SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।
सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
चिदंबरम की भारत और विकास विरोधी मानसिकता उनके हर फैसले में साफ झलकती है। कभी उन्हें डिजिटल इंडिया से समस्या हुई कभी उन्होंने भगवा आतंक का नैरेटिव गढ़ा।
‘शक्ति की सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी के इस विजन में भारत की मैन्युफैक्चरिंग, खेती, AI, 6G, रक्षा, ग्रीन इकॉनमी और सॉफ्ट पावर को लेकर क्या लक्ष्य हैं, समझिए।
छात्रों को बिरयानी खिलाने वाला मोहम्मद जुनैद असल में ठरकी निकला! दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में की गई लिखित शिकायत ने जुनैद का असली चेहरा सबके सामने ला दिया है।
महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद एक ब्रिटिश नागरिक पर FIR दर्ज हुई है। वह पुणे के एक चर्च में यीशू के प्रति भक्ति दिखाते हुए हिन्दू देवी-देवताओं पर भ्रम फैला रहा था।
शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन के मुताबिक, पूरा घोटाला 1000 करोड रुपए का है। इसमें कुछ हिंदू और कथित बेनामी संपत्तियों को भी वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज करने का मामला भी शामिल है।
आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए 'बेहद जल्दीबाजी' में हैं।
न्यूजलॉन्ड्री के पूर्व इंटर्न का कहना है कि अभिनंदन सेखरी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते थे, लेकिन कोई विरोध नहीं कर पाता था। गालियाँ देना वहाँ आम बात थी।
लेफ्ट-लिबरल और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने UPI से लेन-देन पर झूठ फैलाने की साजिश रची और मीडिया के एक वर्ग ने भी आग में घी डालने का काम किया। जानें- क्या है पूरा सच