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चपरासी बनने के लिए इंजीनियरों की लंबी लाइन, दे रहे हैं साइकल चलाने का टेस्ट: सबसे शिक्षित राज्य केरल में बेरोजगारी की मार

कुछ अभ्यर्थियों का ये भी कहना था कि बीटेक की डिग्री होने के बावजूद उन्हें 11,000 रुपए की नौकरी करनी पड़ती है। इतने वेतन में भी उनसे बहुत काम लिया जाता है। दरअसल, इंजीनियरिंग के साथ-साथ कई बड़े डिग्रीधारक अभ्यर्थी भी चपरासी पद पर आवेदन करने के लिए पहुँचे। अन्य स्नातकों की संख्या भी अधिक है।

देश के सबसे शिक्षित राज्य कहे जाने वाले केरल में राज्य सरकार की तरफ से चपरासी की वैकेंसी निकाली गई है। 23 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन वाली इस नौकरी के लिए न्यूनतम योग्यता कक्षा 7वीं कक्षा पास रखी गई है। इसके लिए साइकिल चलाने की दक्षता अनिवार्य है। शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को इस पद के आवेदन के लिए लम्बी लाइन देखी गई। इनमें कई अभ्यर्थियों के पास इंजीनियरिंग की भी डिग्री तक थी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, अब तक 101 उम्मीदवारों ने साइकल चलाने का टेस्ट पास कर लिया है। इनमें ऐसे अभ्यर्थी भी थे, जिनके पास बीटेक की डिग्री थी। एक इंजीनियरिंग डिग्रीधारक ने चपरासी की सरकारी नौकरी को सुरक्षित बताया। बकौल अभ्यर्थी, उस नौकरी में न तो लगातार वाहन चलाने का जोखिम है और न ही फ़ूड डिलीवरी जैसा कोई झंझट।

कुछ अभ्यर्थियों का ये भी कहना था कि बीटेक की डिग्री होने के बावजूद उन्हें 11,000 रुपए की नौकरी करनी पड़ती है। इतने वेतन में भी उनसे बहुत काम लिया जाता है। दरअसल, इंजीनियरिंग के साथ-साथ कई बड़े डिग्रीधारक अभ्यर्थी भी चपरासी पद पर आवेदन करने के लिए पहुँचे। अन्य स्नातकों की संख्या भी अधिक है। दरअसल, सरकारी नौैकरी को युवा सुरक्षित मान रहे हैं, जिसमें नौकरी जाने का खतरा नहीं रहता।

कोच्चि में कैफे चलाने वाले प्रशांत भी इस नौकरी को पाने के लिए उत्साहित हैं। प्रशांत को उम्मीद है कि उनको बिजली विभाग KSEB में नियुक्ति मिलेगी, जहाँ उन्हें लगभग 30 हजार रुपए तनख्वाह हर महीने मिलेगी। माना जा रहा है कि चपरासी पद के लिए निकाली गई इस नौकरी का मूल वेतन 23,000 रुपए महीना है।

हालाँकि, कुछ लोग इसकी भर्ती प्रक्रिया में अनिवार्य किए गए साइकल टेस्ट पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब साइकल परिवहन का साधन नहीं रहा, फिर भी इसका टेस्ट अनिवार्य किया जाना समझ से परे है। वहीं, कुछ लोग इस नौकरी के लिए दिव्यांगों और महिलाओं को अवसर न मिलने पर भी जवाब चाह रहे हैं और पुरानी नियमावली बदलने की माँग कर रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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