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‘सुशांत का लैपटॉप और हार्ड ड्राइव लेकर चली गई रिया, बैंक अकाउंट का एक्सेस था’: सिद्धार्थ पिठानी ने CBI के सामने खोले कई राज

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी ने सीबीआई के सामने कबूल किया है कि सुशांत, दिशा सालियन की मौत के बारे में सुनकर डर गए थे। मीडिया सूत्रों के अनुसार, सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच एजेंसी से कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत चिंतित थे क्योंकि रिया चक्रवर्ती उनका लैपटॉप और हार्ड ड्राइव लेकर चली गई थी। रिया चक्रवर्ती ने 14 जून को उसी फ्लैट में मृत पाए जाने से 8 दिन पहले कथित तौर पर सुशांत के बांद्रा स्थित घर से चली गई थी।

मीडिया रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि रिया उनका इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर चली गई थी, जिसकी वजह से वह काफी बेचैन थे, क्योंकि रिया उनका पासवर्ड जानती थी और उनके सभी अकाउंट का रिया के पास एक्सेस था। जाँच की शुरुआत से ही सिद्धार्थ पिठानी सीबीआई की रडार पर हैं। जाँच एजेंसी द्वारा उन्हें कई बार तलब भी किया गया है और सीन के रीक्रिएट करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत के आवास पर ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता के मृत पाए जाने के बाद 14 जून को पिठानी भी सुशांत के फ्लैट में मौजूद थे।

गौरतलब है कि सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच टीम को पूछताछ के दौरान बताया था कि 8 जून को रिया ने फ्लैट छोड़ने से पहले 8 हार्ड ड्राइव नष्ट करवाई थीं। सिद्धार्थ ने बताया था कि हार्ड ड्राइव के लिए बाकायदा आईटी प्रोफेशनल को बुलवाया गया था। लेकिन यह साफ नहीं किया कि उसे बुलाया किसने था। पिठानी के अनुसार, इस दौरान सुशांत और रिया दोनों कमरे में मौजूद थे और सब कुछ देख रहे थे। उनके अलावा डोमेस्टिक हाउसहेल्पर दीपेश सावंत और बावर्ची नीरज भी कमरे में थे।

इससे पहले सिद्धार्थ पिठानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा था, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी।” हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई में स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर जान दे दी थी, जिसके बाद से मुंबई पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। वहीं, पटना में सुशांत के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बिहार पुलिस की एक टीम भी इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी।

अब यह मामला सीबीआई के पास है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) भी अपनी जाँच में जुटी हुई है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें NCB ने गिरफ्तार किया है।

शाहीन बाग ‘एक्टिविस्ट’ आइमान रिजवी ने RSS पर जबरन कारसेवकों को ट्रेन में बैठाने और गोधरा में आग लगाने का झूठा आरोप लगाया

यूट्यूबर आइमान रिज़वी (Aiman Rizwi) ने दो वीडियो अपलोड किए हैं, जिसमें उसने जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के समर्थन में बात की है। दोनों वीडियो 15 सितंबर को अपलोड किए गए हैं। पहले वीडियो में, उसने गोधरा में 56 कारसेवकों की मौत के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को दोषी ठहराया। उसने कहा कि आरएसएस ने कारसेवकों को जबरदस्ती ट्रेन में बिठाया और जला दिया।

वीडियो में, रिज़वी ने आरोप लगाया कि गोधरा की घटना में मरने वाले एक भी कारसेवक उच्च वर्ग से नहीं थे। जले हुए पीड़ितों में से सभी निचली जाति के थे जो विवादित ढाँचे को गिराने के लिए अयोध्या गए थे। इसी तरह की गलत जानकारी फिक्शन राइटर अरुंधति रॉय द्वारा भी फैलाई गई थी। हालाँकि गलत जानकारी फैलाने की होड़ में उसने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि विवादित संरचना का विध्वंस 1992 में हुआ था, जबकि गोधरा की घटना 2002 में हुई थी।

उसने आरोप लगाया कि 2002 के गुजरात दंगों की साजिश 1990 में भाजपा सरकार के लिए एक आधार स्थापित करने के लिए विकसित की गई थी। रिजवी ने मजहब विशेष के लाखों लोगों की मौत के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया।

उसने दावा किया कि एक बैठक में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से कहा कि वे हिंदुओं के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें और उन्हें गोधरा की घटना का बदला लेने के लिए मजहब विशेष वालों को मारने दें। रिजवी का यह दावा भट्ट के बयान पर आधारित है। हालाँकि, नानावती-मेहता आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि संजीव भट्ट उस बैठक में भी उपस्थित नहीं थे जिसके बारे में उसने दावा किया था कि इस तरह के निर्देश दिए गए थे।

उसने अपने वीडियो में कफील खान का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले तीन वर्षों में यूपी पुलिस ने दो बार जेल में डाला था। पहली बार वह गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों की मौत से संबंधित मामले में जेल गया था। फिर, 2020 में उसे CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के कारण जेल में डाल दिया गया। उसने कहा कि वह अपने मजहब के कारण जेल में था, और भट्ट एक अच्छा इंसान होने के कारण जेल गया था। उन्होंने महात्मा गाँधी के साथ दोनों की तुलना की और कहा कि उन्हें भी सत्यवादी होने के लिए आरएसएस द्वारा मार दिया गया।

रिजवी ने दावा किया कि कई प्रयासों के बाद जब मोदी सरकार भट्ट को किसी मामले में नहीं फँसा पाई, तो उन्होंने 1990 के एक पुराने लंबित मामले को उठाया और पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के लिए उसे दोषी ठहराया। उसने आरोप लगाया कि इस मामले के आधार पर भट्ट को उनकी नौकरी से निलंबित कर दिया गया था। दिलचस्प बात यह है कि भट्ट को ड्यूटी से अनाधिकृत अनुपस्थिति के लिए 2011 में निलंबित कर दिया गया था।

उसने आगे आरोप लगाया कि योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में दस पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी और विकास दुबे एनकाउंटर मामले को यूपी सरकार का काम बताया। हालाँकि, विकास दुबे एक कुख्यात गैंगस्टर था, जिसके खिलाफ 60 से अधिक मामले दर्ज थे। पुलिस में उसके संपर्कों ने दुबे को छापे के बारे में जानकारी लीक कर दी जिसके कारण आठ पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई जिसके परिणामस्वरूप यूपी पुलिस ने उसकी खोजबीन की।

दूसरे वीडियो में, उसने संजीव भट्ट के बारे में अपनी बात जारी रखी। अंधविश्वास फैलाने के लिए सरकार और ब्राह्मणों को दोषी ठहराते हुए, उसने आरोप लगाया कि राम मंदिर भूमि पूजन अशुभ तिथि पर किया गया था। यह झूठ दिग्विजय सिंह जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा फैलाया गया था। रिजवी ने आगे आरोप लगाया कि भूमि पूजन बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया था।

उसने न्यायमूर्ति लोहिया की मृत्यु सहित कुछ मामलों का उल्लेख किया, और आरएसएस को दोषी ठहराया। वीडियो के अंत में, उसने दावा किया कि भारत में 90 प्रतिशत लोग अपनी नौकरी और बिजनेस खो चुके हैं। उसने लोगों से अपने मोबाइल का उपयोग करने और सरकार के खिलाफ वीडियो पोस्ट करने का आग्रह किया।

पिछले कुछ वर्षों में कई हिंदू विरोधी और भारत विरोधी यूटूबर्स सामने आए हैं। हाल ही में, यूपी पुलिस ने माँ सीता और अयोध्या पर अपमानजनक वीडियो पोस्ट करने के लिए हीर खान को गिरफ्तार किया।

कॉमेडियन कुणाल कामरा को कंगना ने जमकर लताड़ा, स्पष्ट शब्दों में कहा- मूर्ख

बॉलीवुड-ड्रग नेक्सस को उजागर करने के बाद बॉलीवुड क्वीन कंगना महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना के आँखों में खटकने लगी है। वहीं अब कंगना ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के अपमानजनक ट्वीट पर जमकर लताड़ते हुए उन्हें स्पष्ट शब्दों में मूर्ख घोषित कर दिया है। बता दें कुणाल कामरा खबरों में बने रहने के लिए अक्सर अजीबोगरीब पोस्ट और हरकतें करते ही रहते हैं।

दरअसल, कंगना ने हाल ही में एक ट्वीट किया था कि कैसे नशे की लत, ग्लैमर की दुनिया को पहचानने और अप्रभावित रहने के लिए एक मजबूत आध्यात्मिक पक्ष की ज़रूरत होती है। वहीं इस पोस्ट पर खुद को अपने ट्विटर बायो में पाखंडी बताने वाले कुणाल कामरा ने कंगना पर तंज कसते हुए उनकी तुलना भारतीय आध्यात्मिक गुरु सदगुरु से कर दी।

जिसके बाद कंगना ने कामरा के वाहियात कमेंट पर उन्हें मूर्ख कहते हुए लताड़ा और कहा, “ये मूर्ख लोग मेरे संघर्ष, बौद्धिकता, आध्यात्मिक गहराई, हिम्मत, सफलता और उपलब्धियों का श्रेय किसी ताकतवार आदमी को देने के लिए बहुत बेताब हैं। मैं खुद अपने दम पर सफल हुई हूँ और अपनी शर्तों पर जिंदगी जी रही हूँ। यह इनके अहंकार को चोट पहुँचाता है। इसे स्वीकार करो।”

वहीं कंगना के बेबाक जवाब से बेज्जती महसूस करते हुए कामरा ने कंगना को दी गई Y सिक्योरिटी का मजाक उड़ाया। कुणाल कामरा ने ट्वीट कर लिखा कि मैं सोच रहा था कि तुम्हारी जैसी शक्तिशाली महिला को Y सुरक्षा की क्यों जरूरत पड़ी।

जिस पर मुंहतोड़ जवाब देते हुए कंगना ने लिखा कि एक लोकतान्त्रिक देश में यह संविधान का कर्तव्य है कि वह एक क्रांतिकारी को सुरक्षा दें। इस केस में आप लोकतंत्र के दो पहलू देखते हैं एक बचाव करने वाला और एक बचने वाला। उन्होंने कामरा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि तुम दोनों में से कुछ भी नहीं बन पाओगे। साथ ही कंगना ने सलाह दी कि एक ऐसा इंसान बनों जो देश के लिए कुछ कर सके।

कामरा इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने अपने मानसिक दिवालिएपन का खुलासा करते हुए रानौत की फिल्म मणिकर्णिका के शूट से एक वीडियो साझा किया जिसमें वह एक प्रोप पर घुड़सवारी के दृश्य की शूटिंग कर रही है।

अब ये तो हर किसी को पता है कि एक्शन फिल्मों में स्टंट करना आम बात है और इसके लिए स्टंटमैन या बॉडी डबल्स एक्टर्स सीन शूट करने के लिए हायर किए जाते हैं। विशेष प्रभाव दिखाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग भी बहुत आम है। इसके अलावा पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के बढ़ते प्रभाव की वजह से हिंसक एक्शन दृश्यों को शूट करने के लिए वास्तविक घोड़ों या अन्य जानवरों का उपयोग करना लगभग असंभव हो गया है।

इसलिए कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी का उपयोग आमतौर पर ऐसी स्थितियों में किया जाता है और अभिनेताओं को वास्तविक जानवरों के बजाय प्रॉम्प्स के साथ अपने दृश्यों को शूट करने की आवश्यकता होती है। उनका यह ट्वीट कंगना द्वारा उनपर की गई टिप्पणी के एकदम सटीक बैठता है। इससे यह तो पता चल गया कि कामरा के ट्वीट्स भी उन्हीं की तरह मज़ाकिया है, जिस पर बिल्कुल भी हँसी नहीं आती है।

यह पहली बार नहीं है कि कामरा को सार्वजनिक रूप से अपमान का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले लेखक चेतन भगत ने भी उनकी बेज़्ज़ती की थी। वहीं कामरा को कई एयरलाइनों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ अजीबोगरीब हरकते करते हुए एक वीडियो शूट किया था।

भारत ने एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक से लिया कर्ज: वामपंथी मीडिया और राहुल गाँधी ने चीन से ऋण लेने का किया झूठा दावा

भारत और चीनी सेना के बीच जारी गतिरोध के बीच भी कुछ लोग और वामपंथी मीडिया संगठन हैं, जिन्होंने विस्तारवादी चीनी डिजाइन के खिलाफ भारत के रुख को कमजोर करने और मोदी सरकार के खिलाफ अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए इस संकट का इस्तेमाल किया है।

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने आज एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर तंज कसा। राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए बताया कि भारत सरकार ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के बीच चीन स्थित एक बैंक से भारी ऋण लिया है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “आप chronology समझिए: PM बोले कि कोई सीमा में नहीं घुसा। फिर चीन-स्थित बैंक से भारी क़र्ज़ा लिया। फिर रक्षामंत्री ने कहा चीन ने देश में अतिक्रमण किया। अब गृह राज्य मंत्री ने कहा अतिक्रमण नहीं हुआ। मोदी सरकार भारतीय सेना के साथ है या चीन के साथ? इतना डर किस बात का?”

इससे पहले आज, ‘द टेलीग्राफ’ में  ‘China loan horse without a mouth‘  शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें कहा गया था कि भारत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के तहत किए गए उपायों का समर्थन करने के लिए $750 मिलियन के लिए एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि PLA पर जारी गतिरोध के बीच भारत ने बैंक से 1,350 मिलियन डॉलर के दो ऋण लिए, जिसमें बीजिंग बहुसंख्यक शेयरधारक है।

द टेलीग्राफ ने अपने लेख में लिखा, “गलवान नरसंहार (जिसमें चीन को भी काफी हताहतों का सामना करना पड़ा) के चार दिन बाद 19 जून को, भारत ने AIIB के साथ कोरोना वायरस वायरस के संकट के लिए 750 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह वह दिन भी था जब प्रधानमंत्री मोदी ने “no-intrusion” का दावा किया था।”

लेख में आगे कहा गया, “8 मई को, ऐसे समय में जब पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर चीनी घुसपैठ की पहली रिपोर्ट आनी शुरू हो गई थी, भारत सरकार द्वारा काफी हद तक इसे नजरअंदाज कर दिया गया था। भारत सरकार ने महामारी से लड़ने के लिए AIIB से 500 मिलियन डॉलर का अन्य ऋण लिया गया था।” यह लेख भारत सरकार द्वारा सीमा पर तनाव के मद्देनजर चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने की नीति पर सवाल उठाता है, साथ ही बीजिंग से ऋण देने की बात पर भी जोर देता है।

राहुल गाँधी ने कहा कि भारत सरकार ने चल रहे LAC गतिरोध के दौरान चीन स्थित बैंक से ऋण लिया, मगर उन्होंने ये नहीं बताया कि यह एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) है, जो चीन से बाहर है और एक बहुपक्षीय संस्था हैं, जिसमें 100 से अधिक सदस्य हैं।

इस बैंक की स्थापना एशिया और इससे आगे के क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक परिणामों में सुधार के उद्देश्य से की गई थी। बैंक का संचालन जनवरी 2016 से शुरू हुआ। इसके 103 से अधिक सदस्य हैं। हालाँकि चीन 26. 61 प्रतिशत वोटिंग शेयरों के साथ बैंक का बड़ा शेयरहोल्डर है, लेकिन भारत 7.6 प्रतिशत वोटिंग के साथ दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। किसी भी अन्य बहु-राष्ट्र संस्थान की तरह, AIIB एक ऐसा संगठन है जो अपने सदस्य देशों को इंफ्रास्ट्रक्टर डेवलपमेंट की चुनौतियों से उबरने में मदद करता है।

हालाँकि, राहुल गाँधी ने ‘चीन स्थित बैंक’ से ऋण लेने कै आरोप लगाते हुए इस तरह की बारीकियों को जानबूझकर अनदेखा किया। चूँकि भारत संगठन का एक हिस्सा है और बड़ी संख्या में वोटिंग शेयरों का स्वामित्व रखता है, इसलिए कानूनी रूप से और नैतिक रूप से, अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण प्राप्त करना उसके अधिकार में है।

टेलीग्राफ और राहुल गाँधी ने जो कहा, उससे इतर AIIB वाणिज्यिक चीनी बैंक नहीं है। यह एक बहुपक्षीय संस्था है। सच्चाई यह है कि इसका मुख्यालय बीजिंग में है, मगर यह चीनी बैंक नहीं है। इसके अतिरिक्त, अन्य बहुपक्षीय संगठनों जैसे ब्रिक्स बैंक या न्यू डेवलपमेंट बैंक में, भारत के वित्त मंत्री राज्यपालों के बोर्ड में होते हैं।

सिर्फ 2 महीने में 16 मामले: UP, MP, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों में तेजी से पाँव पसार रहा है लव जिहाद

उत्तरप्रदेश में लव जिहाद जैसी गंभीर समस्या पर भले ही योगी सरकार अब सख्त होकर पूरे मामले में जाँच करवा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि ये किसी एक राज्य की परेशानी नहीं है। पूरे देश भर में लव जिहाद के ऐसे तमाम मामले सामने आ चुके हैं जिनमें हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फँसा कर पहले उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया, उनसे निकाह किया गया और फिर या तो उन्हें मार दिया गया या उन्हें साथ रख कर प्रताड़ित किया जाता रहा। 

आज हम अलग-अलग शहरों के ऐसे ही कुछ हालिया केसों पर आपका ध्यान दोबारा आकर्षित करवाने जा रहे हैं ताकि ये ज्ञात रहे कि लव जिहाद कोई काल्पनिक संकल्पना नहीं है बल्कि वास्तव में कट्टरपंथियों की रची गई साजिश का हिस्सा है, जो आज हिंदू समाज के लिए नासूर बन गई है और न जाने कितनी हिंदू लड़कियों की जिंदगी तबाह कर रही है।

ताजा मामला आज मेरठ से आया है जहाँ 4 बच्चों का अब्बा अब्दुल्ला, अमन बन कर लड़कियों को फँसाता था और फिर उनका अपहरण करके उनके साथ दुष्कर्म करता था। पुलिस ने आज इस अब्दुल्ला को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। इसके अलावा एक बंटी खान नाम का युवक भी नाबालिग लड़की का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ है।

पिछले दो महीने में लव जिहाद के कहाँ से कितने मामले?

  1. हरियाणा के पानीपत से पिछले महीने 22 अगस्त को 25 साल की विधवा के साथ लव जिहाद, मारपीट और गर्भवती होने के बाद घर से निकालने का मामला सामने आया था। महिला ने इस संबंध में अपनी शिकायत भी करवाई थी। महिला का कहना था कि उसे एक साल पहले एक गोल्डी नाम के लड़के ने प्रेम के जाल में फँसाया, पर बाद में पता चला कि उसका असली नाम निजामुद्दीन है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया था कि जब उसने इस रिश्ते का विरोध किया तो उससे जबरन निकाह कर लिया गया और फिर उसे गर्भवती बना कर घर से निकाल दिया गया। 
  1. हरियाणा के मेवात में स्थित तावड़ू में एक व्यक्ति ने 10-12 दिन पहले अपनी बेटी के गायब होने के बाद अपहरण का मामला दर्ज करवाया। शिकायत में लड़की के पिता ने कहा कि वर्ग विशेष का एक लड़का उसकी बेटी को अपने जाल में फँसाकर भगा ले गया। उन्होंने बताया कि लड़की युवक के कहने पर शुक्रवार की रात घर से नकदी और आभूषण भी अपने साथ ले गई। काफी छानबीन के बाद भी दोनों का कहीं कोई सुराग नहीं लगा है। उन्होंने बताया कि आरोपित के मोबाइल पर घंटी तो जा रही है लेकिन वह रिसीव नही कर रहा।
  1. 13 सितंबर की खबर के अनुसार उत्तरप्रदेश के आगरा में ऐसे ही एक नाबालिग लड़की अपने घर से कुछ समय पहले नाराज होकर निकली और समुदाय विशेष का एक युवक इकरार उसे आकर हरियाणा ले गया। बाद में उसे कुछ दिन वहाँ रखा गया और फिर वह उसे अपने घर सहारनपुर ले गया। लड़की को घर ले जाने के बाद पहले उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया और बाद में उसका नाम इकराना रख कर उससे निकाह कर लिया गया। कुछ दिन पहले जब पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर पूरे मामले की छानबीन करके आरोपित इकरार को गिरफ्तार किया, तब मालूम चला कि इकरार ने लड़की को पहले अपना नाम रवि बताकर दोस्ती की थी और फिर धीरे-धीरे उसे प्रेम के जाल में फँसा लिया था।
  1. उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद का मामला जिस कारण गर्माया वो केस शालिनी यादव से फातिमा बनी लड़की का है। अभी कुछ महीने पहले ही 22 साल की शालिनी अपने घर से गायब हुई थी। बाद में पता चला कि उसने अब फैजल नाम के लड़के से निकाह कर लिया है और अपना नाम, धर्म, मैरिटल स्टेटस सब बदल लिया है। इस केस में लड़की के भाई ने आरोप लगाया था कि पूरा मामला लव जिहाद का है। उसकी बहन 10 लाख रुपए लेकर घर से निकली थी और उसे बहला फुसला कर फँसाया गया।
  1. पिछले महीने 25 अगस्त को लव जिहाद का एक मामला यूपी के लखीमपुर से सामने आया था। इस केस में मोहम्मद दिलशाद ने एक दलित लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और अपने मनसूबे नाकाम होता देख उससे बलात्कार करके बेहरमी से मार डाला। दरअसल, दिलशाद को गुस्सा इस बात का था कि उसने जिस लड़की के साथ प्रेम जाल रचा, उसके घरवालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। पर दिलशाद चाहता था कि लड़की धर्म परिवर्तन करके उससे निकाह करे। जब लड़की ने इससे इंकार किया तो उसे धोखे से बुला कर उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई।
  1. यूपी के मेरठ में 31 जुलाई को समुदाय विशेष के कुछ युवकों ने अपने साथियों के साथ एक दलित लड़की को घर से उठाने का प्रयास किया। हालाँकि, जब परिवार ने विरोध किया तो लड़की किसी तरह उनसे बच गई। इस मामले में पुलिस में सुहेल के खिलाफ़ एफआईआर हुई। जिसमें युवती के परिजनों ने बताया कि सुहेल पिछले 6 महीने से नाम बदलकर उनकी बेटी से बात करता था। मगर जब लड़की को इस बारे में पता चला तो उसने बात करने से मना कर दिया। जिसके चलते उसे कई लोगों के साथ मिलकर घर से उठाने की कोशिश की गई।
  1. 23 जुलाई को मेरठ के ही परतारपुर में लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। प्रिया नाम की महिला को पहले शमशाद ने कुछ साल पहले अमित गुर्जर बनकर फँसाया और फिर हकीकत खुलने पर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहने लगा। हालाँकि, प्रिया खुद को और अपनी बेटी को इन चीजों से बचाती रही। मगर, लॉकडाउन का फायदा उठाकर शमशाद ने दोनों को जान से खत्म कर दिया और घर में गड्डा खोद कर दफना दिया। इस केस का खुलासा प्रिया की सहेली चंचल के कारण पूरे 4 महीने बाद हुआ था।
  1. कानपुर के गोविंदनगर इलाके में भी पड़ताल में मालूम चला था कि एक आसिफ शाह नाम के युवक ने पहले एक हिंदू युवती को अपने जाल में फँसाया फिर उसका ब्रेनवॉश करके जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवाया। बाद में लड़की खराब और मानसिक रूप से अस्थिर हालत में पाई गई। परिजनों की शिकायत पर इस मामले को धारा 366 के तहत दर्ज किया गया है।
  1. एक अन्य मामला कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया। जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा। इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है। 
  1. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा। सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।
  1. दिल्ली के ही ओखला में सिंतबर की शुरुआत में दो पक्षों में विवाद का मामला सामने आया था। इस केस को पहले पुलिस ने मारपीट का मामला बताया था। हालाँकि बाद में मीडिया खबरों से इस केस में लव जिहाद एंगल का खुलासा हुआ। साथ ही ये भी पता चला था कि आरोपित राजा ने पीड़ित की छोटी बेटी को सल्लन ने लल्लन बनकर फँसाया था और कुर्शीद ने बड़ी बेटी को राजा बनकर। मगर, जब दोनों बहनों को हकीकत का पता चला और उन्होंने रिश्ते से इंकार किया तो गाड़ी पार्किंग का बहाना करके उनके परिवार पर हमला बोल दिया गया।
  1. कानपुर के ही एक अन्य केस में हाल में पीड़िता ने मीडिया से खुद आपबीती साझा की। लड़की ने बताया कि शीबू अली नामक लड़के ने उससे सचिन बनकर दोस्ती की और फिर धीरे-धीरे अपनी बातों में फाँसता गया। जब अफेयर शुरू हुआ तो उसकी हरकतों से लड़की को मालूम हुआ कि सचिन का नाम शीबू है।

    पीड़िता के अनुसार, लड़का उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। उसके साथ मारपीट करता था। इतना ही नहीं, एक बार तो उसने लड़की को मौलवी के साथ संबंध बनाने के लिए उकसाया। जब लड़की ने इंकार किया तो उसे पीटा गया। बाद में वह भागकर अपने घर आ गई। हालाँकि तब भी शीबू रुका नहीं, उसने दोबारा उसको फुसलाया और फिर उसे अपने साथ रख कर वही दबाव बनाने लगा। जिसके चलते लड़की एक दिन घर आ गई। लेकिन 14 अगस्त को शीबू ने उसे बुलाकर दोबारा वही सब करना चाहा और इंकार करने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया।
  1. मध्य प्रदेश का ग्वालियर भी लव जिहाद से अछूता नहीं है। 16 अगस्त को सामने आए एक वीडियो के बाद पता चला कि वहाँ एक महिला है जिसे जम्मू कश्मीर के युवक ने झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर शादी कर ली। हालाँकि जब महिला उसके घरवालों से मिली तब उसे लड़के के मजहब का भान हुआ और पता चला लड़के का नाम साहिल कुमार नहीं शौकत अली है। इसका खुलासा होने के कुछ दिन बाद उन्होंने महिला को पीट-पीट कर भगा दिया था। वीडियो में उसने अपने शरीर के घाव भी दिखाए।
  1. बिहार के हरलाखी थाने में 20 अगस्त को एक नाबालिग के अपहरण का मामला सामने आया था। हालाँकि, इस केस में लव जिहाद का एंगल था या नहीं ये कहना मुश्किल है। लेकिन ये बात एक दम सच है कि तीन बच्चों का पिता आरोपित शाबिर जब 14 साल की लड़की को लेकर भागा तो उसके परिवार वालों का कहना यही था कि लड़की का धर्मपरिवर्तन करवाने ले गए हैं। लड़की ने भी बरामद होने के बाद यही बताया कि उसका अपहरण करके उससे सिर्फ़ अल्लाह का नाम लेने को कहा जाता था।
  1. मेरठ में आज 16 सितंबर को कंकरखेड़ा से एक अब्दुल्ला नाम का युवक गिरफ्तार हुआ। इस पर आरोप है कि यह अमन बनकर लड़कियों को फँसाता और फिर उनका अपहरण करके उनके साथ दुष्कर्म करता। उसने हाल में 3 सितंबर को एक युवती का अपहरण किया था। जिसकी बरामदगी 13 दिन बाद हुई। 42 वर्षीय अब्दुल्ला 4 बच्चों का अब्बा बताया जा रहा है।
  2. ताजा मामले की बात करें तो उत्तर प्रदेश के आगरा के इबादतनगर इलाके से बंटी खान ने 11 सिंतबर को एक नाबालिग को अगवा किया था। बंटी ने टिकटॉक के जरिए पहले लड़की से दोस्ती की थी और फिर अपने साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद यूपी पुलिस ने आज बंटी खान समेत 7 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया और किशोरी बरामद कर ली गई।
  3. उत्तरप्रदेश के बागपत जिले के खेखड़ा गाँव में भी पिछले दिनों लव जिहाद का एक मामला उजागर हुआ था। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि एक दूसरे समुदाय का लड़का आदिल शादीशुदा महिला को भगा कर ले गया। 7 महीने बीत जाने के बाद भी महिला का कोई सुराग नहीं है। अगर उसे जल्द नहीं मिली तो वह हंगामा करेंगे। हालाँकि पुलिस की कार्रवाई के बाद एक हफ्ते पहले पीड़िता बरामद कर ली गई और आरोपित को जेल भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि देशभर में इस्लामी कट्टरपंथ की देन यानी लव जिहाद के ये केवल चुनिंदा मामले हैं। जिन्हें आपके सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है। वरना देश के विभिन्न राज्यों में आज ऐसे अनेकों घटनाएँ हैं जहाँ यदि पड़ताल की जाए तो एक तय पैटर्न साफ नजर आता है। मगर, दुखद बात ये है कि जब भी इस मामले को कोई दल या संगठन प्रमुखता से उठाता है तो एक निश्चित तबके के लोग इसे समाज की अखंडता के खिलाफ़ बताते हैं और दक्षिणपंथियों के दिमाग की उपज करार देने में जुट जाते हैं।

वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले केरल में लव जिहाद के कई मामले पिछले कुछ समय में सामने आए हैं। एक मजहबी सम्मेलन की ओर से हाल में प्रेस रिलीज जारी करके यह बात कही गई थी कि केरल में लव जिहाद के नाम पर हिन्दू महिलाओं को टारगेट किया जा रहा है। हाल में ISIS ज्वॉइन करने वाले जो 21 लोग पकड़े गए हैं उनमें से आधी महिलाएँ हैं जो हिन्दू थीं, इनका धर्मांतरण करवाया गया।

इससे एक बात साफ हो जाती है कि लव जिहाद का खेल केरल में जोरों से चल रहा है। इसके अलावा केरल में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं ने ईसाइयों की चिंता भी बढ़ाई है। कुछ समय पहले केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार ने इस पर गहरी चिंता जताई थी। साइरो मालाबार मीडिया कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी हत्या हो रही है।

लव जिहाद में नजर आता है एक पैटर्न

लव जिहाद को लेकर आज भी जिन लोगों के मन में संदेह उत्पन्न होता है या इतने मामले पढ़ने के बाद भी उन्हें लगाता है कि ये सब समाज का ही हिस्सा है तो उन्हें इन केसों में कुछ खास बिंदुओं पर गौर करने की आवश्यकता है। ये वो बिंदू हैं जो लव जिहाद से जुड़े हर दूसरे मामले में देखने को मिल जाएँगे।

जैसे इन केसों में प्रायः, संप्रदाय विशेष का युवक का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होता, और युवक खुद या तो बेरोजगार होता है या फिर छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पालता है। लेकिन, सोचने वाली बात ये है कि जब उन लोगों को हिंदू लड़कियों को फँसाना होता है तो अचानक खुद को मेंटेन रखने के लिए इनके पास पैसे आ जाते हैं। वह महँगे कपड़े पहनते हैं, महँगे तोहफे खरीदते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात जब वह पकड़े जाते हैं तो कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें अव्वल दर्जे की कानूनी मदद भी मिलती है।

इन सबको देखते हुए सवाल तो बनता है न कि आखिर हिंदू लड़कियों से प्रेम के दौरान खुद को सजाने के लिए उनके पास पैसा कहाँ से आता है? शालिनी यादव के केस में उसके भाई ने पूछा था कि फैजल बेरोजगार है, और उसके पिता फर्नीचर डीलर हैं, तो उसके पास आखिर शालिनी को पहले कानपुर से दिल्ली और दिल्ली से प्रयागराज ले जाने के पैसे कहाँ से आए? किसने उसे फंड दिया? आखिर कैसे उसका केस वरिष्ठ वकील न केवल दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लड़ रहे हैं?

यहाँ बता दें कि लव जिहाद मामले में कई बार सामूहिक रूप से किए गए अध्य्यन में पाया गया कि समुदाय विशेष के युवक सोशल मीडिया पर फेक आईडी बनाकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं। वह पहले हिंदुओं की तरह वेशभूषा धारण करते हैं फिर उनसे रिश्ता बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं। कई बार इस अपराध की वीडियो बना ली जाती है। बाद में रिकॉर्डिंग दिखा कर या तो उनका धर्म परिवर्तन हो जाता है या फिर निकाह।

ऐसे अधिकतर रिश्ते शरिया कानून के हिसाब से ही चलते हैं जहाँ लड़की का धर्म परिवर्तन अनिवार्य बताया जाता है। ये लड़कियाँ अधिकांश 15-20 साल की होती हैं। जब निकाह के बाद इन लड़कियों के परिवार इन्हें छोड़ देते हैं तब इन्हें ऐसे बंधन में बाँध कर रखा जाता है जहाँ औरत को कोई अधिकार नहीं होते। जब वह आवाज उठाती हैं तो उन्हें कई बार प्रताड़ित किया जाता है और कई बार जान से मार दिया जाता है।

साथ ही, ऐसे कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़कियों का सामूहिक शारीरिक शोषण से ले कर, अपने दोस्तों, भाई, पिता आदि से बलात्कार तक करवाते हैं। जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो पता चलता है कि लक्ष्य प्रेम का नहीं, बल्कि हिन्दू लड़कियों और उनके परिवारों को समाज में नीचा दिखाना और परिवारों को तबाह करना होता है।

सुरेश रैना के रिश्तेदारों के मर्डर केस में सावन, मुहब्बत और शाहरुख खान गिरफ्तार: 11 आरोपित अब भी फरार

क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदारों के यहाँ की गई चोरी और कत्ल के मामले में पठानकोट पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया है कि उस गैंग के 3 मेंबर्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम सावन, मुहब्बत और शाहरुख खान हैं।

पंजाब पुलिस के महानिदेशक दिनकर गुप्ता ने कहा कि पकड़े गए तीनों आरोपित लुटेरों और अपराधियों के एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा थे। हालाँकि इस मामले में अभी 11 और आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पंजाब पुलिस ने कहा बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “पाँचों आरोपित छत की तरफ से घर में गए, जहाँ उन्होंने 3 लोगों को चटाई पर सोते हुए देखा। इन तीनों पर हमला करने के बाद वो और अंदर गए। इसके बाद दो लोगों पर हमला किया। हमले के बाद पैसा, जेवरात लूटकर वहाँ से फरार हो गए।”

रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने मामले से जुड़े 24 संदिग्धों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। एसआईटी पंजाब जाँच के लिए चिरवा में डेरा डाले हुए थी। झुंझुनू पुलिस ने उन्हें सुविधा प्रदान की थी।

झुंझुनू के एसपी जगदीश चंद्र शर्मा ने कहा था, “पंजाब पुलिस की एसआईटी, जो पिछले तीन दिनों से चिरवा में डेरा डाले हुए है, को झुंझुनू पुलिस की सुविधा दी गई है। पठानकोट एसएसपी के अनुरोध पर, हमने उन्हें तीन अलग-अलग टीमें और अन्य संसाधन दिए हैं। अब तक, उन्होंने लूट और हत्या के मामलों की जाँच के लिए 24 लोगों को हिरासत में लिया है। टीम अभी भी हमारे साथ है और वे हत्या के रहस्य को सुलझाने के लिए और लोगों की तलाश कर रहे हैं।”

बता दें कि 19 अगस्त को लूट और हमले की वारदात में रैना के फूफा अशोक कुमार और फुफेरे भाई कौशल की मौत हो गई थी। उनकी बुआ आशा रानी निजी अस्पताल में कोमा में हैं। उनकी बुआ आशा देवी और चचेरे भाई आपिन कुमार हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराया गया था। अशोक कुमार की माँ, सत्य देवी को भर्ती होने के कुछ समय बाद ही रिलीज कर दिया गया था, लेकिन उन्हें मानसिक आघात लगा है। 

क्रिकेटर सुरैश सेना अपने रिश्तेदारों की हत्या के बाद बुधवार (सितंबर 16, 2020) को पहली बार पठानकोट के गाँव थरियाल पहुँचे थे। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी। अगस्त में हुई घटना के बाद, रैना ने मामले में जाँच शुरू करने के लिए सीएम सिंह को ट्वीट किया था। सिंह ने घटना के बारे में पता चलने के बाद डीजीपी को एसआईटी बनाने का आदेश दिया।

370 हटाने, राम मंदिर निर्माण के फैसले को हथियार की तरह इस्तेमाल कर लोगों को दंगे के लिए बरगलाया गया: चार्जशीट दाखिल

दिल्ली पुलिस ने आज दिल्ली कोर्ट में दिल्ली दंगों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में अबतक 15 लोगों का नाम सामने आया है। जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम शामिल नहीं हैं। हालाँकि, पूरक चार्जशीट में उनका नाम होगा।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में इस बात उल्लेख किया गया है कि अनुच्छेद 370 के हटने और राम मंदिर निर्माण में रामजन्मभूमि के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अल्पसंख्यकों को वर्तमान सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया गया। उन्हें बड़ी संख्या में इकट्ठा करने का प्रयास किया गया ताकि उनका इस्तेमाल सांप्रदायिक दंगों को अंजाम देने के लिए किया जा सके। चार्जशीट में कहा गया है कि उमर खालिद भीड़ जुटाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे लोगों में से एक था।

चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि उमर खालिद के साथ AAP नेता ताहिर हुसैन और खालिद सैफी (जिस पर IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला दर्ज है) नाम भी शामिल है। बता दें खालिद सैफी प्रोपेगैंडा समूह यूनाइटेड अगेंस्ट हेट का संस्थापक हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में कहा गया है कि दिल्ली के दंगों की साजिश की शुरुआत जनवरी में हुई थी जब तीनों शाहीन बाग में बैठकर विरोध प्रदर्शन और बाद में जामिया के पीएफआई कार्यालय में मिले थे।

निम्नलिखित लोगों का चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट में नाम दिया गया है।

  1. शरजील इमाम
  2. उमर खालिद
  3. दानिश
  4. मोहम्मद परवेज अहमद
  5. खालिद
  6. इशरत जहाँ
  7. मीरान हैदर
  8. ताहिर हुसैन
  9. गुलशन
  10. सफ़ुरा ज़रगर
  11. शफा-उर रहमान
  12. आसिफ इकबाल तनहा
  13. शादाब अहमद
  14. नताशा नरवाल
  15. देवांगना कलिता
  16. तस्लीम अहमद
  17. सलीम मलिक
  18. मोहम्मद सलीम खान
  19. अतहर खान
  20. मोहम्मद इलियास

कथिततौर उमर खालिद और शरजील इमाम पर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका का पहला प्रमाण उसके द्वारा दिए गए एक भाषण के बाद सामने आया था।

कथिततौर पर 20 फरवरी को अमरावती में भाषण दिया गया था। उस भाषण में उसे स्पष्ट रूप से यह कहते हुए सुना गया कि 24 फरवरी को जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत का दौरा करेंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को यह दिखना चाहिए कि भारत के लोग सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लड़ रहे हैं।

इस मामले में और अधिक जानकारी आप इस लिंक के जरिए जान सकते है।

कथिततौर पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाया है कि सीएए विरोध में हुए दिल्ली दंगे एक पूर्व नियोजित साजिश थी। एंटी-सीएए प्रदर्शन करने का पैसा पीएफआई के साथ साथ विदेशों से भी आया था। कथिततौर पर उस राशि का उपयोग करके हथियार भी खरीदे गए थे। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद के फोन से 40 जीबी डेटा भी बरामद किया है। जो 11 लाख पेज के डेटा में शामिल है।

उमर खालिद ने कैसे रची थी दिल्ली दंगों की साजिश: फोन से बरामद 40 जीबी डेटा से हुआ खुलासा, हाथ लगे कई सुबूत

दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार जेएनयू का पूर्व छात्र उमर खालिद को लेकर कई नए खुलासे हुए है। जिसके जरिए इस बात के सबूत मिले है कि खालिद ने ही दंगों की साजिश रचने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस को उसके मोबाइल फ़ोन से दंगों से संबंधित 40 जीबी डेटा बरामद हुआ है। बता दें फ़ोन के फोरेंसिक रिपोर्ट विश्लेषण के जरिए यह बात सामने आई है। इसकी जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद को स्पेशल सेल ने 10 दिन की पुलिस रिमांड में रखा है। पुलिस चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया है कि किस तरह उमर खालिद ने पहले से दंगों की पूरी तैयारियाँ कर ली थी। साथ ही उसने इस कार्य के लिए विभिन्न संगठनों से मदद और आम जनता के समर्थन पाने के लिए भड़काऊ भाषण का प्रयोग किया था।

स्पेशल सेल उमर खालिद के कारनामों की चार्जशीट 17 सितंबर से पहले कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर करेगी। रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि खालिद ने 2019 में सीएए के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली दंगों साजिश रचने की तैयारी दिसंबर में ही शुरू कर दी थी। अपने भड़काऊ भाषणों की वजह से उसे मुस्लिम लोगों का समर्थन मिलता चला गया। इतना ही नहीं उसने दंगों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए वामपंथी और समुदाय विशेष संगठनों का सहारा भी लिया।

चार्जशीट में यह बात भी सामने आई कि खालिद ने उन्हीं जगहों को धरना प्रदर्शन के लिए चुना था, जहाँ मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा थी और आसपास मस्जिद भी हो ताकि बिना किसी रुकावट के वह मस्जिदों का पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर सके। ऐसे स्थलों का चुनाव लाउडस्पीकर के जरिए भीड़ बुलाने और मुस्लिम महिलाओं की बढ़चढ़ कर भागीदारी के लिए भी किया गया था। ताकि पुलिस महिलाओं की वजह से ज्यादा बल प्रयोग न कर सके।

चार्जशीट में कहा गया है कि आम जनता को भड़काने और लोगों को आक्रोशित करने के लिए ही ऐसी सड़क को जाम किया गया था जहाँ लाखों की संख्या में लोगों का रोज आना जाना होता था। ताकि आपस में लोगों का टकराव हो सके और दो समुदायों में दंगा भड़के। वाट्सअप ग्रुप बना कर लोगों को बरगलाने का काम भी किया जाता था। खालिद ऐसे ही कई व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ था।

चार्जशीट में कहा गया है कि खालिद ने पहले जामिया विश्वविद्यालय को अपने साजिश को अंजाम देने के लिए चुना था। लेकिन पुलिस ने उसके इरादे को नाकाम कर दिया। जिसके बाद उसने 15 दिसंबर को शाहीनबाग का इलाका चुना। और शांतिपूर्ण धरने की आड़ में गहरी साजिश की शुरुआत की। इसके अलावा तुर्कमान गेट, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सीलमपुर, चाँदबाग, कर्दमपुरी, शाहदरा, निजामुद्दीन, वजीराबाद, जाफराबाद आदि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों पर स्थायी रूप से लोगों को धरने पर बैठाया गया।

खालिद ने शरजील इमाम, खालिद सैफी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर लोगों को धरना प्रदर्शन के लिए उकसाने का काम किया था। साथ ही अलग-अलग प्रदर्शन स्थल पर कमेटियों का गठन भी किया गया था। जो उन्हें आवश्यक जनकारियाँ प्रदान करते थे। वहीं पिंजरा तोड़ की सदस्यों को महिलाओं को एकत्रित करने और उन्हें धरने से जोड़ने का काम सौंपा गया था।

पिंजरा तोड़ के सदस्यों में मुख्य जिम्मेदारी अथरा व रवीश को दी गई थी। अथरा को दिल्ली पुलिस स्पेशल ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया है। वहीं रवीश अभी भी पुलिस गिरफ्त से फरार है। अदालत ने रवीश को भगोड़ा भी घोषित कर दिया है। गुलफिश उर्फ गुल, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता व सुभाषिनी को भी पुलिस गिरफ्तार कर पूछताछ कर चुकी है। जिसमें इन सदस्यों ने खालिद को लेकर कई खुलासे किए है।

AMU वाले स्कूल की लीज समाप्त, जिस जाट राजा ने दान दी थी जमीन, उनके वंशज ने कहा – ‘वापस करो’

स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक, पूर्व जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह (1886-1979) ने 1929 में 90 साल की लीज पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को स्कूल स्थापित करने के लिए लगभग 3.04 एकड़ जमीन दी थी। पिछले साल लीज समाप्त होने के बाद जाट राजा के वंशजों ने माँग की है कि विश्वविद्यालय के आगरा स्थित स्कूल का नाम बदल कर उनके नाम पर रखा जाए और साथ ही महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा एएमयू को दी गई बाकी जमीन उन्हें वापस कर दी जाए।

मामले को देखने और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर तारिक मंसूर हैं।

सिंह के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह के अनुसार, उन्होंने 2018 में लीज की समाप्ति के बारे में विश्वविद्यालय को कानूनी नोटिस दिया था। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनके परदादा द्वारा दी गई जमीन के दो हिस्से थे। 

हालाँकि, उन्होंने आगे ये भी कहा कि वे उस जमीन का बड़ा हिस्सा दान कर रहे हैं, जिस पर आगरा में महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एएमयू का सिटी स्कूल बनाने की माँग की गई है। चरत ने कहा कि भूमि के दूसरे छोटे टुकड़े (1.2 हेक्टेयर) को परिवार को वापस सौंप दिया जाना चाहिए या फिर जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

महेंद्र प्रताप सिंह मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के पूर्व छात्र थे, जो बाद में एएमयू बन गया।

सिंह को मान्यता देने को लेकर एएमयू और बीजेपी के बीच रस्साकशी

गौरतलब है कि पिछले साल, अलीगढ़ की इगलास सीट पर उप-चुनावों के दौरान प्रचार करते हुए, सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करेगी। एएमयू में इस तरह के योगदान देने के बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता नहीं दी गई थी। इसके बाद यूपी कैबिनेट ने पूर्व जाट राजा के नाम पर एक विश्वविद्यालय के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

सिंह, भाजपा और यूनिवर्सिटी के बीच विवाद की वजह बन गए थे।  पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के चित्र को एएमयू परिसर में लटकाए जाने के बाद विश्वविद्यालय के नाम बदलने की माँग ने 2018 में गति पकड़ ली थी।

1 दिसंबर 2014 को AMU में जाट राजा की 128 वीं जयंती मनाने के लिए भाजपा सांसद सतीश गौतम के सुझाव के बाद विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने तब अलीगढ़ में अपने कार्यालय में एक छोटे से समारोह की व्यवस्था की थी और बाद में सिंह पर एक संगोष्ठी आयोजित करने के लिए यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति की तरफ से आश्वासन मिला था।

सिंह ने 1957 के लोकसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था

महेंद्र प्रताप सिंह प्रथम विश्व युद्ध के मध्य अफगानिस्तान में एक अस्थाई सरकार स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। बाद में उन्हें 1932 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। सिंह 1957-62 के दौरान मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित लोकसभा सदस्य भी थे, उन्होंने कद्दावर भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था। अटल बिहारी वाजपेयी बाद में भारत क प्रधानमंत्री बने।

‘ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो… अपने नस्लों के फायदे के लिए पावर हाथ में लो’ – इमरान प्रतापगढ़ी का वीडियो वायरल

पिछले दिनों सुरेश चव्हाणके ने अपने आगामी शो का एक ट्रेलर ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि सिविल सेवाओं में ‘संप्रदाय विशेष की घुसपैठ’ का ‘पर्दाफाश’ किया गया है। वीडियो में उन्होंने जामिया के रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में स्थान पाने वाले छात्रों को ‘जामिया के जिहादी’ कहा था।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाणके वाले इस न्यूज एपिसोड को लेकर काफी बवाल हुआ। इस कार्यक्रम के 4 एपिसोड टेलीकास्ट हो चुके हैं, आगे के प्रसारण के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

इस बीच इमरान प्रतापगढ़ी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिमों से ब्यूरोक्रेसी पर ‘कब्जा’ करने के लिए कहते हैं। वीडियो में इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि फासिस्टों ने पिछले 30 सालों में उनके नस्ल का काफी नुकसान किया है।

इमरान प्रतापगढ़ी के अनुसार इससे एक फायदा भी हुआ है और वह फायदा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और नेपाल के बॉर्डर से लेकर राजस्थान के बॉर्डर तक डंडा लेकर भैंस चराने वाला आम मुस्लिम भी यह समझ चुका है कि इस देश में जिंदा रहना है तो बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।

इमरान प्रतापगढ़ी आगे कहते हैं:

“किसी भी देश का सिस्टम परफेक्ट नहीं होता है। माइक पर खड़े होकर कितना भी कोस लो, कितनी भी गालियाँ दे दो, लेकिन निजाम नहीं बदलता। मैं आपको दावत देता हूँ, अगर निजाम बदलना है तो सिस्टम का हिस्सा बनिए। अगर थाने में तुम्हारे नाम का सिपाही आ जाता है, तो थाने का निजाम बदल जाता है। अगर तुम मुल्क को सुधारना चाहते हो, अपना हक लेना चाहते हो तो ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। अगर बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या बहुत बड़ा बिजनेसमैन बनाते हो तो सिर्फ तुम्हारा फायदा होगा। अगर नस्लों का फायदा करना चाहते हो तो सिर्फ ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो, पावर अपने हाथ में लो।”

गौरतलब है कि मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को सुदर्शन न्यूज के कथित विवादित कार्यक्रम ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब आप कहते हैं कि जामिया मिलिया के छात्र सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने वाले समूह का हिस्सा हैं, तो फिर हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकार को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।”

सुरेश चव्हाणके ने शो के दौरान कहा था कि यूपीएससी के लिए प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाने के लिए उड़ान योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को 1 लाख रुपए दिए जाते हैं, जबकि हिंदुओं को ऐसा कोई लाभ नहीं मिलता है। इसी तरह, राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) में गैजेटेड पदों के लिए, अल्पसंख्यक समुदाय को 50000 रुपए और PSC के नन-गैजेटेड पोस्ट एवं SSC परीक्षा के लिए 25000 रुपए दिए जाते हैं।

सुदर्शन न्यूज ने यह भी खुलासा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए योजनाओं का लाभ उठाने वालों में से अधिकांश मुस्लिम हैं। मुस्लिम समुदाय के बाद, ईसाई दूसरे स्थान पर आते हैं; इसके बाद क्रमशः सिख, बौद्ध और पारसी आते हैं। बहरहाल, ब्योरोक्रेसी में ‘जाना’ एक बात है, मगर उस पर ‘कब्जा’ करने की तमन्ना अलग और नकारात्मक है।