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ओवैसी के शपथ लेने के दौरान संसद में लगे ‘जय श्रीराम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे

संसद सत्र के दूसरे दिन (जून 18, 2019) ऑल इंडिया मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सांसद पद के लिए शपथ ली। खबरों के अनुसार मंगलवार को ओवैसी संसद में जैसे ही शपथ लेने के लिए उठे, वहाँ बैठे कुछ भाजपा नेताओं ने ‘जय श्रीराम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। भाजपा नेताओं को ‘जय श्रीराम’ बोलता देख ओवैसी ने उन्हें हाथों से इशारा कर ‘लगाओ-लगाओ’ कहा और शपथ लेने के बाद ओवैसी ने खुद ‘जय भीम’ और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए।

शपथ के दौरान हुई इस नारेबाजी पर ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये अच्छी बात है कि भाजपा को उन्हें देखकर राम की याद आई। उम्मीद है भाजपा वालों को संविधान और मुजफ्फरपुर में बच्चों की होती मौत भी याद रहेगी।

गौरतलब है इस बार शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुछ सांसद अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं। इस शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब के संगरूर से जहाँ आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए, वहीं भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने भी शपथ लेने के बाद ‘भारत माता की जय’ कहा। कॉन्ग्रेस सांसद सुरेश ने हिंदी में शपथ लेकर जहाँ सबको चौंका दिया वहीं डॉ. हर्षवर्धन ने संस्कृत में शपथ ली। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस दौरान अंग्रेजी में शपथ ली।

केरल के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता के बेटे पर रेप का आरोप, दुबई में बार डांसर थी महिला

केरल में सत्तारूढ़ मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा/CPM) के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। मुंबई पुलिस ने राज्य सचिव कोदियेरी बालाकृष्णन के बड़े बेटे बिनॉय कोदियेरी के खिलाफ मुंबई की एक महिला ने बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। महिला ने यह भी दावा किया है कि उन्हें बिनॉय कोदियेरी से 8 साल की एक बेटी भी है। बिनॉय और उनका भाई बिनीश पिछले साल दुबई में वित्तीय धोखाधड़ी के मामले दर्ज होने के बाद सुर्खियों में रहे थे।

33 वर्षीय इस महिला ने अपनी शिकायत में माकपा की केरल इकाई के सचिव कोदियेरी बालाकृष्णन के बेटे बिनोय विनोदिनी बालकृष्णन पर शादी का झाँसा देकर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, CPM नेता के बेटे ने इस आरोप को नकारते हुए इसे ब्लैकमेल का मामला करार दिया है। मूल रूप से बिहार की व मुंबई में रहने वाली पीड़िता की शिकायत के आधार पर बिनॉय के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और धमकाने के लिए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

पुलिस ने दर्ज प्राथमिकी के आधार पर बताया कि शिकायतकर्ता ने कहा कि उनका एक बच्चा भी है। ओशिवारा पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक शैलेश पासवान ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक दूसरे पुलिस अधिकारी ने शिकायत के हवाले से बताया कि महिला आरोपित को दुबई में मिली थी, जहाँ वह एक बार डांसर थी।

शिकायत के अनुसार, बिनॉय और वह 2008 से रिश्ते में हैं। तब वह दुबई में एक डांस बार में काम करती थी। उसने कहा कि बिनॉय ने उससे शादी करने का वादा किया था, लेकिन बार-बार मनाने के बावजूद उसे धोखा दिया। जब उसे पता चला कि बिनॉय पहले से ही शादीशुदा हैं, तो महिला ने पुलिस शिकायत दर्ज करने का फैसला किया। बिनॉय कोदियेरी ने हालाँकि यह स्वीकार किया है कि वह महिला को जानते हैं, लेकिन उन्होंने उसके साथ कोई भी गलत काम करने से इनकार किया है और कहा कि वह उन्हें ब्लैकमेल कर रही है।

बिनॉय ने इस मामले पर कहा, “6 महीने पहले मुझे उसकी ओर से एक पत्र मिला जिसमें उसने मुझसे 5 करोड़ रुपए माँगे। मैंने यह पत्र लिया और कन्नूर में पुलिस के आईजी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। यह ब्लैकमेलिंग है और मैं इस मामले से कानूनी रूप से निपटूँगा। जहाँ तक मेरे उसकी बेटी का पिता होने के आरोप का सवाल है, आज ऐसे तरीके हैं जिनके माध्यम से कोई वैज्ञानिक रूप से माता-पिता की जाँच कर सकता है और मैं इसके लिए तैयार हूँ।”

कड़ा और बड़ा फैसला: 15 कस्टम अफसर को जबरन रिटायरमेंट, अब तक 27 ‘दागदारों’ पर गिरी गाज

12 ‘दागदार’ व ‘सुस्त’ वरिष्ठ अधिकारियों को समय-पूर्व रिटायरमेंट देने के बाद एक और बार अकुशलता पर चाबुक चलाते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड के 15 बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। इन सभी अधिकारियों पर पद की नियमावली के खिलाफ काम करने का आरोप था। वित्त मंत्रालय ने इसके लिए नियम 56 का सहारा लिया है।

आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त आदि पदों के अधिकारी शामिल

ANI की खबर के मुताबिक नियम 56(जे) के अंतर्गत वित्त मंत्रालय ने जिन अधिकारियों को पदमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं, वह प्रमुख आयुक्त, आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के हैं। ANI ने यह खबर मन्त्रालय के अपने सूत्रों के हवाले से जारी की है।

इसके पूर्व भी आयकर विभाग के जिन 12 अफसरों को वित्त मंत्रालय ने जबरन रिटायर किया था, उन पर भी कार्रवाई इसी नियम के अंतर्गत की गई थी। ये सभी अधिकारी इनकम टैक्स विभाग में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जैसे महत्वपूर्ण और बड़े पदों पर तैनात थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन अधिकारियों में से कई पर भ्रष्टाचार, बेहिसाब संपत्ति का अर्जन और यौन शोषण जैसे आरोप लगे हुए थे

‘मैं हवाला के पैसे लेकर J&K में बवाल करवाती थी, उन्हीं पैसों से बेटे को 8 साल से मलेशिया में पढ़ा रही हूँ’

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की पूछताछ में जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी सहित गिरफ्तार अलगाववादी नेताओं ने 2017 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। आसिया अंद्राबी ने कबूल किया कि वो विदेशी स्रोतों से फंड लेती थी और इसके एवज में उसकी अलगाववादी संगठन दुख्तारन-ए-मिल्लत, घाटी में मुस्लिम महिलाओं से प्रदर्शन करवाती थी।

इतना ही नहीं, आसिया ने इस धन से अपने बेटे मोहम्मद बिन कासिम को मलेशिया के एक विश्वविद्यालय में दाखिला भी करवाया। एजेंसी ने कासिम के बैंक खातों के बारे में पता लगाने के लिए संबंधित विभाग से संपर्क किया और फिर एनआईए ने पूछताछ के दौरान आसिया अंद्राबी को 2011 से मलेशिया में पढ़ रहे उसके बेटे की पढ़ाई की फंडिंग से जुड़े कुछ सबूत भी दिखाए। उसके बेटे की पढ़ाई के लिए जहूर वटाली ने पैसे दिए थे, जिसे टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन दुख्तारन-ए-मिलत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को इस महीने की शुरुआत में दिल्ली की एक अदालत ने जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (जेकेएफएफपी) के शब्बीर शाह और मुस्लिम लीग के मसरत आलम के साथ 10 दिन के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया था।

एनआईए के अधिकारियों के मुताबिक, मुस्लीम लीग के नेता मसरत आलम ने पूछताछ में बताया कि हवाला एजेंटों के जरिए पाकिस्तान से हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद शाह गिलानी समेत अलगाववादी नेताओं को धन मिलता है। उसने बताया कि पाकिस्तान समर्थित एजेंट विदेश से धन एकत्र करके हवाला ऑपरेटर्स के जरिए जम्मू-कश्मीर भेजते हैं। यही कारण है कि गिलानी समेत अलगाववादी नेता जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान में विलय की वकालत करते हैं। मसरत आलम को घाटी में पत्थरबाजों और हिंसक आंदोलनों का पोस्टर बॉय कहा जाता है।

पुलवामा का बदला: हमले के लिए कार देने वाले आतंकी को एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने मार गिराया

सुरक्षाबलों ने आज अनंतनाग के बिजबेहारा एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के 2 आतंकियों को मार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। इनमें से एक आतंकी सज्जाद भट है। ये वही सज्जाद भट्ट है, जिसकी कार 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में इस्तेमाल हुई थी। आत्मघाती हमलावर आदिल डार को कार देने के बाद सज्जाद भट खुद भी जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हो गया था। इलाके में एक और आतंकी के छिपे होने की आशंका है।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 24 घंटे के अंदर दूसरा एनकाउंटर हुआ है, इसमें जैश के दो आतंकी ढेर हुए हैं।
करीब 7 बजे शुरू हुए एनकाउंटर में सेना के एक जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि दो जवान घायल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये एनकाउंटर अनंतनाग के बिजबेहरा के वाघोमा इलाके में हुआ है, जहाँ आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी। सुरक्षा बलों ने जब यहाँ सर्च ऑपरेशन चलाया तो आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सेना की जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकी ढेर हुए हैं। मारा गया आतंकी बीते सोमवार (जून 17, 2019) को पुलवामा में सेना की गाड़ी में हुए IED ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था। फिलहाल, सुरक्षाबलों की ओर से पुलवामा और अनंतनाग में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

आतंकवादियों ने सोमवार (जून 17, 2019) को पुलवामा जिले में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लगे एक वाहन के जरिए सेना के एक पेट्रोल पंप को भी निशाना बनाया था। विस्फोट में 9 जवान और 2 नागरिक घायल हो गए। उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

यह विस्फोट फरवरी में पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले की जगह से कुछ दूरी पर हुआ है, इसमें 40 जवान मारे गए थे।

‘भूरा बाल’ वालों ने बंगाल में ‘सवर्ण डॉक्टरों’ की पिटाई को ठहराया जायज: जाति है कि जाती नहीं

राष्ट्रीय जनता दल- एक ऐसी राजनीतिक पार्टी, जिसकी राजनीति की बुनियाद ही जातिवाद और विभिन्न जातियों बीच वैमनस्य पैदा करने पर टिकी हुई है। एक ऐसी पार्टी, जिसके वोट बैंक का आधार ही गुटबंदी है। एक ऐसी पार्टी, जिसके नेता जातिवादी राजनीति और जातिगत गुटबंदी में खुलेआम गर्व का अनुभव करते फिरते हैं। पार्टी के संस्थापक सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ख़ुद अपने कई बयानों में ‘माई की कृपा‘ का जिक्र करते रहे हैं, जिसका सीधा अर्थ है बिहार में मुस्लिमों और यादवों की संयुक्त गुटबंदी, जो राजद के वोटबैंक का आधार रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू ‘भूरा बाल साफ करो‘ का भी नारा देते रहे हैं, जिसका विश्लेषण सामान्य वर्ग में आने वाली बिहार की 4 प्रमुख जातियों के सफाए के रूप में किया गया।

2017 में भी यादव ने कहा था कि भूरा चूहा बिहार के तटबंधों को खाए जा रहा है। बार-बार ‘भूरा’ और ‘माई’ शब्दों का इस्तेमाल कर या फिर उसका सन्दर्भ दे कर जनता के एक विशेष वर्ग में अपनी बात कैसे पहुँचानी है, इस बात को लालू छात्र राजनीति के जीवन से ही समझते हैं। आज लालू जेल में अपने किए की सज़ा भुगत रहे हैं, उन पर तमाम भ्रष्टाचार के आरोप हैं। लेकिन, उनकी अनुपस्थिति में गर्त में जाती पार्टी राज्य में सबसे ज्यादा विधायक लेकर भी अस्तित्व के संकट से जूझती नज़र आ रही है। ताज़ा मामला यह बताता है कि लालू की पार्टी अभी भी उन्हीं की भूली-बिसरी राजनीतिक बिसात बिछा कर सत्ता में वापसी करना चाह रही है, या यूँ कहें कि सुर्खियाँ बटोर रही है।

बंगाल में एक मरीज की मृत्यु के बाद उसके परिजनों ने गुंडई की और डॉक्टरों की पिटाई की। मूकदर्शक बंगाल पुलिस की तो छोड़िए, उन गुंडों को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी समर्थन मिला। नतीजा यह हुआ कि डॉक्टरों ने देशव्यापी हड़ताल किया और अंततः ममता सरकार को उनकी माँगें माननी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शायद राजद की एक टीम ने बैठक की होगी कि कैसे इससे राजनीतिक मलाई निकाल कर उसे चूसा जाए। जहाँ सभी संगठनों ने डॉक्टरों के साथ हुए अन्याय को लेकर उनका साथ दिया, राजद ने इसे एक अलग मोड़ देने की कोशिश की। मुद्दा वही था, बस उनमें जाति घुसा कर कर अपनी वही पुरानी ‘भूरा बाल’ वाली राजनीति फिर से चमकाने की कोशिश में राजद ने एक ट्वीट किया, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं:

इस ट्वीट में दो-तीन ऐसी चीजें हैं, जिस पर ध्यान देनी ज़रूरी है, जैसे- ‘महज’, ‘सवर्ण’, ‘एक-दो’ और ‘200 दलित’। राष्ट्रीय जनता दल को लगता है कि अगर डॉक्टर सवर्ण है तो वह पिटने के लिए ही बना है, उसकी पिटाई होनी चाहिए। लेकिन हम इस पर बहस कर के राजद की कोशिशों को कामयाब नहीं होने दे सकते। हमारे बहस का मुद्दा है कि राजद को कैसे पता चला कि बंगाल में जिन डॉक्टरों की पिटाई हुई, वे सभी कथित सवर्ण थे? इसके क्या सबूत हैं? देश भर में डॉक्टरों ने विरोध-प्रदर्शन किया, अगर देखा जाए तो उसमें सभी जाति, धर्म, समाज और क्षेत्र के लोग थे, फिर इसमें सवर्ण कहाँ से आ गए?

एक मिनट को मान भी लें कि जिस डॉक्टर की पिटाई हुई वह सामान्य जाति का था, फिर भी यह मुद्दा है क्या? क्या सीमा पर वीरगति को प्राप्त हुए जवानों को जाति देख कर श्रद्धांजलि दी जाएगी? क्या पीड़ितों की संख्या भी ‘महज’ होती है? क्या अगर एक-दो डॉक्टरों की पिटाई होती है तो बाकियों को इन्तजार करना चाहिए 100 डॉक्टरों की पिटाई का, तभी वे सड़क पर निकलें? राजद से पूछा जाना चाहिए कि उनका ‘महज’ कितने तक के आँकड़ों के लिए प्रयोग किया जाता है? राजद ने डॉक्टरों की पिटाई को जस्टिफाई किया है, उसे सही ठहराया है। राजद ने साफ़ कर दिया है कि अगर कभी कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है और उसमें पीड़ित अगर सामान्य वर्ग का है तो उसे लेकर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।

अब राजद की इसी ट्वीट में एक और ग़लती। पार्टी ने मुजफ्फरपुर में मर रहे बच्चों की भी जाति ढूँढ़ ली। पार्टी का दावा है कि AES (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से मर रहे बच्चे दलित हैं। हाँ, इनमें से अधिकतर बच्चे ग़रीब, पिछड़े और मुख्यधारा से कटे परिवारों से आते हैं, लेकिन इनमें कौन ओबीसी है और कौन दलित है, कौन सामान्य वर्ग से है – इस बारे में बात करने का औचित्य ही क्या बनता है? मरते मासूमों की जाति खोजने वाली राजद बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी है। लेकिन बिहार में विपक्ष कहाँ है? 80 से भी अधिक विधायकों वाली पार्टी अगर गंभीरता दिखाई होती तो शायद नीतीश सरकार व स्थानीय प्रशासन की हिम्मत नहीं होती कि इस बीमारी को लेकर ढिलाई बरतते। लेकिन बिहार में विपक्ष संख्याबल में मुख्य सत्ताधारी पार्टी से ज्यादा मजबूत होने के बावजूद निकम्मी और निष्क्रिय है क्योंकि पार्टी हर घटना में जाति देखने में लगी है। पार्टी को तो इस पर बात करनी चाहिए कि मरते बच्चों को कैसे बचाया जाए, लेकिन जाति है कि जाती नहीं।

क्या विपक्ष की यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि अगर इस बीमारी से एक भी बच्चे की मौत होती है तो वह प्रशासन को कटघरे में खड़ा करे? दोषी नीतीश और भाजपा सरकार है, लेकिन क्या इस दोष में साझेदारी उस विपक्ष की नहीं है जिसने जनता द्वारा दिए गए संख्याबल का मजाक उड़ाते हुए मरते बच्चों के मामले में सरकार को घेरने में हद से ज्यादा देरी की। राजद के किसी भी नेता से जब पूछा जाता है कि 15 वर्षों तक राज्य में शासन चलाने के बावजूद पार्टी ने क्या किया, इस पर उनका जवाब होता है कि सामाजिक न्याय किया। सामाजिक न्याय दिखाई और सुनाई नहीं देने वाली चीज है। अगर वो कहते कि सड़कें बनाई गईं और बिजली पहुँचाई गई तो शायद इस पर बहस हो सकती थी कि कितना काम किया गया, लेकिन राजद का कथित ‘समाजिक न्याय’ पार्टी के लिए हर विवाद से बचने का माध्यम है।

राजद के इस ट्वीट से लगता है कि महीनों से RIMS में इलाजरत पार्टी सुप्रीमो भी शायद डॉक्टरों की जाति देख अपना चेक-अप करने देते हैं। पहले मार-मार के खोपड़ी फोड़ दी जाती है और तब उस डॉक्टर की जाति पूछते हैं, फिर उससे चेक-अप करवाते हैं। जहाँ राजद को उस डॉक्टर के स्वास्थ्य के बारे में चिंता करनी चाहिए थी, देश भर के डॉक्टरों की माँगें मानी गईं या नहीं, इस पर मनन करना चाहिए था, वहाँ पार्टी ने उस घटना को डाउनप्ले करने की ठानी और उसमें जाति घुसा कर राजनीतिक फसल काटने की कोशिश की। पत्रकारों से जूठी पत्तल उठवाने का दावा करने वाली राबड़ी देवी की पार्टी के मन में दुनिया के किसी भी प्रोफेशन के लिए कोई सम्मान है ही नहीं, ऐसा उसने साबित कर दिया है। पार्टी अभी भी ‘भूरा बाल साफ़ करो’ वाले युग में ही जी रही है, जिसकी पोल जनता पहले ही खोल चुकी है।

राजद ने कुछ नया नहीं किया है। संवेदनशील मुद्दों को जातिगत मोड़ देने की लालू की पुरानी शैली पर ही वे काम करते दिख रहे हैं। अपने पुराने दिनों में की गई हर रैली में ‘अहीर के घर पैदा होने’ की बता करने वाले लालू यादव की पार्टी अब भी ‘सवर्ण विरोध’ वाली मानसिकता से ही ग्रसित है। भले ही सच्चाई जो भी हो, पीड़ित पक्ष को सवर्ण साबित कर यह दिखाने की कोशिश है कि ये तो बने ही हैं पिटने के लिए, इसके पिटने का मजा लो। राजद जाति की बात करेगी, विरोधी बताएँगे कि डॉक्टर कौन सी जाति के थे और पार्टी का उद्देश्य पूरा हो जाएगा। लेकिन, असली सवाल यूँ ही जस का तस बना रहेगा कि डॉक्टर ही नहीं, किसी भी व्यक्ति को अगर प्रताड़ित किया जाता है तो इसमें उसकी जाति देख यह निर्णय लिया जाएगा क्या कि मामला कितना गंभीर है? या फिर प्रताड़ना का स्तर देख कर?

असली सवाल जस का तस बना रहेगा कि क्या देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हज़ारों डॉक्टरों को एक प्रोफेशन के विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा जाएगा या फिर पहले यह गणना कराई जाएगी कि इसमें कितने यादव हैं, कितने ब्राह्मण है और कितने दलित हैं? राजद शायद लालू की इसी राजनीति को लेकर आगे बढ़ती रही तो पार्टी का क्षय तय है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। रही बात डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर राजद के रवैये की तो इस पर पार्टी न ही कुछ बोले तो बेहतर है। हाल ही में नीतीश के साथ सत्ता के साझीदार होने के दौरान अपने पुत्र तेज प्रताप को स्वास्थ्य मंत्री बनवा कर लालू ने कैसे अस्पतालों व मेडिकल अधिकारियों के कार्यों में प्रबल हस्तक्षेप किया था, इसकी भी हम कभी चर्चा करेंगे।

सस्ती लोकप्रियता के लिए ब्रिटिश गायिका ने मोहन भागवत को कहा ‘आतंकी’, CM योगी को बताया ‘Rape-Man’

ब्रिटिश-भारतीय गायक तरन कौर ढिल्लो ने सरसंघचालक मोहन भगवत के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है और उन पर अनर्गल आरोप लगाए हैं। तरन कौर को उनके स्टेज नाम ‘हार्ड कौर’ के नाम से जाना जाता है और वह इसी नाम से रैप इंडस्ट्री में जानी जाती हैं। हार्ड कौर ने संघ के वर्तमान प्रमुख मोहन भागवत के बारे में लिखा है –

“भारत में हुए सारे आतंकी हमलों के लिए मोहन भागवत ही ज़िम्मेदार हैं, चाहे वो 26/11 का मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा हमला। भारत में सारी समस्याओं का चेहरा यही हैं। संवैधानिक जातिवाद एक अपराध है। गोडसे द्वारा गाँधीजी की हत्या के बाद तुम लोगों (RSS) को सरदार पटेल ने प्रतिबंधित किया था। तुम्हें सक्रिय रहने की अनुमति नहीं है। इतिहास में महात्मा बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणवादी जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाइयाँ लड़ी थीं। तुम एक राष्ट्रवादी नहीं हो, एक रेसिस्ट और हत्यारे हो।”

हार्ड कौर का घृणा फैलाने वाला अनर्गल फेसबुक पोस्ट

इसके बाद हार्ड कौर ने कमेंट में क्रोधित लोगों को ‘माँ-बहन’ की गालियाँ भी दी। उन्होंने अपने ख़िलाफ़ कमेंट कर रहे और पोस्ट का विरोध कर रहे लोगों के लिए आपत्तिजनक और अश्लील शब्द कहे। हार्ड कौर इससे पहले भी सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ व मोहन भागवत के ख़िलाफ़ जहर उगलती रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘Rape-man’ बताया था। उन्होंने लिखा था कि अगर आप अपनी माँ और बहनों का बलात्कार कराना चाहते हैं तो ‘ऑरेंज रेप मैन’ योगी को बुलाएँ।

हार्ड कौर ने आदित्यनाथ के लिए भी इस्तेमाल की आपत्तिजनक भाषा

लोगों का कहना है कि हार्ड कौर यह सब सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए कर रही हैं। उनके गाने नहीं चल रहे और उनके पोस्ट्स पर लाइक्स व कमेंट्स नहीं आ रहे थे, इसीलिए उन्होंने सरसंघचालक व यूपी के सीएम को गालियाँ देनी शुरू कर दी। इसके अलावा उनकी टाइमलाइन पर हिन्दुओं को लेकर भी जमकर अपशब्द कहे गए हैं। बदले में इस पोस्ट के बाद किसी ने हार्ड कौर के विकिपीडिया पेज को अपडेट कर लिख दिया था कि वह पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के लिए काम करती हैं।

हार्ड कौर ‘जॉनी गद्दार’, ‘बचना ऐ हसीनों’ और ‘सराइनोडु’ जैसी बड़ी फ़िल्मों के लिए गाना गा चुकी हैं और उन्होंने कई फ़िल्मों में अपने गानों में ‘स्पेशल अपीयरेंस’ भी दिया है। अक्सर विवादों में रहने वाली हार्ड कौर इससे पहले प्रसिद्ध गीतकार समीर अनजान से भी लड़ाई कर चुकी हैं।

कॉन्ग्रेस में भगदड़ जारी: 13वाँ तेलंगाना विधायक टूटा, भाजपा में शामिल

लोकसभा के नतीजे आने के बाद से कॉन्ग्रेस में जारी दलबदल थमने का नाम नहीं ले रही है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को ताज़ा झटका तेलंगाना राज्य से लगा है। दिसंबर में हुए विधानसभा निर्वाचन में केवल 18 विधायक पाने वाली कॉन्ग्रेस में से पहले ही 12 विधायक तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल हो चुके हैं। अब एक और विधायक ने भाजपा का दामन थामने की घोषणा की है।

मुनुगोडे के विधायक हैं केआर रेड्डी, ‘कॉन्ग्रेस का भविष्य नहीं’

भाजपा में शामिकल होने वाले कोमाटीरेड्डी राजगोपाल रेड्डी से पहले पार्टी छोड़ने वाले 12 विधायक टीआरएस में शामिल हुए थे। एक खेप में हुई टूट के चलते उन्हें दलबदल कानून के अंतर्गत अपनी विधानसभा सदस्यता भी नहीं गँवानी पड़ी। और अब रेड्डी के जाने के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के केवल 5 ही विधायक बचेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कल (सोमवार) को रेड्डी ने दिल्ली में भाजपा नेतृत्व से मुलाकात कर पार्टी में शामिल होने की बाद की है।

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए उन्होंने शनिवार को ही कहा था कि प्रदेश में कॉन्ग्रेस का कोई भविष्य नहीं है, और केवल भाजपा ही केसीआर के नेतृत्व वाली टीआरएस को चुनौती देने की क्षमता रखती है। उनका यह बयान इसके बावजूद है कि भाजपा गत विधानसभा में केवल एक विधायक पहुँचा पाने में कामयाब रही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए उन्हें मजबूत नेता और क्रांतिकारी फैसले लेने वाला बताया, वहीं कॉन्ग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस तेलंगाना और दिल्ली में लोगों का दिल जीत पाने में नाकाम रही है।

जिसे भाजपा में ले जाने की कोशिश की, वह कॉन्ग्रेस से सौदेबाजी पर उतरा

कोमाटीरेड्डी राजगोपाल रेड्डी न केवल खुद कॉन्ग्रेस छोड़ने की तैयारी में हैं, बल्कि उन्होंने एक और विधायक टी जयप्रकाश रेड्डी को भी साथ ले जाने की कोशिश की थी। संगारेड्डी से विधायक जयप्रकाश के मुताबिक उन्होंने अभी ‘मन नहीं बनाया है।’ बकौल जयप्रकाश, “यह सच है कि राजगोपाल रेड्डी ने रविवार को मुझसे बात की थी लेकिन मैं यह नहीं बताना चाहता कि हमारे बीच क्या बात हुई।” लेकिन साथ ही उन्होंने एक तरह से सौदेबाजी की मुद्रा अपनाते हुए खुद को प्रदेश कॉन्ग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की माँग सम्पुट के तौर पर लगा दी है। “मैं हाईकमांड से अनुरोध करता हूँ कि मुझे प्रदेश कॉन्ग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। मैं पार्टी की प्रतिक्रिया के आधार पर निर्णय लूँगा।”

प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति की अनुशासन समिति ने गाँधी भवन में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर रेड्डी के निष्कासन की माँग की है। पूर्व सांसद वी हनुमंत राव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि पार्टी की ओर से विधान परिषद सदस्यता, विधायकी और साँसदी पाने वाले राजगोपाल रेड्डी ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी से रेड्डी के परिवार को कई फायदे मिले हैं, इसके बावजूद वह पार्टी से असंतुष्ट हैं।

चुनाव में हार के बाद प्रियंका गाँधी ने किया निजी सचिव को बर्खास्त, खुद पर नहीं ली कोई जिम्मेदारी

चुनाव नतीजों में कॉन्ग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद प्रियंका गाँधी ने अपने निजी सचिव धीरज श्रीवास्तव को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक प्रियंका के पार्टी महासचिव बनने के कुछ हफ्तों बाद ही धीरज को उनका ओएसडी नियुक्त किया गया था। यूपीए सरकार में धीरज पीएमओ में एक महत्तवपूर्ण पद पर कार्यरत थे। साथ ही यूपीए सरकार के हर फैसले में उनकी एक अहम भूमिका हुआ करती थी। धीरज को जन नीतियों के लिए विशेषज्ञ भी माना जाता था।

रिपब्लिक इंडिया की खबर के अनुसार धीरज श्रीवास्तव सोनिया गाँधी और अशोक गहलोत के करीबी हुआ करते थे। प्रियंका गाँधी से पहले उन्होंने इन दोनों दिग्गज़ नेताओं को ओएसडी के रूप में सेवा भी प्रदान की थी। 2019 के चुनाव में उन्हें कॉन्ग्रेस ने जीत के मद्देनजर महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस यूपी में सिर्फ़ एक सीट जीत पाई। शायद यही कारण है कि दिग्गज नेताओं के करीबी होने के बावजूद भी उन्हें प्रियंका ने बर्खास्त कर दिया।

गौरतलब है कि प्रियंका गाँधी हाल ही में 13 जून को जनता का आभार प्रकट करने अपनी माँ और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी के साथ रायबरेली पहुँची थी। यहाँ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनके तेवर काफ़ी तल्ख नजर आए थे। इस दौरान रायबरेली में हुई जीत का पूरा श्रेय उन्होंने सोनिया गाँधी और रायबरेली की जनता को दिया था। साथ ही जिला संगठन और कामचोरी करने वाले कुछ नेताओं को सख्त संदेश भी दिया था। प्रियंका ने कहा था, “सच्चाई ये है कि आप सब में जिसने भी दिल से काम किया है, उसकी जानकारी आपको है। जिसने नहीं किया है, उसकी जानकारी मैं करूँगी।”

कॉन्ग्रेस महासचिव ने इस दौरान कहा था, ” मैंने हमेशा कहा है कि चुनाव संगठन लड़ाता है, लेकिन आज आपके सामने खड़े होकर कह रही हूँ कि आप सबने दिल से चुनाव नहीं लड़ा। यह संघर्ष का समय है। जो घबरा रहा है, जो समझौता करना चाहता है, जिसका दिल इस संघर्ष में नहीं है, उसके लिए रायबरेली कॉन्ग्रेस और यूपी की कॉन्ग्रेस में कोई जगह नहीं है। कॉन्ग्रेस में काम करना है, तो दिल से करना है और इसके लिए संघर्ष करना पड़ेगा। हार की समीक्षा अभी आगे भी जारी रहेगी। जल्दी ही फिर यहाँ आऊँगी और एक-एक करके कार्यकर्ता व नेता से बात करूँगी।”

अब ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या कॉन्ग्रेस और प्रियंका गाँधी चुनावों में मिली करारी हार का जिम्मा शीर्ष नेताओं को न देकर जमीनी कार्यकर्ताओं और छोटे नेता एवं अधिकारियों को दे रही हैं, क्योंकि एक ओर तो पार्टी हार का पूरा जिम्मा लेने वाले राहुल गाँधी का इस्तीफ़ा अस्वीकार कर देती है और उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए मजबूर करती है, जबकि दूसरी ओर पार्टी की महासचिव जमीनी कार्यकर्ताओं और अन्य अधिकारियों को हार के लिए दोषी ठहराती हैं और उन्हें उनके पद से बर्खास्त कर देती है।

सोनिया गाँधी को हिंदी से नफरत? हिंदी में शपथ लेने वाले कॉन्ग्रेसी MP को लगाई क्लास

लोकसभा भाषाई विविधता का गवाह बनी। दिन था – सोमवार यानी 17 जून 2019। इस दिन को नवनिर्वाचित सांसदों ने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में शपथ ली। अधिकतर सांसदों ने हिंदी में शपथ ली, वहीं दिल्ली के सांसद हर्षवर्धन, मीनाक्षी लेखी और पहली बार सांसद बने प्रताप चंद्र सारंगी ने संस्कृत में शपथ ली। इस बीच केरल से कॉन्ग्रेस के सदस्य कोडिकुन्निल सुरेश ने हिंदी में शपथ लेकर सबको चौंका दिया। सुरेश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद शपथ लेने वाले दूसरे सदस्य थे। केरल के सांसद के इस कदम का अधिकांंश सदस्यों ने मेज थपथपा कर स्वागत किया। इसमें खुद पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य भाजपा नेता शामिल थे। प्रधानमंत्री के शपथ लेने के बाद सुरेश ने उनको बधाई भी दी।

जब मोदी सरकार द्वारा अलग-अलग जगहों पर हिंदी को लागू करने के कदम का विभिन्न राज्यों द्वारा विरोध किया जा रहा है, ऐसे में सांसद कोडिरुन्निल द्वारा लोकसभा में हिंदी में शपथ लेने से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी खासा नाराज हो गईं। सोनिया ने इसके लिए सांसद को डांट भी लगाई कि उन्होंने मलयालम की जगह हिंदी में शपथ क्यों ली। इसके बाद सोनिया ने केरल के अन्य सांसदों को मलयालम या अंग्रेजी में शपथ लेने के लिए कहा। जानकारी के मुताबिक, केरल के कॉन्ग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन, वी के श्रीकान्तन भी हिंदी में शपथ लेने वाले थे, मगर सोनिया गाँधी की नाराजगी को देखते हुए उन्होंने अपना फैसला बदल लिया।

कोडिकुन्निल सुरेश ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सोनिया गाँधी ने उनके शपथ लेने के बाद उनसे पूछा था कि उन्होंने हिंदी में शपथ क्यों ली। सुरेश ने बताया कि पिछली बार उन्होंने अंग्रेजी में शपथ ली थी, इसलिए इस बार उन्होंने बदलाव के लिए हिंदी में शपथ ली। इससे पहले कोडिकुन्निल सुरेश 6 बार सांसद रह चुके हैं। कोडिकुन्निल सुरेश के बाद केरल के अन्य सांसदों ने अंग्रेजी या मलयालम में शपथ ली। केरल की एकमात्र महिला सांसद रेम्या हरिदास ने अंग्रेजी में शपथ ली।