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पाकिस्तान की तरह ही भारतीय सेना भी अपने लोगों को मारती है: CAA विरोधी कथित सामाजिक कार्यकर्ता का बयान

CAA-NRC और NPR के विरोध की आड़ में अधिकतर लोग शायद यह भी भूल चुके हैं कि शुरुआत में उनका विरोध कानून के खिलाफ था। समय के साथ अब यही विरोध कर रहे लोग अब खुदको देश, सरकार और सेना के खिलाफ अपने जहर को उगलने से नहीं रोक पा रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (NPR) के विरोध में दिल्ली में शाहीन बाग़ से लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन हो रहे हैं।

जंतर-मन्तर पर प्रदर्शन के दौरान कथित सामाजिक कार्यकर्ता तपन बोस ने भारतीय सेना के बारे में विवादित बयान दिया है। तपन बोस ने कहा- “पाकिस्तान कोई दुश्मन देश नहीं है। शासक वर्ग चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, एक जैसा है। हमारी सेना भी पाकिस्तानी सेना जैसी है। पाकिस्तानी सेना भी अपने लोगों को मारती है और हमारी सेना भी अपने लोगों को मारती है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। पाकिस्तान में लोग आपसे बहुत प्यार से बात करते हैं और सुलह की बात करते हैं।” ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर धारा 144 लागू कर रखी है।

CAA विरोध में शाहीन बाग़ सहित कई जगहों पर उसी तर्ज पर धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। जिसमें कई देश विरोधी बातें कही जा रही हैं। ऐसे आंदोलनकारियों के देश विरोधी बयानों को देखते हुए ये साफ होने लगा है कि इनका विरोध CAA के लिए नहीं है बल्कि अब पूरा आंदोलन ही देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र हो चुका है।

CAA विरोध के नाम पर आर्थिक जिहाद की माँग, वकील ने कहा- रामदेव गाय-गोबर खिलाकर RSS से खरीदवाता है हथियार

ऐसा लगता है मानो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, CAA-NRC का विरोध अब शाहीन बाग़ से होते हुए अपने असली रंग में आने लगा है। देशद्रोही नारे लगाने के कारण गिरफ्तार हुए शरजील इमाम के पकड़े जाने के ठीक एक दिन बाद ही सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो शेयर होते देखा जा रहा है। इस वीडियो में CAA के विरोध प्रदर्शन के लिए जमा भीड़ को एक वकील द्वारा विशेष ब्रांड और कम्पनी के आर्थिक बहिष्कार की सलाह देते हुए देखा जा सकता है।

टाइम्स एक्सप्रेस द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो को बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

टाइम्स एक्सप्रेस के अनुसार, यह वीडियो उस वक़्त बनाया गया है जब वकील भानु प्रताप सिंह ने CAA पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद दिल्ली के मुस्तफाबाद में धरने पर बैठी जनता को संबोधित कर रहे थे।

इस वीडियो में वकील भानु प्रताप भीड़ को सम्बोधित करते हुए कह रहे हैं- “खुद को हिंदुस्तानी कहना बंद करो, हम भारतीय हैं। इस सरकार की सबसे बड़ी ताकत मीडिया है। वो मीडिया आज की तारीख में अम्बानी ने खरीद लिए हैं। ये अम्बानी ही आरएसएस और भाजपा की पैसे की तिजोरी हैं। बताओ हम टीवी देखकर किसे पैसा दे रहे हैं? अम्बानी को दे रहे हैं या नहीं? हम इनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ देंगे। क्या ये सीरियल और पिक्चर हमारे आंदोलन से बढ़कर हैं? हम अपना पैसा दुश्मन को क्यों दें? हम अपना एक भी पैसा रिलायंस को नहीं देंगे। हम इस रिलायंस की कमर तोड़ देंगे।”

“….रवीश जी ने कहा था टीवी मत देख, हम नहीं माने। लेकिन अब तो मानो, सरकार हमें दफन करना चाहती है, मारना चाहती है। सरकार के पास पैसा, पुलिस, फ़ौज और अदालतें भी हैं। हमारे पास कुछ भी नहीं है, ना सरकार, ना फ़ौज, ना पुलिस। हमारे पास बस हमारी एकता और बुद्धि है। इसी बुद्धि का इस्तेमाल कर के आज यहाँ सब लोग निर्णय करो, हम आज से टीवी पर ताला लगा देंगे, टीवी नहीं देखेंगे। रिलायंस के जितने भी… जिओ के मोबाइल हैं, सब चेंज करो, एयरटेल के लो, चाहे आईडिया के लो, चाहे वोडाफोन के खरीदो, जिसके लो लेकिन रिलायंस की कमर तोड़नी है चाहे जो हो जाए। इसके अलावा रिलायंस का पेट्रोल पम्प, जितने भी उत्पादन हैं, कोई भी रिलायंस का उत्पादन, सबका बहिष्कार करो।”

“….इसके साथ-साथ इस रामदेव के जितने भी उत्पादन हैं सब कचरा हैं। सब गाय और गोबर ही तो खिला रहा है वो। इसको बंद करो। रामदेव का सब पैसा हमारे खिलाफ जाता है। हमारा ही पैसा, अधिकतर पैसा आरएसएस के लिए हथियार खरीदने के काम आ रहा है। हम इन दुश्मनों की कमर और रीढ़ की हड्डी तोड़ देंगे। जिसकी रीढ़ टूट जाती है, कभी सीधा खड़ा नहीं हो पाता है। ये काम हमें करना है, ये काम हम ही कर सकते हैं, कोई दूसरा नहीं करेगा।”

वकील भानू प्रताप आगे कहते हैं- “अपने दोस्त, रिश्तेदारों को समझाओ, हम लड़ाई के मैदान में हैं, हम पिकनिक नहीं कर रहे, हम सैर मनाने नहीं आए हैं, लड़ाई की रणनीति हमें अपनानी पड़ेगी और उसका इस्तेमाल करना होगा। अब बस एक जरुरी बात बताना चाहूँगा, साथियों हम सबको सबसे ज्यादा दिक्कत पुलिस से होती है। क्योंकि कानून हमें मालूम नहीं है और हमारी अज्ञानता का वो फायदा उठाते हैं। ना हम अखिलेश यादव के भरोसे हैं, ना उस दिल्ली के मुख्य्मंत्री केजरीवाल के भरोसे हैं, जो इस आंदोलन में अभी तक एक बार भी नहीं आया।”

ज्ञात हो कि आर्थिक जिहाद इस्लामिक विचारधारा का ही प्रतीक है। ऑपइंडिया पर हम पहले भी बता चुके हैं कि हलाल जैसे कार्यों के लिए भी किस प्रकार से इस्लाम के अलावा सभी धर्मों का बहिष्कार किया जाता है।

फर्जी एकाउंट्स बना कर महिलाओं को प्रताड़ित करता था ‘मोटा’ कामरा: महिला कॉमेडियन ने खोले राज

कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी के साथ बदसलूकी करने के बाद उसे इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइस जेट द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। अब महिला कॉमेडियन अनुभा सिन्हा ने कुणाल कामरा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अनुभा ने कहा है कि कुणाल कामरा और उत्सव चक्रवर्ती मिल कर फर्जी ट्विटर एकाउंट्स बनाते थे और महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित करते थे

अनुभा ने कहा कि जब कुणाल कामरा मोटा हुआ करता था और किसी ने उसके बारे में नहीं सुना था, तब वो ऐसे जोक्स मारा करता था जिसपर किसी को हँसी नहीं आती थी। यही वो समय था जब वो फर्जी ट्विटर अकाउंट्स के जरिए महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित किया करता था। बकौल अनुभा, एक बार ख़ुद कामरा ने अपने और चक्रवर्ती के बारे में ये बात स्वीकार की थी चक्रवर्ती पर पहले ही ‘मी टू’ का मामला चल रहा है।

अनुभा ने बताया कि 2016 में उन्होंने कामरा से पहली बार मुलाक़ात की थी। ये मुलाक़ात मुंबई में हुई थी। उन्होंने बताया कि जब वो ग्रीन रूम में सेट के लिए तैयार हो रही थीं, तब कामरा की बातें उन्होंने सुनी थी। कामरा तब ये बातें कर रहा था कि कैसे उसने अपना वजन घटाया। कुणाल बातें कर रहा कर रहा था कि वो अधिकतर ऐसी महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित करता था, जिनके साथ वो काम करता था।

जब अक्टूबर 2018 में उत्सव चक्रवर्ती पर ‘मी टू’ का आरोप लगा था, तब कुणाल कामरा ने बयान जारी कर के दावा किया था कि उसे उत्सव की हरकतों के बारे में पता था और उसने इस मामले में उत्सव को डाँटा भी था। अनुभा सिन्हा ने कहा कि पहले उन्होंने इस बारे में बात नहीं की लेकिन अर्नब गोस्वामी के साथ कुणाल कामरा के दुर्व्यवहार को देखते हुए उन्हें लगा कि कामरा की सच्चाई बताने का यही सही समय है।

बता दें कि कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा था कि कुणाल कामरा अर्नब गोस्वामी पर लगातार तंज कसते हुए न सिर्फ़ उन्हें परेशान कर रहा है बल्कि बार-बार उन्हें ‘डरपोक’ भी बता रहा है। उसने ट्विटर पर इस वीडियो को डालते हुए गर्व के साथ लिखा कि वो रोहित वेमुला की माँ के लिए ऐसा कर रहा है। वो वीडियो में स्वीकार करता है कि वो जो कर रहा है, वो नियमानुसार सही नहीं है लेकिन फिर वो कहता है कि वो इसके लिए जेल जाने को भी तैयार है। वो अर्नब को कहता दिख रहा- ‘गेट द फकिंग टाइम और रोहित वेमुला की 10 पेज की सुसाइड नोट को पढ़ो।

‘भरोसे लायक नहीं है प्रशांत किशोर, हम खुश हैं कि यह कोरोना वायरस हमें छोड़ रहा है’

नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर पर मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले जदयू नेता प्रशांत किशोर को अब अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध झेलना पड़ रहा है। दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के बाद अब जदयू नेता अजय आलोक ने उनको आड़े हाथों लिया है। अजय आलोक ने उन्हें ‘कोरोना वायरस’ करार दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर भरोसे लायक आदमी नहीं हैं।

जदयू नेता अजय आलोक ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह (प्रशांत किशोर) आदमी भरोसेमंद नहीं है। वह मोदी जी और नीतीश जी का भरोसा नहीं जीत सके। वह AAP के लिए काम करते हैं, राहुल गाँधी से बात करते हैं, ममता दीदी के साथ बैठते हैं। कौन उन पर भरोसा करेगा? हमें खुशी है कि यह कोरोना वायरस हमें छोड़ रहा है, वह जहाँ चाहे वहाँ जा सकते हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बारे में कहा था कि यदि कोई ट्वीट कर रहा है तो करे। जब तक किसी की पार्टी में रहने की इच्छा करेगी, तब तक वह रहेगा और जाना चाहेगा तो जाए। नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को लेकर कहा कि अमित शाह के कहने पर ही उन्हें पार्टी में लिया था, अब उन्हें जाना है तो जाए।

यहाँ बता दें कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से ट्विटर के जरिए नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले पर पार्टी के फैसले पर सवाल खड़े कर रहे थे। इसके साथ ही दिल्ली में BJP और JDU के गठबंधन पर भी प्रशांत किशोर ने निशाना साधा था। इसके मद्देनजर ही जब नीतीश से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया था कि जिसे जाना है वो जा सकता है।

लेकिन, नीतीश कुमार के बयान के बाद भी प्रशांत किशोर चुप नहीं रहे। उन्होंने पलटवार करते हुए लिखा था कि उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर नीतीश कुमार ने झूठ बोला है। किशोर ने लिखा था, “मेरा रंग आपके जैसा नहीं है। अगर आप सच बोल रहे हैं तो कौन भरोसा करेगा कि आपके पास इतनी हिम्मत होगी कि आप अमित शाह की बात नहीं मानेंगे।”

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BJP में स्टार शटलर साइना नेहवाल, दिल्ली के चुनावी प्रचार में उतार सकती है पार्टी

स्टार बैडमिंटन प्लेयर साइना नेहवाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई हैं। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात के बाद अपनी बहन चन्द्रांशु के साथ भाजपा ज्वाइन की। हरियाणा में जन्मीं साइना कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर ओलम्पिक तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुकी हैं। उनसे पहले पूर्व हॉकी कप्तान संदीप सिंह और पहलवान बबिता फोगाट भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। इन दोनों ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थामा था।

साइना नेहवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में खेल को आगे ले जाने के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने ‘खेलो इंडिया’ मूवमेंट की भी तारीफ की। साइना ने कहा कि वो देश और देश के लोगों के लिए और ज्यादा मेहनत करेंगी।

साइना नेहवाल पिछले दिनों में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ कर चुकी हैं। हाल ही में जब पीएम मोदी ने रामलीला मैदान में भाषण दिया था, तब साइना ने उनके सम्बोधन की प्रशंसा की थी।

ख़बरों में कहा जा रहा है कि साइना नेहवाल दिल्ली चुनाव में भी भाजपा के लिए प्रचार करेंगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कैडर में जोश भरने के लिए साइना का प्रचार अभियान अहम साबित हो सकता है। खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित की जा चुकीं साइना युवाओं के बीच पहले से ही ख़ासी लोकप्रिय हैं।

29 वर्षीय साइना नेहवाल अब तक 24 अंतर्राष्ट्रीय टाइटल जीत चुकी हैं। विश्व की पूर्व नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ये उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय बैडमिंटन प्लेयर बनी थीं। इससे पहले प्रकाश पादुकोण ने ये उपलब्धि हासिल की थी।

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चर्च में एक ही प्याली, एक ही चम्मच से सभी को शराब: इस प्रथा के खिलाफ PIL खारिज, HC ने कहा – धर्म का मामला

केरल के हाईकोर्ट ने चर्चों में ‘होली सेक्रामेंट’ के नाम पर एक ही प्याली से पिलाई जाने वाली शराब जैसी प्रथा के ख़िलाफ़ दायर जनहित याचिका को रद्द कर दिया। कोर्ट का कहना है कि ये आस्था का मामला है, इसलिए वे इसमें दखल नहीं कर सकते।

‘होली सेक्रामेंट’ ईसाई धर्म की एक ऐसी प्रथा है, जिसमें गिरजाघरों में रोटी और शराब बाँटकर यीशु मसीह के ‘लास्ट सपर’ को स्मरण किया जाता है। डॉक्टरों और डेन्ट‌िस्टों के संगठन ‘क्वालिफाइड प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन’ ने इस प्रथा के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में इन्होंने इस प्रथा, (‘होली सेक्रामेंट’ वितर‌ित किए जाने की प्रथा) को अस्वास्‍थ्यकर बताया था। साथ ही कहा था कि इस प्रथा से आम जनता के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है, विशेषकर सहभागियों के लिए।

उल्लेखनीय है कि होली सेक्रामेंट की प्रथा में चर्च में पादरी हर सहभागी के मुँह में एक ही प्याली और चम्मच से शराब परोसते हैं। जिसके आधार पर डॉक्टर और डेंटिस्टों के संगठन का कहना था कि यह प्रक्रिया लार से गंदगी फैलने की आशंका को जन्म देती है, जोकि कई बीमारियों के प्रमुख कारणों में से एक है। उनमें से कुछ बीमारियाँ हवा में लार की बूंदों की मौजूदगी से भी फैल सकती है। लार की गंदगी के कारण बड़ी संख्या में लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका होती है। इसलिए लोगों को ऐसी प्रथाओं में शामिल होने से बचना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, इस जनहित यााचिका में माँग की गई थी कि चर्च सहित सभी धार्मिक संस्थानों में जहाँ भोजन वितरित होता है, वहाँ स्वच्छता संबंधी मानकों का पालन किया जाए और यह सुनिश्चित हो कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार केवल सुरक्षित भोजन ही व‌ितर‌ित किया जाए।

मगर, याचिका पर सुनवाई के दौरान और अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए, चीफ जस्टिस एस मानिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की बेंच ने कहा कि खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण को चर्चों में होली सेक्रामेंट के वितरण या व्यवस्थापन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं दिया गया है।

कोर्ट ने कहा धार्मिक समूह के सदस्यों द्वारा, होली सेक्रामेंट प्राप्त करने की प्रथा, सदस्यों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 में संरक्षित किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए, हाईकोर्ट ने इस दौरान कहा कि धर्मावलंबी द्वारा ‘होली सेक्रामेंट’ ग्रहण करना उक्त प्रथा में उस व्यक्ति का विश्वास है और किसी नागर‌िक का धार्मिक विश्वास उस व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता है। हाईकोर्ट ने इसके बाद याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने ऐसा कोई उदाहरण नहीं दिया, जिससे पता चले कि होली सेक्रामेंट वित‌रित किए जाने से किसी व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग हुआ या स्वास्‍थ्य संबंधी खतरा पैदा हुआ।

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चड्डा-चड्डी वालों को, गोली मारो सालों को: मुस्लिम नेता की खुलेआम धमकी, देखें Video

सोशल मीडिया पर पूर्व भाजपा सांसद हरि माँझी ने एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि राजस्थान का एक मुस्लिम नेता खुलेआम लोगों को धमका रहा है। सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ बोलते हुए उक्त मुस्लिम नेता आरएसएस के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करता हुआ दिख रहा है। हरि माँझी लगातार दो बार बिहार के गया से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कैसे मुस्लिम नेता खुलेआम प्रशासन को धमका रहा है।

साथ ही वो खुलेआम गोली मारने की भी धमकी दे रहा है। माँझी ने इस ट्वीट में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को टैग करते हुए पूछा कि वो भड़काऊ बयान देने वाले इस नेता के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई करने वाले हैं? माँझी ने भाजपा प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी इस ट्वीट में टैग किया।

“मैं प्रशासन को चेतावनी देता हूँ। मच्छीपुरा से आने वाली गाड़ियों पर पथराव किया गया है। याद रखना, कुचल के फेंक देंगे। ग़लतफ़हमी में मत रहना। ये चड्डा-चड्डी वालों को, गोली मारो सालों को। बाहर निकालो सालों को।”

मुस्लिम नेता अपने वीडियो में प्रशासन और संघ के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी दे रहा है और साथ ही गोली मारने व बाहर निकालने की बात भी कह रहा है। हालाँकि, अभी तक मुख्यमंत्री गहलोत या उप-मुख्यमंत्री पायलट ने इस वीडियो पर कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी है।

जिन मुस्लिमों का खतना नहीं हुआ वो भी मोदी-शाह से नहीं डरता: मौलवी की धमकी, देखें वीडियो

मुस्लिमों की तरह रहो, अपनी नौटंकी (पूजा-पाठ) बंद करो: पूजा को पति कामरान और ससुराल वालों की धमकी

मौलवी अब्बास सिद्दीक़ी ने दी धमकी, कहा- CAA को रद्द करो वर्ना कोलकाता हवाई अड्डे को ब्लॉक कर दूँगा

जापान में सदियों से होती रही है माँ सरस्वती के इस रूप की पूजा, जानिए देवी बेंजाइटन के बारे में

अगर आपको लगता है कि माँ सरस्वती की पूजा सिर्फ़ भारत में ही की जाती है और केवल हिन्दू धर्म में ही ऐसा होता है, तो आप ग़लत हैं। दरअसल, देवी सरस्वती की पूजा विभिन्न समय-काल में, विश्व की विभिन्न सभ्यताओं द्वारा अलग-अलग स्वरूपों में की जाती रही है। जापान में उनकी पूजा बेंजाइटन के रूप में की जाती है। बेंजाइटन को भी वीणा बजाते हुए दिखाया गया है, ठीक माँ सरस्वती की तरह। सरस्वती के बारे में वेदों में कई ऋचाएँ हैं। सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद में सरस्वती का वर्णन नदी के रूप में है। बाद में उन्हें विद्या की देवी का दर्जा मिला।

सरस्वती नदी के बारे में लिखा गया है कि वो ऐसी शक्तिशाली नदी थी, जिसकी धार पहाड़ों को चीरते हुए धरती पर आती थी। ऋग्वेद में इसका प्रमाण मिलता है कि यज्ञ वगैरह के लिए सरस्वती नदी के तट को दुनिया में सबसे शुद्ध माना जाता था। पुराणों में उन्हें ब्रह्मा जी की पत्नी के रूप में दर्शाया गया है। बौद्ध धर्म में माँ सरस्वती का ख़ास महत्व है क्योंकि भगवान बुद्ध को ज्ञान मिलने का कारण उन्हें ही बताया गया है। बौद्ध मानते हैं कि जो भी धर्म की उपासना करता है, माँ सरस्वती उनकी रक्षा करती हैं।

अगर जापान में पूजी जाने वाले बेंजाइटन की बात करें तो चीन में ‘सुवर्णप्रभास सूत्र’ के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद होने के बाद उन्हें ख्याति मिली। इसी तरह ये साहित्य जापान पहुँचा और वहाँ बेंजाइटन की पूजा होने लगी। उन्हें जल, विद्या, ज्ञान, समय और संगीत की देवी माना गया है। जापान में उन्हें ‘शीसीफुकूजिन’ के अंतर्गत रखा जाता है। अर्थात, ऐसे 7 देवी-देवता, जिनकी पूजा करना व्यक्ति को भाग्यशाली बनाता है। उन्हें बेंटेन ये बेन्ज़ाइटेन्नयो के नाम से भी जाना जाता है।

प्राचीन वैदिक साहित्य में वृत्र नामक असुर का जिक्र मिलता है, सरस्वती ने जिसका वध किया था। वृत्र को ‘अहि’ यानी साँप के रूप में चित्रित किया गया है। वहीं जापान में उसे ड्रैगन के रूप में जाना गया है। कई लोग मानते हैं कि 8वीं या 9वीं शताब्दी में सरस्वती को जापान में बेंजाइटन के रूप में पूजा जाने लगा। लेकिन, पाँचवीं-छठी शताब्दी में लिखी गई बौद्ध पुस्तकों में बेंजाइटन का जिक्र है।

बाद में ड्रैगनों का राजा अनवतप्त की बेटी के रूप में बेंजाइटन की कथा बताई गई है। ये दिखाता है कि काफ़ी पहले से उनकी पूजा होती रही है। बता दें कि अनवतप्त नामक एक झील की भी बौद्ध साहित्यों में ख़ूब चर्चा है, जिसके बारे में बताया गया है कि वो धरती के बीचोंबीच स्थित है।

माँ सरस्वती की तरह बेंजाइटन को भी संगीत और ज्ञान की देवी माना गया है। जिस तरह भारत में माँ सरस्वती का चित्रण सफ़ेद शरीर वाली देवी के रूप में किया गया है, जापान में भी बेंजाइटन की अधिकतर प्रतिमाएँ आपको एकदम सफ़ेद ही मिलेंगी।

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महाभारत में ‘बलात्कार’ की क्या सजा थी? इसे स्त्री की ‘इज्जत लुटने’ जैसी बेहूदी बात से किसने जोड़ा?

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मायावती के पति लगाते रहे गुहार, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को नहीं दिया रास्ता

शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के कारण रविवार (जनवरी 26, 2020) को एक महिला की जान पर बन आई। महिला का पति अपनी बीवी की जान बचाने के खातिर गिड़गिड़ाता रहा। लेकिन शाहीन बाग में बैठी प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस जाने का रास्ता नहीं दिया। नतीतजन महिला की हालत गंभीर होती गई। अंत में महिला को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जहाँ उसकी हालत देखकर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार की रात से ही 44 वर्षीय मायावती को साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। लेकिन रविवार को उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। साँस लेने में तकलीफ और दर्द देखकर मायावती के पति देवता प्रसाद मौर्य ने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया और ड्राइवर से जल्द से जल्द आने को कहा। लेकिन एंबुलेंस शाहीन बाग में प्रदर्शकारियों के कारण काफी देर अटकी रही।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मायावती के पति ने बताया कि अगर उनकी बीवी को कुछ भी हुआ, तो इसके लिए सिर्फ़ शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी जिम्मेदार होंगे। इनके कारण दिल्ली-नोएडा का रोड पूरा ब्लॉक हो रहा है। उनके अनुसार सिर्फ प्रदर्शनकारियों के कारण एंबुलेंस सही समय पर नहीं पहुँची। इसकी वजह से उनकी बीवी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। वो अपनी पत्नी को फौरन सफदरजंग अस्पताल लेकर जाना चाहते थे। लेकिन जब काफी समय तक एंबुलेंस नहीं आ पाई, तो उन्होंने एक खुद ऑटो किया और अपनी पत्नी को न्यू फ्रेंड कॉलोनी इलाके के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में मायावती की गंभीर हालत देखकर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

गौरतलब है कि शाहीन बाग पर चल रहे प्रदर्शन के कारण ये पहला मामला नहीं है, जहाँ किसी को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा हो। रोजाना वहाँ से गुजरने वाले लोगों के लिए ये दिक्कत पिछले एक महीने से आम हो गई हैं। सीएए विरोध के नाम पर कालिंदी कुंज रोड को ब्लॉक कर रखा है जो फरीदाबाद, नई दिल्ली और नोएडा को जोड़ती हैं।

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जिससे थी उम्मीदें, वो बेवफा निकला: ‘सरजी’ के गले का फाँस बना शाहीन बाग़, बिगड़ा चुनावी गणित

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CAA के ख़िलाफ़ एक शब्द नहीं पढ़ूँगा: विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान के साथ बदसलूकी

केरल विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान के साथ बदसलूकी हुई। राज्यपाल के ख़िलाफ़ सदन में जम कर नारेबाजी की गई। दरअसल, राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सूचित किया था कि वो अपने सम्बोधन का पैराग्राफ 18 नहीं पढ़ेंगे, क्योंकि उसमें सीएए के ख़िलाफ़ बातें लिखी हुई हैं। इस पैराग्राफ में नागरिकता संशोधन क़ानून को असंवैधानिक और भेदभाव करने वाला बताया गया है। ड्राफ्ट में सीएए के बारे में इस तरह की बातें लिखे जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई। बाद में राजभवन ने सीएम पिनाराई विजयन के स्पष्टीकरण को ख़ारिज कर दिया। राज्यपाल के सम्बोधन के ड्राफ्ट को मंत्रिपरिषद द्वारा तैयार किया गया गया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने राजभवन को सलाह दी थी कि राज्यपाल को अपना सम्बोधन बिना कोई बदलाव किए हुए पढ़ना चाहिए। राजभवन ने सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। राजभवन का आरोप है कि केरल मंत्रिपरिषद ने ‘विचारों’ को ‘नीतियों और योजनाओं’ के साथ मिक्स कर के पेश करने का प्रयास किया है और राज्यपाल इसके लिए राजी नहीं हैं। हालाँकि, मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल की आपत्तियों को नकार दिया।

बुधवार (जनवरी 29, 2020) को जब केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान बजट सेशन को सम्बोधित करने विधानसभा पहुँचे, तब विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस के विधायकों ने उन्हें सदन में घुसने से रोक दिया। पोस्टर-बैनर लेकर राज्यपाल का रास्ते रोकते हुए कॉन्ग्रेस विधायकों ने जम कर नारेबाजी की। बाद में सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन विधायकों को वहाँ से हटाया। कॉन्ग्रेस विधायकों का कहना था कि राज्यपाल ने लोकतंत्र का अपमान किया है क्योंकि विधानसभा ने सीएए के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास किया था। विधायकों ने सदन से वाकआउट किया।

हालाँकि, हंगामे के बीच ही राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान ने अपना सम्बोधन शुरू किया। नेता प्रतिपक्ष रमेश चेनिथाला ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि वो राज्यपाल को वापस भेजने के लिए एक प्रस्ताव पास करें, जिसमें राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाए वो आरिफ मोहम्मद ख़ान को वापस बुला लें। जब से आरिफ मोहम्मद ख़ान ने सीएए विरोधी प्रस्ताव की आलोचना की है, तब से केरल में पक्ष और विपक्ष, दोनों ही उनका एक सुर से विरोध कर रहे हैं।

राज्यपाल के सम्बोधन के दौरान उन्हें मार्शलों ने घेरे रखा ताकि कोई विधायक उन तक पहुँच कर बदसलूकी न करे। उन्हें मार्शलों की सुरक्षा के बीच मंच तक पहुँचाया गया। इस घटना को लेकर केरल भाजपा ने कॉन्ग्रेस और वामपंथियों की निंदा की है।

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