Home Blog Page 4900

केजरीवाल सरकार ने दिया मेडिकल स्टाफ को अपनी समस्याओं को मीडिया में हाईलाईट ना करने का ऑर्डर: कपिल मिश्रा

दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से कोरोना ड्यूटी में तैनात सभी मेडिकल स्टाफ को अपनी ड्यूटी में होने वाली असुविधाओं के बारे में मीडिया को बताने और सोशल मीडिया पर हाईलाईट करने से मना किया है। कपिल मिश्रा का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा आदेश सरकार के झूठ की पोल खुलने के डर से जारी किया है।

‘कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा’

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा है- “केजरीवाल सरकार का आर्डर- कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी अपनी प्रॉब्लम ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक में नहीं शेयर करेगा। मीडिया को बताने पर भी प्रतिबंध। खाना, मास्क, एकोमोडेशन – कुछ भी न मिले, चुप रहो। ये आर्डर इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर सरकार के सारे झूठ की पोल खुल रही हैं।”

गुरु तेगबहादुर अस्पताल की ओर से जारी आदेश की कॉपी, जिसे कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया है –

वहीं, कुछ लोगों ने कपिल मिश्रा के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि यह स्टाफ के मौलिक अधिकारों का हनन है।

इस ट्वीट के साथ कपिल मिश्रा ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी आदेश की कॉपी भी शेयर की है, जिसमें लिखा गया है कि ड्यूटी में आ रही किसी भी प्रकार की समस्या के लिए वह स्टाफ डिपार्टमेंट हेड के पास शिकायत भेज सकता है, लेकिन बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाए सोशल मीडिया में समस्याओं को पब्लिक करना उचित नहीं है और मेडिकल स्टाफ को इससे बचना चाहिए।

अस्पताल की ओर से जारी इस आदेश की प्रति में यह भी पढ़ा जा सकता है कि अस्पताल के कर्मचारियों को देशसेवा का स्मरण करवाकर उन्हें समस्याओं को नजरअंदाज करने की राय दी गई है। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि स्टाफ़ की वाज़िब समस्याओं पर अवश्य संज्ञान लिया जाएगा।

कपिल मिश्रा ने GTB अस्पताल द्वारा जारी किए गए इस आदेश को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि उनके ही आदेश पर इस प्रकार का आदेश दिया गया है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार को लेकर यह चर्चा निरंतर जारी है कि इन्होने कोरोना वायरस से निपटने में धरातल पर काम करने के बजाए सोशल मिडिया पर अपनी तारीफ में कैम्पेन करने पर ज्यादा ध्यान दिया है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों को होने वाली असुविधाओं पर बात करने पर पाबंदी लगाने का आदेश एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।

सोशल डिस्टेंस की अपील कर रहे होमगार्ड का गला दबाने वाला दिलदार अंसारी गिरफ्तार

झारखंड के गोड्डा जिला स्थित ललमठिया चौक पर लॉकडाउन का पालन करने का निर्देश दे रहे होमगार्ड के साथ झड़प करने वाले दिलदार अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अंसारी ने होमगार्ड के जवान के साथ उस समय हाथापाई की जब वो लोगों से कोरोना वायरस के दौरान घोषित लॉकडाउन के नियमों का पालन करने का निर्देश देते हुए उन्हें भीड़ ना करने की अपील कर रहे थे।

झड़प का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसके बाद कई लोगों ने इस पर कार्रवाई की माँग की। वीडियो में होमगार्ड के जवान के साथ दिलदार अंसारी को अभद्र व्यवहार और बदसलूकी करते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है।

लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का सुझाव देते समय ही कुछ आसामजिक तत्वों ने होमगार्ड के साथ हाथापाई शुरू कर दी और उनका गला दबाने तक की भी कोशिश की। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिलदार अंसारी ने झड़प के दौरान होमगार्ड की वर्दी उतरवाने की भी धमकी दी। होमगार्ड के साथ बदसूलकी करने वाला दिलदार अंसारी लालगुटवा ललमटिया थाना क्षेत्र का ही रहने वाला बताया जा रहा है।

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार जब लोगों ने इस बारे में ललमटिया थाना प्रभारी जावेद अहमद को बताया तो उन्होंने इस मामले की जानकारी होने से मना कर दिया। लोगों ने ट्विटर पर गोड्डा पुलिस से इस मामले पर संज्ञान लेने की भी अपील की। वायरल हुए इस वीडियो के संदर्भ में ललमटिया थाना में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद घटना के मुख्य अभियुक्त दिलदार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि यह पुलिस के साथ बदसलूकी का पहला मामला नहीं है, देशभर में निरंतर पुलिस और डॉक्टर्स के साथ बदसलूकी करने के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। खासकर मुस्लिम समुदाय ने जाँच करने गई डॉक्टर्स की टीम या फिर व्यवस्था बना रहे पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाया है।

लॉकडाउन के बीच कार्गो विमान से कोलकाता पहुॅंचे प्रशांत किशोर, घिरीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर कोरोना से जुड़े तथ्यों में हेरफेर करने और लॉकडाउन के कायदों का पालन नहीं करवाने के आरोप लग रहे हैं। अब ममता बनर्जी पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को चोरी-छिपे कार्गो विमान के जरिए कोलकाता लाने के आरोप लगे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लॉकडाउन के बीच प्रशांत किशोर कार्गो प्लेन से कोलकाता पहुँचे हैं। इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने प्रशांत किशोर के साथ ममता सरकार पर निशाना साधा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत किशोर कार्गो फ्लाइट से उसी वक़्त कोलकाता पहुँचे जब मोदी सरकार की ओर से राज्य में लॉकडाउन की स्थिति का जायजा लेने के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (IMCT) पहुँची। बताया जा रहा है कि टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का मैसेज मिलते ही प्रशांत किशोर दिल्ली से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए थे।

आधी रात को कोलकाता पहुँचे प्रशांत का अभिषेक ने अपने दफ्तर में स्वागत किया और फिर केन्द्र सरकार द्वारा पूछे जा रहे सवालों को लेकर चर्चा भी की। जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को सोशल मीडिया, विपक्षी पार्टी और मीडिया चैनल्स के आरोपों पर जवाबी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी है।

इस बात की जानकारी मिलते ही विपक्षी पार्टियों ने ममता के साथ प्रशांत किशोर को भी घेरना शुरू कर दिया है। जेडीयू नेता अजय आलोक ने कहा कि प्रशांत किशोर को शर्म आनी चाहिए। लॉकडाउन का ऐसा उल्लंघन नहीं देखा गया। कार्गो प्लेन से जरूरी सामान जाते हैं, अब पीके कैसे कार्गो में चले गए।

अजय आलोक ने इस लेकर ट्विटर पर एक ट्वीट भी किया और कटाक्ष करते हुए कहा कि पीके अब ब्यूटीशियन भी बन गए है, जो कि शायद ममता बनर्जी का चेहरा चमकाने कोलकाता गए हैं।

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि प्रशांत किशोर लॉकडाउन में कार्गो फ्लाइट में छुपकर कोलकाता गए। बंगाल में लॉकडाउन की स्थिति सॅंभालने के लिए उन्हें बुलाया गया। निखिल आनंद ने बंगाल सरकार को फेल बताते हुए कहा कि ये समय विशेषज्ञ को बुलाने का है, झूठा इमेज मेकओवर करने वाले को नहीं।

देश में जारी लॉकडाउन के बीच पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन न होना, राशन वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगना, पर्याप्त जाँच न होना आदि बातों को लेकर इन दिनों ममता सरकार और केन्द्र के बीच ठनी हुई है। केन्द्र द्वारा पश्चिम बंगाल में भेजी गई टीम के साथ राज्य सरकार द्वारा सहयोग न करने पर यह विवाद और भी गहरा गया है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल में लगातार हो रहे लॉकडाउन के खुलेआम उल्लंघन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी। राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखे गए इस पत्र में लॉकडाउन का पालन नहीं होने पर सख्त आपत्ति जताई गई थी। साथ ही कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में गैर जरूरी चीजों की दुकानें खोलने और मजहबी जमावड़े के लिए इजाजत दिए जाने की सूचना मिली है और राशन प्रशासन की बजाए नेता बॉंट रहे हैं।

अर्नब पर हमला न होकर रवीश पर होता तो नेशनल-इंटरनेशनल मीडिया में चलते ये 4 हेडलाइन

आज घर से दफ्तर अर्थात शयनकक्ष से अध्ययन कक्ष तक आते-आते एक गाँधी कीड़ा, एक वामपंथी मक्खी और एक जिहादी मच्छर पीछे पड़ गए। आपस में भिनभिनाने लगे और कहने लगे हमसे जो टकराएगा उसका हश्र अर्नब सा हो जाएगा।

मैंने उनसे संवाद करने की कोशिश कि चाहे कोई वामपंथी हो या दक्षिण पंथी, हैं तो सब पत्रकार ही। सबका पेशा तो एक ही है। आप नेहरू-ब्रांड के जिहादी-वाम हैं और बाकी आरएसएस-समर्थित आतंकवादी।

मेरी ये बात मानो उनको नस्तर की तरह चुभ गया हो। फिर क्या था तीनों पील पड़े मुझ पर! वामपंथी मक्खी भिनभिनाने लगी – तुम पत्रकार हो, तुम्हें इन सांप्रदायिक लोगों का पक्ष लेने का कोई हक़ नहीं। ये कहकर वो मुझे घर के एक कोने से दूसरे कोने तक खदेड़ने लगे।

गाँधी कीड़ा बिना खड्ग-ढाल की आज़ादी दिलाने का एहसान याद दिलाने लगा। जिहादी मच्छर बड़े ही चालाकी से संविधान और सेक्युलरिज़्म की महानता के कीर्तन से ब्रेनवाश करने में जुटा रहा।जब उन्हें लगा कि मैं ब्रेनवाश-इम्यून हो चूका हूँ तो उन्होंने अपना प्रॉपर-गन्दा मशीनरी का इस्तेमाल करना शुरू किया। फिर शुरू हुआ धमकियों का दौर- तुम अगर ऐसे ही खुलेआम हमारे खिलाफ बोलोगे तो तुम्हें कहीं नौकरी नहीं मिलेगी। तुम जानते नहीं हो हम कितने पावरफुल हैं, हम तुम्हारा करियर बर्बाद कर देंगे।

जब मैंने बड़ी विनम्रता से कहा कि साहब मैंने तो इसीलिए सालों पहले नौकरी ढूँढना बंद कर दिया था। अगर आप को रोज़ी रोटी चलाने के लिए नौकरी की आवश्यकता हो तो बताएँ! इस पर चिढ़कर तिलिस्मी-तिकड़ी ने मच्छर को मेरे ऊपर ‘लूला’ दिया।

मैं प्राण-रक्षार्थ कभी घर के इस कोने से उस कोने तक भागता रहा। मैं चाहता तो मच्छर को निमिषमात्र में मसल सकता था लेकिन उससे फासिस्ट कहलाने का खतरा और बढ़ जाता। रेप्यूटेशन रक्षार्थ, मैं सोसाइटी के गेट की ओर लपका, लेकिन ये डर लिए कि बाहर की दुनिया – जहाँ मच्छरों और वामों का बोलबाला है – मुझ को आक्रांता कहकर लाठी बरसाएगी।

हमारे पूर्वजों की सहिष्णुता एवं शांति-प्रियता को कायरता का जामा पहनाकर, हमें शोषित और प्रताड़ित कर हमें ही आक्रांता बताने का ये चलन अब ख़त्म होना चाहिए। और ख़त्म हो कर रहेगा। इस रक्त-पिपासु तिकड़ी को ये बात कब समझ आएगी कि इनके धृतराष्ट्र सी पक्षपात-पूर्ण दुर्नीति और दु:शासन-प्रेरित चरित्रहरण का चलन, एक आम व्यक्ति को भी जनता के नज़र में खास बना देता है।

राजनीति में इन्होंने ये गलती मोदी के साथ की और पत्रकारिता में अर्नब के साथ वही कर रहे हैं। मोदी आपकी दशकों से चले आ रहे प्रॉपर-गन्दा के दमपर आज देश का प्रधानसेवक बन बैठा है, और आप अर्नब को मीडिया का मोदी बनाए बिना मानेंगे नहीं।

सोसाइटी के गार्डन एरिया में बैठा मैं इन्हीं विचारों में खोया था उसी वक़्त न्यूटन जैसा एक ख़याली सेव सर पर आ गिरा – अच्छा अगर ये अटैक अर्नब पर न होकर रवीश पर होता तो क्या देश का चौथा स्तम्भ अब तक भरभराकर गिर नहीं गया होता? इंटरनेशनल मीडिया अब तक कलेजा-फाड़ चीख नहीं रहा होता?

वॉशिंगटन पोस्ट “जर्नलिस्ट्स आर बुचर्ड अंडर मोदीज़् हिन्दू-फासिस्ट रूल

न्यू यॉर्क टाइम्स “हिन्दू-टेररिस्ट अटैक इंडियाज़् टॉप जर्नलिस्ट्”

अल जज़ीरा: “मुस्लिम उम्मा मस्ट टेक इंडिया टू टास्क”

टीआरटी: “दिस इस द बिगिनिंग ऑफ़ मुस्लिम जेनोसाइड इन इंडिया”

और उसके बाद ये आर्टिकल ‘द वायर’ के थ्रू ‘द टेलीग्राफ’ तक पहुँचेगा, फिर ‘द प्रिंट’ के माध्यम से लोगों को ‘स्क्रॉल’ करने को उकसाएगा। कालांतर में उसको फिर ‘न्यूजलाउन्ड्री’ में धुला जाएगा और फिर ‘ऑल्टन्यूज़’ की मृगतृष्णा-मानिंद अग्निपरीक्षा के उपरांत ‘द हिन्दू’ में छप जाएगा।

अथ: श्री महाभारत कथा…

संतों की हत्या में वामपंथी साजिश: VHP ने राज्यपाल को ‘ख़ूनी वामपंथी’ इतिहास की याद दिलाते हुए की कार्रवाई की माँग

महाराष्ट्र के पालघर में हुई दो नागा साधुओं और उनके ड्राइवर की हत्या के सम्बन्ध में विश्व हिन्दू परिषद के संतों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करके दोषियों को सख्त सजा देने की माँग की है। साधुओं की मॉब लिंचिंग से आक्रोशित VHP ने राज्यपाल को एक पत्र लिखा जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वामपंथियों का खूनी इतिहास नई बात नहीं है।

राज्यपाल को VHP के एक्शन प्लान से अवगत कराया

राजभवन में हुई इस मुलाकात में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के तीन सदस्यों महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज, स्वामी शंकारानंद महाराज और स्वामी सुखदेवानंद महाराज ने भीड़ द्वारा बेगुनाह संतों की मॉब लिंचिंग के विरोध में विश्व हिंदू परिषद के आगामी एक्शन प्लान से भी राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अवगत कराया।

विश्व हिन्दू परिषद के इस पत्र का विषय पालघर जिले में हिन्दू संतों की निर्मम सामूहिक हत्या है। पत्र में लिखा गया है कि वहाँ मौजूद पुलिस ने संतों को बचाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं की। पत्र में लिखा गया है –

“वामपंथियों द्वारा रक्तरंजित क्रूरता इस परिसर का इतिहास है। विश्व हिन्दू परिषद के देश के प्रथम सेवा कार्य ‘तलासरी छात्रावास’ इसी तरह से 700-800 लोगों को भीड़ द्वारा हमला कर प्रचारकों को जिन्दा जलाने का प्रयास भूतकाल में भी किया गया था। छात्रावास के छात्रों के घर तोड़े गए। वर्तमान घटना के पीछे भी हमें बिना किसी संदेह के वामपंथी गतिविधि दिखती है…।”

“…गत वर्षों से वामपंथियों द्वारा इस क्षेत्र के स्वभावतः मासूम वनवासियों को ‘राम हमारे देव नहीं, हमें रावण की पूजा करनी चाहिए, नवरात्री में शक्ति की जगह महिषासुर को पूजना चाहिए’ ऐसा कहकर जबरन उनकी श्रद्दा को तोड़ा जा रहा है। घर के देवी-देवताओं के विग्रहों को जबरदस्ती विसर्जित करने की माँग की जा रहीं हैं। गत छह माह में तो आगामी जनगणना को ध्यान में रखकर धर्म के स्थान पर हिन्दू न लिखने के दुष्प्रचार किया जा रहा है। वर्तमान हिन्दू संतों की हत्याएँ हमें स्पष्ट रूप से इसी व्यापक हिंदुविरोधी षड्यंत्र की ओर निर्देशित करती है।”

विश्व हिन्दू परिषद के संतों ने राज्यपाल से सवाल किए है कि हिन्दवी स्वराज्य संस्थापक क्षत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर संतों के साथ ऐसी घटनाएँ क्यों घट रही हैं? इसके साथ ही यह भी प्रश्न किया गया है कि यदि हिन्दुओं के स्थान पर किसी और धर्म-विशेष के व्यक्ति के साथ ऐसी घटना होती तो भी क्या सरकार, मीडिया और मानवाधिकार वाले इसी तरह से चुप होते?

इस पत्र के जरिए हिन्दू संतों की मॉब लिंचिंग को स्पष्ट तौर से हिन्दुओं पर हमला माना गया है और शासन से इसकी जिम्मेदारी लेने की बात कही गई है। साथ ही, हत्या के बाद जंगल भाग गए मुख्य दोषियों को ढूँढकर उन्हें सजा देने की माँग की है।

उल्लेखनीय है कि, मॉब लिंचिंग की इस घटना को 16 अप्रैल 2020 को महाराष्ट्र के पालघर में अंजाम दिया गया था। जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु, 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगड़े के साथ मुंबई से गुजरात के लिए एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे।

इसी बीच रास्ते में पड़ने वाले गड़चिनचले गाँव में, 100 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस का दावा किया है कि जब पुलिस की टीम पीड़ित व्यक्ति को बचाने के लिए मौके पर पहुँची तो वह भी भीड़ के हमले का शिकार हो गई।

जबकि सोशल मीडिया पर वायरल पालघर की घटना के भयावह दृश्य में साफ दिख रहा है कि 100 से अधिक लोगों की भीड़ दो साधुओं और उनके ड्राइवर को पीट-पीटकर हत्या कर दी, और इस दौरान पुलिस हमलावरों के सामने मूकदर्शक बनकर खड़ी दिखाई दे रही है।

विहिप द्वारा राज्यपाल को सौंपा गया पत्र –

इकलौते अब्दुल लतीफ से नागपुर बना हॉटस्पॉट, संक्रमण छिपा 55 को दे गए कोरोना: IndiaTV का दावा

महाराष्ट्र के नागपुर में कोरोना से एक की मौत हो चुकी है। 100 लोग संक्रमित हैं। कथित तौर पर अब्दुल लतीफ नामक एक शख्स की वजह से यह शहर संक्रमण का हॉटस्पॉट बना है।

इंडिया टीवी के संपादक रजत शर्मा ने ट्वीट कर दावा किया है कि अब्दुल लतीफ ने कोरोना संक्रमण की बात छिपाई। उनकी मौत के बाद पता चला कि वे पूरे कुनबे को संक्रमित कर गए हैं।

शर्मा ने ट्वीट किया है, “नागपुर के अब्दुल लतीफ ने कोरोना छिपाया। उनके मरने के बाद पता चला कि वो अपने बेटों, बहू, भाई, भाभी, बेटियों, दामाद, पोतों समेत पूरे कुनबे को इन्फ़ेक्शन दे गए हैं। जो दोस्त मिले अनजाने में वो भी शिकार हो गए। कुल 55 पॉजिटिव आ चुके हैं और 144 की रिपोर्ट अभी आनी है। नागपुर वाले हैरान हैं।”

इंडिया टीवी की खबर के मुताबिक 5 अप्रैल को 68 साल के अब्दुल लतीफ की मौत हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवार सहित पूरे इलाके से सैंपल लिए। जाँच के लिए भेजे। रिपोर्ट आई तो हर कोई हैरान रह गया। पता चला कि संक्रमण ​से न केवल लतीफ की जान गई बल्कि पूरे परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के कई लोगों को वे संक्रमित कर गए थे।

अब्दुल लतीफ का परिवार काफी बड़ा है। पहले उनके बेटे को कोरोना हुआ। उससे बहू को इन्फेक्शन हुआ। बहू से उसके भाई और भाभी को भी कोरोना हो गया। अब्दुल लतीफ की तीन बेटियों को भी इन्फेक्शन हुआ। दूसरी बेटी की दो बेटियों और एक बेटे को भी ये बीमारी लग गई। पूरे परिवार में अब तक 26 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

अब्दुल लतीफ शहर के 19 दुकानदारों के लगातार संपर्क में थे। जहाँ लतीफ ने जाँच कराई थी, वहाँ की एक नर्स भी पॉजिटिव पाई गई है। अब नर्स के संपर्क में आने वाले लोगों की हिस्ट्री निकालकर उनकी जाँच की जा रही है। बताया जाता है कि लतीफ के संपर्क में नागपुर के दो दर्जन से ज्यादा परिवार आए हैं।

अब इनके संपर्क में आए दूध वाले, अखबार वाले, मिठाई वाले, किराना वाले, दवाई वाले वगैरह को भी खोजा जा रहा। अभी तक स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को मात्र 200 लोगों की ही जानकारी मिल सकी है। अब्दुल लतीफ तीन अप्रैल को अपनी जाँच कराने के लिए अस्पताल पहुँचे थे। वे टीबी के भी मरीज थे। मौत के बाद जब कोरोना टेस्ट हुआ तो वे पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद उनकी हिस्ट्री की पड़ताल की गई तो पता चला की वे दुबई से आये थे। लेकिन इसकी खबर किसी को नहीं दी।

महाराष्ट्र सरकार की स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट के मुताबिक अभी तक राज्य में 5649 लोग संक्रमित हो चुके हैं। 269 की मौत हुई है जबकि 789 स्वस्थ हो चुके हैं। नागपुर में सौ लोगों के संक्रमण होने और एक की मौत की जानकारी भी वेबसाइट पर मौजूद है। हालॉंकि मृतक अब्दुल लतीफ ही हैं, इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है।

ब्लड बैंक के नाम सेक्स रैकेट चलाने वाला समीर बुखारी POK से गिरफ्तार, PAK अधिकारियों को करता था सप्लाई

पाकिस्तान के आतंकी समूह जमात उत दावा के एक सदस्य सैयद समीर बुखारी को कल यानी बुधवार को सेक्स रैकेट का धंधा चलाने के आरोप में POK के बाग शहर से गिरफ्तार किया गया। बुखारी जमात-उत-दावा से जुड़ी अल-महफिज फाउंडेशन चलाता है। यह फाउंडेशन मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की अगुवाई वाले आतंकवादी संगठन जमात-उत-दावा का हिस्सा है।

एएनआई के अनुसार पुलिस ने उसे एक वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया है। वायरल वीडियो में वह बाग स्थित अपने कार्यालय में महिलाओं से छेड़छाड़ करता हुआ पाया गया। बुखारी एक ब्लड बैंक के नाम पर यह सेक्स रैकेट चला रहा था।

बुखारी के बारे में मौजूद सूचना बताती है कि वे एक समय पर जमात उत दावा के प्रमुख हाफिज सईद का खास व्यक्ति था। इसके अलावा पाकिस्तान के एक राजनैतिक कार्यकर्ता व लेखक अमजद अयूब मिर्जा का इस गिरफ्तारी पर कहना है, “मेरे लिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि यह खुलासा हुआ क्योंकि JuD हमारी बेटियों और बहनों को वेश्याओं के रूप में उन पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के पास भेजता है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर या क्षेत्र में तैनात हैं।”

उनका कहना है कि POK में जो जिहादी कमांडर अपने प्रशिक्षण या मिशन से वापस आते हैं, उनकी संतुष्टि के लिए भी महिलाओं की तस्करी की जाती है।

मिर्जा का कहना है कि अभी सैयद समीर बुखारी को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया है क्योंकि एक वीडियो था जिसमें उसे POK में एक से अधिक महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते दिखाया गया था। अगर यह वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं आता और वायरल नहीं होता, तो अल्लाह जानता है कि इस ‘सज्जन’ को गिरफ्तार करने की हिम्मत किसमें होती?

अरब देशों में हिन्दुओं के खिलाफ साजिश रचने वाले कौन? इस्लामोफोबिया को किसने बनाया हथियार

एक ओर जब सारा विश्व कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में पाकिस्तान अपने चिर प्राचीन एजेंडा, यानी भारत में आतंकी और मजहबी घृणा को बढ़ावा देकर इसी वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाने के प्रोपेगेंडा में मशगूल है।

हाल ही में देखा गया है कि भारत को इस्लामोफोबिक (इस्लाम से नफरत करने वाला) साबित करने के लिए पाकिस्तान से सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित तरीके से मिशन चलाया जा रहा है। भारतीयों को उकसाने के लिए पाकिस्तानी फर्जी ट्विटर एकाउंट्स से अपनी पहचान अरब देश का नागरिक बताकर निरंतर भारत और भारतीयों को इस्लामोफ़ोबिया से ग्रसित बताना चाह रहे हैं।

क्या है इस ‘प्रायोजित इस्लामोफ़ोबिया’ का मकसद

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों द्वारा खुद को अरब बताकर भारत को इस्लामोफोबिक (Islamophobic) साबित करने का पहला उद्देश्य अरब देशों और इस्लामिक देशों की नजरों में भारत की छवि को नुकसान पहुँचाना ही है। इन एकाउंट्स की वास्तविकता इन चित्रों के माध्यम से समझी जा सकती है। भारत को इस्लामोफोबिक बताने वाले यह ‘अरबी एकाउंट्स’ पाकिस्तान के लोगों द्वारा चलाए जाते हैं।

प्रमुख ट्विटर एकाउंट्स

पाकिस्तान से ये एकाउंट्स ऑपरेट होते हैं

आरएसएस से लेकर इस्लामोफ़ोबिया और मोदी घृणा पर किए गए ट्वीट

अरब देशों के खिलाफ भारतीयों को उकसाना है पहला लक्ष्य

भू-राजनीति विश्लेषक वैभव सिंह, जिनका यूट्यूब पर ‘ऑफेंसिव-डिफेन्स‘ नाम का चैनल भी है, का इस बारे में कहना है कि पाकिस्तानियों के द्वारा इस प्रायोजित कैम्पेन का नतीजा यह हो रहा है कि उनके उकसाने में फँस कर कुछ भारतीयों ने प्रतिक्रिया में अरब देशों के विरोध में कहना शुरू कर दिया है, जो कि ऐसे कैम्पेन का पहला मकसद है।

इसका सूत्रधार है पाकिस्तान का एक तथाकथित पत्रकार मोईद पिरज़ादा; जो पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की पीआर एजेंसी ISPR के लिए काम करता है। उसके पास दुबई में अच्छी-खासी संपत्ति है। यही मोईद पीरज़ादा अपने पिता के जाली हस्ताक्षर करने के कारण दुबई में पकड़ा भी गया था।

आईएसआई की भूमिका

मोईद पीरज़ादा एक प्रोपेगेंडा वेबसाईट चलाता है, जिसे शाहीनबाग़ के ‘उजड़ते’ ही भारत भर में मुस्लिमों से हिन्दुओं की घृणा की ‘बुद्धिजीवी वर्ग’ की ‘कल्पना’ को किसी ना किसी प्रकार से साबित करने का प्रोजेक्ट मिला हुआ है। इस सब के पीछे CAA और NRC के लागू होने को लेकर पाकिस्तान की कुछ एजेंसियों का बड़ा समर्थन प्राप्त है।

हम सबने देखा है कि किस प्रकार लगभग तीन महीने से ज्यादा समय तक देशभर में CAA-NRC पर सरकार के फैसले के विरोध में समुदाय विशेष ने व्यापक स्तर पर हिंसक प्रदर्शन और विरोध किए। इस काम में सोशल मीडिया पर बैठे हुए हिन्दुफोबिया से ग्रसित ‘फैक्ट चेकर्स‘ ने भी इनका खूब साथ दिया। लेकिन शाहीन बाग के उजड़ते ही आईएसआई जैसी एजेंसियों ने अब दूसरी रणनीतियों के जरिए भारत को घेरने का काम शुरू किया है।

आर्टिकल-370 और नागरिकता कानून के बाद से पाकिस्तान के साथ काफी सारी प्रत्यक्ष अवरोध आने के बाद तबलीगी जमाती पकड़े जाने लगे, जो कि मस्जिदों से पकड़े गए, जहाँ कि पहचान पत्र तक दिखाने उनके लिए जरूरी नहीं होते। आईएसआई का हाथ इसलिए भी है क्योंकि भारतीयों को लेकर उनकी राय सकारात्मक है जबकि पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों की छवि उनकी नजरों में अच्छी नहीं है।

प्रायोजित ‘इस्लामोफ़ोबिया’ का मकसद

ऐसा करने के पीछे पाकिस्तान के पास प्रमुख कारण भारत और साथ ही साथ यहाँ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गल्फ देशों से लेकर इस्लामिक बहुलता वाले देशों में बढ़ती हुई लोकप्रियता को नुकसान पहुँचाना है। इस काम के लिए पाकिस्तान के लोगों ने माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाईट ट्विटर को चुना है, जहाँ पर वो लोग ऐसे फर्जी एकाउंट्स को अपना हथियार बना रहे हैं, जिनकी राष्ट्रीयता अरब और अन्य इस्लाम देश बताकर भारत विरोधी ट्वीट किए जाते हैं।

CAA से लेकर आर्टिकल 370 से बौखलाया है पाकिस्तान

दरअसल पाकिस्तान तभी से बौखलाया हुआ है, जब से भारत की संसद में शरणार्थी हिन्दुओं को नागरिकता देने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून (CAA) की शक्ल ली। इसके बाद से ही पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के भारत में जासूसी से लेकर आतंकी गतिविधियों की साजिश पर बड़े स्तर पर लगाम लगते जा रही है। यही नहीं, नागरिकता रजिस्टर के कारण ऐसे लोग भी स्वतः चिह्नित हो जाएँगे, जो पाकिस्तान या अन्य देशों से यहाँ किसी अन्य मकसद से आए हुए हैं।

पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की मुश्किलें उसी दिन से बढ़ गईं थीं, जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चले आ रहे आर्टिकल-370 के कुछ प्रावधानों को निष्क्रिय कर घाटी में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने का पहला कदम उठाया था।

सदियों से पाकिस्तान ने बेख़ौफ़ होकर कट्टरपंथियों की मदद से जिस तरह से चाहा, उस तरह से घाटी में आतंकवाद को विकसित करने का काम किया। लेकिन आर्टिकल-370 के निष्क्रिय होते ही घाटी में मौजूद तमाम पाकिस्तान-परस्त संस्थाएँ और साधन बदल गए, जिससे कि पाकिस्तान की साजिशों को बड़े स्तर पर विराम लगता गया।

इस्लामिक देशों में PM मोदी का बढ़ता हुआ वर्चस्व

विगत कुछ सालों में भारत में मौजूद कट्टरपंथी (वामपंथी-उदारवादी) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व को इस्लामिक देशों द्वारा मिलती स्वीकार्यता से चिंतित नजर आया है। सऊदी अरब (ऑर्डर ऑफ़ जायेद) से लेकर बहरीन (द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ़ द रेनेशां) ने भारत के प्रधानमंत्री को अपने देशों के सर्वोच्च नागरिक अलंकरणों से सम्मानित किया है।

पाकिस्तान ने विशेष तौर पर सऊदी अरब द्वारा नरेन्द्र मोदी को सम्मानित करने पर चिंता व्यक्त की थी। इस विरोध के पीछे पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल- 370 को पंगू बनाने का तर्क दिया था। लेकिन हर बड़ी अर्थव्यवस्था इसे भारत का आंतरिक मसला बताकर पाकिस्तान की ‘चिंता’ को ठोकर मारता आया है।

PM मोदी को इस्लामिक देशों की ओर से मिलने वाले ये सर्वोच्च सम्मान इसलिए भी बड़ी उपलब्धियाँ और पाकिस्तान के लिए चिंता बनी रही हैं क्योंकि आज तक भी कई देश नरेन्द्र मोदी की पहली पहचान ‘गुजरात 2002’ को ही साबित करने का निरर्थक प्रयास करते आए हैं। इस कारण राणा अयूब से लेकर तमाम ‘विचारक वर्ग’ ने 2002 तक को हवा देने की कोशिशें की लेकिन, दिन-रात के प्रयासों के बाद भी यह वर्ग खुद के द्वारा तैयार किए गए इस मिथक को आज तक स्थापित करने में विफल ही रहा है।

बेहतर यही है कि इनके उकसाने पर इनके एजेंडे में ना पड़कर अरब देशों को सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी से बचना चाहिए। इसका नकारात्मक प्रभाव किसी ना किसी रूप से उन लोगों की नौकरी पर पड़ सकता है, जो कि गल्फ देशों में नौकरी कर रहे हैं।

कोरोना से जंग में राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद भी आईं सामने, शक्ति हाट में खुद बना रहीं मास्क

देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों से हर कोई चिंतित है। देश का हर नागरिक लॉकडाउन का पालन करते हुए इस जंग में अपना योगदान दे रहा। इसी कड़ी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी सविता कोविंद शक्ति हाट में खुद मास्क सिल रही हैं।

देश की प्रथम महिला सविता कोविंद ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन के शक्ति हाट में सिलाई मशीन पर बैठकर खुद मास्क सिले। इस दौरान उन्होंने अपने मुँह पर भी लाल रंग का मास्क लगा रखा था। उनके द्वारा बनाए गए मास्क दिल्ली के अलग-अलग शेल्टर होम में भिजवाए जाएँगे।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश के भोरंज विधानसभा से विधायक कमलेश कुमारी को लॉकडाउन के बीच अपने घर पर ही सिलाई मशीन से लोगों के लिए मास्क बनाते हुए देखा गया था। उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद हर कोई घर में सेनेटाइजर लाने के लिए और मुँह पर मास्क लगाने के लिए बाजारों में भीड़ लगाए हुए था। इसे देखकर वह घर पर मास्क बनाने में जुट गईं।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में सभी को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इस वक्त बाजार में तीन लेयर वाले सर्जिकल मास्क, N-95 मास्क और कपड़े के बने मास्क मिल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ घरों से बाहर निकलने पर मास्क लगाना बेहद जरूरी है।

आपको बता दें कि इससे पहले राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा था कि लोग कपड़ों से बने मास्क का इस्तेमाल करें। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कई बार अपने गमछे को मास्क के रूप में प्रयोग कर लोगों को यह भी संदेश दे चुके हैं कि कोरोना से बचने के लिए मास्क ही नहीं, बल्कि गमछा भी कारगर हो सकता है।

पिछले दिनों पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बीजेपी जिलाध्यक्ष से फोन पर बात करते हुए कहा था कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को मास्क के बदले गमछे का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

बंगाल: अस्पतालों में मोबाइल ले जाने पर बैन, क्या कोरोना पर हकीकत को दबा रही ममता सरकार?

पश्चिम बंगाल में अस्पतालों के भीतर मोबाइल ले जाने पर बैन लगा दिया गया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या राज्य की ममता बनर्जी सरकार कोरोना संक्रमण पर जमीनी हकीकत को दबाने की कोशिश कर रही है।

बंगाल के अस्पतालों में मोबाइल पर बैन लगाने का फैसला कुछ वीडियो सामने आने के बाद किया है। ऐसा ही एक वीडियो केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने शेयर किया था। यह वीडियो कथित तौर पर आइसोलेशन वार्ड में एक मरीज द्वारा लिया गया था। इसमें वार्ड के भीतर अव्यवस्था स्पष्ट तौर पर दिखाई पड़ रही है।

हालॉंकि ममता सरकार ने इस फैसले की वजह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गाइडलाइन को बताया है। साथ ही कहा है कि मोबाइल की वजह से संक्रमण ज्यादा देर तक फैलने का खतरा बना रहता है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने राज्य के अस्पतालों में मोबाइल फोन ले जाने पर पांबदी लगाए जाने के फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, मरीज या तीमारदार कोई भी अस्पताल के भीतर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे।

मुख्य सचिव ने बताया कि संक्रमित जगहों पर मोबाइल के इस्तेमाल से कोरोना वायरस फैलने का खतरा होता है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक यह फैसला लिया गया है कि सभी डॉक्टर, मेडीकल स्टाफ और मरीज अस्पताल के बाहर ही अपना मोबाइल फोन जमा करेंगे, ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके।अस्पताल में स्टाफ और मरीजों के इस्तेमाल के लिए लैंडलाइन और इंटरकॉम लगाया जाएगा।

दरअसल इससे पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो ने राज्य में कोरोना संक्रमितों के लिए किए गए इंतजाम की पोल-पट्टी खोलते हुए ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में दिखाया गया था कि किस तरह टोलीगंज के एमआर बंगूर अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में कोरोना संदिग्धों को बदइंतजामी के साथ रखा जा रहा है।

वीडियो में दिख रहा था कि अस्पताल में जगह-जगह डेड बॉडी रखी हुई हैं। इनके बीच में ही मरीजों के बेड पड़े हैं। न तो प्रशासन इन मरीजों को वहाँ से उठा रहा है और न ही लोग उनसे दूरी बनाकर रख रहे हैं। अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

गौरतलब है कि ये मामला सिर्फ़ इतना ही नहीं है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बंगाल सरकार पर तथ्यों को छिपाने और आँकड़ों में हेराफेरी के भी आरोप लगे हैं। इसके कारण इस समय ये मुद्दा पश्चिम बंगाल में अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है। तृणमूल कॉन्ग्रेस और डॉक्टरों के बीच विवाद भी बढ़ रहा है। 

स्वास्थ्यकर्मियों का मत है कि राज्य सरकार जबरदस्ती स्वास्थ्य प्रशासन को कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का डाटा सामने लाने से रोक रही है और कह रही है कि जब तक राज्य सरकार द्वारा नॉमिनेटिड पैनल मौतों को कोरोना से हुई मौतें नहीं घोषित करता तब तक वे इस पर कुछ न करें। इसके अलावा ICMR की कोलकाता विंग का ये भी आरोप है कि टीएमसी ने कोरोना संबंधित टेस्टों की गति को धीरे किया हुआ है।