हैदर अली अपने इंस्टा पर गौमांस की वीडियोज को डालता है और हिंदुओं को अंधभक्त कहकर मीट देखने को कहता है। अपने चैनल पर उसने 1 महीने में 10 से ज्यादा ऐसी वीडियो डाली है।
योगी सरकार ने 9 सालों में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विकास के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पूरा ध्यान दिया है और नदियों के संरक्षण से लेकर जानवरों तक की चिंता की है।
बांग्लादेश ने भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने में अनिच्छा दिखाई है। ऐसे में भारतीय अधिकारियों के पास क्या विकल्प बचते हैं? घुसपैठियों के मामले वर्षों से लंबित हैं।
जब इंस्टा से चाइल्ड पोर्नोग्राफी हटाने के लिए भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी किया तो ब्लूमबर्ग ने इसे Regulatory Headache बताया, जिसे पढ़ अब लोग उन्हें गाली दे रहे हैं।
ब्राज़ील की चौंकाने वाली हार, नेमार की भावुक विदाई, अर्लिंग हालांड का ऐतिहासिक प्रदर्शन, इंग्लैंड की रोमांचक जीत और अब पुर्तगाल बनाम स्पेन के महामुकाबले से पहले जानिए फीफा विश्व कप के सबसे नाटकीय दिन की पूरी कहानी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर निर्माण के 5 साल बाद सपा को मंदिर-प्रबंधन की पारदर्शिता की याद क्यों नहीं आई? यह 'चिंता' अचानक तभी क्यों जागी जब 2027 का विधानसभा चुनाव सिर पर है?
केजरीवाल ने नितिन नवीन से पूछा कि आप कौन हैं? लेकिन केजरीवाल को उनकी यह टिप्पणी भारी पड़ गई क्योंकि दोनों की जीवनी देखें तो केजरीवाल का नितिन नवीन से यह सवाल पूछना बनता ही नहीं।
कर्नाटक में एसआईआर में गड़बड़ी को लेकर एनडीए नेताओं ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है। यहाँ बीएलओ घर-घर न जाकर मस्जिदों, शादी हॉल में अपना काम कर रहे हैं।
नितिन गडकरी ने बताया कि एथेनॉल को सीधे डीजल के साथ नहीं मिलाया जा सकता इसीलिए सरकार अब एथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाने की तकनीक पर काम कर रही है। यह सफल हो चुकी है।
मोरक्को की जीत ने सबको चौंका दिया है, और अब नज़रें ब्राजील-नॉर्वे के महामुकाबले पर हैं। फुटबॉल का जुनून इन दिनों सिर चढ़कर बोल रहा है। एक ओर मोरक्को ने कनाडा को हराकर अपनी धाक जमाई है, तो दूसरी ओर फ्रांस का सफर जारी है।
पंजाब कॉन्ग्रेस में कलह मची हुई है। राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद चन्नी-बाजवा और रंधावा गुट खुलकर बोल रहे हैं। चन्नी गुट ने तो 'काम करने से मना' कर दिया है।
300 स्पार्टनों की ऐतिहासिक लड़ाई से शुरू होकर अर्जेंटीना और काबो वर्दे के रोमांचक विश्व कप मुकाबले तक की यह कहानी बताती है कि इतिहास केवल जीतने वालों का नहीं, बल्कि अंत तक संघर्ष करने वालों का भी होता है।