Friday, April 3, 2026
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रक्षा मंत्रालय की ₹4666 करोड़ की मेगा डिफेंस डील: 4 लाख स्वदेशी CQB कार्बाइन और ‘ब्लैक शार्क’ टॉरपीडो से लैस होगी सेना, जानें कैसे बढ़ेगी भारत की ताकत

यह डील सिर्फ हथियारों की खरीदारी नहीं है, बल्कि भारत के 'रक्षा क्षेत्र का सुपरपावर' बनने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है। अब हमारे जवान जमीन और समंदर दोनों जगह पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और ताकतवर होंगे।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 के जाते-जाते देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार (30 दिसंबर 2025) को सरकार ने कुल 4,666 करोड़ रुपए के दो बड़े रक्षा समझौतों पर मुहर लगाई। इस डील के तहत सेना और नौसेना को 4.25 लाख से ज्यादा नई ‘कार्बाइन’ बंदूकें और समंदर की गहराई में तबाही मचाने वाले 48 ‘हैवी वेट टॉरपीडो’ मिलेंगे।

यह कदम न केवल हमारी सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को भी हकीकत में बदलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अब हमारे जवान पुराने हथियारों को छोड़, आधुनिक स्वदेशी तकनीक से लैस होकर सरहदों की रक्षा करेंगे।

क्या हैं ये हथियार और कैसे करते हैं काम?

जब हम सेना की ताकत की बात करते हैं, तो ये दोनों हथियार युद्ध के मैदान में पासा पलटने का दम रखते हैं। सबसे पहले बात करते हैं CQB कार्बाइन की, जो असल में एक छोटी और बहुत हल्की ऑटोमेटिक बंदूक है। इसे खास तौर पर उन मौकों के लिए बनाया गया है जब दुश्मन बहुत करीब हो, जैसे कि किसी घर के अंदर छिपे आतंकियों से मुकाबला करना हो या घने जंगलों में आमने-सामने की मुठभेड़ हो।

इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बहुत छोटी होने के कारण तंग जगहों पर आसानी से घुमाई जा सकती है और पलक झपकते ही ढेर सारी गोलियाँ बरसा देती है, जिससे दुश्मन को संभलने या छिपने का मौका ही नहीं मिलता।

वहीं दूसरी ओर, हैवी वेट टॉरपीडो को आप आसान शब्दों में ‘पानी के नीचे चलने वाली मिसाइल’ कह सकते हैं। ये आकार में बहुत बड़े और बेहद शक्तिशाली होते हैं, जिन्हें हमारी पनडुब्बियों (Submarines) के जरिए समंदर की गहराई से छोड़ा जाता है।

इनका मुख्य काम पानी की सतह पर तैर रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों या पानी के नीचे छिपी उनकी पनडुब्बियों को ढूँढ निकालना और उन्हें सीधा निशाना बनाकर तबाह करना है। इनके आने से समंदर के अंदर हमारी मारक क्षमता और भी ज्यादा घातक हो जाएगी।

स्वदेशी गन से लैस होंगे जवान, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

भारतीय थल सेना और नौसेना को और भी आधुनिक बनाने के लिए सरकार 2,770 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस भारी-भरकम बजट से 4.25 लाख से भी ज्यादा नई कार्बाइन बंदूकें खरीदी जाएँगी।

सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरा सौदा विदेशी कंपनियों के बजाय भारत की अपनी कंपनियों, जैसे भारत फोर्ज और PLR सिस्टम्स (अडानी डिफेंस और इजरायल की कंपनी का साझा प्रयास) के साथ हुआ है। इससे देश का पैसा देश में ही रहेगा और हमारी सेना को बेहतरीन हथियार मिलेंगे।

इन नई बंदूकों के आने से हमारे जवानों को बहुत बड़ा फायदा होगा। दरअसल, अभी तक हमारे सैनिक पुराने समय के भारी-भरकम हथियारों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें ढोना और इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल होता था। लेकिन ये नई कार्बाइन वजन में काफी हल्की हैं और चलाने में भी बहुत आसान हैं, जिससे युद्ध या मुठभेड़ के समय जवान और भी फुर्ती से दुश्मन का मुकाबला कर सकेंगे।

यह पूरी डील ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इन बंदूकों का लगभग 60% हिस्सा भारत फोर्ज कंपनी खुद बनाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हमें हथियारों के लिए दूसरे देशों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा।

साथ ही, भारत में इनका निर्माण होने से हजारों लोगों के लिए नौकरी के नए रास्ते भी खुलेंगे। अगले 5 सालों के भीतर ये आधुनिक बंदूकें हमारे जांबाज सिपाहियों के हाथों में पहुँच जाएँगी, जिससे उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

दुश्मन के लिए काल बनेंगे ‘ब्लैक शार्क’

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को और भी घातक बनाने के लिए सरकार ने इटली की कंपनी (WASS) के साथ 1,896 करोड़ रुपए का एक बड़ा समझौता किया है। इस डील के जरिए भारत को 48 ‘ब्लैक शार्क’ टॉरपीडो मिलेंगे, जो अपनी रफ्तार और अचूक निशाने के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। ये टॉरपीडो हमारी नौसेना की उन 6 आधुनिक ‘कलवरी क्लास’ (स्कॉर्पीन) पनडुब्बियों में लगाए जाएँगे, जिन्हें पूरी शान से मुंबई के मझगाँव डॉक में तैयार किया गया है।

इन टॉरपीडो की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें दुनिया के सबसे आधुनिक सेंसर लगे हुए हैं, जो दुश्मन की लोकेशन को तुरंत पकड़ लेते हैं। इनकी रफ्तार इतनी तेज है कि एक बार दागे जाने के बाद दुश्मन को बचने या भागने का मौका भी नहीं मिलता।

इन टॉरपीडो की डिलीवरी साल 2028 से शुरू होगी और 2030 तक सभी 48 टॉरपीडो भारत पहुँच जाएँगे। इनके आने के बाद हिंद महासागर में भारत की पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी और दुश्मन की कोई भी पनडुब्बी हमारी सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाएगी।

क्यों खास है यह समझौता और भारत को क्या फायदे होंगे?

इस रक्षा सौदे से भारत को तीन बड़े और सीधे फायदे होने वाले हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि अब सेना से पुरानी तकनीक की छुट्टी हो जाएगी। हमारे जवान काफी समय से उन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे थे जो अब पुराने पड़ चुके थे। इस डील के बाद हमारे सैनिकों के पास दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक हथियार होंगे, जिससे युद्ध के मैदान में उनकी ताकत और सुरक्षा दोनों बढ़ जाएगी।

दूसरा बड़ा फायदा यह है कि इससे देश की प्राइवेट कंपनियों को बहुत मजबूती मिलेगी। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में हथियार बनाने का काम भारत की निजी कंपनियों को सौंपा गया है। इसका असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की छोटी-छोटी कंपनियों (MSMEs) को भी हथियारों के कल-पुर्जे बनाने का ऑर्डर मिलेगा। इससे न केवल स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण फायदा देश की आर्थिक मजबूती से जुड़ा है। रक्षा मंत्रालय ने इस साल (2025-26) में अब तक 1.82 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के हथियारों का सौदा किया है। इस भारी-भरकम रकम का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के पास जाने के बजाय भारत की अपनी कंपनियों की जेब में जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश का पैसा देश के अंदर ही रहेगा, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी और हम रक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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