Home Blog Page 3947

शिखा, तिलक, रुद्राक्ष, अगरबत्ती से होती है बॉलीवुड की कॉमेडी, तभी नेता भी कहते हैं- चोटीवाला राक्षस

क्या आपने किसी फिल्म में किसी मौलवी को कॉमेडी करते हुए देखा है? या फिर लोगों को किसी पादरी का अपमान करते हुए? क्या किसी फिल्म या वेब सीरीज में आपने देखा है कि किसी गुरुद्वारा का ग्रंथी गंदी-गंदी गालियाँ बक रहा हो? लेकिन हाँ, ब्राह्मणों को ऐसे करते हुए अनगिनत फिल्मों में दिखाया गया है। आने वाली फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ में भी दिखाया जाएगा, ‘छोटे पंडित’ के जरिए। तभी तो कुछ नेता ‘चोटीवाला राक्षस’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।

आपको ‘भूल भुलैया’ का ‘छोटे पंडित’ याद है? हाँ वही किरदार, जिसे राजपाल यादव ने निभाया था। एक ब्राह्मण, जिसका दिमाग हिला हुआ रहता है और वो अजीबोगरीब हरकतें कर भूत भगाने की चेष्टा करता है। फिर डर के मारे उसका लोटा नीचे जा गिरता है। इसके बाद ‘छोटे पंडित’ पागलों की तरह अजीबोगरीब बातें करता है। साइकिल को गधा कहता है। पानी से डरता है। उछलता-कूदता है।

‘छोटे पंडित’ के किरदार और वेशभूषा को देखिए। वो पूजा-पाठ कराने वाले ब्राह्मण की वेशभूषा में रहता है। शरीर के ऊपरी भाग में कोई कपड़ा नहीं, लेकिन तरह-तरह की मालाएँ लटकी हुई होती हैं। अपने बाल में ही उसने अगरबत्ती का निचला सिरा खोंसा होता है। अगरबत्ती जल रही होती है और उससे धुआँ निकल रहा होता है। शरीर के निचले हिस्से में धोती होती है। धोती को ऊपर उठा कर वो कॉमेडी करता है।

लेकिन, सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात है ‘छोटे पंडित’ की शिखा। उसके बालों के ऊपर से ऊँची उठी हुई शिखा को दिखाया गया है। जाहिर है, उसे कॉमेडी के लिए ही ऐसा डिजाइन किया गया था, क्योंकि बॉलीवुड के लिए शिखा हँसी-मजाक की चीज है, हास्यास्पद विषय-वस्तु है। फिल्म के पहले हिस्से में तो वो रामनामी गमछा डाले हुए भी दिखता है। बाद में उसे एकदम पागल और ‘हिला हुआ’ ही दिखाया गया है।

अब ‘भूल भूलैया 2’ आ रहा है। समय के साथ चीजें बदलती हैं, लेकिन ब्राह्मणों और हिन्दुओं के प्रति बॉलीवुड का भाव वही है। इसमें अक्षय कुमार की जगह युवा कार्तिक आर्यन मुख्य किरदार में हैं। पोस्टर में उन्हें भी हिन्दू साधु की ‘कॉमिक’ वेशभूषा में दिखाया गया था। अब उन्होंने इसी फिल्म से राजपाल यादव का लुक पोस्ट किया। इसमें कपड़े भले ही भगवा से सफ़ेद हो गए हों, लेकिन तिलक और शिखा ज़रूर है कॉमेडी के लिए।

साथ ही इस बार बाहों और गले में रुद्राक्ष की मालाएँ दिख रही हैं। कॉमेडी के लिए इन चीजों का मिश्रण बॉलीवुड वालों के लिए काफी अच्छा होता है। कार्तिक आर्यन ने होली के दिन इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा था, “छोटे पंडित और मेरी तरफ से हैप्पी होली। पानी से बच कर रहना इस साल।” ‘भूल भुलैया’ में ‘छोटे पंडित’ को बताया जाता है कि पानी ठीक नहीं है उसके लिए, इसीलिए वो पानी से डरता है।

जैसा कि स्पष्ट है, बॉलीवुड का कोई अभिनेता किसी मौलवी की वेशभूषा वाले व्यक्ति के साथ तस्वीर पोस्ट कर के ईद पर माँस से बच के रहने को नहीं लिखेगा। किसी पादरी की वेशभूषा में एक्टर के साथ तस्वीर पोस्ट कर के क्रिसमस पर कैन्डल से दूर रहने का ज्ञान भी नहीं देगा। होली पर पानी बचाने से लेकर रंगों का उपयोग न करने तक, ज्ञान ही ज्ञान दिया जाता है। वो भी एक ऐसे फिल्म के सेट से, जिसमें हिन्दू क्रियाकर्म और ब्राह्मणों का मजाक बनाया जाना है।

अभी आशुतोष राणा और सान्या मल्होत्रा की वेब सीरीज ‘Pagglait (पगलैट)’ भी आई है। उसमें आशुतोष राणा अपने बेटे की अस्थि लेकर अंतिम क्रियाकर्म के लिए किसी मंदिर में जाते हैं और पंडितों से डिस्काउंट की बात करते हैं। उसमें ब्राह्मणों को उनके कार के आसपास बड़ी संख्या में आकर उनसे क्रियाकर्म करवाने के लिए हंगामा करते हुए दिखाया गया है। ये सब तो बस ताज़ा उदाहरण हैं।

बस यहीं से ‘चोटीवाला राक्षस’ सेंटीमेंट जन्म लेता है। शिखा रखने वाले भाजपाई, विरोधी नेताओं के लिए राक्षस इसीलिए हो जाता है, क्योंकि बॉलीवुड में उसे चुगलखोर, धोखेबाज और जोकर बना कर ही दिखाया गया है। उसे राक्षस कह देने पर किसी की भावनाएँ आहत नहीं होंगी, ऐसा ग्रांटेड मान कर चला जाता है। तभी TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कह दिया कि ‘चोटीवाला राक्षस गोत्र’ से बेहतर है कि रोहिंग्या ही हो।

फराह खान, भारती सिंह और रवीना टंडन जैसी हस्तियों को बाइबिल के एक शब्द को लेकर कॉमेडी करने के बाद कई बार माफ़ी माँगनी पड़ी थी। सोशल मीडिया की माफी से काम नहीं चला तो सबने वेटिकन के पादरी के पास जाकर हस्तलिखित माफ़ी माँगी थी। इस्लाम पर टिप्पणियों से भारत में कमलेश तिवारी और फ़्रांस में सैमुअल पैटी जैसा हाल किया जाता है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। अब तो खालिस्तानी भी खासा डर का माहौल क्रिएट कर रहे हैं।

क्या ये ज़रूरी है कि अगर कोई धर्म सहिष्णु है, गाली सह कर भी चुप है और अपने देवी-देवताओं पर गलत टिप्पणियों के कारण आहत होकर भी उग्र नहीं होता है तो सब खुल कर यही सब करने लगें? ऐसी चीजों का आज कड़ा विरोध नहीं हुआ तो कल को ‘भूल भुलैया 3’ में भी शिखा-तिलक से कॉमेडी होगी और कोई नेता बाह्मणों को फिर से ‘राक्षस’ कहेगा।

रॉबर्ट वाड्रा कोरोना पॉजिटिव, उद्धव ठाकरे ने कहा- हालात नहीं सुधरे तो महाराष्ट्र में लग सकता है लॉकडाउन

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फिर से बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में देश में 81,000 नए मामले आए हैं। राज्यों की बात करें तो सबसे खराब स्थिति में महाराष्ट्र है, जहाँ शुक्रवार (02, अप्रैल) को लगभग 47,000 नए संक्रमित मिले हैं और 202 मरीजों की मृत्यु हुई है। महाराष्ट्र में अब पुनः लॉकडाउन की स्थिति निर्मित हो रही है।

महाराष्ट्र में बढ़ते संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का बयान भी सामने आया है। ठाकरे ने कहा है कि यदि महाराष्ट्र में संक्रमण की ऐसी ही स्थिति बनी रही तो वे लॉकडाउन की स्थिति इनकार नहीं करेंगे। इसका मतलब हुआ कि यदि महाराष्ट्र में आने वाले कुछ दिनों में संक्रमण की रफ्तार कम नहीं हुई तो एक बार फिर लॉकडाउन लग सकता है। महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से संबंधित खबरों पर उद्धव ने कहा कि यदि संक्रमण की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो अगले 15-20 दिनों में स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी आ जाएगी। मुंबई शहर में भी आठ हजार से अधिक नए संक्रमित मिले हैं और 20 मरीजों की मौत हुई है।

महाराष्ट्र के पुणे शहर में कल (3 अप्रैल) से मिनी लॉकडाउन प्रारंभ हो रहा है। अगले सात दिनों तक पुणे में रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, मॉल और धार्मिक स्थल पूरी तरह से बंद रहेंगे। साथ ही अगले सात दिनों के लिए पुणे में शाम को 6 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगा रहेगा। पिछले दो दिनों से पुणे में लगभग 8000 नए मरीज सामने आए हैं।

इस बीच कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा भी कोविड-19 से संक्रमित हो गए हैं। प्रियंका ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बताया कि कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने के कारण उन्हें अपना असम का चुनावी दौरा रद्द करना पड़ा। हालाँकि प्रियंका की रिपोर्ट निगेटिव आई है किन्तु उन्हें आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने ट्वीट करके अपने संक्रमित होने की जानकारी दी थी।

जवाब ममता बनर्जी को, निशाने पर हिंदू: इशारों में हिंदुओं को ‘बिकाऊ’ बता गए ओवैसी

बंगाल विधानसभा चुनाव में अब असदुद्दीन ओवैसी भी चर्चा में हैं। ममता बनर्जी को जवाब देते हुए ओवैसी ‘गोत्र’ के विषय में कुछ ऐसा कह गए, जिसे लेकर उनकी तीव्र आलोचना हो रही है। ममता ने ओवैसी के विषय में कहा कि भाजपा से पैसे लेकर हैदराबाद से एक आदमी मुस्लिम वोट काटने आया है। इसके जवाब में ओवैसी ने कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है।

कुछ समय से ममता बनर्जी लगातार अपने ऊपर लगाए जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को नकारने का प्रयास करती रही हैं। उन्हें अब अपनी ‘हिन्दू पहचान’ भी याद आ रही है। चुनावी लाभ लेने के इसी प्रयास में कूच बिहार में ममता बनर्जी ने असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि हैदराबाद से एक आदमी बंगाल आया है जिसने भाजपा से पैसे लिए हैं और वह बंगाल में मुस्लिम वोट काटने का काम करेगा।

ओवैसी ने ट्विटर के माध्यम से ममता बनर्जी को जवाब दिया। 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि ममता ने गुजरात में ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया था। ओवैसी ने पूछा कि क्या ममता ने यह मुफ्त में किया था, इसके पैसे लिए थे अथवा मंत्री पद के लिए चुप रहीं थी?   

ओवैसी ने आगे कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है। ओवैसी ने यह बात ममता बनर्जी के उस बयान के जवाब में कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि हालाँकि उनका गोत्र ‘शांडिल्य’ है किन्तु फिर भी एक मंदिर में पुजारी द्वारा गोत्र पूछे जाने पर उन्होंने ‘माँ-माटी-मानुष’ को ही अपना गोत्र बताया था। इस बयान पर भाजपा और ओवैसी दोनों ने ही ममता बनर्जी की आलोचना की। भाजपा ने जहाँ ममता को ‘सीजनल हिन्दू’ बताया वहीं ओवैसी ने कहा कि बंगाल में खुद को ज्यादा हिन्दू दिखाने की रेस लगी हुई है।

हालाँकि ओवैसी का यह बयान कि जिसका गोत्र नहीं होता उसे ‘खरीदा’ नहीं जा सकता है, कहीं अधिक सांप्रदायिक है, क्योंकि इसका मतलब यही है कि सभी हिन्दू (क्योंकि गोत्र तो हिंदुओं के ही होते हैं) खरीदे-बेचे जा सकते हैं, लेकिन मुसलमान नहीं। ओवैसी भले ही अन्य नेताओं पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हों, किन्तु उनका यह बयान बताता है कि वे किसी भी अन्य नेता से कहीं अधिक सांप्रदायिक हैं।

सोशल मीडिया में भी कई यूजर्स ने ओवैसी के इस बयान के बाद उनकी आलोचना की।

हिंदुओं के लिए ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM की घृणा किसी से भी छुपी नहीं है। कुछ ही दिनों पहले तेलंगाना के भैंसा में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के बाद पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें ओवैसी की पार्टी का एक काउन्सलर भी शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार AIMIM का एक नेता पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ है।

2020 में कर्नाटक के गुलबर्ग में एक सीएए विरोधी रैली में AIMIM के नेता वारिस पठान मुसलमानों से यह अपील करते पाए गए कि अब मुसलमानों के संगठित होने और ‘स्वतंत्रता’ प्राप्त करने का समय आ गया है। पठान ने यह भी कहा था कि भले ही हिन्दू संख्या मे 100 करोड़ हैं किन्तु 15 करोड़ मुसलमान उन पर भारी पड़ सकते हैं। इस रैली में AIMIM अध्यक्ष ओवैसी भी मौजूद थे।  

बिहार की जिस ‘लखटकिया खेती’ की चर्चा से बाजार गर्म, वह जमीन पर मिली ही नहीं: रिपोर्ट

बिहार के एक युवा किसान अमरेश सिंह पिछले कुछ दिनों से मीडिया में छाए हुए हैं। इसकी वजह विश्व की सबसे कीमती सब्जी की खेती है। अमरेश औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के करमडीह गाँव के निवासी हैं।

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अमरेश सिंह ने बड़ी मेहनत के बाद लखटकिया सब्जी की खेती की है। इसका नाम हॉप शूट्स है और कीमत लगभग 1 लाख रुपए प्रति किलो है। 

खबरों में यह भी कहा गया कि अमरेश ने दो माह पहले हॉप शूट्स का पौधा हिमाचल प्रदेश से मँगवाया था, जो अब धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। अगर वह कामयाब हुए तो बिहार के किसान उम्मीद से ज्यादा कमाई कर अपनी किस्मत पलट सकते हैं।

दैनिक जागरण ने इस लखटकिया खेती को लेकर मीडिया में किए जा रहे सभी दावों को खारिज किया। पोर्टल पर प्रकाशित एक्सक्लूसिव खबर के अनुसार जागरण को जमीनी तहकीकात में न तो कोई खेत मिला और न ही ऐसी कोई सब्जी।

पूछने पर अमरेश ने कहा कि उन्होंने ट्रॉयल के तौर पर खेती शुरू की थी। लेकिन साथी के बीमार पड़ जाने के चलते वह उसकी देखरेख नहीं कर सके और फसल सूख गई। अब वे फिर से खेती करेंगे।

जागरण का कहना है कि विभिन्न समाचार माध्यमों से बताया जा रहा था कि खेती 60 फीसद सफल रही। लेकिन वास्तविकता में उन्हें हॉपशूट्स कहीं नजर नहीं आया। अमरेश ने काले चावल और काले गेंहूँ उगाए थे, जिसकी खेती बिहार में कई जगह हो रही है।

ग्रामीणों ने जताई खेती से अनभिज्ञता

ग्रामीणों ने भी ऐसी किसी खेती को लेकर अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। परिजनों से बात करने पर उन्होंने अमरेश से फोन पर बात करवाई। जहाँ उन्होंने ये कह दिया कि वे नालंदा में खेती कर रहे हैं। जब नालंदा में जगह को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कुछ नहीं बताया। बाद में नालंदा में भी पता किया गया तो ऐसी कोई खेती की सूचना नहीं मिली।

जागरण ने पड़ताल के दौरान जब अमरेश से पूछताछ की तो उन्होंने अपने बीमार होने का हवाला दिया। वह बोले कि उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश के गाेंडा में 20 एकड़ जमीन लीज पर ली है, जिसमें 5 कट्ठे में हॉप शूट्स की खेती कर रहे हैं। इस खेती के लिए वाराणसी में डॉ. लाल से प्रशिक्षण लिया है।

अमरेश की बात की पुष्टि के लिए जब वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. जगदीश सिंह बात की गई, तो उन्‍होंने पूरी खबर को फर्जी बताया। वह बोले कि यहाँ न कोई डॉ. लाल हैं और न ही हॉप शूट्स नाम की दुनिया की सबसे महँगी सब्जी का बीज तैयार किया गया है।

फर्जी खेती का मामला निकला तो होगी कार्रवाई: उद्यान निदेशक

खबर के अनुसार, सहायक उद्यान निदेशक जितेंद्र कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि ऐसी कोई खेती औरंगाबाद में नहीं की गई है। उद्यान निदेशक ने कहा कि अमरेश के दावे की उच्चस्तरीय जाँच की जा रही है। अगर फर्जी खेती का मामला निकला तो कार्रवाई भी की जाएगी। जिला कृषि कार्यालय के अधिकारी इस पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

हॉप शूट्स क्या है?

हॉप शूट्स एक ऐसी सब्जी है जिसके फूलों का प्रयोग बीयर बनाने में किया जाता है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की दवाएँ बनती हैं। इसकी टहनी खाई जाती है और आचार भी तैयार किया जाता है। सर्वप्रथम इसकी खेती जर्मनी ने शुरू की थी। बाद में यूरोपीय देशों में इसकी पैदावार होने लगी।

बुलेटप्रूफ, हथियारों से लैस गुर्गे और सैटेलाइट फोन: मुख्तार अंसारी का एंबुलेंस कैसा, UP के पूर्व डीजीपी ने उठा दिया पर्दा

उत्तर प्रदेश का माफिया डॉन पिछले दिनों मोहाली की कोर्ट में व्हीलचेयर पर पेशी के लिए आया था। वह जिस एंबुलेंस से अदालत पहुँचा था, उसको लेकर विवाद है। इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने मुख्तार के एंबुलेंस को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार यह साधारण गाड़ी न होकर, एक चलते-फिरते किले जैसा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व डीजीपी ने बताया कि मुख्तार की एंबुलेंस बुलेटप्रूफ है और इसे चंडीगढ़ में बनवाया गया था। इसका ड्राइवर मुख्तार का खास गुर्गा सलीम है। सलीम मुहमदाबाद का रहने वाला है। उसका बड़ा भाई प्रिंस एक कुख्यात अपराधी था, जिसे कुछ समय पहले मुठभेड़ में मारा गिराया गया था।

पूर्व डीजीपी के मुताबिक इस एंबुलेंस में हथियार से लैस मुख्तार के गुंडे सवार रहते हैं। वह खुद सैटेलाइट फोन रखता है। पूर्व डीजीपी बृजलाल के अनुसार किसी अपराधी के पास बुलेटप्रूफ एंबुलेंस होने का यह पहला मामला है। उनके अनुसार यूपी में सपा शासनकाल में मुख्तार अंसारी जब जेल में बंद था, तब भी यह एंबुलेंस जेल के बाहर खड़ी रहती थी। इसके अलावा वह विधान भवन भी अपनी इसी एंबुलेंस में जाता था और उसके गुर्गे बड़ी-बड़ी गाड़ियों में काफिले की तरह साथ होते थे।

बता दें कि इससे पहले पूर्व डीजीपी ने मुख्तार अंसारी के मामले में पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस पर निशाना साधा था। उन्होंने बताया था कि ये सब सिर्फ़ और सिर्फ़ पैंतरेबाजी है। मुख्तार ये सब शुरू से करता रहा है और अंत तक करेगा। 

मुख्तार अंसारी की फर्जी एंबुलेंस

उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी इस समय पंजाब जेल में बंद है। पिछले दिनों वह मोहाली की कोर्ट में पेश हुआ था। लेकिन वहाँ उसे लेकर आई एंबुलेंस पर विवाद हो गया। दरअसल जिस एम्बुलेंस से पुलिस ने उसे मोहाली कोर्ट में पेश किया, उसका रजिस्ट्रेशन तो बाराबंकी जिले का है, लेकिन अब यह एंबुलेंस किसी अस्पताल से पंजीकृत ही नहीं है।

न्यूज 18 के अनुसार, जिस अस्पताल के नाम से एंबुलेंस नंबर UP41 AT 7171 का रजिस्ट्रेशन बताया जा रहा है, वह असल में है ही नहीं। इसकी मियाद साल 2015 में खत्म हो चुकी है। एंबुलेंस की फिटनेस भी साल 2017 में एक्सपायर हो चुकी है। बाराबंकी स्वास्थ्य विभाग के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भ्ज्ञीतर मुख्तार की कस्टडी यूपी पुलिस को सौंपने के निर्देश दिए थे।

वैसे मुख्तार पर सपा सरकार की मेहरबानी को बयाँ करने वाले बृजलाल पहले पुलिस अधिकारी नहीं है। हाल ही में योगी सरकार ने पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह पर दर्ज मुकदमा उठाया था। सिंह ने एक लाइटगन बरामद करने के बाद मुख्तार के खिलाफ पोटा के तहत कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया था कि इसके बाद उन पर तत्कालीन सरकार ने इतना दबाव बनाया कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके कुछ महीने बाद उन पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था।

अब यूपी के शामली से आया रोटी में थूक लगाने वाला वीडियो, पुलिस ने कहा- हिरासत में ले कर रहे पूछताछ

रोटी बनाने के दौरान थूक लगाने का एक और वीडियो वायरल हुआ है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के शामली का बताया जा रहा है। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब का है। वीडियो में एक व्यक्ति तंदूर में रोटी सेंकते समय उसमें थूक लगाता हुआ देखा जा सकता है।

शामली पुलिस ने इस वीडियो पर संज्ञान लिया है और ट्विटर पर बताया है कि आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके खिलाफ कानून उचित कार्रवाई की जाएगी।

थूक लगाकर रोटी बनाने का यह वीडियो शामली के फव्वारा चौक स्थित एक होटल का बताया जा रहा है। वीडियो में स्पष्ट तौर पर यह देखा जा सकता है कि सिर पर सफेद टोपी लगाया हुआ व्यक्ति रोटी पर थूक रहा है।

हाल के समय में इस तरह के कई वीडियो वायरल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ में थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल हुआ था। इस घटना में पुलिस ने नौशाद को गिरफ्तार किया था। उसने खुलासा किया था कि 10-15 वर्षों से वह शादी समारोहों में यह हरकत कर रहा था। इसके अलावा दिल्ली में भी तंदूरी रोटी पर थूक लगाने का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मोहम्मद इब्राहिम और सबी अनवर को गिरफ्तार किया गया था। खाने पर थूकने की एक और घटना में गाजियाबाद के मोहसिन को गिरफ्तार किया गया था जो एक मांगलिक कार्यक्रम में रोटी बनाते समय उसमें थूक रहा था।

IMA अध्यक्ष को ‘सेकुलर’ बनाने आया वायर-स्क्रॉल का कंट्रीब्यूटर, अस्पतालों को ‘धर्मांतरण का अड्डा’ बनाना चाहते हैं जयलाल

वामपंथी मीडिया पोर्टल द वायर, द स्क्रॉल में बतौर लेखक योगदान देने वाले किरण कुंभार ने IMA अध्यक्ष डॉ. जेए जयलाल के समर्थन में आवाज उठाई है। ऑपइंडिया द्वारा ईसाई धर्मांतरण के मुद्दे को प्रकाश में लाने के कुछ ही दिन बाद किरण ने डॉ. जयलाल का समर्थन किया। पिछले दिनों हमने आपको बताया था कि कैसे  IMA अध्यक्ष डॉ. जयलाल धर्मांतरण के लिए अस्पतालों को एक मंच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

अपने ट्वीट में कुंभार ने जयलाल की मंशा को सामान्य दिखाने का प्रयास किया। उनके अनुसार ये सब हिंदुओं का पागलपन है जो IMA अध्यक्ष पर आरोप लगा रहे हैं कि वो डॉक्टरों, छात्रों और मरीजों को ईसाई बनाना चाहते हैं।

साभार: ट्विटर

कुंभार ने कहा कि वह डॉ. जयलाल के साक्षात्कार से सहमत नहीं हैं। उसे देख उन्हें ये भी नहीं लगता है कि वे मेडिकल संस्थानों में धर्मांतरण करवाना चाहते हैं। किरण के अनुसार, ये सब सिर्फ़ भ्रम है।

साभार: ट्विटर

इसके बाद कुंभारर ने पिछले 90 सालों में मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष बने सभी लोगों की सूची शेयर की, सिर्फ़ ये बताने के लिए इतने समय तक काउंसिल में हिंदुओं का वर्चस्व रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. जयलाल के विश्वास को गलत बताया जा रहा है, क्योंकि हिंदू बहुसंख्यक देश में आईएमए हमेशा से एक हिंदू बहुल संघ रहा।

किरण की सारी बहस सिर्फ़ डॉ. जयलाल पर लग रहे इल्जामों को खारिज करने के लिए है। जाहिर है कि इन सब कुतर्कों से ये पता चलता है कि उनका मानना है कि चूँकि लंबे समय से IMA में हिंदू अध्यक्ष रहे, इसलिए अब जब कोई ईसाई चुना गया है तो उसका अन्य लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाना बिलकुल जायज है। हालाँकि, वामपंथी लेखक शायद भूल गए हैं कि जिस संस्था में तमाम हिंदू अध्यक्ष रहे, वहाँ उन सबने कभी वर्तमान अध्यक्ष की तरह गैर हिंदुओं को हिंदू बनाने का प्रयास नहीं किया, जैसा कि डॉ. जयलाल करने की कोशिश कर रहे हैं। 

बता दें कि हिंदुओं के बहुसंख्यक होने और उनपर धर्मांतरण का कोई खतरा न होने वाले दावे करके कई बार इस्लामवादी भी हिंदुओं की चिंता को बेवजह बताने का प्रयास करते रहे हैं और किसी भी रूप में ये नहीं स्वीकारते कि उनमें कट्टरपंथ कितनी तेजी से फैल रहा है, जिसका एक मात्र उद्देश्य या तो धर्मांतरण करवाना है या फिर गैर मजहबी लोगों को बर्बाद करना।

सबसे मुख्य बात ये है कि हिंदू कभी इस बात में यकीन नहीं करते कि उन्हें किसी का धर्मांतरण करवाना है। ये सब इब्राहिम विश्वास रखने वाले ही करते हैं। ये लोग धर्मांतरण को अपना धार्मिक कर्तव्य मानते हैं और दूसरे धर्म के लोगों को उसी में रचाने-बसाने की सोचते हैं।

कुंभार के सभी तर्क निराधार हैं, जो स्पष्ट बताते हैं कि वह सिर्फ़ जयलाल का समर्थन करना चाहते हैं। द वायर के लेखक दावा करते हैं कि आईएमए के अध्यक्ष को ईसाई धर्म में झुकाव होने के लिए नहीं, बल्कि उनका आयुर्वेद को लेकर जो आलोचानात्मक नजरिया था उसके लिए टारगेट किया गया है।

अपने ट्वीट में किरण, IMA अध्यक्ष का बचाव करने के लिए उस भाषा का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकते जिसे इस्लामी आतंकी हिंदू घृणा जाहिर करने के लिए बोलते रहे हैं। किरण, हिंदुओं को IMA अध्यक्ष की बात (धर्मांतरण की) दोहराने के लिए दोषी मानते हैं और गोबर शब्द का इस्तेमाल कर बताते हैं कि कैसे वह भीतर ही भीतर हिंदुओं से घृणा करते हैं।

इंटरव्यू में डॉ. जयलाल ने दिए थे ईसाई धर्मांतरण को लेकर बयान

हाल ही में ‘Haggai इंटरनेशनल’ पर डॉ. जयलाल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कोरोना वायरस संक्रमण मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और रोगियों को ईसाई में धर्मांतरित करने का उनके लिए एक अवसर बनकर आया है।

उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि IMA ‘जीसस क्राइस्ट के प्यार’ को साझा करे और सभी को भरोसा दिलाए कि जीसस ही व्यक्तिगत रूप से रक्षा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि चर्चों और ईसाई दयाभाव के कारण ही विश्व में पिछली कई महामारियों और रोगों का इलाज आया।

उन्होंने ईसाई संस्थाओं में भी गॉस्पेल (ईसाई सन्देश) को साझा करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने IMA में अपने अध्यक्षीय भाषण में भी कहा था कि आज जो भी हैं वह ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर जीसस क्राइस्ट’ का गिफ्ट है और कल जो होंगे, वे भी उनका ही गिफ्ट होगा।

उन्होंने इस दौरान मदर टेरेसा के उद्धरण का जिक्र किया, जिन पर पहले से ही ईसाई धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। ‘क्रिश्चियन टुडे’ के इंटरव्यू में भी उन्होंने बताया कि कैसे महामारी के बावजूद ईसाई मजहब आगे बढ़ रहा है।

वे कोरोना के प्रकोप के कम होने के लिए भी जीसस को ही क्रेडिट देते हैं। उन्होंने कहा था कि जीसस की कृपा से ही लोग सुरक्षित हैं और इस महामारी में उन्होंने ही सभी की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि फैमिली प्रेयर्स और नाइट प्रेयर्स की मदद से ईसाई अब स्वर्ग की अनुभूति कर रहे हैं, न कि भौतिकतावादी दुनिया की। इस तरह से भारत के सबसे बड़े मेडिकल संगठन के मुखिया के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन या टीकाकरण का कोरोना से लड़ने में कोई रोल नहीं है।

मालूम हो कि डॉ, जयलाल सिर्फ़ ईसाई धर्मांतरण करवाना ही नहीं चाहते, बल्कि वे आयुर्वेद की आलोचना भी मुखर होकर करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इसलिए आयुर्वेद में विश्वास करती है, क्योंकि उसके सांस्कृतिक मूल्य और पारंपरिक आस्था हिंदुत्व में है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 3-4 वर्षों से आधुनिक मेडिसिन की जगह आयुर्वेद को लाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी और योग इत्यादि की जड़ें संस्कृत में हैं, जो हिंदुत्व की भाषा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन सबके जरिए सरकार लोगों के दिलो-दिमाग में संस्कृत भाषा को घुसाना चाहती है। डॉक्टर जयलाल ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के जरिए देश भर में सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करवाए थे। उन्होंने हिन्दुओं में काफी देवताओं के होने की बात करते हुए एक बार कहा था कि उन्हें अब जीसस और मुहम्मद को ईश्वर मान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये हर ईसाई का कर्तव्य है कि वे बाइबिल का संदेश सभी तक पहुँचाए।

राजस्थान में हमला, बिहार में केस: राकेश टिकैत से यूपी के किसान ने कहा- पैसा ले ममता बनर्जी का कर रहे प्रचार

कृषि कानूनों के विरोध के नाम देश के अलग-अलग राज्यों में घूम रहे भारतीय किसान यूनियमन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत के खिलाफ लोगों का गुस्सा बाहर आने लगा है। आज (अप्रैल 2, 2021) राजस्थान में एक सभा के लिए जाते वक्त उनके काफिले पर हमला हुआ। वहीं बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अधिवक्ता ने भड़काऊ बयान को लेकर उनके खिलाफ केस किया है। इस बीच एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें उत्तर प्रदेश का एक किसान टिकैत पर पैसा लेकर ममता बनर्जी का प्रचार करने का आरोप लगा रहा है।

काफिले पर हमला

राजस्थान के अलवर के हरसौरा में सभा को संबोधित करने के लिए टिकैत जा रहे थे। इसी दौरान ततारपुर में नाराज भीड़ ने टिकैत के काफिले पर पथराव करते हुए उनकी कार के शीशे तोड़ दिए। उन पर स्याही भी फेंकने की कोशिश हुई।

टिकैत ने हमले में क्षतिग्रस्त गाड़ी का वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए भाजपा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, “राजस्थान के अलवर जिले के ततारपुर चौराहा, बानसूर रोड़ पर भाजपा के गुंडों द्वारा जानलेवा पर हमला किए गए, ये लोकतंत्र के हत्या की तस्वीरें हैं।”

साझा किए गए वीडियो में सुना जा सकता है कि वीडियो बनाने वाला भाजपा नेताओं के साथ प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहा है कि राकेश टिकैत की गाड़ी पर उनके द्वारा जानलेवा हमला किया गया है। गाड़ी पर गोली भी चलाई गई है। पत्थरबाजी की गई है। स्याही फेंकी गई है।

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान विरोधी, जनमानस विरोधी बताते हुए कहा गया कि वह देश को बेचने पर तुले हुए हैं। उन्होंने राकेश टिकैत पर गोली चलवाई है। स्याही फिंकवाई है। इसलिए वह सब रोड जाम करके बैठे हैं जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक वह ऐसे ही बैठे रहेंगे।

मुजफ्फरपुर में केस दर्ज

राजस्थान में राकेश टिकैत के काफिले पर जहाँ हमला हुआ है, वहीं मुजफ्फरपुर कोर्ट में उनके खिलाफ गुरुवार को केस दायर किया गया है। वकील सुधीर कुमार ओझा ने इसे दायर कराते हुए आरोप लगाया कि टिकैत ने खुलेआम धमकी भरे बयान दिए हैं, जिससे अराजकता फैल जाएगी। 

शिकायतकर्ता ने कहा कि दौसा राजस्थान में आयोजित महापंचायत में टिकैत ने खुलेआम धमकी भरा बयान देते हुए कहा था कि अगर सरकार किसान आंदोलन की बात नहीं सुनती है तो देश के 16 राज्यों में विद्युत कनेक्शन काट दिया जाएगा।

सुधीर कुमार ने शिकायत में कहा कि यदि ऐसा कुछ भी होता है तो 16 राज्यों में अँधेरा छा जाएगा और देश की व्यवस्था चरमरा जाएगी। इससे देशवासियों की निजी जिंदगियों पर भी असर पड़ेगा। अराजकता भी फैलेगी और उपद्रव भी बढ़ेगा। ऐसे बयान राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

मालूम हो कि मुजफ्फरपुर में दायर शिकायत पर 8 अप्रैल को सुनवाई होगी।

‘ममता बनर्जी के प्रचारक हो’

बीकेयू नेता राकेश टिकैत पर हो रहे हमले और केसों के बीच उनकी एक ऑडियो भी सामने आई है। इसमें यूपी के मोदीनगर का एक किसान उनसे सवाल कर रहा है कि क्या आप पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के प्रचारक हैं। ऑपइंडिया इस ऑडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता है।

ऑडियो में किसान ने न केवल राकेश टिकैत को ममता बनर्जी का प्रचारक कहा, बल्कि ये भी आरोप लगाया कि वह मोटी रकम लेकर किसानों का साथ छोड़ चुनावी दोरे कर रहे हैं। इस ऑडियो में राकेश टिकैत सफाई दे रहे हैं और आखिर में ‘बकवास मत करो’ कहकर बात खत्म कर देते हैं।

दोबारा मतदान, 4 अधिकारी सस्पेंड, लापता मतदानकर्मी भी मिला: असम में BJP नेता की कार में EVM की गुत्थी सुलझी

असम में गुरुवार (1 अप्रैल 2021) को दूसरे चरण का मतदान हुआ था। मतदान समाप्त होने के बाद एक वीडियो सामने आया। इसमें एक प्राइवेट कार में मतदानकर्मी EVM लेकर जाते देखे गए। इस वीडियो को लेकर जारी विवाद पर विराम लगाते हुए चुनाव आयोग ने चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही दोबारा मतदान के आदेश दिए हैं।

दरअसल जिस कार से ईवीएम ले जाया जा रहा था वह पथराखंडी से बीजेपी विधायक कृष्णेंदु पॉल की थी। यह उनकी पत्नी मधुमिता पॉल के नाम है। कार को करीमगंज में स्थानीय लोगों ने रोक लिया था और कथित तौर पर मतदान अधिकारियों को पीटा भी। इनका आरोप था कि छेड़छाड़ के इरादे से बीजेपी नेता की कार से ईवीएम को ले जाया जा रहा था। हमले में कार बुरी तरह से छतिग्रस्त हो गई है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा पर कॉन्ग्रेस ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप मढ़ना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कार को करीमगंज के पास लोगों ने रोक लिया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बैकग्राउंड में एक व्यक्ति यह कहते हुए सुना जा सकता है, “ओइ देखुं कृष्णेंदु पाल एर गदित इवा पौवा गसा (कृष्णेंदु पॉल की कार में ईवीएम पाए गए हैं)”। कार रोकने के बाद उसमें सवार सभी लोगों को जबरदस्ती बाहर निकाला गया। जैसे ही इन लोगों दोबारा से कार में घुसने की कोशिश की तो एक स्थानीय ने चेतावनी देते हुए कहा, “गादी जागत ठाक्टो (कार अपनी जगह पर ही रुकेगी)।” कार का नंबर AS10B0022 था।

वीडियो वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए ईवीएम से छेड़छाड़ का दुष्प्रचार शुरू कर दिया। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “हर बार के चुनाव में ऐसे वीडियो सामने आते हैं, जिसमें निजी गाड़ियाँ EVM ले जाते हुए पकड़ी जाती हैं। ये गाड़ियाँ अक्सर भाजपा नेताओं अथवा उनके सहयोगियों की होती हैं। ऐसे वीडियो हमेशा एक घटना के रूप में सामने आते हैं और फिर उन्हें झूठा बताकर खारिज कर दिया जाता है। बीजेपी अपने मीडिया तंत्र के जरिए उन्हीं लोगों पर आरोप लगा देती है, जिन्होंने इसका खुलासा किया होता है।”

आगे उन्होंने लिखा, “कई तथ्य देने के बाद भी चुनाव आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। आयोग को इन सभी शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए। सभी राष्ट्रीय दलों को भी गंभीरता से EVM की उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।”

घटना पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट की स्थिति

आरोपों की झड़ी लगने के बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग ने तथ्यों के साथ अपनी रिपोर्ट जारी की। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदान दल, जिसमें एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान कर्मी थे, रतबारी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत नं 149- इंदिरा एमवी स्कूल के मतदान केंद्र पर मतदान पूरा होने के बाद अपने काफिले के साथ लौट रहे थे। उनकी सुरक्षा के लिए एक कॉन्स्टेबल और एक होमगार्ड को लगाया गया था। बारिश होने के कारण सड़कों पर काफी कीचड़ फैल गया था। चुनाव खत्म होने के बाद लगभग 1300 गाड़ियाँ राष्ट्रीय राजमार्ग- 8 से लौट रहीं थीं, जिस कारण काफी भीड़ हो गई थी।

इसी दौरान अचानक एक मोड़ पर बूथ नंबर 149 से पोलिंग टीम को लेकर जा रही गाड़ी खराब हो गई। उस दौरान रात करीब 9 बजे थे और गाड़ी नीलम बाजार पहुँचने वाली थी। चुनाव आयोग ने आगे कहा, “भारी ट्रैफिक और खराब मौसम के कारण यह पार्टी अपने काफिले से पिछड़ गई। वाहन खराब होने के बाद पोलिंग पार्टी सेक्टर अधिकारी अजय सूत्रधर को यथास्थिति से अवगत कराया गया। जब सेक्टर अधिकारी वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कर रहे थे, तब पोलिंग पार्टी ने अपने स्वयं के एक वाहन की व्यवस्था करने का फैसला किया, ताकि वे सामान को गंतव्य स्थान तक समय पर पहुँचा सकें, क्योंकि उनके पास ईवीएम था।”

चुनाव आयोग ने कहा कि इसके बाद मतदान कर्मी वहाँ से गुजर रहे एक वाहन के मालिक के बारे में जाने बिना ही उसमें सवार हो गए। इसके बाद वे रात करीब 10 बजे करीमगंज के कनाईशिल पहुँचे। ट्रैफिक की वजह से उन्हें गाड़ी धीमी करनी पड़ी। इसी दौरान करीब 50 लोगों की भीड़ ने घात लगाकर उन पर हमला कर दिया। उन्होंने गाड़ी पर पथराव करते हुए गालियाँ दी। पोलिंग एजेंटों ने जब भीड़ के नेता से पूछा तो उसने बताया कि वो गाड़ी पथरकंडी से भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु पॉल की है। भीड़ ने ईवीएम से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। आयोग के मुताबिक, जैसे ही पोलिंग अधिकारियों को गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी सेक्टर अधिकारी और नोडल अधिकारी को दी। तब तक वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी।

घटना की जानकारी मिलते ही डीईओ एसपी करीमगंज के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। चुनाव आयोग के मुताबिक, “घटनास्थल पर पहुँचने पर देखा गया कि भीड़ ने पोलिंग पार्टी को कार के बाहर खींचकर उसके साथ मारपीट की है। भीड़ हिंसक हो चुकी थी और उन्होंने गाड़ियों के काँचों को पत्थर मारकर फोड़ दिया था। इस पत्थरबाजी में करीमगंज के एसपी भी घायल हुए हैं। एक पोलिंग अधिकारी भी वहाँ से लापता था। हालाँकि सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।”

ईवीएम के साथ नहीं हुई कोई छेड़छाड़

चुनाव आयोग ने मतदान किए गए ईवीएम की जाँच की और पाया कि वीवीपीएटी, बीयू और सीयू की सील सभी सुरक्षित थे। सारे सामग्रियों को स्ट्रॉन्ग रूम में रखवा दिया गया है। इस बीच घटना के दौरान लापता हुए पोलिंग ऑफिसर का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान भी चलाया गया। उन्हें शुक्रवार को ढूँढ लिया गया। चुनाव आयोग ने चुनाव निकाय के परिवहन प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए पीठासीन अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

दोषी अधिकारी निलंबित, संबंधित केंद्रों पर फिर से होगी वोटिंग

चुनाव आयोग ने परिवहन प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के मामले में दोषी चार अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। साथ ही मतदान केंद्र संख्या 149 पर दोबारा से मतदान का आदेश जारी किया है। हालाँकि ईवीएम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी।

चुनाव आयोग ने अपने स्टेटमेंट में कहा, “पीओ और 3 अन्य अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया है। ईवीएम की सील सही सलामत पाए जाने के बाद भी बूथ नंबर 149 पर फिर से मतदान होगा। एहतियात के तौर पर इंदिरा एमवी स्कूल ऑफ एलएसी 1 रतबारी पर विशेष पर्यवेक्षक भी तैनात किया जाएगा।”

जिन चार अधिकारियों को चुनाव आयोग के यातायात प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करने के मामले में निलंबित किया गया है, उनमें पीठासीन अधिकारी सहाबुद्दीन तालुकदार, पोलिंग अधिकारी सौरव अचार्जी, साहब उद्दीन तापड़कर और अब्दुल मुमित चौधरी। चौधरी एक इस्लामिक स्कूल में शिक्षक हैं।

PM मोदी के खिलाफ फेक न्यूज फैलाती फिर पकड़ी गई कॉन्ग्रेस, युवा अध्यक्ष के एडिटिंग की खुली पोल तो ट्वीट किया डिलीट

कॉन्ग्रेस एक बार फिर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ फेक न्यूज फैलाती पकड़ी गई है। इस बार यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने यह कारस्तानी की है। उन्होंने ट्विटर पर एक एडिटेड वीडियो शेयर कर यह जताने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री एक ऐसे मैदान में हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं, जो पूरी तरह खाली है। पोल खुलने पर यह वीडियो डिलीट कर दिया गया।

शुक्रवार (2 अप्रैल 2021) को श्रीनिवास ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें पूरी तरह से स्पष्ट ग्राफिक्स नहीं दिखाई दे रहे थे। इसी कारण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पीएम मोदी खाली मैदान में ही हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं। वीडियो से आवाज को भी हटा दिया गया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी यह वीडियो पोस्ट किया गया।

युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
कॉन्ग्रेस द्वारा पोस्ट किए गए एडिटेड वीडियो का स्क्रीनशॉट

एडिट किए गए इस वीडियो में यही प्रतीत हो रहा था कि पीएम मोदी जिस मैदान में हैं वहाँ भीड़ का कोई नामो-निशान नहीं है, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। वास्तविक वीडियो में साफ तौर पर पीएम मोदी का अभिवादन करती हुई भीड़ को देखा जा सकता है। लेकिन एडिट कर बनाए गए वीडियो में भीड़ और उनकी आवाज को हटाने का प्रयास किया गया था।

सक्रिय सोशल मीडिया यूजर्स के द्वारा अपनी पोल खोले जाने पर कॉन्ग्रेसऔर उसके नेता ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

वास्तविक वीडियो पीएम मोदी के पश्चिम बंगाल के जयनगर पहुँचने की है, जिसमें साफ तौर पर लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। पीएम मोदी चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए जयनगर पहुँचे थे। मैदान काफी बड़ा था, इस कारण लोग पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर से उतरने वाली जगह से कुछ दूर पर खड़े थे, जिन्हें वीडियो को एडिट करके हटाने का प्रयास किया गया। वहाँ लोगों ने पीएम मोदी का शानदार अभिवादन किया और जैसा कि कॉन्ग्रेस मैदान के खाली होने का दावा कर रही थी, उसके उलट मैदान भरा हुआ था।