकिन अस्पताल में करने लगीं मारपीट, FIR दर्ज

अनुपम खेर जोकर है, मनोरोगी है, मुझे मुस्लिम होने का अहसास कराया जा रहा: नसीरुद्दीन शाह

14 साल बाद BJP में लौटे बाबूलाल मरांडी: झारखंड के पहले सीएम ने 2006 में बना ली थी अपनी पार्टी

झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और एक समय में प्रदेश की राजनीति का कद्दावर चेहरा रहे बाबूलाल मरांडी की सोमवार (फरवरी 17, 2020) को ‘घर वापसी’ हो गई। मरांडी ने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (JVM) का भारतीय जनता पार्टी में विलय कर दिया। मरांडी ने यह फैसला इसी महीने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद लिया था। सोमवार को राँची में एक कार्यक्रम के दौरान मरांडी ने विलय की औपचारिक घोषणा की। इस अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उन्होंने मरांडी का पार्टी में स्वागत किया।

शाह ने कहा, “मुझे खुशी है कि बाबूलाल मरांडी बीजेपी में लौट आए हैं, मैं 2014 से उनकी वापसी के लिए काम कर रहा था।” उनकी घर वापसी को लेकर झारखंड की राजधानी राँची में विशाल कार्यक्रम आयोजित किया गया। बीजेपी ने इसे मिलन समारोह का नाम दिया। मरांडी ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा कि उन्हें पद की लालसा नहीं है और वे पार्टी के लिए झाड़ू लगाने को भी तैयार हैं।

बाबूलाल मरांडी ने अमित शाह को धन्यवाद दिया और उपस्थित सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा, “आज पार्टी में मेरा जिस तरह से बाँहें फैला कर स्वागत किया गया, उसके लिए मैं सबका आभार प्रकट करता हूँ। मैं आज पार्टी में आया हूँ तो किसी पद के मोह में नहीं आया हूँ। मुझे पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी मैं उसे स्वीकार करूँगा। मैं एक आम कार्यकर्ता की तरह काम करूँगा। पार्टी अगर मुझे झाड़ू लगाने का काम भी मुझे देगी तो मैं उसे करूँगा।”

इस दौरान शाह ने कहा कि लोग चर्चा करते हैं कि बीजेपी झारखंड में चुनाव हार गई। लेकिन बीजेपी का लक्ष्य सरकार बनाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माण करना होता है। इस लक्ष्य के लिए हमलोग सालों विपक्ष में रहे हैं। वहीं मरांडी ने अपने संबोधन में हेमंत सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है, लोगों की हत्याएँ हो रही है, लेकिन सरकार बेखबर है।

बता दें कि बाबूलाल मरांडी ने 2006 में बीजेपी से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा के नाम से नई पार्टी का गठन किया था। हालाँकि उनकी पार्टी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। 2009, 2014 और 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी को क्रमशः 11, 8 और 3 सीटों पर जीत मिली।

मोबाइल चोरी पर हल्ला मचाया, लूटेरे इब्राहिम शेख ने चलती ट्रेन से बाहर खींच लिया, अस्पताल में…

बीते शुक्रवार को नानावती अस्पताल में काम करने वाले 32 वर्षीय संतोष कुमार मौर्य को काम पर जाते वक्त अँधेरी स्टेशन पर चलती हुई लोकल ट्रेन से, एक लुटेरे ने मोबाइल लूटने की कोशिश में प्लेटफॉर्म पर खींच लिया। चेहरे के बल गिरे संतोष को इस हादसे में कई चोटें आईं हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मौजूद पब्लिक ने लुटेरों में से एक 26 वर्षीय मो. इब्राहिम शेख को मौके से धर दबोचा, जिसे बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया। जबकि उसका साथी मौके से भागने में कामयाब हो गया। इब्राहिम शेख मुंबई के नालसोपाड़ा का रहने वाला है।

नालसोपाड़ा के ही रहने वाले मौर्या जो विलेपार्ले के नानावती अस्पताल में भर्ती हैं, घटना को याद करते हुए कहते हैं, “मैं लगभग 10 बजे अँधेरी स्टेशन पर फ़ास्ट लोकल से उतर विले पार्ले के लिए स्लो लोकल में बैठा ही था कि किसी ने चोर-चोर का हल्ला किया, यह सुनते ही मैंने अपना फोन तलाशा, जो गायब था… मैंने देखा कि उसने मेरा फोन लिया हुआ था, मैंने उसे कॉलर से पकड़ लिया, इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वह ट्रेन से कूद गया और साथ में मुझे खींच ले गया।”

बाद में मीडिया को पुलिस ने बताया कि इब्राहिम शेख नामक यह शख्श आदतन अपराधी है, तथा इसका साथी 48 साल का मो.अयूब शेख अभी फरार है।

IRCTC ने कहा- महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए सीट रिजर्व नहीं: ओवैसी ने उठाए थे सवाल

काशी महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं है। यह बात आईआरसीटीसी ने कही है। मीडिया रिपोर्टों में एक सीट महाकाल के लिए रिजर्व होने पर और उस पर मंदिर स्थापित होने की बात कही गई थी। यह खबर सामने आने के बाद विवाद भी शुरू हो गया था। AIMIM के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्रेन में मंदिर बनाए जाने का विरोध किया था।

आईआरसीटीसी ने कहा है कि ट्रेन में कोई भी सीट श्री महाकाल के लिए आरक्षित नहीं होने जा रही है। IRCTC ने कहा है कि काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन के स्टाफ ने पूजा और भगवान के आशीर्वाद के लिए ट्रेन की एक सीट पर श्री महाकाल की तस्वीरें रख दी थीं। यह सिर्फ ट्रेन के उद्घाटन के समय के लिए ही था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को वाराणसी से ‘काशी महाकाल एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाई। यह एक्सप्रेस वाराणसी से इंदौर तक जाएगी। ट्रेन दो राज्यों के तीन ज्योतिर्लिंगों की यात्रा कराएगी। खबरें आईं थी कि इसमें एक सीट भगवान शिव के लिए भी रिजर्व की गई है। इस सीट पर भोलेनाथ का एक छोटा मंदिर स्थापित किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सप्रेस ट्रेन के बी5 कोच की सीट नंबर 64 पर इस मंदिर को स्थापित किया गया है। इस ट्रेन की शुरुआत 20 फरवरी से होनी है।

इसको लेकर विवाद भी शुरू हो गया था। ओवैसी ने मंदिर बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने PMO को टैग करते हुए संविधान की प्रस्तावना को ट्वीट किया। हालाँकि इसके बाद ओवैसी पर भी सवाल उठने लगे और कुछ यूजर्स ने तो रेलवे स्टेशन पर बने मस्जिदों की तस्वीर अपलोड कर उन्हें बताया कि अब एकतरफा सेकुलरिज्म काम नहीं करेगा।

बता दें कि ट्रेन के सभी एसी-थ्री कोच सुविधाजनक होने के साथ-साथ खूबसूरत भी बनाए गए हैं। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए हर कोच में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके अलावा कोच अटेंडेंट की सीट के ऊपर एलसीडी डिस्प्ले भी लगाए गए हैं, जिससे वो सभी गतिविधियों की निगरानी कर सकेगा। वहीं, यात्रियों को अगले स्टेशन के बारे पता लगाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, अगला स्टेशन बताने के लिए गेट के ऊपर डिस्प्ले लगे हैं। 

बताया जा रहा है कि उज्जैन-ओंकारेश्वर जाने वालों को 2 रात तीन दिन के ₹9420 के पैकेज में महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर, कालभैरव मंदिर, राममंदिर घाट, हरसिद्धि मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन करवाए जाएँगे। वहीं, ₹12,450 के 3 रात व 4 दिनों के पैकेज में उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-इंदौर का भ्रमण करवाया जाएगा। इसमें इंदौर, महेश्वर में होल्कर किला, नर्मदा घाट व शिव मंदिर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ₹14,950 में भोपाल, सांची, भीमवेट, उज्जैन का भ्रमण करवाया जाएगा। यह पैकेज तीन रातों व चार दिनों का होगा।

रेलवे में 150 सालों का सबसे बड़ा सुधार: ₹50 लाख करोड़ का निवेश, सेवाओं के एकीकरण को मंजूरी

रामलला की अयोध्या: राम मंदिर जैसा होगा रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, फाइव स्टार होटल और एयरपोर्ट भी बनेंगे

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कन्हैया कुमार पर 9वीं बार हमला, इस बार चप्पल फेंक कर मारा: पहले झेल चुके हैं अंडा, मोबिल, पत्थर

नागरिकता कानून के विरोध में बिहार में ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर निकले CPI नेता और जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को बिहार में एक बार फिर भारी विरोध का सामना लखीसराय में करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार लखीसराय जिला मुख्यालय स्थित गाँधी मैदान में सभा करने पहुँचे कन्हैया कुमार को नारंगी शर्ट पहने एक युवक ने चप्पल फेंक कर मारा। चप्पल फेंक कर मारने वाले युवक का नाम चंदन कुमार है। पुलिस ने आरोपित युवक को कन्हैया समर्थकों की मार से बचाते हुए हिरासत में ले लिया।

कन्हैया कुमार की ओर चप्पल उछालने वाले आरोपित युवक चंदन कुमार का कहना है कि कन्हैया देश का गद्दार है। वह देश में दंगा भड़काना चाहता है। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता हो चुके कन्हैया कुमार पर इससे पहले चप्पल से हमला करने के मामले में शिवसेना के प्रदेश सचिव सहित दो शिव सैनिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें प्रदेश सचिव विक्रमादित्य सिंह और व्यावसायिक प्रमुख संजय प्रसाद शामिल हैं।

इससे पहले उनके काफ़िले पर आरा जिले में भी हमला किया गया था। दरअसल कन्हैया कुमार जब बिहार में आरा के रमना मैदान जा रहे थे, उसी दौरान स्थानीय लोगों ने कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में काफिले में शामिल कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।

कन्हैया कुमार इन दिनों नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के खिलाफ ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर निकले हुए हैं लेकिन उन्हें लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के जिस भी जिले में वह अब तक पहुँचे हैं, उनमें से अधिकतर जगहों पर कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला बोला गया है।

बिहार के आरा में जब उनके काफिले पर हमला हुआ था तो इसमें ईंट-पत्थर इस्तेमाल किया गया जिससे उनकी गाड़ियाँ भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे पहले कन्हैया कुमार पर जमुई से नवादा जाते वक़्त भी उनके काफिले को निशाना बनाया गया था, जिस पर अंडे और मोबिल ऑयल फेंके गए थे। कन्हैया कुमार के समर्थकों और स्थानीय लोगों में इस बात पर झड़प भी हुई थी। हालाँकि, कन्हैया कुमार को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ था।

कन्हैया कुमार ने 30 जनवरी को यह ‘जन-गण-मन यात्रा’ शुरू की थी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार बिहार के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पहुँच रहे हैं। अब तक उनकी यह यात्रा 11 के लगभग शहरों में पहुँची है, जिनमें से 9 में वो अपने काफिले समेत कूटे जा चुके हैं।

फिर थूरे गए कन्हैया कुमार: दो हफ्ते में 8वीं बार हुआ काफिले पर हमला, बिहार के आरा में हुआ यह

पथराव के बाद जान बचाकर भागे कन्हैया कुमार: शिवसैनिकों सहित 3 गिरफ्तार, 30 पर FIR

हर दूसरे दिन पिट रहे हैं कन्हैया कुमार, जूता-चप्पल, अंडा, मोबिल, पत्थर… सब बरसा रहे बिहारी

कन्हैया कुमार ये बि​​हारी हैं सब पबित्तर कर देंगे, मैदान से लेकर वामपं​थी प्रोपेगेंडा की दुकान तक

विरोध का अधिकार, सड़क बंद करने का नहीं… बातचीत से हल नहीं तो एक्शन की खुली छूट: शाहीन बाग पर SC

सवाल यह नहीं है कि लोग विरोध कर रहे हैं। हर कोई विरोध करने लगेगा तो क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को दिल्ली के शाहीन बाग में दो महीने से ज्यादा समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर की। अदालत ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस मसले पर अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा जनजीवन को ठप करने की समस्या से जुड़ा है। विरोध के नाम पर सब सड़क पर उतरने लगे तो क्या होगा? कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र लोगों की अभिव्यक्ति से ही चलता है, लेकिन इसकी एक सीमा है। अगर सभी सड़क बंद करने लगे तो परेशानी खड़ी हो जाएगी। यातायात बंद नहीं होना चाहिए। विरोध-प्रदर्शन का तरीका होता है। सभी के पास विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सड़क बंद करने का नहीं।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “पिछले 64 दिन से प्रदर्शन जारी है, लेकिन आप उन्हें हटा नहीं पाए। अब बातचीत से हल नहीं निकलता है तो हम अथॉरिटी को एक्शन के लिए खुली छूट देंगे।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह सड़क को बंद करके प्रदर्शन करने से दूसरे लोगों को भी आइडिया आएगा और वो भी ऐसा ही करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में चंद्रशेखर आजाद की ओर से पेश वकील ने कहा कि देश में इस तरह के 5000 प्रदर्शन होंगे। इस पर अदालत ने कहा, “हमें 5000 प्रदर्शनों से दिक्कत नहीं हैं, लेकिन रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। हमें बस सड़क के जाम होने से चिंता है।”

बता दें कि यह सुनवाई उस याचिका पर चल रही थी जिसमें याचिकाकर्ता ने 2 महीने से बंद सार्वजनिक रास्ते को खोलने का आदेश देने की अपील शीर्ष अदालत से की थी। याचिका में कहा गया था कि सार्वजनिक रास्तों को रोकने संबंधी गाइडलाइन जारी किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग में CAA और NRC खिलाफ धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसकी वजह से रोड 13ए बंद है। यह रोड दिल्ली और नोएडा को जोड़ती है। सड़क बंद होने की वजह से नोएडा और दिल्ली के बीच सफर करने वालों को कई घंटे फालतू लग रहे हैं। उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी सार्वजनिक जगह पर अनंतकाल तक प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। हालाँकि सड़क खाली करवाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

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भारत में इस्लामी कट्टरवादी लगातार ‘गजवा-ए-हिन्द’ का सपना देखते हैं। वो चाहते हैं कि पूरी दुनिया में उनके मजहब का राज हो और उनका खलीफा गद्दी पर बैठे। कट्टरपंथी मौलवियों, हिन्दू-विरोधी नेताओं और कथित विचारकों की तरफ से गाहे-बगाहे ऐसे बयान आते रहते हैं, जिससे पता चलता है कि भारत के मुस्लिमों को भड़का कर उन्हें हिन्दू-विरोधी बनाया जा रहा है। उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि तुमने ‘700 साल राज किया है’ और ताजमहल, लाल किला व चारमीनार जैसे ऐतिहासिक ढाँचे ‘उनके’ हैं, देश के नहीं। इसी क्रम में एक और मौलवी का बयान वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर लेखक तारिक फतह, मेजर सुरेंद्र पुनिया और भाजपा प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने उक्त मौलवी का वीडियो शेयर करते हुए उसकी आलोचना की है और तुरंत गिरफ़्तारी की माँग उठाई है। वायरल वीडियो में मौलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मरने की बात कही है और धमकी भी दी है। मौलवी ने पीएम मोदी को लेकर पूछा कि वो कब तक कुर्सी से चिपके रहेंगे?

मौलवी ने पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर भी बड़ा आरोप लगाया। मौलवी ने कहा कि सुषमा स्वराज ‘जैसी औरत’ ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था, इसीलिए उनकी मृत्यु हो गई और वो ‘अपने अंजाम तक पहुँच गईं।’ मौलवी ने आपत्तिजनक व भड़काऊ बयानों की बौछार करते हुए आगे कहा:

“शीला दीक्षित हाल ही में मरीं और अरुण जेटली की भी मृत्यु हो गई। दोनों अपने अंजाम तक पहुँचे। जब गाँधी, नेहरू, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर, नरसिम्हा राव और वाजपेयी नहीं रहा तो फिर मोदी-शाह रह जाएगा क्या? ये दोनों भी नहीं रहेगा। तू क्यों घबराता है? क्यों फिक्रमंद होता है? दो-चार साल सब्र रख, इन्तजार कर। दूसरों का जो भी अंजाम हुआ है, उससे बुरा अंजाम मोदी-शाह का होगा।”

मौलाना सीएए और एनआरसी से भी ख़ासा ख़फ़ा है। उसने उपस्थित लोगों को भड़काते हुए पीएम मोदी व पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ‘मृत्यु’ की दुआ की। उसने कहा कि जो सीएए और एनआरसी लेकर ‘मुस्लिमों को मिटाने’ का सपना देख रहा है, उसे श्मसान में लाठी से मार-मार कर जलाया जाएगा। मौलाना ने दावा किया कि आज से कुछ सालों बाद 30 करोड़ मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ कर 60 करोड़ हो जाएगी और इस्लाम-मुक्त भारत का सपना देखने वालों के बाल-बच्चे जिन्दा रहे तो वो देखेंगे कि भारत में हर तरफ इस्लामी हुकूमत का ही झंडा लहराएगा।

मौलाना जब ऐसी आपत्तिजनक बातें कर रहा था और अपने कौम के लोगों को भड़का रहा था, तब वहाँ उपस्थित लोग उसकी बातों पर तालियाँ पीट रहे थे। कथित अल्पसंख्यकों ने ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे मजहबी नारों के साथ मौलाना के बयान का स्वागत किया।

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