राजनैतिक मुद्दे

राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी क्या दे पाएँगी PM मोदी को टक्कर: चुके हुए कॉन्ग्रेसी-विपक्षी नेताओं के सहारे तलाश रहीं है नई भूमिका

राष्ट्रीय राजनीति में जिस भूमिका की तलाश में ममता बनर्जी हैं, उसे पहले से ही अस्तित्व के संकट से दो-चार हो रहे अन्य दलों के चुक गए नेताओं के सहारे पाना बड़ी चुनौती होगी।

बतौर गवर्नर 3 साल में 5 राज्य, पहले 6 बार बदली सत्यपाल मलिक ने पार्टी: जिस कॉन्ग्रेस ने जेल में ठूँसा, उसी के बने...

सत्यपाल मलिक को 3 साल में बिहार, ओडिशा, जम्मू कश्मीर, गोवा और मेघालय का राज्यपाल बनाया गया। जानिए क्या रहा है उनका राजनीतिक इतिहास और चुनावों में प्रदर्शन।

47 शैक्षिक/स्वास्थ्य संस्थाएँ चलाने वाला गोरखनाथ मंदिर, जिसके महंत को नेहरू काल में हुई थी जेल: राम मंदिर आंदोलन में बड़ा रोल

गोरखनाथ मंदिर 47 शैक्षिक और स्वास्थ्य संस्थान चलाता है, जहाँ सभी जाति-मजहबों के ज़रूरतमंदों की मदद होती है। जानिए पूर्वांचल की राजनीति और योगी आदित्यनाथ सहित यहाँ के अन्य महंतों के चुनावी इतिहास के बारे में।

भगवाधारी महंत के कंधे पर देश के सबसे बड़े नेता का हाथ: लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश, जिसने ध्वस्त किए कई नैरेटिव

'पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को पैदल कर दिया' और जन्मदिन की बधाई नहीं दी' वाला नैरेटिव अब ध्वस्त हो गया है। देश के सबसे बड़े नेता का हाथ भगवाधारी महंत के कंधे पर है। लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश क्या कहता है?

कृषि कानूनों की वापसी: BJP को उनकी ही वेबसाइट पर मौजूद ये पुस्तक पढ़नी चाहिए, जानिए क्यों

एक साल पहले जब किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली के लिए निकले थे, तभी इस आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों की उपस्थिति का स्पष्ट रूप से पता चल गया था।

पाकिस्तान-चीन ने किसानों में फैलाया प्रोपेगेंडा, राहुल-अखिलेश-ममता-केजरीवाल… सबका दुष्प्रचार यथार्थ पर भारी

कृषि बिल विरोध आड़ में हिन्दू सिख भाईचारे को भी नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुईं। 26 जनवरी की लाल किले की घटना को इससे जोड़कर देखा जा सकता है।

इंदिरा का कानून, चिदंबरम ने लाया था विधेयक: BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ने से कॉन्ग्रेस बेचैन क्यों? तस्करी-घुसपैठ को नेताओं का संरक्षण

म्यांमार -बांग्लादेश से भारी तादात में घुसपैठ की घटनाएँ होती हैं। तस्करी और घुसपैठ को अनेक राजनेताओं और कई राज्य सरकारों का संरक्षण मिलता है।

सेक्युलर मुखौटे वाला खालिस्तानी आंदोलन, जहाँ भीड़तंत्र के सामने बेबस रही पुलिस: ‘ठेकेदारों’ से निपटने और कम्युनिकेशन पर सोचे केंद्र

कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लिया या संचार व्यवस्था कमजोर रही? भीड़तंत्र वाले 'ठेकेदारों' के हिंसक आंदोलन के बाद क्या करे केंद्र सरकार? आगे इस तरह की बलैकमेलिंग से निपटने का रास्ता क्या हो?

हिंसक भीड़ के सामने झुकी सरकार या सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम: आखिर PM मोदी ने क्यों वापस लिए कृषि कानून, जानिए अंदर...

कई लोग मान रहे हैं कि केंद्र सरकार सड़क पर उतर कर भीड़ और हिंसा के सहारे अपनी बात मनवाने की कोशिश करने वालों के सामने झुक गई है। अंदर के लोगों का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा के लिए ये अनिवार्य था।

‘वह PM बने रहने के काबिल नहीं’: इंदिरा गाँधी के लिए एक कॉन्ग्रेसी ने डायरी में लिखा, 9 महीने बाद नेहरू की बेटी ने...

इंदिरा ने पुराने कॉन्ग्रेस को फुस्स कर एक ऐसी कॉन्ग्रेस खड़ी कर ली जहाँ उनके चाटुकारों ने 'इण्डिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इण्डिया' कहने में भी संकोच नहीं किया।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें