पाकिस्तानी सरकार के पास 'अच्छे आतंकी' हैं, जो उनके भारत-विरोधी अजेंडे को सेना के शह पर अंजाम देती है जो सेना स्वयं खुल्लमखुल्ला नहीं कर सकती। वैसे ही एनडीटीवी जैसों के पास 'निष्पक्ष' पत्रकार हैं जो 'निजी राय' के नाम पर कॉन्ग्रेस के लिए भाजपा-विरोधी अजेंडा चलाते हैं।
"मैं मुंबई में शूटिंग का अपना अनुभव शेयर कर रही थी। इस दौरान मैंने जो शब्द इस्तेमाल किए वह एडल्ट कॉमेडी है, मैंने यह शब्द एक एडल्ट मज़ाक के तौर पर उस वक़्त के अपने फ्रस्टेशन (कुंठा) को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किए थे।"
राम मंदिर पर हद दर्जे की नकारात्मकता फैलाई गई। आपको जानना ज़रूरी है कि इस फ़ैसले को लेकर कैसी-कैसी वाहियात और डरावनी बातें कही गईं। इन 8 मीडिया पोर्टल्स को पहचान लीजिए और उन्होंने कैसे हिन्दुओं को बदनाम करने का प्रयास किया, यह भी देख लीजिए।
पाकिस्तान के समर्थन में प्रोपेगंडा NDTV के लिए नया नहीं है। हाल ही में पाकिस्तान ने एनडीटीवी की ही एक फुटेज को अपने भारत-विरोधी एजेंडा को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। निधि ने अपने चैनल के 'काम' को आगे बढ़ाते हुए...
राणा अयूब अक्सर अपने भारत-विरोधी रुख का प्रदर्शन करते रहती हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों बच्चों को गिरफ़्तार कर रखा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि सुरक्षा बलों ने एक 92 वर्षीय वृद्ध महिला पर हमला किया।
सागरिका घोष की ख़ुशी ट्विटर पर बल्लियों उछल कर बाहर आ रही थी। वे शायद वह समय भूल गईं जब उनके लिबरल गैंग ने इन्हीं उद्धव ठाकरे के पिता को हत्यारा, फासिस्ट और न जाने क्या-क्या कहा था। अभिसार शर्मा की तो ख़ुशी इतनी ज़्यादा थी शायद कि विह्वल होकर उनके मुखण्डल से शब्द ही नहीं फूटे। सो......
"मैं और एला उस दौरान बकिंग्घम पैलेस में महारानी के स्विमिंग पूल में नंगे तैरते थे। दोनों ने साथ में MDMA (एनर्जी और सेंसेशन बढ़ाने के लिए लिया जाने वाला एक तरह का ड्रग) भी लेते थे।" इसके बाद आतिश अपने लेख को थोड़ा एंगल देते हैं - भावनाओं का तड़का लगा कर। वो बताते हैं कि...
यह सोचे जाने की ज़रूरत है कि सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी के धर्म को गाली देने की हिम्मत कहाँ से आती है? ऐसी आस्था जिसने न मज़हबी हिंसा की, न जबरिया मतांतरण, उससे शोएब दानियाल जैसों की दुश्मनी क्या है?
"जब तुम अपने लोकतंत्र को अजायबघर (म्यूजियम) में तब्दील कर फुरसत पा लो तो दुनिया के और भी पुराने पार्लियामेंट हाउस को, जैसे वेस्टमिंस्टर को गौमूत्र का अध्य्यन करने वाला संस्थान बनाने या फिर यूएस कैपिटोल को वैदिक काल में उड्डयन संबंधी संग्रहालय बनाने में अपनी सेवा देने के लिए तैयार रहो।"
'द हिन्दू' लिखता है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में खुशियाँ आ गई हैं। उसी दिन उसका भाई 'बिजनेस लाइन' लिखता है कि खुशियाँ नहीं आईं हैं। ये दोनों 'घोड़ा-चतुर' खेल कर पाठकों को पागल बना रहे हैं। एक ही ख़बर को दो तरीके से पेश किया जा रहा है। मंदी है भी, नहीं भी। सब ठीक भी है, नहीं भी......