पीएम के इस निर्णय के बाद तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों ने अंदेशा जताया कि जिस तरह से सोशल मीडिया पर हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को बदनाम किया जाता है, कहीं इसीलिए तो पीएम मोदी सोशल मीडिया को अलविदा नहीं कहने जा रहे हैं?
"दंगाइयों ने फिर से दुकान पर धावा बोल दिया। पहले तो दुकान में जमकर लूटपाट की ओर फिर देखते ही देखते उसे आग के हवाले कर दिया। इसी बीच पता चला कि गोदाम में रहने वाले हमारे कर्मचारी दिलबर नेगी के हाथ पैर काट कर उसे मार दिया गया।"
दंगाइयों ने उनसे पूछा, बता...ये पेट्रोल तुझपर छिड़कें या फिर गाड़ियों पर। दंगाइयों की बात सुनकर वर्कशॉप के मालिक ने उनके आगे बड़ी मिन्नतें की और अपनी जान को किसी तरह उनसे छुड़वाया। मगर, अपनी दुकान और वहाँ रखे सामान को वह उनसे न बचा सके। उनके सामने उपद्रवियों ने सर्विसिंग के लिए आई 15 गाड़ियो पर पेट्रोल डाला और सबको आग के हवाले कर दिया।
चाँद बाग़ में फूँक दी गई अमन ई-रिक्शा कम्पनी, आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की बिल्डिंग के ठीक 3-4 मकान बाद मौजूद थी। हिन्दुओं की इस दुकान, अमन रिक्शा कम्पनी को पहले ताहिर हुसैन के लोगों ने लूटा और फिर उसमें आग लगा दी।
"इन सबको पता था कि आगे क्या होने वाले वाला है। हमारे बराबर में एक मात्र मुस्लिम व्यक्ति का बाइक का शोरूम है। इलाके में हिंसा फैलने से पहले ही 26 फरवरी को सुबह 5 बजे ही उसने सभी बाइकों को शोरूम से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया। फिर खुद को पीड़ित दिखाने के लिए पहले तो शोरूम में तोड़फोड़ की और फिर...
माँ-बहन की गाली से लेकर वेश्या, सेक्स में भी हिंदू-मुस्लिम के एंगल को घुसेड़ कर फेसबुक पर एक महिला को तंग किया जाता है। जिसने ऐसा किया है, उनके नाम हैं - तनवीर और अरशद। ये दोनों इतने 'डरे हुए' हैं कि गालियों की बौछार के बाद किडनैप कर रेप की भी धमकी देते हैं।
अजित पवार खुलकर CAA के समर्थन में आ गए हैं, जबकि उनके चाचा शरद पवार इसका विरोध कर रहे। उद्धव CAA पर तो सहमत हैं लेकिन NRC-NPR पर इनकार कर रहे। अपने CM की लाइन से हटकर अजित पवार ने NRC और NPR के लिए भी समर्थन दे दिया है, वो भी बहुत ही राजनीतिक तरीके से!
"हज़ारों दंगाइयों की चपेट में आकर एक मजहबी दंगाई की भी मौत हो गई। लेकिन दंगाई उसे उठाकर अस्पताल नहीं ले गए बल्कि अपने घर ले गए। 24 घंटे तक घर में दंगाई युवक का शव रखा रहा। जैसे ही केजरीवाल सरकार ने दंगों में मारे गए लोगों को मुआवजा देने की घोषणा की, वैसे ही..."
आसपास के माहौल को शांत देख कर नितिन ने घर से बाहर पैर तो रखा, लेकिन दंगाइयों से अपनी जान बचा पाने में असफल रहा। उसे गोली लगी या पत्थर... किसी को कुछ नहीं पता। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया गया तब वो जिंदा था, मगर सिर में चोट इतनी गहरी थी कि वो 3-4 घंटे में ही जिंदगी की जंग हार गया।
अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के लिए दूध लेने निकले दिनेश को मजहबी भीड़ ने मार डाला। उनके भाई ने कहा कि पुलिस हिन्दुओं के पास से एक चाकू मिलने पर भी कार्रवाई करती है, जबकि मुस्लिम घर-घर में हथियार रखते हैं। उन्होंने एक-एक मुस्लिम के घरों की तलाशी लेने की माँग की।