दिल्ली पुलिस ने बिहार पुलिस के सहयोग से जहानाबाद के काको से देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम को गिरफ़्तार किया। शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील ने पूरे नॉर्थ-ईस्ट को शेष भारत से अलग करने के लोए लोगों को भड़काया था। उसके फेसबुक पोस्ट से ही पता चल गया था कि वो एक इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित व्यक्ति है। पुलिस की पूछताछ के दौरान भी ये बातें स्पष्ट हो गई है कि इस्लामी कट्टरपंथी जहरीले भाषण देने का उसका पुराना रिकॉर्ड रहा है।
शाहीन बाग़ प्रदर्शनस्थल पर यूँ तो हिंदुत्व विरोधी कई पोस्टर समय-समय पर लगाए जाते रहे हैं लेकिन अब वहाँ ऐसे पोस्टर भी लगाए गए हैं, जो भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाली मानसिकता के परिचायक हैं। मसलन, वहाँ भारत का ऐसा नक्शा लगाया गया है, जहाँ उत्तर-पूर्व भारत को देश से अलग दिखाया गया है। ऐसा दिखाया गया है कि उत्तर पूर्वी भारत को शेष भारत से अलग काट दिया गया है। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप उस पोस्टर को देख सकते हैं:
सोमवार (फरवरी 3, 2020) को ऑपइंडिया के रिपोर्टरों ने शाहीन बाग़ के धरनास्थल पर जाकर पड़ताल की तो पाया कि देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की मानसिकता का परिचय देने वाला वो पोस्टर वहाँ पर लगा हुआ था, जिसमें नार्थ-ईस्ट इंडिया को देश के बाकि हिस्सों से काट कर दिखाया गया है। हमारे रिपोर्टरों ने विभिन्न एंगलों से तवीरें क्लिक की, जिसमें वो पोस्टर स्पष्ट दिख रहा है। इससे साफ़ मालूम होता है कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन के पीछे देशविरोधी मानसिकता काम कर रही है।
यही वो ऐसे पोस्टर्स हैं, जिन्हें लहराते हुए ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ का नारा लगाया गया था। अब जब प्रदर्शन को आयोजित करने वाला ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को काट डालने की बात करता है और वहाँ आवागमन को ठप्प करने के लिए लोगों को भड़काता है तो फिर उस प्रदर्शन में मौजूद लोगों की मानसिकता उससे अलग तो होगी नहीं।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही उत्तर-पूरी भारत के राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। संवेदनशील इलाक़ा होने के कारण यहाँ असम राइफल्स, सीआरपीएस, बीएसएफ और सेना के जवान लगातार गश्त करते रहते हैं।
ऐसा नहीं है कि देश के सभी राजनीतिक दलों ने इन पोस्टरों का विरोध किया हो। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इन पोस्टरों का समर्थन किया है। सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर जब हिंसा भड़की तो इसी तरह की एक उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करते हुए आप विधायक अमानतुल्लाह ख़ान को भी देखा गया था।
Can you beat this? This is the Bus Stop of Shaheen Bagh which is being used as a ‘Library’ where all ‘provocative’ Books are placed. This is what you have done to Delhi, Arvind Kejriwal. pic.twitter.com/s6vSlnnAqB
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहले ही कह चुके हैं कि वो शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं। दिल्ली में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार मुकेश शर्मा भी कह चुके हैं कि वो शाहीन बाग़ में हो रहे प्रदर्शन में मदद पहुँचाते रहते हैं और उन लोगों से उनकी बात होती रहती है।
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए आठ फरवरी को वोट पड़ेंगे। चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आतंकी होने के प्रमाण हैं। जावड़ेकर भाजपा के दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रभारी भी हैं।
असल में पश्चिम दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को आतंकवादी बताया था। चुनाव आयोग ने इस बयान के बाद बीजेपी से वर्मा को के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर करने को कहा था। साथ ही उनके प्रचार करने पर 96 घंटे का प्रतिबंध भी लगा दिया था। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि केजरीवाल पूछ रहे हैं कि क्या मैं आंतकवादी हूॅं, तो इस बात के कई सबूत हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद थे।
जावड़ेकर ने कहा, “केजरीवाल मासूम चेहरा बनाकर दिल्ली की जनता से बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या मैं आतंकवादी हूँ। हाँ, आप आतंकवादी हो, इसके बहुत सबूत हैं। आपने खुद कहा था कि मैं अराजकतावादी हूँ। अराजकतावादी और आतंकवादी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता। दिल्ली की जनता जो पहले केजरीवाल के पक्ष में थी। वह भी अब मुखर होकर उनसे सवाल कर रही है।”
#WATCH Union Minister Prakash Javadekar in Delhi: Kejriwal is making an innocent face & asking if he is a terrorist, you are a terrorist, there is plenty of proof for it. You yourself had said you are an anarchist, there is not much difference between an anarchist & a terrorist. pic.twitter.com/vRjkvFKGEO
बकौल जावड़ेकर केजरीवाल पंजाब के मोगा में खालिस्तान कमांडो फोर्स के आतंकवादी कमांडर गुरिंदर सिंह के आवास पर रात भर ठहरे थे। वहॉं वे सोच-समझकर रुके थे। सीएए के विरोध में शाहीन बाग में करीब 50 दिन से चल रहे धरने-प्रदर्शन का आप समर्थन कर रही है। जावड़ेकर ने कहा कि जिन्ना वाली आजादी और असम के विभाजन की बात करने वालों के साथ खड़ा होना भी एक तरह से आतंकवाद है।
आपको बता दें कि सांसद प्रवेश वर्मा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि केजरीवाल जैसे नटवरलाल… केजरीवाल जैसे आतंकवादी देश में छुपे बैठे हैं। हमें तो सोचने पर मजबूर होना पड़ता है हम कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों से लड़ें या फिर केजरीवाल जैसे आतंकवादियों से इस देश में लड़ें।
CAA और NRC के खिलाफ शाहीन बाग़ में पिछले 51 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। विरोध की वजह है मात्र ये डर कि CAA में मुस्लिमों का नाम नहीं है इसलिए जब कभी भी भविष्य में NRC लागू होगा तो इससे मुस्लिमों की नागरिकता छीन जाएगी, मुद्दा पूरी तरह से हिन्दू-मुस्लिम बना दिया गया है लेकिन इसे सेक्युलर ठहराने के नाम पर वामपंथी गिरोहों द्वारा कागज नहीं दिखाने से लेकर कई अन्य प्रपंच रचे और जोड़े गए। जिसकी परिणति कोलकाता से लेकर दिल्ली तक कड़ाके की ठण्ड से बीमार होकर कई मौतों के रूप में भी सामने आया जिसे कुर्बानी बताने की कोशिश की जा रही है।
इस विरोध को बाद में मोदी सरकार गिराने के एजेंडे से भी जोड़ दिया गया जिस पर हम आगे एक विस्तृत रिपोर्ट ले कर आएँगे। फिलहाल, CAA और एनआरसी के विरोध में धरने पर बैठे मुस्लिमों और वामपंथियों की मिलीभगत से हाईवे जाम कर, व्यवस्था ठप कर, कई ‘जिहादी बाग़’ बनाने के प्रयास हुए जिसकी शुरुआत शाहीन बाग़ से हुई। इन प्रदर्शनों में हिन्दुविरोधी पोस्टरों से लेकर देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वालों तक जमावड़ा रहा।
खासतौर से, शाहीन बाग प्रदर्शन का चेहरा बनाया गया एक छोटी बच्ची और दो बूढ़ी दादियों को, दादियाँ तो अभी भी शाहीन बाग में डटी हैं लेकिन वो छोटी बच्ची जो बाटला हाउस इलाके की थी जिसकी कड़कती ठण्ड में प्रदर्शन को इमोशनल टच देने और मीडिया अटेंशन के लिए जामिया और शाहीन बाग़ दोनों जगहों के प्रदर्शनों में इस्तेमाल हुआ वो पिछले कई दिनों से तमाम मीडिया हाउस की ग्राउंड रिपोर्ट से गायब है। क्यों? हमने पड़ताल करने की कोशिश की तो कई फेसबुक पोस्ट और वहाँ मौजूद प्रत्यक्ष-दर्शियों के बयानों से ठण्ड लगने से बीमार होने के कारण उसकी मौत की बात सामने आई।
वाजीहुल हसन आज़ाद ने इस घटना की सूचना देते हुए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “दुखद, जामिया प्रोटेस्ट में एक औरत बच्चे को गोद में लेकर आती थी, सर्दी की वजह से बीमार हुई और आज (2 फरवरी 2020) इन्तिकाल हो गया। NRC, CAA और NPR ने सबसे छोटी को भी कफ़न पहना दिया है। इस बच्ची के घरवालों को अल्लाह सब्र दे और मोदी, शाह को हिदायत दे कि वह हमारे प्रदर्शन करने वाले लोगों को हलके में ना लें, बुजुर्गों के बाद बच्चे भी शहीद हो रहे हैं, इस बच्ची के घरवालों की कुर्बानी याद रहेगी, इन्किलाब आएगा। अल्लाह इस नन्ही को जन्नत नसीब करें और माँ को सब्र अता करें।”
इस पोस्ट के कमेंट में भी उसकी मौत और कुर्बानी की चर्चा करते हुए उसके लिए दुआ की गई। लेकिन, क्या यह एक आम मौत है या सिर्फ अपने झूठे एजेंडे के लिए एक नन्ही बच्ची के जान से खिलवाड़ करते हुए उसे मौत की आगोश में पहुँचाकर, उसे कुर्बानी का नाम देकर खुद को सही साबित करने की कोशिश हो रही है?
इस आंदोलन का एक चेहरा सदफ जफ़र जो कुछ दिन पहले लखनऊ में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर प्रदर्शनकारियों को भड़काने और अशांति फ़ैलाने के कारण जेल भी गई थी, ने लिखा, ये मौत किसके नाम लिखी जाएगी, एक नन्ही जान जामिया पर अपनी माँ के साथ सर्दी में आ रही थी, बीमार होकर जान गँवा बैठी। दिल पर हाथ रखकर फैसला कीजिएगा।”
एक और फेसबुक पोस्ट में नदीम खान ने लिखा, “आज मन दुखी है, जामिया प्रोटेस्ट में बाटला हाउस की एक छोटी सी बच्ची अपनी माँ के साथ प्रोटेस्ट में आती थी, ठण्ड लगने से बच्ची की तबियत ख़राब हुई और बच्ची की डेथ हो गई। पता नहीं कितना खून चाहिए वफ़ादारी साबित करने के लिए।”
कहा ये भी जा रहा है कि ये बाटला हाउस की वही बच्ची है जिसका शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट में इस्तेमाल हुआ और अब मौत के बाद उसे जामिया का बता कर इस मौत की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश हो रही है। कई और भी फेसबुक पोस्ट में उस बच्ची को जामिया का बताया गया और उसके मौत की पुष्टि भी की गई लेकिन कमेंट में ये बात आने के बाद कि इससे प्रोटेस्ट को नुकसान होगा कहकर कई पोस्ट डिलीट कर दिए गए लेकिन कुछ अभी भी मौजूद है। उसकी मौत को लेकर कुछ ट्वीट्स भी किए गए थे लेकिन कुछ ही देर बाद सारे ट्वीट्स गायब हो गए।
क्या किसी साज़िश के तहत शाहीन बाग़ उपद्रव व उससे जुड़े लोगों ने फ़ैसला लिया है कि इस मुद्दे को दबाना है? इस मामले में अब तक कोई मीडिया रिपोर्टिंग नहीं हुई है। इसे सोशल मीडिया पर भी छिपाया जा रहा है। एक नहीं बच्ची का इस्तेमाल अपना प्रोपेगंडा चलाने के लिए किया गया और अब जब उसकी मौत हो गई है तो इसे छिपाया जा रहा है, ख़बर को दबाया जा रहा है। बात कल की है और आज जब हमारे रिपोर्टर ने शाहीन बाग़ में गुपचुप तरीके से पड़ताल करने की कोशिश की तो वहाँ के कई प्रोटेस्टरों ने इसकी पुष्टि की लेकिन वही बात दोहराई की हाँ एक बच्ची जो जामिया प्रोटेस्ट में आती थी जो अब दो महीने की हो गई थी उसकी ठण्ड लगने से मौत हो गई।
शायद ये सूचना कुछ बड़े मीडिया संस्थानों व उनके पत्रकारों को भी हो जो प्रोटेस्ट के हर एजेंडे की बखूबी खबर रख रहे हैं और उन्हें उनके झूठ के साथ ही बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन कोई भी इसे चलाने की कोशिश नहीं कर रहा है जिसकी एक बड़ी वजह ये है कि ऐसे तमाम बड़े मीडिया हाउस जो प्रोटेस्ट के इस झूठे नैरेटिव को हवा दे रहे हैं। जिन्होंने अपने चैनलों के माध्यम से उस नहीं सी मासूम जान को प्रोटेस्ट का चेहरा बनाया, जिन लोगों ने उस माँ से यह बयान दिलवाया कि अगर आज मैं इस विरोध में शामिल नहीं होऊँगी तो ये 20 दिन की बच्ची बड़ी होकर मुझसे सवाल करेगी और मैं इसके भविष्य के लिए यहाँ कड़ाके की ठंडी में भी रात-रात भर मौजूद हूँ। जब वह बच्ची करीब दो महीनों की हुई और माँ की बेवकूफी और वामपंथी-मुस्लिम एजेंडे की भेंट चढ़ गई तो वही मीडिया गिरोह उस पर पर्दा डाल रहे हैं अपनी गर्दन बचाने को।
इस ख़बर की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर शाहीन बाग़ भी पहुँचे। वहाँ लोगों से बातचीत करने के बाद पता चला कि बच्ची की मौत की बात सत्य है। कुछ लोगों ने बताया उसके लिए शाहीन बाग़ और जामिया नगर में चल रहे प्रदर्शन स्थलों पर दुआ भी पढ़ी गई। शाहीन बाग़ के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मृत बच्ची के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा- “हमने थोड़ी मारा?वो अल्लाह की बच्ची थी, अल्लाह ने उसे बुला लिया।” कितनी आसानी से एक इंसानी ग़लती को उपरवाले के सिर मढ़ दिया गया और कोई मीडिया आउटरेज भी नहीं। उस बच्ची ने क्या अपनी सहमति दी थी कि मुझे सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने ले चलो?
शाहीन बाग़ में उपस्थित एक और प्रदर्शनकारी अम्मा से भी जब इसकी पुष्टि करनी चाही तो उन्होंने कहा, “यहाँ तो बड़ों को गोली मारी जा रही है। वो तो बच्ची थी, क़ुर्बान हो गई।” 20 दिन की नहीं बच्ची जो इस कथित आंदोलन का सबसे नन्हा चेहरा थी जब उसकी अम्मी उसे गोद में लेकर धरने पर बैठी थी। सोचिए कि भीषण ठण्ड के दिन में इसका बच्ची के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा होगा, जो अपनी राय तक जाहिर नहीं कर सकती थी और न ही उसे पता है कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है। आज जब वह दो महीने की हो चुकी थी तो उसने इस पूरे प्रपंच को अलविदा कह दिया।
अब सवाल उठता है कि बच्ची की मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या वो अम्मी, जिसने नहीं बच्ची का इस्तेमाल अपना प्रोपेगंडा चलाने के लिए किया? या वो सभी लोग इस मौत के जिम्मेदार हैं, जिन्होंने मीडिया अटेंशन पाने के लिए उसका इस्तेमाल किया। भाजपा व मोदी के अंध विरोध में एक नहीं सी जान का इस्तेमाल करने वालों से मीडिया सवाल नहीं पूछ रही, लिबरल गिरोह चुप है। सोचिए, ऐसे कितने ही नन्हे व छोटे बच्चों का वहाँ जमावड़ा लगा दिया गया है।
बच्चों के हितों की रक्षा करने वाली सरकारी एजेंसी एनसीपीसीआर ने भी विरोध प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता जताई थी और कहा था कि इन बच्चों की काउंसलिंग की जाएगी। वहाँ बच्चों से भड़काऊ नारे लगवाए जा रहे थे और उनसे बयान दिलवाए जा रहे थे। नीचे संलग्न किए गए इस ट्वीट में शाद अब्दुल्लाह नामक व्यक्ति दावा कर रहा है कि जिस बच्ची की मौत हुई, उसे कैंडल जला कर श्रद्धांजलि दी गई है:
आज रात शाहीन बाग एट रांची में आंदोलन कर रहीं औरतों ने शाहीन बाग दिल्ली में प्रोटेस्ट कर रही एक छोटी से बच्ची जिसकी ठंड से मौत हो गई थी उसके याद में कैंडल जला कर श्रद्धांजलि दी गईं। pic.twitter.com/9eAA20X4Tv
जेएनयू में प्रदर्शनकारियों ने दिव्यांगों को आगे कर दिया। जम्मू कश्मीर पर भारत के विरोधी पक्ष को सही साबित करने के लिए यही गिरोह गे कम्युनिटी के लोगों को आगे कर देता है। मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी बात को सही साबित करने के लिए दलितों का इस्तेमाल किया जाता है। सीएए के विरोध के लिए महिलाओं को भड़काया जाता है। झारखण्ड में चुनाव आता है तो आदिवासियों में भ्रम फैलाया जाता है। अब छोटे बच्चे-बच्चियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये मौत नहीं है, हत्या है। इसके जिम्मेदार वो लोग हैं, जो अपने उस बच्ची को लेकर वहाँ गए। उनमें बच्ची की अम्मी भी शामिल है। और सभी प्रदर्शनकारी मुस्लिम और वामपंथी एजेंडा बाज भी, तो क्या उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए, उनसे सवाल नहीं होना चाहिए। आखिर अपने झूठ के लिए और कितनों को ये कुर्बान करेंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के चुनावी अभियान को धार देते हुए दिल्ली स्थित कड़कड़डूमा में विशाल जनसभा को संबोधित किया। पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पहले ही प्रचार अभियान में लगा चुकी है। अमित शाह घर-घर जाकर पर्चे बाँट रहे हैं और कार्यकर्ताओं के घर भोजन कर रहे हैं। अब पीएम मोदी की रैली से भाजपा कैडर के भीतर नए जोश का संचार हुआ है। पीएम ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में सातों सीटें देकर दिल्ली के लोगों ने बता दिया है कि वो किस दिशा में सोच रहे हैं।
पीएम मोदी ने शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शन के बारे में कहा कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि सोचा-समझा प्रयोग है। उन्होंने कहा कि ये राष्ट्र की सौहार्दता को खंडित करने का एक कुत्सित प्रयास है। उन्होंने कहा कि संविधान और तिरंगे को सामने रखते हुए ज्ञान बॉंटा जा रहा है और असली साजिश से ध्यान हटाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये चुनाव दिल्ली के इसी गौरव को 21वीं सदी की पहचान और शान देने के संकल्प का है। ये चुनाव एक ऐसे दशक का पहला चुनाव है, जो 21वीं सदी के भारत का और 21वीं सदी में भारत की राजधानी का भविष्य तय करने वाला है। उन्होंने लोगों को विश्वास दिलाया कि भाजपा नेगेटिविटी में नहीं बल्कि पॉजिटिविटी में भरोसा रखती है। कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि दिल्ली के 40 लाख से अधिक लोगों, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोग हैं, उन्हें उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता से भाजपा सरकार ने मुक्त किया है।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के घोषणा-पत्र की भी बात की। बकौल पीएम मोदी, पक्की की गई कॉलोनियों के तेज विकास के लिए डेवलपमेंट बोर्ड बनाया जाएगा। जहाँ झुग्गी है वहाँ पक्का घर भी बनेगा। झुग्गी में रहने वाले परिवारों को पक्का घर देने के लिए तेज़ी से काम किया जाएगा। केजरीवाल सरकार को घेरते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 5 साल में इतना सारा काम देश में हुआ, गरीबों को रहने के लिए घर मिले, लेकिन दिल्ली की सरकार यहाँ के गरीबों को रहने के लिए घर नहीं देना चाहती। उन्होंने आगे कहा:
“पिछले 5 वर्षों में 2 करोड़ घर केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए देशभर में बनाए। इनमें से एक भी घर दिल्ली सरकार की वजह से यहाँ नहीं बन पाया। जब तक ये लोग बैठे रहेंगे, तब तक ये दिल्ली के लोगों की भलाई के कामों में रोड़े अटकाते ही रहेंगे। ये लोग रुकावट डालते रहेंगे। आम आदमी पार्टी के लोग सिवाय राजनीति के कुछ जानते ही नहीं हैं। पहली बार, देश को लोकपाल भी मिला। देश के लोगों को तो लोकपाल मिल गया, लेकिन दिल्ली के लोग आज भी इंतजार कर रहे हैं। इतना बड़ा आंदोलन और इतनी बड़ी-बड़ी बातें की गई थी, उन सबका क्या हुआ?”
पहले की सरकारों ने कैसे-कैसे देश को उलझाकर रखा था।
ये फैसले पहले भी लिए जा सकते थे, ये समस्याएं पहले भी सुलझाई जा सकती थीं।
पीएम मोदी ने सवाल दागा कि सीएए से हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों को नागरिकता का अधिकार कितने साल बाद मिला? उन्होंने आगे पूछा कि शहीद जवानों के लिए देश में नेशनल वॉर मेमोरियल कितने साल बाद बना? 1984 के सिख नरसंहार में दोषियों को सज़ा कितने साल बाद मिली? वायुसेना को नेक्स्ट जनरेशन लड़ाकू विमान कितने साल बाद मिला? बेनामी संपत्ति कानून कितने साल बाद लागू हुआ? इन्हीं सवालों के जवाब देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि इन कार्यों में क्रमशः 70, 60, 50, 34, 35 और 28 साल का लंबा समय लगा।
केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के आँकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पहली बार 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली। पहली बार 10 करोड़ गरीब परिवारों तक टॉयलेट की सुविधा पहुँची। उन्होंने आगे बताया कि पहली बार 8 करोड़ गरीब महिलाओं की रसोई में गैस का मुफ्त कनेक्शन पहुँचा। 5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर इनकम टैक्स जीरो किए जाने वाले फ़ैसले की भी पीएम मोदी ने चर्चा की। उन्होंने याद दिलाया कि सामान्य वर्ग के ग़रीबों को आरक्षण देने का काम इसी सरकार ने किया है। उन्होंने जानकारी दी कि साढ़े 3 लाख संदिग्ध कंपनियों की पहचान कर उन पर ताला जड़ दिया गया है।
शनिवार को जो बजट आया है, वो इस साल के लिए ही नहीं बल्कि इस पूरे दशक को दिशा देने वाला है।
इस बजट का लाभ दिल्ली के नौजवानों, व्यापारियों, मध्यम वर्ग, निम्म मध्यम वर्ग, गरीबों और यहां की महिलाओं, सभी को होगा: पीएम मोदी #DelhiWithModipic.twitter.com/xXJOW4nVZl
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए ताज़ा बजट की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि इस बजट में इसका भी ध्यान रखा गया है कि मध्यम वर्ग के करदाताओं के हाथ में ज्यादा पैसे बचे। उन्होंने व्यापारियों के लिए किए गए कार्यों को गिनाते हुए कहा कि अब हरियाणा या यूपी सामान भेजना हो या वहाँ से मँगवाना हो तो दिल्ली के व्यापारियों की दिक्कतें कम हुई हैं, क्योंकि जीएसटी से सारे चुंगी और चेकपोस्ट ख़त्म हो गए हैं।
पीएम मोदी ने इस दौरान नीतीश कुमार की दिल्ली में हुई रैली की भी चर्चा की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने दिल्ली में रैली करते हुए कहा था कि केजरीवाल सरकार ने बिहार से दिल्ली तक बसें चलाने की अनुमति नहीं दी, जिस कारण यात्रियों को गाजियाबाद उतरना पड़ता है। पीएम मोदी ने बताया कि वो ‘नीतीश बाबू’ को सुन रहे थे और इससे पता चलता है कि दिल्ली सरकार यूपी-बिहार के लोगों के प्रति हीन भावना रखती है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने भविष्य में भाजपा संग गठबंधन की संभावनाओं पर प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश में एनसीपी और कॉन्ग्रेस संग गठबंधन सरकार चला रहे ठाकरे ने कहा कि भविष्य में भाजपा के साथ साझेदारी हो सकती है।
शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में महाराष्ट्र के सीएम ने कहा, “मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि हम भविष्य में उनके (भाजपा) साथ गठबंधन नहीं करेंगे।” उन्होंने विरोधी विचारधारा की पार्टी एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के फैसले का भी बचाव किया। कहा की पिता बाला साहेब से किए वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था। उद्धव का कहना है उन्होंने पिता से किसी शिवसैनिक को राज्य का सीएम बनाने का वादा किया था। ठाकरे ने कहा, “जब मुझे महसूस हुआ कि भाजपा के साथ रहकर अपने पिता से किया गया वादा पूरा नहीं किया जा सकता, तो मेरे पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।”
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर अपना वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था। तब शिवसेना ने दावा किया था कि चुनाव से पूर्व हुए गठबंधन में तय था कि दोनों पार्टियाँ 50-50 फॉर्मूले के तहत सरकार में रहेंगी। हालाँकि चुनाव परिणाम के बाद भाजपा ने शिवसेना के साथ इस तरह के किसी समझौते को ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कॉन्ग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई।
उद्धव ठाकरे ने इंटरव्यू में कहा, “अगर उन्होंने अपना वादा निभाया होता और मुझसे झूठ नहीं बोला होता तो मैं कभी मुख्यमंत्री नहीं बनता। मैंने उससे ज्यादा कभी नहीं माँगा। मैंने उनसे बस उसका सम्मान करने के लिए कहा था जो चुनाव से पूर्व दोनों दलों के बीच तय हुआ था।” ठाकरे ने कहा कि वो पीएम मोदी और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के बीच ‘सैंडविच’ थे, दोनों ने उन्हें छोटे भाई के रूप में बताया था।
साथ ही उद्धव ने साफ किया कि शिवसेना ने हिंदुत्व की अपनी विचारधारा को ना तो छोड़ा है और ना ही उससे कोई समझौता किया है। सामना के संपादक संजय राउत को दिए इंटरव्यू में ठाकरे ने कहा, “हमने हिंदुत्व नहीं छोड़ा है, गठबंधन किया है इसका मतलब ये नहीं कि हमने धर्म बदल लिया है।”
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गोथुआ गाँव के कई लोगों के घर के बाहर ‘यह मकान बिकाऊ है‘ लिखा हुआ देखकर सनसनी फैल गई। जानकारी करने पर पता चला कि यहाँ के लोग फर्जी मुकदमों के कारण पलायन को मजबूर हो गए हैं। गाँव के लोगों का कहना है कि एससी/एसटी एक्ट के फर्जी मुकदमों से तंग आकर अन्य जातियों के लोग गाँव छोड़कर जा रहे हैं। ग्रामीणों ने अपने मकानों की बिक्री के लिए बोर्ड लगा दिए है। साथ ही जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
Firozabad: People are selling homes in Gothua village allegedly due to registration of fake cases under the SC/ST Act against them. A villager says,”Every year,fake cases are lodged against us under SC/ST Act over trivial issues.We are fed up with it & want to leave the village.” pic.twitter.com/XQHn9i6H4s
जानकारी के अनुसार, गोथुआ में 27 जनवरी को बच्चों के बीच हुए झगड़े ने तूल पकड़ा था और दो पक्षों में इसे लेकर मारपीट भी हुई। इसके बाद एक पक्ष ने गाँव के ही कई लोगों पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने और अन्य अनर्गल आरोप लगाकर उनके खिलाफ थाने में तहरीर दे दी।
ग्रामीणों के अनुसार, गाँव में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोग पहले भी एससी-एसटी के फर्जी मुकदमे लिखवाकर गाँव के 14 लोगों को जेल भिजवा चुके हैं। आरोप है कि एक बार फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जो बच्चे नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हीं को निशाना बनाकर उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा लिखवा कर उन्हें जेल भिजवा दिया जा रहा है। इससे युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। अब, ऐसी स्थिति से निबटने के लिए परेशान ग्रामीणों ने घर छोड़ने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और पुलिस द्वारा उनकी सुनवाई नहीं की जाती तो वे गाँव से पलायन को मजबूर हो जाएँगे।
पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, गोथुआ में 2 जाति ठाकुर और जाटव समाज के लोगों के बीच काफी समय से विवाद चला आ रहा है। आए दिन दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटनाएँ होती हैं। इसे लेकर ही ठाकुर समाज के लोगों ने दीवारों पर लिखकर मकान और खेत बेचने की बात अंकित की है।
हालाँकि, वहाँ के सीओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि किसी भी मामले में कानूनी कार्रवाई जातिवाद देखकर नहीं की जाएगी। उन पर फर्जी एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमे पंजीकृत नहीं कराया जाएगा। इसलिए वह लोग दीवारों पर लिखे गए मकान और खेत बेचने की बात को मिटा दें। मगर, ग्रामीणें ने इससे इनकार कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी राजनीति व्यक्ति के दखल के बाद ही वह इसे मिटाएँगे।
आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान पर अक्सर मारपीट के आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ने भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रात में बैठक के बहाने बुलाकर उन्हें अमानतुल्लाह से पिटवाया था। इस मामले में अमानतुल्लाह को गिरफ़्तार भी किया गया था। उन्होंने दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ भी मारपीट की थी। शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन में आगे बढ़ कर हिस्सा लेने वाले और हिंसक भीड़ का नेतृत्व करते देखे गए अमानतुल्लाह यौन हिंसा के आरोप भी झेल रहे हैं। वैसे, दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जो 70 उम्मीदवार उतारे हैं उनमें 51% दागी हैं।
अब एक ट्विटर यूजर ने दावा किया है कि अमानतुल्लाह ख़ान ने इस बार किसी और को नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के मुखिया केजरीवाल को निशाना बनाया है। ट्वीट की मानें तो केजरीवाल इस बात से नाराज़ चल रहे थे कि करोड़ों रुपए फूँकने के बाद भी आम आदमी पार्टी को शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ‘पोकर शाह’ नामक ट्विटर अकाउंट के अनुसार, दिल्ली के सीएम इस बात से नाराज़ थे कि उन्हें शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फ़ायदा क्यों नहीं हो रहा है?
‘पोकर शाह’ ने अटकलों का बाजार गर्म करते हुए लिखा कि रविवार (फरवरी 2, 2020) की रात आक्रोशित केजरीवाल ने अमानतुल्लाह से इस बारे में पूछा और नाराज़गी जताई। इस ट्वीट की मानें तो अमानतुल्लाह इसके बाद मारपीट पर उतर आए और उन्होंने केजरीवाल के साथ जोर-जबरदस्ती की। ‘पोकर शाह’ ने कहा कि प्रार्थना कीजिए कि ये ख़बर सत्य नहीं हो।
Hearing a story of a rift between Amanatullah and Kejriwal. Last night there was a fight between them regarding Shaheen Bagh. Accd to sources Kejriwal was angry as Shaheen bagh has completly failed even after spending crores. Amanatullah went physical. Hope its not true.
हालाँकि, ऑपइंडिया इस ख़बर की कोई पुष्टि नहीं करता है कि अमानतुल्लाह ने केजरीवाल को पीटा, क्योंकि इसका न तो कोई वीडियो वायरल हुआ है और न ही दोनों तरफ से कोई बयान ही आया है। अमानतुल्लाह और केजरीवाल के बीच झड़प की ख़बर उपर्युक्त ट्विटर हैंडल के हवाले से ही चल रही है। सोशल मीडिया पर अटकलों का बाजार गर्म है।
मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के एक मंत्री ने बीते दिन अपनी ही सरकार के दावों की पोल खोल दी। एक कार्यक्रम में पहुँचे कमलनाथ सरकार के श्रम मंत्री सिसोदिया ने कहा कि मैंने एक साल मे उद्योगों के लिए कुछ नहीं किया। इतना ही नहीं मंत्री ने कुछ काम न करने के लिए लोगों के सामने खेद भी व्यक्त किया।
अपने अटपटे बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले कमलनाथ सरकार के श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने विकास कार्यों को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। सोमवार को गुना ज़िले के एक कार्यक्रम में पहुँचे श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने मौजूद लोगों को संबाोधित करते हुए कहा,
“मैं अभी एक साल से मंत्री हूँ, लेकिन हम औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं कर सकते, मैं खेद व्यक्त करता हूँ। आपने आज मुझे यहाँ बुलाया और मुझे आपके साथ बोलने का अवसर मिला, हम गुना के लिए जो भी कर सकते हैं, हम मध्य प्रदेश सरकार के रूप में करेंगे।”
MP Minister MS Sisodiya in Guna: I’ve been a minister for a year now but we couldn’t do something to give boost to industrial sector, I express my regret. You called me here today & I got the opportunity to speak with you, we’ll do whatever we can for Guna, as MP government.(2.2) pic.twitter.com/UemsJrXZhI
यह बयान कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, इसके बाद यूजर्स ने विकास कार्यों को लेकर कमलनाथ सरकार को जमकर निशाने पर लिए। हालाँकि, अभी तक सिसोदिया के बयान को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है। बतादें कि सिसोदिया अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।
उन्होंने इससे पहले खुद को कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का चमचा बताते हुए कहा था कि, मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं इतने बड़े कद के व्यक्ति का चमचा हूँ।’ उन्होंने आगे यह भी कहा था कि मैं राजनीति छोड़ दूँगा, मगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं छोड़ूँगा।
अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में आतंकी हमले में 20 लोगों की मौत हो गई। आतंकियों ने एक गॉंव में घंटों कहर बरपाया। हमले के बाद दहशत में लोग गॉंव छोड़कर भाग खड़े हुए। हमला शनिवार (02 फरवरी 2020) को उत्तरी बुर्किना फासो के लाम्दामोल गाँव में किया गया। मोटरसाइकिलों पर आए सशस्त्र आतंकियों ने गाँव में घुसते ही लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाते हुए निकल गए।
डोरी शहर में एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मारे गए लोगों में प्रमुख नर्स भी शामिल है जो लाम्दामोल गाँव की रहने वाली थी। अधिकारी ने बताया कि गाँव और आस-पास के इलाके के लोग घबराए हुए हैं और इलाका छोड़कर जा रहे हैं। कर्नल साल्फो काबोरे ने रविवार को कहा, “सुरक्षा बल नर्स के शव को घटनास्थल से लेकर आए ताकि उसे उसके परिवार को सौंपा जा सके।” उन्होंने बताया कि इलाके की सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं ताकि सभी का अंतिम संस्कार किया जा सके।
एक अन्य सुरक्षाकर्मी ने बताया कि आतंकियों ने स्थानीय लोगों से कुछ दिन पहले इलाका खाली करने को कहा था। इसके बाद हमलावरों ने घटना को अंजाम दिया। बता दें कि देश के उत्तर में एक सप्ताह पहले भी इसी प्रकार के हमले हुए थे। इससे पहले सोम प्रांत में 25 जनवरी को हुए हमले में 39 लोग मारे गए थे। बुर्किना फासो की सीमा माली और नाइजर से लगती है। दोनों देश लंबे समय से इस्लामी कट्टरपंथ से प्रभावित हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ 2019 में ही माली, नाइजर और बुर्किना फासो में हुए जिहादी हमलों में 4000 लोगों की जान गई थी और कम से कम 6 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था।
उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हिंसा भड़काने के आरोप में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 108 सदस्य पिछले 4 दिन में गिरफ्तार किए गए हैं। राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी और कार्यकारी डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।
अवनीश अवस्थी ने बताया कि पिछले चार दिनों में यूपी पुलिस ने पीएफआई के 108 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि तह तक पहुँच कर पता लगाया जायेगा कि आखिर इन लोगों को किससे मदद मिलती है। इस दिशा में जॉंच की जा रही है। राज्य की मशीनरी केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में भी है।
Awanish K Awasthi, Additional Chief Secretary, Uttar Pradesh Home Department on Popular Front of India (PFI): 108 people have been arrested in the last 4 days, these are in addition to the 25 who were arrested earlier. pic.twitter.com/QbkMqTVXv1
डीजीपी हितेशचंद्र अवस्थी ने बताया, “2001 में सिमी पर प्रतिबंध के बाद साल 2006 में केरल में PFI बना था। PFI का संगठन पूरे यूपी में है। शामली, बहराइच, पीलीभीत में विशेष तौर पर सक्रिय है।”
उन्होंने कहा, बीते साल 19 और 20 दिसंबर को हिंसा के बाद पीएफआई के 25 सदस्यों की गिरफ्तारी की गई थी। इनमें प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम अहमद, डिवीजन इंचार्ज बहराइच/बाराबंकी मौलाना अशफाक, डिवीजन इंचार्ज वाराणसी रहीस अहमद एडवोकेट, कमेटी मेंबर नसरुद्दीन सहित अन्य कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी।
Awanish K Awasthi, Additional Chief Secretary, UP Home Department: More information is being gathered about the organization, including information of their financial transactions. We are also taking assistance from central agencies, our target is to identify them & take action. https://t.co/NfH9ukE8od
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 4 दिन में जिन 108 पीएफआई सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है उनमें से लखनऊ से 14, बहराइच से 16, सीतापुर से 3, मेरठ से 21, गाजियाबाद से 9, मुजफ्फरनगर से 6, शामली से 7, बिजनौर से 4, वाराणसी से 20, कानपुर से 5, गोंडा, हापुड़ और जौनपुर से एक-एक को गिरफ्तार किया गया है।
अवनीश अवस्थी ने कहा, “किसी भी रूप में देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा।” एडीजी पीवी रमाशास्त्री ने कहा, “साक्ष्य संकलन एक निरंतर प्रक्रिया है। अपने साथी संस्थाओं के साझा प्रयास से हम साक्ष्य इकट्ठा कर रहे हैं। ईडी जैसी अन्य एजेंसियाँ इस जाँच में शामिल हैं।”
गौरतलब है कि इससे पहले, मेरठ पुलिस ने शनिवार को PFI सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। देर रात तक जिले भर में 6 गिरफ्तारियाँ हुईं थीं। इसमें परतापुर से कारी इरफान निवासी सैलाना, सरूरपुर से मुस्तकीम निवासी खिवाई, इंचौली से कारी ओसामा निवासी लावड़ और लिसाड़ी गेट से अय्यूब निवासी श्यामनगर, महताब निवासी अहमदनगर व शोएब निवासी इस्लामनगर को गिरफ्तार किया गया था।